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Tuesday, August 18, 2026
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31 दिसंबर के बाद इन 6 बैंकों से नहीं निकलेगा पैसा

इस बैंक से नहीं निकलेगा पैसा
सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
एसबीआई और एसोसिएटेड बैंकों का विलय हो चुका है, एसबीआई के अलावा, अन्य 5 बैंकों में जिनका भी खाता है वो स्टेट बैंक के पास चला जाएगा। 31 दिसंबर 2017 के बाद स्टेट बैंक के एसोसिएटेड बैंकों सहित 6 बैंकों की चेक बुक अमान्य हो जाएंगी।
इनके जरिए कोई भी खाताधारक अपने अकाउंट से पैसा नहीं निकाल सकेगा। हालाँकि पहले सितंबर के अंत में ये व्यवस्था लागू होनी थी, लेकिन आरबीआई ने हाल में ही ये डेडलाइन बढ़ाई दी थी। एसोसिएटेड बैंकों के एसबीआई में विलय होने से ये नया नियम लागू होगा। SBI के मुताबिक, इन सभी बैंकों के ग्राहकों को 1 जनवरी 2018 से मोबाइल बैंकिंग या ब्रांच में आकर नई चेकबुक के लिए अप्लाई करना होगा।
स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, भारतीय महिला बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद इन छह बैंकों का एसबीआई में विलय हो गया है। इनके विलय के साथ ही 1 अप्रैल 2017 से इन बैंकों के ग्राहक एसबीआई के ग्राहक हो गए हैं, हालांकि, विलय के बाद से ही एसबीआई ने अपनी सेवाएं महंगी कर दी हैं।
एसबीआई के सहयोगी बैंकों की ओर से जारी किए जाने वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड पहले से ही एसबीआई के नेटवर्क के तहत ही काम करते थे, रिपोर्ट्स के मुताबिक, सहयोगी बैंकों के विलय से SBI और मजबूत होगा और उसकी वित्तीय स्थिति भी बेहतर होगी। एसबीआई के अधिकारियों का मानना है कि इस विलय का मकसद एक बेहद मजबूत बैंक तैयार करना है और अलग-अलग बैंकों की बजाए एक बड़े मजबूत बैंक में सभी को लाने से ग्राहकों को भी आसानी होगी।

लेक्चर पद्धति, गतिविधि और तकनीकी के बीच संतुलन साधना आवश्यक -डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय

एनपी न्यूज़ नेटवर्क्स | Navpravah.com

‘विवा एजुकेशन’ और ‘अंतर्राष्ट्रीय हिंदी प्रचार परिषद’ के संयुक्त तत्त्वावधान में शनिवार को हिंदी कार्यशाला आयोजित की गई। आईसीएससी का हब माने जाने वाले बेंगलुरु शहर में तकरीबन 150 अध्यापकों ने इस आयोजन का लाभ उठाया।

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित लर्नर्स अकादमी मुंबई के प्राचार्य राम नयन दूबे और जाने-माने समीक्षक, शिक्षाविद एवं सेंट पीटर्स संस्थान पंचगनी के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र पाण्डेय बतौर रिसोर्स पर्सन के रूप में मौजूद थे। प्राचार्या कलाई सेल्वी, जनरल मैनेजर अशेक मुर्शीद, राजेश देवराजन समेत अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी प्रचार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र कुमार शर्मा ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत और परिचय दिया।

प्रश्नकाल के दौरान राम नयन दूबे ने बताया, “काउंसिल ने सभी शैक्षणिक संस्थाओं को अपना कैरिकुलम भेज दिया है। सभी अध्यापक अपने-अपने विद्यालयों से उसकी मांग करें, अथवा बोर्ड की वेबसाइट पर देखें। वहां आप पाएंगे कि हिंदी का पाठ्यक्रम (प्री स्कूल से आठवीं तक) नितांत व्यवहारिक और पारदर्शी है। आप लोगों को पुस्तकों के चयन का मानक भी वहाँ उपलब्ध कराया गया है। भाषा के अंतर्गत जिन नए बिंदुओं को प्रस्तावित किया गया है, उनकी यहाँ विस्तृत, स्पष्ट, सटीक और सार्थक चर्चा की गई।”

