गुरूवार को राष्ट्रपति भवन में विज़िटर्स कांफ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे देश के राष्ट्रपति ज्ञान के सागर हैं और हम भाग्यशाली हैं जो हमें उनके साथ काम करने का मौक़ा मिला है।
रक्षा स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास को लेकर उन्होंने देश के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और आईआईटी के प्रमुखों से कहा कि यह आपका सौभाग्य है कि उन्हें सीधे राष्ट्रपति मुखर्जी के निर्देश में काम करने का मौक़ा मिला है। आप सभी राष्ट्रपति के विराट कार्यानुभवों का लाभ अवश्य मिलेगा। और देश के शिक्षा संस्थानों का सीधा लाभ देश को मिलता है।
कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री बनने का सबसे बड़ा फायदा यही नज़र आता है कि मैं राष्ट्रपति मुखर्जी से मुलाकात कर पाता हूँ। वह हर मसले को बड़ी ही गंभीरता से समझाते हैं।
असहिष्णुता वाले मामले में शाहरुख खान के विरोध में ऊट-पटांग बयान देने वाले भाजपा नेता अपनी ही पार्टी के बयानों पर लीपा पोती करते दिख रहे हैं। योगी आदित्यनाथ और कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेताओं के विवादित बयान से खुद को अलग करते हुए टेलिकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अभिनेता शाहरुख ख़ान के बारे में कहा कि वे सच्चे भारतीय हैं और असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे।
शाहरुख खान के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने बयान तो दे दिया लेकिन अब उन्ही की पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता मामले को संतुलित करने में लगे हैं। गौरतलब है कि कैलाश विजयवर्गीय के विवादित बयान के बाद सरकार के पक्ष में खड़े अनुपम खेर ने भी हिदायत दी थी कि भाजपा के नेता शाहरुख के बारे में उलटे सीधे बयान देने से बचें। जिसके बाद से पार्टी नेताओं ने मामले को शांत करने की कोशिश में लगे हुए हैं।
असहिष्णुता और देश में बन रहे विरोध के माहौल पर रविशंकर प्रसाद ने बीजेपी को सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहस, चर्चा और विभिन्नता भारत की विरासत का हिस्सा है। हमारी सरकार भारत की समृद्ध विरासत के प्रति प्रतिबद्ध है।
प्रसाद ने उन लोगों पर भी हमला बोला जो जानबूझकर मामले को तूल देने की कोशिश में लगे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी से नफरत करने वाले तमाम बुद्धिजीवी ऐसे मौकों पर शांत रहे, जब तसलीमा नसरीन बंगाल से निकाला गया, उस समय वहाँ सीपीएम की सरकार थी और सलमान रुश्दी की किताब पर पाबंदी लगाईं गई उस समय क्यों सन्नाटा पसरा था साहित्यिक जगत में।
Amit Dwivedi @Navpravah.com
सम्मान वापसी मुद्दे पर अब सलमान ख़ान के पिता सलीम ख़ान ने प्रधानमंत्री मोदी का बचाव किया है. उहोने अपने एक साक्षात्कार में कहा कि प्रधानमंत्री कम्युनल नहीं है. यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि क्या देश के मुसलमान पाकिस्तान,ईराक,ईरान या अफगानिस्तान जैसे देश में जाकर रह सकते हैं.
देश में लगातार बिगड़ते माहौल के दौरान नामचीन पटकथा लेखक सलीम ख़ान ने कहा कि मैं भारत को सबसे बेहतरीन देश मानता हूँ. यह कहना गलत न होगा कि मुसलमानों के रहने के लिए यह सबसे सुरक्षित जगह है. उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के लिए इससे अच्छा देश कोई हो ही नहीं सकता.
