विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पीएम मोदी ने कहा कि, हार और जीत जीवन का अहम हिस्सा है, साथ ही उन्होंने कहा कि, वह हार स्वीकार करते हैं, मंगलवार को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी को राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार का समान करना पड़ा। पीएम मोदी ने कहा कि, हार और जीत जीवन का अहम हिस्सा है, साथ ही उन्होंने कहा कि, वह हार स्वीकार करते हैं
कल रात पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए बीजेपी के कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान मेहनत करने के लिए शुक्रिया भी अदा किया, उन्होंने कहा, विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी कार्यकर्ता के परिवार ने रात-दिन जम कर मेहनत की है, मैं उनकी मेहनत को सलाम करता हूं, जीत और हार जीवन का अहम हिस्सा है।
ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस, केसीआर और मिजोरम में एमएनएफ को भी बधाई दी है, इसके अलावा उन्होंने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लोगों का भी शुक्रिया अदा किया है।
पीएम ने कहा कि, हमें इतने खराब नतीजे की उम्मीद नहीं थी, हमें इन नतीजों पर विचार करना होगा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों जगह पिछले 15 साल से हमारी सरकार थी, मुझे नहीं लगता की हार की वजह एंटी इनकंबेंसी फैक्टर है, बल्कि थकान है।
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि, मोदीजी सिर्फ कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते रहे, उनको ये पता नहीं है कि भारत कभी कांग्रेस मुक्त नहीं होगा, कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाले खुद मुक्त हो जाएंगें।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनावों में बीजेपी के कांग्रेस से पिछड़ने के बाद कहा कि उनकी पार्टी को सबसे ज्यादा वोट जरूर मिले, लेकिन हमें स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि, “हम सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करेंगे, हम संख्याबल के आगे सिर झुकाते हैं। लिहाजा मैं राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने जा रहा हूं। उन्होंने जिस अंदाज में ये बात कही, वही अंदाज़ 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के एक भाषण में है, जब उनकी 13 दिन पुरानी सरकार अपेक्षित बहुमत नहीं जुटा पाई थी।
तब वाजपेयी ने लोकसभा में भाषण देते हुए कहा था, “जनता ने विपक्ष को जनादेश नहीं दिया था, लेकिन लोकतंत्र में बहुमत का खेल होता है, ऐसे में हम संख्याबल के सामने शीश झुकाते हैं, मैं इसके साथ ही राष्ट्रपति के पास अपना इस्तीफा देने जा रहा हूं।”
शिवराज सिंह चौहान ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि पराजय की जिम्मेदारी मेरी, मेरी और सिर्फ मेरी है। अब मैं पूरी तरह मुक्त हूँ, पार्टी कार्यकर्ताओं ने अथक प्रयास किया, हमको वोट भी ज्यादा मिले, लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इससे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 230 सीटों के परिणाम आने के बाद 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस को बसपा समर्थन देगी, खुद बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह ऐलान किया है।
मायावती ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी गलत नीतियों की वजह से चुनावों में हारी है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि राज्यों के विधानसभा चुनाव में हम अपेक्षा के मुताबिक सीटें जीतने में कामयाब नहीं हुए, लेकिन मैं हमारी पार्टी के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करती हूं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में आज डेढ़ घंटे की मतगणना के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह को कांग्रेस उम्मीद्वार करुणा शुक्ला से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिससे भाजपा प्रत्याशियों की टेंशन बढ़ी हुई नजर आ रही है।