कार्यशाला में वर्ण-विचार से लेकर पत्र-लेखन तक की शंकाओं का समाधान किया गया, किंतु पाठ्यक्रम में शामिल किए गए ‘डायरी लेखन’, ‘विज्ञापन लेखन’, ‘प्रतिवेदन’, ‘नोटिस लेखन’ जैसे मुद्दों पर विशेष प्रकाश डाला गया।

आश्वस्त नज़र आए हिंदी शिक्षक-

सैकड़ों प्रश्नों की बौछार करते हुए शिक्षकों ने खेल-विधि जैसी गतिविधियों को जाना, समझा और अपने को उनमें शामिल किया। हिंदी कक्षा को रुचिकर और मनोरंजक बनाने के कई सूत्र कार्यशाला के मार्गदर्शकों द्वारा साझा किए गए। अद्यतन तकनीकी पर ज़ोर देते हुए डॉ. जितेंद्र पाण्डेय ने कहा, “आजकल शिक्षण में तकनीकी का प्रयोग आम हो गया है। लोग यूट्यूब से संबंधित टॉपिक पर वीडियो लोड कर बच्चों को दिखा देते हैं और मान लेते हैं कि उनकी जिम्मेदारी समाप्त हो गई। यहाँ पर उन्हें अपने विवेक का प्रयोग करते हुए लेक्चर पद्धति, गतिविधि और तकनीकी के बीच संतुलन साधना होगा। तकनीकी का प्रयोग करते समय सावधानी और दूरदर्शिता की ज़रूरत होती है। कट-पेस्ट की आदत मुश्किल पैदा कर सकती है। आवश्यकता है कि तकनीकी को सृजनात्मक ढंग से इस्तेमाल किया जाए। सृजन और तकनीकी एक दूसरे के पूरक बनें।” इस अवसर पर डॉ. पाण्डेय ने ‘नेता जी का चश्मा’ नामक पाठ को तकनीकी से जोड़कर दर्शकों को दिखाया और बताया ।

हिंदी की विराट संभावनाओं को पहचानने और जानने की ज़रूरत-

विदेशी भाषाओं के प्रति अभिभावकों की ललक और हिंदी भाषा के लिए उदासीनता हिंदी जगत के लिए चिंता का विषय है। ऐसी स्थिति में हिंदी अध्यापकों की भूमिका अधिक बढ़ जाती है। दोहरी जिम्मेदारी निभानी होगी। इस विषय पर प्राचार्य रामनयन ने शिक्षकों के कर्त्तव्य बोध पर बल देते हुए बताया, “आज वैश्विक स्तर पर हिंदी की मजबूत पकड़ है। इसे बोलने और समझने वालों की संख्या उत्तरोत्तर बढ़ती जा रही है। देश-विदेश में हिंदी का प्रचुर साहित्य लिखा जा रहा है। समूची दुनिया अपने व्यवसाय के लिए हिन्द की ओर बड़ी उम्मीद से देख रही है। बच्चों और उनके माता-पिता में हिंदी के प्रति अनुराग और सम्मान जगाने के लिए हम अध्यापकों को हिंदी जगत में होने वाली पल-पल की हलचल पर अपनी पैनी नज़र बनानी होगी। तब जाकर हम स्वयं गौरव का अनुभव करेंगे और आने वाली पीढ़ी को करवाएंगे।”

इस अवसर पर नीलम गुप्ता, विमला देव, सुधा मिश्रा, ज्योति चड्ढा, मीनाक्षी चौधरी, सीमा उपाध्याय, डॉ. विश्वेश उपाध्याय ‘प्रभु’, शमी श्रीवास्तव, दीपाली मल्होत्रा, नविदा भानु आदि शिक्षा जगत की जानी-मानी हस्तियाँ मौजूद थीं। विवा एजुकेशन के टेरिटरी मैनेजर राकेश राय ने आभार प्रदर्शन की औपचारिकी निभाई।

