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Thursday, September 3, 2026
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रोहिंग्या शरणार्थी भारत में रहेंगे या वापस भेजे जाएंगे

रोहिंग्या शरणार्थी
रोहिंग्या शरणार्थी

एनपी न्यूज़ नेटवर्क । Navpravah.com

रोहिंग्या मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम सुनवाई की तारीख तय की है, c

केंद्र सरकार ने दलील देते हुए कहा है कि, मसला आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ा है और अदालत इसमें दखल न दे, रोहिंग्या लोगों ने अपने कैंप में बुनियादी सुविधाओं की कमी की भी शिकायत की है।

दरअसल, इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि रोहिंग्या जो बॉर्डर के जरिए भारत में प्रवेश चाहते हैं, उनको बॉडर से ही वापस भेजा जा रहा है, इसके लिए चिली पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि, सरकार इस समस्या के समाधान के लिए राजनयिक प्रयास कर रही है, इसलिए कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने NHRC के वकील से पूछा था कि क्या ऐसे लोगों को देश में घुसने की इजाजत दी जा सकती है? इस पर NHRC ने कहा था कि वो केवल उन लोगों के लिए चिंतित हैं जो बतौर रिफ्यूजी देश में रह रहे हैं।

रोहिंग्या समुदाय 12वीं सदी के शुरुआती दशक में म्यांमार के रखाइन इलाके में आकर बस तो गया, लेकिन स्थानीय बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने उन्हें आज तक नहीं अपनाया है।

2012 में रखाइन में कुछ सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद रोहिंग्या और सुरक्षाकर्मियों के बीच व्यापक हिंसा भड़क गई, तब से म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा जारी है।

तमिलनाडु: किसानों ने दी सरकार को चुनौती

farmers agitation tamilnadu
farmers agitation tamilnadu

एनपी न्यूज़ डेस्क| Navpravah.com

दिल्ली में चल रहे किसानों के दो दिवसीय ‘मुक्ति मार्च’ में तमिलनाडु के किसान एक बार फिर अपना पुराना तरीका अपनाते हुए नर खोपड़ी के साथ आंदोलन में शामिल हुए हैं।

नर खोपड़ी के साथ ही तमिलनाडु के किसानों ने अर्ध नग्न होकर केंद्र सरकार के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया है। बता दें इससे पहले अक्टूबर 2017 में भी तमिलनाडु के किसान इसी तरह से सरकार के प्रति विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।

तमिलनाडु के किसान इस दौरान हरे झंडों और हरे रंग के ही कपड़ों में नजर आए हैं, वहीं आंदोलन में शामिल हुए किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार उनकी मागों पर ध्यान नहीं देती है तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।

किसान महासभा के सचिव अतुल अंजान की मानें तो सरकार को स्पेशल सेशन में किसानों के लिए दो बिल लेकर आना चाहिए, एक कर्ज माफी का और दूसरा फसलों की उचित कीमत की गारंटी का।

बता दें, देश भर के ये किसान अपनी संपूर्ण कर्ज माफी और फसलों को डेढ़ गुना ज्यादा समर्थन मूल्य की मांग की है। किसानों के इस आंदोलन को कई वर्गों का भरपूर समर्थन मिला है, जिनमें कई राजनीतिक पार्टियां भी शामिल हैं।

किसानों का छलका दर्द, कहा, “हमारी जान भी सस्ती है”

kisan mukti march in delhi
kisan mukti march in delhi

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

‘माफ कीजिएगा! हमारे इस मार्च से आपको परेशानी हुई होगी… हम किसान हैं।’ ये पंक्तियां उन लाखों किसानों का दर्द है, जो उन्‍होंने दिल्‍ली में विरोध-प्रदर्शन करने के दौरान लोगों को बांटे पर्चे में जताया है।

किसानों ने पीले रंग के इस पर्चे में उनके साथ हो रही नाइंसाफी को उजागर करना चाहा है। यह पर्चा पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

इसमें किसानों ने लिखा है- ‘माफ कीजिएगा! हमारे इस मार्च से आपको परेशानी हुई होगी..हम किसान हैं, आपको तंग करना हमारा इरादा नहीं है, हम खुद बहुत परेशान हैं, सरकार को और आपको अपनी बात सुनाने बहुत दूर से आए हैं।’

