फ़िल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज जल्दी ही सैफ अली खान, शाहिद कपूर और कंगना राणावत के साथ अपनी आगामी फ़िल्म ‘रंगून’ की शूटिंग करते नज़र आएँगे। फ़िल्म के निर्माण के सम्बन्ध में विशाल ने साजिद नाडियाडवाला के साथ करार किया है।
द्वितीय विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फ़िल्म संभवतः 15 नवम्बर से फ्लोर पर जाए।
साजिद से करार के बारे में विशाल ने कहा ” मैं इस विषय पर पिछले 8 साल से फ़िल्म बनाना चाहता था। मेरी इच्छा थी कि फ़िल्म के निर्माण में पूरी आज़ादी मिले। क्योंकि यह एकदम अलग तरह की फ़िल्म है और क्रिएटिव लेवल पर इसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं चाहिए। और मुझे लगा कि बतौर निर्माता साजिद नाडियाडवाला ही एकदम फिट हैं। और साजिद से मिलकर बात करने के बाद यह पूरी तरह से क्लियर भी हो गया।
इस सम्बन्ध में निर्माता साजिद ने कहा कि नाडियाडवाला ग्रैंडसन की पूरी टीम और मैं विशाल भारद्वाज के साथ काम करने को लेकर बेहद उत्सुक हूँ। आशा है जल्दी काम शुरू होगा। रंगून का विषय बहुत ही उम्दा है। मुझे ऐसा लग रहा है कि भारत की तमाम क्लासिक फिल्मों में से एक होगी ‘रंगून’।
रंगून की कहानी लिखी है मैथ्यू रॉबिन्स ने, जिसे मुम्बई, अरुणांचल प्रदेश और यूएस में फिल्माया जाएगा।
मुम्बई: उ.प्र. के प्रतापगढ़ जिले के श्रीपुर गाँव में दबंगों द्वारा बी.ए. की छात्रा ज्योति विश्वकर्मा को ज़िंदा जला दिए जाने की घटना से आक्रोषित विश्वकर्मा समाज ने सोमवार, २६ अक्टूबर २०१५ को आज़ाद मैदान में धरना प्रदर्शन कर दोषियों पर कड़ी कारवाई की मांग करते हुए पीड़ित परिवार को उचित मुआवज़ा देने की मांग की है।
सर्व विश्वकर्मा समाज संस्था की ओर से आयोजित इस धरने के संयोजक शिवलाल सुतार ने बताया कि गत 25 सितम्बर को गाँव के कुछ दबंगों ने ज्योति पर मिट्टी का तेल डालकर ज़िंदा जला दिया था, जिसने बाद में इलाहाबाद के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। यदि पुलिस व प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया होता, तो शायद ज्योति की जान बच सकती थी। ऐसी घटनाएँ दुबारा न हो, इसके लिए हम सबको कमर कसनी होगी।
इस घटना के विरोध में महाराष्ट्र के कोने-कोने से विश्वकर्मा वंशीय इकट्ठा हुए। मुंबई में भारी संख्या में औरतों ने भी इस प्रदर्शन में इसमें भाग लिया। विश्वकर्मा समाज की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने धरने में शामिल होकर दोषियों को कठोर सज़ा की मांग करते हुए पीड़ित परिवार को दी जानेवाली सहायता राशि बढ़ाने की मांग की है। सभी लोगों ने सामूहिक रूप से मोमबत्तियां जलाकर ज्योति की दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
धरना प्रदर्शन में भरत विश्वकर्मा, राधेश्याम विश्वकर्मा, नागोराव पांचाल, बिपिन सुतार, बृजेश कुमार विश्वकर्मा, रामसिंगार विश्वकर्मा, राजकुमार विश्वकर्मा, संतलाल विश्वकर्मा, राजेंद्र भालेराव, हरिप्रसाद विश्वकर्मा, शोभनाथ विश्वकर्मा, हेमंत मिस्त्री, कृष्णप्रसाद विश्वकर्मा, श्याम विश्वकर्मा आदि सहित विश्वकर्मा समाज की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे।
इस धरने में विश्वकर्मा समाज ने अपनी इन मांगों को मुख्य रूप से रखा:
दोषी पुलिस-कर्मियों का आजीवन निलंबन।
मुकदमे को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपने की मांग।
विवादीन जमीं का जल्द न्यायिक निपटारा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुआवजे की राशि बधाई जाय।