हरीश रावत ने मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा, “सरकार कर रही है रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार”

राजेश सोनी । Navpravah.com

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। हरीश रावत ने कहा, केंद्र में बैठी मोदी सरकार रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। मोदी सरकार ने सत्ता में आने से पहले भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता की निति अपनाने की बात कही थी, पर अब केंद्र में बैठी मोदी सरकार खुद ही रक्षा सौदों में भ्रष्टाचारियों का साथ दे रही है।

रावत यहीं नहीं रुके, आगे उन्होंने मोदी सरकार पर कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा रक्षा सौदों और पेट्रोलियम पदार्थ के भाव बढ़ाकर इन कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुँचाया जा रहा है। इस वजह से आम आदमी महंगे पेट्रोलियम पदार्थ खरीदने के लिए मजबूर है।

रावत ने कहा, कच्चे तेल का दाम अंतरष्ट्रीय बाजार में कम होने के वावजूद भी तेल भारत में इतना महंगा क्यों है। सरकार महंगाई पर नियंत्रण नहीं लग पा रही और महंगाई से गरीब आम आदमी त्रस्त है। रावत ने मोदी सरकार को हर मोर्चे पर विफल बता दिया और कहा कि इस सरकार पर से अब लोगों का भरोसा खत्म हो रहा है।

जम्मू-कश्मीर: कांग्रेस नेता के घर आतंकी हमला

कांग्रेस नेता के घर आतंकी हमला

 एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 

आज सुबह कश्मीर के बांदीपुरा जिले में एक कांग्रेसी नेता इम्तियाज परे के आवास के बाहर गोलियों की आवाज आई, जिससे लोगों को लगा कि ये उन पर आतंकवादी हमला है। आपको बता दें कि इम्तियाज परे मोहम्मद यूनुस उर्फ़ कूका परे के बेटे हैं।  
 
कूका परे वहीं हैं, जो आतंकवाद का रास्ता छोड़ राजनीती में आये थे और वे आतंकियों के खिलाफ लड़ते थे। आतंकवाद का साथ छोड़कर और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की वजह से आतंकियों ने कूका परे की हत्या वर्ष २००३ में ही गोली मारकर कर दी थी।  
 
पुलिस अब इस मामले की पूरी जांच कर रही है और आतंकी हमले की संभावनाओं से भी इनकार नहीं कर रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि अब तक पता नहीं चल पाया है, यह गोलीबारी किसने की है। इस हमले में किसी की जान जाने या घायल होने की खबर अबतक नहीं आई है। 

विराट कोहली ने तोड़ा रिकी पोंटिंग का रिकॉर्ड, बतौर कप्तान एक साल में बनाये सबसे ज्यादा शतक

virat's double century
सुनील यादव | Navpravah.com
भारत और श्रीलंका टेस्ट सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में भारत के कप्तान विराट कोहली ने रिकी पोंटिंग का 11 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वर्ष 2006 और 2008 में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान रिकी पोंटिंग ने एक वर्ष में सबसे ज्यादा 9-9 शतक बतौर कप्तान अपने नाम किये थे। इस वर्ष विराट कोहली ने 10 शतक बना लिए हैं जो कि एक कैलेंडर ईयर में बसे ज्यादा शतक हैं।
नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम पर खेले जा रहे दूसरे क्रिकेट टेस्ट मैच में भारत की ओर से अब तक 3 शतक लग चुके हैं। मैच के दूसरे दिन जहां अनुभवी ओपनर मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा ने अपने-अपने शतक पूरे किए। वहीं मैच के तीसरे दिन विराट कोहली ने चेतेश्वर पुजारा के साथ मिलकर तेजी से रन बनाते हुए अपनी सेंचुरी पूरी की।
मैच के तीसरे दिन लंच से पहले चेतेश्वर पुजारा 143 रन बनाकर चलते बनें, वहीं लंच के बाद महज 2 रन बनाकर अजिंक्य रहाणे भी सस्ते में निपट गए। उसके बाद पिच पर आए रोहित शर्मा ने कप्तान विराट कोहली का बखूबी साथ निभाया और दोनों ने मिलकर टीम का स्कोर 500 के पार भी पहुंचा दिया। ख़बर लिखे जाने तक भारतीय टीम ने अब तक 4 विकेट खोकर 509 रन बना लिए हैं। भारतीय कप्तान विराट कोहली 171* और रोहित शर्मा 52* बनाकर पिच पर तैनात हैं।

