नई दिल्ली। आतिशी के दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके जीवन और करियर की एक नई चर्चा शुरू हुई है, जिसमें उनके नाम ‘मार्लेना’ का भी उल्लेख महत्वपूर्ण है। आइए इस नाम के पीछे की कहानी, उनके राजनीतिक सफर और उनकी पहचान पर विस्तार से नजर डालें।
क्या है ‘मार्लेना’ का नाम के पीछे की कहानी?
ज़ी मीडिया के अनुसार, आतिशी का मिडिल नेम ‘मार्लेना’ खास महत्व रखता है। यह नाम मार्क्स और लेनिन के नामों का मिलाजुला स्वरूप है। कार्ल मार्क्स, एक प्रमुख जर्मन दार्शनिक और समाजवादी विचारक, ने पूंजीवादी समाज की शोषणकारी प्रकृति की आलोचना की और मजदूर वर्ग की स्थिति सुधारने के लिए कई सिद्धांत प्रस्तुत किए। वहीं, व्लादिमीर लेनिन ने रूसी क्रांति की अगुवाई की और साम्यवादी समाज की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हालांकि ‘मार्लेना’ नाम ने एक महत्वपूर्ण विचारधारा को दर्शाया, आतिशी ने 2018 के चुनाव से ठीक पहले इसे दैनिक उपयोग से हटा दिया। इसका कारण यह था कि वह चाहती थीं कि उनकी पहचान उनके नाम और वंश से न जुड़ी हो, बल्कि उनके कार्य और उनके योगदान पर आधारित हो। उनका मानना था कि राजनीति में जाति, धर्म और वंश के बजाय, व्यक्ति की योग्यता और उनके काम को प्रमुखता मिलनी चाहिए।
आतिशी का क्या है राजनीतिक सफर?
आतिशी का राजनीतिक करियर बेहद ही सफल रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक सलाहकार के रूप में की और जल्द ही महत्वपूर्ण भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ी। 2014 में, वह आम आदमी पार्टी (आप) की प्रवक्ता बनीं, और इस भूमिका में उन्होंने पार्टी की नीतियों और दृष्टिकोण को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया।
2015 में, मनीष सिसौदिया के सलाहकार के रूप में उनकी नियुक्ति किया गया। उन्होंने सिसोदिया के साथ दिल्ली में शिक्षा में बहुत काम किया।
मुख्यमंत्री बनने की कहानी
केजरीवाल के इस्तीफे के ऐलान के बाद आतिशी मुख्यमंत्री के रेस में सबसे आगे चल रही थी। आतिशी को अरविन्द केजरीवाल ने अपनी पत्नी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के ऊपर तरजीह दी है। अब देखना ये है कि ये है की आतिशी का दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में क्या परिवर्तन लाती है। उनका 10 साल का सफर, जिसमें उन्होंने सलाहकार से लेकर कैबिनेट मंत्री और अब मुख्यमंत्री तक का पद संभाला है |
नई दिल्ली।पृथ्वी को एक अस्थायी मिनी-मून मिलने वाला है, और यह घटना वास्तव में बहुत रोमांचक है! इस मिनी-मून का असली नाम 2024 PT5 है, और यह एक छोटा सा एस्टेरॉयड है जिसे 7 अगस्त 2024 को नासा के एस्टेरॉयड टेरेस्ट्रियल इम्पैक्ट लास्ट अलर्ट सिस्टम (ATLAS) द्वारा खोजा गया था। इस एस्टेरॉयड का व्यास केवल 10 मीटर (33 फीट) है, जो कि काफी छोटा है, लेकिन इसका पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने का यह समय हमारे लिए बहुत दिलचस्प है।
2024 PT5 29 सितंबर से 25 नवंबर 2024 तक पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में रहेगा और हमारे ग्रह के चारों ओर एक खास कक्षा (orbit) बनाएगा। इस अवधि के दौरान, यह एस्टेरॉयड पूरी तरह से पृथ्वी का एक चक्कर नहीं लगा सकेगा। इसके बजाय, यह एक ‘घोड़े की नाल’ के आकार में पृथ्वी के चारों ओर घूमेगा, फिर धीरे-धीरे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर चला जाएगा। इस घटना को देखने से वैज्ञानिकों को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल की बेहतर समझ प्राप्त होगी, जो हमारे ग्रह के गुरुत्वाकर्षण और इसके प्रभावों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा।
इस तरह के अस्थायी मिनी-मून की घटनाएं काफी दुर्लभ होती हैं। आमतौर पर, एस्टेरॉयड या तो पृथ्वी की कक्षा में आने से चूक जाते हैं या पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जल जाते हैं। हालांकि, 2006 और 2022 में भी ऐसी घटनाएं हुई थीं, जब एस्टेरॉयड ने पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाया था। लेकिन 2024 PT5 की विशेषता यह है कि यह एस्टेरॉयड इतनी धुंधली होगी कि इसे नग्न आंखों या साधारण टेलीस्कोप से देखना मुश्किल होगा। इसे देखने के लिए एडवांस ऑब्जर्वेटरीज की आवश्यकता होगी, जो विशेष रूप से ऐसी घटनाओं के लिए डिजाइन की गई हैं।