पीड़ित परिवार को न्यायिक सुरक्षा प्रदान की जाय।
सूत्रों की माने तो विश्वकर्मा वंशियों का इस प्रकार प्रदर्शन पहली बार मुंबई में देखने को मिला है।
रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की आने वाली फिल्म तमाशा का नया गाना ‘अगर तुम साथ हो’ हाल ही में रिलीज़ हुआ। अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के मुताबिक़ यह गाना उनके दिल के बेहद करीब है। और फ़िल्म के सभी गानों में सबसे ज़्यादा छू लेने वाला गाना है।
इस गाने का वीडिओ भी काफी इमोश्नल है। इसको शूट करते वक़्त दीपिका काफी भावुक हो गई थी। जिसकी वजह से इसे शूट करने में भी काफी वक़्त लगा। इस गाने को आवाज़ दी है अरिजीत सिंह और अलका याग्निक ने और संगीतकार हैं ए.आर. रहमान।
दीपिका ने कहा कि कुछ गाने आपको गुनगुनाने को मजबूर कर देते हैं। और ‘अगर तुम साथ हो’ भी इन्ही गानों में से एक है। यह गाना बेहद भावुक कर देने वाला है। उन्होंने कहा कि यह निश्चित ही श्रोताओं को रास आएगा।
इम्तियाज़ अली का निर्देशन और रणबीर-दीपिका की पसंदीदा जोड़ी, का ‘तमाशा ‘ बड़े परदे पर अपना कमाल दिखाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। फिल्म 27 नवंबर को रिलीज़ होने जा रही है।
फिल्में समाज का आईना होती हैं, इस कहावत को चरितार्थ करती है नितिन चंद्रा द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन बिहार’। बिहार समेत समूचे उत्तर भारत की सामाजिक,आर्थिक और व्यावहारिक दशा को बखूबी सिनेमाई शक्ल दी है निर्देशक नितिन ने। भ्रष्टाचार और दबंगई की वजह से उत्तर भारत के युवा किस कदर भ्रमित होकर गलत राह पर जा रहे हैं और उसका क्या नुकसान समाज को हो रहा है यही विषयवस्तु है इस फ़िल्म का।
पूरी फ़िल्म बिहार के बक्सर जिले में रहने वाले राजीव कुमार,शंकर पाण्डेय और जीन्स नामक किरदार के इर्द गिर्द घूमती है। इनमें से कोई प्रशासनिक अव्यवस्था से परेशान है,कोई सामाजिक तो सरकारी तंत्र से। राजीव कुमार आईएएस बनाना चाहता है लेकिन 2 बार साक्षात्कार से रिजेक्ट कर दिया जाता है वहीं शंकर के पास नौकरी पाने के लिए 2 लाख रूपए घूस के नहीं हैं। जिसकी वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिलती है। राजीव पर बहन की शादी की ज़िम्मेदारी होती है। वह शहर से दूर कमाने जाता है, बमुश्किल लाख रूपए कमाकर बक्सर पहुँचता है लेकिन रास्ते में ही छिनैती का शिकार हो जाता है। जिससे राजीव परेशान रहने लगता है। शंकर भी आर्थिक तंगी से परेशान होता है और भाई से विवाद होने की वजह से घर छोड़कर चला जाता है और जीन्स के साथ रहने लगता है।
जीन्स,राजीव और शंकर आर्थिक तंगी से परेशान होने के कारण अपहरण की योजना बनाते हैं। बहुत सोचने के बाद तीनो निश्चित करते हैं कि होटल अम्बेसडर के मालिक का अपहरण किया जाएगा। लेकिन गलती से अपहरण किसी और का हो जाता है। जिसके बाद अचानक से सभी की परेशानियां बढ़ जाती हैं। इसके बाद कहानी रोचक मोड़ ले लेती है। जिसका असली मज़ा लेने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना पड़ेगा।
फ़िल्म का संगीत औसत दर्ज़े का है। गीत और संगीत भोजपुरीमय है। शारदा सिन्हा का गया गीत फ़िल्म को मज़बूत करता है। पटकथा कई जगह बहुत कमज़ोर है और संवाद भी। फिर भी मुद्दा ज्वलंत होने की वजह से कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता।
क्यों देखें– देश और समाज की दशा को करीब से समझने के लिए।
