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Friday, August 14, 2026
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इतिहास रचने उतरेंगे कोहली के रनकुबेर, श्रीलंका से तीसरा मैच आज

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

तीन टैस्ट मैचों की सीरिज में 2-0 से बढ़त बना चुकी टीम इंडिया आज श्रीलंका का सूपड़ा साफ करने कैंडी के पल्लीकेली स्टेडियम में उतरेगी। यह टैस्ट मैच महज एक मैच न रहकर एक ऐतिहासिक पल हो सकता है।

जहां श्रीलंका क्रिकेट टीम की इस मैच में इज़्जत दाव पर लगी है, वहीं भारतीय क्रिकेट टीम इतिहास रचने मैदान पर उतरेगी। 85 वर्ष के अपने कॅरियर में जहां भारतीय क्रिकेट टीम के पास पहली बार विदेशी भूमि में तीन मैचों की टैस्ट सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप करने का मौका है। वहीं खिलाडियों की खराब फाॅर्म और चोट से जूझ रही श्रीलंकाई क्रिकेट टीम मुथैया मुरलीधरन के होम टाउन में अपने आत्म सम्मान बचाने उतरेगी। 85 वर्ष में भारत सिर्फ एक बार विदेशी सरजमीं में किसी टैस्ट सीरीज में एक बार तीन टैस्ट मैच जीता है, 1968 में मंसूर अली खां पटौदी की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलेंड को 4 मैचों की सीरीज में 3-1 से हराया था हालांकि पहला मैच जीतने के बाद टीम दूसरा मैच हार गयी थी।

इस मैच में आईसीसी आचार संहिता का उल्लंघन करने के चलते रविंद्र जडेजा बाहर बैठेंगे और संभावना है कि उनकी जगह कुलदीप यादव का खेलेंगे लेकिन चायनामैन के नाम से मशहूर अक्षर पटेल को उनके कवर के तौर पर रखा गया है। वहीं श्रीलंका के लिए बुरी ख़बर है कि चोट के चलते उनके मुख्य गेंदबाज इस मैच में नहीं खेलेंगे। इससे पहले नुवान प्रदीप और असेला गुणारत्ने टीम से बाहर कर दिये गए हैं। प्रदीप और हेराथ की जगह दुसमंथा चमेरा और लाहिरू गमगे खेलेंगे। उम्मीद है कोहली के रनकुबेर इस मैच में इतिहास रचकर अपने फैंस को जश्न मनाने का अवसर जरूर देंगे।

टीम:
भारत: शिखर धवन, लोकेश राहुल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली (कप्तान), अजिंक्य रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, वृध्दिमान साहा (कीपर), हार्दिक पांड्या, मोहम्मद शमी, उमेश यादव, अक्षर पटेल, अभिनव मुकुंद, रोहित शर्मा, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार, ईशांत शर्मा।

श्रीलंका: दीमुथ करुनारत्ने, उपुल थरंगा, कुसल मेंडिस, दिनेश चांडीमल (कप्तान), एंजेलो मैथ्यूज, निरोशन डिक्वेला (कीपर), धनंजय डि सिल्वा, दिलरुवन परेरा, मलिन्डा पुष्पककुमार, दुश्मांथा चमेरा, लाहिरू गमगे, लक्ष्मण सैंडकन, लाहिरू कुमारा, विश्व फर्नांडो, लाहिरू थिरिमने।

मायावती त्यागेंगी अपना “माया” मोह

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

टिकट बेचने और कार्यकर्ताओं से पैसे उगाही जैसे मामलों से घिरी रहने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती कार्यकर्ताओं से पैसे वसूलने के मामले में बैकफुट पर नज़र आ रही हैं। देखा जाए तो माया ने “माया मोह त्यागने का फैसला कर लिया है। पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों ने कहा है कि अब पार्टी टारगेट फिक्स करके पैसे नहीं मांगेगी, बल्कि स्वेच्छा से देने वालों से पार्टी फंड, पब्लिक मीटिंग और जन्मदिन के आयोजन के लिए ही पैसा लिया जाएगा।

