देश में असहिष्णुता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र सरकार की व्यवस्था के समर्थन में फ़िल्म इंडस्ट्री के कुछ प्रमुख कलाकार और फिल्मकार 40-50 लोगों की टीम लेकर जल्दी ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाक़ात करेंगे। अनुपम खेर ने यह बात एक निजी चैनल से साझा की।
फ़िल्म इंडस्ट्री में ही असहिष्णुता को लेकर दो गुट तैयार होता नज़र आ रहा है। एक गुट सरकार के समर्थन में अवार्ड वापसी का विरोध कर रहा है और दूसरा यह कह रहा है कि देश में भय का माहौल बन रहा है जोकि असहिष्णुता का द्योतक है। अवार्ड वापसी को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। इस मामले में अभिनेता अनुपम खेर खुलकर सरकार के पक्ष में आ गए हैं।
हम यह सन्देश देना चाहते हैं कि देश में ऐसा माहौल बिल्कुल नहीं है जैसा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। देश में पहले कई मर्तबा प्रतिकूल माहौल रहा है तब क्यों ऐसे विरोध नहीं किया गया। इस तरह के कृत्य से देश का माहौल बिगड़ता है।
-अनुपम खेर
इस मसले पर अभिनेता अनुपम खेर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। अभिनेता ने कहा कि वह अपने साथ 40-50 लोगों की एक टीम लेकर राष्ट्रपति भवन जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम यह सन्देश देना चाहते हैं कि देश में ऐसा माहौल बिल्कुल नहीं है जैसा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश में पहले कई मर्तबा प्रतिकूल माहौल रहा है तब क्यों ऐसे विरोध नहीं किया गया। इस तरह के कृत्य से देश का माहौल बिगड़ता है।
फ़िल्म अभिनेता कमल हसन के बाद अब बंगाली फिल्मों की नामचीन अभिनेत्री मुनमुन सेन ने भी केंद्र सरकार का बचाव किया है। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि देश में असहिष्णुता आज की बात नहीं है, यह हमेशा से ही रही है। बस, आजकल इसका प्रचार-प्रसार ज़ोरदार तरीके से हो रहा है।
देश में इस समय असहिष्णुता पर लेखकों से लेकर फ़िल्म इंडस्ट्री तक के तमाम लोग अपनी राय रख रहे हैं। अभिव्यक्ति की आज़ादी मामले पर कोई सरकार से सहमत है तो कोई इस परिस्थिति को असहिष्णु बता रहा है। इसी सन्दर्भ में अभिनेत्री मुनमुन सेन ने खुलकर केंद्र सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हमें पहले पांच साल देखना चाहिए। अगर इन पांच सालों में विकास का मार्ग स्पष्ट नहीं नज़र आएगा तो खुलकर विरोध भी करेंगे। लेकिन अभी फिलहाल सरकार को काम करने देना चाहिए।
अब तक फ़िल्म इंडस्ट्री से तमाम लेखक-कलाकार अपनी अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। कुछ समय पहले मशहूर गीतकार गुलज़ार ने कहा था कि देश में भय का माहौल पैदा हो चुका है, ऐसा पहले कभी नहीं था। लेकिन इसके उलट कई कलाकारों ने अवार्ड वापसी और असहिष्णु वाले मुद्दे को फ़िज़ूल बताया और कहा कि लेखकों को अवार्ड वापसी की जगह अपने लेखों से विरोध प्रकट करना चाहिए।
यही सवाल जब अभिनेत्री विद्या बालन से किया गया था तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें सम्मान राष्ट्र ने दिया है किसी सरकार ने नहीं। इसलिए वे अपना अवार्ड बिल्कुल नहीं लौटाएंगी।
