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Wednesday, August 12, 2026
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पी.वी. सिंधु ने स्पेन की कैरोलिना को हराकर ‘इंडिया ओपन सुपर सिरीज’ किया अपने नाम

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

भारतीय बैडमिंटन स्‍टार पीवी सिंधु ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे भारत के लिए एक ‘कोहिनूर हीरा’ हैं, देश की शान हैं। सिंधु ने ‘इंडिया ओपन सुपर सिरीज’ के फाइनल मुकाबले में स्‍पेन की खिलाड़ी और वर्ल्‍ड नंबर वन कैरोलिना मारीन को हराकर खिताब अपने नाम किया। रियो ओलंपिक के अत्यंत रोचक मुक़ाबले में कैरोलिना से हारकर रजत पदक जीतने वाली सिंधु ने लगातार दोनों सेटों में जीत दर्ज कर यह मुकाबला जीता। सिंधु शनिवार को सुन जी यून को हराकर फाइनल में पहुंची थीं, जबकि क्वार्टर फाइनल में उन्होंने भारतीय बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल को हराया था।

इंडिया ओपन सुपर सिरीज का यह फाइनल मुक़ाबला भी बेहद रोचक रहा, जिसमें पहले सेट में सिंधु ने कांटे की टक्कर दे रही मारीन को 21-19 से हराया। दूसरा सेट सिंधु ने 21-16 से जीता। सिंधु इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार पहुंची थीं और पहली बार में ही वह इसे जीतने में सफल रहीं। यह फाइनल मैच सिरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खेला गया। आपको बता दें कि मारिन और सिंधु के बीच अभी तक आठ मैच हुए हैं, जिनमें मारिन 5-3 से आगे है। दोनों के बीच आखिरी बार दुबई में टक्‍कर हुई थी जिसे सिंधु ने जीता था।

सेमीफाइनल में शनिवार को पीवी सिंधु ने तीन गेम तक चले मुकाबले को 21-18, 14-21 और 21-14 से अपने नाम किया था। सिंधु ने पहला गेम जीत लिया था, लेकिन दूसरे गेम में यून ने वापसी करके स्कोर बराबरी पर ला दिया। फिर तीसरे गेम में सिंधु ने लगभग एकतरफा अंदाज में जीत दर्ज कर ली थी। क्वार्टर फाइनल मुकाबले की बात करें तो इस मुकाबले में शुक्रवार को सिंधु ने साइना नेहवाल को मात दी थी। रोमांचक मुकाबले में पीवी सिंधु ने साइना नेहवाल को 21-16, 22-20 से हराने में सफलता हासिल की थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में आयोजित समारोह में शरीक हुए पीएम मोदी, सीएम योगी ने किया स्वागत

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संगम नगरी इलाहबाद में हैं। प्रधानमंत्री इलाहाबाद हाई कोर्ट के 150 वर्ष पूर्ण होने पर  आयोजित कार्यक्रम के समापन समारोह में हिस्सा लेने इलाहाबाद पहुँचे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वहां पहले से उपस्थित थे। उन्होंने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

इस समारोह में भारत के प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर, कानून एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद और हाई कोर्ट के कई न्यायाधीश एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी शामिल हुए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 150 वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम की शुरुआत पिछले साल मार्च में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने की थी।

पिछले महीने उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद मोदी की यह पहली इलाहाबाद यात्रा है, पिछले साल नगर में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में हिस्सा लेने के लिए यहां की दो दिवसीय यात्रा के दौरान मोदी थोड़े समय के लिए उच्च न्यायालय गए थे और न्यायाधीशों एवं बार के सदस्यों से बातचीत की थी।

