‘द एडवांटेज असम’ आसियान देशों के लिए है एक्सप्रेसवे -पीएम मोदी
पारुल पाण्डेय | Navpravah.com
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम दौरे पर हैं। ‘द एडवांटेज असम: ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट 2018 का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी ने कई बड़े ऐलान किए। इस दौरान जनता को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि समिट में लोगों की उपस्थिती दिखा रही है कि असम किस तरीके से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भूटान के पीएम की मौजूदगी को सराहते हुए, इसे दोनों देशों की मजबूत दोस्ती बताया और कहा कि ये एडवांटेज असम आसियान के लिए एक्सप्रेस वे है।
आगे पीएम मोदी ने कहा कि भारत की ग्रोथ स्टोरी में और गति तभी आएगी, जब देश के पूर्वोत्तर में रहने वाले लोगों का और इस पूरे क्षेत्र का संतुलित विकास भी तेज गति से हो। पिछले साढ़े तीन वर्ष में केंद्र सरकार की तरफ से और पिछले डेढ़ वर्ष में, असम सरकार की तरफ से किए गए प्रयासों का परिणाम दिखाई देने लगा है। आज जितने व्यापक पैमाने पर ये आयोजन हो रहा है, वो कुछ वर्ष पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था।
मोदी ने देश में विकास को लेकर कहा कि अब लोगों की सोच बदल गई है। अब हताशा की जगह हौसला और आशा ने ले ली है। देश में दोगुनी रफ्तार से विकास हो रहा है। हम सभी योजनाओं को उस तरफ ले जा रहे हैं, जो गरीब, निम्न मध्यम वर्ग और मध्य वर्ग का कल्याण करें। हमारी योजनाएं जिंदगी को आसान बनाने के लिए हैं। उन्होंने कहा कि आसियान देश हों, बांग्लादेश-भूटान-नेपाल हों, हम सभी एक तरह से कृषि प्रधान देश हैं। किसानों की उन्नति, इस पूरे क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाई पर पहुंचा सकती है। इसलिए हमारी सरकार देश के किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
वहीं मोदी ने कहा कि अब हम लगभग 1300 करोड़ की लागत राशि से ‘National Bamboo Mission’ को रीस्ट्रक्चर कर रहे हैं। उत्तर-पूर्व के लोगों को, खासकर यहां के किसानों को बजट के द्वारा एक और फायदा मिलने जा रहा है।उन्होंने बताया की इस साल के बजट में सरकार ने मुद्रा योजना के द्वारा लोगों को स्वरोजगार के लिए 3 लाख करोड़ रुपए कर्ज देने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से भी युवाओं को सशक्त करने का काम ये सरकार कर रही है।
बता दें कि इस सम्मलेन का मकसद असम में व्यापार को बढ़ावा देना है। समिट में पहुंचने से पहले मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि इस सम्मेलन में ऊर्जा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, आईटी, परिवहन, पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, हस्तशिल्प और पर्यटन सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये शिखर सम्मेलन असम के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में योगदान देगा।
जीएसटी में आने के बाद भी सस्ते नहीं होंगे पेट्रोल-डीजल -वित्त सचिव
एमपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आम जनता परेशान है और उन्हें अभी एक साल तक पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में कमी की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए। क्योंकि, केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अढिया ने यह बात साफ़ कर दिया है कि भले ही पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाकर इसकी सबसे ऊँची कर दर 28 फीसदी लगा दी जाए, लेकिन फिर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम नहीं होंगी।
अढिया ने आगे कहा कि पेट्रोल-डीजल पर कितना कर होना चाहिए, यह एक नीतिगत मामला है। इसमें लोकनीति का ध्यान रखा जाता है कि लोग कम वाहनों का उपयोग करें। इसी वजह से सरकार पेट्रोल-डीजल के भाव कम नहीं कर सकती। यही कारण है कि सरकार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के बाद भी इनके कीमतों में ज्यादा कमी नहीं कर सकती है। वहीं अगले साल अप्रैल मार्च 2019 तक जीएसटी द्वारा देश को मिले राजस्व की स्थिति भी साफ़ हो जाएगी। इसके बाद ही सभी पहलुओं को देखते हुए पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी की दर तय की जा सकेगी।