जमाखोरों के ठिकानों पर छापेमारी के बाद पिछले कुछ दिनों में दाल की कीमतों में लगभग २० रूपए की गिरावट आई है। केंद्र सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि जमाखोरों की वजह से दाल के दाम तेज़ी से बढ़ गए थे, जिसे नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की जा रही है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि खरीफ की फसल के बाद कीमतों में और भी कमी आएगी।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने त्योहारों से पहले आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों की एक बैठक बुलाई थी। जिसमें उन्होंने कीमतों के बढ़ने की वजह और इससे निपटने के तरीकों पर चर्चा की। खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके इसके लिए बफर स्टॉक बढ़ाने का आदेश दिया। उन्होंने दलहनों की खरीद पर भी ज़ोर दिया, जिससे बढ़ती कीमतों की समस्याओं को समाप्त किया जा सके।
सरकार द्वारा जारी एक बयान में स्पष्ट किया गया है कि देशभर में दालों की कीमतों में लगभग 20 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है। संभावना जताई जा रही है कि उड़द दाल की जारी बाजार में आवक तथा दिसंबर के आरंभ में अरहर दाल की नई फसल के आने के बाद कीमतों में और गिरावट आएगी। विभिन्न राज्यों से जब्त किये गए 1.3 लाख टन दाल के बाजार में आने के बाद आपूर्ति की स्थिति में और सुधार होने की संभावना है।
देश में असहिष्णुता को लेकर बयानबाज़ी रुकने का नाम नहीं ले रही है। बयानबाज़ी की लिस्ट में फिल्म इंडस्ट्री से एक और नाम जुड़ गया है। दक्षिण भारतीय फिल्म के सुपरस्टार कमल हसन ने कहा है कि अवार्ड लौटाने की बातें फ़िज़ूल की हैं और वह अपना अवार्ड नहीं लौटाएंगे। उन्होंने अवार्ड लौटाने वालों को नसीहत भी दे दी कि सम्मान लौटाने वालों को विरोध का कोई और तरीका अपनाना चाहिए।
एक निजी चैनल से बात करते हुए कमल हसन ने स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि देश में असहिष्णुता हमेशा से ही रही है, यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता का विरोध अवार्ड लौटा कर नहीं बल्कि बौद्धिक तरीके से किया जाना चाहिए। लेखकों को यह समझना होगा कि उनका एक लेख सम्मान वापस करने से ज़्यादा काम करेगा।
कमल हसन ने कहा कि असहिष्णुता वह है जिसकी वजह से 1947 में देश का बंटवारा हुआ था। ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि मैं उनका बिल्कुल समर्थन नहीं करता जो अपना अवार्ड लौटा रहे हैं।
“आत्मवत् सर्वभूतेषु” भारतीय संस्कृति का मूल स्वर है। वेद इसके प्रतिष्ठाता हैं। अपने स्वार्थवश हिंसा को वेदों से जोड़ना भारतीय अस्मिता पर गहरी चोट है। ये मानवजाति की अनमोल धरोहर हैं। नितांत वैज्ञानिक और तथ्यपूर्ण। इनके गूढ़ार्थ में वैश्विक समस्याओं का हल है। आवश्यकता है इन पर उच्च स्तरीय शोधकार्य करवाया जाय ताकि वैदिक युग की कल्पना को यथार्थ रूप मिले।
Dr.JitendraPandey @Navpravah.com
वेद सभी सत्य विद्याओं की पुस्तक हैं। वेद का अर्थ ही “ज्ञान” है और ज्ञान सत्य से जुड़ा होता है। अतः इनका सार्वदेशिक व सर्वकालिक होना स्वाभाविक है। वेदों के सन्दर्भ में तमाम भ्रांतियां समाज में फैली हैं। विशेषकर उस समय, जब सामाजिक सौहार्द खतरे में हो। वेदों का साक्ष्य प्रासंगिक माना जाता है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर जीव-हिंसा को जायज़ ठहराया गया। यह निर्विवाद है कि मध्यकाल में वेदों की तमाम ऋचाओं पर गलत टीकाएं लिखी गईं। उदाहरण स्वरूप सायण, महीधर आदि आचार्यों के भाष्य पढ़े जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि वेदों में गौ-बलि, नर-बलि, अश्व-बलि, गज-बलि आदि का उल्लेख किया गया है। परिणामतः यज्ञादि अनुष्ठानों में बलियां दी जाने लगीं।
निरीह प्राणियों के कत्लेआम से क्षुब्ध होकर महात्मा बुद्ध और महावीर स्वामी ने वेदों का बहिष्कार करना प्रारम्भ किया। आचार्यों की इन्हीं मिथ्या धारणाओं को मैक्समूलर, विल्सन, ग्रिफिथ आदि पाश्चात्य विद्वानों ने पूरी दुनिया में फैला दिया। इतिहास-लेखकों ने भी इस सन्दर्भ में काफी लीपा-पोती की। वेदों के शब्दों पर गलत प्रकाश डाला गया। अर्थ को अनर्थ में बदलने का षड्यंत्र अक्षम्य था।
