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Friday, August 21, 2026
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साल 2017 में भारतीय सैनिकों ने मार गिराए 138 पाक सैनिक

भारतीय सेना ने मारे 138 पाकी सैनिक

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 

भारतीय सेना ने 2017 के रणनीतिक ऑपरेशन में पाकिस्तान को मात दी है और उसके 138 जवान ढेर कर दिए। सरकार के खुफिया सूत्रों के अनुसार भले ही जवाबी कार्यवाई में भारत ने पकिस्तान को मात दी हो, लेकिन नियंत्रण रेखा के पास हमारे 28 जवान शहीद हो गए।

पिछले एक साल के दौरान भारतीय सेना की तरफ से संघर्ष विराम उल्लंघन और जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के खिलाफ कड़ा रवैया अपनाया गया है। एक निजी एजेंसी को ख़ुफ़िया सूत्रों द्वारा दिए गए बयान में पाया गया कि साल 2017 में सीमा पार फायरिंग के खिलाफ जवाबी कार्रवाई और रणनीतिक ऑपरेशन में पाकिस्तानी सेना के 138 जवान मारे गए, जबकि 155 घायल हुए। हालांकि, इस दौरान 70 भारतीय सेना के जवान भी सीमापार फायरिंग और अन्य घटनाओं में घायल हुए। 

विदित हो कि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में कुल 860 संघर्ष विराम उल्लंघन के मामले सामने आए, जबकि 2016 में ये मामले सिर्फ 221 थे। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान की ये नीति है कि वह अपने सेना के जवानों की मौत को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कारगिल का भी उदाहरण दिया, जब भारत की तरफ से सबूत देने के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी सेना की मौत से इनकार कर दिया था।

सरकार ने आधार का डाटा लीक होने के बाद लिया बड़ा फैसला

आधार के बदलेंगे नंबर

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 
 
आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी लीक होने के मामले के बाद यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने बड़ा एक्शन लिया है। अब आधार नंबर 12 अंकों की जगह 16 अंकों का होगा। इसके तहत हर शख्‍स की एक वर्चुअल आईडी बनाई जाएगी और आधार आधारि‍त केवाईसी को सीमि‍त कि‍या जाएगा। सभी एजेंसि‍यां 1 जून तक इस सि‍स्‍टम को अपना लेंगी।
 
4 जनवरी की एक रिपोर्ट के अनुसार, महज 500 रुपये में करोड़ों आधार की डिटेल मिल रही है। इस खबर के सामने आते ही यूआईडीएआई ने ये एक्शन लिया है। अथॉरिटी ने अपने बयान में कहा था कि‍ ‘बायोमेट्रिक डाटाबेस से डाटा चोरी का कोई मामला सामने नहीं आया है, वैसे ये पूरी तरह सुरक्षित है। 
 
UIDAI ने कहा था कि आधार नंबर कोई सीक्रेट नंबर नहीं है और आधार होल्डर की मर्जी पर किसी सेवा या सरकारी वेलफेयर स्कीम्स का फायदा लेने के लिए इसे एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है। 

काली और बदसूरत कहलाने पर कर लिया खुद को स्वाहा, 14 साल की पीड़िता ने गवाई जान 

महिला ने खुद को जलाया

पारुल पाण्डेय | Navpravah.com 

तेलंगाना में हुई एक अश्चार्चाकित घटना ने लोगों को चौका दिया है। यहाँ 14 साल की एक लड़की ने खुद को सिर्फ इसलिए आग में स्वाहा कर लिया, क्योंकि उसके सहपाठी उसे काली और बदसूरत कहकर चिढाते थे। पीड़िता कई दिनों से सहपाठीयों के इस बर्ताव के चलते परेशान थी। वे उसे यह कहकर ब्लैकमेल भी करते थे कि वे उसकी बातें क्लास में हर किसी को बता देंगे। 
 
