समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान पर भारतीय जनता पार्टी नजर गड़ाकर बैठी है। गुरूवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लखनऊ पहुंच गए। उन्होंने कहा, हम सपा खेमे पर नजर रख रहे हैं। दरअसल, समाजवादी पार्टी के 30 विधायक भाजपा के कई नेताओं के संपर्क में हैं। इनमें टिकट से वंचित रहने वाले ही नहीं, ऐसे विधायक भी शामिल हैं, जिन्हें बुधवार को मुलायम सिंह यादव ने टिकट दिए हैं।
अब समाजवादी पार्टी के यादव कुनबे की रार बहुत आगे निकल चुकी है। ऐन चुनाव के वक्त जिस तरह मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच दंगल चल रहा है, उससे जनता को लग रहा है कि सपा की नैया डांवाडोल है। भला, बेचारे विधायक क्या करेंगे। इस तकरार का सीधा फायदा भाजपा को मिल रहा है। इसी कारण सपा के विधायक भी भाजपा कैंप के चक्कर काट रहे हैं।
भाजपा और सपा में हमारे सूत्रों ने जानकारी दी है कि कम से कम 30 विधायक पाला बदलने के लिए तैयार बैठे हैं। इनमें कई विधायक तो ऐसे हैं, जो कई-कई बार चुनाव जीत चुके हैं। इन विधायकों का मानना है कि यादव कुनबे के घमासान से उन्हें नुकसान होगा।
मध्य यूपी के एक विधायक ने कहा, हमारा हारना तो तय है। हमें मुलायम सिंह और शिवपाल यादव टिकट देंगे तो अखिलेश यादव के समर्थक हरवा देंगे। अगर अखिलेश यादव की ओर से समर्थन मिला, तो शिवपाल यादव के लोग चुनाव हराएंगे। राजनाथ सिंह, दिनेश शर्मा, अमित शाह, पंकज सिंह, संगीत सोम, योगी आदित्य नाथ, कलराज मिश्रा, संजीव बालियान, डा.महेश शर्मा, मुख्तार अब्बास नकवी, कल्याण सिंह, राजवीर सिंह के संपर्क में सपा के विधायक हैं। खास बात यह है इनमें सबसे ज्यादा सपा के यादव और ठाकुर विधायक हैं। इनमें सहारनपुर, अलीगढ़, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, मेरठ, मुजफ्फरनगर, कानपुर, आगरा, गोरखपुर और बनारस के विधायक शामिल हैं।
सरकार ने न्यूयार्क विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र प्रोफेसर और अपने आप को ‘गरीब व्यक्ति का रघुराम राजन’ कहने वाले विरल वी. आचार्य को रिजर्व बैंक का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। आचार्य 20 जनवरी, 2017 को पदभार संभालेंगे।
रिजर्व बैंक ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि आचार्य 20 जनवरी, 2017 को पदभार संभालेंगे। वह मौद्रिक नीति और अनुसंधान का काम देखेंगे। उर्जित पटेल को गवर्नर बनाए जाने के बाद से यह पद रिक्त था। केंद्रीय मंत्रिमंडल नियुक्ति समिति ने तीन साल के लिये उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है। पटेल चार सितंबर को रघुराम राजन के स्थान पर रिजर्व बैंक गवर्नर बने।
रिजर्व बैंक में इस समय तीन डिप्टी गवर्नर हैं- एसएस मूदड़ा, एनएस विश्वनाथन और आर. गांधी हैं। आचार्य ऐसे समय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर नियुक्त किये गये हैं, जब नोटबंदी के बाद नियमों में बार बार बदलाव को लेकर केन्द्रीय बैंक की आलोचना की जा रही है। न्यूयार्क विश्वविद्यालय के वित्त विभाग में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर वी वी आचार्य भी राजन की ही तरह अकादमिक क्षेत्र से जुड़े हैं। वह वित्तीय क्षेत्र में प्रणालीगत जोखिम क्षेत्र में विश्लेषण और शोध के लिये जाने जाते हैं।
