28.2 C
Mumbai
Thursday, July 30, 2026
Home Blog Page 17

चौहत्तर वर्ष के हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पढ़िए, उनके जीवन की दस महत्वपूर्ण घटनाएँ

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | आज, 17 सितंबर 2024 को, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके जीवन की यात्रा अद्वितीय रही है, जो उन्हें एक साधारण परिवार के व्यक्ति से देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक तक लेकर गई है। मोदी का जीवन न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि कई महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा हुआ है जिसने उनके नेतृत्व और राजनीतिक दृष्टिकोण को आकार दिया। आइए उनके जीवन की 10 बड़ी घटनाओं पर नजर डालते हैं।

1. साधारण पृष्ठभूमि से राजनीति की ओर कदम: नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता चाय बेचते थे और मोदी भी अपने बचपन में इस काम में उनका साथ देते थे। ये प्रारंभिक संघर्षशील जीवन उन्हें आम जनता से जोड़े रखने में मददगार साबित हुआ।

2. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव: 1967 में, नरेंद्र मोदी आरएसएस के संपर्क में आए। वहां उन्होंने अनुशासन, संगठन और राष्ट्रसेवा के गुण सीखे। आरएसएस के माध्यम से उनका संपर्क भारतीय जनता पार्टी (BJP) से हुआ, जो आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन का आधार बना।

3. गुजरात के मुख्यमंत्री बनना (2001): 2001 में, नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए, जिनमें प्रमुख रूप से औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे का विस्तार शामिल था। हालांकि, 2002 के गुजरात दंगों के कारण उनका नाम विवादों में भी आया, लेकिन उन्होंने इससे उबरते हुए राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए।

4. 2002 के गुजरात दंगे: गुजरात में 2002 के सांप्रदायिक दंगों ने मोदी की छवि को काफी हद तक प्रभावित किया। इस दौरान उन पर दंगे रोकने में नाकामी का आरोप लगा, लेकिन बाद में उन्होंने कानूनी जांचों का सामना किया और उन्हें निर्दोष घोषित किया गया। ये घटना उनके जीवन का एक प्रमुख मोड़ साबित हुई।

5. ‘वाइब्रेंट गुजरात’ अभियान: मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने गुजरात को औद्योगिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 2003 में ‘वाइब्रेंट गुजरात’ अभियान शुरू किया। इस अभियान ने गुजरात को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया और राज्य में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए।

6. 2014 में प्रधानमंत्री बनना: 2014 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। ‘अच्छे दिन’ के नारे और विकास के वादे के साथ भाजपा ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, और नरेंद्र मोदी भारत के 14वें प्रधानमंत्री बने। यह उनके नेतृत्व और संगठनात्मक कौशल की जीत थी।

7. नोटबंदी (2016): प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने कई महत्वपूर्ण और विवादास्पद फैसले लिए। 8 नवंबर 2016 को, उन्होंने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने का ऐलान किया। नोटबंदी का उद्देश्य काले धन, आतंकवाद और नकली मुद्रा पर प्रहार करना था, हालांकि इस कदम के कई सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम सामने आए।

8. जीएसटी लागू करना (2017): 2017 में, मोदी सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया, जो भारत की कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार माना गया। इससे देशभर में एकीकृत कर प्रणाली लागू हुई और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया।

9. अनुच्छेद 370 हटाना (2019): 2019 में प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी बार चुने जाने के बाद, नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला लिया, जो राज्य को विशेष दर्जा देता था। इस फैसले ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी चर्चा और विवाद उत्पन्न किए, लेकिन इसे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।

10. कोविड-19 महामारी का प्रबंधन (2020): 2020 में आई कोविड-19 महामारी के दौरान नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की। महामारी के प्रबंधन के लिए उनकी सरकार ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया, जो दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बन गया। उन्होंने महामारी के समय में आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों के जरिए देश को संकट से उबारने की कोशिश की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन संघर्ष, धैर्य और संकल्प की कहानी है। उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत की राजनीति और समाज को गहराई से प्रभावित किया है। इन दस घटनाओं के माध्यम से, यह स्पष्ट है कि मोदी का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उनकी पहचान स्थापित हुई है।

