28.4 C
Mumbai
Monday, August 10, 2026
Home Blog Page 1070

शशिकला नटराजन ने AIADMK पार्टी प्रमुख की ली शपथ, भाषण देते वक़्त हुईं भावुक

सौम्या केसरवानी,

शशिकला नटराजन जो कि कल से AIADMK पार्टी प्रमुख घोषित की गयीं, आज पार्टी ऑफिस में पहुँच कर शशिकला ने सबसे पहले जय ललिता को श्रद्धांजलि अर्पित की और फिर AIADMK पार्टी प्रमुख की शपथ ली, और बोली कि अम्मा साथ नहीं हैं, पर पार्टी सौ सालों तक राज करेगी, भाषण देते वक़्त शशिकला भावुक नजर आईं। शशिकला ने कहा, अम्मा ने 75 दिन तक जिंदगी से जंग लड़ी। ईश्वर ने अपनी सबसे प्रिय बच्ची को बुला लिया है, अम्मा को याद करते-करते शशिकला रो पड़ीं।

पार्टी प्रमुख बोलीं जय ललिता की मुझे हमेशा फ़िक्र रहती थी। पुराने ज़माने में इंदिरा गांधी ही एकमात्र महिला राजनीतिक मानी जाती थीं, पर जय ललिता ने अपने राजनीतिक दांव पेंच से एक इतिहास कायम किया है, पूरा जीवन मैं अपनी पार्टी को समर्पित करतीं हूँ। अम्मा को चाहने वालों के लिए मैं काम करुँगी, पार्टी लोगों ने बनाई है, AIADMK पार्टी लोगों की है और उन्हीं के विकास के लिए कार्यरत रहेगी।

फिलहाल शशिकला नटराजन ने पार्टी प्रमुख की कमान संभाल ली है, पिछले दिनों जय ललिता के निधन के बाद तमिलनाडु में गम का माहौल छाया हुआ है, जिस तरह से जयललिता ने राजनीति में पहचान कायम की है, उनकी जगह शायद ही कोई ले पाएगा।

नए साल के लिए ‘1 सेकण्ड’ और करना होगा इंतज़ार!

शिखा पाण्डेय,

घड़ी की सूइयों में बंधा, बिलकुल नपा तुला ‘समय’, जो कभी किसी का इंतज़ार नहीं करता, जो कभी रुकता नहीं, वही ‘समय’ साल 2017 का आगमन पूरे एक सेकेंड की देरी से करेगा। अर्थात साल 2016 में 1 सेकेंड का समय अतिरिक्त जुड़ गया है। जी हां! साल 2016 एक सेकेण्ड लंबा होगा। नववर्ष की पूर्व संध्या पर वैश्विक घड़ी में एक ‘लीप सेकेण्ड’ के जुड़ने के कारण ऐसा होगा।

वाशिंगटन डीसी के अमेरिकी नौ सेना वेधशाला के मास्टर क्लॉक फेसिलिटी में समन्वित वैश्विक समय (यूटीसी) के अनुसार 23 बजकर 59 मिनट और 59 सेकेण्ड पर अतिरिक्त सेकेण्ड जोड़ा जाएगा। वहीं भारतीय मानक समय के अनुसार एक जनवरी को सुबह 05:29:59 पर यह इजाफा प्रभावी होगा।

गौर करें तो साल 2016 लीप ईयर था यानी इस साल फरवरी 28 दिनों की जगह 29 दिनों की थी। यानी हर साल के मुकाबले हमें एक दिन का समय अधिक मिला था। अब वैज्ञानिकों ने बताया कि इस साल के अंत में एक लीप सेकंड का समय और जुड़ जाएगा। कारण, धरती के घूर्णन की गति पहले से कुछ मंद हुई है। उल्लेखनीय है कि ऐतिहासिक रूप से ‘समय’ पृथ्वी द्वारा खगोलीय पिंडों की परिक्रमा पर निर्भर करता था और इसी संदर्भ में सेकेण्ड को परिभाषित किया जाता था। एटॉमिक क्लॉक्स के आविष्कार के बाद हालांकि इससे जुड़े परिवर्तन हुए और अब सेकेण्ड पृथ्वी की परिक्रमा से अलग है।