हवाईअड्डे पर प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी के अलावा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और राज्य के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह एवं नंद गोपाल गुप्ता भी मौजूद थे। आपको बता दें कि मौर्य फूलपुर से लोकसभा सदस्य हैं, सिंह और नंदी इलाहाबाद पश्चिम और इलाहाबाद दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने इस समापन समारोह के अवसर पर कानून को शासकों का भी शासक  बताया। समारोह को संबोधित करते हुए योगी ने कहा, “लोकतंत्र की स्वतंत्रता की नींव मजबूत न्यायपालिका पर निर्भर करती है। प्राचीन काल से न्याय तथा विधि एक दूसरे के पूरक हैं।” उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र करते हुए कहा, “कानून का स्थान शासक से भी ऊपर होता है। कानून से समाज चलता है। जब-जब लोकतंत्र पर संकट आया इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले से उसका सम्मान रखा।” उन्होंने न्याय की इस धारा के बने रहने की कामना की।

उल्लेखनीय है  कि इलाहाबाद हाई कोर्ट एशिया का सबसे पुराना और बड़ा कोर्ट है। इसकी स्थापना 17 मार्च 1866 में हुई थी। इसकी एक अन्य बेंच लखनऊ में है। इलाहाबाद हाई कोर्ट देश का एकमात्र हाई कोर्ट है,जिसका अपना म्यूजियम और गैलरी भी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट से लगभग 17 हजार वकील जुड़े हुए हैं। यहां जजों के करीब 160 पद हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ही इंदिरा गांधी का निर्वाचन रद्द किया था। जगदंबिका पाल को भी यूपी के सीएम पद से हटाने का फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ही दिया था। अयोध्या जमीन विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ही जमीन का बंटवारा किया था, जिसमें राम मंदिर, बाबरी मस्जिद और अखाड़े के नाम पर तीन जगह बंटवारा किया गया था।

A.C. केबिन में ऐश कर रहे ‘प्रभु’ के अधिकारी, रेलवे की लापरवाही से यात्रियों का बुरा हाल

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

एक ओर सरकार बुलेट ट्रेन और तमाम तकनीकी तरक्कियों की बात कर रही है और दूसरी ओर पहले से मौजूद ट्रेनों की असुविधाओं को दूर करने में असमर्थ है। छुट्टियों के दौरान बुकिंग व ट्रेनों के सफर में होने वाली तमाम दिक्कतों तक तो ठीक है, लेकिन कई ऐसी गाड़ियां हैं जो साल भर लेट लतीफ़ और असुविधाजनक बनी रहती हैं।

ऐसी ही एक ट्रेन है लखनऊ जंक्शन इंटरसिटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस(ट्रेन नं. 12180)। कहने को तो यह ट्रेन सुपरफास्ट है, लेकिन इसकी लेट लतीफ़ी से यात्रियों का ही नहीं टिकट चेकर्स तक का हाल बेहाल है।

आगरा से लखनऊ के बीच चलने वाली इस ट्रेन में सफर कर रहे नियमित यात्री, आर. के. यादव (पीएनआर- 2329629786), चाणक्य त्रिपाठी (पीएनआर-2129747446), रेखा चौहान (पीएनआर- 2710676723) से बात करने पर पता चला कि यह ट्रेन आज तक कभी अपने सही समय पर किसी गंतव्य तक नहीं पहुंची है। नाम मात्र की यह इंटरसिटी एक्सप्रेस जगह-जगह पर बीच-बीच में रुक जाया करती है।

स्टेशनों के अतिरिक्त घंटों घंटे कहीं भी बीच में रुके रहने के कारण तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बच्चे पानी तक के लिए तरस जाते हैं, घंटों उन्हें भूखा रहना पड़ता है, लोग अपने ज़रूरी कामों के लिए समय पर नहीं पहुँच पाते। एसी कोच में एसी काम नहीं करता।

इसी ट्रेन से यात्रा कर रहे नवप्रवाह मीडिया समूह के प्रबंध सम्पादक प्रज्ञात द्विवेदी ने इस सन्दर्भ में रेल अधिकारियों से बात की। जिसके बाद पता चला कि इस ट्रेन का हमेशा से यही हाल रहा है। टिकट चेकर्स से इस सन्दर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वे भी इस ट्रेन की ऐसी नियमित अनियमितता से तंग आ चुके हैं।

