28 C
Mumbai
Monday, August 17, 2026
Home Blog Page 916

ऋतिक-कंगना मामले में आया एक और ओपन लेटर, यामी गौतम ने कहा, “इंतज़ार करिए, आप फ़ैसला ना सुनाइए”

Another open letter in the Hrithik-Kangna case, Yami Gautam said, "Wait, you can not hear the decision"

एंटरटेनमेंट डेस्क । Navpravah.com

ऋतिक और कंगना के बीच छिड़ी जंग में ऋतिक के इंटरव्यू के बाद एक नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में फरहान अख्तर ने एक ओपन लैटर लिखकर इस मुद्दें पर चर्चा की। अब इस मामले पर अपनी राय देते हुए फिल्म ‘काबिल’ से ऋतिक की को-एक्ट्रेस यामी गौतम ने फेसबुक पर एक लैटर पोस्ट किया है।

यामी गौतम ने अपने लेटर में लिखा, “वैसे तो मैं सोशल मीडिया पर ज्यादा टीका टिप्पणी नहीं करती हूं, लेकिन आज मैं कुछ कहना चाहूंगी क्योंकि एक महिला के तौर पर मैं जो देख रही हूं वो मुझे बहुत डराता है। ये लैटर इंडस्ट्री के दो बड़े स्टार्स के बीच चल रहे विवाद को लेकर है। खुशकिस्मती से इनमें से एक के साथ मुझे काम करने का अवसर मिला।  लेकिन मैं ये एक दोस्त या को-स्टार के तौर पर नहीं लिख रही हूं। मैं ये एक औरत और देश की नागरिक होने के तौर पर लिख रही हूं। मैं अपनी बात को संक्षेप में और यथासंभव निष्पक्ष तरह से रखने की कोशिश करूंगी।

मैं कानूनी जानकार नहीं हूं। मैं मीडिया के जरिये ही जानती हूं कि इस केस में क्या हुआ है, लेकिन अब यह एक जेंडर वार बन चुका है। इसमें आदमी को ही गलत ठहरा दिया गया है। लोगों ने सोच लिया है कि वह आदमी है, इसलिए वही दोषी है, क्योंकि ऐसा ही हमेशा से होता आया है. आदमी ने औरत को सदियों से प्रताड़ित किया है, तो  इस मामले में भी ऐसा ही मान लिया गया है कि गलती आदमी की ही है। ये खतरनाक है।

यामी का कहना है कि हमें किसी को भी दोषी ठहराने से पहले कानून को ये साबित करने का मौका देना चाहिए कि असल में दोषी कौन है। उन्होंन लिखा, ‘मेरा कहना सिर्फ इतना है कि इसे जेंडर इश्यू न बनाया जाए। इसे दो लोगों के बीच की लड़ाई ही समझें। पहले तथ्यों को सामने आने दें, तब तक के लिए अपनी जजमेंट से किसी को भी दोषी करार न दें। ये लड़ाई एक आदमी और औऱत के बीच है, इसका ये मतलब नहीं कि इसे जेंडर फाइट बना दिया जाए।

मैं यहां किसी को दोषमुक्त कराने की कोशिश नहीं कर रही हूं, मैं किसी भी एक पार्टी द्वारा द्वेष की सलाह नहीं दे रही हूं। मैं बस इतना कह रही हूं कि इसे दो जेंडर्स के बीच का झगड़ा न बनाया जाए। आइए इसे दो लोगों के बीच की एक ऐसी लड़ाई रहने दें, जिनका अतीत में पत्राचार न हुआ हो। इस मामले की सभी बातों को सामने आने दिया जाए और तब तक हमारे जजमेंट को सुरक्षित रखा जाए।

बस क्योंकि एक आदमी और औरत के बीच की लड़ाई है, इसका ये मतलब नहीं कि ये दो जेंडर्स के बीच की लड़ाई है। इसी तरह हर मुद्दे को दो जेंडर के बीच की लड़ाई बनाने से समाज में इस तरह के सेक्सिस्ट इश्यूज से निपटते समय हमारा ध्यान भटक जाता है। ऐसी इश्यूज जो हमारे समाज को प्लेग की तरह ग्रसित करते हैं।”