बीएसपी से बाहर किए गए नसीमुद्दीन कहते हैं कि बीएसपी ने हर विधानसभा के संगठन से 22 लाख रूपये इकट्ठा करने की बात कही है। वहीं कुछ दिन पहले ही इंद्रजीत सरोज ने मायावती को पैसों की देवी तक कह दिया था। पार्टी में हर जगह इसका विरोध हो रहा है। यहां तक की मेरठ की मंडलीय बैठक में पार्टी में पैसा उगाही को लेकर दो राय हो गयी।

दो दिन पूर्व बीएसपी संगठन की मीटिंग में पैसा न लेने का फरमान सुनाया गया है। जिसके बाद यह माना जा रहा है कि फिलहाल टारगेट फिक्स कर धन इकट्ठा नहीं किया जाएगा। वहीं पार्टी के अंदर ही यह मांग उठी है कि पैसा एकत्रित करने के बजाए पार्टी के संगठनात्मक ढ़ांचे को मजबूत करना चाहिए। कुछ की मांग यह भी है कि विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों से भी पैसे न मांगे जाए और नगर निकाय चुनाव में लड़ना चाह रहे प्रत्याशियों से भी पार्टी फंड में पैसा न लें।

ऐसा नहीं है कि मायावती या उनकी पार्टी पर धन संबंधी यह पहला आरोप लग रहा हो, इससे पहले नोटबंदी के दौरान बसपा के दो खाते सीज़ कर दिए गए थे और लगातार विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उनपर टिकट बेचने के आरोप उन पर लगते रहते हैं।

हामिद अंसारी पर परेश रावल का हमला

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी के सांसद परेश रावल फिर से चर्चा में आ गये हैं। परेश रावल ने इस बार हामिद अंसारी पर निशाना साधा है। हामिद अंसारी का उपराष्ट्रपति का कार्यकाल इसी महीने 10 अगस्त को समाप्त हुआ है, अंसारी ने अपने कार्यकाल ख़त्म होने से पहले देश के मुसलमानों को लेकर एक बयान दिया था।

परेश रावल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर हामिद अंसारी को लेकर ‘GET WELL SOON’ लिखा है। परेश रावल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ‘Wishing shri Hamid Ansari ji a long and a healthy life so plz GET WELL SOON !’

हामिद अंसारी ने अपने बयान में कहा था कि “देश के मुसलमानों में एक बेचैनी बनी हुई है और उनमें असुरक्षा की भावना बनी हुई है। हामिद अंसारी के इसी बयान को लेकर अन्य लोगों ने भी उनकी कड़ी आलोचना की है। अंसारी ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके मंत्रीमंडल और सहयोगियों के सामने भी असहनशीलता का मुद्दा उठाया है। इसी के साथ हामिद अंसारी ने इसे परेशान करने वाला विचार करार दिया कि व्यक्तियों की भारतीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हामिद अंसारी के इस बयान पर बीजेपी के मुस्लिम नेता शाहनवाज हुसैन ने जवाब देते हुए कहा है कि इस पूरी दुनिया में मुसलमानों के रहने के लिए भारत से बेहतर कोई दूसरा देश नहीं है और न ही हिन्दू से अच्छा कोई दोस्त मिल सकता है।

पहलाज निहलानी बाहर, प्रसून जोशी सेंसर बोर्ड के नए अध्यक्ष

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

“मैं कभी बतलाता नहीं, पर अंधेरे से डरता हूं मैं मां” गीत लिखने वाले प्रसून जोशी सेंसर बोर्ड के नए अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालेंगे। साथ ही विद्या बालन को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड अर्थात सेंसर बोर्ड का सदस्य बनाया गया है।

16 सितंबर 1968 को उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिले में जन्मे प्रसून ने महज 17 वर्ष की आयु में लिखना शुरू कर दिया था। प्रसून हिंदी के बेहतरीन कवि, पटकथा लेखक और गीतकार हैं उन्होंने हम तुम, फ़ना, रंग दे बसंती जैसी कई शूपर डूपर हिट फिल्मों में गीतों के लिए अपने बोल दिये हैं। एमएससी और उसके बाद एमबीए करने वाले कला के धनी प्रसून अंतराष्ट्रीय एड कंपनी मैकेन एरिक्सन के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। एड गुरू के नाम से विख्यात और कई जबरदस्त कैचलाइनों को अपनी कलम से इजाद करने वाले प्रसून ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीयूष पांडे के साथ मिलकर बीजेपी के एड कैंपेन का गीत “मेरा देश बदल रहा है” लिखा था।