ट्रेन में मौजूद एक टीसी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, “सर, यात्रियों की छोड़िये, हम लोग खुद इस ट्रेन में ड्यूटी नहीं चाहते। इस ट्रेन की ड्यूटी हमें मजबूरन बजानी पड़ती है।” लखनऊ जंक्शन इंटरसिटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे तमाम यात्रियों का रेल मंत्रालय से यही निवेदन है कि भारतीय रेल बुलेट ट्रेन का सपना साकार करने से पहले, मौजूद ट्रेनों की हकीकत से रूबरू हो और पहले उनको सुविधाजनक बनाने का प्रयास करे।

मुलायम का दर्द : “जो बाप का न हुआ, वह आपका क्या होगा!”

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले ‘समाजवादी’ परिवार में शुरू हुए आपसी घमासान को विरोधी पार्टियां मात्र सियासी ड्रामा बता रही थीं, लेकिन आज सपा संरक्षक बन कर रह गए मुलायम सिंह यादव ने खुद इस सन्दर्भ में अपना हार्दिक दुःख व्यक्त किया है। मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक तौर पर स्वयं इस बात का खुलासा किया है कि अखिलेश ने इन 5 सालों में उनके अपमान की सभी सीमाएं पार कर दीं। मुलायम ने अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा, “जो बाप का नहीं हुआ, वो आप का क्या होगा!”

मैनपुरी में एक उद्घाटन समारोह के दौरान मुलायम सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी की नींव उन्होंने रखी, उसे राज्य स्तरीय,फिर राष्ट्रीय पार्टी का दर्ज़ा उन्होंने दिलाया और उन्हीं का इतना बड़ा अपमान किया गया। मुलायम ने कहा, ” आज तक किसी ने खुद की साख कायम रहते,खुद कुर्सी का त्याग कर, अपने बेटे को मुख्यमंत्री नहीं बनाया होगा, पर मैंने अपने बेटे को अपनी जगह मुख्यमंत्री की कुर्सी दी और उसी ने मुझे पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात दोहराते हुए कहा, ” जो बाप का सगा नहीं हुआ, वो किसी और का सगा क्या होगा!” आपको बता दें कि कन्नौज में  चुनाव रैली के दौरान मोदी ने यही बात तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव में सन्दर्भ में कही थी।

मुलायम ने बेटे अखिलेश व भाई शिवपाल के बीच छिड़े युद्ध का ज़िक्र करते हुए कहा,” अखिलेश ने चाचा शिवपाल से भी उनका मंत्री पद छीन लिया। कोई अपने चाचा के साथ ऐसा नहीं करता। अखिलेश ने अपने पिता-चाचा का साथ नहीं दिया और बगावत पर उतर आये।” गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी में चाचा शिवपाल यादव को लेकर पिता मुलायम सिंह यादव व पुत्र अखिलेश यादव में घमासान युद्ध शुरू हो गया था। युद्ध इस स्तर तक पहुँच गया था कि पार्टी दो खेमों में बंट गयी थी, मुलायम-शिवपाल खेमा व अखिलेश-रामगोपाल खेमा। तमाम उठापटक के बाद अखिलेश ने खुद को पार्टी अध्यक्ष घोषित कर मुलायम को पार्टी संरक्षक का टैग थमा दिया था और पिता को थक हार कर पुत्र के सामने हथियार डालने पड़े थे।

गुजरात: संगठनों की आपत्तियों के बावजूद मुस्लिम महिलाएं योग और सूर्य नमस्कार करने को तैयार