आईआईटी मुंबई के छात्र रहे आचार्य ने 1995 में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में स्नातक और न्यूयार्क विश्वविद्यालय से 2001 में वित्त में पीएचडी की है। वर्ष 2001 से 2008 तक आचार्य लंदन बिजनेस स्कूल में रहे।
एक तरफ यूपी में सभी को चुनाव की तारीखों का बेसब्री से इन्तजार है, वहीं दूसरी तरफ सूबे का सियासी पारा भी आसमान छूता जा रहा है। प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी एक बार फिर अपने अंतर्कलह से सुर्खियों में हैं।
टिकट के बंटवारें को लेकर अखिलेश यादव और शिवपाल यादव फिर आमने सामने हैं। आज पूरे दिन हुए सियासी घटनाक्रम में शाम होते होते अखिलेश यादव ने बढ़त बना ली है। तमाम सियासी घटनाक्रम के बीच विधानसभा चुनाव से ऐन पहले समाजवादी पार्टी के टूटने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
आपको बता दें कि आज लखनऊ में सुबह से चल रही मैराथन बैठकों के बाद शाम को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने 167 उम्मीदवारों की सूची बनाई है। सूत्रों की मानें तो उम्मीदवार साइकिल पर नहीं बल्कि अलग चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे। बताया जा रहा कि कुछ ही देर में अखिलेश अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेंगे लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि क्या अखिलेश इतना बड़ा फैसला ले पाएंगे!
सूत्र तो यहाँ तक बता रहे हैं कि ये सभी प्रत्याशी सपा प्रत्याशियों के खिलाफ ही मैदान में उतरेंगे। हालांकि सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहम्मद शाहिद ने कहा कि पार्टी में कोई टूट नहीं हुई है। न ही ऐसी कोई लिस्ट जारी हुई है। वहीं अखिलेश समर्थक एमएलसी सुनील साजन ने कहा कि अखिलेश यादव ने 167 लोगों की सूची नेताजी को दी है, क्योंकि वो दागियों के खिलाफ हैं।
कल जारी हुई लिस्ट में कुछ बड़े नामों को काट दिया गया था जिससे अखिलेश यादव काफी नाराज बताये जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अखिलेश ने मुलायम के घर कहा कि किस सर्वे में गोप, रामगोविंद चौधरी, पवन पांडे हारते दिखाई दे रहे हैं?
शिवपाल ने अपने सर्वे परिणाम नेताजी के सामने रखे। वहीं अखिलेश ने भी अपने सर्वे के परिणाम नेताजी के सामने रखे, जिसके आधार पर सीएम ने तैयार की थी अपनी लिस्ट। फिलहाल ये तो आने वाले समय में स्पष्ट हो जायेगा कि सपा का ये हाई वोल्टेज सियासी ड्रामा कहाँ जाकर रुकेगा, लेकिन अगर जानकारों की मानें तो इस घमासान से पार्टी का चुनावी गणित जरूर बिगड़ सकता है ।
“ज़िन्दगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं”, ज़िंदगी का यह फलसफा सिखाने वाला ‘आनंद’, यानि बॉलीवुड के एवरग्रीन स्टार राजेश खन्ना ने अपने फिल्मी करियर में ‘आनंद’,’अमर- प्रेम’, ‘आराधना’, ‘सफर’, ‘कटी पतंग’, ‘ख़ामोशी’, ‘सच्चा- झूठा’, ‘रोटी’ जैसी तमाम ऐसी फ़िल्में कीं, जिन्होंने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया और जीवन के प्रति लोगों की सोच को एक नयी दिशा भी प्रदान की।
राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर, 1942 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। माता पिता ने तो उनका नाम जतिन रखा था, लेकिन बॉलीवुड में पदार्पण करने से पूर्व उनके करीबी केके तलवार ने उनका नाम बदलकर राजेश खन्ना रख दिया। उनका पालन पोषण उनके माता पिता द्वारा नहीं हुआ था। उनके एक नजदीकी रिश्तेदार ने उन्हें गोद लिया था और बहुत ही लाड़-प्यार से उन्हें पाला।
