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Sunday, August 2, 2026
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सुशांत केस में आज अपनी फाइनल रिपोर्ट सार्वजनिक कर सकते हैं एम्स के डॉक्टर

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
जब से सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई, एनसीबी, ईडी ने अपने हाथ में ली है, तब से इस केस की जांच को गति मिली है और रोज ही नए खुलासे हो रहे हैं. इसे देखते हुए लगता है कि जल्द ही यह जांच किसी नतीजे पर पहुंचेगी. अब इंतजार है, तो एम्स की रिपोर्ट का. उम्मीद जताई जा रही है कि आज एम्स अपनी फाइनल रिपोर्ट को सार्वजनिक करेगा. इस रिपोर्ट के जारी होते ही सुशांत केस लगभग हल होने की उम्मीद जताई जा रही है.
_ दिल्ली लौटी एसआईटी की टीम
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई का विशेष जांच दल (SIT) मुंबई से दिल्ली लौट आया है. शुक्रवार को इस टीम ने सीबीआई के आला अफसरों को जांच की डिटेल में रिपोर्ट दी है. सुशांत मामले में एम्स के डॉक्टरों द्वारा तैयार विसरा रिपोर्ट भी आज सार्वजनिक हो सकती है. शुक्रवार को सभी पांच डॉक्टरों की एक फाइनल मीटिंग दिल्ली में हुई है. आज यह रिपोर्ट सीबीआई टीम को सौंपी जानी है. अगले एक से दो दिन में यह स्पष्ट हो जाएगा कि सुशांत की मौत हत्या थी या आत्महत्या.
_ सीबीआई ने सौंपी प्रोग्रेस रिपोर्ट
सीबीआई के इस दल ने पिछले एक महीने में मुंबई में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच के दौरान संबंधित कई लोगों के बयान दर्ज किए और घटनास्थल पर उनकी कथित आत्महत्या के सीन को दोबारा से रीक्रिएट करके मामले की असलियत को खंगालने के प्रयास किए. सीबीआई की एसपी नूपुर प्रसाद और डीएसपी अनिल यादव ने सीबीआई के मुख्यालय पर वरिष्ठ अफसरों से मुलाकात की. उन्होंने इन अफसरों को इस मामले में हुई अब तक की प्रोग्रेस की डिटेल दी है.
सुशांत मामले में सीबीआई ने केंद्र सरकार के आदेश पर 6 अगस्त को केस दर्ज किया था. सीबीआई ने यह जांच अपने हाथ में बिहार सरकार के दर्ज किए गए केस के आधार पर शुरू की गई थी. यह शिकायत सुशांत सिंह के पिता केके सिंह की ओर से बिहार पुलिस के समक्ष दर्ज की गई थी.
_ विसरा के आधार पर बनी रिपोर्ट
विसरा रिपोर्ट से साफ होगा कि सुशांत को जहर दिया गया था या नहीं. इससे पहले फॉरेंसिक ने अपनी रिपोर्ट में विसरा रिपोर्ट को निगेटिव बताया था. दोबारा सामने आने वाली ये रिपोर्ट एक्टर के 20 प्रतिशत विसरा की जांच पर तैयार की गई है. क्योंकि मुंबई पुलिस ने सुशांत का 80 फीसदी विसरा अपनी जांच में इस्तेमाल कर लिया था.

लॉकडाउन में भी शिर्डी के साईंबाबा मंदिर को मिला 20.76 करोड़ ऑनलाइन दान

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

पूरे देश ही नहीं बल्कि विश्वभर में साईबाबा के भक्त फैले है. कई भक्त नित्य नियम से बाबा के दर्शन करने शिर्डी जाते थे, लेकिन कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के कारण भक्त बाबा के दर्शन करने नहीं जा सके. ऐसे भक्तों के लिए ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था संस्थान की ओर से की गई थी. भक्तों ने भी अपने साईं की झोली में दिल खोल कर दान किया. बताया जाता है कि भक्तों की आस्था इस कदर गहरी है कि लॉकडाउन के दौरान ही 17 मार्च से 31 अगस्त के बीच मंदिर को 20.76 करोड़ रुपए का दान मिला है.