राजनंदगांव से सीएम रमन सिंह लगातार आगे-पीछे चल रहे हैं, वहीं बात करें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की तो वह मरवाही विधानसभा सीट पर तीसरे नंबर पर चल रहे हैं।
बता दें राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 66 सीटों के साथ कांग्रेस पूर्ण बहुमत से राज्य में आती दिख रही है, एक ओर जहां कांग्रेस 66 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है तो वहीं बीजेपी 17 और जनता कांग्रेस 8 जबकि 2 सीट पर अन्य निर्दलीय दल आगे चल रहा है।
बस्तर से कांग्रेस प्रत्याशी लखेश्वर बघेल ने 27,238 मतों के अंतर से जीत दर्ज कराई है, सीतापुर से कांग्रेस प्रत्याशी अमरजीत सिंह ने 17855 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कराई, वहीं चित्रकोट विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दीपक बैज जीते हैं।
राज्य में लगातार पलड़ा कांग्रेस की तरफ भारी होने से पूरे कांग्रेसियों में खुशी का माहौल है, जिसके चलते रिजल्ट आने से पहले ही कांग्रेसी नेता जश्न मनाते दिख रहे हैं, वहीं कोटा से अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी भी पीछे चल रही हैं, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी विभोर सिंह बढ़त बनाए हुए हैं।
बता दें कि, छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव संपन्न हुए थे, जिसमें पहले चरण में 18 सीटों के लिए 12 नवंबर को और दूसरे चरण में 72 सीटों के लिए 20 नवंबर को चुनाव हुए थे, प्रदेश में कुल 1,84,80,997 मतदाता हैं जिनमें से 31 लाख 80 हजार मतदाता पहले चरण में और दूसरे चरण में 1 करोड़ 53 लाख 983 मतदाता थे।
राजस्थान विधानसभा चुनाव की मतगणना आज सुबह 8 बजे से जारी है, 32 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं, सीएम वसुंधरा राजे ने झालरापाटन, सचिन पायलट ने टोंक और अशोक गहलोत ने सरदारपुरा सीट पर जीत दर्ज की है।
राजस्थान की 199 सीटों के रुझानों में 103 सीटोंं पर कांग्रेस और 68 पर बीजेपी आगे चल रही है, वहीं 22 सीटों पर अन्य आगे चल रहे हैं।
राजस्थान चुनाव परिणामों के रुझान सामने आने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने निर्दलीय प्रत्याशियों से समर्थन मांगा है, उन्होंने कहा कि, राजस्थान में कांग्रेस को जनता का समर्थन मिला है।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, बीजेपी जुगाड़ से सरकार बनाना चाहती है, हम सरकार बनाने के लिए बागियों और बाहरियों का स्वागत करेंगे, राजस्थान के सीएम चेहरे का फैसला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी करेंगें।
राजस्थान में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए हुए मतदान में 72.70 फीसदी मतदान हुआ था, चुनाव आयोग की मानें तो मतगणना को लेकर सभी जगहों पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, वहीं राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मतगणना से पहले बांसवाड़ा में त्रिपुर सुंदरी मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंची हैं।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश माथुर ने कहा है कि, प्रदेश में एक बार बीजेपी एक बार कांग्रेस-इस परंपरा को सही नहीं मानता, जहां हम (बीजेपी) सरकार में हैं वहां लगातार सरकार बना रहे हैं, केंद्र और प्रदेश में सरकार है।
जयपुर की बात करें तो यहां की 19 विधानसभा सीटों की मतगणना कामर्स और राजस्थान कॉलेज में होगी, जयपुर में 4 हजार कर्मचारी 220 टेबल के साथ लगी कुर्सी पर बैठकर वोट गिनेंगे, कड़ी सुरक्षा के बीच कॉमर्स कॉलेज में 10 और राजस्थान कॉलेज में 9 विधानसभा सीटों की मतगणना होगी।
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के रुझानों पर नेताओं की प्रतिक्रिया भी आनी शुरू हो गई है, अब तक के रुझानों पर शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि मैं नहीं कहूंगा कि ये कांग्रेस की जीत हैं, लेकिन यह लोगों का गुस्सा है।
