राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (NDRF) मुख्यायलय में तनाव का माहौल बन गया, जब पता चला कि प्रबंधन बल के लगभग पचास जवान कोरोना वाइरस से संक्रमित हैं। ओडिशा के कटक में तैनात इन जवानों को ओडिशा से पश्चिम बंगाल अम्फान तूफान के दौरान वहाँ राहत एवं बचाव कार्य के लिए भेजा गया था।
गत माह चक्रवाती तूफान अम्फान की वजह से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी त्रासदी देखी गई। तूफान में राहत और बचाव कार्य के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल को ओडिशा से पश्चिम बंगाल भेजा गया था, ताकि राहत कार्य यथाशीघ्र संपन्न कर लिया जाए। इसलिए जवानों को कटक से पश्चिम बंगाल भेजा गया। राहत कार्य से लौटने के बाद कुछ जवानों की तबियत खराब होने की सूचना मिली।
In view of inquiries it is informed that on testing of #NDRF personnel in Odisha after return from #CycloneAmphan duties 50 were found positive of nearly 190 personnel tested for COVID19. So far all these personnel are asymptomatic & under observation. @NDRFHQ@ndmaindiapic.twitter.com/KoAZ1Oi6pr
— ѕαtчα prαdhαnसत्य नारायण प्रधान ସତ୍ଯପ୍ରଧାନ-DG NDRF (@satyaprad1) June 8, 2020
पश्चिम बंगाल से लौटे इन जवानों की तबियत की जानकारी मिली, तब इनकी जांच कराई गई, तब पता चला कि लगभग पचास जवान कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। इसकी जानकारी मिलने के बाद विभाग में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया, जिसके बाद लगभग १९० जवानों की जांच कराई गई।
भारत भूमि हमेशा संस्कृतियों के संगम का द्योतक रही है और यहां की सहिष्णुता और सम्मिलित होने की भावना इतनी प्रबल रही है कि यहां हर काल में सभी शाश्वत दिशाओं से आने वाली हर सार्थक प्रवृत्ति , हर सुन्दर भाषा और हर रचनात्मक दृष्टिकोण का स्वागत हुआ है। भारत जैसे देश में , जिसने सबसे पहले वसुधैव कुटुम्बकम की बात कही, समय और राजनीति ने कई बार कोलाहल पैदा किया। निजी स्वार्थ और परिवारवाद की जड़ें इतने अंदर तक चली गयीं की परिस्थितियों के रूप में जो फल निकले, वे विषाक्त थे।
1980 का दशक वो दशक था जब पूरा विश्व वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सहारे एक नए युग का स्वागत कर रहा था या करने की तैयारी कर रहा था। लेकिन भारत में परिस्थितियां सामान्य नहीं थी। राजनैतिक उथल-पुथल ने माहौल बिगाड़ दिया था और इस देश के अभिन्न अंग भी अपने को अलग-थलग पा रहे थे। ऐसे में आवश्यकता थी एक ऐसी प्रस्तुति की, जो ये याद दिला सके कि हम सब एक हैं। दूरदर्शन ही एक ऐसा माध्यम था जिसके सहारे एक बार में बात दूर तक कई लोगों तक एक साथ पहुंचाई जा सकती थी। दूरदर्शन ने इस ज़िम्मेदारी को समझा और उस पूरी पीढ़ी को उपहार स्वरुप एक गीत मिला जिसने न केवल देशप्रेम और एकता की भावना को प्रबल किया, हमारी स्मृतियों का एक हिस्सा बन कर हृदय के एक कोने में हमेशा के लिए स्थित हो गया।
पं. भीमसेन जोशी
गीत था “मिले सुर मेरा तुम्हारा”, इसके शब्द , श्री पीयूष पांडेय के थे और श्री अशोक पटकी ने इसे राग भैरवी पर आधारित किया , क्योंकि यही पंडित भीमसेन जोशी जी की इच्छा थी। राग भैरवी को वैसे भी सदा सुहागन राग कहा जाता है और किसी भी मंगल भावना को इसमें लयबद्ध करना प्रभावकारी होता है। लुइ बैंक्स ने इसे व्यवस्थित करने की ज़िम्मेदारी ली और अपने अत्यंत प्रशंसनीय कौशल से एक सुन्दर गीत बनाया।
मंगलमपल्ली बालमुरलीकृष्णा
इस गीत को लोक सेवा संचार परिषद् के संरक्षण में बनाया गया और 17 गीतों को नकार कर श्री पीयूष पांडेय को चुना गया।
