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Friday, August 14, 2026
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जेडीयू ने राज्यसभा में शरद यादव को पार्टी के नेता पद से हटाया

सौम्या केसरवानी  / Navpravah.com

जेडीयू ने शरद यादव को राज्‍यसभा में पार्टी के नेता पद से हटा दिया है, इस बारे में पार्टी की तरफ से उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू को पत्र सौंपा गया है। पार्टी ने शरद यादव की जगह आरसीपी सिंह को राज्यसभा में अपना  नेता चुना है।

इस तरह शरद यादव की राज्यसभा में नेता पद से छुट्टी कर दी गई है,  राज्यसभा में जेडीयू के दस सांसद हैं, इनमें कल अली अनवर भी निलंबित किए जा चुके हैं और अब शरद यादव पर भी पार्टी ने ये बड़ी कार्रवाई की है।

जदयू के वरिष्ठ नेता और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने वर्तमान समय को अपने राजनीतिक जीवन का चुनौतीपूर्ण समय बताया और कहा कि अब तो यह देखना है कि मंजिल किसे मिलती है।

सांसद ने पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यक्रम में शाामिल होने से पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को रोका जा रहा है और उन्हें पार्टी से निकालने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने पार्टी को चुनौती देते कहा कि कितने को निकालोगे, निकालते-निकालते थक जाओगे।

सेंसर बोर्ड के ‘संस्कार काल’ का अवसान

Pahlaj Nihalani head of the Central Board of Film Certification of India during Idea exchange at Express tower on Wednesday. Express photo by Prashant Nadkar, Mumbai, 25/11/2015

आनन्द रूप द्विवेदी | Navpravah.com

माना जाता है कि, फ़िल्में समाज का आइना होती हैं. सिर्फ़ फ़िल्में ही क्यों, अभिव्यक्ति का कोई भी माध्यम समाज को असलियत का आईना दिखाने का काम ही करता है. लेकिन जब इस आईने में संस्कारों की झीनी चदरिया ओढ़ाई जाने लगे तो समझिये समाज, आइना देखने से वंचित रह गया. जिनके अंदर संस्कार कूट कूटकर भरे हुए हैं, वो महज़ आइना देखने से कुसंस्कारी हो जाएँ तो मानिए कि संस्कारों में कमी रह गई.  वैसे केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष व बोर्ड मेम्बरान इस बात का बेहद सलीके से ख्याल रखते थे कि फिल्मों के माध्यम से जनता में कुसंस्कार व्याप्त न होने पायें, जिसके चलते तमाम फिल्मकारों को सेंसर बोर्ड के इस ‘फाइनल लेवल’ को क्रॉस करना पड़ता था.

पहलाज निहलानी फ़िल्मी दुनिया का जाना माना नाम हैं जिनके खाते में दर्जन भर फ़िल्में दर्ज हैं. बतौर फिल्म निर्माता पहलाज की पहली फिल्म थी १९८२ में आई ‘हथकड़ी’ जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा, संजीव कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों ने अभिनय किया था. उसके बाद आंधी तूफ़ान, इलज़ाम, पाप की दुनिया, मिट्टी और सोना, आग का गोला, फर्स्ट लव लेटर, एक और फौलाद, शोला और शबनम, आँखें, अंदाज़, दिल तेरा दीवाना, भाई भाई, उलझन, तलाश,खुशबू जैसी तमाम फिल्मों का सफलता पूर्वक निर्माण करने वाले पहलाज सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष नियुक्त हुए.

पहलाज निहलानी द्वारा निर्मित फ़िल्में

 “खेत गए बाबा बाजार गई माँ, अकेले हूँ घर में तू आजा बालमा..” ये गाना पहलाज निहलानी की फिल्म ‘आँखें’ का ही है. गाने में प्रेमिका अपने प्रेमी को घर में अकेले होने व प्रणय के सुनहरे अवसर का लाभ उठाने का  निवेदन करती दर्शाई गई है. पहलाज साहब की संसकारों वाली डिक्शनरी में शायद ये जायज़ है.

