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Monday, August 10, 2026
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लखनऊ रैली: एक वादे को तरसे किसान, कर्ज़माफी पर खामोश रहे प्रधानसेवक

अनुज हनुमत,

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी चुनाव से ठीक पहले लखनऊ के रमाबाई मैदान से लाखों की संख्या में मौजूद लोगों को संबोधित किया । लेकिन आज की रैली में एक बार फिर बदहाली और कर्ज से जूझ रहे किसानों को मायूसी ही हाथ लगी। जानकारों के मुताबिक ये गलती मोदी सरकार को आने वाले चुनावों में भारी पड़ सकती है। आज की रैली में पीएम मोदी ने विरोधियों पर जमकर हमला बोला।

आज रैली की सबसे खास बात ये रही कि पीएम मोदी को सुनने के लिए लखनऊ में लाखों की संख्या में भारी भीड़ उमड़ी। रैली को संबोधित करने मंच पर पहुंचे पीएम मोदी ने कहा कि मेरे पूरे जीवन में इतनी बड़ी रैली को संबोधित करने का मुझे सौभाग्य नहीं मिला था। लोकसभा चुनाव लड़ा था, तब भी इतनी विराट जनसभा को देखने का सौभाग्य मुझे नहीं मिला था। पीएम मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ ये लड़ाई रूकने वाली नहीं है। गरीबों को लूटा गया है और उन्हें लौटाने के लिए हमने ये कदम उठाया है। अब हमें यूपी से आशीर्वाद चाहिए। पीएम ने कहा कि और दलों के लिए ये सत्ता हथियाने का प्रयास होगा, और दलों के लिए कौन एमएलए बने, कौन सीएम बने इसका खेल होगा, लेकिन बीजेपी के लिए ये चुनाव सिर्फ हार जीत का मसला नहीं है, बीजेपी के लिए ये 2017 का यूपी चुनाव एक जिम्मेवारी का काम है।

उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की जनता को बताना है कि जो पार्टी परिवार में लगी है वो प्रदेश को बचा पाएगी क्या? किसी को पैसा बचाना है तो किसी को परिवार, एक हम ही हैं जो यूपी को बचाना चाहते हैं। मैं ये कहने आया हूं कि परिवर्तन आधा-अधूरा मत करना, पूर्ण बहुमत से सरकार बनाना।

पीएम मोदी ने विपक्षियों पर हमला बोलते हुए कहा कि कभी सपा-बसपा को साथ देखा है? दोनों में खूब विरोध है, लेकिन अब इतने सालों बाद एक मुद्दे पर दोनों इकट्ठे हो गए। दोनों मिलकर कह रहे हैं कि मोदी को बदलो, मोदी को हटाओ। वो कहते हैं मोदी हटाओ, मैं कहता हूं कालाधन हटाओ। वो कहते हैं मोदी हटाओ, मैं कहता हूं भ्रष्टाचार हटाओ। निर्णय आपको करना है कि क्या करना है।

पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि जब से केंद्र सरकार बनी है, तब से यूपी में एक लाख करोड़ रूपया खर्च करने के लिए मिला है। ढ़ाई साल में ढाई लाख करोड़ रूपया यूपी को मिला है। अगर उन पैसों का सही उपयोग हुआ होता तो यूपी कहां से कहां पहुंच गया होता।

आज 14 साल बाद भी बीजेपी की सरकार को याद करते हैं और वर्तमान सरकार के साथ तुलना करते हैं। आज युग ऐसा है कि सरकार बदलने के 6 महीने में पुरानी सरकार को लोग भूल जाते हैं। आज बड़े गर्व के साथ कह सकता हूं कि कल्याण सिंहजी, रामप्रकाश गुप्तजी और राजनाथजी के नेतृत्व में चली सरकारों को लोग आज भी याद करते हैं।
जो यूपी चुनाव का हिसाब किताब लगा रहे हैं, उन्हें ये रैली देखने के बाद ये मेहनत नहीं करनी पड़ेगी कि चुनाव में क्या होने वाला है। हवा का रूख साफ नजर आ रहा है।