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

अब भारतवासी जाति, धर्म, ऊंच, नीच के भेदभाव से कहीं ऊपर उठकर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की संस्कृति को पुनः अपनाते नज़र आ रहे हैं। इसी के तहत, योग व सूर्य नमस्कार को शारीरिक स्वास्थ्य का जरिया न समझ, उसे धर्म से जोड़कर लोगों को बांटने वालों के लिए एक बुरी खबर है। मुस्लिम संगठनों की तमाम आपत्तियों के बावजूद अहमदाबाद में मुस्लिम महिलाएं अपने आपको फिट रखने के लिए योग व सूर्य नमस्कार को अपने जीवन का हिस्सा बनाने जा रही हैं।

दरअसल अहमदाबाद में एक गैर-सरकारी संस्था की तरफ से योग कक्षा की शुरूआत होने जा रही है, जिसमें पूरे शहर की करीब 32 मुस्लिम महिलाओं ने अपना दाखिला कराया है। संभवतः यह कक्षा अगले हफ्ते से खानपुर के एक निजी परिसर में शुरू हो जाएगी। एक अन्य सकारात्मक बात यह है कि इसमें कांग्रेस की खानपुर से निगम पार्षद अज़रा कादरी भी यहां पर दाखिला लेनेवाली महिलाओं में शामिल हैं। कादरी ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति से जुड़ा हुआ है और इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।

गैर सरकारी संस्था की सदस्य फ़रहत जहान सैयद का मानना है कि योग मुस्लिम महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति और जागरुक करेगा। उन्होंने कहा, “मैं सूर्य नमस्कार करने में कुछ बुरा नहीं मानती हूं क्योंकि यह कोई प्रार्थना नहीं है बल्कि यह 12 आसनों का संयुक्त रूप है।” फ़रहत ने कहा, “ योग एक विज्ञान है जिसका धर्म से किसी तरह का कोई भी लेना देना नहीं है। इसके अतिरिक्त सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम चाहते हैं कि मुस्लिम महिलाएं सामाजिक बंधन को तोड़कर आगे आएं। ” फ़रहत ने बताया कि कक्षाएं तसनीम खंचवाला लेंगी। उन्होंने कहा कि तसनीम योग क्लास चलाती हैं, जिसमें 35 महिलाएं हैं। उनमें से ज्यादातर मुस्लिम हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल उस वक्त विवाद पैदा हो गया था, जब कुछ मुस्लिम धर्मगुरूओं ने योग, खासकर सूर्य नमस्कार पर अपनी आपत्ति जाहिर की थी। उन्होंने उसे इस्लाम के खिलाफ बताया था। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मो. वली रहमानी ने कहा था कि सूर्य नमस्कार और योग का इस्लाम में कोई स्थान नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार योजना बनाकर विद्यालयों के सहारे मुसलमानों पर इसे थोपने का प्रयास न करे।

विदेश में रहने वाले भारतीयों को पुराने नोट बदलने का आख़िरी मौक़ा

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

आज 31 मार्च, 2017, एक खास तारीख है। आज कार्यालयीन वर्ष का आखिरी दिन है तथा विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए भी सशर्त पुराने नोट बदलने का आखिरी मौका है। आज के बाद सिर्फ प्रवासी भारतीयों के ही पुराने 500 व 1000 रुपये के नोट 30 जून, 2017 तक बदले जाएंगे, लेकिन अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या केंद्रीय बैंक बाजार से वापस आये प्रतिबंधित नोटों का आंकड़ा सार्वजनिक करेगा? यदि आरबीआई अगले पखवाड़े तक इसकी जानकारी नहीं दे पाता है तो फिर वे सवालों के घेरे में आ जायेगा।

आधिकारिक तौर पर 14 दिसंबर, 2016 के बाद केंद्रीय बैंक द्वारा वापस लौटे नोटों या बाजार में प्रचलन में गये नोटों का कोई आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है, जबकि दुनिया का हर केंद्रीय बैंक साप्ताहिक या पखवाड़े स्तर पर बाजार में प्रचलन में गये नोटों की जानकारी देता है। खुद आरबीआई भी अब तक यह करता रहा है।