अपने हुए पराए, गुजरात चुनाव प्रचार से भी दूर कर दिए गए आडवाणी

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को पहली बार पार्टी ने गुजरात चुनाव के प्रचार से दूर रखा है। वरिष्ठ नेता से जब गुजरात की राजनीति से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि राज्य की राजनीति में क्या कुछ हो रहा है, उन्हें इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है।

8 नवंबर को आडवाणी का जन्मदिन था, और अपने 90वें जन्मदिन पर आडवाणी अपनी बेटी प्रतिभा आडवाणी के साथ अपने घर पर मेहमानों का स्वागत करते रहे। वहीं पर ये पूछा गया कि क्या वो गुजरात में चुनाव प्रचार करने जाएंगे? तब उनकी जगह प्रतिभा ने जवाब दिया था, नहीं, हम इसी दुनिया में खुश हैं।’

आज बीजेपी 11 करोड़ सदस्यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है। आज भी उसकी वैचारिकी ‘हिंदुत्व’ पर केंद्रित है, जिसे आडवाणी ने सींचा था। लेकिन खुद आडवाणी की स्थिति पहले वाली नहीं रही। आडवाणी के जन्मदिन पर बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता उनके घर पहुंचे, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह आडवाणी के घर पर सबसे पहले पहुंचे थे। उनके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, अनंत कुमार और विजय गोयल भी उनके आवास पर पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी थोड़ी देर के लिए उनसे मिलने आये थे, पीएम मोदी ने ट्विटर पर भी आडवाणी को बधाई दी थी, आडवाणी को बधाई देने वालों में विपक्षी नेता भी शामिल थे।

आतंकियों का समर्थन करने वाले देश की दुनिया में कोई जगह नहीं

अरुण जेटली 1 जनवरी को पेश करेंगे बजट

 एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com 

गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने आज २६/११ की नौवीं बरसी पर प्रदेश भर में “मन की बात चाय के साथ” कार्यक्रम का आयोजन किया था। इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे। सूरत के ऐसे ही एक कार्यक्रम में देश के वित मंत्री अरुण जेटली ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने इस कार्यक्रम में कहा आतंक और आतंकवादियों को समर्थन करने वाले देशों को दुनिया के परिवार में कोई स्थान नहीं है।
जेटली ने पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया आतंकवाद से पीड़ित है और ऐसे में पाकिस्तान आतंकवादियों को अपने देश में सुरक्षित ठिकाना मुहैया करा रहा है। आपको बता दें कि पाकिस्तान ने गुरुवार को ही ठीक मुंबई हमले की बरसी से चार दिन पहले ही इस आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को नजरबन्द की सजा से रिहा कर दिया था। पाकिस्तान ने आतंकी हाफ़िज़ की रिहाई के लिए उसके खिलाफ सबूतों के आभाव को जिम्मेदार बताया।
जेटली ने कहा, हमारी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जिसके कारण कश्मीर में कोई भी आतंकी संगठन का कमांडर ६० दिन से ज्यादा जीवित नहीं रहता और अब तो कश्मीर में कोई कमांडर बनने को भी तैयार नहीं हो रहा। इस मौके पर जेटली ने २६/११ में शहीद जवानों और जिन लोगों ने अपने प्रियजनों की इस आतंकवादी हमले में खोया था, उनके प्रति संवेदना प्रकट की।

आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो रही हैं मानवतावादी शक्तियां -नरेन्द्र मोदी 

फिर बढ़ सकता है लॉकडाउन!
फिर बढ़ सकता है लॉकडाउन!