इस अस्थायी मिनी-मून की घटना न केवल खगोलशास्त्र के शौकिनों के लिए एक उत्सव का मौका है, बल्कि यह वैज्ञानिकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। 2024 PT5 की कक्षा और उसके गुरुत्वाकर्षण बल के अध्ययन से हमें भविष्य में अन्य एस्टेरॉयड्स और मिनी-मून्स के साथ ऐसी घटनाओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
इस अस्थायी मिनी-मून के आगमन के साथ, हम पृथ्वी के वातावरण और गुरुत्वाकर्षण के बारे में नई जानकारी प्राप्त करने की उम्मीद कर सकते हैं, जो हमारे ग्रह के अस्तित्व और उसके आसपास के खगोलीय घटनाओं को समझने में मददगार साबित होगी।
नई दिल्ली | आज केजरीवाल अपने पद से इस्तीफा देंगें और साज ही दिल्ली को नया मुख्यमंत्री भी मिल गया है, अब दिल्ली की नयी मुख्यमंत्री अतिशी होगीं, आतिशी को आम आदमी पार्टी विधायक दल की बैठक में चुना गया है, केजरीवाल ने खुद आतिशी के नाम का प्रस्ताव रखा और मनीष सिसोदिया ने प्रस्ताव का अनुमोदन किया.श, आज शाम केजरीवाल सीएम पद से इस्तीफा देंगे, उसके बाद आतिशी के नेतृत्व में नई सरकार का दावा पेश किया जाएगा।
केजरीवाल के साथ आप विधायकों का प्रतिनिधिमंडल राजभवन जाएगा, पार्टी हाईकमान चाहता है कि विधानसभा सत्र से पहले नई सरकार का गठन हो जाए, अब आतिशी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी और शुरुआत में सरकार में दो विधायक शामिल होंगे और मंत्री पद की शपथ लेंगे, इस सत्र को आतिशी ही संबोधित करेंगी।
आप नेता आतिशी का कहना है कि, दिल्ली में सिर्फ एक ही मुख्यमंत्री हैं, वो अरविंद केजरीवाल हैं, लेकिन कुछ बदलाव के कारण दिल्ली को 11 वर्षों के बाद नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है, दिल्ली विधानसभा चुनाव में बस कुछ ही महीने बचे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि, बीजेपी ने 2 साल तक अरविंद केजरीवाल को परेशान किया ,केजरीवाल की गिरफ्तारी गलत थी। मैं अगले कुछ महीने तक चुनाव तक सीएम होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम केजरीवाल की वापसी के लिए प्रयास करें, मैं विधायक साथियों से आग्रह करूंगी कि ,आप में से कोई बधाई नहीं दीजिए।, मेरे लिए यह बहुत दुख की घड़ी है कि, सबके चहेते सीएम को इस्तीफा देना पड़ रहा है, आतिशी ने कहा कि, केजरीवाल जी ने मुझपर भरोसा किया है, ये जिम्मेदारी देने के लिए मैं केजरीवाल धन्यवाद करती हूं।
नई दिल्ली | आज, 17 सितंबर 2024 को, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके जीवन की यात्रा अद्वितीय रही है, जो उन्हें एक साधारण परिवार के व्यक्ति से देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक तक लेकर गई है। मोदी का जीवन न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि कई महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा हुआ है जिसने उनके नेतृत्व और राजनीतिक दृष्टिकोण को आकार दिया। आइए उनके जीवन की 10 बड़ी घटनाओं पर नजर डालते हैं।
1. साधारण पृष्ठभूमि से राजनीति की ओर कदम: नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता चाय बेचते थे और मोदी भी अपने बचपन में इस काम में उनका साथ देते थे। ये प्रारंभिक संघर्षशील जीवन उन्हें आम जनता से जोड़े रखने में मददगार साबित हुआ।
2. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव: 1967 में, नरेंद्र मोदी आरएसएस के संपर्क में आए। वहां उन्होंने अनुशासन, संगठन और राष्ट्रसेवा के गुण सीखे। आरएसएस के माध्यम से उनका संपर्क भारतीय जनता पार्टी (BJP) से हुआ, जो आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन का आधार बना।
3. गुजरात के मुख्यमंत्री बनना (2001): 2001 में, नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए, जिनमें प्रमुख रूप से औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे का विस्तार शामिल था। हालांकि, 2002 के गुजरात दंगों के कारण उनका नाम विवादों में भी आया, लेकिन उन्होंने इससे उबरते हुए राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए।