पीसीएस अधिकारी के घर में जन्मे प्रसून ने राजकुमार संतोषी की फिल्म लज्जा से बाॅलीवुड में कदम रखा और उसके बाद एक के बाद एक नए मुकाम हासिल करते चले गए। फिल्म फ़ना के गीत चांद सिफारिश और फिल्म “तारे जमीन पर” के गीत “मां” के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार के दो फिल्मफेयर अवार्ड वो अपनी झोली में डाल चुके हैं और गीत मां के लिए ही उन्हें राष्ट्रीय पुरूस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

कविताओं को अपना पहला प्रेम बोलने वाले प्रसून ने उस्ताद हफीज़ अहमद खान साहब से शास्त्रीय संगीत की दीक्षा ली। हिंदी उर्दू के लिए बाल्य काल से उपजा प्रेम आज भी प्रसून की लेखनी में दिखाई देता है। कलम की जादू के चलते ही उन्हें शैलेंद्र सम्मान से भी सम्मानित किया गया है।

हालांकि अब तक अपनी सभी जिम्मेदारियों की भली भांति पूर्ति रहे प्रसून को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष की नयी पारी का शुभारंभ करते देखना दिलचस्प होगा क्योंकि इनसे पूर्व सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी अपने अड़ियल रूख के चलते काफी चर्चा में रहे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ बाॅलीवुड भी उनके काम करने के अंदाज से खासा नाराज़ था।

सैकड़ो बच्चों की क़ातिल ब्लू व्हेल

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com
किसी जमाने में मां-बाप बच्चों से बोलते थे- “बेटा चोरी करना पाप है। चोरी नहीं करनी चाहिए।” “झूठ बोलना पाप है झूठ नहीं बोलना चाहिए” और भी पता नहीं कितने तरह के नैतिकता के पाठ पढ़ाया करते थे लेकिन आज कल ये नैतिकता के पाठ सिमटकर सिर्फ- “बेटा मोबाइल दिया है तो ब्लू व्हेल मत डाउनलोड कर लेना“ पर आकर सिमट गया है।
कई बच्चों की जान ले चुका गेम ब्लू व्हेल दुनिया भर में दहशत का माहौल बनाता जा रहा है और अब इसका शिकार भारत भी बन चुका है। जहां मुबंई में एक छात्र ने इस गेम को पूरा करने के चक्कर में घर की छत से कूदकर अपनी जान दे दी तो वहीं। गुरुवार के दिन मध्य प्रदेश के इंदौर में भी एक बच्चे ने कुछ ऐसी ही कोशिश को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश की है।
13 साल के कक्षा सात में पढ़ने वाले बच्चे ने ब्लू व्हेल का चैलेंज पूरा करने के लिए अपने स्कूल की तीसरी मंजिल की रेलिंग पर चढ़कर कूदने लगा कि तभी उसके दोस्तों ने उसे देखते ही शोर मचा दिया और इसी दौरान वहां मौजूद स्पोर्ट्स एवं फिजिकल ट्रेनर ने उसे कूदने से रोक दिया। मामला पुलिस में पहुंचा तो पता चला बच्चा अपने पिता के फोन में ब्लू व्हेल गेम खेलता था फिलहाल पुलिस छात्र को काउंसलिंग के लिए किसी मनौवैज्ञानिक के पास ले जाने पर विचार कर रही है।
जानलेवा बन चुके इस गेम के विरोध में कई आवाजें उठी हैं लेकिन दिन बर दिन इसे डाउनलोड करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस बात से यह स्पष्ट होता है कि गेम के प्रति लोगों का रूझान बढ़ता जा रहा है। रूस से शुरू हुआ यह मौत का खेल अब दुनिया के कई हिस्सों में पहुंच चुका है और लगातार देश इसकी चपेट में आ रहे हैं। लगभग 50 दिन तक चलने वाले इस खेल में अब तक 100 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है।
ब्लू व्हेल से पहले पोकेमाॅन गो नाम का भी एक गेम आया था जिसकी वजह से काफी बच्चों की जान गयी थी हालांकि बाद में विरोध के चलते उसे भारत समेत कई देशों में बैन कर दिया गया था। कुछ ही इसी तरह का विरोध ब्लू व्हेल के लिए भी होने लगा है। भारत में कई राज्य सरकारें इस गेम का विरोध कर रही हैं तो सदन में भी ब्लू व्हेल का मुद्दा ज़ोर शोर से उठाया गया है। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी एकदम से नोटबंदी का ऐलान कर देने वाली सरकार ने इस खेल को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया। क्या अभी भी कुछ और घटनाओं का इंतज़ार किया जा रहा है। फिलहाल ये गेम सरकार बैन करे ना करे आप प्रयास कीजिए की आपके या आपके आस-पास के बच्चे इस गेम को न खेलें। बच्चों के लिए थोड़ी सी सतर्कता जरूरी है वर्ना शाम को आप जब आॅफिस से घर आते हैं और बच्चों के मांगने पर बिना सोचे समझे उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं वो आपके बच्चे के संग आपके लिए भी खतरनाक हो सकता है।
क्या मोबाइल फोन और कंप्यूटर पर खेले जाने वाले खेलों की कोई नियमावली नहीं होनी चाहिए़़? क्या सरकारों को इस तरह के खेलों पर त्वरित कार्यवाही नहीं करनि चाहिए? क्या इस तरह के गेम बनाने वाले निर्माताओं में इंसानियत का थोड़ा सा भी अंश नहीं होता? खेल के बारे में सुनने के बाद ऐसे कई सवाल मन में आए लेकिन जवाब फिर वही कोई सोचे न सोचे हमें खुद सोचना होगा और अपने बच्चों को इस तरह के जानलेवा खेलों से दूर रखना होगा।