“ऐसा प्रचलित है कि तत्कालीन प्रधानमन्त्री स्वर्गीय श्री राजीव गाँधी ने जयदीप समर्थ के साथ इस गीत को रचने के लिए कलाकारों को प्रेरित करने की योजना बनाई थी। ये बिलकुल संभव है क्योंकि पंजाब की स्थिति बहुत खराब रही थी 1984 के बाद और इसे संभालने के लिए ऐसा कुछ करना आवश्यक भी था। सुरेश मल्लिक और कैलाश सुंदरनाथ ने मिलकर इस से पहले “टॉर्च ऑफ फ्रीडम ” भी 1985 में, इसी उद्देश्य से बनाया था।”
इस बार भी ज़िम्मेदारी इन्हे ही दी गयी। भारतीय शास्त्रीय संगीत के पुरोधा पंडित भीमसेन जोशी जी से इस गीत की शुरुआत की गयी और वहीं इसे शूट किया गया जहां मशहूर लिरिल का प्रचार बनाया गया था यानि कि पाम्बर जलप्रपात के पास, जिसे अब लिरिल जलप्रपात के नाम से भी जाना जाता है। इस गीत के लिए जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से महान और प्रसिद्ध लोगों को चुना गया और उत्तर से लेकर सुदूर दक्षिण तक के सभी प्रसिद्ध चेहरों और भाषाओं को अंग्रेजी वर्णमाला के हिसाब से क्रमवार तरीके से प्रस्तुत किया गया। गीत के बोल हर भाषा में यही कहते थे, “मिले सुर मेरा तुम्हारा “।
चूंकि सिनेमा भी एक सशक्त माध्यम बन चुका था तब तक, तो उसमे काम करने वाले कलाकारों से भी सम्मिलित होने का आग्रह किया गया। सबने इस आमंत्रण को स्वीकार किया, नसीरुद्दीन शाह के अलावा।
पाम्बर नदी स्थित ‘लिरिल जलप्रपात’, कोडईकैनाल
कमाल हसन के साथ दक्षिण के और बहुत से प्रसिद्ध चेहरे इस गीत की प्रस्तुति का हिस्सा बने। इस गीत को 1988 में स्वतन्त्रता दिवस के दिन पहली बार प्रसारित किया गया। 2010 में दोबारा, “फिर मिले सुर मेरा तुम्हारा” नाम का एक गीत बनाया गया और इस बार महान संगीतकार ए०आर०रहमान ने संगीत दिया। सब कुछ सुन्दर था लेकिन 1988 में प्रसारित “मिले सुर मेरा तुम्हारा” आज भी हम सब की स्मृतियों में जीवित है।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लागू है, अभी तक 256611 व्यक्ति संक्रमित हो गये हैं और 7135 लोगों की मौत हो गयी है, पर वहीं बिहार में विधानसभा चुनाव और गुजरात में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक उठा-पटक जारी है।
बिहार में लॉकडाउन के बीच सभी पार्टियों ने प्रचार करना शुरू कर दिया है, इस बात को लेकर बॉलीवुड के मशहूर एक्टर प्रकाश राज ने ट्वीट किया है कि, ‘प्रवासी पैदल चल सकते हैं, मध्यवर्ग शांति से मर सकता है, अर्थव्यवस्था चौपट हो सकती है, लेकिन राजनैतिक दल, बिहार में अपना चुनाव प्रचार करने में व्यस्त हैं।’
प्रकाश राज ने अपने ट्वीट में गुजरात की राजनैतिक स्थिति पर भी निशाना साधा है, उनका यह ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, उन्होंने गुजरात चुनाव को लेकर ट्वीट किया कि, ‘गुजरात में विधायकों को रिसॉर्ट में शिफ्ट किया जा रहा है, जो चीज वे अच्छे से कर सकते हैं, वे कर रहे हैं।’
वहीं, गुजरात में 19 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले ही सियासी हलचल तेज हो गई है, तीन विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस पार्टी पूरी तरह सतर्कता बरत रही है, ताकि आने वाले चुनाव में वे जीत हासिल कर सके।
बता दें कि, प्रकाश राज ने बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग से लोगों का दिल जीता है, और लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की मदद करने की भी पूरी-पूरी कोशिश की है, साथ ही अपने बेबाक बातों से भी ये चर्चा में बने रहते हैं।
ऋषिमम प्रोडक्शन एवं उनके सहयोगी (एसोसिएट पार्टनर) चम्बल सिने प्रोडक्शन के द्वारा अभिनेता निर्मल पाण्डेय की स्मृति में ऑनलाइन लधु व वृत फ़िल्म फेस्टिवल का आयोजन होने जा रहा है।