संस्कृति और सभयता की बात पर सलीम ने कहा कि अगर मुस्लिमों को देश में रहना है तो देश और इसकी संस्कृति की इज्जत करनी होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मोदी सबका साथ सबका विकास पर अडिग नज़र आते हैं मुझे, उनके नेतृत्वा में मुझे कोई कमी नहीं नज़र आती.
लगातार लौटाए जा रहे अवार्ड के मसले पर सलीम खान ने स्पष्ट किया कि सरकार को इस पर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर देश का प्रबुद्ध वर्ग ऐसा कुछ कर रहा है तो अवश्य कुछ बात होगी. इस मसले पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.
देश में असहिष्णुता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र सरकार की व्यवस्था के समर्थन में फ़िल्म इंडस्ट्री के कुछ प्रमुख कलाकार और फिल्मकार 40-50 लोगों की टीम लेकर जल्दी ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाक़ात करेंगे। अनुपम खेर ने यह बात एक निजी चैनल से साझा की।
फ़िल्म इंडस्ट्री में ही असहिष्णुता को लेकर दो गुट तैयार होता नज़र आ रहा है। एक गुट सरकार के समर्थन में अवार्ड वापसी का विरोध कर रहा है और दूसरा यह कह रहा है कि देश में भय का माहौल बन रहा है जोकि असहिष्णुता का द्योतक है। अवार्ड वापसी को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। इस मामले में अभिनेता अनुपम खेर खुलकर सरकार के पक्ष में आ गए हैं।
हम यह सन्देश देना चाहते हैं कि देश में ऐसा माहौल बिल्कुल नहीं है जैसा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। देश में पहले कई मर्तबा प्रतिकूल माहौल रहा है तब क्यों ऐसे विरोध नहीं किया गया। इस तरह के कृत्य से देश का माहौल बिगड़ता है।
-अनुपम खेर
इस मसले पर अभिनेता अनुपम खेर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। अभिनेता ने कहा कि वह अपने साथ 40-50 लोगों की एक टीम लेकर राष्ट्रपति भवन जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम यह सन्देश देना चाहते हैं कि देश में ऐसा माहौल बिल्कुल नहीं है जैसा प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश में पहले कई मर्तबा प्रतिकूल माहौल रहा है तब क्यों ऐसे विरोध नहीं किया गया। इस तरह के कृत्य से देश का माहौल बिगड़ता है।
फ़िल्म अभिनेता कमल हसन के बाद अब बंगाली फिल्मों की नामचीन अभिनेत्री मुनमुन सेन ने भी केंद्र सरकार का बचाव किया है। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि देश में असहिष्णुता आज की बात नहीं है, यह हमेशा से ही रही है। बस, आजकल इसका प्रचार-प्रसार ज़ोरदार तरीके से हो रहा है।
देश में इस समय असहिष्णुता पर लेखकों से लेकर फ़िल्म इंडस्ट्री तक के तमाम लोग अपनी राय रख रहे हैं। अभिव्यक्ति की आज़ादी मामले पर कोई सरकार से सहमत है तो कोई इस परिस्थिति को असहिष्णु बता रहा है। इसी सन्दर्भ में अभिनेत्री मुनमुन सेन ने खुलकर केंद्र सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हमें पहले पांच साल देखना चाहिए। अगर इन पांच सालों में विकास का मार्ग स्पष्ट नहीं नज़र आएगा तो खुलकर विरोध भी करेंगे। लेकिन अभी फिलहाल सरकार को काम करने देना चाहिए।