IIT BHU में धूमधाम से मना सार्वजनिक गणेशोत्सव

इशिका गुप्ता| navpravah.com

वाराणसी, उत्तर प्रदेश| काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में स्थित आईआईटी बीएचयू के महाराष्ट्र मित्र मंडल द्वारा सार्वजनिक गणेशोत्सव का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन बीएचयू परिसर में उपस्थित धनराजगिरी हॉस्टल में हुआ। हॉस्टल के कॉमन हाल में गणेश प्रतिमा स्थापित करी गई थी व वहां भव्य सजावट की गई थी।

महाराष्ट्र मित्र मंडल के सदस्यों ने मिलकर हॉल को कुछ क्राफ्ट्स कार्यों द्वारा भी सजाया था। पंडाल के एक दीवार पर छत्रपति शिवाजी व उनके साम्राज्यों के नामों के साथ कुछ तस्वीरें भी लगी हुई थी।

मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी व्यवस्था हॉस्टल के ग्राउंड फील्ड में की गई थी, जिसमें आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसरों के छोटे-छोटे बच्चों (मेघना,अंजना,क्रिस्टी) ने भी नृत्य में सहभाग लिया।

बाकी कुछ आईआईटी छात्र छात्राओं ने अपनी गायन और नृत्य कला से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य में संस्कृति, धृति, भार्गवी, तनिष्का व समीक्षा ने अपनी प्रस्तुति दी। गायन में अंकित-हर्षित ,अलक्षेंद्र, आयुष-आयुष, रोहन पाटिल आदि ने प्रस्तुति दी। कविता पाठ में अभिनंदन ने पिता पर कविता सुनाई जो सभी को पसंद आई।

दूसरी कविता पाठ में खनन विभाग की अंतिम साल की छात्रा अपेक्षा ने छत्रपति शिवाजी के जीवन पर आधारित एक लंबी कविता का पाठ किया जिसमें छत्रपति शिवाजी के जन्म, उनके वीरता, संघर्ष, उनके हिंदू धर्म की स्थापना, साम्राज्य विस्तार, युद्ध , उनके बेटे शंभाजी की वीरता व शिवाजी की मौत तक की सारी वृतांत को एक कविता के माध्यम से पूरे भावपूर्वक रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने इस पूरी कविता को सुनाने में लगभग 4 से 5 मिनट का समय लगा। दर्शक भी इस कविता को सुन भावुक दिख रहे थे और बीच बीच में तालियां भी बजा रहे थे।

अंत में एक क्लासिकल गायन को मोहित व अनुभव द्वारा प्रस्तुत किया गया। और इसी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का समापन हुआ।

कार्यक्रम की शुरुवात शाम 7 बजे हुई जो 9 बजे खत्म हुई। कार्यक्रम के खत्म होने के पश्चात गणेश आरती हुई व भगवान और देवी देवताओं के जयघोष के साथ यह गणेशोत्सव संपन्न हुआ। मंडल ने बताया की गणेश विसर्जन कार्यक्रम दिनांक 17/9/2024 को किया जाएगा।

बिहार : सारण में मिलाद-उन-नबी जुलूस में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, अशोक स्तम्भ की जगह चांद-तारा

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | बिहार के सारण जिले में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान तिरंगे झंडे के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला तब सामने आया जब एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दिखाया गया कि एक पिकअप वाहन पर लहराए जा रहे तिरंगे पर अशोक चक्र की जगह चांद-तारा वाला प्रतीक लगाया गया था। इस वीडियो ने न केवल सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ी, बल्कि स्थानीय लोगों में भी गुस्सा और आक्रोश पैदा कर दिया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया

वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद सारण के पुलिस अधीक्षक डॉ. कुमार आशीष ने मामले का संज्ञान लिया और भारतीय ध्वज अधिनियम 2002 और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस की सक्रियता को देखते हुए संबंधित थाने ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस पिकअप वाहन को जब्त कर लिया, जिस पर यह विवादित झंडा लहराया जा रहा था। इसके साथ ही पुलिस ने इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार व्यक्तियों ने दावा किया कि उन्हें यह झंडा किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराया गया था।

पुलिस अधीक्षक डॉ. कुमार आशीष ने बताया कि पुलिस अब उस तीसरे व्यक्ति की तलाश में जुटी है, जिसने इस झंडे को दिया था। इसके साथ ही, इस घटना के पीछे छिपी मंशा और उद्देश्य को जानने के लिए गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जो भी इस षड्यंत्र में शामिल है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

तिरंगे के अपमान पर जनता का आक्रोश

तिरंगे झंडे के साथ इस तरह की छेड़छाड़ ने स्थानीय ग्रामीणों और अन्य लोगों के बीच व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों ने इस घटना को देश की अस्मिता के साथ सीधा खिलवाड़ बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने का घेराव करते हुए प्रदर्शन किया और प्रशासन से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि तिरंगा हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक है और इसके साथ कोई भी अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इस घटना को लेकर लोगों ने धरना दिया और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। उन्होंने प्रशासन से यह भी सुनिश्चित करने की मांग की कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों और यदि किसी धार्मिक या सामाजिक आयोजन के दौरान तिरंगे का उपयोग होता है, तो उसे आदर के साथ लहराया जाए।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन भी सतर्क हो गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि भारतीय ध्वज अधिनियम 2002 के प्रावधानों और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153 (समाज में वैमनस्यता फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, जुलूस के लाइसेंस की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या जुलूस की अनुमति कानूनी रूप से प्राप्त की गई थी और अगर हां, तो लाइसेंसधारी ने इस झंडे के इस्तेमाल पर कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई।

इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आखिरकार इस जुलूस में तिरंगे का उपयोग किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसके पीछे कोई सांप्रदायिक या राजनीतिक मंशा थी। पुलिस का कहना है कि इस तरह की हर पहलू की जांच की जा रही है और अगर कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी अपना विरोध जताया है। कई संगठनों ने इस घटना को राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के रूप में देखा है और इसके खिलाफ प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि तिरंगे का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इसके दोषियों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।

सार्वजनिक मंचों पर भी इस घटना की निंदा की जा रही है और लोगों ने यह मांग की है कि इस तरह के मामलों में पुलिस और प्रशासन को और भी सख्त होना चाहिए, ताकि देश की गरिमा और अस्मिता सुरक्षित रह सके। कई नेताओं और समाजसेवियों ने घटना पर बयान जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और इसके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ अस्वीकार्य है।

सौरभ भारद्वाज ने अरविन्द केजरीवाल की तुलना भगवान राम से की, पढ़िए पूरी खबर

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

नई दिल्ली। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ गये हैं, लेकिन जेल के बाहर आने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है, इस मामले को लेकर AAP नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आज को प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, एक सीएम इस्तीफा देता है और कहता है कि, दिल्ली की जनता मेरी ईमानदारी पर वोट करें, ऐसा आज तक नहीं हुआ‌ है, वो भी तब जबकि केंद्र सरकार ने सारी एजेंसी लगा रखी थी। दिल्ली के लोगो के अंदर ऐसी उत्सुकता है कि लोग चाहते हैं कि कल ही चुनाव हो और फिर अरविंद जी को सीएम बनाया जाये।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, कई लोग कहते हैं कि सतयुग में सुना था कि राम मर्यादा के नाम पर 14 साल के लिए वनवास पर चले गए। आज केजरीवाल जी ने वही किया है, वो भगवान नहीं है। लेकिन सतयुग के बाद ये पहली बार हुआ है।

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाते हुए कहा है कि, केंद्र सरकार समेत तमाम एजेंसियां, चाहे वह ईडी हो, सीबीआई हो, इनकम टैक्स हो सभी मुख्यमंत्री के पीछे पड़ी हैं, लेकिन ये सब के बावजूद मुख्यमंत्री को अभी भी अपने लोगों और अपनी ईमानदारी पर भरोसा है।