यह मामला तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में स्थित गुम्माडिडाला मंडल से जुड़ा हुआ है, जहां डोमाडुगु गांव में रहने वाली 14 वर्षीय एम.लावन्या नौवीं कक्षा में पढ़ती थी। पुलिस के अनुसार, चूंकि लावन्या सावली थी, तो उसके सहपाठी रोज़ उसे अलग अलग नामों से पुकारते थे। जिससे लावन्या काफी परेशान थी। वहीं एक लड़के ने लावन्या के चरित्र को लेकर उसे ब्लैकमेल करने का प्रयास भी किया था। वह उससे कहता था कि वह उससे जुड़ी बातें क्लास के बाकी लोगों को बता देगा।  
 
ज्ञात हो कि लावन्या ने इसी कारण अपने हाथ की नस काटने की भी कोशिश की थी। हालांकि, उसने बाद में इस मसले को लेकर अपनी प्रिंसिपल के पास जाने का फैसला किया, लेकिन वहां से भी उसे किसी प्रकार की खास मदद नहीं मिली। मजिस्ट्रेट को अंतिम वक्त दिए गए बयान में लावन्या ने बताया था कि प्रिंसिपल ने मुझसे पूछा था कि मैंने ऐसा क्यों किया? जब मैंने कहा कि मैंने खुद को खत्म करने का प्रयास किया, तो उन्होंने पूछा कि क्या मैं मेंटल या पागल हूं। लेकिन मैंने अपनी शिकायत वापस नहीं ली।
 
पुलिस ने आगे बताया कि प्रिंसिपल और स्कूल प्रबंधन ने पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया, इसलिए उसने 2 जनवरी को आत्महत्या का प्रयास किया और मिट्टी का तेल छिड़ककर खुद को आग लगा ली। हादसे में उसके शरीर का 45 फीसदी हिस्सा जला था। नाजुक हालत में उसे हैदराबाद के गांधी अस्पताल ले जाया गया। मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी और उसने वहीं दम तोड़ दिया। पुलिस इस लापरवाही के लिए स्कूल प्रबंधन पर मामला दर्ज करने के सिलसिले में जांच कर रही है।

1984 सिख दंगा: बंद 186 मामलों की फिर होगी जांच -सर्वोच्च न्यायालय 

सिख दंगों की फिर होगी जांच

राजेश सोनी | Navpravah.com 

1984 के सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को एक विशेष तीन सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दिया है। जाँच कमेटी उन 186 मामलों की जाँच करेगी, जो बंद कर दिए गए थे। इस समिति की अगुवाई हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश करेंगे।

गौरतलब है कि 2015 में भी भाजपा शासित केंद्र सरकार ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था, जिन्होंने 1984 दंगों के पुराने मामलों की दोबारा से जांच की थी। यह वे मामले थें, जिनकी जांच या तो पुलिस ने बंद कर दी थी या फिर मामले कोर्ट तक नहीं पहुंच पाए।  
 
दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए काफी लंबे वक्त से लड़ रहे एचएस फुल्का कहते हैं कि करीब 237 मामले हैं, जिन्हें पुलिस ने बंद कर दिया था। फुल्का के मुताबिक, कांग्रेस नेता सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर के खिलाफ भी दो मामले हैं, जिनकी जांच दोबारा होनी चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मारे जाने के बाद हुए दंगों में 3325 लोग मारे गए थे, जिनमें से 2733 सिर्फ दिल्ली में मारे गए थे। बाकी हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मारे गए थे।
 
गौरतलब है कि जस्टिस नानावती कमीशन ने बंद किए गए 241 मामलों में से केवल चार को ही फिर खोलने की सिफारिश की थी, लेकिन भाजपा चाहती थी कि सभी 237 मामलों की फिर से जांच हो।

हिन्दू हो तो मुझे वोट देना और मुस्लिम हो तो कांग्रेस को -भाजपा नेता

जसवंत सिन्हा ने दिया विवादित बयान

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 

कुछ दिन पहले राजस्थान के अलवर में भाजपा नेता और राज्य सरकार में श्रम मंत्री जसवंत यादव ने एक विवादित बयान दिया था और उनके इस बयान का वीडियो भी अब लोगों के सामने आ गया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए, यादव इस वीडियो में कहते नजर आ रहे हैं कि हिन्दू हो तो मुझे वोट देना और मुस्लिम हो तो कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देना।  
 