अब तक फ़िल्म इंडस्ट्री से तमाम लेखक-कलाकार अपनी अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। कुछ समय पहले मशहूर गीतकार गुलज़ार ने कहा था कि देश में भय का माहौल पैदा हो चुका है, ऐसा पहले कभी नहीं था। लेकिन इसके उलट कई कलाकारों ने अवार्ड वापसी और असहिष्णु वाले मुद्दे को फ़िज़ूल बताया और कहा कि लेखकों को अवार्ड वापसी की जगह अपने लेखों से विरोध प्रकट करना चाहिए।
यही सवाल जब अभिनेत्री विद्या बालन से किया गया था तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें सम्मान राष्ट्र ने दिया है किसी सरकार ने नहीं। इसलिए वे अपना अवार्ड बिल्कुल नहीं लौटाएंगी।
जमाखोरों के ठिकानों पर छापेमारी के बाद पिछले कुछ दिनों में दाल की कीमतों में लगभग २० रूपए की गिरावट आई है। केंद्र सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि जमाखोरों की वजह से दाल के दाम तेज़ी से बढ़ गए थे, जिसे नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की जा रही है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि खरीफ की फसल के बाद कीमतों में और भी कमी आएगी।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने त्योहारों से पहले आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों की एक बैठक बुलाई थी। जिसमें उन्होंने कीमतों के बढ़ने की वजह और इससे निपटने के तरीकों पर चर्चा की। खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके इसके लिए बफर स्टॉक बढ़ाने का आदेश दिया। उन्होंने दलहनों की खरीद पर भी ज़ोर दिया, जिससे बढ़ती कीमतों की समस्याओं को समाप्त किया जा सके।
सरकार द्वारा जारी एक बयान में स्पष्ट किया गया है कि देशभर में दालों की कीमतों में लगभग 20 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है। संभावना जताई जा रही है कि उड़द दाल की जारी बाजार में आवक तथा दिसंबर के आरंभ में अरहर दाल की नई फसल के आने के बाद कीमतों में और गिरावट आएगी। विभिन्न राज्यों से जब्त किये गए 1.3 लाख टन दाल के बाजार में आने के बाद आपूर्ति की स्थिति में और सुधार होने की संभावना है।
देश में असहिष्णुता को लेकर बयानबाज़ी रुकने का नाम नहीं ले रही है। बयानबाज़ी की लिस्ट में फिल्म इंडस्ट्री से एक और नाम जुड़ गया है। दक्षिण भारतीय फिल्म के सुपरस्टार कमल हसन ने कहा है कि अवार्ड लौटाने की बातें फ़िज़ूल की हैं और वह अपना अवार्ड नहीं लौटाएंगे। उन्होंने अवार्ड लौटाने वालों को नसीहत भी दे दी कि सम्मान लौटाने वालों को विरोध का कोई और तरीका अपनाना चाहिए।
एक निजी चैनल से बात करते हुए कमल हसन ने स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि देश में असहिष्णुता हमेशा से ही रही है, यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता का विरोध अवार्ड लौटा कर नहीं बल्कि बौद्धिक तरीके से किया जाना चाहिए। लेखकों को यह समझना होगा कि उनका एक लेख सम्मान वापस करने से ज़्यादा काम करेगा।
कमल हसन ने कहा कि असहिष्णुता वह है जिसकी वजह से 1947 में देश का बंटवारा हुआ था। ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि मैं उनका बिल्कुल समर्थन नहीं करता जो अपना अवार्ड लौटा रहे हैं।
“आत्मवत् सर्वभूतेषु” भारतीय संस्कृति का मूल स्वर है। वेद इसके प्रतिष्ठाता हैं। अपने स्वार्थवश हिंसा को वेदों से जोड़ना भारतीय अस्मिता पर गहरी चोट है। ये मानवजाति की अनमोल धरोहर हैं। नितांत वैज्ञानिक और तथ्यपूर्ण। इनके गूढ़ार्थ में वैश्विक समस्याओं का हल है। आवश्यकता है इन पर उच्च स्तरीय शोधकार्य करवाया जाय ताकि वैदिक युग की कल्पना को यथार्थ रूप मिले।