पलकें झुककर उठाने वाले अंदाज़ पर करोड़ों हसीनाओं को बेहोश कर देने वाले राजेश खन्ना ने बॉलीवुड में अपने अभिनय के सफर की शुरुआत 1966 में फिल्म ‘आखिरी खत’ से की थी। वर्ष 1969 में आई फिल्म ‘आराधना’ ने उनके करियर को आकाश की बुलंदियों पर पहुंच दिया और देखते ही देखते वे युवा दिलों की धड़कन बन गए। इस फिल्म ने राजेश खन्ना की किस्मत के दरवाजे खोल दिए। इसके बाद वे अगले चार साल के दौरान लगातार 15 सफल फिल्में देकर समकालीन और अगली पीढ़ी के अभिनेताओं के लिए मिसाल बन गए।
तीन दशकों के अपने लंबे करियर में राजेश खन्ना ने 180 फिल्मों में अभिनय किया। इस दौरान उन्होंने तीन बार ‘फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड’ जीते और इसके लिए 14 बार नामांकित भी हुए। सबसे अधिक बार, यानि 4 बार ‘अवार्डस फॉर बेस्ट एक्टर’ पाने का सौभाग्य भी सिर्फ उन्हीं को मिला है। वह इसके लिए 25 दफा नामित भी हुए। ‘काका’ को 2005 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1971 खन्ना के करियर का सबसे यादगार साल रहा। इस वर्ष उन्होंने ‘कटी पतंग’, ‘आनंद’, ‘आन मिलो सजना’, ‘महबूब की मेहंदी’, ‘हाथी मेरे साथी’ और ‘अंदाज’ जैसी अति सफल फिल्में दीं।
लंबी बीमारी के बाद 18 जुलाई, 2012 को दुनिया को अलविदा कहने वाले इस सितारे को 30 अप्रैल, 2013 को आधिकारिक तौर पर ‘द फर्स्ट सुपरस्टार ऑफ इंडियन सिनेमा’ की उपाधि प्रदान की गई।
आइये जानते हैं ‘आनंद’ के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें-
– राजेश खन्ना ने फिल्म जगत में पदार्पण एक टॉवन्त हंट प्रतियोगिता जीतकर किया था, जिसमें हज़ारों प्रतिभागियों को हराकर उन्होंने ये ख़िताब जीता था।
– राजेश खन्ना ने फिल्म में काम पाने के लिए कई निर्माताओं के दफ्तर के चक्कर लगाए। स्ट्रगलर होने के बावजूद वे अपनी आलीशान एमजी स्पोर्ट्स कार में निर्माताओं के यहां काम मांगने जाते थे। उस दौर के सफल हीरोज के पास भी उस ज़माने में वैसी आलीशान कार नहीं थी।
– सत्तर के दशक में जाने-माने फ़िल्ममेकर मनमोहन देसाई ने ‘बाजीराव मस्तानी’ बनाने का मन बनाया। बाजीराव के किरदार के लिए तब के सबसे रोमांटिक एक्टर राजेश खन्ना और मस्तानी के लिए ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी को फ़ाइनल किया गया था। इस फ़िल्म के डायलॉग्स कादर ख़ान ने लिखे थे, जबकि संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल देने वाले थे। फ़िल्म का पोस्टर भी जारी किया गया था, जिस पर अंग्रेजी में लिखा था, ‘भारत के अतीत के एक सुनहरे पन्ने का पुनरचित्रण’। पोस्टर पर ये जानकारी भी दी गई थी, कि फ़िल्म जल्द सेट पर जाने वाली है। मनमोहन देसाई ने उस दौर में कई कॉस्ट्यूम ड्रामा वाली फ़िल्में बनाई थीं। ऐसे में ‘बाजीराव मस्तानी’ को लेकर उनका प्रेम समझा जा सकता है। हालांकि ये फ़िल्म किन्हीं कारणों से बन नहीं सकी।
– ‘आनंद’ राजेश खन्ना के जीवन की सबसे यादगार फिल्म साबित हुई। आरम्भ में हृषिकेश मुखर्जी आनंद का चरित्र निभाने के लिए किशोर कुमार और भास्कर बैनर्जी का चरित्र निभाने के लिए महमूद को लेना चाहते थे। लेकिन एक ग़लतफ़हमी के चलते किशोर कुमार के दरबान ने हृषिकेश मुखर्जी को दरवाज़े से ही लौटा दिया। आहत हृषिकेश दा ने किशोर कुमार के साथ काम ना करने का निर्णय लिया और राजेश खन्ना को आनंद व अमिताभ बच्चन को “बाबू मोशाय” की भूमिका दे दी। कहा जाता है कि हृषिकेश दा ने पूरी फ़िल्म केवल 28 दिन में शूट कर ली थी।