हालांकि, पिछले साल के मुकाबले ये दान महज 10% ही है. पिछले साल इसी अवधि में मंदिर को 202 करोड़ रुपए का दान मिला था. इस लिहाज से इस साल 180 करोड़ रु. से ज्यादा का नुकसान मंदिर को उठाना पड़ा है. लॉकडाउन के दौरान शिरडी साईं मंदिर का सबसे खास क्षेत्र द्वारिका माई का भी कायाकल्प कर दिया गया है.

पुराने पत्थरों को निकालकर 40 लाख की लागत से नए संगमरमर का फर्श लगवा दिया गया है. द्वारिकामाई वो ही खंडहरनुमा मस्जिद है, जहां साईंबाबा ने अपने जीवन का ज्यादातर समय गुजारा था.

फिर नाकाम हुई देश को दहलाने की साजिश, NIA के शिकंजे में अल-कायदा के 9 आतंकी फंसे

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

एक बार फिर आतंकवदियों की देश में बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश नाकाम हो गई है. NIA ने समय रहते देश में अल-कायदा के मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया है. केरल और पश्चिम बंगाल में एनआईए (NIA) ने अलकायदा के 9 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है. आज एनआईए की टीम ने कई जगहों पर छापेमारी की. एनआईए ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और केरल के एर्णाकुलम में रेड की. एनआईए ने कहा है कि सभी गिरफ्तार आतंकवादी आतंकी साजिश से जुड़े हुए हैं.

_ ऑनलाइन कट्टरपंथी बनाने की साजिश
एनआईए ने कहा है कि प्रारंभिक जांच के मुताबिक इन गिरफ्तार व्यक्तियों को सोशल मीडिया पर पाकिस्तान स्थित अल-कायदा आतंकवादियों द्वारा कट्टरपंथी बनाया गया था और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित कई स्थानों पर हमले करने के लिए प्रेरित किया गया था. एनआईए ने कहा है कि इस मामले में अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

_ दिल्ली थी टारगेट पर
यह गिरोह सक्रिय रूप से धन उगाहने में लगा था और गिरोह के कुछ सदस्य हथियारों और गोला-बारूद की खरीद के लिए दिल्ली की यात्रा करने की योजना बना रहे थे. संभव है कि इस गिरफ़्तारी से देश के विभिन्न हिस्सों में संभावित आतंकवादी हमले रोके जा सके हैं.

_ बड़ी मात्रा में हथियार और अन्य डिवाइस बरामद
एनआईए ने कहा है कि छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण, दस्तावेज, जिहादी साहित्य, धारदार हथियार, स्वदेशी आग्नेयास्त्र, घरेलू शारीरिक कवच और होममेड एक्सप्लोसिव डिवाइस बरामद किए गए हैं.

अब गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड नहीं होगा पेटीएम एप

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

गूगल ने गूलल प्ले स्टोर से पेटीएम ऐप को हटा दिया है. इस पर गूगल ने कहा है कि वह किसी भी गैंबलिंग ऐप का समर्थन नहीं करेगा. गूगल का कहना है कि पेटीएम और UPI ऐप वन97 कम्यूनिकेशन लिमिटेड द्वारा डेवलप किया गया है. इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर सर्च करने पर ये नहीं दिख रहा है. हालांकि, पहले से Android स्मार्टफोन्स में इंस्टॉल्ड हुआ ऐप काम कर रहा है.

पेटीएम पेमेंट ऐप के अलावा कंपनी के अन्य ऐप्स- Paytm for business, Paytm money, Paytm mall आदि गूगल प्ले स्टोर पर अभी भी उपलब्ध हैं. हालांकि अभी पेटीएम की तरफ से इस ऐप के गूगल प्ले स्टोर से रिमूव किए जाने के बारे में कोई बयान नहीं आया है. गूगल ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि हम ऑनलाइन कैसिनो की अनुमति नहीं देते हैं. हम किसी भी ऐसे ऐप का समर्थन नहीं करते हैं जो किसी उपभोक्ता को किसी दूसरी वेबसाइट पर ले जाता हो. अगर कोई ऐप किसी ऐसी वेबसाइट पर कस्टमर को ले जाता है जहां नकद पुरस्कार जीतने के लिए किसी टूर्नामेंट में भाग ले सकते हैं.