इस रैली को देखने के बाद विपक्षियों में तो जरूर खलबली मची होगी लेकिन आज की रैली में भाजपा ने अपना दम तो जरूर दिखा दिया लेकिन पीएम मोदी कहीं न कहीं चूक गए। क्योंकि नोटबन्दी के बाद एक ख़ास वर्ग जिसमें किसान और मजदूर शामिल हैं, उन्हें लगातार मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को आशा थी कि आज की रैली में पीएम मोदी कर्ज माफी की घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अनुराधा पौडवाल डी. लिट. उपाधि से सम्मानित

एंटरटेनमेंट डेस्क,

पार्श्व गायिका अनुराधा पौडवाल को संस्कृत श्लोकों के प्रचार-प्रसार में सराहनीय योगदान के कारण डी. वाय. पाटिल यूनिवर्सिटी के पांचवे दीक्षांत समारोह में “डी. लिट“ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह समारोह 30 दिसम्बर शुक्रवार को संपन्न हुआ जिसकी अध्यक्षता कुलपति विजय भटकर जी ने की।

“डी. लिट“ की मानद उपाधि ग्रहण करने के बाद अनुराधा पौडवाल ने कहा कि यह गौरवशाली पल मैं आपके साथ बांट रही हूँ। आज का सम्मान भावनाओं से परिपूर्ण है और यह क्षण इसलिए भी खास है, क्योंकि आज मेरा परिवार भी मेरे साथ है जिन्होंने हर प्रतिकूल परिस्थिति में मेरा साथ दिया और मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अपने जीवन के सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण समयों में मेरे सबसे ज्यादा हिट गीत आए। जब मुझे म्यूजिकल हिट्स के लिए लगातार फिल्म फेयर पुरुस्कार मिल रहें थे, तब मैंने फिल्म संगीत को छोड़ने का निर्णय लिया और अंत में मुझे यह सम्मान तब मिला जब मै अपने संगीत कॅरियर के शिखर पर नहीं हूँ। मेरी जीवनयात्रा में सेवाभाव का ही सबसे ज्यादा योगदान रहा है, एक बेटी, एक पत्नी, एक माँ, एक बहन होने के नाते मुझे अपने परिवार की सेवा से सबसे ज्यादा संतुष्टि मिली है।

उन्होंने आगे कहा कि एक गायिका होने के नाते अपने श्रोताओं के साथ भी मेरा कुछ दायित्व था, जिसे मैंने एक अच्छे कलाकार के रूप में सदैव अच्छा संगीत देने के आधार पर निभाया है। मुझे ईश्वर ने वह कला दी, जिसके माध्यम से मैने उनके भक्तों को भक्ति संगीत के द्वारा ईश्वर वंदना से रूबरू कराने में योगदान दिया है और आज जब मैंने किसानों तथा धरती माता के लिए कुछ किया है तो ईश्वर ने मेरी पीठ थपथपाने का निर्णय लिया। यह उपाधि मै अपने पिताजी को समर्पित करती हूँ। मै जानती हूँ कि जिस तरह से यह जीवन चल रहा है तो मुझे लगता है कि स्वर्ग में मेरे सास – ससुर, आत्या तथा अरुण जी मुझे देखकर अपना आशीष दे रहें है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर प्रकाश बी. बेहरे ने कहा कि अनुराधा जी को दुर्गा सप्तशती, शिव महिमा स्त्रोत, भगवद गीता और अन्य धार्मिक ग्रंथों के संस्कृत श्लोकों को लोकप्रिय बनाने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इस उपाधि से समान्नित किया गया है।

धर्म-जाति के नाम पर वोट नहीं मांग सकते राजनीतिक दल – सुप्रीम कोर्ट

सौम्या केसरवानी,

सुप्रीम कोर्ट में आज धर्म और जाति के आधार पर वोट मांगने वालों पर फैसला आ गया है। इस सन्दर्भ में एक याचिका दाखिल की गई थी, उसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि धर्म जाति और संप्रदाय के नाम पर कोई भी वोट अपील नहीं कर सकता। धर्म जाति के नाम पर वोट मांगने के सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट में ढेरों याचिकाएं दाखिल थी। उन्हीं याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला दिया है।

