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Tuesday, August 4, 2026
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“मैसी साहिब (1985)” -शासित और शोषित का मनोवैज्ञानिक चित्रण

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Cinema Desk

1973 में, स्वीडेन की मीडिया ने, एक बैंक डकैती के बारे में लिखते हुए, “स्टॉकहोल्म सिन्ड्रोम”,इस संज्ञा का प्रयोग, एक मानसिक स्थिति को दर्शाने के लिए किया। घटना ये थी, कि बैंक में डकैती के दौरान अपराधियों ने, चार लोगों को बंधक बना लिया था और जब छूटने के बाद बंधकों से अपराधियों को दंड दिलवाने की बात की गई, तो एक आश्चर्यजनक बात हुई। बंधकों ने न केवल अपराधियों को पहचानने से मना कर दिया, सहानुभूति भी जताई उनके लिए। ये मानसिक स्थिति जहाँ प्रताड़ित, प्रताड़ना देने वाले का समर्थन करने लगे, बहुत भयावह है और पूर्ण आत्मसमर्पण है शोषित या प्रताड़ित का।

ठीक ऐसी ही मानसिक स्थिति के फलस्वरूप, उपनिवेशवाद का शिकार हुए देश और वहां की शासित जनता, शासकों के प्रत्ययों को, जैसे कि वीरता, सौन्दर्य आदि को ही प्रशंसनीय मानने लगती है। शासित, शासक जैसा बनना चाहता है और उसका अनुकरण करने लगता है। ऐसा ही मनोवैज्ञानिक चित्रण, शासितों का, 1985 में आई फ़िल्म, “मैस्सी साहिब” में किया गया।

फ़िल्म के एक दृश्य में रघुबीर यादव और अरुंधति रॉय

फ़िल्म के मुख्य कलाकार, रघुबीर यादव (मैस्सी साहिब) होते हैं, जो धर्म परिवर्तन कर के इसाई बन गए होते हैं। स्वतंत्रता के पहले और बाद, जितने धर्मांतरण हुए, सब के पीछे, जो मुख्य मनोवैज्ञानिक तथ्य था, वो था, शासकों के बीच गिने जा सकने की लालसा, अतः जो वर्ग जितना अधिक दमन झेल चुका था और जितना दूर था अपने सांस्कृतिक परिचय से, वो उतना ही जल्दी परिवर्तित हुआ।

बतौर फ्रांसिस मैसी ‘रघुबीर यादव’

रघुबीर यादव (मैस्सी साहिब) के साथ भी ऐसा ही हुआ, वे स्वयं को शासकों का प्रतिनिधि समझने लगे और सैला (अरूंधति रॉय) से चर्च में शादी भी की, सैला का भाई वीरेन्द्र सक्सेना (पासा), इस शादी का गवाह भी बना। रघुबीर यादव (मैस्सी साहिब), चार्ल्स ऐडम्स (बैरी जॉन) के कार्यालय में क्लर्क होते हैं और चार्ल्स डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर। चार्ल्स ऐडम्स (बैरी जॉन), सड़क बनाना चाहते हैं लेकिन पैसों की कमी होती है, इस स्थिति में रघुबीर यादव (मैस्सी साहिब) युक्ति लगाते हैं और ग्रामीणों को कभी डरा कर, कभी किसी अलग तरीके से, ये काम करवा लेते हैं। बाद में जब इसकी जांच होती है, तो रघुबीर यादव (मैस्सी साहिब) फंस जाते हैं और चार्ल्स ऐडम्स (बैरी जॉन), जिनके लिए उन्होंने, सारा श्रम किया होता है, पल्ला झाड़ लेते हैं। रघुबीर यादव (मैस्सी साहिब), विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए, हत्या के आरोप में फंस जाते हैं और कुछ समय बाद, दुखद अंत के भागी बनते हैं।

बतौर सैला ‘अरुंधति रॉय’

फ़िल्म का निर्देशन, प्रदीप कृशन ने किया और NFDC ने इसका निर्माण किया। यह फ़िल्म, जोइस कैरी के उपन्यास, “मिस्टर जॉनसन” पर आधारित थी। सिनेमैटोग्राफ़ी, आर०के०बोस का था और संगीत वनराज भाटिया ने दिया था।

“इस फ़िल्म को कई पुरस्कार मिले और रघुबीर यादव को भी। इनकी खूब प्रशंसा हुई। इनके पहले, सिद्धार्थ बसु को इस रोल के लिए चुना गया था, लेकिन नियति ने यह रघुबीर यादव के लिए ही रखा था।”