हैदराबाद ब्लास्ट केस में 10 आरोपियों को किया गया रिहा

सौम्या केसरवानी। Navpravah.com
हैदराबाद में साल 2005 में हुए आत्मघाती विस्फोट मामले में हैदराबाद की महानगर सत्र अदालत ने सभी 10 आरोपियों को अब बरी कर दिया गया है, हैदराबाद ब्लास्ट केस में अदालत ने आरोपियों को दोषी नहीं माना क्यूंकि उनके पास सबूतों अभाव था, इनमें से एक आरोपी कलीम पिछले 12 साल तक जेल में बंद रहा, उसका पारिवारिक जीवन खत्म हो चुका है।
हैदराबाद के बेगमपेट इलाके में 12 अक्टूबर, 2005 को कार्यबल कार्यालय में एक बांग्लादेशी आत्मघाती हमलावर द्वारा किए गए विस्फोट में एक होमगार्ड की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया था। केस की जांच कर रही SIT ने दावा किया कि इस हमले के पीछे बांग्लादेशी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी का हाथ था।
वहीं एक आरोपी गुलाम यजदानी दिल्ली में मारा गया था, बचाव पक्ष के वकील अब्दुल अजीम ने बताया कि अभियोजन पक्ष सबूत पेश करने में असफल रहा, लिहाजा अदालत ने सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपियों को बिना किसी सबूत के गिरफ्तार किया था।

राम जन्म भूमि विवाद- कोर्ट ने की अंतिम सुनवाई की तारीख तय

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में आया बड़ा मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर अंतिम सुनवाई का ऐलान किया.  समय से अधर में लटका राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद अब जल्द ही समाप्त होने के आसार नज़र आ रहे हैं।

आज उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना विवाद में अंतिम सुनवाई पांच दिसंबर से करने का फैसला किया है। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी पक्षों को न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा का पालन करना होगा और किसी भी परिस्थिति में स्थगन नहीं दिया जायेगा।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ करीब डेढ़ घंटे की गहन मंत्रणा के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई शुरू करने के बारे में सहमति पर पहुंची।
उल्लेखनीय है कि राम लला की ओर से वरिष्ठ सी एस वैद्यनाथन और उप्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले की शीघ्र सुनवाई करने पर जोर दिया था, जबकि दूसरे पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अनूप जार्ज चौधरी और राजीव धवन अगले साल जनवरी से पहले इस पर सुनवाई शुरू करने के पक्ष में नहीं थे।