वेदों में अश्वमेध ,नरमेध, अजमेध, गोमेध की चर्चा की गई है। भाष्यकारों ने इन शब्दों को अश्वबलि, नरबलि, बकरीबलि और गौबलि से जोड़कर बताया जबकि “मेध” का अर्थ “बुद्धि” से है। अब आसानी से “बुद्धि” के आलोक में उपरोक्त शब्दों को अनर्थ में परिवर्तित होने से बचाया जा सकता है। शतपथ ब्राह्मण (13.1.6.3) में इन शब्दों की सम्यक व्याख्या की गई है। यजुर्वेद (30/3) में देवताओं और पूर्वजों को “मेधावी” कहा गया है। उसी मेधा शक्ति की प्राप्ति की उपासना करते हुए कहा गया है –
“यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते।
तया मामद्य मेधयाग्ने मेधाविनं कुरु।”
इसी तरह “माष” शब्द को “मांस” शब्द से जोड़कर देखा गया जबकि इसका अर्थ “एक प्रकार की दाल” है। आयुर्वेद में तो इसका अर्थ “गूदा” बताया गया है। जैसे – आम्रमांसं, खजूरमांसं आदि। तैतरीय संहिता (2,23,8) में दही, शहद और धान को मांस कहा गया है। वेदों में किसी भी प्रकार की हिंसा को स्थान नहीं है।
ईश्वर की प्रार्थना में आयु, प्राण, सुयोग्य नागरिक और कीर्ति के साथ-साथ गाय, घोड़ा, ऊंट जैसे पशुओं को प्रदान करने को कहा गया है-
रही बात गाय की तो इसे यजुर्वेद (3/20) में पूज्या माना गया है। इनके गुणों के आधार पर अदिति, विश्रुति, रन्ता, हव्या, काम्या, इडा, चंद्रा, ज्योति, अधन्या आदि नामों का उल्लेख मिलता है।
ऋग्वेद (8/101/16) में स्पष्ट आदेश है – “उस देवी गौ को अल्प बुद्धिवश मानव नहीँ काटे-मारे” तथा “गौए वधशाला में न जाएं।” यजुर्वेद में बेजुबान जानवरों की हत्या को भयंकर बताया गया है। इसके बावजूद यह शंका व्यक्त की जाती है कि वेदों में “गोघ्न” अर्थात् गायों को मारने का आदेश है। हमें समझना होगा कि ” गोघ्न” के दो अर्थ होते हैं-“हिंसा” और “गति”। मन्त्र के संदर्भ में अर्थ लिया जाएगा -“जो गौ की हत्या करने वाला है, नीच पुरुष है। वह तुमसे दूर रहे।”
बाली (इंडोनेशिया) में कैद अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को डर है कि मुम्बई में कोई उसकी जान न ले ले। छोटा राजन को भारत वापस लाने के लिए पुलिस और सीबीआई बाली पहुँच गई है और कुछ अधिकारियों ने राजन से मुलाक़ात भी की है।
एक निजी समाचार चैनल को छोटा राजन ने बताया कि मुझे मुम्बई में जान का खतरा है क्योंकि मुम्बई पुलिस के कुछ लोग अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद से मिले हुए हैं जो मुझे ख़त्म करना चाहते हैं। गौरतलब है कि छोटा राजन को जल्दी ही भारत लाया जा सकता है। छोटा राजन ने दिल्ली सरकार पर विश्वास जताते हुए कहा कि दिल्ली सरकार मेरे साथ न्याय करे। मुम्बई पुलिस ने मेरे साथ बहुत अत्याचार किया है और इसके कुछ अधिकारी दाऊद से मिले हुए हैं, जो मौका पाते ही मुझे मार डालने की कोशिश करेंगे।
छोटा राजन ने कहा कि उसके ऊपर तमाम झूठे मुकदमे दर्ज़ किए गए हैं। भारत सरकार पर भरोसा जताते हुए उसने कहा कि मुझे सरकार जहां रखना चाहे मैं रहूँगा।
इस बीच छोटा राजन को भारत लाए जाने की सारी प्रक्रिया भारतीय दूतावास ने पूरीे कर दी हैं। अब इंडोनेशिया की तरफ से जितना समय लगेगा, उसी पर निर्भर है कि छोटा राजन कब तक भारत लाया जा सकेगा।
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नेपाल में भारतीय सीमा के करीब बीरगंज में प्रदर्शन करते समय पुलिस की गोली से एक भारतीय की मौत हो गई। नेपाल के गृह सचिव सूर्या सिलवाल ने पुलिस के साथ झड़प में हुई इस मौत की पुष्टि की। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ मृतक (आशीष कुमार राम) बिहार के रक्सौल ज़िले का निवासी है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात कर इस कृत्य की कड़ी आलोचना की और उनसे घटना का विस्तृत व्योरा माँगा है।