गूगल किसी भी ऐप को ऐसा करने की अनुमति नहीं देता है और ऐसा करना गूगल नीतियों का उल्लंघन है. गूगल के Suzanne Frey, उपाध्यक्ष ने लिखा कि हम ऑनलाइन कैसीनो की अनुमति नहीं देते हैं या किसी भी ऐसे अनियमित जुआ ऐप्स का समर्थन नहीं करते हैं जो खेल सट्टेबाजी की सुविधा प्रदान करते हैं.

पेटीएम ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि पेटीएम ऐप डाउनलोड या अपडेट करने के लिए गूगल के प्ले स्टोर पर अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है. यह बहुत जल्द वापस आ जाएगा. आपके सभी पैसे पूरी तरह से सुरक्षित हैं और जिनके पास पेटीएम ऐप पहले से डाउनलोडेड हैं वे लोग अपने पेटीएम ऐप को सामान्य रूप से यूज कर सकते हैं.

पुणे : कोरोना ने ली पति की जान, तो पत्नी ने भी लगाया मौत को गले

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

महामारी कोरोना ने कइयों को अपनी चपेट में ले लिया है. कई घर और कई परिवार तबाह हो गए हैं. ताजा मामला पिंपरी चिंचवड़ शहर का है जहां महामारी की चपेट में आकर पति की मौत के करीबन  दो माह बाद उसके विरह में उसकी पत्नी ने भी फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. पिंपरी चिंचवड़ के भोसरी इलाके के महात्मा फुले नगर में शुक्रवार की सुबह सामने आयी इस घटना से पूरे शहर में दुख जताया जा रहा है. माता- पिता की इस तरह से मौत हो जाने से 11 और 7 वर्षीय संतानें अनाथ हो गई हैं.

गोदावरी गुरुबसप्पा खजुरकर (30) ऐसा आत्महत्या करनेवाली महिला का नाम है. 18 जुलाई को उनके पति गुरुबसप्पा उर्फ प्रकास खाजुरकर (35) की महामारी कोरोना की चपेट में आकर मौत हो गई. स्थानीय भूतपूर्व नगरसेवक जितेंद्र ननवरे ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि, गुरुबसप्पा टीवी फिटींग और इंस्टॉलेशन के काम करते थे, उसी से उनका गुजारा होता था. उनकी पत्नी गोदावरी भी छोटे- मोटे काम कर पति का हाथ बंटाती थी. इसी बीच शहर में महामारी कोरोना का संक्रमण फैलने लगा और गुरुबसप्पा भी संक्रमण का शिकार हो गए. उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था, महात्मा फुले नगर बसाहत के लोग भी उनके इलाज के लिए प्रयासरत थे. हालांकि 18 जुलाई को इलाज के दौरान गुरुबसप्पा ने दम तोड़ दिया. वे अपने पीछे 11 साल का बेटा, सात साल की बेटी, मां और पत्नी से भरा परिवार छोड़ गए.

पति की मौत के बाद घर कैसे चलाएंगे, बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा? इन सवालों ने उनकी पत्नी गोदावरी को निराशा में धकेल दिया. पति के मरने का विरह सहन नहीं हो रहा था, इसके चलते गोदावरी ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. आज सुबह यह घटना सामने आयी. अब गुरुबसप्पा के परिवार में उनकी मां और दो छोटे बच्चे रह गए हैं. इस घटना से पूरे शहर में दुख और शोक जताया जा रहा है. उनके बच्चों की मदद के लिए लोग भी आगे आ रहे हैं.