बैंकिंग सूत्रों की मानें तो संभवत: अप्रैल के पहले पखवाड़े में केंद्रीय बैंक की तरफ से वापस आये नोटों की जानकारी दी जा सकती है। इसके पीछे एक वजह यह बताई जा रही है कि संसदीय समिति ने फिर से आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को पेश होने का नोटिस दिया है। आरबीआई गवर्नर से संभवत: 20 अप्रैल को संसदीय समिति के सदस्य पूछताछ करेंगे और वे 08 नवंबर, 2016 को नोटबंदी लागू होने के बाद से अभी तक वापस आये नोटों का ब्यौरा मांगेगे। पिछली बार भी वित्त मंत्रालय द्वारा यह जानकारी मांगी गई थी लेकिन पटेल ने जवाब नहीं दिया था। इस पर समिति के कई सांसदों ने नाराजगी भी जताई थी।

उल्लेखनीय है कि 08 नवंबर को लागू नोटबंदी के बाद 30 दिसंबर, 2016 तक सभी को पुराने नोट वापस करने का मौका दिया गया था। उसके बाद पुराने नोट वापस करने के लिए आरबीआई के पांच कार्यालयों को नामित किया गया लेकिन इसके साथ कड़ी शर्त भी लगा दी गई। नोटबंदी के दौरान (8 नवंबर से 30 दिसंबर) जो भारतीय विदेश गये थे, उन्हें 31 मार्च, 2017 तक इन केंद्रों पर नोट बदलने की छूट दी गई थी। विशेषज्ञों ने पुराने आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान लगाया है कि जनवरी के अंत तक आरबीआई के पास प्रतिबंधित नोट का 97 फीसदी हिस्सा वापस आ चुका है।

बता दें कि 31 मार्च 2017 के बाद भी अगर किसी के पास पुराने प्रतिबंधित नोट रह गए हों, तो फिर उनके लिए सुप्रीम कोर्ट ही अंतिम सहारा होगा। वैसे सुप्रीम कोर्ट में तकरीबन दस ऐसे मामले दायर हैं, जिनमें नोट बदलने के लिए और अवधि मांगी गई है। अगले महीने की 11 तारीख को इस पर सुनवाई होगी। प्रवासी भारतीय भी 30 जून तक नोट बदल सकेंगे लेकिन उन्हें ‘फेमा’ नियमों के मुताबिक ही भारतीय मुद्रा को बदलने की छूट मिलेगी। इस नियम के तहत 25 हजार रुपये तक लाने की ही छूट है। उन्हें इसकी जानकारी कस्टम अधिकारी को भी देनी होगी।

धर्म के ठेकेदारों के मुंह पर ताले, योगी को मिला मौलाना कासिम का साथ

New Delhi : Chief Minister of Uttar Pradesh, Yogi Adityanath arrives at Parliament in New Delhi on Tuesday.PTI Photo by Subhav Shukla(PTI3_21_2017_000063B)

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

अपने स्वार्थ की रोटियां सेंकने के लिए कुछ राजनीतिक पार्टियों द्वारा जनता को बांटने के दिन अब लदते नज़र आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिन पर कट्टर हिंदुत्ववादी का टैग लगा दिया गया था, उन्होंने कल जहाँ सूर्य नमस्कार और नमाज़ में समानता का अपना भाव व्यक्त कर सबको चौंका दिया, वहीं जमात-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सुहैब कासमी ने उनका समर्थन कर बनावटी धर्मनिरपेक्षों के मुह पर एक और करारी चपेट लगाई है।

सुहैब कासमी ने उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के सूर्य नमस्‍कार और नमाज में समानता वाले बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि हर धर्म लोगों को शांति की शिक्षा देता है और योगी आदित्‍यनाथ का यह कथन राष्ट्र को एकजुट करने में मदद करेगा। मौलाना कासमी ने कहा, “योगी आदित्‍यनाथ का बयान काबिले तारीफ है, जिससे राष्‍ट्र में एकजुटता बढ़ेगी।

