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Wednesday, August 12, 2026
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योगी सरकार ने मांगी प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की लिस्ट, जल्द ही होगी कार्यवाही!

Vector illustration of shocked male patient escaping from the doctor with a syringe.

अनुज हनुमत | Navpravah.com

लखनऊ में नई सरकार आने के साथ ही प्राइवेट प्रैक्टिस कर मोटी कमाई करने वाले सरकारी डॉक्टरों के अच्छे दिन खत्म होते दिख रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सरकार ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की लिस्ट प्रदेश के सभी सीएमओ से मांगी है।

आपको बता दें कि चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त सरकारी डॉक्टरों को किसी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा और स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा ने भी निर्देश दिए कि जिन डॉक्टरों के बारे में प्राइवेट प्रैक्टिस की जानकारी है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

बुधवार को यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने लखनऊ के केजीएमयू में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि डॉक्‍टरों को मरीजों के प्रति अधिक संवेदनशील होकर काम करना चाहिए और बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं ही हमारी सरकार का लक्ष्‍य हैं। योगी ने डॉक्‍टरों को पैसे की जगह सेवा के लिए काम करने की सीख दी थी। साथ ही उन्होंने डॉक्टर्स को मरीजों के साथ नरमी बरतने और बाहर प्रैक्टिस न करने की हिदायत दी।

सीएम योगी के इस संदेश के बाद से ही माना जा रहा था कि ऐसे डॉक्टरों पर गाज गिरना तय है। आपको बताते चले कि बीते कई महीनों से बुन्देलखण्ड के चित्रकूट धाम मंडल में कई सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते पकड़े गये थे। सबसे ज्यादा स्थिति चित्रकूट जिले की दयनीय है, जहाँ आये दिन डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मरीज अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। लेकिन अब लोगों को आशा है कि योगी सरकार में स्वास्थ्य सेवाएं अच्छी होंगी। आपको बताते चले कि सूबे में स्वास्थ्य विभाग की लचर और बदहाल व्यवस्था का सबसे बड़ा कारण यहाँ डॉक्टरों की भारी कमी है। अस्पतालों के नाम पर आपको सिर्फ इमारत ही नजर आएंगी, डॉक्टर बहुत कम संख्या में ही दिखेंगे।

RSS ने दलाई लामा को ‘भारत रत्न’ देने के लिए चलाया अभियान

दलाई लामा

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

तिब्बत के धर्मगुरु व नोबेल पुरस्कार विजेता दलाई लामा को लेकर भारत व चीन के बीच चल रहे विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग की है। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ ने 6 अप्रैल से देश के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान, ‘भारत रत्‍न’ के लिए दलाई लामा के पक्ष में एक अभियान शुरु किया है। इस अभियान के पक्ष में अब तक 5,000 हस्‍ताक्षर इकट्ठा किए जा चुके हैं। इस अभियान से अलग दलाई लामा को भारत रत्‍न दिए जाने को लेकर ऑनलाइन कैंपेन भी चल रहा है।

पश्चिमी कामेंग जिले के आरएसएस नेता ल्‍हुंदुप चोसांग ने यह अभियान शुरू किया है। उन्‍होंने कहा,”हमने अब तक 5000 हस्‍ताक्षर इकट्ठा किए हैं। 25,000 हस्‍ताक्षर हो जाने के बाद हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाएंगे।” चोसांग ने कहा कि हालांकि भारत रत्‍न, नोबेल शांति पुरस्‍कार से अलग है, मगर इस कदम से अंतर्राष्‍ट्रीय मंच पर सही संदेश जाएगा। उन्‍होंने कहा, ” दलाई लामा भारत रत्‍न के योग्‍य हैं, क्‍योंकि उन्‍होंने कहा है कि वह भारत के पुत्र हैं और इस महान देश के सबसे लंबे समय तक मेहमान रहकर सम्‍मानित महसूस करते हैं।”