सौरभ भारद्वाज ने आगे बताया कि, आज AAP के PAC की बैठक होगी, पार्टी का जो भी नेता चुना जाएगा वह उपराज्यपाल के जरिए राष्ट्रपति के पास दावा पेश करेगा, उन्होंने कहा कि, विधायक हमारे साथ हैं, तो जाहिर है उस व्यक्ति को बुलाया जाएगा और शपथ ली जाएगी।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य घोष के पॉलीग्राफ जांच को लेकर सीबीआई ने किया ये दावा

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | कोलकाता में डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष ने आत्महत्या के एक नए सिद्धांत को सामने रखा है, जिसे अधिकारियों ने स्वीकार किया है। सीबीआई ने बताया है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के जवाब पॉलीग्राफ टेस्ट और वॉयस विश्लेषण के दौरान गड़बड़ पाए गए हैं।

अगस्त में, जब अस्पताल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की जांच चल रही थी, सीबीआई ने दावा किया कि संदीप घोष को सुबह 9:58 बजे घटना की जानकारी मिली थी, लेकिन उन्होंने तुरंत पुलिस को नहीं बताया। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने बाद में एक अस्पष्ट शिकायत दर्ज कराई।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि संदीप घोष ने तुरंत एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश नहीं की। इसके बजाय, उन्होंने आत्महत्या के एक नए सिद्धांत को पेश किया, जो पीड़िता के शरीर के निचले हिस्से पर मौजूद बाहरी चोटों के हिसाब से संभव नहीं लगता।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि घोष ने सुबह 10:03 बजे ताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अभिजीत मंडल से संपर्क किया, लेकिन अप्राकृतिक मौत का मामला सुबह 11:30 बजे दर्ज किया गया।

कोलकाता बलात्कार और हत्या के मामले में सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को फिर से गिरफ्तार किया है। एजेंसी का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने में देरी और अपराध स्थल की सुरक्षा में विफलता के कारण महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नुकसान पहुंचा।

सीबीआई ने आरोप लगाया कि घोष ने आरोपी संजय रॉय और अन्य लोगों को बचाने की कोशिश की, जिन्होंने अपराध स्थल पर अनधिकृत रूप से प्रवेश किया था। पीड़िता का बलात्कार और हत्या अस्पताल के सेमिनार हॉल में की गई थी, जहां वह आराम करने गई थी। उसका शव एक डॉक्टर ने हॉल में पाया था।

जम्मू कश्मीर में किस दल के घोषणा पत्र में क्या वादे किए गए हैं? चारों की तुलना एक साथ पढ़ें

संवाददाता। navpravah.com

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। आज 24 सीटों पर प्रचार थम जाएगा और 18 सितंबर को पहले चरण की वोटिंग शुरू होगी। यह चुनाव जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें प्रमुख दलों के बीच मुकाबला और भी तेज हो गया है। बीजेपी, कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन और पीडीपी प्रमुख दलों के तौर पर चुनावी रण में उतरे हैं, जबकि क्षेत्रीय दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि प्रमुख दलों ने अपने घोषणापत्र में क्या वादे किए हैं और उनके चुनावी रणनीति की विशेषताएं क्या हैं।

बीजेपी के वादे-

बीजेपी ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए अपना संकल्प पत्र जारी किया है। इसमें कुल 25 वादे शामिल किए गए हैं, जो महिलाओं, युवाओं, कश्मीरी पंडितों, किसानों और आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने पर केंद्रित हैं। प्रमुख वादे इस प्रकार हैं:

– माँ सम्मान योजना: बीजेपी ने घोषणा की है कि जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक घर की सबसे बुजुर्ग महिला को हर साल 18,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य बुजुर्ग महिलाओं को सम्मानित करना और उनके आर्थिक बोझ को कम करना है।

– पंडित प्रेम नाथ डोगरा रोजगार योजना: इस योजना के तहत जम्मू और कश्मीर के युवाओं के लिए 500,000 नौकरियों का सृजन किया जाएगा। यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और बेरोजगारी की समस्या को कम करने के लिए है।