4. 2002 के गुजरात दंगे: गुजरात में 2002 के सांप्रदायिक दंगों ने मोदी की छवि को काफी हद तक प्रभावित किया। इस दौरान उन पर दंगे रोकने में नाकामी का आरोप लगा, लेकिन बाद में उन्होंने कानूनी जांचों का सामना किया और उन्हें निर्दोष घोषित किया गया। ये घटना उनके जीवन का एक प्रमुख मोड़ साबित हुई।
5. ‘वाइब्रेंट गुजरात’ अभियान: मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने गुजरात को औद्योगिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 2003 में ‘वाइब्रेंट गुजरात’ अभियान शुरू किया। इस अभियान ने गुजरात को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया और राज्य में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए।
6. 2014 में प्रधानमंत्री बनना: 2014 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। ‘अच्छे दिन’ के नारे और विकास के वादे के साथ भाजपा ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, और नरेंद्र मोदी भारत के 14वें प्रधानमंत्री बने। यह उनके नेतृत्व और संगठनात्मक कौशल की जीत थी।
7. नोटबंदी (2016): प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने कई महत्वपूर्ण और विवादास्पद फैसले लिए। 8 नवंबर 2016 को, उन्होंने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने का ऐलान किया। नोटबंदी का उद्देश्य काले धन, आतंकवाद और नकली मुद्रा पर प्रहार करना था, हालांकि इस कदम के कई सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम सामने आए।
8. जीएसटी लागू करना (2017): 2017 में, मोदी सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया, जो भारत की कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार माना गया। इससे देशभर में एकीकृत कर प्रणाली लागू हुई और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया।
9. अनुच्छेद 370 हटाना (2019): 2019 में प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी बार चुने जाने के बाद, नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला लिया, जो राज्य को विशेष दर्जा देता था। इस फैसले ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी चर्चा और विवाद उत्पन्न किए, लेकिन इसे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
10. कोविड-19 महामारी का प्रबंधन (2020): 2020 में आई कोविड-19 महामारी के दौरान नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की। महामारी के प्रबंधन के लिए उनकी सरकार ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया, जो दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बन गया। उन्होंने महामारी के समय में आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों के जरिए देश को संकट से उबारने की कोशिश की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन संघर्ष, धैर्य और संकल्प की कहानी है। उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत की राजनीति और समाज को गहराई से प्रभावित किया है। इन दस घटनाओं के माध्यम से, यह स्पष्ट है कि मोदी का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उनकी पहचान स्थापित हुई है।
वाराणसी, उत्तर प्रदेश| काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में स्थित आईआईटी बीएचयू के महाराष्ट्र मित्र मंडल द्वारा सार्वजनिक गणेशोत्सव का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन बीएचयू परिसर में उपस्थित धनराजगिरी हॉस्टल में हुआ। हॉस्टल के कॉमन हाल में गणेश प्रतिमा स्थापित करी गई थी व वहां भव्य सजावट की गई थी।
महाराष्ट्र मित्र मंडल के सदस्यों ने मिलकर हॉल को कुछ क्राफ्ट्स कार्यों द्वारा भी सजाया था। पंडाल के एक दीवार पर छत्रपति शिवाजी व उनके साम्राज्यों के नामों के साथ कुछ तस्वीरें भी लगी हुई थी।
मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी व्यवस्था हॉस्टल के ग्राउंड फील्ड में की गई थी, जिसमें आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसरों के छोटे-छोटे बच्चों (मेघना,अंजना,क्रिस्टी) ने भी नृत्य में सहभाग लिया।