चुनाव एक धर्म निरपेक्ष प्रणाली है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा,  चुनाव और धर्म को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। लोगों को स्वतंत्रता है किसी भी धर्म को अपनाने की, किसी भी संघठन या पार्टी द्वारा इस पर टिप्पणी करना या लोगों को उकसाने का कार्य सही नहीं है। चुनावों के कुछ नियम और कानून हैं, उन सभी का पालन करना आवश्यक है।

वर्तमान समय में देखा जाए या पिछले कुछ सालों में राजनीतिक पार्टियों में अधिक से अधिक वोट पाने की होड़ लगी रहती है, जिसके लिए धर्म और जाति के नाम का भी प्रयोग किया जाता है। ये फैसला बेहद अहम है, अब देखना ये होगा कि धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगने वालों की कोशिशों पर कब अंकुश लगता है कि नहीं।

बदल गया जिओ ऑफर, जानिए क्या अलग है ‘हैप्पी न्यू ईयर’ ऑफर में!

शिखा पाण्डेय,

रिलायंस जियो द्वारा दिए गए फ्री ‘वेलकम ऑफर’ का लाभ ले रहे उपभोक्ताओं को लगातार एक मैसेज आ रहा है कि आपका नंबर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ ऑफर में लाया जा रहा है। जिन उपभोक्ताओं ने भी अपना सिम पिछले साल, अर्थात 2016 में लिया था, उनका यह ‘वेलकम ऑफर’ समाप्त कर दिया गया है और उनकी मुफ्त सुविधाओं को ‘हैप्पी न्यू ईयर’ ऑफर में तब्दील किया जा रहा है।

दरअसल रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जियो की फ्री सर्विसिस को 31 दिसंबर 2016 से 31 मार्च 2017 तक बढ़ाने की घोषणा की थी। इस घोषणा को जियो का ‘हैप्पी न्यू ईयर ऑफर’ नाम दिया गया। इस ऑफर में पहले की तरह ही वॉइस कॉलिंग, वीडियो कॉलिंग, डेटा और मेसेजिंग सर्विसिस फ्री रहेंगी। फर्क बस यह है कि जहां पहले फ्री सर्विसिस की 4जी लिमिट रोजाना 4 जीबी डेटा थी, वह अब नए ऑफर के तहत सिर्फ 1 जीबी डेटा हो गई है। नए ऑफर के तहत 1 जीबी डेटा से ज्यादा इस्तेमाल करते ही नेट स्पीड 4जी से गिरकर 128Kbps की हो जाएगी।

इसके अतिरिक्त अगर आप 1 जीबी की डेटा लिमिट क्रॉस करने के बाद भी बढ़िया स्पीड चाहते हैं तो उसके लिए आपको पैसे खर्च करने होंगे। 51 रुपये के रीचार्ज से आप रोज 1 जीबी का ज्यादा डेटा पा सकते हैं जो 4जी स्पीड पर चलेगा। इसी तरह 301 रुपये के रिचार्ज से आप 6जीबी का 4जी डेटा ज्यादा ले सकेंगा जो 28 दिन कि वैलिडिटी के साथ होगा। ठीक इसी तरह से अलग-अलग रिचार्ज के हिसाब से अलग-अलग ऑफर्स हैं, हालांकि कंपनी ने वॉइस कॉलिंग और मेसेजिंग सेवा लाइफटाइम फ्री रखने की बात कही है।