बता दें कि ताजा रुझानों के मुताबिक, बीजेपी सत्ता विरोधी रुझानों से जूझ रही है, इन रुझानों ने बीजेपी को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है, देश में लोकसभा चुनाव होने में 6 महीने से कम समय रह गया है, ऐसे में इन पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों पर पूरे देश की नजर लगी है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से बीजेपी को 112 सीटों पर बढ़त है, इस तरह वह बहुमत के जादुई आंकड़े से महज चार सीटें पीछे है, छत्तीसगढ़ के रुझानों में कांग्रेस बड़े बहुमत की ओर बढ़ रही है।
इसके साथ ही लग रहा है कि 15 सालों से सत्ता में बीजेपी पिछड़ रही है, यहां की 90 सीटों में से कांग्रेस 58 सीटों पर आगे है, बीजेपी 24 और अजीत जोगी की छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस और बसपा के गठबंधन को 7 सीटों और 1 सीट पर अन्य को बढ़त मिलती दिख रही है।
तेलंगाना की 119 सीटों के रुझानों में सत्तारूढ़ टीआरएस को 90 से अधिक सीटों पर बढ़त है, मिजोरम में सत्तारूढ़ कांग्रेस के हाथ से सत्ता फिसलती दिख रही है और विपक्षी एमएनएफ को 40 में से 23 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है, कांग्रेस यहां पर 12 और बीजेपी 2 सीटों पर आगे है।
2019 के लोकसभा चुनाव में अभी काफी समय है, लेकिन नेताओं और पार्टियों ने अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर नाराज चल रहे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने आज मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने आज पीएम मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि कुशवाहा महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं। मंगलवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है, उससे पहले आज एनडीए की बैठक होनी है, इस बैठक में उपेंद्र कुशवाहा ने जाने से मना कर दिया था।
दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा की मांग है कि 2019 के लोकसभा में उन्हें बिहार में चार सीटें दी जाएं, लेकिन बीजेपी उन्हें दो ही सीटें देने पर अड़ी है। यही कारण है कि वह लगातार इसका विरोध कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, बिहार की 40 में से 17 सीटों पर बीजेपी और 17 सीटों पर जेडीयू चुनाव लड़ सकती है, जबकि बाकी सीटें LJP और RLSP में बांटी जाएंगी। गौरतलब है कि मंगलवार को पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने हैं, एग्जिट पोल में कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है।
“साँझ के हाथों मे सूरज दे गया है प्रेम-पाती,
जा रहा हूँ दूर तुमसे तुम जलाना दीप-बाती।”
अक्षर कभी क्षरित नहीं होते । ये उसे भी अमर करते हैं जो इन्हें साधता है । इस नश्वर दुनिया में काल के साथ वही लंबी यात्रा कर पाते हैं जो शब्द-साधक होने के साथ-साथ शब्दजीवी भी होते हैं । जिनके कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होता । एक ऐसे ही विराट व्यक्तित्त्व के धनी थे कवि रंगनाथ चौबे ‘रंग’ । विद्यापति की परंपरा के इस कवि से जो भी मिला, उनका हो गया । मेरी भी मुलाक़ात कुछ ऐसी ही थी ।
गर्मी की छुट्टियों में मैं जब भी जाता, उनसे मिले बिना नहीं लौटता । गज़ब का आकर्षण तो उनके जादुई व्यक्तित्त्व में । चाय-पानी के बाद काव्य-पाठ का पिटारा खोल देते । शब्द-शब्द मधुरता की चाशनी में पगे रहते । जी करता था, बस सुनते रहें । सचमुच, कविता का मधुमय आभास यहीं होता था । काव्यशास्त्रों में साहित्य के लिए ‘ब्रह्मानंद सहोदर’ की बात की गई है । इसका अनुभव तो यहीं हुआ ।सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में उन्हीं को पद-प्रतिष्ठा मिल पाती है जो जोड़-तोड़ की राजनीति में माहिर होते हैं । सरस्वती का यह वरदपुत्र इस प्रकार के गठजोड़ में फिसड्डी साबित हुआ ।
एक मुलाक़ात में रंगनाथ चौबे जी ने बताया था कि देवरिया (बिहार) के एक कवि सम्मेलन में किस तरह वहाँ का जनमानस उनकी कविता-पाठ का दीवाना बन गया । इस अवसर पर ख्यातिलब्ध कवि स्व. चंद्रशेखर मिश्र स्वयं उनके मुरीद हुए थे और रचनात्मकता के कुछ गुर भी पूछे । यह भोजपुरी साहित्य का दुर्भाग्य है कि डॉ. रंगनाथ चौबे ‘रंग’ का खण्डकाव्य ‘सैरंध्री’ अभी तक अप्रकाशित है । खण्डकाव्य की उत्कृष्टता का आभास निम्न पंक्तियों से स्वयमेव हो जाता है –