क्यों न देखें– अगर आपको मात्र मसाला फिल्में पसंद हों तो यह फ़िल्म आपको रास नहीं आएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भूकंप के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से बात कर उन्हें हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ भूकंप से अब तक पाकिस्तान में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं। 7.5 रेक्टर तीव्रता वाले भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था।
सोमवार को पाकिस्तान समेत समूचे उत्तर भारत में आए भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान था।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ से बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से भी फोन पर बात की और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
मोदी ने बताया कि जब गनी उनसे इमारत गिरने की वजह से बच्चों के मारे जाने की बात बता रहे थे तो मेरा ध्यान 2001 में गुजरात में आई आपदा की ओर चला गया। बहुत दुःख हुआ।
मुंबई: प्रतापगढ़ के श्रीपुर गॉव में जलाकर मारी गई १९ वर्षीया ज्योति विश्वकर्मा को न्याय दिलाने हेतु देश भर में विश्वकर्मा समाज एकजुट हो गया है। इस सन्दर्भ में पिछले दिनों में देश भर में विश्वकर्मा समाज द्वारा विरोध प्रदर्शन व शोकसभा का आयोजन भी किया गया। मुंबई में भी जगह-जगह विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी शृंखला में कल २६ अक्टूबर, २०१५ को मुंबई के आजाद मैदान में समस्त विश्वकर्मा समाज का धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। प्रशासन ने इस धरने की अनुमति दे दी है।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में लालगंज, अजहारा तहसील के श्रीपुर उमरपुर गांव में 25 सितंबर की शाम कुछ दबंगों ने ज्योति विश्वकर्मा को कुछ जमीनी -विवाद के चलते ज़िंदा जला दिया था। आठ दिनों तक मृत्यु से लड़ते-लड़ते अंततः ज्योति ने दम तोड़ दिया। यदि ज्योति का सही ढंग से इलाज़ हो जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। देश के दूर-दराज के इलाक़ों में होने वाली बर्बर घटना पर भी पुलिस और प्रशासन का क्यो रवैया होता है, यह इस घटना से साबित हो गया।
जब ज्योति के रिश्तेदार घटना की रिपोर्ट लिखवाने जेठवारा पुलिस स्टेशन गए तो, जैसा कि आरोप है, थानाध्यक्ष चंद्रबली यादव ने उन्हें गाली देकर भगा दिया। जलाने की वारदात रिपोर्ट दबाव बनाने के बाद 26 सितंबर की शाम दर्ज की जा सकी। जब सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 27 सितंबर को कार्रवाई करने का आदेश दिया तब पुलिस ने मुख्य आरोपी ओमप्रकाश मौर्या समेत सभी चारों आरोपियों को गिरफ़्तार किया।
हमारे समाज में निर्धन व असहाय सदा से शोषण का शिकार होते रहे हैं। ऐसी घटनाओं के विरोध में इस बार महाराष्ट के विश्वकर्मा, पांचाल समाज व अन्य विश्वकर्मा वंशियों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन का फैसला किया है।
इस धरने में विश्वकर्मा समाज की मुख्य मांगें हैं :
दोषी पुलिस-कर्मियों का आजीवन निलंबन।
मुकदमे को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपने की मांग।
विवादीन जमीं का जल्द न्यायिक निपटारा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुआवजे की राशि बधाई जाय।
पीड़ित परिवार को न्यायिक सुरक्षा प्रदान की जाय।
आयोजकों ने विश्वकर्मा वंशियों को भारी संख्या में कल इस धरने में शामिल होकर अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करने का आग्रह किया है।
ज्योति विश्वकर्मा के साथ घटी यह घटना विस्तार से पढ़ने के लिए क्लिक करें..