राजेश सोनी | Navpravah.com 

प्रधानमंत्री मोदी ने आज ऑल इंडिया रेडियो के द्वारा मन की बात के ज़रिए ३८वीं बार देश की जनता को संबोधित किया। मोदी ने मन की बात में लोगों को संविधान दिवस की बधाई दी और साथ ही उन्होंने मुंबई के २६/११ आतंकवादी हमले के दौरान अपनी जान गवाने वाले लोगों को नमन भी किया। मोदी ने मन की बात की शुरुआत कर्नाटक से बच्चों द्वारा भेजे गए पत्रों के बारे में ज़िक्र करके किया। 

मोदी ने आगे कहा कि मैंने देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये बच्चों का पत्र पढ़ा, तो मुझे पता चला कि बच्चे भी देश की गंभीर समस्याओं से अवगत है। आजकल के बच्चों को क्लास में बैठकर पढ़ना अच्छा नहीं लगता, क्योंकि उनको प्रकृति के बारे में जाने की बहुत रूचि है। मोदी ने अपने सम्बोधन के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव के भी संकेत दिए।
मोदी ने आतंकवाद की समस्या को मानवता के खिलाफ खतरा बताया। उन्होंने कहा, अगर आतंकवाद जैसी समस्या को दुनिया से मिटाना है, तो पूरी दुनिया को इस समस्या के खिलाफ एक होना पड़ेगा। मोदी ने आगे कहा अब आतंकवाद पूरी दुनिया को अपना शिकार बना रहा है, इसलिए अब पूरी दुनिया इस आतंकवाद की समस्या को पहचान चुकी है और इस समस्या के खिलाफ एकजुट हो रही है।
 
मोदी ने अपने सम्बोधन में बताया कि रक्षा मंत्रालय एक विशेष अभियान चलाने जा रहा है। मोदी ने जनता से अपील की कि आप सभी देशवासी इस अभियान से जुड़ें। आप अपने स्कूल में फ़ौज से जुड़े हुए लोगों को आमंत्रित करें।

पद्मावती मामले पर शबाना आज़मी ने कहा, “जो हो रहा है, भयावह है”

पद्मावती मामले पर शबाना आज़मी का बयान
सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
शबाना आज़मी ने टाइम्स दिल्ली लिटफेस्ट में ‘राष्ट्रवाद’ पर चर्चा के दौरान कहा, “फिल्म पद्मावती पर जो विवाद हो रहा है सही नहीं है। हम जो अभी देख रहे हैं, वह अति राष्ट्रवाद है, यह कुछ ऐसा है जो खतरनाक है।
शबाना ने कहा, “कला का मतलब सुंदरता दिखाना या लोरी सुनाना नहीं है, यह हमारी आवाज बुलंद करने के लिए भी है, यह विरोध जताने योग्य बनने के लिए भी है, यह उकसाने के लिए भी है। शबाना ने आगे कहा कि राष्ट्रवाद और देशभक्ति के बीच एक बेहद पतली रेखा होती है, हालांकि यह दोनों किसी एक बिंदु पर गड्डमड्ड हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “समाज में जो हो रहा है, आप उस पर आलोचनात्मक हो सकते हो, इसका मतलब यह नहीं है कि आप देशभक्त नहीं हो।
शबाना ने फिल्म उद्योग को इस खराब विवाद और ‘पद्मावती’ फिल्म के रिलीज के विरोध पर एकजुट होने का आह्वान किया और कहा कि कला की आलोचना करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन दीपिका को जान से मारने की धमकी सही नहीं है।
इस फिल्म की शूटिंग के दौरान भंसाली को कई व्यवधानों का सामना करना पड़ा था, लेकिन फिल्म रिलीज की तारीख नजदीक आने के बाद फिल्म को लेकर विरोध लगातार बढ़ने लगे, ऐसा माना जा रहा है कि राजपूत रानी पद्मावती को लेकर फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है।
भंसाली ने लगातार इन आरोपों से इंकार किया है। फिल्म की रिलीज की तारीख़ 1 दिसंबर से टाल दी गई है, लेकिन हिंदू संगठनों का प्रयास है कि इस फिल्म को प्रतिबंधित कर दिया जाए।