– प्रगति शिक्षा योजना: कॉलेज के छात्रों के लिए सालाना 3,000 रुपये का यात्रा भत्ता प्रदान किया जाएगा, ताकि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके और वे आसानी से अपने कॉलेज जा सकें।

– किसानों के लिए बिजली बिल में छूट: किसानों को बिजली बिल में 50% तक की छूट देने का प्रस्ताव है, जिससे सिंचाई पंप और कृषि मशीनरी का संचालन अधिक किफायती हो जाएगा।

इसके अतिरिक्त, बीजेपी का कहना है कि अनुच्छेद 370 अब अतीत की बात हो गई है और भविष्य में इसे फिर से लागू नहीं किया जाएगा। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर का दर्जा बहाल करने का भी वादा किया है, और इसके लिए कोई भ्रम नहीं रखने की बात की है।

कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन के वादे

कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। कांग्रेस 32 सीटों पर और नेशनल कॉन्फ्रेंस 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। दोनों पार्टियों ने मिलकर सात महत्वपूर्ण गारंटियां दी हैं:

– महिला सम्मान: महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

अच्छी सेहत: स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और अधिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

OBC का हक: पिछड़ी जातियों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।

कश्मीरी पंडितों का हक: कश्मीरी पंडितों के अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान की वापसी की जाएगी।

हमारी नौकरी, हमारा हक: रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे और नौकरी की स्थितियों में सुधार किया जाएगा।

– स्टेटहुड का हक: जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की दिशा में काम किया जाएगा।

– हमारा अनाज, हमारा हक: खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और अनाज की उपलब्धता में सुधार किया जाएगा।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी अपने घोषणापत्र में 12 प्रमुख गारंटियां दी हैं, जिसमें अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का वादा शामिल है। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने बिजली और पानी के संकट से राहत देने, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को हर साल 12 मुफ्त LPG सिलेंडर देने का भी वादा किया है।

पीडीपी के वादे

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने 24 अगस्त को श्रीनगर में अपने घोषणापत्र की घोषणा की। पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने निम्नलिखित वादे किए हैं:

– 200 यूनिट मुफ्त बिजली: हर परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान की जाएगी, जिससे बिजली के बिल में कमी आएगी और घरेलू खर्च कम होगा।

– पुरानी पेंशन योजना की वापसी: पेंशन योजना को फिर से लागू किया जाएगा, जिससे पुराने पेंशन लाभार्थियों को लाभ होगा।

– भर्ती प्रक्रिया को तेज करना: सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, जिससे खाली पदों को भरने में मदद मिलेगी।

– संविदा शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि: संविदा शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि की जाएगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

– जेल में बंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता: जेल में बंद लोगों को कानूनी सहायता मुफ्त में प्रदान की जाएगी, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके।

पीडीपी ने शारदा पीठ के लिए मार्ग खोलने की कोशिश करने और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पार व्यापार की बहाली के लिए बातचीत की अपील की है। पार्टी का मानना है कि इस प्रकार के कदम सुलह और समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण होंगे।

चुनाव की प्रक्रिया

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे: 18 सितंबर, 25 सितंबर, और 1 अक्टूबर को। चुनाव परिणाम 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। यह पहली बार होगा जब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 2019 में जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था, और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर का प्रशासन मनोज कुमार सिन्हा के हाथ में है, जो उपराज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं।

एप्पल का ये ऑफर आपको चौंका देगा, जानिये पूरी खबर

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | आप iPhone 16 को अब सिर्फ 5000 रुपये में प्री-बुक कर सकते हैं, ऐपल के रिटेल पार्टनर Imagine ने एक खास ऑफर पेश किया है। iPhone 16 की प्री-बुकिंग 13 सितंबर से शुरू हो चुकी है और इसे ऐपल की आधिकारिक वेबसाइट से भी प्री-बुक किया जा सकता है। Imagine के इस ऑफर के तहत, आपको 5000 रुपये में नया iPhone प्री-बुक करने का मौका मिल रहा है, साथ ही कुछ खास ऑफर भी मिलेंगे।