भारत-नेपाल सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। भारतीय सीमा के निकट सोमवार को प्रदर्शनकारियों द्वारा भारी पथराव किया गया , जिसको नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई राउंड फायर किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। बीरगंज-रक्सौल सीमा पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित कर पाना जब कठिन हो गया तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ा। पुलिस के डर से प्रदर्शनकारी पास के ही पुल पर भाग गए, जो भारत और नेपाल को जोड़ता है। मृतक को पास के ही एक अस्पताल में ले जाया गया तो चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया, बाद में यह पता चला कि मृतक भारतीय है।
गौरतलब है कि नेपाल में जारी नए संविधान के बाद से ही भारतीय सीमा के निकट नेपाल-भारत के सभी प्रवेश बिंदुओं पर पिछले डेढ़ महीने से तनाव का माहौल बना हुआ है। नेपाल में मधेश आधारित राजनीतिक पार्टी नए संविधान व संघवाद की अवधारणा को लेकर नाराज है। बीरगंज एक ऐसी जगह है, जहां से नेपाल को ईंधन व खाने-पीने के सामान भेजे जाते हैं। प्रदर्शनकारियों की वजह से नेपाल को आयात में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल के दक्षिण हिस्से में आंदोलन भड़कने के बाद से लेकर अब तक लगभग 50 लोग मारे जा चुके हैं।
आर्य विद्या मंदिर बांद्रा पश्चिम के वार्षिकोत्सव उत्कर्ष 2015 के अन्तर्गत “डॉ वर्गिस कुरियन: एक स्वप्न द्रष्टा” विषय पर एक दिवसीय महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न हुआ। अमूल इंडिया लिमिटेड के प्रणेता डॉ. कुरियन के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर आधारित नृत्य नाटिका के साथ साथ बोल री कठपुतली रानी, लघु नाटिका,मॉस्क मेकिंग, झरोखा पेंटिंग, पतंग मेकिंग तथा टेस्ट आफ इंडिया मास्टर शेफ इत्यादि इवेंट में मुंबई के तेरह प्रतिष्ठित आई.सी.एस.ई. विद्यालयों ने इसमें हिस्सा लिया।
माननीय मुख्य अतिथि जी. सी. एम. एम. एस. के मैनेंजिंग डाइरेक्टर डॉ. आर एस. सोंधी जी अपने समूह के सदस्यों के साथ निर्धारित समय से कार्यक्रम में उपस्थित हुए। डॉ. सोंधी ने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की और छात्रों को सम्वोधित करते हुए कहा, “डॉ कुरियन के जीवन मूल्य शिक्षा के प्रमुख अंग हैं। उन्होंने सफलता के लिए कभी छोटा रास्ता (short cut) नहीं चुना। सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए साहस और निर्भयता को हथियार बनाना चाहिए।”
सह मुख्य अतिथि तथा की सुपुत्री सुश्री निर्मला कुरियन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चेन्नई से आईं। कार्यक्रम को देखकर भावविभोर होकर उन्होंने विद्यालय समूह की निदेशिका तथा प्राचार्या श्रीमती कुमार को कोटिश धन्यवाद दिया और इसी तरह शैक्षणिक कार्यक्रमों को सम्पन्न करने की प्रेरणा दी।
इसके अतिरिक्त उपस्थित अतिथियों ने कार्यक्रम में प्रतिभागी छात्रों, शिक्षक गण तथा अभिभावकों के सामूहिक प्रयास की प्रशंसा की। इस प्रकार कार्यक्रम सकुशल सम्पन्न हुआ।
समसामायिक हिंदी कविता गहरे सामाजिक सरोकारों की कविता है। वह मानवीय संबंधों के प्रति अतिशय संवेदनशील है। उसमें टुकड़ो में ही सही, लेकिन वर्तमान सभ्यता और समाज का समग्र चित्र विद्यमान है। समय और परिस्थिति का दबाव भले ही कवि को अपने में सिमटने पर विवश करे, पंरतु वह पर-दुख-ताप से पिघलकर अपने व्यक्तित्व में दरिया का विस्तार महसूस करता है।