चीन की नाराज़गी के बावजूद 5 अप्रैल को दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ पहुंचे थे। मठ में बौद्ध भिक्षुओं तथा श्रद्धालुओं ने उनका बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू तिब्बती धर्मगुरु के साथ थे। दलाई लामा के दौरे के मद्देनजर पूरे तवांग को भारत तथा तिब्बत के झंडों तथा फूलों के अलावा, रंगीन प्रार्थना झंडों से सजाया गया। सड़कों को रंगा गया और नालों की सफाई की गई। आपको बता दें कि यह मठ भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है।

दरअसल दलाई लामा तवांग से अरुणाचल प्रदेश का एक सप्ताह लंबा धार्मिक दौरा चार अप्रैल को ही शुरू करने वाले थे। लेकिन, खराब मौसम के कारण उन्हें सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि उनका हेलीकॉप्टर असम के डिब्रूगढ़ से उड़ान नहीं भर सका। दलाई लामा तवांग मैथ में ही ठहरे हैं। चीन व भारत की सीमा को विभाजित करने वाले मैकमोहन लाइन (वास्तविक नियंत्रण रेखा) से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तवांग में सुरक्षाबलों को चौकस रखा गया है।

शिवपाल पर पार्टी तोड़ने का आरोप, अखिलेश सुना सकते हैं सख़्त फैसला

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ समाजवादी पार्टी सख्त कार्रवाई कर सकती है। गुरुवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा के जिला व महानगर अध्यक्षों तथा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई।कई नेताओं ने पार्टी के खिलाफ साजिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर अखिलेश ने कहा, “गलतफहमी से पार्टी को नुकसान हो रहा है। लगता है, इसे दूर करने के लिए सख्त कदम उठाना पड़ेगा।” माना जा रहा है कि उनका इशारा शिवपाल की तरफ था।

प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम की अध्यक्षता में प्रदेश मुख्यालय के लोहिया सभागार में हुई बैठक में प्रदेश सचिव राजपाल सिंह ने पार्टी के खिलाफ साजिश करने वालों के खिलाफ प्रस्ताव रखा। शिवपाल का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में,और उसके बाद भी भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है कि कुछ वरिष्ठ नेता अलग पार्टी बना सकते हैं। इससे न सिर्फ अनुशासनहीनता फैलाने की कोशिश की जा रही है, बल्कि पार्टी की छवि को भी धक्का लग रहा है।

उन्होंने कहा, “महानगर व जिला अध्यक्ष तथा प्रदेश कार्यकारिणी अखिलेश यादव के सक्षम नेतृत्व में आस्था जताती है और उनकी अगुवाई में सपा के विस्तार के लिए कार्य करने का संकल्प लेती है।” सभी ने हाथ उठाकर प्रस्ताव का समर्थन किया। बैठक में सभी को सपा के संशोधित संविधान की प्रतियां भी दी गईं। इस दौरान रामगोविंद चौधरी, अहमद हसन, राजेंद्र चौधरी, बलराम यादव, अभिषेक मिश्र, अरविंद कुमार सिंह, राजकुमार मिश्र, डॉ. मधु गुप्ता, एसआरएस यादव, कर्नल सत्यवीर सिंह, डॉ. फिदा हुसैन अंसारी खास तौर पर मौजूद रहे।

चीन के टेढ़े रुख की वजह मात्र दलाई लामा नहीं, कई अन्य वजहें भी हैं!

दलाई लामा

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

एशिया के दो बड़े देश भारत और चीन के बीच पिछले तीन दिनों में तनाव का स्तर काफी बढ़ गया है। दोनों देश एक-दूसरे को लगातार धमकियां दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच छिड़े इस तनाव का कारण है दलाई लामा द्वारा अरुणांचल प्रदेश का दौरा। दलाई लामा का दौरा तो अभी का मामला है, लेकिन हाल के दिनों में पांच ऐसे बड़े मुद्दे हैं, जिन पर चीन और भारत जैसी बड़ी शक्तियां आमने-सामने हैं और तनाव किसी भी हद तक बढ़ सकता है।

दरअसल दोनों देशों के बीच विवाद दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश दौरे को लेकर शुरू हुआ था। इस दौरे को लेकर चीन ने आपत्ति जताई थी, लेकिन भारत ने साफ कहा था कि चीन हमारे अंदरूनी मामलों में दखल न दे। वहीं चीन ने कहा कि भारत के इस कदम से द्विपक्षीय संबंधों को भारी नुकसान पहुंचा है और सीमा पर भी तनाव और बढ़ सकता है। चीन ने दलाई लामा के मामले पर कश्मीर में दखल देने की धमकी भी दी है।