“एक चक्र चलै न रुकै छन एक
धुरी मधुसूदन की अंगुरी
उही चक्र प जीव चराचर के संग
काल चलै कगरी कगरी
लोक चलै परलोक चलै, कुलि
लोक चलै संघरी संघरी
उही चक्र के जोरे अजोरे चलै
विधना रचिके रचना सगरी”
डॉ. रंगनाथ का भोजपुरी काव्य नंदनवन है । इसमें प्रवेश करने वालों का तन, मन और आत्मा मह-मह करने लगती है । यहीं पर बिंबित होती है वीनस-डी-मिलो की अर्धनग्न मूर्ति और लियोनार्दो द विंची की अबूझ पहेली-‘मोनालिसा’ । कतिपय भोजपुरी की रचनाएँ प्रासंगिक हैं –
“जब चातक पीर अधीर लगै,
नहिं दृष्टि टरै बदरा परसे
मनभावन सावन की डगरी,
कगरी कगरी कजरा तरसे
तब गजगामिनि कामिनि सी,
निकसै कविता बनिता घरसे
भव भाव विभाव से भावित हो,
रस- बिन्दु झरै अधराधर से ।”
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“अग्नि परीक्षा की ज्वाल कराल में
वेदवती सिय रूप समाला
जहवाँ तपि के निकसैं मतवा
लिहले हथवाँ जय जीव की माला
शिव धाम से शम्भु निहारि रहे
आसन छोड़ि बाघाम्बर वाला
कमला कमलापति शेष जहाँ
अवशेष जहाँ पय सिंधु बुझाला ।”
कवि रंग की हिंदी कविता भोजपुरी के समानांतर चलती है । यहाँ भी शब्द-माधुर्य, शब्द-चयन और बिंबों की खूबसूरत श्रृंखला बरकरार है । पीड़ा, करुणा, उदारता, प्रेम और मैत्री कवि की थाती है । पीड़ा को सँजो कर रखने वाले इस कवि की इस रचना की अंतर्व्यथा को समझें –
“छलक न जाये बन कर आंसू
छलकी तो नादानी होगी
यह पीड़ा ही सम्बल होगी जब
कुछ और सयानी होगी
आँखों में जब रात कटेगी
पीड़ा मन से बात करेगी
ढाढ़स देगी, समझाएगी.
कलकी भोर सुहानी होगी
छलकी तो नादानी होगी ।”
एक रचनाकार अपने समय से विलग नहीं हो सकता । वह भी राग-द्वेष, घात-प्रतिघात, सम्मान-अपमान को देखता, समझता और सहता है । इसलिए उसकी कलम वर्तमान विसंगतियों को उघाड़ कर समाज के सामने रखती है, युवाओं को संघर्ष के लिए तैयार करती है और साथ ही भविष्य में बदलाव का संकेत भी देती है । वर्तमान समसामयिक विसंगतियों पर
डॉ. रंगनाथ चौबे का आक्रोश इस गीत में कुछ इस प्रकार फूटा है –
“शब्द दूषित गगन में सघन हो गये,
बन के बादल किसी दिन बरस जायेंगे ।
हो न जाये हलाहल धरा का सलिल,
लोग दो बूँद को भी तरस जायेंगे ।।”
डॉ. चौबे अपने हिस्से की जिम्मेदारी उसी तरह निभाते हैं जैसे चिलचिलाती धूप में खड़ा कोई हरा-भरा पेड़ । चुपचाप, बिना ढोल पीटे । अपने एक गीत में वे लिखते हैं – “मैं समन्वय के पटल पर / शक्ति के संकल्प लिखकर / इस तिमिर में, एक तुलसी फिर बुलाना चाहता हूँ / मुखपुत्र ईश्वर का बने जो / राह करुणा की चुने जो / प्राण में रस-गंध घोले / ज्योति के जो द्वार खोले / मैं मलय की गंध में डूबे हुए / हर छंद की सौगंध लेकर / हर अधर पर एक भाषा फिर उगाना चाहता हूँ ।”
गीतकार रंगनाथ जी कल की खुशहाली के लिए वर्तमान को संघर्षों से भर देना चाहते हैं । इसके लिए वे हर काले गोरखधंधों पर जमकर वार करने को तैयार हैं । समझौता उनके स्वभाव में नहीं है । एक उद्बोधन में डॉ. चौबे लिखते हैं –
“शह छोड़ अब मात करें हम
आओ कल की बात करें हम
आँखों वाले उन अंधों की
काले सब गोरखधंधों की
घातों पर प्रतिघात करें हम
आओ कल की बात करें हम ।”
डॉ. रंगनाथ चौबे ‘रंग’ मात्र गीतों में ही नहीं बल्कि जीवन में भी फक्कड़ थे । वही, कबीर वाली फक्कड़ता । मज़ाल क्या कि उनके चेहरे पर किसी ने शिकन भी देखी हो । सबके लिए उनके दिल से सद्भावना की नदियाँ फूटती थीं । मिलने वाले को यही लगता था कि डॉक्टर साहब सबसे ज्यादा उसी की परवाह करते हैं ।
उनके निधन से आहत डॉ. लक्ष्मण दूबे बताते हैं, “अभी दस दिन पहले रंग जी ने मुझे वीडियो कॉल किया था । कह रहे थे अब मैं बिल्कुल स्वस्थ हूँ । पिछली बार कम समय देने के कारण वे नाराज थे । बच्चों जैसी अधीरता दिखाते हुए उन्होंने कहा था कि लक्ष्मण जी जल्दी गाँव आ जाओ । लिट्टी-चोखा साथ में खाएँगे । मैं बनवाऊँगा । मेरे घर आना, नहीं तो मैं ही आपके यहाँ चला आऊँगा ।” चौबे जी अपनी बीमारी को लेकर कभी उदास नहीं हुए । “हम क्यों घबरायें” शीर्षक गीत में लिखते हैं –
“जब अनंत से घिरी हुई हैं, पृथ्वी की सीमायें –
हम क्यों घबरायें ?