Imagine स्टोर्स के जरिए आप iPhone 16 और iPhone 16 Pro को प्री-बुक कर सकते हैं, और इसके लिए आपको सिर्फ 5000 रुपये देने होंगे। इस ऑफर के तहत, Imagine 19 सितंबर तक प्री-बुकिंग कैंपेन चला रहा है, जिसमें प्री-बुकिंग करने वाले ग्राहकों को एडिशनल बेनिफिट्स, वाउचर्स और रिवॉर्ड्स भी मिलेंगे।

Apple ने iPhone 16 और iPhone 16 Plus को नए डिजाइन के साथ पेश किया है। इन दोनों फोन में वर्टिकल कैमरा मॉड्यूल है, जिसमें 48MP + 12MP का डुअल रियर कैमरा और 12MP का फ्रंट कैमरा शामिल है। ये स्मार्टफोन A18 प्रोसेसर के साथ आते हैं और इनमें एक्शन और कैप्चर बटन दी गई हैं, जो कैमरा एक्सेस और कई कैमरा फीचर्स का उपयोग आसान बनाती हैं।

iPhone 16 में 6.1 इंच का डिस्प्ले है, जबकि iPhone 16 Plus में 6.7 इंच का डिस्प्ले मिलेगा। दोनों डिवाइस IP68 रेटिंग के साथ आते हैं और इनमें Type-C चार्जिंग पोर्ट दिया गया है।

iPhone 16 की कीमत 79,900 रुपये से शुरू होती है, iPhone 16 Plus की कीमत 89,900 रुपये से शुरू होती है। प्रो वेरिएंट की बात करें तो iPhone 16 Pro की कीमत 1,19,900 रुपये से और iPhone 16 Pro Max की कीमत 1,44,900 रुपये से शुरू होती है।

आखिर ये ‘बीच की ऊँगली’ क्या बला है, जानिये क्या कहता है इतिहास?

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | हम सभी ने कभी न कभी तर्जनी उंगली की ताकत का अनुभव किया है। यह उंगली दिशा दिखाने, कुछ सिखाने या बस ध्यान आकर्षित करने के काम आती है। और छोटी उंगली, उसकी तो बात ही निराली है—कभी ‘चुप रहो’ का इशारा, कभी ‘मेरे पास आओ’।

फिर आती है वह उंगली, जो अक्सर विवादों में रहती हैबीच की उंगली। जब ये किसी को दिखाई जाती है, तो उसे अगला इंसान गाली समझता है; उसे देखते ही लोग ऑफेंड हो जाते हैं, बुरा मान जाते हैं. उंगली, जो अंग्रेजी की एक गाली बन गई है. मिडल फिंगर (middle finger), फ्लिपिंग द बर्ड (flipping the bird), भक यू (बूझे?) वगैरह-वगैरह भी कहा जाता है.

भाषा के साथ देह-भाषा भी विकसित होती है. कुछ मायने बदलते हैं, कुछ घटते-बढ़ते हैं. मगर बीच की उंगली के हक का सवाल है: ‘मैं ही क्यों?’ सिर्फ एक उंगली गाली कैसे बनी गाली? आइये जानते हैं इसका जवाब:

बीच की उंगली का इतिहास:

1415 का संघर्ष: एक कहानी यह कहती है कि 1415 में ब्रिटिश और फ्रेंच सैनिकों के बीच एक युद्ध हुआ। फ्रेंच सैनिकों ने अंग्रेजी आर्चरों की उंगलियां काटने का प्लान बनाया, ताकि वे तीर न चला सकें। लेकिन अंग्रेजों ने जीत हासिल की और फ्रेंच सैनिकों की तमन्ना पर पानी फिर गया तो उन्होंने बीच की उंगलियां दिखाकर फ्रेंच सैनिकों का मजाक उड़ाया। साथ में चिल्लाया – ‘प्लक यू (pluck yew)’. प्लक माने तरकश से तीर निकालना. कहा जाता है समय के साथ इसी प्लक का ‘प’ चुपके से किसी रोज ‘फ’ में बदल गया। यह कहानी थोड़ी मिक्स्ड लगती है, क्योंकि कई रिपोर्ट्स इसे सही नहीं मानतीं। फिर भी, यह कहानी यह दिखाती है कि कैसे एक इशारा भी इतिहास की धारा को बदल सकता है।