इसी फिल्म के “..ऐ लाल दुपट्टे वाली जरा नाम तो बता..” जैसे गीत ने मनचलों को एक कायदे का जुमला पकड़ाया. सरेराह लड़कियों ने लाल दुपट्टा पहन कर चलना कम कर दिया था. क्योंकि पहलाज साहब की फिल्म ने देशवासियों और नौजवानों को लाल दुपट्टे के माध्यम से ये सन्देश दे दिया था, कि लाल रंग के दुपट्टे वाली लड़कियों का नाम जान लेना फ़िल्मी संस्कारों के बेहद करीब है. बतौर सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी में गजब का परिवर्तन आया. अपनी फिल्मों में भरपूर स्किन शो करवाने के बाद अब पहलाज निहलानी सेंसर बोर्ड में संस्कार श्री के रोल में आ चुके थे.

पहलाज साहब यदि राजकपूर साहब के समकालीन होते तो शायद बेहद उलझन में पड़ जाते. उन्हें मेरा नाम जोकर, सत्यम शिवम सुन्दरम, राम तेरी गंगा मैली, जैसी बोल्ड फिल्मों का सामना करना पड़ता. बात तब पचाने वाली होती जब पहलाज निहलानी खुद की फिल्मों के माध्यम से वही सन्देश देते जिसकी बात वो बतौर सेंसर बोर्ड अध्यक्ष करते रहे.  “..नॉर्मल फिल्मों में पोर्नोग्राफी नहीं दिखाई जाएगी” जैसे जुमले देने वाले पहलाज निहलानी ने बतौर निर्माता एक भी धार्मिक या सौ टके टंच संस्कारी फ़िल्म नहीं बनाई। उनकी फिल्मों में भी भरपूर स्किन शो हुआ। लेकिन जब सेंसर बोर्ड की कुर्सी मिली तो पहलाज निहलानी अपनी ही बिरादरी के लिए मुसीबत का पहाड़ बन बैठे।

नशे के कारोबार पर आधारित फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के लिए तो पहलाज निहलानी बहती नदी में बाँध के सामान साबित हुए थे. हाल ही में सेंसर बोर्ड ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत  “बाबूमोशाय बन्दूकबाज़” फिल्म में कुल 48 कट लगाए. यहाँ तक कि फिल्म निर्माता किरन श्याम श्रॉफ जब सेंसर बोर्ड पहुंची तो परम संस्कारी सेंसर बोर्ड मेम्बरान ने उनपर फब्तियां कसीं. किरन के पैंट शर्ट पहनने पर उन्हें ऐतराज़ हुआ. ऐसा ही चलता रहा तो सेंसर बोर्ड को ऑफिस मैनुअल में बुरका या धोती कुरता अनिवार्य करने की मांग कर देनी चाहिए. कपड़ों से महिलाओं को जज कर लेने वाले ऐसे दिव्यदर्शी महापुरुषों को पदस्थ कर, सेंसर बोर्ड अवश्य ही गौरवान्वित महसूस करता होगा.

खैर, केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पिछले अध्यक्ष पहलाज निहलानी अब अध्यक्षता की कुर्सी में नहीं बैठेंगे. उनका स्थान मशहूर गीतकार प्रसून जोशी ले रहे हैं. उम्मीद है प्रसून जोशी की कैंची, क्रिएटिविटी के पर कतरने के काम नहीं आएगी.

अमेरिका ने दी वेनेजुएला को चेतावनी 

पीयूष चिलवाल। Navpravah.com
नौर्थ कोरिया के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला को सैन्य कार्यवाही की चेतावनी दी है। अमेरिका ने यह चेतावनी वेनेजुएला के बिगड़ हुए हालातों को देखकर दी है। अमेरिका पूर्व में ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को तानाशाह घोषित कर चुका है और कई स्तरों पर प्रतिबंधों की भी घोषणा कर चुका है।
दक्षिणी अमेरिका में स्थित वेनेज़ुएला
व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी करते हुए कहा है वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करने की आग्रह किया  लेकिन अमेरिका ने यह कहकर निवेदन ठुकरा दिया की जब वैनेजुएला में लोकतंत्र दोबारा स्थापित होगा तभी अमेरिकी राष्ट्रपति वेनेजुएला के राष्ट्राध्यक्ष से बात करेंगे। पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला की परिस्थितियों से निपटने के लिए अमेरिका के पास कई विकल्प हैं और उन्हीं में से एक सैन्य कार्रवाई है।
मालूम हो कि वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता के चलते हिंसक प्रदर्शन जारी हैं और मादुरो के खिलाफ जनता में असंतोष है। वेनेजुएला में हाल ही में नए संविधान को लेकर चुनाव हुए थे। चुनाव संपन्न होने के बाद संविधान के अनुरूप राष्ट्रपति असीमित शक्तियां प्राप्त हो गई हैं। चुनाव के खिलाफ विरोध के चलते सैकडो लोगों की मौत हो चुकी है।
 अंतराष्ट्रीय समुदाय ने पहले ही वेनेजुएला के चुनावों को रद्द कर दिया है। अमेरिका भी यह स्पष्ट कर चुका है कि वो वेनेजुएला में दोबारा लोकतंत्र कायम करने के लिए कोई कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