किन परिस्थितियों में एक व्यक्ति, जो शासित है, अपना सब छोड़ एक नए परिवेश से तुरंत जुड़ जाता है, किस मानसिकता के प्रभाव में, वह अपने शासक का ही अनुकरण करने लगता है, ऐसे प्रश्नों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करती है ये फ़िल्म और बताती है कि अपना सब छोड़ कर, सब नया ले लेने से भी कोई दूसरे वांछित वर्ग में, पूर्णतया स्वीकार्य नहीं हो सकता। ये विश्लेषण, बहुत सारे धर्मों के प्रसार युग का इतिहास भी समझाता है। अरूंधति रॉय के अलावा सभी का अभिनय अद्भुत है। अरूंधति रॉय ने इस फ़िल्म के बाद मैन बूकर प्राईज़ जीत कर, अलग विधा में अपना सामर्थ्य दिखाया। ये फ़िल्म हमेशा याद रखी जाएगी।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

देखें फ़िल्म का प्रोमो-

राहुल गाँधी के सवाल पर भड़की सेना और सरकार, कहीं ये बातें

रविशंकर प्रसाद
रविशंकर प्रसाद

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

आज केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस की ओर से भारत-चीन सीमा विवाद पर पूछे जा रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा है कि, राहुल गांधी अर्थ नीति और सामरिक नीति को कितना समझते हैं, इसपर बहस होनी चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि चीन जैसे अतंरराष्ट्रीय मुद्दे पर ट्विटर पर सवाल नहीं पूछे जाते हैं।

रविशंकर ने कहा कि, राहुल गांधी में इतनी समझदारी तो होनी चाहिए कि चीन जैसे अतंरराष्ट्रीय मुद्दे को लेकर ट्विटर पर सवाल नहीं पूछे जाते हैं। ये वही व्यक्ति हैं जिन्होंने उरी हमले पर सवाल उठाया था, अब चीन पर सवाल कर रहे हैं।

भाजपा सांसद ने ट्वीट में दावा किया है कि, चीन ने कांग्रेस कार्यकाल में भारतीय जमीन पर कब्जा किया था। बता दें कि राहुल गांधी ने ट्वीट कर पूछा था कि क्या चीन ने लद्दाख में भारतीय जमीन पर कब्जा किया है।

वहीं सेनानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह ने राहुल गांधी के सवालों को लेकर कहा, ‘उन्हें ऐसे सवाल नहीं करने चाहिए कि सरकार क्या कर रही है क्योंकि ये चीजें गुप्त हैं और इन्हें उजागर नहीं किया जा सकता है। एक समझदार व्यक्ति इस तरह का बयान कभी नहीं दे सकता है।’

कोरोना वाइरस प्रकोप के बीच आई अच्छी ख़बर

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com
कोरोना वाइरस महामारी के बीच में एक अच्छी ख़बर सामने आई है। सरकारी आँकड़े के अनुसार, नए मिले संक्रमितों की संख्या से अधिक संख्या ठीक होने वाले लोगों की है। बुधवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक आँकड़ा जारी किया जिसके मुताबिक़, देश में कोविड-19 के कुल 1,33,632 ऐक्टिव केस हैं, जबकि अबतक 1,35,206 मरीजों का इलाज कर उन्‍हें अस्‍पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।
कोरोना के कुल मामलों की संख्‍या 2.76 लाख से ज्‍यादा हो गई है। सरकार द्वारा जारी आँकड़े के अनुसार, पिछले २४ घंटे में कोरोना वाइरस के ९९८५ नए मामले सामने आए हैं और २७९ मरीजों की मौत हो गई। बुधवार सुबह 9 बजे तक भारत में कोरोना के कुल 2,76,583 केस थे। कोविड-19 से मरने वालों की संख्‍या 7,745 तक पहुंच गई है।
महाराष्‍ट्र देश का सबसे प्रभावित राज्‍य बना हुआ है, जहां कोरोना केसेज की संख्‍या 90 हजार के पार जा चुकी है। राज्‍य में अब तक 3,289 मरीजों की मौत हुई है। महाराष्ट्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मंगलवार को निर्णय लिया कि गम्भीर रूप से बीमार लोगों को ही अस्पताल में भर्ती किया जाएगा, ताकि अस्पतालों में भीड़ कम हो सके।