आपको बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा ‘वेलकम ऑफर’ को ही ‘हैप्पी न्यू ईयर’ ऑफर के रूप में मार्च तक बढ़ाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन ट्राई ने रिलायंस जियो के सामने प्रश्न रख दिया कि जियो का ‘हैप्पी न्यू ईयर’ ऑफर कंपनी के ‘वेलकम ऑफर’ से किस तरह अलग है और ऑफर को मार्च तक करना क्यों न मौजूदा नियमनों का उल्लंघन माना जाए। इन नियमनों के मुताबिक प्रचार के लिए किसी तरह की पेशकश की अवधि 90 दिन की हो सकती है। रिलायंस जियो की यह अवधि 4 दिसंबर को खत्म हो गई थी, जिसके बाद कंपनी ने नया ‘हैपी न्‍यू ईयर’ ऑफर शुरू कर दिया था।

पीएम मोदी की लखनऊ रैली पर टिकी सबकी निगाहें, हो सकती हैं बड़ी घोषणाएं

अनुज हनुमत,

यूपी के विधानसभा चुनाव की तारीखें किसी भी वक्त चुनाव आयोग द्वारा जारी की जा सकती हैं, लेकिन इस वक्त यूपी के सियासी गलियारों का पारा जिस तेजी के साथ ऊपर चढ़ रहा है, उसे देखकर कुछ भी कहना मुश्किल है। सपा के सियासी खींचतान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रतीक्षित रैली आज लखनऊ में है।

चुनाव से ठीक पहले आज पीएम इस रैली में कुछ बड़ी घोषणाएँ कर सकते हैं, क्योंकि नोटबन्दी के बाद वैसे भी सरकार बैकफुट पर है। स्पष्ट है कि यह रैली यूपी के बढ़े हुए सियासी पारे को और बढ़ाएगी। भाजपा इस रैली को ऐतिहासिक बनाने में जुटी है।

बीजेपी का दावा है कि लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में होने वाली मोदी की रैली में 10 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता शामिल होंगे। चुनाव से ठीक पहले जानकारों के मुताबिक पार्टी अपना जनबल दिखाना चाहेगी। सूत्रों की मानें तो देश में अब तक हुई रैलियों में ये रैली सबसे बड़ी होगी। इस रैली में पीएम मोदी द्वारा सूबे के लोगों के लिए बड़ी घोषणाएं खासकर किसानों के कर्ज माफी की घोषणा की बड़ी संभावना है।

सूत्रों के हवाले से खबर है कि विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जल्द जारी होने की संभावना के बीच पीएम पार्टी प्रत्याशियों की सूची पर भी कुछ कह सकते हैं। बीजेपी यह चुनाव मोदी के भरोसे ही जीतना चाहती है, क्योंकि मुख्यमंत्री उम्मीदवार तय किए जाने से गुटबाजी की संभावना है। पार्टी के सामने यहां भी बिहार जैसी स्थिति है।

पार्टी के हवाले से बताया जा रहा है कि पीएम मोदी की रैली में पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी ओम प्रकाश माथुर, प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र, उमा भारती, संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा, साध्वी निरंजन ज्योति, जनरल वी के सिंह, महेंद्र नाथ पाण्डेय आदि मौजूद होंगे।

प्रधानमंत्री की रैली के मद्देनजर सुरक्षा चाक-चौबंद रहेगी। केंद्रीय सुरक्षा बलों की 20 कंपनियां और पीएसी की आठ कंपनियां तैनात की जाएगी, जबकि पांच पुलिस अधीक्षक, 10 अपर पुलिस अधीक्षक और 20 उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी रैली के दौरान चप्प-चप्पे पर कड़ी नजर रखेंगे।
देखना होगा कि आज पीएम नरेंद्र मोदी रैली से यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सूबे में वनवास काट रही भाजपा को कितनी संजीवनी दे पाते हैं।

मुस्लिमों ने कहा, “योगी नहीं तो बीजेपी नहीं!”