साक्षी महाराज ने बच्चों की मौत को नर संहार बताया

सौम्या केसरवानी। Navpravah.com
भारतीय जनता पार्टी के उन्नाव से सांसद साक्षी जी महाराज ने गोरखपुर में बच्चों की मौत को नर संहार बताया है, भजपा सांसद ने ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत का होना दर्दनीय बताया है।
उन्होंने यह भी कहा कि भुगतान न होने की वजह से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई बंद की गई इसके चलते ये भयावह स्थित हुई है, इसके लिए अस्पताल का प्रशासन जिम्मेदार है, साक्षी जी महाराज ने कहा कि एक दो मौतें ही सामान्य होती हैं इतनी नहीं, ये नरसंहार है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है।
बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन ना मिलने से 70 लोगों की मौत हो गई है, 7 अगस्त को एनआईसीयू में 4, एईएस से 2 और नॉन एईएस से 3 मरीजों की मौत हुई, 8 अगस्त को एनआईसीयू में 7, एईएस से 3 और नॉन एईएस से 2 मरीजों की मौत हुई, 9 अगस्त को एनआईसीयू में 6, एईएस से 2 और नॉन एईएस से 1 मरीज की मौत हुई, 10 अगस्त को एनआईसीयू में 14 , एईएस से 3 और नॉन एईएस से 6 मरीजों की मौत हुई, 11 अगस्त को एनआईसीयू में 3, एईएस से 2 और नॉन एईएस से 2 मरीजों की मौत हुई।
इस प्रकार ऑक्सीजन की कमी के चलते बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में 30 मासूमों की भेंट चढ़ गए, जिस पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल गोरखपुर कांड पर राजनीति शुरू हो गई है, विपक्षी पार्टियों के नेता गोरखपुर पहुंचे हैं।
ये नेता वर्तमान सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली संस्था की ओर से 63 लाख रुपये बकाये को लेकर बीआरडी प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया।
जिसके बाद भी प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं की गयी, जिसके बाद भी संस्था की ओर से रोगियों के हितो को ध्यान हुए 4 से 5 दिन और ऑक्सीजन की सप्लाई की गयी, लेकिन इसके बावजूद भी बकाये का भुगतान न होने पर ऑक्सीजन सप्लाई आखिरकार बाधित हो गयी।

जब इंदिरा गांधी से डर नहीं लगा, तो अब ‘उनसे’ कैसा डर! -शरद यादव

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार द्वारा महागठबंधन में सेंध लगाकर लिए गए यू टर्न के बाद से उनके व पूर्व जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव के बीच में पड़ी फूट बढ़ती ही जा रही है। शरद यादव की नाराज़गी और नितीश कुमार से उनकी ख़िलाफ़त अब साफ़ साफ़ नज़र आने लगी है। शरद यादव ने नीतीश कुमार का नाम लिये बिना ही कह दिया है कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़ा होने में डर नहीं लगा, तो अब किसी से क्या डरना।

शरद यादव ने आज सुबह ट्वीट किया, ” आज मधुबनी से निकल कर सुपौल, सहरसा होते हुए सड़क मार्ग से मधेपुरा तक की यात्रा होगी।” शरद यादव ने अपने इस ट्वीट के साथ एक वीडियो भी अटैच किया है, जिसमें उनके लिए  जय-जय कारे की आवाज आ रही है और लोग उनके काफिले का स्वागत करते हुए उनके समर्थन में नारे लगा रहे हैं। आज यादव का बिहार की तीन दिवसीय यात्रा का तीसरा और आखिरी दिन है। आज की अपनी यात्रा पूरी कर वे दिल्ली लौट जायेंगे, जहां वे स्वयं द्वारा वीपी हाउस में आयोजित किये जाने वाले सम्मेलन की तैयारी में जुटेंगे। अपने दौरे के क्रम में शरद यादव ने नीतीश कुमार का नाम लिये बिना कहा है कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़ा होने में डर नहीं लगा तो अब काहे का डरना।