इसके बाद किसानों ने इस पर्चे में उन कीमतों का जिक्र किया है, जिसमें उनके साथ नाइंसाफी होती है। उन्‍होंने लिखा है कि मूंग दाल जो लोग 120 रुपये/किग्रा की दर पर खरीदते हैं, उसकी उन्‍हें सिर्फ 46 रुपये/किलो कीमत ही मिलती है। इसी तरह जो टमाटर हम लोग बाजार से 30 रुपये/किग्रा की दर पर खरीदते हैं, उसकी कीमत किसानों को 5 रुपये/किग्रा. मिलती है।

किसानों ने इसके आगे लिखा है, “यह है हमारी परेशानी, हम हर चीज महंगी खरीदते हैं और सस्‍ती बेचते हैं, हमारी जान भी सस्‍ती है, पिछले बीस साल में तीन लाख से अधिक किसान आत्‍महत्‍या कर चुके हैं।” उन्होंने कहा कि, सरकार की चाभी मीडिया के पास है, लेकिन वो हमें देखता नहीं और मीडिया की चाभी आपके पास है, आप हमारी बात सुनेंगे, इस उम्‍मीद से हम आपको अपनी दुख-तकलीफ समझाने आए हैं।

किसानों ने पर्चे में मांग की है, ‘हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि संसद का एक विशेष सत्र किसानों की समस्‍या पर बुलाया जाए और उसमें किसानों के लिए दो कानून पास किए जाएं, फसलों के उचित दाम की गारंटी का कानून और किसानों को कर्ज मुक्‍त करने का कानून, कुछ गलत तो नहीं मांग रहे हम?

दरअसल देश के अलग-अलग हिस्‍सों से लाखों किसान एक बार‍ फिर कल से दिल्‍ली में एकत्र हुए हैं, अपनी विभिन्‍न मांगों को लेकर वे शुक्रवार को संसद की ओर कूच कर गए हैं, किसानों ने सरकार के खिलाफ इस प्रदर्शन को ‘किसान मुक्ति मार्च’ नाम दिया है।

‘जेठालाल’ ने ‘राहुल गांधी’ को बताया खुद से बड़ा ‘कॉमेडियन 

जेठालाल
जेठालाल

एनपी न्यूज़ नेटवर्क । Navpravah.com

राजस्‍थान में चुनावी समर जोरों पर है, विधानसभा चुनाव में अब तक जहां राजनेता अपने प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभाएं करने में जुटे हुए तो वहीं अब टीवी कलाकार भी इस मैदान में उतर कर प्रत्याशियों के समर्थन में रोड शो कर रहे हैं।

जहां मध्‍य प्रदेश इलेक्‍शन में टीवी सीरियल ‘ये रिश्‍ता क्‍या कहलाता है’ कि एक्‍ट्रेस मोहिना चुनाव प्रचार करती दिखीं, तो वहीं अब सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के जेठालाल यानी एक्‍टर दिलीप जोशी भी राजस्‍थान के चुनाव में भाजपा प्रत्‍याशी का समर्थन करते दिख रहे हैं।

गुरुवार को विधानसभा क्षेत्र में दिलीप जोशी ने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में रोड़ शो किया, इस दौरान अपने पसंदीदा किरदार जेठालाल को लाइव देखने के लिये लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

दिलीप जोशी ने खास बातचीत में कहा कि उन्‍होंने पिछले लोकसभा चुनाव में भी पीएय मोदी के लिये बनारस में प्रचार किया था और अब फिर से विधानसभा चुनाव में मौका मिलने पर भाजपा के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।

अपने सीरियल ‘तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा’ के जरिए सालों से दर्शकों को हंसाने वाले जेठालाल भले ही बीजेपी का प्रचार कर रहे थे लेकिन जैसे ही उनसे राहुल गांधी के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने उन्‍हें कॉमेडियन कह दिया।

दिलीप जोशी से जब पूछा गया कि एक हास्‍य कलाकार के तौर पर आप राहुल गांधी के बारे में आप क्‍या कहेंगे तो उन्‍होंने कहा, ‘बस इतना ही कह सकता हूं कि मुझसे बड़े हास्‍य कलाकार वो हैं’।

संतरे का जूस और पत्तेदार हरी सब्जियां खाने से कम होगा बुढ़ापे में याददाश्त कम होने का खतरा