 

पत्नी ने नहीं रखा करवाचौथ का व्रत, पति ने पत्नी को चाकू से किया घायल, ख़ुद कर ली आत्महत्या

wife-did-not-keep-karwachauth-vrat-wife-fast-husband-wounded-wife-with-knife-committed-suicide
एनपी न्यूज़ नेट्वर्क । Navpravah.com

पत्नी के करवाचौथ व्रत न रखने से नाराज एक पति ने पत्नी पर चाकू से हमला कर दिया और खुद बिल्डिंग की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना दिल्ली के रोहिणी इलाके की है। घायल पत्नी को पड़ोसियों ने इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने बताया कि यह घटना शुक्रवार रात हुई, जब जसविंदर सिंह अपनी पत्नी से मिलने के लिए उसके मायके पहुंचा था।

उन्होंने बताया कि जसविंदर अपनी पत्नी को छत पर ले कर गया, जहां बातचीत के बाद उनमें झगड़ा हो गया। गुस्से में उसने पत्नी को छुरा मारा और चौथी मंजिल के फ्लैट की छत से नीचे कूद गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

खबर के मुताबिक इन दोनों ने हाल ही में तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी भी दाखिल की है और एक दूसरे से अलग रह रहे हैं। रविवार को पति जसविंदर सिंह अपनी बेटी से मिलने के लिए पत्नी के घर गया, जहां उसने पत्नी को कुछ जरूरी बात के लिए छत पर आने को कहा। छत पर आने के बाद दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया जिसके बाद जसविंदर ने अपनी पत्नी को चाकू से मारकर घायल कर दिया।

पत्नी पर हमले के बाद जसविंदर ने छत से नीचे कूद गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घायल पत्नी शोर मचाते हुए सीढ़ियों से उतरकर पति के शव के पास पहुंची, जहां वो बेहोश हो गई। शोर सुनकर आए पड़ोसियों ने मामले की सूचना को देते हुए महिला को अस्पताल में भर्ती कराया। होश में आने के बाद महिला ने बताया कि यह पहली बार था, जब उसने करवा चौथ का व्रत नहीं रखा था, जिससे जसविंदर काफी नाराज़ था। वहीं पुलिस ने कहा कि वो केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

पत्नी का बीएसए अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस दंपति की चार साल की एक बच्ची है। उनका विवाह पांच साल पहले हुआ था। पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुटी है।

 

सेना ने माना, शवों को गत्ते में लपेटना थी चूक

army-assumes-that-the-dead-body-was-wrapped-in-the-cardboard

एनपी न्यूज़ डेस्क|Navpravah.com

अरुणाचल प्रदेश में वायुसेना का एमआई 17 वी5 हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था। इसमें दो जवान और पांच क्रू मेंबर समेत सात जवान शहीद हो गए थे, शहीद हुए जवानों के शवों को गत्ते में रखे जाने की तस्वीरें रविवार को सामने आई थीं, कई लोगों ने इसके लिए सरकार और सेना के तरीके पर सवाल उठाए। फोटो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अपना गुस्सा भी जमकर सरकार पर उतारा।
विवाद बढ़ता देख सेना ने अपनी गलती मानी और कहा कि सेना ने कहा कि भविष्य में शवों को उचित तरीके से पहुंचाना की पूरी कोशिश की जाएगी। सेना ने एक बयान जारी करके कहा कि स्थानीय संसाधनों से शवों को लपेटना भूल थी, ये गलती थी, शहीद सैनिकों को हमेशा ही पूरा सैन्य सम्मान दिया गया है।
रविवार को उत्तरी सैन्य कमान के लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एच एस पनाग ने शवों की तस्वीर के साथ अपने ट्वीट में कहा, सात युवा अपनी मातभूमि भारत की सेवा करने के लिये कल दिन के उजाले में निकले.और वे अपने घर इस तरह आए। उनके इस ट्वीट के बाद ही सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर सवाल उठने लगे थे।
बाद में सेना द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में सीमित संसाधनों के कारण हेलिकॉप्टर ज्यादा भार नहीं ले जा सकते। इसलिए बॉडी बैग्स या ताबूत के बजाय शव उपलब्ध स्थानीय संसाधनों में लपेटे गए। बयान में कहा गया कि गुवाहाटी बेस अस्पताल में पोस्टमार्टम के तुरंत बाद शवों को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ लकड़ी के ताबूत में रखा गया था।
एक अधिकारी के अनुसार तस्वीरें उस वक्त ली गईं जब शव गुवाहाटी में थे। लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवत्त) पनाग ने कहा कि जब तक ताबूत उपलब्ध नहीं हों तब तक शवों को अग्रिम स्थानों से ले जाने में उचित सैन्य बॉडी बैग्स का अवश्य इस्तेमाल किया जाना चाहिये।