बाकी कुछ आईआईटी छात्र छात्राओं ने अपनी गायन और नृत्य कला से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य में संस्कृति, धृति, भार्गवी, तनिष्का व समीक्षा ने अपनी प्रस्तुति दी। गायन में अंकित-हर्षित ,अलक्षेंद्र, आयुष-आयुष, रोहन पाटिल आदि ने प्रस्तुति दी। कविता पाठ में अभिनंदन ने पिता पर कविता सुनाई जो सभी को पसंद आई।
दूसरी कविता पाठ में खनन विभाग की अंतिम साल की छात्रा अपेक्षा ने छत्रपति शिवाजी के जीवन पर आधारित एक लंबी कविता का पाठ किया जिसमें छत्रपति शिवाजी के जन्म, उनके वीरता, संघर्ष, उनके हिंदू धर्म की स्थापना, साम्राज्य विस्तार, युद्ध , उनके बेटे शंभाजी की वीरता व शिवाजी की मौत तक की सारी वृतांत को एक कविता के माध्यम से पूरे भावपूर्वक रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने इस पूरी कविता को सुनाने में लगभग 4 से 5 मिनट का समय लगा। दर्शक भी इस कविता को सुन भावुक दिख रहे थे और बीच बीच में तालियां भी बजा रहे थे।
अंत में एक क्लासिकल गायन को मोहित व अनुभव द्वारा प्रस्तुत किया गया। और इसी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम की शुरुवात शाम 7 बजे हुई जो 9 बजे खत्म हुई। कार्यक्रम के खत्म होने के पश्चात गणेश आरती हुई व भगवान और देवी देवताओं के जयघोष के साथ यह गणेशोत्सव संपन्न हुआ। मंडल ने बताया की गणेश विसर्जन कार्यक्रम दिनांक 17/9/2024 को किया जाएगा।
नई दिल्ली | बिहार के सारण जिले में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान तिरंगे झंडे के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला तब सामने आया जब एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दिखाया गया कि एक पिकअप वाहन पर लहराए जा रहे तिरंगे पर अशोक चक्र की जगह चांद-तारा वाला प्रतीक लगाया गया था। इस वीडियो ने न केवल सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ी, बल्कि स्थानीय लोगों में भी गुस्सा और आक्रोश पैदा कर दिया।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया
वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद सारण के पुलिस अधीक्षक डॉ. कुमार आशीष ने मामले का संज्ञान लिया और भारतीय ध्वज अधिनियम 2002 और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस की सक्रियता को देखते हुए संबंधित थाने ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस पिकअप वाहन को जब्त कर लिया, जिस पर यह विवादित झंडा लहराया जा रहा था। इसके साथ ही पुलिस ने इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार व्यक्तियों ने दावा किया कि उन्हें यह झंडा किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराया गया था।
पुलिस अधीक्षक डॉ. कुमार आशीष ने बताया कि पुलिस अब उस तीसरे व्यक्ति की तलाश में जुटी है, जिसने इस झंडे को दिया था। इसके साथ ही, इस घटना के पीछे छिपी मंशा और उद्देश्य को जानने के लिए गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जो भी इस षड्यंत्र में शामिल है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तिरंगे के अपमान पर जनता का आक्रोश
तिरंगे झंडे के साथ इस तरह की छेड़छाड़ ने स्थानीय ग्रामीणों और अन्य लोगों के बीच व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों ने इस घटना को देश की अस्मिता के साथ सीधा खिलवाड़ बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने का घेराव करते हुए प्रदर्शन किया और प्रशासन से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि तिरंगा हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक है और इसके साथ कोई भी अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
इस घटना को लेकर लोगों ने धरना दिया और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। उन्होंने प्रशासन से यह भी सुनिश्चित करने की मांग की कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों और यदि किसी धार्मिक या सामाजिक आयोजन के दौरान तिरंगे का उपयोग होता है, तो उसे आदर के साथ लहराया जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन भी सतर्क हो गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि भारतीय ध्वज अधिनियम 2002 के प्रावधानों और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153 (समाज में वैमनस्यता फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, जुलूस के लाइसेंस की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या जुलूस की अनुमति कानूनी रूप से प्राप्त की गई थी और अगर हां, तो लाइसेंसधारी ने इस झंडे के इस्तेमाल पर कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई।
इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आखिरकार इस जुलूस में तिरंगे का उपयोग किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसके पीछे कोई सांप्रदायिक या राजनीतिक मंशा थी। पुलिस का कहना है कि इस तरह की हर पहलू की जांच की जा रही है और अगर कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी अपना विरोध जताया है। कई संगठनों ने इस घटना को राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के रूप में देखा है और इसके खिलाफ प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि तिरंगे का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इसके दोषियों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।
सार्वजनिक मंचों पर भी इस घटना की निंदा की जा रही है और लोगों ने यह मांग की है कि इस तरह के मामलों में पुलिस और प्रशासन को और भी सख्त होना चाहिए, ताकि देश की गरिमा और अस्मिता सुरक्षित रह सके। कई नेताओं और समाजसेवियों ने घटना पर बयान जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और इसके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ अस्वीकार्य है।
नई दिल्ली।दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ गये हैं, लेकिन जेल के बाहर आने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है, इस मामले को लेकर AAP नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आज को प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, एक सीएम इस्तीफा देता है और कहता है कि, दिल्ली की जनता मेरी ईमानदारी पर वोट करें, ऐसा आज तक नहीं हुआ है, वो भी तब जबकि केंद्र सरकार ने सारी एजेंसी लगा रखी थी। दिल्ली के लोगो के अंदर ऐसी उत्सुकता है कि लोग चाहते हैं कि कल ही चुनाव हो और फिर अरविंद जी को सीएम बनाया जाये।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, कई लोग कहते हैं कि सतयुग में सुना था कि राम मर्यादा के नाम पर 14 साल के लिए वनवास पर चले गए। आज केजरीवाल जी ने वही किया है, वो भगवान नहीं है। लेकिन सतयुग के बाद ये पहली बार हुआ है।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाते हुए कहा है कि, केंद्र सरकार समेत तमाम एजेंसियां, चाहे वह ईडी हो, सीबीआई हो, इनकम टैक्स हो सभी मुख्यमंत्री के पीछे पड़ी हैं, लेकिन ये सब के बावजूद मुख्यमंत्री को अभी भी अपने लोगों और अपनी ईमानदारी पर भरोसा है।
सौरभ भारद्वाज ने आगे बताया कि, आज AAP के PAC की बैठक होगी, पार्टी का जो भी नेता चुना जाएगा वह उपराज्यपाल के जरिए राष्ट्रपति के पास दावा पेश करेगा, उन्होंने कहा कि, विधायक हमारे साथ हैं, तो जाहिर है उस व्यक्ति को बुलाया जाएगा और शपथ ली जाएगी।
नई दिल्ली |कोलकाता में डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष ने आत्महत्या के एक नए सिद्धांत को सामने रखा है, जिसे अधिकारियों ने स्वीकार किया है। सीबीआई ने बताया है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के जवाब पॉलीग्राफ टेस्ट और वॉयस विश्लेषण के दौरान गड़बड़ पाए गए हैं।
अगस्त में, जब अस्पताल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की जांच चल रही थी, सीबीआई ने दावा किया कि संदीप घोष को सुबह 9:58 बजे घटना की जानकारी मिली थी, लेकिन उन्होंने तुरंत पुलिस को नहीं बताया। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने बाद में एक अस्पष्ट शिकायत दर्ज कराई।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि संदीप घोष ने तुरंत एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश नहीं की। इसके बजाय, उन्होंने आत्महत्या के एक नए सिद्धांत को पेश किया, जो पीड़िता के शरीर के निचले हिस्से पर मौजूद बाहरी चोटों के हिसाब से संभव नहीं लगता।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि घोष ने सुबह 10:03 बजे ताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अभिजीत मंडल से संपर्क किया, लेकिन अप्राकृतिक मौत का मामला सुबह 11:30 बजे दर्ज किया गया।