प्राचीन ग्रीस की कहानी: एक प्रसिद्ध घटना के अनुसार, डायॉजनीस ने डेमोस्थनीस (Demosthenes) नामक एक प्रसिद्ध ग्रीक राजनेता की आलोचना की थी। डेमोस्थनीस एक प्रभावशाली और लोकप्रिय वक्ता थे, जो अपने भाषणों के लिए प्रसिद्ध थे। डायॉजनीस ने उनके भाषणों की खामियों को उजागर करने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया।

एक दिन, जब डायॉजनीस सार्वजनिक रूप से डेमोस्थनीस की आलोचना कर रहे थे, उन्होंने अपने दर्शकों के सामने बीच की उंगली दिखाकर एक तुच्छ इशारा किया। उनका इशारा इस बात को दर्शाता था कि डेमोस्थनीस का प्रभाव और उनके भाषण कितने निम्नस्तरीय थे। यह इशारा, जो आज भी एक अपमानजनक इशारा माना जाता है, डायॉजनीस ने एक तरह से डेमोस्थनीस की प्रतिष्ठा को चुनौती देने और उनका मजाक उड़ाने के रूप में इस्तेमाल किया।

एक और कहानी:

यूनिवर्सिटी ऑफ एलिनॉइस के प्रोफेसर थॉमस कॉनले ने इस ‘प्राचीन बेइज्जती’ पर रिसर्च की है| वो बताते हैं कि एक प्राचीन रोमन इतिहासकार ने भी इस बारे में लिखा था| बताया था कि जर्मन जनजाति के लोगों ने कभी चढ़ाई कर रहे रोमन सैनिकों को बीच की उंगली दिखाने का तोहफा दिया था|

वहीं, इससे पहले प्राचीन ग्रीक लोग जननांग को दर्शाने के लिए इस उंगली का इस्तेमाल किया करते थे. ऐसा भी बताया जाता है|

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ कांसस के प्रोफेसर ऐंथनी कॉरबेइल इसका नाता प्राचीन रोम से भी जोड़ते हैं| वो भी यही बताते हैं कि करीब 400 BC के आसपास प्राचीन रोम में इस उंगली को दिखाने का मतलब एक तरह से धमकी देना और जननांग की नकल दिखाने जैसा ही था| हालांकि, कहा ये भी जाता है कि एकदम सटीक ये बता पाना मुश्किल है. किस देश या समय में इस ‘उंगली का उदय’ हुआ|

बताए गए उदाहरणों से बीच की उंगली वाले मामले की जड़ों को, प्राचीन ग्रीस और रोम से जोड़कर देखा जा सकता है| जहां इसे जननांग की नकल और विरोध के तौर पर दिखाने की बातें सुनने मिलती हैं|

मिडल फिंगर की मनोवैज्ञानिक ध्वनि:

बीच की उंगली का अपमानजनक उपयोग एक सांस्कृतिक विरासत की तरह विकसित हुआ है। यह उंगली न केवल अपमान का प्रतीक है, बल्कि यह मानव की भावनाओं और सामाजिक रिवाजों का भी अंश है। जब हम इसे दिखाते हैं, तो यह अक्सर गुस्से, असहमति या तिरस्कार का इशारा होती है—यह पूरी तरह से व्यक्तिगत और सांस्कृतिक संदर्भ पर निर्भर करता है।

बीच की उंगली ने एक लंबे और विविध इतिहास को अपने साथ संजोया है। यह उंगली केवल एक इशारा नहीं है, बल्कि यह सदियों की सांस्कृतिक और सामाजिक जटिलताओं की गवाही देती है। जब भी आप इसे दिखाएं, सोचिए कि आप एक अद्वितीय और पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि एक मासूम सी उंगली इतने गहरे अर्थ और भावनाओं की वाहक हो सकती है? यह दर्शाता है कि भाषा और सांस्कृतिक प्रतीक किस तरह से बदलते हैं और हमारे सामाजिक व्यवहार को आकार देते हैं।

अरविन्द केजरीवाल देंगे इस्तीफा, नए मुख्यमंत्री पर सस्पेंस!