वित्त सचिव ने आगे कहा कि बजट के साथ जीएसटी का कोई लेना देना नहीं है। लिहाजा बजट में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत लाने का कोई विचार ही नहीं था। पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी पहले से ही कम कर दिया गया और इन पर सेस लगा दिया गया है। इन पैसों का इस्तेमाल राज्यों के इंफ्रास्ट्रक्टर के विकास को और मजबूत करने के लिए किया जाता है।
कासगंज हिंसा: बरेली डीएम के बाद इस महिला अफसर के फेसबुक पोस्ट ने मचाया बवाल
अनुज हनुमत | Navpravah.com
एक तरफ सूबे की योगी सरकार का कहना है कि कासगंज की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है, लेकिन कासगंज हिंसा मामले को लेकर दूसरी तरफ बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अभी बरेली डीएम के पोस्ट से उठा तूफान थमा भी नहीं था कि एक और अधिकारी ने कासगंज हिंसा को लेकर फेसबुक बम फोड़ दिया है। सोशल मीडिया में पोस्ट की गई पोस्ट की मानें, तो बरेली डीएम के पोस्ट के बाद अब सहारनपुर की डिप्टी डायरेक्टर सांख्यिकी रश्मि वरुण के फेसबुक पोस्ट ने मामले में नई बहस खड़ी कर दी है। हालांकि विवाद के बाद उनके द्वारा ये फेसबुक पोस्ट हटा ली गई है।
इस महिला अधिकारी ने कासगंज हिंसा की तुलना सहारनपुर मामले से करते हुए सोशल मीडिया पर अपने मन की बात लिखी डाली। डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, “यह थी कासगंज की तिरंगा रैली। यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि अम्बेडकर जयंती पर सहारनपुर के सड़क दूधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी। उसमें से अम्बेडकर गायब थे या कहिए कि भगवा रंग में विलीन हो गये थे। कासगंज में भी ऐसा ही हुआ, तिरंगा गायब और भगवा शीर्ष पर। जो लड़का मारा गया, उसे किसी और समुदाय ने नहीं मारा, उसे केसरी, सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवा ने खुद मारा।”

पोस्ट में आगे लिखा है कि जो नहीं बताया जा रहा, वह यह है कि अब्दुल हमीद की मूर्ति पर तिरंगा फहराने की बजाए रैली में चलने की जबरदस्ती की गई। केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पर लाल रंग भारी पड़ गया। इस पोस्ट की चर्चा बड़े अफसरों में हो रही है। पोस्ट लिखने वाली महिला ने बरेली डीएम का भी समर्थन किया है। इमोजी के साथ डिप्टी डायरेक्टर ने लिखा है कि पाकिस्तान में जाकर नारे लगाकर मरना है क्या इन्हें। बरेली डीएम आर. विक्रम सिंह द्वारा अपना स्पष्टीकरण देते हुए फेसबुक पर की गई टिप्पणी को शेयर करते हुए भी रश्मि ने लिखा है कि देखिए सही बात को किस तरह अपना स्पष्टीकरण देना पड़ता है, सही इंसान को भी माफी मांगनी पड़ती है।
फिलहाल, इन अफसरों का रुख प्रदेश की भाजपा सरकार के लिए चुनौती बन रहा है, क्योंकि अभी डीएम बरेली का मामला निपटा नहीं है कि सहारनपुर की डिप्टी डायरेक्टर की पोस्ट चर्चा का विषय बन गई है। विपक्ष पहले ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खेाले है। वहीं अपनी पोस्ट पर विवाद बढ़ते देख डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि फेसबुक पोस्ट में ऐसी कोई बात नहीं लिखी गई है, जो किसी के खिलाफ हो। फिलहाल हमारे कहने का सिर्फ इतना आशय है कि गणतंत्र दिवस मनाने का सभी को अधिकार है। इसमें पहले या बाद में मनाने का कोई मतलब नहीं होना चाहिए। जैसा कि मुझे पता लगा है कि कासगंज में दोनों पक्षों के बीच 26 जनवरी मनाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। व्हाट्सएप पर कोई गलत मैसेज चलता है, तो उसे रोकने की पहल नहीं होती, बल्कि वायरल होता चला जाता है। इससे माहौल बिगड़ने के हालात पैदा होते हैं। रही बात डीएम बरेली की, तो मेरा मानना है कि उन्होंने अपनी पोस्ट में ऐसा कुछ नहीं लिखा था, जिससे किसी की भावना को ठेस पहुंचे।
अब देखना होगा कि इन बयानों से कासगंज की स्थिति पर क्या फर्क पड़ता है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस मूद्दे पर रोटियां सेंकने की फिक्र भी बढ़ती जा रही है। फिलहाल, योगी सरकार ऐसे अधिकारियों पर सख्त रुख अख्तियार कर सकती है।
जम्मू-कश्मीर: CRPF जवानों पर आतंकियों ने ग्रेनेड फेंककर किया हमला
राजेश सोनी | Navpravah.com