कोलकाता बलात्कार और हत्या के मामले में सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को फिर से गिरफ्तार किया है। एजेंसी का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने में देरी और अपराध स्थल की सुरक्षा में विफलता के कारण महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नुकसान पहुंचा।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि घोष ने आरोपी संजय रॉय और अन्य लोगों को बचाने की कोशिश की, जिन्होंने अपराध स्थल पर अनधिकृत रूप से प्रवेश किया था। पीड़िता का बलात्कार और हत्या अस्पताल के सेमिनार हॉल में की गई थी, जहां वह आराम करने गई थी। उसका शव एक डॉक्टर ने हॉल में पाया था।
नई दिल्ली।जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। आज 24 सीटों पर प्रचार थम जाएगा और 18 सितंबर को पहले चरण की वोटिंग शुरू होगी। यह चुनाव जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें प्रमुख दलों के बीच मुकाबला और भी तेज हो गया है। बीजेपी, कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन और पीडीपी प्रमुख दलों के तौर पर चुनावी रण में उतरे हैं, जबकि क्षेत्रीय दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि प्रमुख दलों ने अपने घोषणापत्र में क्या वादे किए हैं और उनके चुनावी रणनीति की विशेषताएं क्या हैं।
बीजेपी के वादे-
बीजेपी ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए अपना संकल्प पत्र जारी किया है। इसमें कुल 25 वादे शामिल किए गए हैं, जो महिलाओं, युवाओं, कश्मीरी पंडितों, किसानों और आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने पर केंद्रित हैं। प्रमुख वादे इस प्रकार हैं:
– माँ सम्मान योजना: बीजेपी ने घोषणा की है कि जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक घर की सबसे बुजुर्ग महिला को हर साल 18,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य बुजुर्ग महिलाओं को सम्मानित करना और उनके आर्थिक बोझ को कम करना है।
– पंडित प्रेम नाथ डोगरा रोजगार योजना: इस योजना के तहत जम्मू और कश्मीर के युवाओं के लिए 500,000 नौकरियों का सृजन किया जाएगा। यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और बेरोजगारी की समस्या को कम करने के लिए है।
– प्रगति शिक्षा योजना: कॉलेज के छात्रों के लिए सालाना 3,000 रुपये का यात्रा भत्ता प्रदान किया जाएगा, ताकि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके और वे आसानी से अपने कॉलेज जा सकें।
– किसानों के लिए बिजली बिल में छूट: किसानों को बिजली बिल में 50% तक की छूट देने का प्रस्ताव है, जिससे सिंचाई पंप और कृषि मशीनरी का संचालन अधिक किफायती हो जाएगा।
इसके अतिरिक्त, बीजेपी का कहना है कि अनुच्छेद 370 अब अतीत की बात हो गई है और भविष्य में इसे फिर से लागू नहीं किया जाएगा। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर का दर्जा बहाल करने का भी वादा किया है, और इसके लिए कोई भ्रम नहीं रखने की बात की है।
कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन के वादे
कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। कांग्रेस 32 सीटों पर और नेशनल कॉन्फ्रेंस 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। दोनों पार्टियों ने मिलकर सात महत्वपूर्ण गारंटियां दी हैं:
– महिला सम्मान: महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
– अच्छी सेहत: स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और अधिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
– OBC का हक: पिछड़ी जातियों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।
– कश्मीरी पंडितों का हक: कश्मीरी पंडितों के अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान की वापसी की जाएगी।
– हमारी नौकरी, हमारा हक: रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे और नौकरी की स्थितियों में सुधार किया जाएगा।
– स्टेटहुड का हक: जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