अरुण कमल के व्यक्तित्व निर्माण के मुख्य प्रेरणास्त्रोत उनके पिता श्री कपिलदेव मुनि रहे। कविता लेखन में अरुण कमल की विशेष रुचि थी। कविता की भावुकता उनके निजी जीवन में भी देखने को मिलती है। संगीत में भी उनकी विशेष अभिरुचि है।
अरुण कमल के ‘नये इलाके में’ काव्य-संग्रह को वर्ष 1998 का ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ दिए जाने पर विद्वानों के मध्य अनेक विवाद उपजे और बहुत से आक्षेप लगाए गए। किन्तु इन कविताओं में गहरे डूबने पर जो जीवन की अर्थ-छवियाँ पाठक को मिलती हैं, उनमें वे सारे आक्षेप अपने आप खारिज हो जाते हैं।
काव्य में वस्तु अथवा रूप में से किसी एक को अधिक महत्व देना सही नहीं है । इनमें से कोई भी बड़ा या छोटा नहीं है । दोनों का संबंध अन्योन्याश्रित है। ये दोनों ही परस्पर एक-दूसरे के पूरक हैं और साहित्य में दोनों की ही भूमिका महत्त्वपूर्ण एवं निर्णायक है।
अरुण कमल उन कवियों में से हैं जो जीवन की जटिलताओं एवं अन्तर्विरोधों से जूझते हैं। उन्हें अपनी कविताओं में मुखर करके पाठकों को सोचने पर विवश करते हैं । अपने समय के दबावों से प्रभावित होने के कारण अरुण कमल की कविताओं में समकालीन राजनीति के चित्रण के साथ-साथ समसामयिक परिवेश जीवन्त हो उठा है। अनेक कविताओं में कवि ने एक दहशत भरे माहौल का चित्रण किया है। देष में बढ़ती हुई अराजकता और गुंडागर्दी का चित्रण उनकी कविताओं में मिलता है।
अरुण कमल की कविता में जीवन के विविध क्षेत्रों का चित्रण मिलता है। इस विविधता के कारण उनकी भाषा में भी विविधता के दर्शन होते हैं। अरुण कमल ने अपनी कविताओं में अभिव्यक्त होनेवाले भाव को ठेठ समकालीन भाषा के अत्यंत सहज लहजे में प्रस्तुत किया। उनकी भाषा में लोकजीवन से शब्दों, मुहावरों, ग्रामीण बोली-भाषा व स्थानीय शब्दों का प्रयोग हुआ है।
समकालीन कविता ने ‘शिल्प’ को व्यापक अर्थ में प्रयुक्त किया है। इसका तात्पर्य सौंदर्य के उन तमाम उपादानों, साधनों, तत्वों आदि से है, जिनके द्वारा वह अपने भाव और विचार पाठकों तक प्रेषित करती है। हिंदी साहित्य में प्रयोगवादी कवियों ने काव्य-शिल्प के प्रति जागरुकता व्यक्त करते हुए शिल्प के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग किए। अरुण कमल का मुहावरा अपने समकालीनों में काफी अलग और सहज रूप से ध्यानाकर्षी रहा है। वे प्रगतिशील चिंतन के कवि माने जाते हैं, जिसका पर्याप्त साक्ष्य उनकी कविताएँ देती हैं।
अरुण कमल ने भाषा को जीवन के बहुत निकट लाने का प्रयास किया है। उनकी भाषा जिंदगी और अनुभव की भाषा है। उसे अनुभव से अलग करके नहीं समझा जा सकता। अरुण कमल की कविताओं में कुछ ताजे और अछूते बिंब देखने को मिलते हैं। ये बिंब प्रकृति या लोक-जीवन से अनायास उनकी कविताओं में आते हैं। वे अपने सामान्य और साधारण बिंबो को हमारे चिर-परिचित परिवेश से उठाते हैं और अपनी कला से गजब का सामर्थ्य और अदभुत वैशिष्ट्य भर देते हैं।
अरुण कमल की कविताओं में उम्मीद को जिलाए रखने की कोशिश मिलती है। कवि को यह पूरी उम्मीद है कि एक दिन राजपाट के पुराने भ्रष्ट तरीके समाप्त हो जाएंगे और उनके स्थान पर एक स्वस्थ व्यवस्था कायम होगी, जहाँ न मूर्खों का राज होगा, न ही पकवान का भेाज छकता महन्त। साथ ही देश में भय और आतंक फैलाने वाले गिरोह भी समाप्त हो जाएँगे। तब शासन की बागडोर दयालु, भोले-भाले और पवित्र आत्मा वाले लोग सँभालेंगे। वे देश में सुख-शांति फैलाएँगें, जनता को अन्धकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले चलेंगे।