क्या हैं तनाव की अहम् वजहें-

-अरुणाचल और लेह में सीमा विवाद के चलते करीब 6 दशकों से भारत और चीन के बीच तनाव है, लेकिन दुनिया का शायद ये अकेला तनाव वाला बॉर्डर है जहां 1962 के युद्ध के बाद एक भी गोली नहीं चली है। दोनों देशों ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई मैकेनिज्म पर विचार किया लेकिन अब तक कुछ ठोस हल सामने नहीं आया है। पिछले साल लेह-लद्दाख में बॉर्डर में इलाकों को लेकर दोनों देशों के सैनिक कई दिनों तक आमने-सामने जमे रहे। हाल ही में ये बात भी सामने आई थी कि चीन अरुणाचल के तमांग के बदले अक्साईचिन पर अपना दावा छोड़ सकता है।

-आबादी में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और दुनिया की सबसे तेज ऊभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत, UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए पूरा जोर लगाए हुए है। इस राह में चीन सबसे बड़ा रोड़ा है। ठीक ऐसे ही एनएसजी की सदस्यता की भारत की कोशिशों में चीन लगातार बाधा बनता जा रहा है। ऐसे में विदेश नीति के मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच तनाव साफ है।

-54 बिलियन डॉलर की लागत से तैयार किए जा रहे चीन-पाकिस्तान के आर्थिक गलियारे को भारत साफ तौर पर अवैध मानता है, जबकि चीन इसे किसी भी कीमत पर पूरा करने पर अड़ा हुआ है। ये गलियारा गिलगित-बालटिस्तान से होकर गुजरता है, जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है और पाकिस्तान के अवैध कब्जे से छुड़ाने का ऐलान कर चुका है। वहीं चीन की शह पर पाकिस्तान गिलगित-बालटिस्तान को अपना पांचवां राज्य बनाने की कोशिश में है।

-मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड पाकिस्तानी आतंकी अजहर मसूद और हाफिज सईद पर प्रतिबंध लगाने की यूएन में भारत की कोशिशों को दो बार चीन रोक चुका है। चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो पावर है। भारत इस तरह की स्थितियों के मद्देनजर ही सुरक्षा परिषद जैसी संस्थाओं में सुधार की मांग कर रहा है।

स्लो इन्टरनेट स्पीड पर भी सरपट वीडियो दिखायेगा यूट्यूब का नया फीचर ‘यूट्यूब गो’!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

अब आपको धीमी इन्टरनेट स्पीड की वजह से यूट्यूब पर वीडिओज़ देखने के लिए अपना मन नहीं मारना होगा। धीमी नेट स्‍पीड पर अब आप यूट्यूब वीडियोज़ देख भी सकेंगे और अपने करीबी दोस्‍तों के साथ वीडियोज़ शेयर भी कर सकेंगे। इसके लिए कंपनी ने ‘यूट्यूब गो’ फीचर लॉन्च किया है, जो खासकर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए लॉन्‍च किया गया है। फिलहाल इसे ‘बेटा फेज’ में लॉन्‍च किया गया है।

बेटा फेज में लॉन्‍च करने का मतलब ये है कि इसमें बग्‍स आने की संभावना ज्‍यादा होती है। यूट्यूब ने बताया, “कई महीनों तक टेस्टिंग और सुधार करने के बाद हमने इसे लॉन्‍च किया है। फिलहाल हम इसे बेटा वर्जन में पेश कर रहे हैं। इसे गूगल प्‍ले स्‍टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। इसे भारत को ही ध्‍यान में रखकर लाया गया है।”

आपको बता दें कि ‘यूट्यूब गो’ को उन क्षेत्रों को ध्‍यान में रखकर लाया गया है, जहां इंटरनेट कनेक्‍शन काफी कमजोर चलता है। कंपनी ने पिछले साल सितंबर में इस फीचर की घोषणा की थी। रिलायंस जियो की एंट्री के बाद भारत में वीडियो कंजम्‍पशन काफी बढ़ गया, लेकिन साथ साथ नेटवर्क की दिक्कतें भी काफी बढ़ गईं। इस फीचर से यूट्यूब यूज़र्स को नेटवर्क की दिक्कतों को मात देने में सहायता मिलेगी।