न्यायालय ने इस मामले के सभी पक्षों से कहा कि इसमें शामिल दस्तावेज़ों का 12 सप्ताह के भीतर अंग्रेजी में अनुवाद कराएँ क्योंकि ये आठ अलग अलग भाषाओं में हैं। इसके अलावा, पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह इस मालिकाना हक के विवाद के निर्णय के लिये उच्च न्यायालय में दर्ज साक्ष्यों का दस सप्ताह के भीतर अंग्रेजी में अनुवाद कराए।

इसी बीच शिया वक्‍फ बोर्ड ने शुक्रवार को कोर्ट में यह बयान दिया कि मस्‍ज‍िद कहीं भी बन सकती है। शिया वक्‍फ बोर्ड के इस बयान को लेकर भी काफी विवाद हो रहा है। समाचार एजंसी एएनआई से बातचीत में शिया वक्फ बोर्ड के वकील एमसी ढींगरा ने कहा, “बोर्ड ने यह तय किया है कि उन्हें अलॉट की गई एक-तिहाई जमीन वह छोड़ने को तैयार है, ताकि दोनों धर्मों के लोगों के बीच किसी भी तरह का विवाद न हो। फैसले की वजह यह है कि अगर मस्जिद बन भी जाए तो उसमें लाउडस्पीकर का इस्तेमाल होगा। ऐसे ही इलाके में मंदिर हैं, जहां पर भी लाउडस्पीकर इस्तेमाल होंगे। ऐसी स्थिति में दोनों धर्मों के लोगों के बीच परेशानी बढ़ेगी।” आपको बता दें कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड की विवादित भूमि को तीन हिस्सों में विभक्त करके इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाडा और राम लला के बीच बांटने की व्यवस्था दी थी।

सत्ता को लेकर नवाज परिवार में छिड़ा गृह युद्ध

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com
हाल ही में पनामा पेपर्स लीक के मामले में अपनी कुर्सी से हाथ धो चुके पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की शराफ़त पर दाग अब उनके ही परिवार के लोग लगाने लगे हैं। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य करार दिये जाने के बाद शरीफ को अपनी प्रधानमंत्री की कुर्सी के साथ-साथ अपनी संसद की सदस्यता से भी हाथ धोना पड़ा था जिसके बाद प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे कद्दावर चेहरे के रूप में उनके छोटे भाई शाहबाज शरीफ को देखा जा रहा था लेकिन नवाज ने अपने भाई को आईना दिखाते हुए शाहिद अब्बासी को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया।
शाहबाज को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर न देखकर शाहबाज की पत्नि तहमिना दुर्रानी ने नवाज के खिलाफ ट्विटर पर ट्विटयुद्ध छेड़ दिया है। वे अपने हर ट्विट में नवाज़ के ख़िलाफ आग उगलती हुई नज़र आ रही है। नवाज़ की आलोचना करते हुए एक ट्विट में वे लिखती हैं कि नवाज़ एकदम औसत दर्जे के सलाहकारों से घिरे हुए हैं। वे उनकी बात सुनते हैं और उनका ख़्याल रखते हैं। तहमिना की यह नाराज़गी तब खुलकर सामने आयी जब नवाज ने शाहबाज को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठाने का फैसला किया।
नवाज ने पहले यह भी कहा था कि अब्बासी को प्रधानमंत्री बनाना कोई तात्कालिक या कामचलाऊ कार्रवाई नहीं है वे उन्हें अपने स्थायी उत्तराधिकारी के रूप में देखते हैं। वहीं गुरूवार को हुई अपने रोड शो में उन्होंन अपनी बात को पलटते हुए कहा कि वे अब्बासी को अगले चुनाव तक प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं। विशेषज्ञ इस बात से यही मतलब निकाल रहे हैं कि अगले चुनाव में जीतने के बाद नवाज़ किसी और को प्रधानमंत्री की कुर्सी का स्वाद चखा सकते हैं। फिलहाल आशंका इस बात की जताई जा रही है कि नवाज़ अपनी बेटी को अपनी सीट से चुनाव लड़ाएंगे।
उधर रोड शो के बाद भी तहमिना का गुस्सा ट्विटर पर साफ नज़र आया और वे इस रोड शो की आलोचना करती हुई नज़र आयी। उन्होंने लिखा कि नवाज़ के रोड शो से काफी दिक्कत हुई। जनजीवन पर काफी बुरा असर पड़ा। उन्होंने यह भी लिखा की नवाज की रैली से लोगों का जो नुकसान हुआ है उसका हर्जाना कौन भरेगा।
ऐसा पहली बार नहीं था जब तहमिना ने नवाज़ पर सार्वजनिक रूप से शाब्दिक हमले किए हों। पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद भी वे नवाज़ को अपनी सारी काली कमाई देश के नाम करने की सलाह भी दे चुकी हैं। फिलहाल नवाज़ अपने सलाहकारों से घिरे हैं तो यह मुश्किल है कि वे तहमिना की सलाह पर काम करें।