-हृषिकेश दा ने गुलज़ार साहब को निर्देश दिया था कि फ़िल्म कुछ ऐसे शुरु होनी चाहिए जिससे दर्शकों को शुरु में ही पता लग जाए कि आनंद मर गया है। हृषिकेश दा दर्शकों को इस सस्पेंस में नहीं रखना चाहते थे कि आनंद की मृत्यु हो जाएगी या वह बच जाएगा। इसके बजाए हृषिकेश दा दर्शकों का ध्यान पूरी फ़िल्म में इस बात पर रखना चाहते थे कि आनंद ने अपने जीवन को किस खूबी से जिया।हृषिकेश दा “ज़िन्दगी कैसी है पहेली” गीत को फ़िल्म की शुरुआत में आने वाली “श्रेय सूची” के साथ बैकग्राउंड में बजाना चाहते थे। लेकिन राजेश खन्ना को लगा कि इतने सुंदर गीत के साथ यह अन्याय होगा। राजेश खन्ना के सुझाव पर ही हृषिकेश दा ने फ़िल्म में परिस्थिति का निर्माण कर इस गीत को बीच में शामिल किया।उस समय संगीतकार सलिल चौधरी और गीतकार योगेश के करियर का सितारा डूबा हुआ था। “आनंद” फ़िल्म के गीतों ने इन दोनों के करियर नया जीवन दिया।फ़िल्म आनंद को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, राजेश खन्ना को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, अमिताभ बच्चन को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला। हृषिकेश दा को सर्वश्रेष्ठ कहानीकार व सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म संपादन के फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार प्राप्त हुए।
– राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के एक ऐसे सुपरस्टार थे जिनके पीछे करोड़ों लड़कियां दीवानी थीं। कई अभिनेत्रियों से उनके बेहद करीबी रिश्ते रहे जिनमें अंजू महेन्द्रू, डिम्पल कपाड़िया (पत्नी) टीना मुनिम के नाम शामिल हैं, लेकिन बेहद कम लोगों को मालूम होगा कि राजेश खन्ना का नाम अपने जमाने की एक बेहद प्रभावशाली महिला पत्रकार से भी जुड़ा था। लोगों का कहना है कि देवयानी चौबल नामक इस पत्रकार का राजेश खन्ना के करियर में बहुत बड़ा योगदान है। 60 व 70 के दशक में वे ‘स्टार व स्टाइल’ नाम से बॉलीवुड फिल्म मैगजीन निकला करती थीं। यह वहीं पत्रकार थीं, जिन्होंने सबसे पहले राजेश खन्ना को ‘सुपरस्टार’ टाइटल से नवाजा था।
– राजेश खन्ना का क्रेज ऑडियंस में ही नहीं, निर्माताओं में भी इतना बढ़ गया था कि एक बार जब पाइल्स के ऑपरेशन के लिए राजेश खन्ना को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था, अस्पताल में उनके इर्दगिर्द के कमरे निर्माताओं ने बुक करा लिए ताकि मौका मिलते ही वे राजेश को अपनी फिल्मों की कहानी सुना सकें। राजेश खन्ना की सफलता के पीछे संगीतकार आरडी बर्मन और गायक किशोर का अहम योगदान रहा। इनके बनाए और राजेश पर फिल्माए अधिकांश गीत हिट साबित हुए और आज भी सुने जाते हैं। किशोर ने 91 फिल्मों में राजेश को आवाज दी तो आरडी ने उनकी 40 फिल्मों में संगीत दिया।
– फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के लिए पहले राजेश खन्ना को ही एप्रोच किया गया था, लेकिन हीरो के रूप में राजेश अपने आपको एक अदृश्य करैक्टर के साथ जोड़ कर नहीं देख पा रहे थे, इसलिए उन्होंने यह फिल्म ठुकरा दी, जो बाद में अनिल कपूर के लिए एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सजा पाने के लिए चौराहा चुन लेना चाहिए, क्योंकि 50 दिन पूरे हो चुके हैं और जनता को अभी तक कोई राहत नहीं मिल सकी है। हालात जस के तस हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम नबी आजाद ने बाराबंकी के जीआईसी मैदान में बुधवार को आयोजित एक रैली मे यह बातें कही।