कासमी ने कहा, “हर धर्म लोगों को शांति का संदेश देता है, एक-दूसरे के साथ प्‍यार से रहना सिखाता है। मेरा मानना है कि हर धर्म के लोगों में इबादत करने का तरीका मिलता-जुलता होता है, क्‍योंकि ईश्‍वर एक हैं। योगी आदित्‍यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी यही मानना है, इसके लिए दोनों की सराहना होनी चाहिए।”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमाज़ और सूर्य नमस्कार को मिलता-जुलता स्वरूप बताया था।योगी ने कहा था कि दरअसल राजनीति दोनों धर्मों को एक नहीं होने देती। लखनऊ में चल रहे योग महोत्सव के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि सूर्य नमस्कार में जितने आसन और मुद्राएं आती हैं, वो मुस्लिम बंधुओं के नमाज़ पढ़ने की क्रिया से मिलती-जुलती हैं।

‘RSS’ से चिढ़ने वाली राजनीतिक पार्टियां ‘संघ’ बनाने की जुगत में!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

तमाम राजनीतिक पार्टियों का ऐसा मानना है कि देश भर में धूम मचानेवाली व आधे से अधिक भारत पर विजय पाने वाली राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी की सफलता के पीछे ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ का हाथ है। इसीलिए शायद तमाम बड़ी पार्टियाँ आरएसएस की टक्कर में अपना संघ स्थापित करने की होड़ में लग गई हैं।

जहाँ एक ओर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने ‘धर्मनिरपेक्ष सेवक संघ’ (डीएसएस) का गठन किया है, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व ओलंपियन असलम शेर खान ने ‘राष्ट्रीय कांग्रेस स्वयंसेवक संघ'(आरसीएसएस) के गठन की घोषणा की है।

तेज प्रताप यादव ने आरएसएस और योगी आदित्य नाथ के संगठन ‘हिंदू युवावाहिनी’ से मुकाबला करने के लिए नए संगठन की घोषणा करते हुए कहा कि डीएसएस को पहले बिहार में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर फैलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीएसएस में हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी धर्मो के लोग शामिल होंगे। यह संगठन आरएसएस और योगी आदित्यनाथ के संगठन ‘हिंदू युवा वाहिनी’ का मुकाबला करने को तैयार है।

आरएसएस को खदेड़ देगा डीएसएस-

आरक्षण को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बताते हुए तेजप्रताप ने कहा, “हम आरएसएस की मनमानी नहीं चलने देंगे। डीएसएस आरक्षण के मुद्दे पर आरएसएस को खदेड़ देगा।” बता दें कि आरएसएस लंबे समय से आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की मांग कर रहा है, जिसे लेकर विपक्षी नेता संघ और बीजेपी को लंबे समय से अपने निशाने पर रखे हुए हैं।

दूसरी ओर पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान ने घोषणा की है कि मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा को टक्कर देने के लिए वे जल्द ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तर्ज पर आरसीएसएस बनायेंगे। असलम ने संवाददाताओं से बताया, ‘‘आरसीएसएस मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में ठीक उसी तरह से कांग्रेस की मदद करेगी, जैसे आरएसएस चुपके-चुपके पिछले दरवाजे से चुनावों में भाजपा की सहायता करती है।’’ उन्होंने कहा कि आरसीएसएस का ढांचा ठीक उसी प्रकार का होगा, जैसे आरएसएस का है, लेकिन आरसीएसएस का कोई परिधान नहीं होगा, जैसा कि आरएसएस स्वयंसेवकों का है।