शिवसेना शहर संगठक सुलभा उबाले दोनों बच्चों के पूरे ख़र्च का जिम्मा उठाया है. वहीं पूर्व नगरसेवक जितेंद्र ननवरे ने दोनों बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाया है. गोदावरी का मायका सोलापुर-कर्नाटक की सीमा पर है. उनके मायके वाले पिंपरी चिंचवड़ में आने के बाद उनकी पार्थिव देह का अंतिम संस्कार किया जाएगा, ऐसा ननवरे ने बताया.

IPS अमिताभ गुप्ता के हाथ में पुणे शहर पुलिस की कमान

– डॉ. अभिनव देशमुख पुणे जिला पुलिस अधीक्षक नियुक्त

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
राज्य सरकार ने आईपीएस अधिकारियों के तबादले के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है. बीती रात गृह विभाग के प्रधान सचिव (विशेष) अमिताभ गुप्ता समेत 50 से ज्यादा आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया है. गुप्ता अब पुणे शहर के नए पुलिस आयुक्त होंगे. पुणे पुलिस आयुक्त डॉ. के. वेंकटेशम का तबादला अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विशेष अभियान) के रूप में किया गया है. वहीं पुणे जिला (ग्रामीण) पुलिस बल की कमान डॉ. अभिनव देशमुख को सौंपी गई है. डॉ. देशमुख कोल्हापुर पुलिस के जिला अधीक्षक थे. पुणे जिला पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल को नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली परिक्षेत्र के उपमहानिरीक्षक नियुक्त किया गया है.
– के. वेंकटेशम बने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विशेष अभियान)
गुरुवार शाम जारी सरकारी आदेश के मुताबिक 41 आईपीएस अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है जबकि बाकी अधिकारियों को अभी नई तैनाती नहीं मिली है. पुणे के पुलिस आयुक्त के. वेंकटेशम का तबादला अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विशेष अभियान) के रूप में किया गया है. उनकी जगह पर गृह विभाग के प्रधान सचिव (विशेष) अमिताभ गुप्ता का तबादला किया गया है. गुप्ता इसी साल सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने कोरोनाकाल में यस बैंक और पंजाब एवं महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े घोटालों को लेकर छानबीन के दायरे में आए दो कारोबारी भाइयों- कपिल और धीरज वधावन को पुणे के पास खंडाला से सातारा जिला स्थित महाबलेश्वर जाने की अनुमति दी थी. करप्शन केस के दोनों संदिग्ध भाइयों को ट्रैवल परमिट दिए जाने के मामले पर हंगामा मचने के बाद गुप्ता को अनिवार्यत: अवकाश पर भेज दिया गया था. हालांकि, बाद में एक समिति, जिसने जांच में उन्हें क्लीन चिट दे दी थी, की सिफारिश पर उनका अवकाश रद्द कर दिया गया. अब उन्हें पुणे शहर पुलिस की कमान सौंपी गई है.
– भरोसा सेल जैसे उपक्रम चलाए
उनसे पहले के आयुक्त डॉ. के. वेंकटेशम ने पुणे में पदभार संभालने के साथ कई नए उपक्रमों की शुरुआत की. सालों से धूल फांक रही शिकायतों की फाइलों का निपटारा किया. उनके द्वारा शुरू की गई टीआरएम मीटिंग और सेवा उपक्रम तो पुणे समेत पूरे राज्य पुलिस बल में गूंजी. सेवा उपक्रम का सबसे ज्यादा लाभ शिकायतकर्ताओं और उनके बाद पुलिस अधिकारियों को मिला. भरोसा सेल जैसे उपक्रम के अलावा पुणे की अनुशासन हीन ट्रैफिक को अनुशासन बद्ध बनाने के लिए भी उन्होंने कई योजनाएं शुरू की. उन्हीं की बदौलत पुणे ट्रैफिक पुलिस विभाग को अपर आयुक दर्जे का अधिकारी मिल सका.
– गढ़चिरौली भेजे गए संदीप पाटिल
दो सितंबर को गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आईपीएस अधिकारियों के तबादले के आदेश के अनुसार पुणे जिला पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल को नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली परिक्षेत्र के उपमहानिरीक्षक पद पर तबादला दिया गया. पुणे से पहले पांच सालों तक वे गढ़चिरौली में ही तैनात थे औऱ वहां उनके द्वारा शुरू किए गए पुस्तक दान उपक्रम को भारी तवज्जो मिली थी. गढ़चिरौली ने नक्सलवाद के उच्चाटन के लिए भी उन्होंने कई सफल अभियान चलाये. दो साल पहले पुणे जिला पुलिस की कमान संभालने के बाद यहां भी स्मार्ट पुलिसिंग जैसे कई उपक्रम चलाये. तबादले के दौरान उन्होंने खुद से गढ़चिरौली में नियुक्ति की मांग की थी, ऐसा उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया.