थेलर के नाम अर्थशास्त्र का नोबेल, चूके रघुराम राजन

names-of-thalers-economics-chuckle-raghuram-rajan

शिखा पाण्डेय|Navpravah.com

वर्ष 2017 का इकोनॉमिक्‍स क्षेत्र का नोबल पुरस्कार अमेरिका के दिग्‍गज अर्थशास्‍त्री रिचर्ड एच थेलर को दिया गया है। रॉयल स्‍वीडिश अकेडमी ने कहा कि थेलर ने इकोनॉमिक्‍स और साइकोलॉजिकल एनालिसिस के बीच एक ब्रीज बनाने का काम किया है। अवार्ड के रूप में उन्‍हें 9 मिलियन स्‍वीडिश क्रोन (1.1 मिलियन डॉलर) यानी करीब 7 करोड़ रुपए प्राइज दिया जाएगा।

12 सितंबर, 1945 को जन्मे अमेरिकी अर्थशास्त्री थेलर शिकागो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। वो अर्थशास्त्र में कई प्रसिद्ध किताब लिख चुके हैं। नोबल ज्‍यूरी के अनुसार साइकोलॉजी और इकोनॉमिक्‍स के तार किस तरह जुड़े हैं, इस क्षेत्र में थेलर ने काफी काम किया है। जूरी टीम के अनुसार थेलर ने किसी व्यक्ति के आर्थिक फैसले लेने के पीछे के मनोवैज्ञानिक कारणों के व्यावहारिक अर्थशास्त्र की सूक्ष्म पड़ताल की है, जो इकोनॉमिक्स के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि इस साल के इकोनॉमिक्‍स नोबेल की रेस में भारत की ओर से आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन भी शामिल थे। राजन और थेलर के अलावा अन्‍य 4 लोग भी इस रेस में शामिल थे।

महत्त्वपूर्ण तथ्य-

-क्लैरिवेट एनालिटिक्स एकेडमिक और साइंटिफिक रिसर्च अपने रिसर्च के आधार पर नोबल पुरस्कार के संभावित विजेताओं की लिस्ट भी तैयार करती है।

– इकोनॉमिक्स के नोबल पुरस्कार को आधिकारिक तौर पर स्वेरिजेज रिक्सबैंक प्राइज कहा जाता है।

– इसकी शुरुआत 1968 में हुई थी। अर्थशास्त्र को काफी देर बार नोबल पुरस्कारों में शामिल किया गया।

-भारत के पूर्व आरबीआई गर्वनर भी उन छह अर्थशास्त्रियों में से एक थे, जिन्हें क्लैरिवेट एनालिटिक्स ने इस साल अपनी लिस्ट में शामिल किया था। कॉर्पोरेट फाइनेंस के क्षेत्र में किए गए काम के लिए राजन का नाम लिस्ट में आया था।

 