यादव यहां अलवर लोकसभा उपचुनाव के लिए वोट मांगने पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर हो रहे वायरल इस वीडियो में यादव आगे कहते नजर आ रहे हैं कि मेवात में चुनाव प्रचार के दौरान मुस्लिमों ने मुझसे बोला कि वे मेरे द्वारा किए गए विकास कार्यों के लिए मुझे वोट देंगे, लेकिन वो बीजेपी को वोट नहीं देंगे, क्योंकि भाजपा हिंदुओं की पार्टी है। तो अगर आप हिंदू हैं, तो मुझे वोट दीजिए और अगर मुस्लिम हैं, तो कांग्रेस को वोट दीजिए।
 
हालांकि जब इस वीडियो को लेकर जसवंत यादव से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि मैंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। यह कांग्रेस की मुझे बदनाम करने की साजिश है और इस वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। इससे पहले भी मेरे एक वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी, जहाँ मैंने पीएम मोदी को बेस्ट करार दिया था। बाद में मेरे उस संबोधन के वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उन्होंने मेरे बयान को इस तरह लोगों के सामने पेश लिया था कि मैंने मोदी जी को भ्रष्ट पीएम करार दिया था। 

दिल्ली में डीजल के दाम ने तोड़ा अब तक का रिकॉर्ड 

दिल्ली में डीजल की कीमत आसमान पर

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 
 
दिल्ली में डीजल के दाम ने पिछले सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं। जबकि, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत 68 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई है, जो मई 2015 के बाद से उच्चतम स्तर पर है। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बताया कि आम लोगों को राहत पहुंचाने की अब जिम्मेदारी राज्य सरकार के ऊपर निर्भर है, क्योंकि केंद्र और राज्य सरकार दोनों इसके ऊपर टैक्स लगाती है।
 
केन्द्र ने प्रति लीटर 2 रूपये एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। अब राज्य सरकार को भी अपना वैट कम कर अपनी चिंता जाहिर करनी चाहिए। दिल्ली में डीजल 60.66 रूपये लीटर मिल रहा है और पेट्रोल भी 70.53 रूपये तक पहुंच चुका है।
 
अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 68.29 प्रति डॉलर को छूने के बाद इसका दाम 68.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। अब इस ओर केंद्र और राज्य सरकार को ध्यान देना होगा, ताकि आम जनता को मंहगाई के मार से बचाया जा सके।

हिन्दू धर्म को बढ़ावा दे रही है केंद्र सरकार -याचिकाकर्ता विनायक शाह  

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

राजेश सोनी | Navpravah.com 

केंद्रीय विद्यालयों में होनी वाली हिंदी प्रार्थना को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा है। सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा है कि केंद्रीय विद्यालयों में क्यों होनी चाहिए हिंदी में प्रार्थना? क्योंकि सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय किसी भी धर्म का प्रचार-प्रसार नहीं कर सकते हैं। इस सवाल को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई और उसमें केंद्र सरकार पर हिन्दू धर्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। 
 
सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से जवाब मांगते हुए कहा है कि यह एक गंभीर संवैधानिक मामला है। याचिका कर्ता  ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए लिखा कि केंद्र सरकार केंद्रीय विद्यालयों में हिंदी भाषा में प्रार्थना करवाकर हिन्दू धर्म को बढ़ावा दे रही है, क्योंकि इन हिंदी प्रार्थनाओं के कई शब्द संस्कृत भाषा के हैं। याचिका में आगे कहा गया है कि यह संविधान अनुच्छेद 25 और 28 के खिलाफ है और इसे इजाजत नहीं दी जा सकती है।
 
याचिका करता विनायक शाह ने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की है कि एक धर्म को बढ़ावा देने वाली ऐसी प्रार्थनाओं को न्यायालय जल्द से जल्द रुकवाए। विनायक शाह पेशे से वकील हैं। शाह के बच्चों ने केंद्रीय विद्यालयों से ही अपनी पढाई संपन्न की है। भारत में करीब 1100 केंद्रीय विद्यालय हैं और इनमें कुल 11 लाख छात्र पढाई करते हैं। 