– डॉ. अभिनव देशमुख को नक्सल प्रभावित क्षेत्र का अच्छा अनुभव
अब उनकी जगह पुणे जिला पुलिस अधीक्षक पद पर कोल्हापुर जिला अधीक्षक डॉ अभिनव देशमुख का तबादला किया गया है. कोल्हापुर आने से पहले वे भी गढ़चिरौली.के तैनात थे. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में किये गए उल्लेखनीय कार्य की दखल खुद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने ली. कोल्हापुर में कार्यरत रहते उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय का आंतरिक सुरक्षा सेवा मेडल घोषित किया गया. कोल्हापुर में भी उन्होंने काफी उल्लेखनीय काम किया है.

राष्ट्रपति ने स्वीकारा कैबिनेट मंत्री हरसिमरत कौर का इस्तीफा

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पीएम मोदी से सलाह के बाद कैबिनेट मंत्रिमंडल से हरसिमरत कौर के इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत हरसिमरत का इस्तीफा स्वीकार किया है. इस इस्तीफे के कारण रिक्त हुए पद का प्रभार नरेंद्र तोमर को दिया गया है.

मोदी कैबिनेट से अपने इस्तीफे की जानकारी हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट कर दी थी. अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था कि मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है. किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व है. हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री थीं.

बिहार में भी जदयू – भाजपा में छोटे भाई – बड़े भाई का विवाद; किस करवट बैंठेगा ऊंट?

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा के बीच छोटे भाई, बड़े भाई के विवाद में गत विधानसभा चुनाव में बहूमत से दूर लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी भाजपा को विपक्ष में बैठने की नौबत आई. गठबंधन में चुनाव जीतने के बाद भी पहले बड़े भाई की भूमिका निभानेवाली शिवसेना ने छोटा भाई बनते ही, चुनाव के बाद युति तोड़ कर राकां, कांग्रेस के सहयोग से सरकार बना ली, लेकिन समान विचारधारा वाली भाजपा को बड़ा भाई मानने से इनकार कर दिया. ऐसा ही कुछ अब बिहार विधानसभा में भी देख्ाने को मिल रहा है.

सीटों के बंटवारे को लेकर फंसा पेंच
बिहार में चुनाव की तारीखों की घोषणा अभी भले नहीं हुई है लेकिन सियासी सरगर्मी अपने उफान पर है. कहीं सीटों को लेकर दावेदारी है तो कहीं गठबंधन का पेंच फंसा है. कोई अपनी जीती हुई सीट छोड़ने को तैयार नहीं है तो कोई मुश्किल सीटों पर लड़ने से बच रहा है. जिसका जहां वोट बैंक है, उसके आधार पर अपनी जोर आजमाइश कर रहा है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भले कह रहे हैं कि एनडीए में सबकुछ ठीक है लेकिन लोजपा ने जिस तरह का रूख अख्तियार किया है, खासकर के जदयू के खिलाफ उससे लगता है कि कहीं न कहीं सीटों को लेकर पेंच जरूर है. आखिर ऐसा क्यों हैं इसे समझने की कोशिश करते हैं.