हरी सब्जियां खाने से कम होगा बुढ़ापे
हरी सब्जियां खाने से कम होगा बुढ़ापे

एनपी न्यूज़ नेटवर्क । Navpravah.com

जो लोग हरी पत्तेदार सब्जियां, गहरे नारंगी और लाल रंग वाली सब्जियां, बेरीज (स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी) खाते हैं तथा संतरे का जूस पीते हैं, उनके बुढ़ापे में याददाश्त खोने का खतरा कम हो जाता है।

एक शोध के अनुसार, शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि जो पुरुष बुढ़ापे से 20 साल पहले ज्यादा मात्रा में फल और सब्जियां खाते हैं, उनमें सोच और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं, चाहे वे बाद में अधिक मात्रा में फल और सब्जियां खाएं या नहीं खाएं।

जो व्यक्ति अधिक सब्जियों का सेवन करते हैं उनमें कमजोर सोच कौशल विकसित होने की संभावना उन पुरुषों की तुलना में 34 फीसदी कम होती है, जो कम मात्रा में सब्जियों का सेवन करते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि, जो रोजाना संतरे का जूस पीते हैं उनमें कमजोर सोच कौशल विकसित होने की संभावना उन पुरुषों की तुलना में 47 फीसदी कम होती है, जो महीने में कम से कम एक बार भी संतरे के जूस का सेवन नहीं करते हैं।

यह शोध कुल 27,842 पुरुषों पर किया गया, जिनकी औसत उम्र 51 साल थी, इनमें 55 फीसदी प्रतिभागियों की अच्छी याददाश्य देखी गई, जबकि 38 फीसदी की ठीक-ठाक याददाश्त थी और केवल 7 फीसदी प्रतिभागियों की याददाश्त कमजोर थी।
 

 

महाराष्ट्र: अब मराठाओं को मिलेगा 16% आरक्षण

देवेंद्र फडणवीस ने आरक्षण को लेकर दिया बड़ा बयान
देवेंद्र फडणवीस ने आरक्षण को लेकर दिया बड़ा बयान

एनपी न्यूज़ नेटवर्क । Navpravah.com

महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को आज बड़ी सौगात दी है, फड़णवीस सरकार ने राज्य की नौकरियों एवं शिक्षा क्षेत्र में मराठा समुदाय को 16 फीसदी आरक्षण को मंजूरी दे दी है।

फड़णवीस ने कहा, ‘मराठा आरक्षण रिपोर्ट के लिए हमने मानक प्रक्रिया को पूरा किया है और हम आज इस पर विधेयक ला रहे हैं। जहां तक धांगर आरक्षण की बात है, तो हमने एक सब-कमेटी बनाई है जो शीघ्र ही इस बारे में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

बता दें कि फड़णवीस सरकार ने गत 18 नवंबर को विधेयक पारित कर दिया था और इसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाना था, शिवसेना इस विधेयक का समर्थन करने की बात कह चुकी है। इससे पहले अहमदनगर में एक रैली में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा था, ‘हमें पिछड़ा आयोग से मराठा आरक्षण पर रिपोर्ट मिली है। मैं आप सभी को 1 दिसंबर को जश्न मनाने के लिए तैयार रहने का अनुरोध करता हूं।’

गौरतलब है कि मराठा कोटा पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को सदन में पेश करने की मांग को लेकर मंगलवार (27 नवंबर) को भी जमकर हंगामा हुआ था, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस ने विपक्षी दलों पर मराठा कोटा पर त्वरित कार्रवाई में बाधा डालने का आरोप लगाया था।

कांग्रेस ने राजस्थान में पेश किया ‘राहुल मॉडल’

Rahul model in rajasthan by congress
Rahul model in rajasthan by congress

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

राजस्‍थान चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने आज घोषणापत्र जारी किया है, कांग्रेस ने इसे ‘जन घोषणापत्र’ नाम दिया है। पार्टी का कहना है कि यह घोषणापत्र राज्य की जनता की जनभावनाओं, उनकी अपेक्षाओं एवं आंकाक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस अवसर पर कहा कि पार्टी के घोषणापत्र में जन भावनाओं को शामिल करने का यह ‘राहुल मॉडल’ है और घोषणापत्र के लिए लगभग दो लाख सुझाव मिले थे। कांग्रेस ने अपने जन घोषणापत्र में वादा किया कि राजस्थान में सत्ता में आने पर वह किसानों का कर्ज माफ करेगी, बुजुर्ग किसानों को पेंशन देगी, बेरोजगार युवाओं को 3500 रुपये तक का मासिक भत्ता देगी व बच्चियों की शिक्षा पूरी तरह नि:शुल्क करेगी।