सौम्या केसरवानी,

एक तरफ समाजवादी पार्टी में सियासी घमासान मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए तरह तरह के पैंतरे बदल रहे हैं। गोरखपुर में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने आज नव वर्ष के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सीएम कैंडिडेट घोषित करने को लेकर पोस्टर जारी किया। जिसमे लिखा है मुस्लिम समाज की एक मांग योगी नहीं तो बीजेपी नहीं।

पोस्टर में योगी आदित्यनाथ को छत्रपति शिवाजी के रूप में दर्शाया गया है। यही नहीं इस पोस्टर में योगी आदित्यनाथ को छत्रपति शिवा जी के रूप में दर्शाया गया है। पोस्टर में ये नारा भी दिया गया है कि “अब न करो देरी कही अंधेर ना हो जाए, जल्द करो योगीजी को सीएम कैंडिडेट घोषित कही देर न हो जाये।”

इस पोस्टर के जारी होने के बाद कही न कही उत्तर प्रदेश में बीजेपी में सीएम कैंडिडेट को लेकर शियासत गर्म हो सकती है।

‘समाजवादी’ ड्रामा: अंदर-बाहर की राजनीति से हैरान उत्तर प्रदेश

शिखा पाण्डेय,

समाजवादी पार्टी का अंदरूनी ड्रामा समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा। एक बार राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव द्वारा अपने बेटे , उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व भाई रामगोपाल यादव को पार्टी से 6 सालों के लिए निकाला गया, फिर 2 दिन के भीतर ही तमाम उठापटक के बाद निष्कासन रद्द कर दिया गया, फिर रामगोपाल यादव द्वारा आज बुलाये गए अधिवेशन में अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया और फिर झुंझलाए मुलायम द्वारा रामगोपाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। 2 दिनों के भीतर कहानी में इतने ट्विस्ट आये, कि जनता के आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा।

रामगोपाल द्वारा अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किए जाने कब बाद अब मुलायम सिंह ने इन दोनों द्वारा बुलाए गए आज के विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन को असंवैधानिक और अवैध करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने 5 जनवरी को लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया है। मुलायम सिंह ने पत्र लिखकर कहा है कि कुछ लोग उन्हें बेइज्जत कर भाजपा को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव को फिर से 6 साल के लिए पार्टी से बाहर निकाल दिया है।

उल्लेखनीय है कि अखिलेश व रामगोपाल के समर्थकों को मुलायम टीम द्वारा बाग़ी करार दे दिया गया है और इस बागी गुट के राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले मुलायम सिंह ने पत्र लिखकर कार्यकर्ताओं से अधिवेशन में शामिल नहीं होने की अपील भी की थी। उन्होंने पत्र में में लिखा था, “यह आयोजन पूरी तरह पार्टी संविधान के विरुद्ध है तथा पार्टी अनुशासन के विपरीत और पार्टी को क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है। अत: आप तथाकथित ऐसे किसी सम्मेलन में भाग न लें।”

उधर मुलायम सिंह यादव की आज्ञा व इच्छा के विरुद्ध हुए इस विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में  सर्वसम्मति से अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। राज्य सभा सांसद अमर सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया गया है। इससे पहले पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने अधिवेशन में प्रस्ताव पेश किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को पार्टी का मार्गदर्शक बना दिया गया। अब देखना दिलचस्प होगा कि ये सियासी नोक झोंक आखिर किस स्तर तक जाती है।

मोदी ने राष्ट्र के नाम सन्देश नहीं, बजट भाषण दिया -लालू प्रसाद

सौम्या केसरवानी,

नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने बीती शाम देश के नाम संदेश दिया, जिस पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने हमला बोला है। लालू ने कहा कि यह संदेश मोदी दर्शन के अतिरिक्त कुछ भी नहीं था। लोगों को बड़ी आशा थी कि वे भाषण मे कितना काला धन प्राप्त हुआ उसका खुलासा करेंगे, परंतु उन्होंने इस संदेश को बजट भाषण बना दिया।

लालू ने पीएम मोदी पर तंज कसा कि पटरी से उतरी देश की अर्थव्यवस्था कब रफ्तार पकड़ेगी। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के बाद कालाधन प्राप्ती का ब्यौरा भी नहीं दिया।