लेखकों के सम्मान लौटाने वाले मामले में अब साहित्यकारों के अलावा फ़िल्म इंडस्ट्री का भी सहयोग मिलना शुरू हो गया है। अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बाद अब मशहूर लेखक गुलज़ार ने भी लेखकों के सम्मान लौटाने का समर्थन किया हैं। गुलज़ार ने कहा कि देश ने ऐसा भय का माहौल पहले कभी नहीं देखा था।
गुलज़ार ने लेखकों के सम्मान लौटाने की प्रक्रिया को सही ठहराते हुए कहा कि लेखकों की आवाज़ दबाई नहीं जानी चाहिए। जिस तरह से पिछले कुछ समय में ऐसा माहौल पैदा हुआ है, उसमें लेखकों द्वारा उठाया गया कदम साहसिक एवं सही है।
उन्होंने कहा कि साहित्यकारों के सम्मान लौटाने के मामले में वह पहले कुछ उलझन में थे, लेकिन अब वह उनके दर्द के साथ हैं। उन्होंने कहा, कि मैं भी एक लेखक हूँ इसलिए मैं लेखकों का दर्द समझ सकता हूँ। देश में जो एक डर का माहौल है, उससे विचलित होना स्वाभाविक है। मैंने हिन्दुस्तान में ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा।
गुलजार ने लेखकों की दिक्कतों का सारा ठीकरा सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि लेखकों की स्थिति के लिए सरकार ही ज़िम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि लेखक समाज की चेतना को जगाने वाले लोग हैं। वह बेचारा क्या राजनीति करेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने आज 13 वीं बार देश के लोगों के सामने रेडियो पर अपने ‘मन की बात’ की। प्रधानमंत्री ने “मन की बात” कार्यक्रम में उन सभी भारतीयों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से इस कार्यक्रम द्वारा समाज एवं देश में बदलाव लाने और इस मुहिम को व्यापक बनाने में अपना योगदान दिया।
प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम में पहली बार लोगों को अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने का अवसर भी दिया। मोदी ने चित्तूर के सेंट मैरी विद्यालय की उन सभी छोटी छात्राओं को सराहा, जिन्होंने विभिन्न कलाओं द्वारा समाज को ‘अंगदान महादान’ का महत्व समझाने का बड़ा काम किया तथा प्रधानमंत्री को अँगूठे के निशान से बनी भारत के मानचित्र की एक कलाकृति भेंट की।
प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में महाराष्ट्र के क़रीब 80 वर्षीय वसंतराव सुड़के गुरूजी के महत्वपूर्ण योगदान और तमिलनाडु राज्य के अग्रिम पंक्ति में होने का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने देश में हो रहे विभिन्न पर्वों की शुभकामनाएं देते हुए देश में 26 से 29 अक्टूबर को भारत की राजधानी नई दिल्ली में ‘India-Africa Foreign Summit’ के होने वाले एक नए पर्व की ओर देशवासियों का ध्यान आकर्षित किया। भारत की धरती पर पहली बार इतने बड़े पैमाने पर ऐसे कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें 54 अफ्रीकी देशों और यूनियनों के लीडर्स को आमंत्रित किया गया है, जो कि अफ्रीका के बाहर अफ्रीकन देशों का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा।
प्रधानमंत्री ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के लिए हो रहे सफल प्रयासों की भी प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री ने इस बार, भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा स्कूली बच्चों के लिए छोटे व बड़े पैमाने पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों को भी खूब सराहा।
पर्व और त्योहारों के बाद की सफाई पर भी दें ध्यान-
“मन की बात” हो और मोदी स्वच्छता की बात न करें ऐसा संभव नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार आप दीपावली या अन्य त्योहारों से पूर्व जी जान से उनकी तैयारी करते हैं, उसी प्रकार आपको त्योहारों के बाद की स्वच्छता की भी फिक्र होनी चाहिये। उन्होंने स्वच्छता अभियान के लिए देशवासियों को जागरूक बनाने में मीडिया जगत द्वारा दिए गए योगदान को जम कर सराहा तथा उम्मीद जताई कि पिछले वर्ष महात्मा गाँधी जयंती पर प्रारंभ हुआ यह अभियान ,वर्ष २०१९ में बापू की १५०वीं जयंती तक इतना सफल हो कि हम गर्व से कह सकें ‘हमने भारत माता को गंदगी से मुक्त कर दिया।’