क्यों होता है बदलाव-

यूएस नेवल ऑब्जरवेट्री के जिओफ चेस्टर ने बताया कि कई बार धरती को रोजाना अपना चक्कर पूरा करने में कुछ अधिक समय लगता है। इसलिए कभी-कभार टाइमकीपर्स धरती के घूर्णन की गति को मिलाने के लिए समय में एक या दो सेकंड का समय अतिरिक्त बढ़ा देते हैं।

उन्होंने बताया कि चंद्रमा के कारण आने वाले ज्वार-भाटे और अन्य कारणों जैसे अल-नीनो के प्रभाव के कारण धरती को रोजाना एक चक्कर पूरा करने में कुछ अधिक समय लग जाता है। यही वह अतिरिक्त समय है जो साल के आखिरी में 31 दिसंबर को 23 बजकर 59 मिनट और 59 सेकंड में जोड़ दिया जाएगा।

‘भीम’ ऐप को लेकर मायावती का मोदी पर वार

सौम्या केसरवानी,

कैशलेस इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने जिस BHIM ‘भीम’ ऐप को शुक्रवार को लॉन्च किया,  उस पर मायावती बेहद नराज हैं। उन्होंने ‘भीम’ ऐप को भीम राव अंबेडकर के नाम से जोड़ने को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि यह अशोभनीय है।

बसपा सुप्रमो मायावती ने ‘भीम’ ऐप (भारत इंटरफेस मनी एप) के नाम को लेकर पीएम मोदी पर हमला करते हुए कहा कि ‘भीम’ ऐप से बाबा साहब का मजाक उड़ाया गया है। ‘भीम’ ऐप यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) और यूएसएसडी (अस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डाटा) का ही नया रूप है। इसके जरिए पैसे का डिजिटल लेन-देन कर सकते हैं।

यहाँ क्लिक करके आप BHIM अप्लिकेशन अपने मोबाइल में इंस्टाल कर सकते हैं:

https://play.google.com/store/apps/details?id=in.org.npci.upiapp

bhim-app

 

यूजर्स को इसे अपने बैंक खाते से जोड़ना होगा।
ऐप में अपने बैंक खाते की जानकारी दर्ज करनी होगी। जानकारी के मुताबिक, BHIM को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकेंगा। इस ऐप में रजिस्ट्रेशन पूरा करने के बाद कैशलेस ट्रांज़ैक्शन किया जा सकता है।

समाजवाद पर भारी पड़ा ‘परिवार’वाद!

अनुज हनुमत,

समाजवादी विचारधारा के पोषक और भारतीय राजनीति के मजबूत स्तम्भों में से एक डॉ राम मनोहर लोहिया भारत के प्रमुख समाजवादी विचारक, राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे। संसद में सरकार के अपव्यय पर की गयी उनकी बहस “तीन आना-पंद्रह आना” आज भी प्रसिद्ध है! उनका जीवन प्रत्येक राजनीतिज्ञ के लिए आदर्श है किन्तु दुःख कि बात है कि आज उन जैसा एक भी राजनीतिज्ञ नहीं दिख रहा है खासकर उस पार्टी में भी, जिसने लोहिया के समाजवाद को आगे करके राजनीति के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त किया।

जी हां, हम बात कर रहे हैं देश की सबसे मजबूत क्षेत्रीय पार्टियों में से एक समाजवादी पार्टी की जो आज अपने मूल्यों और सिद्धांतों से भटकती नजर आ रही है। पिछले कुछ महीनों से पार्टी के अंदर ही जबर्दस्त आपसी नूराकुश्ती हो रही थी, जिसका अंत आखिरकार कल सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने प्रेस कांफ्रेंस करके कर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी से 6 वर्ष के निकाल दिया। इस पूरे प्रकरण में सबसे खास बात नेता जी का अपने बेटे को पार्टी से निकालना था, जिसने ये साबित कर दिया कि वो महाभारत के धृतराष्ट्र नहीं, जो पुत्रमोह से कभी ऊपर उठकर सोच न पाएँ, बल्कि आज के वह पिता हैं जो राजनीति से ऊपर अपने बेटे को भी स्थान नहीं देते।