वे आगे कहते हैं कि लाखों लोगों ने लाइन में खड़े होकर अपनी गाढ़ी कमाई का रुपया बैंक में जमा किया, इस दौरान 100 से अधिक लोगों की जान चली गई।
तो वहीं कल-कारखाने में लगे असंगठित मजदूर नोटबंदी की वजह से अपने-अपने घरों को वापस लौटने के लिए मजबूर हुए।

नोटबंदी के कारण उन्हें काम मिलना बंद हो गया है, दवा-इलाज कराने में कठिनाई हुई। उनको हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार क्या करेगी इसका भी जिक्र भाषण में नहीं हुआ।

पार्टी में साजिश करने वालों को छोड़ा नहीं जायेगा -सीएम अखिलेश

सौम्या केसरवानी,

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार 1 जनवरी को जनेश्वर मिश्र पार्क में अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने पर सीएम ने कहा कि, उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गयी है और पार्टी में साजिश करने वालों को छोड़ा नहीं जायेगा।

इस अवसर पर सीएम ने चुनाव के लिए कहा कि, अगले दो महीने महत्वपूर्ण होंगे और मैं सभी का स्वागत और अभिनन्दन करता हूँ। इसके साथ ही सीएम ने कहा कि, नेताजी का सम्मान, नेताजी का जो स्थान है वो बना रहेगा।

उन्होंने आगे कहा कि, चार महीने से जो खेल रहा है वो अच्छा नहीं है। पार्टी और परिवार को बचाना है। गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री अखिलेश और रामगोपाल को पार्टी में अनुशासनहीनता के लिए निष्कासित किये गये थे। साथ ही सपा प्रमुख ने इस अधिवेशन को असंवैधानिक बताया था।

सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में रामगोपाल ने अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना

अनुज हनुमत,

राजनीति में कब क्या घटित हो जाये कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन जो सियासी घटनाक्रम मौजूदा समय में समाजवादी पार्टी में चल रहा है, ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है। आज लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में चल रहे राष्ट्रीय अधिवेशन में रामगोपाल यादव ने अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करते हुए बड़ा सियासी तीर चला दिया है।

रामगोपाल यादव पार्टी नेताओं को सम्बोधित करते हुए मांग की कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को पार्टी से हटा दिया जाए और अमर सिंह को सपा से बर्खास्त कर दिया जाए। आपको बता दें कि , राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि हमारे लिए नेताजी का स्थान सबसे ऊंचा और महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अगर नेताजी के खिलाफ कोई साजिश हो तो उनका बेटा होने के नाते मेरा फर्ज है कि मैं साजिश को सामने लाऊं।

हालाँकि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने इस अधिवेशन को असंवैधानिक करार दे दिया है और कहा कि वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, उनके पास ये अधिकार हैं। उन्होंने कहा है कि जो भी इस अधिवेशन में शामिल हो वे उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। मुलायम ने चिट्ठी जारी कर ये बातें कही हैं।

आपको बता दें आज सुबह ही समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके घर पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक यहां पर शिवपाल ने मुलायम से अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। शिवपाल यादव ने कहा कि अगर यूपी अध्यक्ष पद से उनका इस्तीफा लेने के बाद झगड़ा खत्म हो तो उनका इस्तीफा ले लिया जाए। इसके अलावा खबर है कि मुलायम आज संसदीय कमेटी की बैठक बुला सकते हैं।

दरअसल, परसों देर शाम सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया था, लेकिन अगले दिन प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने पत्रकारों से वार्ता करके सूचना दी कि सपा सुप्रीमों ने अपना फैसला वापस ले लिया है और हम सब बैठकर बात करेंगे। लेकिन आज सुबह रामगोपाल यादव द्वारा राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव को उपस्थित कार्यकर्ताओं की सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करके फिर से पार्टी में चल रहे सियासी दंगल को हवा दे दी है । अब देखना होगा कि मुलायम सिंह यादव क्या रणनीति अपनाते हैं।