“सिक्कों” को लेकर केंद्र सरकार ने लिया ये फैसला

सिक्कों को लेकर मोदी सरकार ने लिया ये फैसला

सौम्या केसरवानी। Navpravah.com
 
देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए केंद्र सरकार नई-नई योजनाएं बना रही है। नोटबंदी और जीएसटी के बाद केंद्र सरकार ने सिक्का बंद करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद देश के सभी टकसालों में सिक्के बनाने का काम बंद कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश की चार प्रमुख नोएडा, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद सरकारी टकसालों में सिक्‍कों का प्रोडक्‍शन बंद हो गया है। रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है।
 
भारत सरकार की ओर से इन चारों जगह पर ही सिक्के बनाए जाते हैं। हालांकि आरबीआई के अधिकारियों का कहना है कि नोटबंदी के दौरान बड़ी मात्रा में सिक्के बनाए गए थे, इस वजह से फिलहाल सिक्कों को बनाने का काम बंद कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, 8 जनवरी तक 2500 एमपीसीएस सिक्कों का स्टोरेज है और आरबीआई के अगले आदेश तक सिक्कों का प्रोडक्शन रोक दिया गया है।
 
पीएम मोदी ने 8 नवंबर 2016 को देश में नोटबंदी का ऐलान किया था, जिसके बाद 1000 और 500 रुपये के नोट को कानूनी तौर पर अमान्य घोषित कर दिये गये थे। जिसके बाद पीएम मोदी ने देश की जनता से 50 दिन का वक़्त माँगा था, देश से काला धन और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है।

सिंगल रिटेल ब्रांड और कंस्ट्रक्शन में 100 प्रतिशत एफ़डीआई को मंज़ूरी

विदेशी निवेशकों को सरकार ने दिया राहत

राजेश सोनी | Navpravah.com

केंद्र सरकार ने आज बड़ा फैसला लेते हुए देश में विदेशी निवेश को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सिंगल रिटेल ब्रांड, कंस्ट्रक्शन और एयर इंडिया में विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इस तरह के कदम से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने आज सिंगल रिटेल ब्रांड सेक्टर में 100% विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है। वहीं कंस्ट्रक्शन को भी लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला उठाते हुए कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में भी 100% विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है।

एयर इंडिया में विदेशी निवेश को लेकर उठाया बड़ा कदम-
एयर इंडिया को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। एयर इंडिया के घाटे को देखते हुए सरकार ने एयर इंडिया में 49% तक विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है। कुछ दिन पहले ही विपक्ष एयर इंडिया के निजीकरण न करने की मांग उठाई थी।
 
गौरतलब है कि जब भाजपा विपक्ष में थी और यूपीए इस तरह का फैसला लेना चाहती थी, तब भाजपा और उनके सहयोगी दलों ने यूपीए सरकार का पुरजोर विरोध किया था। विपक्ष ने उस समय की यूपीए सरकार पर देश को आर्थिक गुलाम बनाने का आरोप तक लगा दिया था।      

शौहर ने नशे में दिया तलाक, महिला ने दर्ज की शिकायत

तीन तलाक़

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 
 
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी से तीन तलाक का एक और मामला सामने आया है। जहाँ एक महिला को उसके शौहर ने नशे की हालत में में तलाक दे दिया है। रोजी बेगम नाम की इस महिला ने पुलिस में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराकर न्याय पाने की गुहार लगाई है। पीड़िता ने मीडिया को बताया कि उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया है। एक समाचार एजेंसी के मुताबिक पुलिस में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि पति ने नशे की हालत में महिला को फोन पर तीन तलाक दिया है।

महिला ने बताया कि उसका पति पिछले 3-4 वर्षों से उसे पीटता था और जब उसने फोन पर तलाक दिया गया तो वह पुलिस में शिकायत करने के लिए गई, लेकिन अभी तक पुलिस ने कोई कारवाई नही की है। यूपी में तीन तलाक से सम्बंधित एक और मामला हाल ही में सामने आया था। सऊदी अरब में रह रहे एक भारतीय ने अपनी पत्नी को एसएमएस के जरिये तीन तलाक दे दिया था।
 
केंद्र सरकार तीन तलाक बिल पास कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में बिल पास भी हो गया था, लेकिन राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत न होने के कारण बिल अधर में लटक गया है। अब सरकार इसे संसद के अगले सत्र में पास कराने की कोशिश करेगी।