मायावती ने केंद्र सरकार पर बोला हमला

एनपी न्यूज़ नेट्वर्क । Navpravah.com
9 अक्टूबर को बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि होती है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित बसपा कार्यालय में आज कांशीराम की पुण्यतिथि कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
बसपा सुप्रीमो मायावती भी पुण्यतिथि कार्यक्रम में पहुंची थी। जहाँ उन्होंने कांशीराम को भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी और साथ ही बसपा सुप्रीमो ने कार्यक्रम को संबोधित भी किया। कार्यक्रम  को सम्बोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि, सरकार न बनने से सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की नीति को आघात पहुँच रहा है और कहा कि भाजपा सरकार फेल हो गयी है।
 
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भाजपा की सरकार काम नहीं कर रही है, बस बड़ी-बड़ी बात कर रही है। बड़ी बातें करने से कुछ नहीं होगा, जनता को काम चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ध्यान बंटाने के लिए राष्ट्रधर्म, देशभक्ति जैसे मुद्दों को उभारने का प्रयास कर रही है। रोजी-रोटी, महंगाई, आत्म-सम्मान और सुरक्षा लोगों की पहली आवश्यकता है। भाजपा मुंह में राम और बगल में छुरी के मुहावरे को चरितार्थ कर रही है। वैसे भी अब जानता सब समझ रही है और आगामी 2019 के चुनाव में जनता भाजपा को सत्ता से बाहर करके जवाब देगी।

बिग बॉस 11: ज़ुबेर ने सलमान से कहा, विवेक ओबेरॉय नहीं हूँ, जो तेरे से डर जाऊँगा

कोमल झा । Navpravah.com
बिग बॉस 11 में पहले हफ्ते के नॉमिनेशंस में ही बाहर हुए कंटेस्‍टेंट जुबैर खान ने सलमान खान के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कर सुर्खियां बना दी हैं।  इसमें उन्‍होंने सलमान पर बिग बॉस में वीकेंड वार के दौरान धमकी देने का आरोप लगाया है जिसकी वजह से उन्होंने सुसाइड करने की भी कोशिश की।
जुबैर द्वारा घर के सदस्यों के साथ गाली गलौच वाली भाषा का इस्तेमाल करने की वजह से वीकेंड का वार में सलमान खान ने काफी खरी-छोटी सुनाई थी। सलमान ने गुस्से में जुबैर को नल्ला डॉन तक कह दिया। सलमान यहीं नहीं रुके, आगे उन्होंने ये भी कहा कि वो फ्रॉड हैं। जब जुबैर ने सलमान को सॉरी भाई बोला तो वो और भड़क गए और कहा कि तू मुझे भाई नहीं बोलेगा। सलमान ने कहा, नाम खराब करने आते हैं यहां, अम्मी का नाम खराब करोगे, मोहल्ले का नाम खराब करोगे और क्या बोलोगे कि बच्चों के लिए आया हूं। सूत्रों के मुताबिक सलमान की डांट के बाद जुबेर टेंशन में आ गए और उन्होंने बहुत सारी गोलियां खा लीं। जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब घर से बाहर आने के बाद जुबैर ने एक इंटरव्यू देते हुए सलमान को खुला चैलेंज दिया है। उन्होंने बिग बॉस के कॉन्ट्रैक्ट के कुछ सीक्रेट्स को भी जारी कर दिया है।
जुबैर ने सलमान खान और कलर्स पर इल्जाम लगते हुए कहा है, ‘सलमान ने मुझे नेशनल टीवी पर इंडस्ट्री में काम नहीं करने देने की धमकी दी है और बाहर निकलने पर कुत्ता बनाने की बात कही है। उन्होंने कभी भी खुद को दाउद की बहन हसीना पारकर का दामाद नहीं बताया। जुबैर ने यह भी कहा, कि कलर्स के लोग रोजाना दो बार लड़ाई करने और दो बार एक दूसरे को गाली देने के लिए कहते थे। आपसे कहा जाता है कि गाली वाले सेग्मेंट को काट दिया जाएगा। जबकि ऐसा होता नहीं है। वो आपकी नकारात्मक छवि दिखाते हैं, ताकि शो को टीआरपी मिल सके। वो मुझे रोजाना 5 लाइनें बोलने के लिए देते थे। मुझे नहीं पता था कि वो मुझे किस तरह से दिखाते थे, लेकिन बाहर आने के बाद मैंने उसे देखा। जुबैर ने सलमान को धमकी देते हुए ये तक कह दिया कि वो विवेक ओबेरॉय नहीं हैं, जो सलमान से डर जाएं। जुबैर और उनकी वकील ने ये भी कहा कि कलर्स चैनल के लोगों ने जान बूझकर उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती न करवाकर प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया।
जुबैर ने यह भी कहा कि मैं अपने बीवी बच्चों के लिए बिग बॉस में गया था, ताकि उन्हें बता सकूं कि मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं। तेरे को क्या पता बच्चों के बारे में। तू कौन होता है मुझे बोलने वाला। तू बस शर्ट उतारकर नाच सकता है। वैसे जुबैर खान पर खुद को हसीना पारकर का दामाद बताने का और हसीना फिल्म का प्रोड्यूसर बतलाने का भी इल्जाम लगा था। जबकि हसीना फिल्म के को-प्रोड्यूसर और दाऊद परिवार के सदस्य समीर आंतुले ने जुबैर को फ्रॉड बताया है। उन्होंने कहा, जुबैर फ्रॉड है और उसका हमारे परिवार से कोई कनेक्शन नहीं है। वो दाऊद का नाम पब्लिसिटी के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