महाराष्ट्र के युवा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का कहना है कि सन 2019 तक मेट्रो रेल मुंबई के हर वार्ड से होकर गुजरेगी। मेट्रो रेल के तानेेबाने के साथ ही अगले साल नवंबर तक पूरी मुंबई सीसीटीवी कैमरे की जद में होगी जबकि इस नवंबर में दक्षिण मुंबई का इलाका सीसीटीवी की जद में आ जाएगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बीते 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और शिवसेना के बिना महाराष्ट्र में पहली बार बीजेपी सत्तासीन हुई थी। आगामी 31 अक्टूबर को फडणवीस का एक साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने सरकारी आवास वर्षा में कुछ चुनिंदा पत्रकारों के साथ अपने एक साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को साझा किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान तैयार किए गए विजन डाक्यूमेंट के तहत काम शुरु किया गया हैं। आगामी पांच साल में बदलाव नजर आएगा। सरकार की योजना है कि सन 2019 तक मुंबई के हर वार्ड में मेट्रो रेल दौड़ेगी। इस नवंबर में दक्षिण मुंबई सीसीटीवी के कैमरे लग जाएंगे और अगले साल नवंबर तक पूरी मुंबई कैमरे की जद में होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत के सपनों को साकार करने के लिए महाराष्ट्र के शहरों को खुले शौच से मुक्त किए जाने की योजना शुरु है। फडणवीस ने कहा कि सन 2017 तक महाराष्ट्र देश का पहला राज्य होगा जो खुले में शौच पूरी तरह बंद हो जाएगा।
सूखे से निपटने के लिए कारगर योजना है जलयुक्त शिवार-
फडणवीस का कहना है कि महाराष्ट्र में सूखे से परेशान किसानों की आत्महत्या रोकने में जलयुक्त शिवार योजना कारगर साबित होगी। तीन साल में सूबे का कृषि संकट काफी हद तक समाप्त कर देंगे। राज्य में इजराईली पैटर्न यानि कम जगह में ज्यादा उत्पाद की खेती भी शुरु की जाएगी। राज्य में 1059 मौसम स्टेशन बनाएंगे जिससे किसानों को यह जानकारी मिलेगी कि उनके लिए कब और कौन सी फसल फायदेमंद रहेगी।
उपहास के दायरे से बाहर निकल चुके हैं-
एक साल के कार्यकाल बीते एक साल में वे उपहास के दायरे से बाहर निकल चुके हैं। अब दो साल तक विरोध का स्टेज होगा। इस विरोध के दायरे को भी आसानी से पार करेंगे। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुरुआत में लोग कहते हैं कि ये नया है। उपहास उड़ातेे हैं लेकिन, अब मैं उस दायरे से बाहर निकल चुका हूं। विपक्षी नेताओं को लग रहा है कि जम गया है तो विरोध का स्टेज शुरु होगा। अब दो साल विरोध होगा। लेकिन, जब ठीक से काम करेंगे तब लोगों में विश्वास बढ़ेगा और जनमान्यता मिलेगी।
सकारात्मक राजनीति में भरोसा-
भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे फडणवीस यह जानते हैं कि शिवसेना ने विरोध का जो तरीका अपना रखा है उसमें विशेष परिवर्तन की उम्मीद नहीं है फिरभी उनका दावा है कि सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगी। फडणवीस ने कहा कि मेरा मूल स्वभाव कोई राजनीतिक नहीं है कि इसको जवाब दूं या उसको खत्म करूं। मैं काम करता रहता हूं। सकारात्मक राजनीति में विश्वास रखता हूं और उसी की बदौलत यहां तक पहुंचा हूं।
शिवसेना के विरोध के बावजूद पांच साल पूरा करेगी सरकार-
हाल के दिनों में शिवसेना के उग्र हिंदुत्ववाद की भूमिका अपनाने के मुद्दे पर देवेन्द्र फडणवीस शिवसेना का नाम लिए बिना कहते हैं कि राजनीतिक फायदे के लिए अड़चन पैदा किया जाता हैं लेकिन जनता सब जानती है। मुंबई में मराठी-गुजराती, मराठी-उत्तरभारतीय विवाद इसी की देन होती है। बीजेपी का शिवसेना के साथ 25 साल का साथ रहा है। अब गठबंधन किया है तो सरकार चलानी पड़ेगी।