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निर्मल पाण्डेय बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता थे, जिन्होंने रंगमंच के साथ साथ फ़िल्म इंड्रस्ट्री में बहुत ही उल्लेखनीय काम किये। अच्छे कलाकार होने के साथ ही वो अच्छे गायक भी थे। सबसे बड़ी बात वो एक ज़िंदादिल इंसान थे।
स्व. निर्मल पाण्डेय की याद में उनके जन्मदिन 10 अगस्त को “निर्मल पाण्डेय स्मृति शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2020” का ऑनलाइन आयोजन पहली बार होने जा रहा है। इस फेस्टिवल को करने के पीछे ये उद्देश्य है कि निर्मल भाई हमेशा नई प्रतिभाओं की मदद करते थे और वो चाहते थे कि नई प्रतिभाओं को आगे लाना चाहिए। इस फेस्टिवल के माध्यम से हम उनके इस सपने को साकार करने का प्रयास करेंगे।
रवींद्र चौहान ने नवप्रवाह से हुई बातचीत में यह स्पष्ट किया कि इस फेस्टिवल में चुनी हुई शॉर्ट फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को डिजिटल प्रदर्शन के साथ सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही फिल्म जगत से जुड़ी किसी एक हस्ती को लाईफटाईम एचीवमेंट अवॉर्ड के सर्टिफिकेट से सम्मानित करेंगे।
फिल्मों की स्क्रीनिंग 7,8 व 9 अगस्त को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी। 10 अगस्त को विजेताओं के नाम घोषित किये जायेगें। फ़िल्म एन्ट्री निःशुल्क है।
इस फेस्टीवल के ज्यूरी जज आभा परमार (जानी मानी फ़िल्म एवं टेलीविजन अभिनेत्री) डॉ कुमार विमलेन्दु सिंह (नवप्रवाह के स्तम्भकार, जाने माने साहित्यकार और शिक्षाविद) , सुनील मिश्रा (समालोचक : फ़िल्म और संस्कृति), सादिया सिद्दीकी (सुप्रसिद्ध फ़िल्म एवं टेलीविजन अभिनेत्री) आरिफ शहडोली (अभिनेता एवं निर्देशक) और अशोक मेहरा (अभिनेता एवं निर्देशक) हैं।
फेस्टिवल के संस्थापक एवं फेस्टिवल निदेशक अनिल दुबे, सह संस्थापक एवं फेस्टिवल सहायक रवीन्द्र चौहान, फेस्टीवल मैनेजर व संस्थापक सदस्य कनुप्रिया, संस्थापक सदस्य व सलाहकार मिथलेश पाण्डेय, टेक्निकल हेड ऋत्विक ऋषभ, मीडिया हेड कविता गाँधी, प्रोग्राम सहायक प्रशान्त पचौरी, डिज़ाइन कंसलटेंट ईशा दुबे सहयोगी की भूमिका में है।
फ़िल्म फेस्टिवल में बतौर मीडिया पार्टनर नवप्रवाह व अन्य कई मीडिया ग्रुप शामिल हैं।
फेस्टिवल मैनेजर एवं संस्थापक सदस्या कनुप्रिया ने फ़िल्म फेस्टिवल से जुड़े मीडिया पार्टनर्स के नामों सहित पोस्टर को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जारी करते हुए बताया कि प्रिन्ट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समाज का आईना है। मीडिया के माध्यम से लोगों को देश की हर गतिविधियों की जानकारी मिलती है, साथ ही उनका मनोरंजन भी होता है। किसी भी देश में जनता का मार्गदर्शन के साथ यह सरकार एवं जनता के बीच एक सेतु का कार्य करता है । जनता की समस्याओं उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचता है।
कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन है, और इसकी वजह से बड़े पैमाने में प्रवासी मजदूर शहरों से गांव की ओर पलायान करने पर मजबूर हो गये हैं, अब सरकार इन मजदूरों के लिए बड़ी योजना की तैयारी में है।
देश भर के ऐसे 116 जिलों की पहचान की गयी है, जहां सबसे अधिक श्रमिक वापस आए हैं, ये जिले 6 राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओड़िसा और राजस्थान में हैं। केंद्र सरकार की तरफ से चयनित 116 जिलों में सबसे ज्यादा 32 जिले बिहार के हैं, उसके बाद उत्तर प्रदेश के 31 जिले, मध्यप्रदेश के 24, राजस्थान के 22 जिले, झारखंड के 3 और ओड़िसा के 4 जिले हैं, इन जिलों के प्रवासी मजदूर अपने खाने-कमाने का जरिया गवां चुके हैं।