शरद यादव का कहना है कि उनके साथ आने वालों को डराया जा रहा है, लेकिन उन्हें किसी का डर नहीं है। शरद ने कहा है कि वे कौन होते हैं मुझे डराने वाले? उन्होंने कहा है कि अब परिस्थितियां काफी बदल गयी हैं। शरद की इस पूरी कवायद में जेडीयू सांसद अली अनवर व अरुण श्रीवास्तव उनके साथ खड़े हैं। दोनों पर पार्टी ने कार्रवाई भी की है।

उल्लेखनीय है कि भाजपा- जेडीयू के गठबंधन के बाद नीतीश कुमार ने भी कल दिल्ली में कह दिया है कि फैसला पार्टी ने सर्वसम्मति से लिया है और शरद यादव अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। वास्तव में बिहार दौरा 70 वर्षीय शरद यादव की नयी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी है, जिसके लिए वह बिहार का दौरा कर जमीन टटोल रहे हैं। समाजवादी राजनीतिक धारा में मिलना, बिछड़ना और फिर बिछड़ कर मिलने की परंपरा रही है।

गोरखपुर की घटना हादसा नहीं, हत्या है -कैलाश सत्यार्थी

पीयूष चिलवाल। Navpravah.com

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर के अस्पताल मरने वाले बच्चों संख्या बढ़कर 64 पहुंची, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और शिक्षा स्वास्थ्य मंत्री आशुतोष टंडन अस्पताल जाएंगे। वहीं सोनिया गांधी के आदेश पर पहले ही कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल वहां आ चुका है। कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, राज बब्बर और संजय सिंह ने बीआरडी मेडिकल काॅलेज का दौरा किया।

कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि ये बेहद दुभाग्यपूर्ण घटना और सरकार की नाकामी पर मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए और स्वास्थ्य मंत्री को माफी मांगनी चाहिए।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने बच्चों की मौत पर दुख जताया है और मृतकों के परिवारों के लिए 20 लाख के मुआवजे की बात कही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे के बाद भी ऐसी घटना के होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सरकार पर काम न करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वे सपा की नेताओं की एक टीम को वहां भेज रहे हैं जो वहां जाकर लोगों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सरकार को और पार्टी मुख्यालय को देगा।

वहीं नोबल अवार्ड विजेता कैलास सत्यार्थी ने इसे सामूहिक हत्या करार दिया है।

वहीं आक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाले ठेकेदार ने कहा है कि पिछले माह से बकाया भुगतान करने के लिए अस्पताल को भुगतान कर रहे थे और करीब 70 लाख रूपये का भुगतान बाकी था उनका कहना है कि अस्पताल ने आखिरी बार चिट्ठी का जवाब फरवरी में दिया और कल ही ही 52 लाख का भुगतान किया गया है।

बीजेपी के ही नेता साक्षी महाराज ने कहा है कि बच्चों की मौत आक्सीजन सप्लाई न होने की वजह से हुई है और उन्होने घटना को नरसंहार बताया ।

उधर यूपी सरकार का गुस्सा आॅक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पर निकल रहा है। कंपनी के मालिक के घर समेत आफिस में छापेमारी जारी है।

भारत ने सिक्किम और अरुणाचल में सेना की तैनाती बढ़ाई

घुसपैठियों के शव ले जाए पाकिस्तान -भारतीय सेना
घुसपैठियों के शव ले जाए पाकिस्तान -भारतीय सेना
सौम्या केसरवानी। Navpravah.com
डोकालाम के मुद्दे पर चीन की धमकियों के कारण भारत ने सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से लगी सीमा के समूचे इलाके में सैनिकों की तदात बढ़ा दी है। चीन की हरकतों को ध्यान में रखते हुए सैनिकों को चौकन्ना रहने को भी कहा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि डोकलाम पर भारत के खिलाफ चीन के आक्रामक रुख और धमकियों के मद्देनजर भारत-चीन की करीब 1400 किलोमीटर लंबी सीमा के पास के इलाकों में सैनिकों की तैनाती बढ़ाई गई है। हालांकि यह नहीं बताया गया कि कितने सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई है।
अधिकारियों ने कहा कि डोकालाम में भारत-चीन-भूटान ट्राई जंक्शन पर सैनिकों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। डोकालाम में करीब आठ हफ्ते से लगभग 350 जवान तैनात हैं, यह तैनाती उस वक्त से है जब भारतीय सैनिकों ने 16 जून को चीनी सेना को वहां एक सड़क बनाने से रोक दिया था।
चीन पिछले कुछ हफ्तों से भारत से सेना हटाने की मांग कर रहा है, चीनी विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की ओर से सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दी जा रही है।
भारत लगातार कूटनीतिक रास्ते से गतिरोध के हल पर जोर दे रहा है, लेकिन चीन की बयानबाजी और सीमा पर गतिविधियों को देखकर वह कोई जोखिम नहीं मोल नहीं लेना चाहता। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पिछले हफ्ते संसद में कहा था कि दोनों पक्षों को पहले अपनी-अपनी सेना हटानी चाहिए, तभी कोई बातचीत हो सकेगी।