उन्होंने छोटे पदों के लिए इंटरव्यू समाप्त करने के विषय में कहा कि कभी किसी ने सुना नहीं है कि दुनिया में कोई ऐसा मनोवैज्ञानिक है जो एक मिनट, दो मिनट के साक्षात्कार में किसी व्यक्ति को पूरी तरह जाँच लेता है और इसी विचार से उन्होंने घोषणा की थी कि क्यों न हम छोटे पदों की नौकरियों के लिए इंटरव्यू की परम्परा ख़त्म करें।
उन्होंने बताया कि सरकार ने सारी प्रक्रिया पूर्ण कर ली और केंद्र सरकार के ग्रुप ‘डी’, ग्रुप ‘सी’ और ग्रुप ‘बी’ के नॉन ग़ज़टेड पदों में अब भर्ती के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। यह नियम 1 जनवरी, 2016 से लागू हो जायेगाI
योग हिंदुस्तान की बहुत प्राचीन सम्पति है| यह भारत वर्ष गौरव एवं मन की वस्तु है जैसा की इसका प्रभाव धर्म और संप्रदाय मात्र पर पड़ा है| भारतीय शाश्त्रों में योग पर बहुत ही रोहक व चित्रित कथाएं लिखी पड़ी है| योग से सम्बंधित यहाँ वृधोक्ति और किवदंतियों भी कमी नहीं है| योग पर आधारित हमारे देश में बहुत से ग्रन्थ लिखे गए है,जिसमे एक पतंजलि योग दर्शन है हम लोग बहुत भाग्यशाली है और हमें गौरवान्वित होना चाहिये की यह विद्या हम लोगों के बीच है इस महान पवित्र सिद्धि के लिए हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्षो तक प्रयत्न के बाद ये विद्याएँ मिली| जो लोग संसार को सत्य मानकर भोग प्राप्ति के लिए योग में लगा करते है उन्ही को उपर्युक्त ब्यग्रता,अनियमितता,दुराग्रह,आदि दोस विघ्न तथा सिद्धि आदि पाप सताया करते हैं| सच तो यह है की भोगों के लिए योग में लगना रोग और मृत्यु को पाना है और भग वासना को भष्म करने के लिए योग में लगना भगवान को पाना है| यही योग साधना का मूल मंत्र व सिधांत बिंदु है|
प्रश्न – आदरणीय गुरु जी मै हमारा महानगर का नियमित पाठक हु | हमारी नाक अक्सर जाम रहता है और सिर में भी दर्द रहता है डॉक्टर ने बताया की साइनस भी हो सकता है आपको जल नेति करने लाभ होगा कृपया जल नेति के बारे में बताये –आर.एन.पाण्डेय (अद्वोकेट)मुंबई
उत्तर–सबसे पहले आपको धन्यवाद् हमारा महानगर के नियमित पाठक के लिए |और रही बात जल नेति की आपको जल नेति के बारे में विस्तआर से वर्णन किया जा रहा है |
जल नेति
जल नेति के लिए आवश्यक सामग्री
१-जल नेति पॉट
२-कुंकना पानी
३-आधा लीटर पानी में आधा चाय के चम्मच आधा चम्मच नमक घोल लें
सबसे पहले पॉट के टोटी को दायें नथुने के भीतर डालिए |
सिर को धीरे धीरे बड़े ध्यान से बाई ओर झुकाइये ||
धीरे धीरे पॉट से जलप्रवाह दाये नथुने की ओर |
आने दे बाएं नथुने से पानी निचे की ओर ||
मुह खोल के रखे सदा स्वास लेने के लिए |
सदा ध्यान रखे जल जरा अन्दर न पियें ||
लगभग बीस सेकण्ड तक जल प्रवाह होने दीजिये |
तत्पश्चात भस्त्रिका के द्वारा नासिका स्वस्छ कीजिये ||
अब बाई नथुने में पॉट के टोटी को लगाइए |
इसी क्रिया को पुनह बाई ओर दुहारिये ||
नासिका को शुष्क करना
पूर्ण होने के बाद खड़े हो दोनों हाथो को करके पीछे की ओर |
थोड़ा आगे की ओर झुके और स्वास को झटके निचे की ओर ||
आंख कान और गले की बिमारियों को झट पट दूर भागता |
अनियंत्रित क्रोध व सिर दर्द दूर कर ताजगी है लाता ||
यह क्रिया किसी योग गुरु के सानिध्य में ही करे |
श्री हरी नारायण सेवा संस्थान द्वारा संचालित परम पूज्य गगन गिरी महाराज अस्राम मनोरी मलाड वेस्ट प्रत्येक रविवार को योग ध्यान का शिविर का आयोजन किया गया है जिसका नाम लाइफ रिफैनरी (चित से चेतना की ओर)रखा गया है |आयोजन का लाभ लेने के लिए संपर्क करें- Anil kumar shukla 9930456295
मुम्बई के कल्याण क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला। राज ने कहा कि 100 दिन में देश के अच्छे दिन आने वाले थे आज 500 दिन हो गए लेकिन अच्छे दिन का कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने कहा कि फेंकू का दूसरा मतलब ही बीजेपी हो गया है।
मुम्बई में बढ़ते क्राइम की वजह का सारा ठीकरा अन्य प्रदेशों से आने वाले लोगों पर फोड़ दिया। अपने चिर परिचित अंदाज़ में ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में क्राइम दूसरे प्रदेशों से आ रहे लोगों की वजह से बढ़ रहा है।
उन्होंने शिवसेना पर भी हमला बोला, कहा कि अगर शिवसेना और बीजेपी में सबकुछ सही नहीं चल रहा है तो अलग क्यों नहीं होते हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस पर तंज कसते हुए राज ने कहा कि वो विदेश पैसे मांगने जाते हैं और दिल्ली में जाकर सिर झुकाते हैं।