Dr.JitendraPandey @Navpravah.com
वेद सभी सत्य विद्याओं की पुस्तक हैं। वेद का अर्थ ही “ज्ञान” है और ज्ञान सत्य से जुड़ा होता है। अतः इनका सार्वदेशिक व सर्वकालिक होना स्वाभाविक है। वेदों के सन्दर्भ में तमाम भ्रांतियां समाज में फैली हैं। विशेषकर उस समय, जब सामाजिक सौहार्द खतरे में हो। वेदों का साक्ष्य प्रासंगिक माना जाता है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर जीव-हिंसा को जायज़ ठहराया गया। यह निर्विवाद है कि मध्यकाल में वेदों की तमाम ऋचाओं पर गलत टीकाएं लिखी गईं। उदाहरण स्वरूप सायण, महीधर आदि आचार्यों के भाष्य पढ़े जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि वेदों में गौ-बलि, नर-बलि, अश्व-बलि, गज-बलि आदि का उल्लेख किया गया है। परिणामतः यज्ञादि अनुष्ठानों में बलियां दी जाने लगीं।
निरीह प्राणियों के कत्लेआम से क्षुब्ध होकर महात्मा बुद्ध और महावीर स्वामी ने वेदों का बहिष्कार करना प्रारम्भ किया। आचार्यों की इन्हीं मिथ्या धारणाओं को मैक्समूलर, विल्सन, ग्रिफिथ आदि पाश्चात्य विद्वानों ने पूरी दुनिया में फैला दिया। इतिहास-लेखकों ने भी इस सन्दर्भ में काफी लीपा-पोती की। वेदों के शब्दों पर गलत प्रकाश डाला गया। अर्थ को अनर्थ में बदलने का षड्यंत्र अक्षम्य था।
वेदों में अश्वमेध ,नरमेध, अजमेध, गोमेध की चर्चा की गई है। भाष्यकारों ने इन शब्दों को अश्वबलि, नरबलि, बकरीबलि और गौबलि से जोड़कर बताया जबकि “मेध” का अर्थ “बुद्धि” से है। अब आसानी से “बुद्धि” के आलोक में उपरोक्त शब्दों को अनर्थ में परिवर्तित होने से बचाया जा सकता है। शतपथ ब्राह्मण (13.1.6.3) में इन शब्दों की सम्यक व्याख्या की गई है। यजुर्वेद (30/3) में देवताओं और पूर्वजों को “मेधावी” कहा गया है। उसी मेधा शक्ति की प्राप्ति की उपासना करते हुए कहा गया है –
“यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते।
तया मामद्य मेधयाग्ने मेधाविनं कुरु।”
इसी तरह “माष” शब्द को “मांस” शब्द से जोड़कर देखा गया जबकि इसका अर्थ “एक प्रकार की दाल” है। आयुर्वेद में तो इसका अर्थ “गूदा” बताया गया है। जैसे – आम्रमांसं, खजूरमांसं आदि। तैतरीय संहिता (2,23,8) में दही, शहद और धान को मांस कहा गया है। वेदों में किसी भी प्रकार की हिंसा को स्थान नहीं है।
ईश्वर की प्रार्थना में आयु, प्राण, सुयोग्य नागरिक और कीर्ति के साथ-साथ गाय, घोड़ा, ऊंट जैसे पशुओं को प्रदान करने को कहा गया है-
रही बात गाय की तो इसे यजुर्वेद (3/20) में पूज्या माना गया है। इनके गुणों के आधार पर अदिति, विश्रुति, रन्ता, हव्या, काम्या, इडा, चंद्रा, ज्योति, अधन्या आदि नामों का उल्लेख मिलता है।
ऋग्वेद (8/101/16) में स्पष्ट आदेश है – “उस देवी गौ को अल्प बुद्धिवश मानव नहीँ काटे-मारे” तथा “गौए वधशाला में न जाएं।” यजुर्वेद में बेजुबान जानवरों की हत्या को भयंकर बताया गया है। इसके बावजूद यह शंका व्यक्त की जाती है कि वेदों में “गोघ्न” अर्थात् गायों को मारने का आदेश है। हमें समझना होगा कि ” गोघ्न” के दो अर्थ होते हैं-“हिंसा” और “गति”। मन्त्र के संदर्भ में अर्थ लिया जाएगा -“जो गौ की हत्या करने वाला है, नीच पुरुष है। वह तुमसे दूर रहे।”