२६/११ मुंबई आतंकी हमला: लहू से लिखी तारीख़ की नौवीं बरसी

ninth year of mumbai terrorist attack
राजेश सोनी | Navpravah.com
२६/११ का आतंकी हमला मुंबई पर आतंकी हमला था, जिसे चाहकर भी मुंबईकर अपने ज़हन से नहीं निकाल सकते। मुंबई के इतिहास में लहू से लिखी इस तारीख की कल नौवीं बरसी है।
 
कल २६/११ आतंकी हमले की ९वी बरसी है। नवप्रवाह की टीम ने सीएसटी जाकर रेल और बस यात्रियों से बात की कि अब वे अपने आप को सीएसटी स्टेशन के अंदर और बाहर के परिसर में कितना सुरक्षित मसहूस करते हैं। आइये जानते हैं रेल यात्रियों की राय उनकी ज़ुबानी।
 
रेल यात्री अब्दुल नूरानी जो सीएसटी स्टेशन से रोज उल्हासनगर के बीच ट्रेन में सफर करते है, उन्होंने बताया कि अब सुरक्षा व्यवस्था बहुत बढ़ा दी गई है और सुरक्षा बल बहुत सतर्क हैं, जिसके कारण हम अपने आप को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करते है। जुगल नामक एक और रेल यात्री से हमने सीएसटी पर तैनात सुरक्षा पर उनकी राय जाने की कोशिश की, उन्होंने कहा कि अब यहाँ बिल्कुल डर नहीं लगता। हम तो हमले के अगले दिन ही काम पर लौट गए थे। हमें हमारे देश की पुलिस और सेना पर पूरा भरोसा है। फूलचंद यादव रोजाना सीएसटी से कल्याण के बीच यात्रा करते हैं, ने कहा कि ऐसा हमला एक बार हो, गया भगवान ने चाहा तो ऐसा हमला मुंबई फिर कभी नहीं होगा।
गौरतलब है कि ये आतंकी हमला पाकिस्तान द्वरा प्रायोजित आतंकियों ने किया था। इस आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान से 10 आतंकियों का एक गुट समुद्र के रास्ते से मुंबई में दाखिल हुआ था। इस आतंकी हमले में 163 निर्दोष लोगों ने अपने प्राण गवाएं थे। इस आतंकी हमले के दौरान एक मात्र आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। कसाब को जिंदा पकड़ने के बाद ही इस आतंकी साजिश का खुलासा हो पाया कि इस आतंकी साजिश में पाकिस्तान की भूमिका थी। कसाब ने जांच एजेंसियों को बताया कि उसने पाकिस्तान के मुज़्ज़फ़राबाद में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण शिविर में आतंकी बनने का पूरा प्रशिक्षण हासिल किया था। कसाब आतंकी हाफिज सईद के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकवादी था।
  