आम आदमी पार्टी ने बढ़ाई आम आदमी की टेन्शन

न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 31 जुलाई तक कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए 80 हजार बेड की जरूरत होगी। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने तो यह बयान एहतियातन दिया लेकिन उनके इस बयान से दिल्लीवासियों में भय व्याप्त हो गया है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज (बुधवार) को बताया कि मंगलवार को SDMA की बैठक हुई, जिसमें आने वाले महीनों में संक्रमितों की सम्भावित संख्या को लेकर चर्चा हुई। इसके मुताबिक, 15 जून तक 44 हजार, 30 जून तक 1 लाख और 15 जुलाई तक संक्रमितों की तादाद 2.15 लाख तक पहुंच सकती है।
केजरीवाल ने कहा कि यह आपस में लड़ने का वक्त नहीं है, बल्कि कोरोना से मिलकर लड़ने का समय है। मुख्यमंत्री ने आम लोगों को सलाह दी कि घर से बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल ज़रूर करें साथ ही सोशल डिस्टन्सिंग का भी पालन करें
केजरीवाल ने कहा कि भविष्य में कोरोना संक्रमण तेज़ी से बढ़ने वाला है, लिहाज़ा हमने पहले ही उसकी तैयारी शुरू कर दी है। केजरीवाल ने बताया की अभी ४२०० बेड ख़ाली हैं। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में लगभग पचास प्रतिशत मरीज बाहर से आते हैं, ऐसे में हमें जुलाई तक हमें लगभग डेढ़ लाख बेड की आवश्यक्ता होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टेडियम को क्वॉरंटीन सेंटर में बदलने की देखरेख वे ख़ुद करेंगे ताकि किसी तरह की कोई दिक्कत न हो।

कम्युनिटी ट्रांस्मिशन: केंद्र और दिल्ली में मतभेद, किस की मानें बात !

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली सरकार की कम्युनिटी ट्रांस्मिशन की बात को खारिज किया। एक वक्तव्य जारी करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कोरोना का सामुदायिक प्रसार अभी नहीं हो रहा है, साथ ही उन्होंने दिल्ली सरकार की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर भी सवाल खड़ा कर दिया।

दिल्ली सरकार की ओर से कल कहा गया था कि राज्य में कोरोनवायरस का कम्युनिटी स्प्रेड शुरू हो गया है और जितने भी मामले आ रहे हैं, उनमें से 50 फीसदी मामलों में संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चल रहा है। जिसके बाद केंद्र ने दिल्ली की राज्य सरकार के संक्रमण खोजने के ज़रिए पर भी सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को वाइरस के स्रोत को खोजने को लेकर उसके तौर-तरीकों में बदलाव की अवाश्यकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कंटेनमेंट स्ट्रेटेजी के तहत वायरस के मामलों को ढूंढ निकालने के लिए डोर टू डोर अभियान को और दुरुस्त करने की जरूरत है। सरकार का कहना है कि 11 जिलों में से कुछ बेहतर हालत में भी हैं, लेकिन कई जिलों में ये समस्या जस की तस बनी हुई है।

बता दें कि मंगलवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि, दिल्ली में कोरोनावायरस का कम्युनिटी स्प्रेड हो रहा है और संक्रमण के जितने भी मामले आ रहे हैं, उनमें से 50 फीसदी मामलों में नहीं पता चल रहा कि मरीज को संक्रमण कहां से हुआ है। जिसका जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उनके इस दावे का खंडन करते हुए उनके ही तौर-तरीकों पर सवाल खड़ा कर दिया।

“रुई का बोझ (1997)” -मोह, अपेक्षा और जीवन का त्रिकोण

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Cinema Desk

जिजीविषा मनुष्य की सबसे प्रबल भावना है और बाकी सारी  भावनाएं, इसी को और प्रबल या क्षीण बनाती हैं। सारे संबंधों के बनने के पहले, निभाए जाने के दौरान और टूटने या समाप्त होने तक , बस यही  जिजीविषा बची रहती है।  अगर ध्यानपूर्वक अवलोकन किया जाए तो हम पाते हैं कि अब तक जितनी भी कथाएं मानव सभ्यता ने अपने सचेत होने के बाद बनायी या बतायी हैं, उन सब में जीते रहने की भावना, न जीने की भावना और अच्छे से जीने की भावना, बस इन्ही को प्रदर्शित किया गया है।