2015 में नीतीश ने धुर विरोधी लालू यादव से किया था गठबंधन
दरअसल 2015 का विधानसभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था. इस चुनाव में वर्षों के यार जुदा हो गए थे और पुराने धुर विरोधी एक हो गए थे. 20 साल बाद लालू और नीतीश एक साथ मिलकर महा गठबंधन (जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी) के रूप में चुनाव लड़ रहे थे, जबकि दूसरी ओर भाजपा, लोजपा, रालोसपा और हम पार्टी मिलकर उनका मुकाबला कर रही थीं. चुनाव परिणाम घोषित हुए तो महा-गठबंधन को बहुमत मिला, सरकार भी बनी लेकिन दोनों का साथ ज्यादा दिन नहीं चल सका और जुलाई 2017 में नीतीश महा-गठबंधन से अलग होकर फिर से एनडीए में आ गए. इस बार के चुनाव में जदयू, भाजपा, लोजपा और हम पार्टी साथ हैं तो वहीं रालोसपा एनडीए से अलग होकर महा-गठबंधन का हिस्सा हो गई है.

52 सीटों पर भाजपा को दी थी सीधी टक्कर
2015 के पहले जदयू बड़े भाई की भूमिका में होती थी लेकिन इस बार भाजपा छोटे भाई की भूमिका में नहीं रहना चाहती है. राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दल बराबर- बराबर सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं. अगर इस पर बात बन भी जाए तो मुश्किल यह है कि लोजपा और दूसरी सहयोगी पार्टियों को कितनी सीटें दी जाए.

सीटों का मसला सुलझाना आसान नहीं
अगर सीटों का बंटवारा हो भी जाए तो कौन किस सीट से लड़ेगा, इस मसले को सुलझाना आसान नहीं होगा. क्योंकि पिछले चुनाव में 52 सीटों पर जदयू और भाजपा में सीधी टक्कर यानी यहां दोनों पार्टियां पहले और दूसरे नंबर पर थीं. इनमें से 28 जदयू और 24 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं. 22 सीटों पर तो हार जीत का अंतर 10 हजार से भी कम था. जबकि जदयू और लोजपा 22 सीटों पर आमने- सामने थीं, इनमें से 21 पर जदयू को जीत मिली थी. इस बार लोजपा की पूरी कोशिश है कि उसे कम से कम वो सीटें तो मिले ही जिस पर पिछली बार उसने चुनाव लड़ा था, लेकिन मुश्किल यह है कि जदयू अपनी जीती हुई सीटें इतनी आसानी से कैसे देगी.

2010 में छोटे भाई की भूमिका में थी भाजपा
आखिरी बार 2010 में भाजपा और जदयू एक साथ लड़ी थीं. उस वक्त भाजपा ने 102 और जदयू ने 141 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इनमें से 115 पर जदयू को और 91 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी. पिछली बार रालोसपा एनडीए का हिस्सा थी. लेकिन इस बार वह महा-गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. 2015 में14 सीटों पर रालोसपा का मुकाबला राजद और कांग्रेस के साथ हुआ था. जिसमें से सिर्फ दो सीटों पर रालोसपा को जीत मिली थी. पिछले चुनाव में 8 सीटें ऐसी थीं जहां हार-जीत का अंतर एक हजार से भी कम था. इनमें से तीन राजद को, तीन भाजपा को और एक-एक जदयू और सीपीआई को मिली थी. तरारी सीट पर जीत-हार का अंतर 272 तो चनपटिया सीट पर सिर्फ 464 वोट का अंतर था.