जैसी गंध मिली धरती को, वैसे सुमन खिले ।
उतना ही गतिमान जगत है, जितनी छुवन मिले ।
अक्षरहीन अँधेरों से ही, निकली सभी ऋचायें –
हम क्यों घबरायें ?
जितनी पीता रहता सूरज, अपकर्षों की हाला ।
उत्कर्षों के लिए चाँद ने, उतना अमृत दे डाला ।
रंग सभी की आँखों में, इंद्रधनुष भर जायें –
हम क्यों घबरायें ?”
डॉ. रंगनाथ का साहित्य वैविध्यता पूर्ण है । यहाँ सबके मन की बात मिलेगी । सौंदर्य और दर्शन साथ-साथ चलते हैं । ज्ञान की गगरी प्रेम के विशाल समुद्र में बदलती जाती है । शब्द-संधान के अचूक निशानेबाज हैं रंगनाथ जी । हवाओं का रुख पहचानने में निष्णात । तभी तो लिखते हैं –
“जाने या अनजाने में ही,
उलझन को सुलझाने में ही,
हमसे कोई भूल हुई है,
तभी हवा प्रतिकूल हुई है ।”
इनकी रचनाओं को पढ़ते हुए कभी जयदेव का साहित्य सामने आता है तो कभी विद्यापति की पदावली झंकृत होने लगती है ।कहीं कवि बिहारी का सौंदर्य ध्वनित होता है तो कहीं पर धूमिल का आक्रोश । ग़ज़लों में तो दुष्यंत कुमार की परंपरा के वाहक-से प्रतीत होते हैं ।
गीत, कविता एवं ग़ज़ल के कई संग्रह डॉ. रंगनाथ जी ने लिखा है । गोपालगंज बाजार के उनके साहित्यिक शिष्य श्री लालबहादुर चौरसिया बताते हैं , ‘चुटकी भर सिंदूर’, ‘हमसे कोई भूल हुई है’, ‘मेमने के होठ पर लहू’, ‘बदनाम चमन हो जाएगा’ और ‘दर्द के गीत’ उनके प्रमुख संग्रह हैं ।” डॉ. रंगनाथ चौबे के देहावसान से व्यथित वे अपनी बात बढ़ाते हुए कहते हैं, “मैंने अपना एक अभिभावक खो दिया ।
डॉ. साहब मुझसे इतना अंतरंग थे कि प्रतिदिन मेरी दुकान पर आते और अपनी कोई न कोई रचना सुनाकर जाते । मैंने कभी उन्हें मायूस नहीं देखा । हम सबकी प्रेरणा थे वे । मुझे ऐसा लगता है कि आज़मगढ़ जनपद ने एक साहित्यिक विभूति खो दिया ।” डॉ. रंगनाथ चौबे ‘रंग’ एक ऐसे कोहिनूर थे जिनकी चमक पर सदैव आवरण पड़ा रहा । मुझे विश्वास है कि महाप्राण निराला की तरह उन्हें भी कोई राम विलास शर्मा मिलेगा ।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल की तरह कोई अन्वेषी उनकी पांडुलिपियों को प्रकाश में लाएगा । यकीन है कि साहित्य के मंदिर में इस महाकवि की शाश्वत प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी । पीर का यह गायक अपनी फेसबुक वाल पर 2 सितंबर, 2018 की सायं साढ़े आठ बजे अपने स्वस्थ होने का वादा करके 5 दिसंबर, 2018 की शाम को लखनऊ की पीजीआई में अपने वादे से मुकर जाता है । चल पड़ता है अपनी अनंत यात्रा पर । साहित्य जगत में एक सूनापन…खाली-खाली ।
न तो कोई चर्चा, न ही शोक सभा । बस, एक अवसाद- रिक्तता –
“पीर छलक कर इन .नयनों से,
धड़कन का संवाद लिखेगी ।
आत्म कथा आहों की लिखकर ,
आँसू का अनुवाद लिखेगी ।”
विधानसभा चुनावों के बाद जारी हुए कई एक्जिट पोल के परिणामों में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की जीत की संभावना जताई गई है। मगर राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में बीजेपी ही सरकार बनाएगी। सीएम शिवराज सिंह ने कहा, “मुझसे बड़ा सर्वेयर कोई नहीं हो सकता, जो दिन और रात जनता के बीच घूमता है। इसलिए पूरे विश्वास के साथ कह रहा हूं कि भारतीय जनता पार्टी ही सरकार बनाएगी। मध्य प्रदेश में साल 2003 से बीजेपी सत्ता में है। एबीपी न्यूज-लोकनीति सीएसडीएस के सर्वे में 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को 126 सीटें दी गई हैं, जबकि बीजेपी को 94 और अन्य को 10 सीटें दी गई हैं।