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | जेल से रिहाई के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने समर्थकों के बीच जोश भरे अंदाज में संबोधन किया। उन्होंने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए बड़ा ऐलान किया कि दो दिन बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। उनका कहना था कि उन पर और मनीष सिसोदिया पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है। केजरीवाल ने जनता से सीधा सवाल किया कि क्या वे उन्हें ईमानदार मानते हैं या नहीं।

अपने संबोधन में केजरीवाल ने कहा कि वे राजनीति में सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि ईमानदारी से देश की सेवा करने के लिए आए थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अब एक अग्निपरीक्षा के लिए तैयार हैं और जनता के निर्णय का सम्मान करेंगे। केजरीवाल का कहना था कि यदि जनता उन्हें ईमानदार मानती है, तो उन्हें फिर से वोट दे। उनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना या न रहना अब जनता के हाथ में है।

उन्होंने यह भी ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी से ही कोई अन्य नेता मुख्यमंत्री बनेगा, लेकिन वे और मनीष सिसोदिया जनता की अदालत में जाएंगे। उनका कहना था कि अगर जनता उन्हें ईमानदार मानेगी, तो वे फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे। इसका सीधा मतलब था कि अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद मनीष सिसोदिया भी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।

केजरीवाल ने अपने संबोधन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी की साजिशें आम आदमी पार्टी के हौंसले को तोड़ नहीं पाईं। उनका कहना था कि जेल में भेजे जाने का असली मकसद भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पार्टी और सरकार को तोड़ने की कोशिश थी। लेकिन उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे और उनकी पार्टी इससे कमजोर नहीं हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने देश की राजनीति को एक नई दिशा दी है। उनकी पार्टी ने ईमानदारी और पारदर्शिता के मुद्दे पर देश की राजनीति में बदलाव लाने का काम किया है। उनका कहना था कि विरोधियों ने उनकी पार्टी को तोड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन न तो वे और न ही पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता इस दबाव के आगे झुके।

अंत में केजरीवाल ने कहा कि उनकी लड़ाई देश के लिए है, और वे इसे जारी रखेंगे। उन्हें सिर्फ अपने समर्थकों और जनता का साथ चाहिए। उन्होंने कहा कि एक क्रांतिकारी मुख्यमंत्री को जेल में डाला गया, लेकिन उनकी हिम्मत नहीं टूटी।

गाजियाबाद में यूरिन मिलाकर लोगों को पिलाए जूस: पब्लिक ने दुकानदारों को जमकर पीटा; तलाशी में बोतल में भरा मिला यूरिन

इशिका गुप्ता| navpravah.com

नई दिल्ली | गाजियाबाद से एक बेहद चौंकाने वाली खबर आई है। वहां के एक जूस विक्रेता पर आरोप है कि उसने जूस में पेशाब मिलाकर बेचा। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और उसके स्टॉल से पेशाब भरा एक कंटेनर भी बरामद किया है। जूस विक्रेता और उसके 15 वर्षीय बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पुलिस ने शुक्रवार को गाजियाबाद में जूस विक्रेता आमिर के स्टॉल की तलाशी ली और वहां से पेशाब भरा एक प्लास्टिक कंटेनर बरामद किया।

एसीपी भास्कर वर्मा के अनुसार, आमिर से पूछताछ की गई लेकिन उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इस मामले में उसके 15 वर्षीय बेटे को भी हिरासत में लिया गया है। ग्राहकों की लगातार शिकायतों के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है और मामले की आगे की जांच की जा रही है।