उन्होंने कहा कि मोदी कहते हैं कि आज भी देश के 18 हजार गांवों में बिजली नहीं पहुंची। जबकि देश में करीब 9 लाख गांव हैं, तो देश के आठ लाख 82 हजार गांवों में बिजली किसने पहुंचाई ये बात मोदी नहीं बताते।
उन्होंने कहा कि मोदी अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पर कोई जबाव नहीं देते। रमन सिंह का 30 हजार करोड़ का अनाज घोटाला उन्हें नहीं दिखता। शिवराज सिंह का व्यापम घोटाला उन्हें नजर नहीं आता।
उन्होंने कहा कि सहारा की डायरी में कांग्रेस नेता शीला दीक्षित का भी नाम है, वो जांच कराने को तैयार हैं तो मोदी जी क्यों डर रहे हैं। उन्हें देश की कम विदेश की ज्यादा जानकारी है।
आजाद ने कहा कि एक भी काम जमीनी स्तर पर किया हो तो बताएं। उन्होंने कहा, देश के प्रधानमंत्री ने देश की आवाम से जो वादा किया था, उसमें से एक भी वादा पूरा नहीं सके। जनता इसका जवाब विधान सभा चुनाव में जरूर देगी।
नई दिल्ली। गत 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए नोटबंदी का ऐलान कर कालेधन को समाप्त करने का बीड़ा उठाया। हालाँकि पीएम के इस फैसले को जनता का समर्थन मिला, लेकिन समूचा विपक्ष इस मुद्दे पर कभी एकसाथ तो कभी बट कर विरोध जताता रहा है।
संसद का शीतकालीन सत्र भी नोटबंदी का भेंट चढ़ा व पूरे सत्र में एक दिन भी कोई कार्य नहीं हुआ। इन्हीं मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एकबार पुनः देश के नाम संदेश देंगे। सूत्रों की मानें तो यह संदेश नववर्ष की पूर्वसंध्या पर प्रसारित होगा।
अपने संदेश मे प्रधानमंत्री विपक्ष के सवालों का तो जवाब देंगे, साथ ही नोटबंदी के 50 दिनों बाद देश को क्या मिला? व जो कालाधन बरामद हुआ है, सरकार उसका लाभ किस प्रकार गरीबों एवं किसानों तक पहुंचाएगी, प्रधानमंत्री इसका भी ऐलान कर सकते हैं।
सपा में टिकटों के लिए कथित रूप से शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच मचे घमासान के बीच सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने आज आगामी यूपी विधानसभा चुनावों के लिए 325 उम्मीदवारों की सूची जारी की। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि बाकी 78 उम्मीदवारों की सूची विचार-विमर्श के बाद जारी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि 176 मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट दिया गया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बारे में बोलते हुए सपा सुप्रीमो ने कहा कि वह जहां से भी चाहेंगे वहां से चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही मुलायम ने कहा कि उन्होंने जीतने वाले उम्मीदवार घोषित किए हैं। पार्टी प्रमुख ने कहा कि सभी उम्मीदवारों को सोच-समझकर चुना गया है। लेकिन, जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है, उसमें शिवपाल का प्रभुत्व ज्यादा नजर आता है। शिवपाल के चहेतों की इस लिस्ट में भरमार है।
चुनावों में मुख्यमंत्री के चेहरे के सवाल पर उन्होंने कहा कि सपा से ज्यादा लोकतांत्रिक पार्टी कोई और नहीं है। इसलिए हम चुनाव से पहले मुख्यमंत्री तय नहीं करते। मुलायम सिंह ने कहा कि अब कोई टिकट बदला नहीं जाएगा। बहुत सोच-समझकर टिकट दिया गया है, साथ में यह भी जोड़ा कि जिन कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिल सका है, उनका भी पार्टी में पूरा सम्मान है। टिकट पाने में मुख्य लोगों में से बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा का नाम भी शामिल है, उल्लेखनीय है कि राकेश वर्मा पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे, बेनी प्रसाद को मुलायम सिंह का बेहद करीबी माना जाता है।