रेल मंत्री पीयूष गोयल The Wire पर 100 करोड़ की मानहानि का करेंगे केस

railway-minister-piyush-goyal-defaming-100-crores-on-the-wire

एनपी न्यूज़ डेस्क|Navpravah.com

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी के बारे में भ्रामक स्टोरी छापने को लेकर न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ मुश्किल में घिर गई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि गलत तरीके से खबर पेश करने के चलते जय शाह द वायर पर 100 करोड़ के मानहानि का मुकदमा करेंगे।

वायर ने लिखा था कि, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की कंपनी टेम्पल इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड मार्च 2013 में घाटे में थी और ये घाटा 6,239 रुपये था, मांर्च 2014 में भी कंपनी घाटे में रही और घाटा था 1,724 रुपये, लेकिन 2014-15 में ये कंपनी मुनाफे में आ गई और टर्नओवर 80 करोड़ को पार कर गया।

पीयूष गोयल ने कहा कि वायर की स्टोरी से अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। बीजेपी अध्यक्ष के बेटे की कंपनी में हर प्रकार के ट्रांजेक्शन के सारे हिसाब-किताब कानून के अनुसार ही किए जाते हैं, उनमें टैक्स भरे जाते हैं। वेबसाइट ने बिना तथ्यों के देखे पूरी तरफ से गलत आंकड़े देकर झूठ फैलाने की कोशिश की है।

इस मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने इस मामले पर बीजेपी से कई सवाल पूछे हैं, सिब्बल ने कहा है कि जय की कंपनी का अचानक टर्नओवर 80 करोड़ कैसे हो गया? ऐसा है तो इस मामले में सीबीआई और ईडी आखिर क्या कर रही है? कांग्रेस नेता ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 

पीएम ने नहीं दिया वक्‍त, टूटी शांति निकेतन की 66 साल पुरानी परंपरा

करना चाहता हूँ देश की सेवा -पीएम मोदी

सौम्या केसरवानी।Navpravah.com

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार बीते 66 सालों में पहली बार पश्चिम बंगाल स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय पहली बार बगैर दीक्षांत समारोह किए छात्रों को उपाधियां (डिग्री) देगा। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने टेलीग्राफ को बताया कि दीक्षांत समारोह के लिए चांसलर या उसके द्वारा नियुक्त किसी गणमान्य की मौजूदगी जरूरी है।

विश्व भारती विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने टेलीग्राफ को बताया कि उन्हें कई बार अनुरोध करने के बावजूद मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से कोई जवाब अब तक नहीं मिला है।

विश्व भारती के अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी और को भी ये दायित्व नहीं दिया जैसे मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री रहने के दौरान तत्कालीन राज्यपाल एमके नारायणन को सौंपा था।