– हमारा अनाज, हमारा हक: खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और अनाज की उपलब्धता में सुधार किया जाएगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी अपने घोषणापत्र में 12 प्रमुख गारंटियां दी हैं, जिसमें अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का वादा शामिल है। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने बिजली और पानी के संकट से राहत देने, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को हर साल 12 मुफ्त LPG सिलेंडर देने का भी वादा किया है।
पीडीपी के वादे
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने 24 अगस्त को श्रीनगर में अपने घोषणापत्र की घोषणा की। पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने निम्नलिखित वादे किए हैं:
– 200 यूनिट मुफ्त बिजली: हर परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान की जाएगी, जिससे बिजली के बिल में कमी आएगी और घरेलू खर्च कम होगा।
– पुरानी पेंशन योजना की वापसी: पेंशन योजना को फिर से लागू किया जाएगा, जिससे पुराने पेंशन लाभार्थियों को लाभ होगा।
– भर्ती प्रक्रिया को तेज करना: सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, जिससे खाली पदों को भरने में मदद मिलेगी।
– संविदा शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि: संविदा शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि की जाएगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
– जेल में बंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता: जेल में बंद लोगों को कानूनी सहायता मुफ्त में प्रदान की जाएगी, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके।
पीडीपी ने शारदा पीठ के लिए मार्ग खोलने की कोशिश करने और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पार व्यापार की बहाली के लिए बातचीत की अपील की है। पार्टी का मानना है कि इस प्रकार के कदम सुलह और समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण होंगे।
चुनाव की प्रक्रिया
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे: 18 सितंबर, 25 सितंबर, और 1 अक्टूबर को। चुनाव परिणाम 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। यह पहली बार होगा जब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 2019 में जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था, और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर का प्रशासन मनोज कुमार सिन्हा के हाथ में है, जो उपराज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं।
नई दिल्ली |आप iPhone 16 को अब सिर्फ 5000 रुपये में प्री-बुक कर सकते हैं, ऐपल के रिटेल पार्टनर Imagine ने एक खास ऑफर पेश किया है। iPhone 16 की प्री-बुकिंग 13 सितंबर से शुरू हो चुकी है और इसे ऐपल की आधिकारिक वेबसाइट से भी प्री-बुक किया जा सकता है। Imagine के इस ऑफर के तहत, आपको 5000 रुपये में नया iPhone प्री-बुक करने का मौका मिल रहा है, साथ ही कुछ खास ऑफर भी मिलेंगे।
Imagine स्टोर्स के जरिए आप iPhone 16 और iPhone 16 Pro को प्री-बुक कर सकते हैं, और इसके लिए आपको सिर्फ 5000 रुपये देने होंगे। इस ऑफर के तहत, Imagine 19 सितंबर तक प्री-बुकिंग कैंपेन चला रहा है, जिसमें प्री-बुकिंग करने वाले ग्राहकों को एडिशनल बेनिफिट्स, वाउचर्स और रिवॉर्ड्स भी मिलेंगे।
Apple ने iPhone 16 और iPhone 16 Plus को नए डिजाइन के साथ पेश किया है। इन दोनों फोन में वर्टिकल कैमरा मॉड्यूल है, जिसमें 48MP + 12MP का डुअल रियर कैमरा और 12MP का फ्रंट कैमरा शामिल है। ये स्मार्टफोन A18 प्रोसेसर के साथ आते हैं और इनमें एक्शन और कैप्चर बटन दी गई हैं, जो कैमरा एक्सेस और कई कैमरा फीचर्स का उपयोग आसान बनाती हैं।
iPhone 16 में 6.1 इंच का डिस्प्ले है, जबकि iPhone 16 Plus में 6.7 इंच का डिस्प्ले मिलेगा। दोनों डिवाइस IP68 रेटिंग के साथ आते हैं और इनमें Type-C चार्जिंग पोर्ट दिया गया है।
iPhone 16 की कीमत 79,900 रुपये से शुरू होती है, iPhone 16 Plus की कीमत 89,900 रुपये से शुरू होती है। प्रो वेरिएंट की बात करें तो iPhone 16 Pro की कीमत 1,19,900 रुपये से और iPhone 16 Pro Max की कीमत 1,44,900 रुपये से शुरू होती है।