“टॉयलेट एक प्रेम कथा’ को किसी लक की ज़रूरत नहीं” – ऋतिक रोशन का ट्वीट

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
अक्षय की फिल्म को इंडस्ट्री मे इतना प्रोत्साहन मिल रहा है, जिसे देखो वो खिलाडी कुमार की ‘टायलेट एक प्रेम कथा’ की तारीफ कर रहा है।
अक्षय कुमार और ऋतिक रोशन एक दुसरे को काफी अरसे से जानते हैं, दोनों की फॅमिली भी एक दूसरे के करीब है।
बर्थडे हो यह फिल्म रिलीज़ दोनों केदुसरे को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर विश करते नज़र आते है। ऐसा ही कुछ इस बार ऋतिक ने अपने  दोस्त अक्षय कुमार के लिए किया है, उन्होंने ट्विटर पर अपने इस दोस्त को ट्वीट करते हुए कहा कि “आपकी फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कहा रिलीज़ हुई है, आपको अपनी इस फिल्म के लिए किसी भी प्रकार की लक की ज़रूरत नहीं है। यह फिल्म अपने आप ही काफी शानदार हैं और बढ़िया प्रदर्शन करेगी।” अक्षय ने भी अपने दोस्त के ट्वीट को रिप्लाई कर उनका शुक्रिया अदा किया है।
अक्षय कुमार की फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ थिएटर में आज रिलीज़ हुई है। वैसे ऋतिक ही नहीं बल्कि इंडस्ट्री का एक छोटा बड़ा स्टार अक्षय कुमार को उनकी फिल्म के लिए बेस्व्त विशेज दे रहा है। रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा ने  अपनी अपनी तरफ से खिलाडी कुमार की फिल्म का प्रमोशन कर रहे है।
वैसा यह पहला मौका नहीं हैं जब अक्षय की फिल्म को इंडस्ट्री से इतना प्रोत्साहन मिल रहा है। इससे पहले जब खिलाडी कुमार की रुस्तम रिलीज़ हुई थी तब भी उन्हें बॉलीवुड से काफी प्यार मिला था।

वाइरल ख़बर: 3 पहियों वाली बाइक का सच

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
सोशल मीडिया खासकर व्हाटसएप पर एक मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें 3 पहियों वाली एसी बाइक दिखाई जा रही है| कई जगह पर एक वीडियो भी दिखाया जा रहा है, जिसमें इस बाइक को तैयार करने के पीछे इंडियन इंजीनियर्स का हाथ बताया गया है। हद तो तब हो गई जब मेक इन इंडिया कैंपेन के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे 15 अगस्त को लॉन्च करने वाले हैं, लेकिन सच तो ये है कि ऐसी कोई बाइक देश में नहीं आ रही और न ही बन रही है।
जिस 3 पहिए वाली बाइक की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाए जा रहे हैं, वह असल में 3 पहिए वाली एक छोटी कार है। यह कार नीदरलैंड की Carver कंपनी की है, जिसे साल 2006 में लॉन्च किया गया था। इस कार में एक व्यक्ति के बैठने की जगह थी। बाजार में न चल पाने की वजह से इस कार को कुछ समय बाद ही इसे बंद कर दिया गया।
इस खुलासे के बाद अब भी कई लोग इस बात को मानते हैं कि यह कार इंडियन मार्केट में पक्का से आएगी। अगर ​इंडियन मार्केट की बात करें तो इस तरह का प्रोडक्ट यहां भी नहीं टिकने वाला है।