इन 21 सीटों पर भाजपा ही जीतती आई है
अगर हम पिछले कुछ चुनावों को देखें तो कई दिलचस्प आंकड़े सामने आते हैं. कई ऐसी सीटें हैं जहां एक ही पार्टी लंबे समय से चुनाव जीत रही है तो कई ऐसी सीटें हैं जहां लंबे वक्त से किसी पार्टी को जीत नसीब नहीं हुई है. कुम्हरार, बनमनखी और गया टाउन, ये तीन सीटें भाजपा की गढ़ रही हैं. यहां भाजपा 1990 से चुनाव जीत रही है. वहीं बांकीपुर, दानापुर और पटना साहिब सीट पर भाजपा 1995 से जीत रही है. रामनगर, हाजीपुर, चनपटिया और रक्सौल सीट पर भाजपा 2000 से हारी नहीं है. इसके अलावा 11 ऐसी सीटें जहां भाजपा 2005 से लगातार जीत रही है. इस तरह कुल 243 सीटों में 21 पर भाजपा 15 या उससे ज्यादा साल से लगातार जीत रही है. जदयू की बात करें तो वह 17 सीटों पर 2005 से लगातार चुनाव जीत रही है. इनमें लौकहा, त्रिवेणीगंज,जोकिहाट, सिंघेश्वर और महाराजगंज जैसी सीटें शामिल हैं. हालांकि आंकड़ों के इस मुकाबले में कांग्रेस और राजद के हिस्से में कुछ खास नहीं है. कांग्रेस सिर्फ एक सीट (बहादुरगंज) पर तो राजद दरभंगा ग्रामीण और मनेर सीट पर 2005 से जीत रही है. इन आंकड़ों को देखें तो 28 सीटों पर भाजपा-जदयू लगातार 15 साल से जीतती आ रही है. इनमें से पिछली बार 10 सीटों पर दोनों आमने-सामने थीं. जिसमें से 3 पर भाजपा और 7 सीटों पर जदयू को जीत मिली थी.

इस देश में सभी नागरिकों को मुफ्त में मिलेगा कोविड-19 का टीका

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कोविड19 के टीके को लेकर अपनी योजना का खुलासा करने के साथ इस पर काम भी शुरू कर दिया है. इसके तहत देश के सभी नागरिकों को टीका मुफ्त में मिलेगा. खास बात यह है कि टीके का वितरण जनवरी माह की शुरुआत में होने की बात इस योजना में कही गई है. अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग और रक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से बुधवार को इस योजना से जुड़े दो दस्तावेजों को जारी किया है. इनमें कोरोनो वायरस महामारी के बीच ट्रंप प्रशासन की वैक्सीन वितरण रणनीति को रेखांकित किया गया है.
_ अभी सीमित मात्रा में उपलब्ध है वैक्सीन
एचएचएस सचिव एलेक्स अजार ने कहा कि हम दूसरे राज्यों और स्थानीय स्वास्थ्य साझीदारों के साथ भी काम कर रहे हैं ताकि अमेरिका में हर किसी को कोरोना वैक्सीन मिल सके. अमेरिकी लोगों को पता होना चाहिए कि विज्ञान और डाटा की मदद से वैक्सीन बनाने की प्रकिया शुरू की गई थी. बयान जारी होने बाद प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि अभी सीमित मात्रा में ही वैक्सीन उपलब्ध है और पूरा ध्यान स्वास्थ्य कर्मियों, आवश्यक कार्यों में लगे दूसरे कर्मचारियों और वंचितों की सुरक्षा पर है.
वैक्सीन के वितरण में पेंटागन भी सक्रिय रूप से शामिल होगा. नागरिक स्वास्थ्य कर्मी ही वैक्सीन का टीका लगाएंगे. अजार ने बयान में कहा कि ऑपरेशन वार्प स्पीड के तहत हम महीनों से इस पर काम कर रहे हैं ताकि लोगों को कोरोना वैक्सीन का प्रभावी टीका उपलब्ध कराया जा सके और जो तमाम मानकों पर भी खरा उतरे.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता ने जहर खा कर की आत्महत्या

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
दिल्ली पानीपत हाई वे पर आम आदमी पार्टी (आप) के नेता निशांत तंवर ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली है. तंवर की अर्ध नग्न लाश पुलिस को मिली थी. पुलिस ने मृतक के परिजनों के बयान पर मुकदमा दर्ज कर लिया है.
जानकारी के अनुसार दिल्ली-पानीपत हाईवे पर कार में एक युवक ने जहर निगल लिया. वह कार के पास अर्द्धनग्न हालत में बेसुध पड़ा था. लोगों ने पुलिस को सूचना दी और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच की तो शव की पहचान दिल्ली के नारायणा निवासी निशांत तंवर के रूप में हुई.