सरकार की इस योजना के अनुसार, अपने राज्यों और गांवों को लौटे मजदूरों के पुनर्वास और रोजगार के लिए इन 116 जिलों में केंद्र सरकार की सामाजिक कल्याण और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीमों को तेजी से मिशन मोड में चलाया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि घर लौटे श्रमिकों के लिए आजीविका, रोजगार और गरीब कल्याण सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके, इन जिलों में मनरेगा, जनधन योजना, किसान कल्याण योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, पीएम आवास योजना, कौशल विकास समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत मिशन मोड में काम किया जायेगा।
जम्मू-कश्मीर के शोपियां ज़िले में सुरक्षा बालों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शोपियां में चल रही मुठभेड़ में पुलिस बल और सुरक्षा बल के जवान जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। इस मुठभेड़ में सुरक्षा बल के जवानों ने चार आतंकियों को ढेर कर दिया है, जबकि तीन सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। पिछले 24 घंटे में सुरक्षाबलों ने कुल मिलाकर नौ आतंकवादियों को ढेर कर दिया है।
घाटी में अशांति फैलाने के लिए पाकिस्तान लगातार नापाक हरकतें करने में जुटा हुआ है। लेकिन पाकिस्तान के इस मंसूबे को भारतीय सुरक्षा बालों के जवान कामयाब नहीं होने दे रहे हैं, लगातार आतंकियों को ढूंढ-ढूंढ कर मौत के घात उतार रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में एक बार फिर भारतीय सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है।
भारतीय सुरक्षा बल को खुफिया जानकारी मिली थी कि शोपियां इलाके में कुछ आतंकी छिपे हैं, जिसके बाद सुरक्षा बल ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। सुरक्षाबल के जवान इलाके की छानबीन कर रहे हैं।
गौरतलब है कि रविवार को भी दक्षिण कश्मीर में शोपियां के रेबन इलाके में पांच आतंकियों के छुपे होने की खबर मिली थी। सूचना के आधार पर भारतीय सुरक्षाबलों ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त टीम बनाई और इलाके की घेराबंदी कर दी। भारतीय जवानों की ओर से चलाए गए सर्च ऑपरेशन से इलाके में छुपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई। हालांकि काफी देर चली फायरिंग के बाद दो कमांडरों सहित पांच आतंकवादी मारे गए।
लोकतंत्र मे, शासन एक ऐसी अवस्था का नाम है, जिसे ग्रहण करते ही कोई भी व्यक्ति, समूह या संगठन, सामान्यता का प्रतीक और प्रतिनिधि दोनों एक साथ हो जाता है। ऐसे में ये आवश्यक हो जाता है कि जिनका प्रतिनिधित्व हो रहा है, यानि कि जनता , समय समय पर ये जाने और जांचे कि , जो हो रहा है या किये जाने की योजना बन रही है , वो किस सीमा तक, सार्थक होगी उनके लिए। सामान्यता का प्रतीक होने के बाद भी सत्ता धारण करने वाले लोग स्वयं को विशेष मानने लगते हैं और बहुत बदल जाता है उनका व्यवहार।
मनोहर श्याम जोशी
कई बार तो ये इतना ज़्यादा आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय हो जाता है कि लगता ही नहीं , ये हमारे प्रतिनिधि हैं, बात शासक और शासित वाली स्थिति में पहुँच जाती है। ऐसी स्थिति में ये बताना आवश्यक हो जाता है कि जो हो रहा है या किया जा रहा है, वो सही नहीं है और सबसे सुन्दर और प्रभावकारी माध्यम होता है साहित्यिक चित्रण, इन परिस्थितियों का। अगर ऐसी प्रस्तुतियों में हास्य को एक उपकरण के रूप में लाया जाए तो बात दूर तक और बहुत लोगों तक पहुंचा पाने की संभावना अधिक होती है।