बहरहाल इस पूरे प्रकरण के बाद अखिलेश यादव का भी बयान आया। उन्होंने कहा मुझे पिता जी ने पार्टी से निकाला है न कि दिल से। मैं पुनः चुनाव में जीत दर्ज करके उन्हें समर्पित करूँगा । हालाँकि कल अखिलेश यादव के यूएस सलाहकार स्टीव जार्डिन का एक मेल भी लीक हो गया जिसमें उन्होंने पार्टी को ऐसे ही ड्रामे की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह पार्टी को भावनात्मक रूप से अखिलेश के विकास कार्यों का वोट मिलेगा। लीक हुए इस मेल की सच्चाई कुछ भी हो लेकिन एक प्रश्न इस वक्त सबके सामने है कि क्या वाकई समाजवाद पर परिवारवाद भारी पड़ गया! लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सिर्फ परिवार तक सिमट कर रह गई और नेताजी एक बार फिर पीएम की दावेदारी करने से चूक गए। उधर, यूपी में सत्ता का केंद्र मुलायम-शिवपाल के हाथ से निकलकर अखिलेश के हाथ पहुंच चुका था।

अखिलेश ने पिता और चाचा की इच्छाओं का सम्मान भी किया, लेकिन ढाई साल पूरे होने तक अखिलेश, ‘गिफ्ट में मिली कुर्सी’ और ‘साढ़े चार मुख्यमंत्री’ वाले तानों के बीच अपना वजूद स्थापित करने में जुट गए। दरअसल, दरार सिर्फ पार्टी में ही नहीं परिवार में भी पड़ चुकी है। कुलमिलाकर मौजूदा समाजवाद पर परिवारवाद का गाढ़ा रंग चढ़ते हुए साफ नजर आ रहा है।

सोना की शादी में डैडी बने ‘शत्रु’, तो सोना ने लिया कठोर फैसला!

शिखा पाण्डेय,

जहाँ एक तरफ पहली जनवरी को बहुचर्चित जोड़ी अनुष्का-विराट की प्लांड सगाई की खबरें आ रही हैं, वहीं एक सरप्राइज करने वाली खबर यह भी आ रही है कि ‘दबंग गर्ल’ सोनाक्षी अपने माता पिता की मर्ज़ी के खिलाफ जल्द ही अपने बॉयफ्रेंड बंटी सचदेव के साथ सगाई करने वाली हैं। सूत्रों की मानें तो सोनाक्षी अगले साल फरवरी तक बंटी सचदेव से सगाई कर सकती हैं।

अब यहाँ सोनाक्षी बंटी के प्यार में पागल हैं और वहाँ उनके पेरेंट्स इस रिश्ते के सख़्त खिलाफ हैं। इसका कारण यह है कि बंटी की एक बार शादी हो चुकी है और उनका तलाक भी हो चुका है। साथ ही दोनों की उम्र के बीच काफी फासला भी है। इसलिए पिछले काफी समय से भले ही सोनाक्षी और बंटी की डेटिंग की खबरें आ रही हों या कई बार बंटी को सोनाक्षी की फैमिली के साथ देखा भी गया हो, लेकिन बंटी और सोनाक्षी के रिलेशनशिप से सोना की फैमिली कतई खुश नहीं है।

आपको बता दें कि बंटी, सलमान खान के छोटे भाई सोहेल खान की पत्‍नी सीमा खान के भाई हैं। बंटी ने अंबिका चौहान से शादी की थी, जिसमें सलमान भी शामिल हुए थे। लेकिन यह शादी 4 साल बाद टूट गई। कहा जाता है कि बंटी इससे पहले सुष्मित सेन, दीया मिर्जा और नेहा धूपिया को भी डेट कर चुके हैं।