सचिन पायलट ने घोषणा पत्र की शुरुआत किसानों से की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में किसानों की अनदेखी की गई है और हमारी सरकार आने पर सबसे पहले किसानों के कर्ज माफ किए जाएंगें।

किसानों की सहायता के लिए कांग्रेस ने कृषि उपकरणों को भी जीएसटी मुक्त बनाने की घोषणा की है, इसमें कृषि के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सभी उपकरणों को शामिल किया गया है।

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बेरोजगारों की सहायता का भी जिक्र किया है, सचिन पायलट ने कहा कि, हम पूरी कोशिश करेंगे कि सभी को रोजगार प्राप्त हो लेकिन यदि ऐसा नहीं हो पाता तो हम बेरोजगारों की सहायता के लिए उन्हें 3,500 रूपयों तक की आर्थिक सहायता प्रदान करेंगे और प्रदेश में ऋण प्रक्रिया को भी आसान बनाएंगे।

सचिन पायलट ने परीक्षार्थियों की सहायता का भी ऐलान किया है, उन्होंने कहा, यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा के लिए अन्य राज्य में जाता है तो उसे फ्री ट्रांसपोर्ट मुहैया कराया जाएगा, इसके लिए विद्यार्थी को अपना आई कार्ड दिखाना होगा।

आलोक वर्मा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है जारी

CBI vs CBI विवाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू
CBI vs CBI विवाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू
सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
CBI vs CBI विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ इस पर सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा के जवाब लीक होने पर नाराज़गी जताते हुए सुनवाई टाल दी थी और आलोक वर्मा के बारे में छपी रिपोर्ट की प्रति उनके वकील फली नरीमन को देते हुए उनकी प्रतिक्रिया मांगी थी।
फली नरीमन ने बताया था कि, मीडिया में छपा आर्टिकल सीवीसी की ओर से पूछे गए आलोक वर्मा के जवाब के बारे में था, न कि कोर्ट में सीलबंद कवर में पेश किए गए जवाब के बारे में।
दरअसल, आलोक वर्मा ने अचानक छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ याचिका दायर की हुई है, याचिका में कहा गया कि दिल्ली स्पेशल पुलिस स्टैबलिशमेंट (डीएसपीई) एक्ट की धारा 4-बी के मुताबिक, सीबीआई निदेशक का दो वर्ष का तय कार्यकाल होता है और सरकार ने उनका कामकाज छीनकर इस नियम का उल्लंघन किया है।
याचिका में ये भी कहा गया है कि, उनका 35 साल सेवा का बेदाग रिकॉर्ड है और इसीलिए उन्हें दो वर्ष के लिए जनवरी 2017 में सीबीआई निदेशक पद पर नियुक्त किया गया है।
उनका कहना है कि सीबीआई से उम्मीद की जाती है कि वह स्वतंत्र और स्वायत्त एजेंसी के तौर पर काम करेगी, ऐसे हालात भी आते हैं, जबकि उच्च पदों पर बैठे लोगों से संबंधित जांच की दिशा सरकार की इच्छानुसार न हो, वर्मा कहते हैं कि हाल के दिनों में ऐसे मौके आए, जबकि जांच अधिकारी और अधीक्षण अधिकारी से लेकर संयुक्त निदेशक और निदेशक तक सभी कार्रवाई के बारे में एक मत थे, सिर्फ विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का मत भिन्न था।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि, करतारपुर कॉरीडोर खुलने का मतलब ये नहीं कि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो जाएगी

सुषमा स्‍वराज
सुषमा स्‍वराज

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

पाकिस्‍तान स्थित करतापुर कॉरीडोर के उद्घाटन समारोह से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने दो टूक लहजे में कहा कि, इसके खुलने का आशय ये नहीं है कि इस कारण दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो जाएगी।

उन्‍होंने यह भी कहा कि, भारत सरकार करतारपुर कॉरीडोर शुरू करने के लिए कई वर्षों से कह रही थी लेकिन पाकिस्‍तान ने अब जाकर सकारात्‍मक रुख अपनाया है।