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल इलाके में आतंकियों ने CRPF जवानों को एक बार फिर निशाना बनाया है। आतंकियों ने जवानों पर छिपकर ग्रेनेड फेंककर हमला किया है। आतंकियों के इस हमले में अब तक 2 जवान और 2 नागरिकों के घायल होने की खबर मिली है।
बता दें कि यह हमला त्राल के बतगुंडा गांव में सीआरपीएफ जवानों की पेट्रोलिंग पार्टी पर हुआ। इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने सारे एरिया को घेर लिया है और आतंकियों को ढूंढ़ने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 24 अक्टूबर को त्राल में आतंकियों ने ग्रेनेड फेंककर पुलिस के जवानों पर हमला किया था। जब हमला हुआ, तब पुलिस पेट्रोलिंग कर रहे थे। मारा गया आतंकी बुरहान वाणी भी त्राल का रहने वाला था।
भ्रष्टाचार में लिप्त सीजीएसटी कमिश्नर संसार चंद समेत 10 लोग गिरफ्तार
सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
आज सीबीअाई ने भ्रष्टाचार के अारोप में सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर संसार चंद को 10 लोगों समेत गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार हुए उनमें चार बिचौलिए, तीन सुपरीटेंडेंट, संसारचंद की पत्नी और उनके निजी सचिव हैं। जीएसटी लागू होने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ यह एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स विभाग के कमिश्नर संसारचंद 6 महीने पहले से ही जांच एजेंसियों के निशाने पर थे।
जब कल सुबह संसारचंद लखनऊ के लिए निकले, क्योंकि लखनऊ से उन्हें दिल्ली जाना था, लेकिन दिल्ली जाने से पहले ही फैजाबाद में सीबीआई ने संसारचंद को गिरफ्तार कर लिया। फैजाबाद से संसारचंद की गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद शाम 4 बजे सीबीआई अधिकारियों ने सर्वोदय नगर स्थित सेंट्रल जीएसटी मुख्यालय में भी छापा मार दिया। बिचौलियों में उद्यमी मनीष शर्मा (निदेशक शिशु सोप), अमित अवस्थी, अमन जैन, चंद्रप्रकाश उर्फ मोनू भी शामिल हैं। बिचौलियों पर आरोप लगाया गया है कि वे घूस का पैसा अफसरों तक पहुँचाते थे।
सूत्रों के अनुसार, संसारचंद घूसखोर अधिकारी थे, वे लोगों से घूस लेते थे। अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, उन्होंने एक सिंडीकेट बना लिया था, जिससे उन्हें अच्छा फायदा होने लगा था। घूस की काली कमाई का ‘फ्लो’ नीचे से ऊपर तक होता था। संसारचंद 6 महीने से ही जांच के रडार पर थे और अब जाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
कासगंज हिंसा: चंदन गुप्ता की हत्या का एक और आरोपी राहत कुरैशी गिरफ्तार
राजेश सोनी | Navpravah.com
कासगंज हिंसा में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अब तक हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अभी पुलिस ने तिरंगा यात्रा के दौरान चंदन गुप्ता के हत्या में शामिल दूसरे मुख्य आरोपी राहत कुरैशी को भी गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस को काफी दिनों से राहत की तलाश थी।
बता दें कि कुरैशी हत्या के बाद से ही फरार चल रहा था। पुलिस काफी दिनों से राहत के दोस्तों से पूछताछ कर रही थी। राहत कुरैशी के ऊपर कासगंज दंगों में शामिल होने के आरोप लगे हैं। पुलिस क़ाफी दिनों से दंगे में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले पुलिस ने कासगंज में हिंसा फैलाने के आरोप में 120 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया था। राहत कुरैशी दंगे फैलाने का भी आरोपी है। 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा के दौरान दो समुदाय में हिंसा भड़की थी। वहीं इस मुद्दे को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। सपा पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने सरकार द्वारा मुस्लिमों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ‘महिलाओं पर नही चल सकता रेप और छेड़खानी का केस’
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला दिया है। कोर्ट ने रेप, यौन उत्पीड़न और छेड़खानी़ के मामले को जेंडर न्यूट्रल बनाए जाने वाली याचिका को शुक्रवार को खारिज करते हुए कहा कि यह एक ‘‘काल्पनिक स्थिति’’ है और महिलाओं पर रेप और छेड़छाड़ का मामला नहीं चल सकता है। इस अर्जी को खारिज करते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ की पीठ ने कहा कि कोर्ट इस मामले में कुछ नहीं कर सकती, अगर संसद चाहे तो सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखकर इस पर विचार कर सकती है।