वैसे तो सोनाक्षी और बंटी की डेटिंग की खबरें 2012 से ही चर्चा में हैं लेकिन पिछले कुछ महीनों से दोनों की नजदीकियां बढ़ गई हैं। दोनों को कई बार हैंगआउट करते हुए देखा जा चुका है लेकिन दोनों में से कोई फॉर्मली इस बात को स्वीकार करने को राज़ी नहीं है। सोनाक्षी से जब एक इंटरव्‍यू में इस बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने कहा,” आपको मेरी उंगली में कोई रिंग दिखती है क्‍या? नहीं ना! फिर? क्‍या इससे आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया?” अब सोना भले इस बात को छुपाने की लाख कोशिशें करती रहें, लेकिन ‘छुपाये न छुपे, ये सितारों की चमक है।’

छली गई लक्ष्मी, न्याय की आस में बनी लक्ष्मीबाई

आनंद रूप द्विवेदी  

सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश में रोजाना न जाने कितनी बेटियाँ-लक्ष्मियाँ, लोगों की दरिंदगी व छल का शिकार होती हैं. उनमे से कुछ मामले सामने आ जाते हैं तो बाकी सामाजिक दबाव, लोकलाज, असहायता के चलते अपना दम तोड़ देते हैं. ऐसी लक्ष्मियाँ अन्याय को दुर्भाग्य समझकर चुप रह जाती हैं.

कहते हैं “प्यार अँधा होता है..और कानून भी”. ऐसा कई फ़िल्मों में भी आपने सुना होगा. लेकिन हम जिस लक्ष्मी की कहानी आपको सुना रहे हैं, उसके मामले  में ऐसा बिलकुल नहीं है. इस बार प्यार अँधा नहीं बल्कि दगाबाज़ निकला जिसने एक असहाय लड़की को इस्तेमाल करने के बाद बियावान में ठोकरें खाने को छोड़ दिया. कानून जिसे हम अंधा मानते हैं, अब वही लक्ष्मी को इस दगाबाज़ प्यार के अन्याय से न्याय का रास्ता दिखा रहा है.

lacmi_dileep-2

ये कहानी उत्तराखंड में उधमसिंह नगर जिले के बेरिया गाँव की रहने वाली लक्ष्मी देवी पुत्री चरण सिंह  की है.  लक्ष्मी को अपने गाँव के दिलीप सिंह पुत्र धरम सिंह  से प्यार हुआ, बिलकुल सच्चा वाला. लक्ष्मी और दिलीप दोनों ही दलित तबके से हैं. लक्ष्मी का परिवार बेहद गरीब है और पिता शराबी. वहीँ  दिलीप का परिवार काफी संपन्न और रसूखदार है. दरअसल साल २०११ में लक्ष्मी और दिलीप एक दूजे से मिले, प्यार हुआ और परवान चढ़ा. दिलीप के संग जीवन के हर बसंत के सपने सजा लेने वाली लक्ष्मी ने स्वयं को समर्पित कर दिया. मजदूर भाई की बहन, शराबी पिता और बिन माँ की बेटी, लक्ष्मी, ने २०१४ तक दिलीप के साथ अपने प्यार के रिश्ते को बेरोक-टोक जारी रखा.

एक ही बिरादरी के होने के कारण लक्ष्मी को अपने प्रेम सम्बन्ध पर कोई मुश्किल आती भी नहीं दिखाई पड़ी.  निश्छल प्रेम और विश्वास से भरी लक्ष्मी ने अपने तन मन को दिलीप को समर्पित कर दिया. दिलीप ने लक्ष्मी को सशर्त आश्वासन दिया कि वो उससे शादी करेगा. २०१४ में भाई और पिता ने लक्ष्मी का विवाह किसी अन्य व्यक्ति से तय कर दिया. लक्ष्मी ने दिलीप पर दबाव बनाया कि वह उसके घर वालों से बात करे और कहे कि वो शादी करेगा. दिलीप ने लक्ष्मी को सही वक़्त आने देने का इंतज़ार करने को कहा और चुप करा दिया. फिर भी लक्ष्मी दिलीप पर लगातार दबाव बनाती रही. शादी के कुछ दिन पहले ही दिलीप ने उसको घर से भाग चलने का झांसा दिया और एक शाम गाँव के नज़दीकी रेलवे स्टेशन बेरिया दौलतपुर ले गया. उसने लक्ष्मी को एक बेंच पर बैठाया और ट्रेन का इंतज़ार करने को कहा. मौक़ा देखकर दिलीप, लक्ष्मी को अकेला छोडकर चम्पत हो गया.