महान ऑस्ट्रियन मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ्रायड ने अपनी व्याख्याओं में मनुष्य के मस्तिष्क में “इरोस” और “थानाटोस” का कई बार ज़िक्र किया है।  “इरोस” (सुखपूर्वक जीते रहने की भावना),  “थानाटोस” (मर जाने की इच्छा) भी इसी जी सकने या न जी सकने से ही सम्बंधित है। सम्मान और अपमान के परे भी जीजिविषा बनी रहती है और ये होना ही मनुष्य होने का प्रतीक भी है।  एक कहानी के माध्यम से यही दिखाने का प्रयास  किया गया 1997 में आयी फिल्म, “रुई का बोझ ” में।

फ़िल्म के एक दृश्य में बतौर किसुन साह ‘पंकज कपूर’

ये फिल्म NFDC ने प्रोड्यूस की थी और इसमें पंकज कपूर (किसुन साह ) अपने बुढ़ापे में अपना सारा धन अपने परिवार के सदस्यों में बाँट कर अपने सबसे छोटे बेटे रघुबीर यादव (राम शरण ) और बहु (रीमा लागू) के साथ रहने का फैसला करते हैं।

फ़िल्म के एक दृश्य में बतौर किसुन साह की बहू ‘रीमा लागू’

इनके घर में सब कुछ सामान्य नहीं रहता है और जिस सम्मान की अपेक्षा पंकज कपूर (किसुन साह ) अपने बच्चों से रखते हैं, वो उन्हें नहीं मिलता, या ये भी कहा जा सकता है कि वे मिल रहे सम्मान को समझ नहीं पाते, क्योंकि उसका स्वरुप उनके प्रत्याशा के अनुरूप नहीं होता। वे मुखर हो कर अपनी अपेक्षाएं बताते है अपने बेटे और बहु से लेकिन उनके सामर्थ्य के परे होती हैं ये अपेक्षाएं , अतः संबंधों में घर्षण शुरू होता है।

“कुछ संवाद बहुत ही सामयिक और सच हैं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में।  एक संवाद में पंकज कपूर (किसुन साह ) कहते हैं , “बाप वो संपत्ति होता है जिसे बेटा अपने भाइयों को देने के लिए हमेशा तैयार रहता है।”

एक और संवाद में पंकज कपूर (किसुन साह ) का पोता उनसे कहता है कि “आप 10 -15 पैसे नहीं दे सकते तो आप दादा कैसे हुए”। एक अवसर पर बात इतनी बढ़ जाती है कि पंकज कपूर (किसुन साह ) और बेटे रघुबीर यादव (राम शरण ) में हाथा पाई तक हो जाती है और पंकज कपूर (किसुन साह ) , कभी न लौटने के लिए घर छोड़ कर निकल जाते हैं, लेकिन यात्रा के दौरान उन्हें आभास होता है की उनके बच्चों ने उनका अपमान तो किया है पर बहुत से अवसरों पर उनका ध्यान भी रखा है और उनके प्रति मोह उमड़ पड़ता है ।  जिजीविषा को बस एक तृण , एक बूँद की आवश्यकता होती है जीवन का वन या महासागर बनाने के लिए, वापस मुड़ जाने के लिए जीवन की तरफ़।

फ़िल्म के एक दृश्य में बतौर राम सरन ‘रघुबीर यादव’

ये फ़िल्म, चन्द्रकिशोर जायसवाल के उपन्यास, “गवाह गैरहाज़िर”, पर आधारित है और इसका निर्देशन, सुभाष अग्रवाल ने किया। सिनेमैटोग्राफ़ी महेश चंद्रा की थी और संगीत के० नारायण का था।

फ़िल्म के लगभग अंतिम भाग में पंकज कपूर का मोनोलॉग, “मेरा मोहभंग हो गया है”, मानव जीवन की सबसे भ्रामक उक्तियों में से एक है, क्योंकि मोहभंग की अवस्था प्राप्त करना, मानवीय संबंधों से भी, एक मोह ही है। भारतीय सिनेमा के अभूतपूर्व फ़िल्मों में से एक है, “रूई का बोझ”, जिसमें मोह, अपेक्षा और जीवन का त्रिकोण है।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