सुरक्षा नहीं दे सकती सरकार तो भ्रूण हत्या की दे इजाजत -रागिनी के पिता

सौम्या केसरवानी। Navpravah.com
यूपी के बलिया में 8 अगस्त को रागिनी की हत्या कर दी गयी थी, हत्या बीजेपी नेता सह ग्राम प्रधान के लड़के ने की थी, मृतका रागिनी महज 17 साल की थी और 12वीं में पढ़ती थी। स्कूल आते-जाते समय गांव प्रधान के लड़के उस पर कमेंट पास करते थे, वह इन सब बातों से तंग आकर उसने मई के बाद स्कूल जाना ही बंद कर दिया था। सिस्टम से नाराज रागिनी के पिता जीतेंद्र दुबे ने योगी सरकार से न्याय की मांग करते हुए कहा, “अगर सरकार लड़कियों की सुरक्षा नहीं दे सकती, तो भ्रूण हत्या करने की इजाजत दे”। पिता ने कहा आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए और अगर फाँसी की सजा नही मिली तो वे आंदोलन करेंगे।
जिस पिता को करना था डोली में विदा ,वो आज कर रहे हैं बेटी का अंतिम संस्कार:
बलिया बीजेपी नेता का आरोपी पुत्र
रागिनी इसी साल मई में 11वीं पास कर इंटर में आई थी, स्कूल आते-जाते गांव प्रधान के लड़के उस पर कमेंट पास करते थे, उसे देखकर सीटी बजाते तो कभी गाने गाते थे, इन सब बातों से तंग आकर उसने मई के बाद स्कूल जाना ही बंद कर दिया था,
रागिनी 8 अगस्त को सुबह 8 बजे स्कूल जाने के लिए अपनी छोटी बहन के साथ निकली। रास्ते में बाइक से आए प्रधान के लड़के ने उसका रास्ता रोका और उसे धक्का मारकर नीचे गिरा दिया, फिर उसने जेब में रखा चाकू निकाला और रागिनी का गला रेत दिया, फिर उसकी बॉडी को चाकू से गोद कर अपने साथियों संग फरार हो गया। रागिनी की मां ने बताया, “प्रधान का लड़का सोमवार को हमारे घर आया था, वो धमकी दे रहा था कि अगर रागिनी स्कूल गई तो वह उसकी जिंदगी का आखिरी दिन होगा। मेरी बेटी लगभग 3 महीने बाद मंगलवार को स्कूल एग्जाम की जानकारी लेने जा रही थी, अपनी धमकी के मुताबिक प्रधान के लड़के ने मेरी बेटी की हत्या कर दी।
रागिनी की सरेराह हत्या करने वाले दो युवकों को पुलिस ने बुधवार को जेल भेज दिया, मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं, उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
रागिनी के पिता ने कहा, पुलिस ने भले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी भी बाकी के तीन आरोपी फरार हैं, पुलिस हाथ पर हाथ रखे बैठी है, लेकिन हमें हर हाल में इंसाफ चाहिए।