कंपनी ने कहा कि यह ऐप आपको अपने डाटा यूसेज पर ज्‍यादा कंट्रोल देता है। इस दौरान वीडियो स्‍ट्रीमिंग के दौरान डाटा सेव किया जा सकता है। इस ऐप को पहले ऑफलाइन इस्‍तेमाल के लिए तैयार किया गया है। इसके बाद इसे धीमे नेटवर्क पर वीडियोज देखने के अनुरूप बनाया जाएगा। यूट्यूब ने कहा कि आने वाले महीनों में हम ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक ‘यूट्यूब गो’ को पहुंचाएंगे। इस दौरान यूजर्स से फीडबैक लेकर प्रोडक्‍ट को इंप्रूव किया जाएगा। इसके बाद अगले साल इसे पूर्णतः लॉन्‍च कर दिया जाएगा।

‘यूट्यूब गो’ पर यूजर किसी भी वीडियो को ऑफलाइन सेव करने से पहले उसका प्रीव्‍यू भी देख सकता है। उल्लेखनीय है कि 2014 में यूट्यूब ‘ऑफलाइन फीचर’ लाया गया था। इसके जरिए किसी भी वीडियो को ऑफलाइन सेव किया जा सकता है और डाटा बचाया जा सकता है। इसके अलावा कंपनी ने ‘स्‍मार्ट ऑफलाइन फीचर’ भी लाया था। इससे आपको वीडियो ऑफलाइन सेव करने के लिए टाइम चुनने का मौका दिया जाता है।

पाकिस्तानी मंत्री का दिवास्वप्न, घर मे अँधेरा लेकिन पड़ोसी मुल्क रोशन करने को बेताब

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

एक बड़ी मशहूर कहावत, “जेब में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने..” पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पर एकदम सटीक बैठती है। पाकिस्तान के पंजाब में खुद बिजली आपूर्ति एक बड़ी समस्या है। उस पर वहाँ के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ अपने चुनावी भाषणों में भारत को बिजली बेचने की बात कह रहे हैं।

बिजली की समस्या पर बोलते हुए शरीफ अक्सर दावे करते हैं कि दो-एक साल में बिजली की समस्या को न सिर्फ समाप्त कर दिया जाएगा, बल्कि इतना बिजली उत्पादन किया जाएगा कि भारत में पीएम मोदी को भी हम बिजली देंगे। पाकिस्तानी मीडिया ने इस पर जवाब दिया है कि पहले पहले हमें तो बिजली दे दो!

भारत को बिजली देने के शरीफ के इन दावों पर भारत को कोई टिप्पणी करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि खुद पाकिस्तानी मीडिया ने उन्हें बड़ी शराफत से करारा जवाब दे दिया है। पाकिस्तान मीडिया चैनल्स के अनुसार, एक दिन में 18 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। ऐसे में पाकिस्तान मीडिया कह रही है कि पहले बिजली हमें ही दे दो, भारत को बाद में देना।

शाहबाज शरीफ कहते हैं कि अगर बिजली नहीं आई, तो नाम बदल दीजियेगा। अब वहाँ पाकिस्तान में चुटकी ली जा रही है कि शाहबाज शरीफ का नया नाम क्या रखा जाये! आपको बता दें कि पाकिस्तान में बिजली की स्थिति बेहद खराब है।

वादों पर खरी उतरी योगी सरकार, किसानों व राज्य के हित में लिए कई अहम् फैसले

New Delhi : Chief Minister of Uttar Pradesh, Yogi Adityanath arrives at Parliament in New Delhi on Tuesday.PTI Photo by Subhav Shukla(PTI3_21_2017_000063B)