देखें फ़िल्म-

गम्भीर लक्षण वाले मरीजों को ही किया जाएगा अस्पताल में भर्ती -महाराष्ट्र सरकार

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 
महाराष्ट्र में अब कोरोना के चीन से भी ज़्यादा मामले हैं। चीन में  कोरोना के 83 हज़ार मामले हैं, जबकि महाराष्ट्र में लगभग 86 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं। भविष्य में परेशानी बढ़े न इसीलिए राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब सिर्फ़ गम्भीर लक्षण वाले मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार ने इस फ़ैसले की जानकारी दी और कहा कि वर्तमान की स्थिति को देखते हुए यह फ़ैसला ज़रूरी हो गया था। एक समाचार चैनल से बात करते हुए डाक्टर्स कहते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है। ऐसे में जल्दी सभी अस्पतालों के बेड भर जाएँगे, और क्रिटिकल केयर के लिए ज़रूरी सामानों की कमी हो जाएगी, तब क्या करेंगे। इस स्थिति से निबटने के लिए सरकार ने निर्णय लिया कि जिन लोगों में लक्षण पाए जाएँगे, उनकी जाँच के लिए कम्यूनिटी हेल्थ वालांटियर उनके घर जाकर जाँच करेगा और लक्षण के आधार पर अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
कोरोना के 60 प्रतिशत से ज़्यादा मामले पांच शहरों में हैं, जिनमें मुंबई और दिल्ली सबसे आगे हैं। मुंबई समेत राज्य के कोविड-19 अस्पतालों में बेड की कम संख्या को देखते हुए उद्धव ठाकरे सरकार ने ये फैसला लिया है। दिल्ली और पश्चिमी मुंबई के डॉक्टरों ने बीबीसी को बताया कि कोविड-19 के इलाज के लिए आने वाले लोगों में तेज़ बढ़ोतरी हो रही है। सरकार चाहती है कि 80 प्रतिशत कोरोना संक्रमितों का इलाज घर में हो।

TOI की खबर के मुताबिक, उद्धव सरकार का कहना है कि जिन कोरोना मरीज़ों में कोई लक्षण नहीं है या मामूली लक्षण हैं, वो अपने-अपने घर पर ही ठीक हो सकते हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ गंभीर लक्षण वाले मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

बीएमसी ने निर्णय लिया है कि अब मरीजों को स्वाब टेस्ट देने के लिए अस्पताल में नहीं जाना पड़ेगा। मरीज को घर में ही क्वारंटाइन किया जाएगा। सिम्टम्स के आधार पर उनका स्वाब टेस्ट घर से लिया जाएगा। बीएमसी अधिकारी और डॉक्टर स्वाब टेस्ट जमा कर जांच के लिए लैब में भेजेंगे। पहला टेस्ट 5 दिन में और दूसरा टेस्ट 10 दिन में लिया जाएगा। डॉक्टर मरीज को जो दवा लेने की सलाह देंगे मरीज को घर पर लेते रहना होगा। मरीज की स्थिति के आंकलन के आधार पर अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने मुंबई के सभी 24 वार्डों के लिए अलग से वार्ड वॉर रूम बनाने का निर्णय लिया है। हर वार्ड के लिए 30 फोन लाइन होगी, जो 1916 पर फोन करने के बाद संबंधित वार्ड ऑपरेटर के पास ट्रांसफर हो जाएंगी।

महिला ने गर्भवती सौतन को गोली से उड़ाया, लहराती रही पिस्तौल

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

मुरादाबाद में कल शाम एक महिला ने अपनी गर्भवती सौतन को गोली मार दी। मौके पर ही उसके सौतन की मौत हो गयी। इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी महिला पिस्टल लेकर शव के चारों तरफ घूमती रही और आस-पास के लोग ये तमाशा देखते रहे।

आस-पास जमा भीड़ में से किसी ने इस घटना का वीडियो भी बना लिया, मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया और महिला से पूछताछ करने में जुट गयी।

ट्रांसपोर्ट कारोबारी जफर की पहली पत्नी शबाना पति के साथ ही रहती है, जबकि उसकी सौतन आलिया पड़ोस में किराए के मकान में रहती थी, वह सात महीने की गर्भवती थी, डेढ़ साल पहले जफर ने उससे शादी कर ली थी, वह पहले हिंदू थी और शादी के बाद उसने अपना धर्म बदल लिया था, वे मानसी से आलिया बन गयी थी।

जफर ने जबसे दूसरी शादी की तब से शबाना अपनी सौतन से बदला लेने का मौका देख रही थी, जब कल सोमवार की शाम उसकी सौतन बाहर कहीं अपनी भतीजी मुस्कान के साथ आ रही थी, तभी शबाना ने उसका रास्ता रोक लिया था।