निश्छल मन वाली लक्ष्मी जिसने अपना सर्वस्व प्रेम की वेदी पर भेंट स्वरुप अर्पित कर दिया था , रात भर उस स्टेशन पर दिलीप और उसकी ट्रेन के आने का इंतज़ार करती रही. लक्ष्मी के साथ छल हुआ था. वो अपने घर वापस आ गई, लेकिन घरवालों द्वारा तय की गई शादी करने से इनकार कर दिया. अब लक्ष्मी ने निश्चय कर लिया था कि वह अपने प्रति दिलीप का ये छल, अन्याय, बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेगी. वो उसकी खोज करेगी. काफी खोजबीन के बाद दिलीप मिला लेकिन अब वो लक्ष्मी का दिलीप नहीं है. लक्ष्मी को उस रात स्टेशन पर अकेला छोड़ कर भागा हुआ दिलीप दक्षिण अफ्रीका के घाना में पाया गया है. उसने लक्ष्मी को प्यार में धोखा दिया, उसका शोषण किया और अब घाना में मौज भरी जिन्दगी बसर कर रहा है.  दिलीप के रसूखदार परिवार ने उसकी नैया पार लगाई है. उसके जीजा, देवी सिंह आयकर उपायुक्त हैं जिनकी मदद से दिलीप घाना में व्यवसाय कर रहा है.

lacmi_dileep-1

लक्ष्मी ने दिलीप की तलाश में उम्मीद का हर दरवाजा खटखटाया. उसने थाना कोर्ट, हाईकोर्ट, सब एक कर दिया तब जाकर भगोड़े दिलीप का पता चला है. लक्ष्मी ने दिलीप के विरुद्ध, शादी के झांसे में फंसाकर शारीरिक और मानसिक शोषण किये जाने की प्राथमिकी दर्ज करवाई लेकिन दिलीप के परिवार ने अपने रसूख के बल पर उसके हाथ कुछ ख़ास लगने नहीं दिया. लक्ष्मी को पूरे ब्रह्माण्ड से लड़कर भी न्याय चाहिये. कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहायता से लक्ष्मी पहले जिला न्यायालय फिर नैनीताल हाईकोर्ट में इस मामले को ले गई.

न्याय के लिए संघर्षरत लक्ष्मी ने अदालत से दिलीप के विरुद्ध गिरफ्तारी का वारंट जारी करवा लिया, तमाम आदेश दिए गए, लेकिन इन सभी न्यायिक संस्थाओं से दूर घाना में आरोपी दिलीप सिंह मौज कर रहा है.  पता चला है कि अदालत में लंबित इस मामले के दौरान ही दो महीने पहले दिलीप सिंह ने घाना में शादी कर ली है और अब वहीँ स्थाई तौर पर घर बसाने की तैयारी कर रहा है.

वकील रघुवंशी लक्ष्मी के इस संघर्ष में उसकी सहायता कर रहे हैं. लक्ष्मी की इस दास्तान को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पीएम मोदी तक पहुंचाने की पहल कई जागरूक लोगों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से की जा रही है. पीएमओ को टैग और शेयर किया जा रहा है, रिट्वीट्स किये जा रहे हैं. अपील की जा रही है कि सारी जुगत लगाकर किसी भी तरह लक्ष्मी को न्याय दिलवाया जा सके और उसके शोषक दिलीप को भारत लाकर न्यायालय के समक्ष खड़ा किया जा सके.

 (यह आलेख अवनीश पी०एन०शर्मा जी की फेसबुक वाल पर पोस्ट की गई ‘लक्ष्मी की दास्तान’ पर साभार संदर्भित व आधारित है.)