आईटीवी-नेता एक्जिट पोल में कांग्रेस को 112 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है और बीजेपी को 106 सीटें मिलने की बात कही गई है। मायवती की बसपा सहित अन्य दलों को 12 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
बता दें कि, 230 सदस्यीय विधानसभा में किसी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 116 सीटें जीतने की जरूरत है। साल 2013 में बीजेपी ने 165 सीटें जीती थीं, कांग्रेस को 58 सीटें मिली थीं, बसपा को चार और निर्दलियों ने तीन सीटें जीती थीं।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोलीबारी की घटना में कथित रूप से संलिप्त एक जवान को आज जम्मू-कश्मीर में हिरासत में ले लिया गया है। बुलंदशहर की घटना में एक पुलिस अधिकारी और एक स्थानीय नागरिक की मौत हो गई थी।
सूत्रों के अनुसार, जितेंद्र मलिक उर्फ जीतू फौजी को सोपोर में 22 राष्ट्रीय राइफल्स द्वारा हिरासत में लिया गया,।उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) उसे हिरासत में लेने के लिए देर शाम यहां पहुंच सकता हैं।
पिछले सप्ताह बुलंदशहर में भीड़ द्वारा हुई हिंसा में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और चिंगरावठी गांव के रहने वाले सुमित कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि बुलंदशहर में सोमवार को हुई मॉब लिंचिंग के मामले में दो और पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया है। खेत में कुछ हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा गोवंश के अवशेष मिलने के बाद बिगड़ी स्थिति को संभालने में नाकाम रहने की वजह से दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
इस बीच, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर की इस घटना को दुर्घटना बताया है, उन्होंने पहले कहा था कि यह घटना एक बहुत बड़ी साजिश थी, लेकिन शुक्रवार को दिल्ली में कहा कि यह घटना वास्तव में एक दुर्घटना थी. उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश में कोई मॉब लिंचिंग की घटना नहीं हुई है, बुलंदशहर में जो हुआ, वो एक दुर्घटना थी।
चित्रकूट | धर्मनगरी चित्रकूट में इस समय बाल श्रम तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। समूचे देश में हज़ारों संस्थाओ से लेकर सरकार तक ने बालश्रम रोकने हेतु कई जरूरी उपाय कर रखे हैं, लेकिन सब ढकोसला नजर आ रहा है। बुन्देलखण्ड इलाके में बालश्रम तेजी से अपनी जड़ें जमा रहा है। इसी क्षेत्र में आने वाला धर्मनगरी चित्रकूट, जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कर्मस्थली के रूप में जाना जाता है। यहां बालश्रम लगभग चारों तरफ फैला नजर आ रहा है।
सरकार से लेकर तमाम संस्थाओं द्वारा इसे रोकने हेतु चलाये जा रहे सभी कार्यक्रम बेमानी साबित हो रहे हैं। बालश्रम में पकड़े गए बच्चों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था न होने के कारण जिले का श्रम विभाग भी खुद को असहाय महसूस करता है। देश की नीति निर्धारण करने वाले जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार के हर नुमाइंदे के पास इस प्रश्न का उत्तर नहीं है कि आखिर बालश्रम में पकड़े गए बच्चों के पुनर्वास को लेकर कोई ठोस और उचित व्यवस्था क्यों नही है !