सुषमा स्‍वराज का बयान उस समय आया है जिनमें कहा जा रहा है कि, पाकिस्‍तान सार्क शिखर सम्‍मेलन के लिए भारतीय पीएम मोदी को निमंत्रण भेज सकता है, सुषमा स्‍वराज के बयान से स्‍पष्‍ट है कि भारत इस तरह के किसी भी आमंत्रण को स्‍वीकार करने के मूड में नहीं है।

उधर पाकिस्तान के करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारत के गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक से जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित गलियारे की नींव वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान बुधवार को रखने जा रहे हैं, इससे भारतीय सिख श्रद्धालुओं को वीजा मुक्त आवाजाही की सुविधा मिल सकेगी।

पाकिस्तान ने इस कार्यक्रम के लिए भारत के 25 पत्रकारों के समूह को आमंत्रित किया है, इसी कड़ी में कूटनीतिक गलियारे में चर्चा है कि करतारपुर कॉरीडोर के माध्‍यम से पाकिस्‍तान दोनों देशों के बीच रिश्‍तों में जमी बर्फ को पिघलाने के लिए कोशिश कर सकता है।

द टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पहले ही पाकिस्‍तान के इस तरह के किसी ‘दिखावे’ को खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्‍तान एकतरफा फैसला लेते हुए इस तरह से किसी को ‘आमंत्रित’ नहीं कर सकता है।

इस संबंध में कहा जा रहा है कि, सार्क शिखर सम्‍मेलन का आयोजन तभी हो सकता है जब सभी सदस्‍य देश इसके लिए सहमत हों, सम्‍मेलन के लिए सदस्‍यों के बीच तारीखें तय होने के बाद ही निमंत्रण भेजा जा सकता है।

वो देश को किसानी सिखाने के लिए घूम रहे हैं: PM मोदी

पीएम मोदी
पीएम मोदी

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

राजस्‍थान चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि, कुछ लोग ऐसे हैं जिनको मालूम नहीं कि चने का पौधा होता है या पेड़, जो मूंग और मंसूर में फर्क नहीं समझते वो आज देश को किसानी सिखाने के लिए घूम रहे हैं।

इसके साथ ही कहा, धुआं क्‍या होता है, नामदार को नहीं मालूम है, लकड़ी का चूल्‍हा कैसा जलता है, नामदार को नहीं मालूम, मैंने बचपन में मां को लकड़ी के चूल्‍हे पर खाना पकाते देखा है, धुएं से आंखों में पानी निकलते देखा है, इसलिए उज्‍ज्‍वला योजना शुरू करने की प्रेरणा की।

पीएम मोदी ने भाषण की शुरुआत में मारवाड़ी में लोक देवताओं को याद करते हुए कहा कि, ‘आप सगला ने घणा घणा राम राम सा’, भाजपा की सरकार को चाहे दिल्ली में सेवा करने का मौका मिले, चाहे प्रदेश में सेवा करने का मौका मिले, वह सभी का साथ सभी का विकास के मंत्र पर काम करती है।

नागौर की पहचान नर और नारा से है, परिश्रम से है मेहनतकश लोगों से है, नागौर की इस संत एवं शूरवीरों की भूमि पर एक कामदार आपसे आशीर्वाद मांगने आया है, आख़िरकर सरकार किसके लिए होती है सरकार ग़रीबों के लिए होती है, सरकार सामान्य मानवीय के लिए होती है, अगर कोई बीमार हो जाए तो सरकार के अलावा कोई चारा नही होता, अमीर बीमार हो जाए तो दस चिकित्सक सेवा में लगे रहते है, मेरा ग़रीब कहा जाएगा, यह तो वही जानता है जो आप में से निकला है।

पीएम ने कहा कि, 2022 तक एक भी परिवार बिना मकान के नहीं रहेगा, एक करोड़ पच्चीस लाख गरीबों को घर किसने दिए हैं, ये मोदी ने नहीं दिए, आपके एक वोट ने दिए हैं, सही जगह पर आपका अगर वोट सही पड़ता है तो गरीबों को पक्का घर मिलता है, आपके वोट की ताक़त का पता चला आपको, हम वोट दे रहे हैं, राजस्थान बनाने के लिए।

धुएं से मुक्ति मिलने पर आशीर्वाद किसको मिलेगा क्‍योंकि आपके वोट के कारण ऐसा संभव हुआ है, इसका पुण्य वह कमाएगा जिसने वोट दिया उसको मिलेगा पुण्य, इसलिए मैं आपसे वोट मांगने आया हूं।