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

भारतीय जनता पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतने के बाद से ही वहाँ की जनता इस आस में बैठी थी कि किसानों की क़र्ज़ माफ़ी के संबंध में राज्य सरकार द्वारा कब और क्या फैसला लिया जायेगा। मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने आज अपनी पहली कैबिनेट बैठक में किसानों के हित में कई अहम फैसले लिए। उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों का एक लाख रुपए तक का ऋण माफ कर दिया है। इसके अतिरिक्त बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि सरकार प्रदेश में किसानों से 80 लाख मैट्रिक टन गेहूं की खरीद करेगी और मांग के अनुसार जिलों में ‘खरीद केंद्र’ खोले जाएंगे।

बैठक में सरकार द्वारा लिए गए अहम् फैसले कुछ इस प्रकार हैं-

-राज्य के 2 करोड़ 15 लाख लघु और सीमांत किसानों का 30729 करोड़ कर्जा माफ किया गया है। 7 लाख किसानों को 5630 करोड़ रुपए का एनपीए माफ किया गया है।

-आलू के किसानों को राहत पहुंचाई जाएगी। आलू खरीद के लिए तीन लोगों की कमेटी बनेगी।

– सरकार 80 लाख मैट्रिक टन गेंहू खरीदेगी। 5000 ‘गेहूं खरीद केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें मंत्रियों द्वारा मॉनिटर किया जाएगा। समर्थन मूल्य का पैसा सीधा किसानों के खाते में जाएगा, जिससे बिचौलिए खत्म हो जायेंगे।

–  योगी सरकार किसान राहत बॉन्ड की शुरुआत करेगी।

– अवैध बूचड़खानों को बंद किया जाएगा। बूचड़खानों के लाइसेंस देखकर रिन्यू किए जाएंगे। अब तक राज्य के 26 अवैध बूचड़खाने बंद किए गए हैं।

-‘ऐंटी रोमियो दस्ता’ थाना स्तर पर बनाया गया है। यह दस्ता अधिकारियों से ब्रीफिंग लेकर निकलता है। बैठक में लिए फैसले के अनुसार प्रेमी जोड़े को परेशान नहीं किया जायेगा। कपल को परेशान करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने वाले लफंगों के खिलाफ ‘ऐंटी रोमियो दस्ता’ कड़ी कार्रवाई करेगा।

-रोजगार के लिए युवाओं को बाहर ना जाना पड़े, इसके लिए काम होगा। मंत्रियों का एक समूह अलग-अलग राज्यों में जाकर वहां की उद्योग नीतियों को समझेगा। राज्य में सिंगल विंडो नीति का निर्माण किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में ये मंत्रियों का समूह बनेगा। पूंजी निवेश पर जोर दिया जायेगा।

-सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को संवैधानिक दर्जा देगी।

-अवैध खनिज कारोबार पर जीओएम बनेगा।

-गाजीपुर में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनेगा।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को अधिकारियों और कैबिनेट के सहयोगियों के साथ 8 घंटे की मैराथन मीटिंग में सीएम योगी ने तमाम विभागों की योजनाओं के ब्लू प्रिंट पर चर्चा की और काम का टारगेट तय किया। बैठक में यांत्रिक बूचड़खानों पर रोक लगाने का फैसला किया गया। कैबिनेट बैठक के बाद यूपी सरकार में मंत्री श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह ने मीडिया को संबोधित कर तमाम अहम् फैसलों का संक्षिप्त विवरण दिया।

‘सुपर एडवांस्ड’ सिक्योरिटी फीचर के साथ जारी होंगे 200 रुपये के नोट!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

नोटबंदी के बाद बाजार में आयी 2000 की करारी गुलाबी नयी नोटों के बाद अब भारतीय रिज़र्व बैंक जल्द ही 200 रुपये की नोट जारी करने जा रहा है। जी हां! आरबीआई ने 200 रुपये के नए नोट लाने की तैयारी शुरू भी कर दी है। सूत्रों के अनुसार आरबीआई ने 200 रुपये छापने की मंजूरी दे दी है और इन नए नोटों में सुरक्षा फीचर का भी अधिक ध्यान दिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार 200 रुपये के नोट पर सुरक्षा के खास फीचर होंगे ताकि इसका नकली नोट नहीं बनाया जा सकें।
इसके अलावा सरकार 500 और 2000 रुपए के बैंक नोटों के सुरक्षा फीचर में हर 3-4 साल में बदलाव करने के विषय में भी सोच रही है ताकि जाली नोटों की समस्या पर लगाम लगाई जा सके। दरअसल सरकार ने नोटबंदी के बाद पिछले चार महीने में भारी मात्रा में जाली मुद्रा पकड़ने जाने को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है।