अपने फैसले में शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ऋषि मल्होत्रा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि भारतीय दंड सहिंता (आईपीसी) की धारा 354 और 375 में दुष्कर्म और छेड़छाड़ की वारदात को परिभाषित किया गया है। साथ ही इन सभी धाराओं में साफ तौर पर स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के मामलों में सिर्फ महिलाएं ही पीड़ित हो सकती हैं। जबकि पुरुष अपराधी याचिकाकर्ता ने कहा कि दुष्कर्म और छेड़छाड़ की वारदातों में किसी तरह का कोई भी लिंग भेद नहीं हो सकता है। इस तरह के मामलों में लिंग भेद नहीं होना चाहिए, क्योंकि ऐसा आवश्यक नहीं है कि हर मामले में पुरुष ही अपराधी हो, क्योंकि कई बार महिलाएं भी अपराध में संलिप्त हो सकती हैं।
सुनवाई के दौरान अर्जी खारिज करते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ की संयुक्त पीठ ने कहा कि यह एक ‘‘काल्पनिक स्थिति’’ है और सामाजिक जरूरतों के मुताबिक संसद इस पर विचार कर सकती है । बहरहाल , पीठ ने यह भी कहा कि संसद चाहे तो कानून में ऐछिक बदलाव कर सकती है और न्यायालय इसमें दखल नहीं दे सकता। इसके बाद याचिकाकर्ता वकील ऋषि मल्होत्रा ने कोर्ट में कहा कि कानून किसी पुरुष के खिलाफ भेदभावपूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, ‘‘अपराध का कोई लिंग नहीं होता और न ही कानून लिंग आधारित होना चाहिए। आईपीसी में किसी शख्स की ओर से इस्तेमाल किए गए शब्दों को हटाया जाना चाहिए। कानून अपराधियों के बीच भेदभाव नहीं करता और अपराध को अंजाम देने वाले हर शख्स को सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह पुरुष हो या महिला हो।’’
इस केस में बड़ा मोड़ तब आया, जब कार्यवाही के दौरान न्यायालय ने कहा, ‘‘आप कह रहे हैं कि एक महिला भी किसी पुरुष का पीछा कर सकती है। क्या आपने किसी महिला को शिकायत दाखिल करते देखा है, जिसमें वह कह रही हो कि किसी और महिला ने उससे बलात्कार किया या उसका पीछा किया? यह एक काल्पनिक स्थिति है। सामाजिक जरूरतों के मुताबिक संसद चाहे तो कानून में बदलाव कर सकती है।’’
भारत ने जीता चौथा U-19 विश्वकप खिताब, शॉ की सेना ने कंगारुओं को किया चित्त
सुनील यादव | Navpravah.com
U-19 विश्वकप के फाइनल में आज भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हराकर चौथी बार विश्वकप का खिताब अपने नाम कर लिया है। इस जीत के साथ ही भारत सबसे ज्यादा बार U-19 विश्वकप का खिताब जीतने वाला देश बन चुका है। विश्वकप के पहले मैच में कंगारुओं को पटखनी देने वाली भारतीय टीम ने फाइनल में भी ऑस्ट्रेलिया को हराकर साबित कर दिया कि शॉ की सेना इस समय वर्ल्ड U-19 में सबसे बेस्ट टीम क्यों है।
कोच राहुल द्रविड़ की देख-रेख में भारतीय युवा खिलाड़ियों ने विश्वकप 2018 में शुरू से अब तक कोई मैच नहीं हारा। हर एक सीढियों को कदमों से लांघते टीम इंडिया ने शिखर पर पहुंचकर आज विश्वकप की ट्रॉफी उठा ली है। मुंबई के छोटे से खिलाड़ी पृथ्वी शॉ ने भारतीय टीम की कप्तानी हाथ मे लेकर वो कर दिखाया है, जो बेहद बड़े-बड़े नाम भी करने में असफल रहें।
आज विश्वकप के फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया। ऑस्ट्रेलिया के दोनों सलामी बल्लेबाजों मैक्स ब्रयांट और जैक एडवर्ड्स ने टीम को तेज शुरुआत देने की कोशिश की, लेकिन ईशान पोरेल ने ऑस्ट्रेलिया को 32 रनों के स्कोर पर पहला झटका मैक्स ब्रयांट के रूप में दिया, उन्होंने 14 रन बनाये। इसके बाद पिच पर आये ऑस्ट्रेलिया के कप्तान जैसन संघा भी ज्यादा देर टिक न सके, वह 13 रन बनाकर नागरकोटी का पहला शिकार बने। ऑस्ट्रेलिया ने अपने तीनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट महज 60 रनों पर खो दिए। लेकिन इसके बाद जोनाथन मेर्लो और परम उत्पल ने टीम को संभाला और दोनों मिलकर 75 रन जोड़ दिए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से सबसे ज्यादा जोनाथन मेर्लो ने 76 रन बनाये। लगातार एक छोर से विकेट गिरते रहने से वह भी टीम को संभाल न सके और पूरी टीम 216 रनों पर ढेर हो गई। भारत की ओर से कमलेश नागरकोटी, शिवा सिंह, ईशान पोरेल और अनुकूल रॉय ने 2-2 विकेट झटके, जबकि शिवम मावी को 1 विकेट मिला।

