शबाना ने पहला फायर मुस्कान पर किया, लेकिन वह चूक गयी, आलिया मुस्कान को बचाने के लिए सामने आई तो शबाना ने उस पर 4 गोलियां चला दी, इसके बाद शबाना पिस्टल लहराते हुए उससे बात करती रही। कुछ देर बाद आलिया ने दम तोड़ दिया। बता दें कि उसका पति जफर फरार है।

इराक़: अमेरिकी सेना का विमान क्रैश

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

आज इराक में अमेरिकी सेना का एक विमान C-130 क्रैश हो गया है। बगदाद के इराकी सैन्य अड्डे पर ये हादसा हुआ, इस विमान हादसे में किसी के मौत की खबर अब तक नहीं है।

अमेरिकी सेना की तरफ से कहा गया है कि, इस हादसे में चार सैनिक घायल हो गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है और सभी खतरे से बाहर हैं। वहीं इस हादसे के साथ ही इराक एयरपोर्ट पर एक मिसाइल दागी गई है, जिसके बाद इराक में जांच तेज हो गई है।

इराकी सेना के अधिकारी ने बताया कि, बगदाद हवाई अड्डे पर रॉकेट गिरने की जांच की जा रही है। इस विमान में चालक दले के सात सदस्य और 26 यात्री सवार थे। इराकी सेना ने दावा किया है कि यह मिसाइल हवाइ अड्डे के दक्षिण में लॉन्च की गई थी।

WHO की चेतावनी: डैंजर ज़ोन में एशिया के ये देश

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने कोरोना वायरस के प्रसार को लेकर एक बार फिर चेतावनी जारी की है। स्वास्थय संगठन के मुताबिक़, दक्षिण एशियाई इलाके में कोरोना तेज़ी के साथ पाँव पसार रहा है, जोकि बेहद घातक है। विश्व स्वाथ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहोनम गेब्रेसियोसिस के मुताबिक़, बीते 3 दिनों में कोरोना संक्रमण के जितने भी नए मामले सामने आए हैं, उनमें से लगभग 75% से ज्यादा मामले दक्षिण एशिया और अमेरिका और ब्राजील के हैं।

विश्व स्वास्थय संगठन ने कोरोना संक्रमण को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा कि रविवार को एक दिन में सबसे ज्यादा 1.36 लाख से ज्यादा मरीज मिले, जिनमें 75% दक्षिण एशिया और अमेरिकी महाद्वीप के 10 देशों से सामने आए हैं। टेडरोस ने कहा कि भले ही कुछ देशों में इसके संक्रमण का औसत कम हो गया हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह और भी खतरनाक होता जा रहा है।

उन्होंने एक आंकड़ा जारी करते हुए बताया कि बीते दस दिनों में से नौ दिन ऐसे रहे हैं, जब संक्रमण के मामलों की संख्या एक लाख से भी ज़्यादा थी। उन्होंने कहा कि कुछ देशों में सकारात्मक परिणाम भी देखे गए हैं, लेकिन विश्व के कई देशों में संक्रमण की स्थिति संवेदनशील स्थिति में पहुंच गई है।

विश्व स्वास्थय संगठन ने यह स्पष्ट किया कि एशिया में संक्रमण के करीब १४ लाख मामले सामने आये हैं, जो कि दक्षिणी अमेरिका और यूरोप के बाद तीसरे नंबर पर हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से ज़्यादातर मामले पिछले बीस दिनों में ही आये हैं, जो कि चिंताजनक कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं बीस दिनों में लगभग 35639 की मृत्यु हुई है।

स्वास्थय संगठन ने स्पष्ट किया कि एशिया में फिलहाल भारत में सबसे ज्यादा करीब 2,66,000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 7400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में हर दिन करीब 10 हज़ार नए केस सामने आ रहे हैं, जबकि यहां टेस्टिंग रेट काफी कम करीब 10 लाख पर सिर्फ 3400 ही है।

WHO के मुताबिक एशिया में करीब 14 लाख कोरोना संक्रमण के केस सामने आ चुके हैं जो कि नॉर्थ अमेरिका और यूरोप के बाद तीसरे नंबर पर है. सबसे ज्यादा खतरे की बात ये है कि इनमें से ज्यादातर केस बीते 20 दिनों में ही सामने आए हैं और 35,639 मौतें हुई हैं.