सूत्रों के अनुसार गृह और वित्त मंत्रालय के अफसरों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। इस कदम का समर्थन करते हुए गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि ज्यादातर विकसित देश अपने मुद्रा नोटों में सुरक्षा फीचर हर 3-4 साल में बदल देते हैं। भारत के लिए भी इस नीति का पालन करना अनिवार्य है। अधिकारियों का कहना है कि 2000 और 500 रुपये के नये मुद्रा नोटों में भी अतिरिक्त सुरक्षा फीचर नहीं हैं। हाल ही में पकड़े गए जाली नोटों में पाया गया है कि 17 सुरक्षा फीचर में से कम से कम 11 की नकल की गई है।

आपको बता दें कि भारतीय नोटों के डिजाइन में बदलाव लंबे समय से लंबित है। वर्ष 2000 में 1000 रुपए का नोट पेश किया गया था तथा उसके बाद नोटबंदी तक उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। वहीं 1987 में पेश 500 रुपए का नोट पेश किया और उसमें बदलाव एक दशक पहले किया गया था।

‘ट्राई’ ने किया खुलासा, ‘JIO’ की डाउनलोड स्पीड ‘Airtel’ और ‘Idea’ से दुगुनी!

FREE दे रहा है
FREE दे रहा है

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

टेलिकॉम रेग्‍युलेटर अथॉरिटी ‘ट्राई’ (TRAI) ने इस बात का खुलासा किया है कि’ रिलायंस जियो’ अपने सबसे करीबी प्रतियोगी’ आइडिया सेलुलर’ और ‘एयरटेल’ से करीब दोगुनी डाउनलोड स्‍पीड दे रहा है। हालांकि फरवरी के मुकाबले जनवरी में जियो की डाउनलोड स्पीड में कमी आयी है, लेकिन अन्य कंपनियों के मुकाबले यह स्पीड दुगुनी ही रही।

ट्राई के आंकड़ों के अनुसार फरवरी में जियो की डाउनलोड स्‍पीड 16.48 एमबीपीएस रही। जनवरी में यह 17.42 एमबीपीएस थी। इसके बावजूद वह महीने के दौरान सबसे तेज स्‍पीड वाला नेटवर्क बना हुआ है। जियो की मौजूदा 4जी स्‍पीड पर एक मूवी 5 मिनट से भी कम समय में डाउनलोड किया जा सकता है। ट्राई के अनुसार, फरवरी में आइडिया सेलुलर की डाउनलोड स्‍पीड 8.33 एमबीपीएस और एयरटेल की 7.66 एमबीपीएस दर्ज की गई।

ट्राई की ओर से फरवरी माह के लिए जारी किए गए आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं-

रिलायंस जियो -16.48 एमबीपीएस

आइडिया सेलुलर – 8.33 एमबीपीएस

भारती एयरटेल – 7.66 एमबीपीएस

वोडाफोन – 5.66 एमबीपीएस

बीएसएनएल – 2.01 एमबीपीएस

रिलायंस कम्‍युनिकेशंस – 2.67 एमबीपीएस

टाटा डोकोमो – 2.52 एमबीपीएस

एयरसेल – 2.01 एमबीपीएस

ट्राई के आंकड़ों के अनुसार, आइडिया, एयरटेल ही नहीं, वोडाफोन व बीएसएनएल की डाउनलोड स्‍पीड में भी जनवरी के मुकाबले गिरावट आई है। वोडाफोन की डाउनलोड स्‍पीड जनवरी के 6.13 एमबीपीएस से घटकर 5.66 एमबीपीएस और बीएसएनएल की जनवरी के 2.89 एमबीपीएस से घटकर 2.01 एमबीपीएस रह गई। वहीं, रिलायंस कम्‍युनिकेशंस, टाटा डोकोमो और एयरसेल नेटवर्क पर फरवरी के अंत में डाउनलोड स्‍पीड क्रमश: 2.67 एमबीपीएस, 2.52 एमबीपीएस और 2.01 एमबीपीएस रही।