इसके साथ ही अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले मौजूदा मंत्री अरविंद सिंह आैर पवन पांडे का टिकट काट दिया गया है। गौरतलब है कि पवन पांडे को सपा प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था और अखिलेश से उनको हटाने का आग्रह किया था लेकिन इसके बावजूद अखिलेश ने उनको मंत्रिमंडल से नहीं हटाया, दरअसल हालिया चाचा-भतीजे की लड़ाई में पवन पांडे ने खुलकर अखिलेश का साथ दिया था, वहीं दूसरी तरफ अरविंद सिंह का टिकट काटकर राकेश वर्मा को दे दिया गया।
मुलायम सिंह के करीबी गायत्री प्रजापति, नारद राय को टिकट दिया गया है, कानपुर कैंट से अतीक अहमद को टिकट दिया गया है और बर्खास्त मंत्री राजकिशोर सिंह को भी टिकट मिला है।
जयललिता की मृत्यु के विषय पर जांच की मांग करने वाली अन्नाद्रमुक की निष्कासित नेता शशिकला पुष्पा के वकील पर पार्टी ऑफिस के बाहर हमला किया गया।
AIADMK ऑफिस के बाहर तब अफरा-तफरी मच गयी, जब शशिकला के वकील पर हमला किया गया है। यह हमला उस वक्त हुआ जब शशिकला पुष्पा पार्टी ऑफिस में जनरल सेक्रेट्री पद के लिए नामांकन भरने आई थीं। हमले के बाद अन्नाद्रमुक ऑफिस के बाहर अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया।
उल्लेखनीय है कि शशिकला पुष्पा ने जयललिता की मौत की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से कराने की मांग संबंधी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है।
उन्होंने सरकार से भी जयललिता के मेडिकल कंडीशन और उपचार के विवरणों को सार्वजनिक करने की मांग की है। पुष्पा का कहना है कि जयललिता का निधन संदेहास्पद परिस्थतियों में हुआ है, ऐसा इसलिए क्योंकि उनके बीमार होने से लेकर मृत्यु तक की सभी सूचनाओं को गोपनीय रखा गया। यहाँ तक कि बीमारी के दौरान किसी को भी उनके पास नहीं जाने दिया गया।
शशिकला पुष्पा ने संसद को कुछ समय पहले सूचित किया कि चेन्नई में एक अन्नाद्रमुक नेता ने उनको थप्पड़ मारा, इसके साथ ही बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गयी है। जिसके बाद एक अगस्त को उनको पार्टी से निकाल दिया गया। लेकिन उसके बाद उन्होंने संसद सदस्यता से इस्तीफा देने से मना कर दिया था।
नोटबंदी के बाद चलन से बाहर 500, 1000 रुपये के पुराने नोट रखने वालों पर अब जुर्माना लगेगा। उन्हें जेल की सजा भी हो सकती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस तरह के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दी है। इसके तहत केंद्र सरकार 31 मार्च, 2017 के बाद किसी के पास एक सीमा से ज्यादा पुराने 500 और 1000 का नोट पाए जाने पर चार साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही पुराने नोटों में लेन-देन करने पर 5000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस दंडित करने के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दी गई। इसमें निर्धारित तिथि के बाद 500, 1000 रुपये के अमान्य नोट रखने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ साथ जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।