“ब्रिटेन में 1980 से 1984 तक BBC पर एक सिटकॉम प्रसारित किया गया और उसका नाम था, “Yes Minister ” और उसमें ऐसी राजनैतिक परिस्थितियों और भ्रष्टाचार को दिखाया जाता था हास्य पर आधारित कर के। इस से यथास्थिति का चित्रण भी हो जाता था और लोग अवगत भी होते थे कि उनके देश के शासन तंत्र में क्या अच्छी या बुरी बातें हैं।”
उसी समय भारत के तत्कालीन सूचना और प्रसारण सचिव एम०एस०गिल ने साहित्यकार मनोहर श्याम जोशी जी से कहा कि कुछ ” Yes Minister ” जैसा ही वे लिखें और इसे दूरदर्शन पर दिखाया जाए।
मनोहर श्याम जोशी की मूल व्यंग्य रचना ‘नेताजी कहिन’ (PC-Rajkamal Prakashan)
जोशी जी ने लिखा भी, लेकिन गिल साहब के रिटायर होते ही कहा गया कि , दूरदर्शन ये नहीं दिखा सकता। जोशी जी ने दुबारा लिखा और इस बार अपनी लेखनी के शीर्षक से, “मंत्री” शब्द हटा दिया और उसकी जगह “नेता ” लिख दिया। लेकिन इतना भी पर्याप्त न था। इसके दो पायलट को नकार दिया गया और जब इजाज़त मिली तो “नेता जी” को “कक्का जी” करवा दिया गया।
एक दृश्य में ‘ओम पुरी’
मनोहर श्याम जोशी के विख्यात स्तम्भ लेख, “नेता जी कहिन ” पर ये धारावाहिक आधारित अवश्य था और इसे प्रसारित करने की अनुमति भी मिल गयी 1988 में , लेकिन बहुत सारी बाधाओं के साथ। इस धारावाहिक का निर्देशन बासु चटर्जी ने किया था और लेखन पूरी तरह से मनोहर श्याम जोशी जी का ही था।
शैल चतुर्वेदी
इस धारावाहिक में दिग्गज अभिनेता ओम पूरी और प्रसिद्द हास्य कवि शैल चतुर्वेदी जी थे। दोनों का अभिनय शानदार रहा और हर उम्र, हर वर्ग के लोगों ने इसे पसंद किया। एक तो वैसे ही इसके शुरू होने में बहुत सी बाधाएं थीं और जब ये शुरू भी हुआ तो मात्र कुछ एपिसोड के बाद, ये कह कर इस धारावाहिक को बंद करा दिया गया कि इसमें नेताओं को बदनाम किया जा रहा है। ये बात बहुत आश्चर्यजनक है कि हमारा देश जहां अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता को लेकर इतने वक्ता उभर कर आये हैं, उस दौर में , इनमे से एक भी न हो पाया।
“कक्काजी कहिन ” को बहुत जल्दी बंद कर दिया गया लेकिन उसकी स्मृतियाँ आज भी लोगों को गुदगुदाती हैं।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
देश में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। ख़बर लिखे जाने तक 246628 मामले सामने आये हैं, इनमें से 6929 मौतें हो चुकी हैं। अब कोरोना कम्युनिटी ट्रांसमिशन की तरफ बढ़ चुका है, इसी बीच पुडुचेरी में कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शव के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया है।
एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सरकारी कर्मचारी कोरोना संक्रमित मरीज़ के शव को एक गड्ढे में फेंकते हुए नजर आ रहे हैं, इस वीडियो को देखने के बाद लोगों में आक्रोश है, हालांकि प्रशासन ने मामले के जांच के आदेश दिए हैं।
इस वीडियो के अनुसार, पीपीई किट पहने चार लोग एंबुलेंस से एक शव को निकालते हैं और कब्र में फेंक देते हैं, 30 सेकंड के बाद एक व्यक्ति सरकारी अधिकारी से कहता है कि, उन्होंने ‘शव को फेंक’ दिया है, जिसके बाद अधिकारी अंगूठा दिखाता है।
वीडियो में साफ पता चल रहा है कि, कर्मचारियों ने कोरोना संक्रमित शव को संभालने के दौरान अपनाए जाने वाले कई प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। मृतक व्यक्ति को एक सफेद कपड़े में लपेटा गया है, जो कि ग़लत है, क्योंकि इस तरह के मामले में शव को बैग में रखना अनिवार्य है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, शव को दफ़न करने का जिम्मा राजस्व विभाग के अधिकारियों को दिया गया था। पुडुचेरी के कलेक्टर अरुण ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं, उन्होंने एक निजी चैनल से कहा कि, ‘मैंने संबंधित विभाग को मेमो जारी किया है, यह सही नहीं हुआ है, मैं इस मामले में जांच कर रहा हूं।’