बाली (इंडोनेशिया) में कैद अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को डर है कि मुम्बई में कोई उसकी जान न ले ले। छोटा राजन को भारत वापस लाने के लिए पुलिस और सीबीआई बाली पहुँच गई है और कुछ अधिकारियों ने राजन से मुलाक़ात भी की है।
एक निजी समाचार चैनल को छोटा राजन ने बताया कि मुझे मुम्बई में जान का खतरा है क्योंकि मुम्बई पुलिस के कुछ लोग अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद से मिले हुए हैं जो मुझे ख़त्म करना चाहते हैं। गौरतलब है कि छोटा राजन को जल्दी ही भारत लाया जा सकता है। छोटा राजन ने दिल्ली सरकार पर विश्वास जताते हुए कहा कि दिल्ली सरकार मेरे साथ न्याय करे। मुम्बई पुलिस ने मेरे साथ बहुत अत्याचार किया है और इसके कुछ अधिकारी दाऊद से मिले हुए हैं, जो मौका पाते ही मुझे मार डालने की कोशिश करेंगे।
छोटा राजन ने कहा कि उसके ऊपर तमाम झूठे मुकदमे दर्ज़ किए गए हैं। भारत सरकार पर भरोसा जताते हुए उसने कहा कि मुझे सरकार जहां रखना चाहे मैं रहूँगा।
इस बीच छोटा राजन को भारत लाए जाने की सारी प्रक्रिया भारतीय दूतावास ने पूरीे कर दी हैं। अब इंडोनेशिया की तरफ से जितना समय लगेगा, उसी पर निर्भर है कि छोटा राजन कब तक भारत लाया जा सकेगा।
Bureau @Navpravah.com
नेपाल में भारतीय सीमा के करीब बीरगंज में प्रदर्शन करते समय पुलिस की गोली से एक भारतीय की मौत हो गई। नेपाल के गृह सचिव सूर्या सिलवाल ने पुलिस के साथ झड़प में हुई इस मौत की पुष्टि की। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ मृतक (आशीष कुमार राम) बिहार के रक्सौल ज़िले का निवासी है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात कर इस कृत्य की कड़ी आलोचना की और उनसे घटना का विस्तृत व्योरा माँगा है।
भारत-नेपाल सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। भारतीय सीमा के निकट सोमवार को प्रदर्शनकारियों द्वारा भारी पथराव किया गया , जिसको नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई राउंड फायर किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। बीरगंज-रक्सौल सीमा पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित कर पाना जब कठिन हो गया तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ा। पुलिस के डर से प्रदर्शनकारी पास के ही पुल पर भाग गए, जो भारत और नेपाल को जोड़ता है। मृतक को पास के ही एक अस्पताल में ले जाया गया तो चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया, बाद में यह पता चला कि मृतक भारतीय है।
गौरतलब है कि नेपाल में जारी नए संविधान के बाद से ही भारतीय सीमा के निकट नेपाल-भारत के सभी प्रवेश बिंदुओं पर पिछले डेढ़ महीने से तनाव का माहौल बना हुआ है। नेपाल में मधेश आधारित राजनीतिक पार्टी नए संविधान व संघवाद की अवधारणा को लेकर नाराज है। बीरगंज एक ऐसी जगह है, जहां से नेपाल को ईंधन व खाने-पीने के सामान भेजे जाते हैं। प्रदर्शनकारियों की वजह से नेपाल को आयात में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल के दक्षिण हिस्से में आंदोलन भड़कने के बाद से लेकर अब तक लगभग 50 लोग मारे जा चुके हैं।