दत्ता के अनुसार जब पीएमओ से जवाब नहीं आया तो मानव संसाधन मंत्रालय ने विश्वविद्यालय से कहा कि वो दीक्षांत समारोह का इंतजार किए बगैर प्रमाणपत्र वितरित कर दे।

विश्व भारती में पिछले चाल साल से दीक्षांत समारोह नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय के करीब 15 हजार स्नातकों और परास्नातकों को डिग्री दी जानी है। विश्वविद्यालय ने बताया है कि जो छात्र डिग्री के लिए आवेदन कर रहे हैं उन्हें यथाशीघ्र इसे दिया जा रहा है।

 

गुजरात हाईकोर्ट : गोधरा केस मे 11 दोषियों के फांसी की सजा उम्र कैद में हुई तब्दील

gujarat-high-court-11-convicts-in-godhra-case-convicted-for-life-imprisonment

सौम्या केसरवानी।Navpravah.com

गोधरा में ट्रेन आगजनी मामले में आज गुजरात हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है, जिन 11 दोषियों को फांसी की सजा दी गयी थी, उसे उम्रकैद में बदल दिया गया है, और पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने को भी कहा गया है।

27 फरवरी 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के S-6 बोगी जला दी गयी थी, जिसमें 59 लोगों के होने की आशंका थी। इनमें से ज्यादातर लोग अयोध्या से लौट रहे कार सेवक थे। इस मामले की जांच SIT ने की और इस केस मे 11 मार्च 2011 को 31 दोषियों को सजा मिली थी।

एसआईटी की विशेष अदालत ने 11 मार्च 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया था, जबकि 63 को बरी कर दिया था। इनमे से 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

बाद में उच्च न्यायालय में कई अपीलें दायर कर दोषियों को चुनौती दी गई, जबकि राज्य सरकार ने 63 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती दी है। दोषियों को हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत कसूरवार ठहराया गया है।

 

अनुप्रिया पटेल ने लखनऊ में ‘सघन मिशन इंद्रधनुष’ की शुरुआत की

anupriya-patel-launches-dense-mission-rainbow-in-lucknow

सौम्या केसरवानी।Navpravah.com

केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कल लखनऊ के वीरांगना आवंती बाई महिला चिकित्सालय में मिशन इन्द्रधनुष की शुरुआत की। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी भी इस समय मौजूद रहें।

‘पांच साल में सात बार, छूटे न टीका एक भी बार’ इस थीम पर स्वास्थ्य विभाग और यूनीसेफ मिलकर दिसंबर 2018 तक 90 प्रतिशत बच्चों तक टीकाकरण पहुंचाना है। सघन मिशन इंद्र धनुष में लगभग एक लाख टीकाकरण गतिविधी की जायेंगी।

स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, “इस अभियान के तहत देश के 121 जनपदों एवं 17 शहरी क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के 52 जनपद एवं 08 शहरी क्षेत्र सम्मिलित हैं। इन सभी क्षेत्रों में सघन मिशन इन्द्रधनुष अभियान आगामी चार महीने में किया जायेगा।”

मिशन इंद्रधनुष केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के ने 25 दिसंबर 2014 को शुरू किया था। इसके शुरूआती तीन चरणों के तहत यह 2.1 करोड़ बच्चों तक पहुंचा गया और उनमें 55 लाख का पूरी तरह से टीकाकरण किया गया। इसके अलावा 55. 9 लाख गर्भवती महिलाओं को भी टेटनस का टीका लगाया गया।

2020 तक 80 फीसद और 2030 तक शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब सघन मिशन इन्द्रधनुष की शुरुआत के बाद इसे बदलकर 2018 तक कि 90 प्रतिशत टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है।

परिवार कल्याण मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, “मिशन इन्द्रधनुष अभियान के तहत 2018 तक उत्तर प्रदेश के 60 लाख बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के अन्तर्गत 2017 चरण में कुल 1,01,891 टीकाकरण सत्र लगाये जायेंगे।”