मुलायम भड़के, अखिलेश और राम गोपाल पार्टी से 6 साल के लिए निकाले गए

अनुज हनुमत,

एक कहावत है कि राजनीति में कभी भी कुछ भी घटित हो सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं समाजवादी पार्टी, जहाँ अब बाप-बेटे में भी तलवारें खिंच गई हैं और अब देर शाम पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सीएम अखिलेश यादव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुये 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है ।

दरअसल, नोटिस 2017 में होने वाले यूपी चुनाव के लिए अखिलेश द्वारा अलग से जारी की गई उम्मीदवारों की लिस्ट को लेकर दिया गया है। इसके बाद मुलायम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि रामगोपाल यादव को पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया गया है। इस दौरान शिवपाल यादव भी उनके साथ ही मौजूद हैं। मुलायम ने बेटे अखिलेश को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि सीएम गुटबाजी कर रहे हैं। रामगोपाल सीएम का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।

आपको बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुलायम ने कहा कि 30 दिसंबर 2016 को रामगोपाल यादव को मैंने पत्र लिखा। उन्होंने पार्टी का आपातकालीन सम्मेलन 1 जनवरी को बुलाया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के अलावा किसी और को सम्मेलन बुलाने का अधिकार नहीं है। ये न सिर्फ अनुशासनहीनता है, बल्कि पार्टी को भारी आघात पहुंचाया। पार्टी को कमज़ोर करने का काम किया। इसलिए आपको सभी पदों और सदस्यता से बर्खास्त किया जाता है। रामगोपाल को छह साल के लिए पार्टी से निकाला जाता है।

बड़ी बात ये है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश के साथ-साथ रामगोपाल यादव को भी नोटिस जारी करते हुए दोनों को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। नोटिस में मुलायम सिंह ने पूछा है कि अलग लिस्ट क्यों निकाली गई और इस पर क्यों न कार्रवाई की जाए। हालांकि, नोटिस का जवाब देने की समय सीमा तय नहीं की गई है। इधर, रामगोपाल ने राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन बुलाया है।

पहली तारीख को पार्टी का विशेष प्रतिनिधि सम्मेलन राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के सभागार में 11 बजे होगा। ये पार्टी का सबसे बड़ा फोरम होता है जो पार्टी में अगर कहीं गड़बड़ी हो तो उसे सुधारने का काम करता है।

यूपी के सियासी माहौल में मुलायम सिंह यादव की प्रेस कांफ्रेंस के बाद अचानक भूचाल आ गया है। सूत्रों की मानें तो अब पिता-पुत्र का अलगाव निश्चित है। समाजवादी पार्टी का टूटना अब लगभग तय है।

#SpeakUpIndia : दिल्ली में महिला की चाकू से गोदकर हत्या

सौम्या केसरवानी,

महिलाओं के प्रति हो रहे अत्याचार का एक और मामला सामने आया है, ये मामला दिल्ली के काकोरी थाना क्षेत्र का  है, जहाँ एक महिला की चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। शुक्रवार सुबह महिला का शव गांव के बाहर बाग में खून से सना मिलने से हड़कंप मच गई। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

महिला एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत थी। हत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। थाना क्षेत्र के प्रेमराज गांव में रहने वाली मालती देवी एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत थी। वह रोज की तरह गुरुवार को भी ड्यूटी पर गई थी।

देर शाम तक घर वापस न जाने पर घरवालों ने कॉलेज में पता किया। कॉलेज से पता चला कि महिला रोज की तरह समय से घर जा चुकी है। इस पर परिवार वालों ने उसे ढूंढना शुरू कर दिया, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा।

शुक्रवार सुबह राहगीरों ने महिला के आने-जाने वाले रास्ते में पड़ने वाले बाग में उसका शव खून से लथपथ देखा, तो पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने पहचान कराई तो महिला के घर में कोहराम मच गया। स्थानीय लोगों ने रेप के विरोध में हत्या किये जाने की आशंका जताई है। फिलहाल पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जाँच-पड़ताल शुरू कर दी गई है।