रिजर्व बैंक कानून में संशोधन वाले एक अन्य अध्यादेश को भी मंजूरी दी गई है जिसमें अमान्य किए गए इन नोटों के दायित्व से सरकार और केन्द्रीय बैंक को मुक्त किया गया है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचा जा सके।
अध्यादेश को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की जानकारी दी है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि दंड का यह प्रावधान किस तिथि के बाद लागू होगा। सरकार ने 500, 1,000 रुपये के अमान्य नोटों को बैंकों में जमा कराने के लिये 50 दिन की समयसीमा तय की थी। यह समय 30 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। इसके अलावा यह भी कहा गया था कि एक घोषणा पत्र के साथ 31 मार्च तक इन नोटों को रिजर्व बैंक के विशिष्ट कार्यालयों में जमा कराया जा सकेगा। अध्यादेश के प्रावधानों के अनुसार दस से अधिक अमान्य नोट रखने पर वित्तीय जुर्माना लग सकता है और कुछ मामलों में चार साल तक जेल की सजा भी हो सकती है। सरकार ने 8 नवंबर की मध्यरात्रि से 500, 1,000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य घोषित कर दिया था। ऐसे नोटों को नये नोटों से बदलने अथवा बैंक, डाकघर खातों में जमा कराने को कहा गया।
सरकार ने हालांकि, नोट बदलने की सुविधा को तो कुछ समय बाद वापस ले लिया, लेकिन पुराने नोट बैंक और डाकघर खातों में जमा कराने के लिये शुक्रवार 30 दिसंबर तक का समय है। अध्यादेश के जरिये सरकार और रिजर्व बैंक की इन नोटों के धारकों को उनके नोट का मूल्य देने का वादा करने वाली देनदारी को भी समाप्त कर दिया है।
राज्य की न्यायिक सेवा में पिछड़ा, अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति व जनजाति को 50 फीसदी आरक्षण मिलेगा। राज्य कैबिनेट की हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। आरक्षण का यह प्रावधान बिहार उच्च न्यायिक सेवा और बिहार असैनिक सेवा, न्याय (जूडिशियल मजिस्ट्रेट) में लागू होगा।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, अब बिहार न्यायिक सेवा और उच्च न्यायिक सेवा में अति पिछड़ा को 21 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 16 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग को 12 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति को एक प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। यह कुल आरक्षण का 50 प्रतिशत होगा, जिसमें महिलाओं को क्षैतिज रूप से 35 प्रतिशत और शारीरिक रूप से अक्षम को एक प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
किसी भी श्रेणी की आरक्षित कुल सीटों में उसी श्रेणी की महिलाओं को 35 प्रतिशत और शारीरिक रूप से अक्षम को एक प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।सामान्य श्रेणी की सीटों में भी 35 प्रतिशत महिलाओं को और एक प्रतिशत शारीरिक रूप से अक्षम को आरक्षण मिलेगा।
कैबिनेट की बैठक के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव डॉ धर्मेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि पूर्व में सिर्फ सबॉर्डिनेट न्यायिक सेवा में आरक्षण का प्रावधान था, इसमें एससी कोटे को 16 प्रतिशत, एसटी कोटे को एक प्रतिशत और अति पिछड़ा को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। अब राज्य सरकार ने बिहार उच्च न्यायिक सेवा यानी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति में भी आरक्षण देने का निर्णय लिया है।