बक्सर के डीएम मुकेश पांडे को बचाने की सारी कोशिशें फेल

पीयूष चिलवाल। Navpravah.com
बक्सर के डीएम मुकेश पांडे ने गुरूवार की रात आत्महत्या कर ली थी जिसके कारण अब एक एक कर खुल कर सामने आ रहे हैं। डीएम का मृत शरीर गुरूवार की रात गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर दो हिस्सों में मिली। हालांकि उन्हें रोकने की तमाम कोशिशें हुई लेकिन अनहोनी को कोई भी टाल नहीं पाया।
 डीएम मुकेश ने किसी को व्हट्स एप के जरिये अपने आत्महत्या करने की सूचना दी। उन्होंने लिखा है कि “मैं पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में होटल पिकादिल्ली की 10वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर रहा हूं. मैं अपनी जिंदगी से तंग आ चुका हूं और इंसान के अस्तित्व पर से मेरा विश्वास उठ गया है. मेरा सुसाइड नोट लीला पैलेस होटल के रूम नंबर 742 में एक बैग में रखा है. मैं माफी चाहता है, सभी को मेरा प्यार, प्लीज मुझे माफ कर देना.” जिसके बाद यह मैसेज दिल्ली पुलिस तक पहुंचा लेकिन वे पुलिस के हाथ नहीं आए।
मुकेश 2012 बैच के आईएएस थे और हाल ही में डीएम बने थे। 4 अगस्त को चार्ज लेने के बाद कमिश्नर से छुट्टी लेकर दिल्ली पहुंच गए। डीएम ने अपने सुसाइड नोट में पारिवारिक कलह का जिक्र किया है हालांकि उन्होंने अपनी आत्महत्या के पीछे किसी का हाथ होने से इंकार किया है।
मौत से पहले बनाए एक वीडियो में उन्होंने अपनी ज़िदगी से तंग होने की बात कही है। वे कहते हैं कि वे अपने माता पिता और पत्नि के बीच झगड़े से तंग आ गए हैं वे दोनों से प्रेम करते हैं और दोनों में से कोई भी गलत नहीं हैं। उन्होंने यह कहा है कि वे जिंदगी से शर्मिंदा हैं और  या तो तप करना चाहते हैं या समाजसेवा लेकिन ज़िंदगी से मोह भंग हो गया है।
उनकी आत्महत्या के बाद हर कोई हैरान है। सुसाइड का एलर्ट मिलने के बाद पुलिस की 6 टीमों ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन असफलता हाथ लगी।

गोरखपुर में दो और बच्चों की मौत, अब तक कुल 63

पीयूष चिलवाल। Navpravah.com
गोरखपुर मेडिकल काॅलेज में 2 और बच्चों की मौत। पिछले 48 घंटे में समेत 63 लोगों की मौत हो चुकी है। मौत की वजह आॅक्सीजन न मिल पाने की वजह से मौत होने की बात सामने आयी है तो वहीं सरकार यह मानने को तैयार नहीं है सरकार का कहना है कि बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस यानि दिमागी बुखार की वजह से हुई है।
वहीं आक्सीजन आपरेटर के पत्र के सामने आने के बाद हडकंप मच चुका है। दो दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अस्पताल का दौरा किया था लेकिन इस दौरान उन्हें इस मामले की भनक तक नहीं लगने दी गयी। आक्सीजन आपरेटर 9 अगस्त के इस पत्र में लिखा गया है कि आक्सीजन काफी कम मात्रा में बची हुई है उसे तत्काल भरे जाने की जरूरत है सप्लाई 10 अगस्त को सुबह 11 बजे तक खत्म होने की बात भी की गयी है लेकिन अस्पताल ने इस पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की।
उधर यूपी की स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ और शिक्षा मंत्री आशुताष टंडन आज गोरखपुर का दौरा करेंगे सिद्धार्थनाथ ने कहा है कि मामले की जांच 24 घंटे में हो जाएगी और जो भी दोशी होंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। वहीं स्वास्थ्य शिक्षा मंत्री आशुताष टंडन ने अपने बयान में आक्सीजन की कमी की बात को नकारा है और कहा है कि मौतें इंसेफेलाइटिस से हुई हैं।
सीएम यागी ने भी अपनी चुप्पी तोड़ते हुए त्वरित कार्रवाई की बात कही है और उनके इलाहबाद दौर को रद्द कर गोरखपुर आने की आशंका जताई जा रही है। वहीं कांग्रेस के कई नेता भी अपने शीर्ष प्रतिनिधिमंडल के साथ आज गौरखपुर का दौरा करेंगे।
खस्ताहाल अस्पताल में 7 अगस्त से लगातार बच्चों की मौतों की संख्या में इजाफा हुआ है। 7 अगस्त को 9 बच्चों की मौत हुई, 8 अगस्त को 12 तो 9, 10 और 11 को क्रमशः 9, 23, 7 बच्चों की मौत हो चुकी है।