आपको बता दें कि ट्राई देश भर में रीयल  टाइम बेसिस पर ‘माय स्‍पीड अप्‍लीकेशन’ की मदद से देशभर के सब्‍सक्राइबर्स से मोबाइल डाटा स्‍पीड कलेक्‍ट करता है और उनका आकलन करता है। ट्राई की ओर से फरवरी का मं‍थली एवरेज डाउनलोड मोबाइल ब्रांडबैड स्‍पीड डाटा जारी किया गया है। डाउनलोड स्‍पीड को लेकर टेलिकॉम कंपनियों में लंबे समय से झगड़ा चल रहा है। जियो और एयरटेल देश का सबसे तेज नेटवर्क होने का दावा करते आ रहे हैं।

सरकार आरटीआई नियमावली में कर रही बदलाव, आम जनता से मांगे सुझाव

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

केंद्र सरकार तमाम सामाजिक व सार्वजनिक मुद्दों पर आम जनमानस के सुझाव लेकर और अपने नियमों में सुधार या बदलाव कर, सही मायने में आम जनता की सरकार साबित हो रही है। केंद्र सरकार ने ‘सूचना का अधिकार’, यानी राईट टू इंफॉर्मेशन (आरटीआई) के तहत शिकायत और अपील करने के लिए नए नियम बनाए हैं, साथ ही नए नियमों के मसौदे को लेकर आम लोगों से राय मांगी गई है। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) की वेबसाइट पर अपलोड किए गए इन नियमों पर कोई भी व्‍यक्ति 15 अप्रैल तक अपने सुझाव दे सकता है।

सरकार के प्रस्‍तावित बदलाव के मुताबिक सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (सीआईसी)  को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह किसी भी शिकायत को दूसरी अपील का दर्जा दे सकता है। अर्थात आरटीआई एक्‍ट में जो व्‍यक्ति शिकायत वाली धारा के तहत आ गया है, सीआईसी उसे भी सूचना देने का आदेश दे सकती है। पहले ये व्‍यवस्‍था नहीं थी।

अन्य प्रस्तावित बदलाव-

-अपील करने वाले को नए नियमों के अनुसार यह अधिकार भी दिया जायेगा कि वह चाहे तो कमीशन की इजाजत से अपील वापस ले सकता है। लेकिन यह तब नहीं हो सकेगा, जब आरटीआई पर फैसला ले लिया गया हो।

-आरटीआई दायर करने के बाद अपील करने वाले व्‍यक्ति के पास शिकायत दर्ज करने के लिए 135 दिनों का समय रहेगा। उसे इसी दौरान अपनी शिकायत को कमीशन के पास रखना होगा।

-रूल्‍स में यह प्रावधान भी किया गया है कि शिकायतकर्ता को सीआईसी के पास जाने से पहले शिकायत व अपील की कॉपी सेंट्रल पब्लिक इंफोर्मेशन ऑफिसर (सीपीआईओ) में पेश करनी होगी। इसका एक प्रूफ भी कमीशन के पास सब्मिट करना होगा।

-अपीलकर्ता को कमीशन को यह भी डिक्‍लेर होगा कि जिस मैटर की वह शिकायत कर रहे हैं, उस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है या फिर वह कोर्ट में पेंडिंग है।

 -प्रस्तावित नियमों के मुताबिक अपील दायर करने वाले की मौत होने पर उस आरटीआई का प्रोसेस रद्द कर दिया जाएगा। यानी इस पर आगे कुछ नहीं किया जाएगा।

दूसरी तरफ आरटीआई नियमों में बदलाव के लिए सरकार की तरफ से कोई भी आधिकारिक जानकारी जारी न किए जाने से एक्टिविस्‍ट नाराज हैं। आरटीआई एक्टिविस्‍ट कमोडोर लोकेश बत्रा ने कहा, “सुझाव देने के लिए जो समय सरकार की तरफ से दिया गया है, वह काफी कम है। इसके अलावा कोई ऑफिशियल प्रेस रिलीज भी सरकार की तरफ से जारी नहीं की गई है। ऐसे में लोगों को कैसे पता चलेगा कि ऐसी कोई चीज डीओपीटी की वेबसाइट पर डाली गई है!”