रविवार को केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बिहार के विधानसभा चुनाव के लिए बिगुल फूंक दिया। उन्होंने वर्चुअल रैली के ज़रिये प्रदेश की जनता को सम्बोधित किया। बिहार जनसंवाद रैली को सम्बोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारतीय राजनीति की पहली रैली में मैं सभी बिहारवासियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार जनसंवाद रैली सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं उन करोड़ों कोरोना वारियर्स को सलाम करता हूँ, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर इस संकट काल में देश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश इन योद्धाओं के योगदान को हमेशा याद रखेगा।
हालाँकि इस वर्चुअल रैली के दौरान शाह ने कहा कि इस रैली का कोई सम्बन्ध चुनाव से नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखती है और हम इस संकट के समय में भी जनसम्पर्क के संस्कार को भुला नहीं सकते। अपने भाषण में उन्होंने बिहार की धरती का भारत की स्वतंत्रता में योगदान की बात याद दिलाई और देश को एक और अखंड रखने में बिहारवासियों के हौसले की तारीफ की।
शाह ने बिहार में विपक्षी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा ‘आज जब मैं वर्चुअल रैली के माध्यम से आपसे संवाद कर रहा हूं, तब कुछ लोगों ने अभी थाली बजाकर इस रैली का स्वागत किया है। मुझे अच्छा लगा कि देर-सवेर मोदी जी की अपील को उन्होंने माना। आधिकारिक रूप से तो यह चुनावी रैली नहीं थी, लेकिन जिस तरह से गृह मंत्री शाह ने विपक्षियों की खामियां गिनाई, उससे राजनीतिक गलियारे में इसी बात की चर्चा है कि भाजपा ने चुनावी रैली की शुरुआत कर दी है। संभव है कि आगे बाकी पार्टियों के नेता भी वर्चुअल रैली के ज़रिये बिहार की जनता को सम्बोधित कर सकते हैं।
कोरोना वायरस के बीच प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने में मदद करने के लिए बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद की हर जगह तारीफ हो रही है, लेकिन शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में सोनू सूद के मदद कार्य को लेकर सवाल उठा दिये हैं।
संजय राऊत ने रोखटोक कालम में लिखा है कि, लॉकडाउन के दौरान अचानक सोनू सूद नाम का एक महात्मा तैयार हो गया है, इतने झटके और चतुराई के साथ किसी को महात्मा बनाया जा सकता है। राउत ने आगे कहा कि प्रवासी मजदूरों को बस में भेजने के लिए आये पैसें का गबन किया गया है और सोनू सूद को बीजेपी का मुखौटा बताने की कोशिश की है।
बीजेपी नेता राम कदम ने संजय राउत के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, कदम ने अपने ट्वीट में लिखा है कि, ‘कोरोना के संकट काल में इंसानियत के नाते मजदूरों को सड़क पर उतर के सहायता करने वाले सोनू सूद पर संजय राउत का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है, खुद की सरकार कोरोना से निपटने में नाकाम हो गई? यह सच्चाई सोनू सूद पर आरोप लगाकर छुप नहीं सकती। जिस काम की सराहना करने की आवश्यकता है उस पर भी आरोप लगा रहे हैं।’
अभिनेता सोनू सूद और उनकी टीम ने अब तक 16-17,000 प्रवासी मजूदरों को उनके घर पहुंचा चुकी है, उनका लक्ष्य 40-50 हजार श्रमिकों या उससे भी ज्यादा को घर पहुंचाना है।