असलम ने भी धर्मनिरपेक्षता का ही राग अलापते हुए कहा कि  आरसीएसएस में उन लोगों को स्वयंसेवकों के रूप में शामिल किया जायेगा, जो किसी राजनीतिक दल से न जुड़े हों और धर्मनिरपेक्ष होने के साथ-साथ कांग्रेस के समान विचार रखने वाले हों। उन्होंने यह भी कहा कि जमीनी स्तर पर कांग्रेस के पास कार्यकर्ताओं की भारी कमी है, जबकि एक राजनीतिक दल के लिए चुनाव जीतने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का होना जरूरी है।’’ उन्होंने यह भी दावा किया कि अगले साल तक आरसीएसएस में एक लाख तक स्वयंसेवक हो जाएंगे और उसकी मदद से कांग्रेस आने वाले दिनों में भाजपा को चुनावों में कड़ी टक्कर देगी।

पहली बार ‘बिजली’ का शुद्ध निर्यातक बना भारत

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

मोदी सरकार अपने ‘अच्छे दिन’ लाने के वादे पर पूर्णतः खरी उतरती नज़र आ रही है। बिजली मंत्रालय के अनुसार भारत पहली बार इस वित्त वर्ष के दौरान बिजली का शुद्ध निर्यातक बना है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुसार भारत पहली बार बिजली के शुद्ध आयातक से शुद्ध निर्यातक बना।’’

बिजली मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2016-17 (अप्रैल-फरवरी) के दौरान भारत ने 579.8 करोड़ यूनिट बिजली नेपाल, बांग्लादेश तथा म्यांमा को निर्यात की। यह भूटान से आयातित करीब 558.5 करोड़ यूनिट बिजली से 21.2 करोड़ यूनिट अधिक है। नेपाल और बांग्लादेश को किया गया निर्यात पिछले तीन साल में क्रमशः 2.5 और 2.8 गुना बढ़ा है।

वैसे तो भारत की छवि बिजली की स्थिति को लेकर खासा अच्छी नहीं रही है लेकिन, आज भारत बिजली का निर्यातक बन चुका है। बीते कुछ सालों में भारत ने पावर जेनरेशन में भारी निवेश किए हैं। वहीं कोयला से बिजली बनाने में भी भारत को काफी फायदा बीते दो सालों में पहुंचा है। गौरतलब है कि 1980 के मध्य से भारत ने सीमा पार से बिजली का व्यापार शुरू किया। उस समय से भारत भूटान से बिजली का आयात कर रहा है। औसतन भूटान से 500 से 550 करोड़ यूनिट बिजली की आपूर्ति हो रही है। दूसरी ओर भारत नेपाल को बिहार और उत्तर प्रदेश से क्रमशः 33 केवी और 132 केवी का निर्यात करता रहा है।

राष्ट्रपति नहीं बनेंगे मोहन भागवत, लगाया सभी अटकलों पर विराम

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल जुलाई 2017 में समाप्त होने वाला है। अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा इस पर तमाम न्यूज़ एजेंसियों से लेकर सोशल मीडिया में भी गहमा-गहमी शुरू है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगभग सबके दिमाग में यही प्रश्न था। मोदी और यूपी में योगी के बाद अब देश का अगला राष्ट्रपति भी राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से बनेगा, क्या मोहन भागवत देश के अगले राष्ट्रपति होंगे?

इन तमाम अटकलों के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मीडिया में चल रही इन ख़बरों पर विराम लगा दिया है। मोहन भागवत ने इन खबरों का पूरी तरह से खंडन करते हुए कहा कि ऐसी खबरें सिर्फ मनोरंजन के लिए होती हैं और इसे वहीं तक सीमित रखना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी 27 मार्च को कहा था कि राष्ट्रपति का पद देश में शीर्षतम पद है। इसलिए यह पद बेदाग छवि वाले किसी व्यक्ति को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा था कि हिंदू राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से मोहन भागवत राष्ट्रपति पद के लिए अच्छी पसंद होंगे, लेकिन उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने का फैसला उद्धव जी द्वारा किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा था कि हमने सुना है कि राष्ट्रपति पद के लिए भागवत के नाम पर विचार चल रहा है। गौरतलब है कि मोहन भागवत के नाम को लेकर शिवसेना के मुखपत्र सामना में भी संपादकीय छप चुकी है।