मुंबई में इन जगहों पर हुए थे आतंकी हमले-
 
आतंकियों ने मुंबई के कई प्रसिद्ध और व्यस्त स्थानों को अपने साजिश को अंजाम देने के लिए चुना था। आतंकी ज्यादा से ज्यादा माल और जान का नुकसान पहुंचा सकें, इसके लिए आतंकी दो-दो के जोड़ी में मुंबई शहर के अलग अलग स्थानों पर बंट गए थे। आतंकियों ने दहशत फैलाने के लिए निम्न प्रमुख जगहों को निशाना बनाया-  
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी)-
२६/११ के आतंकी हमले में आतंकियों ने अगर कहीं सबसे ज्यादा जान-माल का नुकसान पहुँचाया,  तो वो था छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस। मुंबई का यह एक व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है, यहाँ से रोजाना लाखों लोग ट्रेन के द्वारा यात्रा करते हैं पर २६/११ की रात कई यात्रियों के लिए आखिरी रात साबित हुई। उस रात आतंकी कसाब और इस्माईल ने यहाँ बेगुनाह लोगों पर अन्धाधुंद गोलियां बरसाईं और करीब साठ लोगों को छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर अपनी जान गवानी पड़ी।
CST
   
कामा अस्पताल-
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के बाद आतंकियों ने कामा अस्पताल को अपना निशाना बनाया। आतंकी कसाब और इस्माईल कामा अस्पताल में भी सीएसटी जैसा ही तांडव मचाने आए थे। पर कामा अस्पताल के डॉक्टर और नर्स की सूझबूझ के कारण आतंकी यहाँ बड़े पैमाने पर लोगों की जान नहीं ले पाएं और यहाँ सिर्फ कुछ ही लोगो इस आतंकी हमले में शिकार हुए थे। 
 
लियोपोल्ड कैफ़े-
मुंबई का लियोपोल्ड कैफ़े विदेशी पर्यटकों के बीच बहुत मशहूर है। ज़्यादातर कोई भी विदेशी जो मुंबई घूमने आते हैं, तो वे सब इस कैफ़े में जाते हैं। २६/११ की रात भी लोगों का रोजाना की तरह इस कैफे में जमावड़ा लगा हुआ था। विदेश तक इस आतंकी साजिश का पता चले, इसलिए आतंकियों ने लियोपोल्ड कैफ़े को अपने आतंकी साजिश के लिए चुना था। 
 
नरीमन हाउस-
आतंकियों ने इजरायली मूल के लोगों को निशाना बनाने के लिए नरीमन हाउस की बिल्डिंग को चुना था। आपको बता दें कि नरीमन हाउस के इस बिल्डिंग में ज्यादातर इजरायली मूल के नागरिक रहते हैं। 
 
ओबेरॉय होटल-
आतंकियों ने मुंबई के पाँच सितारा होटलों को भी निशाना बनाया था। आतंकियों ने इन होटलों में कई बेगुनाह लोगों को बंदी बना लिया था और बाद में उनकी जान ले ली। 
 
होटल ताजमहल-
आतंकियों ने सबसे ज्यादा किसी जगह को नुकसान पहुँचाया था, वो थी मुंबई का ताजमहल होटल। आतंकियों और भारतीय सुरक्षा बलों के बीच यहाँ करीबन 3 दिनों तक संघर्ष चला। आतंकियों ने मुंबई के इस प्रसिद्ध होटल को भी बंदी बना लिया था। बाद में इस होटल को आतंकियों से सुरक्षा बलों ने रिहा करा लिया और कई लोगों की जान बचा ली थी। 
होटल ताजमहल
  
गौररतलब है कि जिस जगह मुंबई आतंकी हमले के मुख्य आरोपी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना आतंकी हाफिज सईद को पाकिस्तान प्रांत की न्याय समीक्षा बोर्ड ने सबूतों के आभाव में आतंकी हाफिज को नजर बंद की सजा से रिहा कर दिया। ठीक मुंबई हमले की बरसी से 4 दिन पहले हाफिज को रिहा कर पाकिस्तान ने एक बार फिर मुंबई आतंक पीड़ित लोगों के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया है। 
आपको बता दें कि मुंबई आतंकी हमले के मुख्य आरोपी हाफ़िज सईद के खिलाफ केस लड़ रहे वकील उज्वल निकम का कहना है कि पाकिस्तान को भारत ने हाफिज के खिलाफ पर्याप्त सबूत सौपें हैं, फिर भी पाकिस्तान ने उसे सजा देने की बजाय भारत के साथ धोखा किया।