रिश्तों ने ‘प्रदेश का मुकद्दर’ ही बिगाड़ दिया -आजम खान

सौम्या केसरवानी,

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण पर दो फाड़ हो चुकी है, जिसके बाद ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव नई पार्टी बना सकते हैं। ज्ञात हो कि सीएम अखिलेश अपनी स्वयं की भी एक लिस्ट जारी कर चुके हैं। इसी बीच सपा नेता आजम खान ने पार्टी के सियासी संकट पर बेतुका बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज जो पार्टी में हो रहा है इतिहास में वो बुरे लफ़्ज़ों में लिखा जायेगा, लोग औलाद और औलाद बाप के नाम से नफरत करेंगे।

आज़म खान ने वर्तमान में मुलायम परिवार के कलह पर टिप्पणी की। खान ने कहा, “रिश्तों के बिगाड़ ने प्रदेश का मुकद्दर ही बिगाड़ दिया है। 5 साल की कामयाबी के बाद पार्टी नुक्ताचीनी का विषय बन गयी है।”

उन्होंने आगे कहा कि, भाजपा जश्न मना रही है और समाजवादी लोग मायूस हैं। सबसे बड़े राज्य में राजनीति करने वाले हल्के साबित हो गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि, पार्टी से निकाले जाने पर भी हमने कश्ती नहीं बदली।

#SpeakUpIndia : 4 दिन से छात्रा लापता, अखिलेश राज में पुलिस अपने में मस्त

अनुज हनुमत,

एक तरफ यूपी में अखिलेश सरकार लगातार दावा कर रही है कि उनके शासनकाल में महिलाएं ज्यादा सुरक्षित हैं, लेकिन आए दिन एक न एक घटना उनके दावों की पोल खोल देता है। लगातार महिलाओं के साथ छेड़खानी, बलात्कार और किडनैपिंग की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है।

ताजा मामला संगम नगरी इलाहाबाद का है, जहाँ एक भाई ने अपनी बहन के किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज कराई है। भाई गया प्रसाद द्वारा दी गई तहरीर में बताया गया है कि उनकी बहन कल्पना मौर्या (उम्र 21 वर्ष) इलाहाबाद में छोटा बघाड़ा के एक हॉस्टल में रहकर बैकिंग आदि परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। विगत 26 तारीख को उसका फोन आया कि वह अपने घर (फूलपुर) जा रही है। लेकिन फिर घर नहीं पहुँची। उसके बाद से उसका फोन भी नहीं लग रहा है। भाई ने बताया कि कल्पना तैयारियों के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करती थी। ग़रीब बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी। उनके अनुसार, पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की है।

आपको बता दें कि कल्पना के पक्ष में कल सैकड़ों छात्र छात्राओं ने छात्र नेता नलिनी मिश्रा के नेतृत्व में कर्नलगंज थाने का घेराव भी किया, जिसके बाद पुलिस थोड़ी हरकत में आई और मामले की विवेचना शुरू की। छात्र नेता नलिनी मिश्रा और तमाम छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने अगर समय रहते कार्यवाही की होती तो कल्पना की जल्दी वापसी हो जाती और आरोपी भी पकड़े जाते, लेकिन अभी तक पुलिस को ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। वहीं पुलिस के अनुसार पूरे मामले की विवेचना चल रही है और आरोपी जल्द ही पकड़े जायेंगे और कल्पना की सकुशल वापसी होगी।

फिलहाल इस पूरे मामले ने पुलिस प्रशासन और सूबे की अखिलेश सरकार के महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किये जा रहे तमाम दावों की पोल खोल दी है। अब देखना होगा कि पुलिस कब तक आरोपियों को पकड़ पाती है और कब तक कल्पना की सकुशल वापसी होगी। कल्पना की सकुशल वापसी के लिए छात्रों ने भी मोर्चा खोल दिया है। आज इलाहाबाद के डीएम और एसएसपी से मिलकर छात्र जल्द से जल्द कल्पना की वापसी की गुहार लगाएंगे।