बाल-श्रम का मतलब ऐसे कार्य से है, जिसमें कार्य करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु सीमा से छोटा होता है। इस प्रथा को कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संघटनों ने शोषित करने वाली प्रथा माना है। अतीत में बाल श्रम का कई प्रकार से उपयोग किया जाता था, लेकिन सार्वभौमिक स्कूली शिक्षा के साथ औद्योगीकरण, काम करने की स्थिति में परिवर्तन तथा कामगारों श्रम अधिकार और बच्चों के अधिकार की अवधारणाओं के चलते इसमें जनविवाद प्रवेश कर गया।
इस कानून के तहत संरक्षित किये गए बच्चों के साथ क्या होता है ?
इस क़ानून का उल्लंघन करने वाली परिस्थितियों से जिन बच्चों को बचाया जाता है उनका नए कानून के तहत पुनर्वास किया जाना चाहिए। ऐसे बच्चे, जिन्हें देख-भाल और सुरक्षा की आवश्यकता है, उन पर किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा) अधिनियम २०१५ लागू होता हैl
क्या बच्चों का पारिवारिक व्यवसाय में काम करना क़ानूनी है?
हाँ, १४ वर्ष से कम आयु के बच्चों को पारिवारिक व्यवसाय में नियोजित किया जा सकता हैl ऐसे व्यापार जिनका संचालन किसी करीबी रिश्तेदार (माता, पिता, भाई या बहन) या दूर के रिश्तेदार (पिता की बहन और भाई, या माँ के बहन और भाई) द्वारा किया जाता है, वह इस परिभाषा में शामिल हैं l
यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि पारिवारिक व्यापार इस क़ानून के तहत परिभाषित खतरनाक प्रक्रिया या पदार्थ से जुड़ा न हो l ऊर्जा/बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योग, खान, विस्फोटक पदार्थों से जुड़े उद्योग इस परिभाषा में शामिल हैं। खतरनाक व्यवसाय एवं प्रक्रिया की परिभाषा में सभी शामिल व्यवसायों की सूची यहाँ पढ़ेंl
हालाँकि, बच्चे पारिवारिक व्यवसाय में सहयोग दे सकते हैं, यह सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इससे उनकी पढ़ाई पर कोई असर न पड़े, इस हेतु उन्हें स्कूल से आने के बाद या छुट्टियों में ही काम करना चाहिए l
child labor in chitrakoot
क्या माता-पिता/अभिभावकों को अपने बच्चों को काम करने की अनुमति देने के लिए दंडित किया जा सकता है?
सामान्यतः बच्चों के माता-पिता /अभिभावकों को अपने बच्चों को इस कानून के विरुद्ध काम करने की अनुमति देने के लिए सज़ा नहीं दी जा सकती है, परन्तु यदि किसी १४ वर्ष से कम आयु के बच्चे को व्यावसायिक उद्देश्य से काम करवाया जाता है या फिर किसी १४-१८ वर्ष की आयु के बच्चे को किसी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम करवाया जाता है तो यह प्रतिरक्षा लागू नहीं होती और उन्हें सज़ा दी जा सकती है। क़ानून उन्हें अपनी भूल सुधारने का एक अवसर देता है, यदि वह ऐसा करते हुए पहली बार पकड़े जाते हैं, तो वह इसे समाधान/समझौते की प्रक्रिया से निपटा सकते हैं, पर यदि वह फिर से अपने बच्चे को इस क़ानून का उल्लंघन करते हुए काम करवाते हैं तो उन्हें १०,००० रूपए तक का जुर्माना हो सकता है।
क्या बच्चों को काम पर रखना क़ानूनी है?
नहीं, १४ साल से कम उम्र के बच्चों को काम देना गैर-क़ानूनी है। हालाँकि, इस नियम के कुछ अपवाद हैं, जैसे कि पारिवारिक व्यवसायों में बच्चे स्कूल से वापस आकर या गर्मी की छुट्टियों में काम कर सकते हैं l इसी तरह फिल्मों में बाल कलाकारों को काम करने की अनुमति है, खेल से जुड़ी गतिविधियों में भी वह भाग ले सकते हैं।
14-18 वर्ष की आयु के बच्चों को काम पर रखा जा सकता है (जो किशोर/किशोरी की श्रेणी में आते हैं), यदि कार्यस्थल सूची में शामिल खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया से न जुड़ा हो।