गुजरात में हो रहे निकाय चुनाव में रविवार को मतदान करने अहमदाबाद पहुंचे बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने नरेन्द्र मोदी की विकास संबंधी नीतियों का समर्थन करते हुए कहा कि अच्छे दिन अवश्य आएँगे. उन्होंने कहा कि हर अच्छे और बड़े कार्य में समय लगता है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अच्छे दिन से सम्बंधित नीतियों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया वक्त लेगी, अगर दिशा ठीक है तो परिणाम भी अच्छे ही होंगे. उन्होंने कहा कि समय के साथ ही इसके सही स्वरुप को समझा जा सकता है. कोई भी काम समय के पहले नहीं हो सकता, इसलिए हमें सहे समय का इंतज़ार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि हमारे नरेंद्र भाई संसद में प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं. वर्षों से उनको गुजरात में काम करते देखा है. उन्होंने आशा व्यक्त किया कि ‘मुझे प्रसन्नता होगी अगर कॉर्पोरेशन के चुनाव में वैसे ही परिणाम आएंगे जैसे लोकसभा और विधानसभा में आते हैं.’
गौरतलब है कि सरकार के गठन के बाद आडवाणी प्रधानमंत्री मोदी से नाराज़ नज़र आ रहे थे लेकिन उनके इस बयान से ऐसा अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अब आडवाणी भी अंततः मोदी के समर्थन में उतर ही गए.
बिहार चुनाव में हार के बाद आडवाणी के नेतृत्व में चार बढ़े नेताओं ने हार की जिम्मेदारी तय करने को लेकर बयान जारी किया था, जिसके बाद आडवाणी ने पहली बार मीडिया से बात की थी. हालांकि बिहार चुनाव पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि बिहार चुनाव के नतीजों से चेतना बढ़ी है.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को अभिनेत्री करीना कपूर के साथ सेल्फी लेना भारी पड़ता नज़र आ रहा है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में यूनिसेफ के एक कार्यक्रम में फोटो लेने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री रमन सिंह पर हमला बोल दिया. कोंग्रेस ने रमन सिंह पर आरोप लगाया कि राज्यभर में किसान परेशान हैं और आत्महत्या कर रहे हैं और मुख्यमंत्री अभिनेत्री के साथ सेल्फी लेने में व्यस्त हैं.
रायपुर में आयोजित बाल अधिकार सम्मेलन सप्ताह के समापन समारोह के अवसर पर फिल्म अभिनेत्री करीना कपूर बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद थी. कार्यक्रम में विलम्ब से पहुंचने के बाद ही करीना ने हाथ हिलाकर वहा उपस्थित बच्चों का अभिवादन किया. मंच पर करीना जब मुख्यमंत्री सिंह के पास बैठी तो उन्होंने अपने मोबाइल से सेल्फी ले ली. मुख्यमंत्री के सेल्फी लेने की खबर लगते ही काँग्रेसी नेताओं के सुर तेज़ हो गए.
कांग्रेस ने सेल्फी मामले पर कहा कि राज्य में दर्जनों किसान सूखे की चपेट में आकर आत्महत्या कर चुके हैं और राज्य सरकार समस्याओं का हल निकालने की बजाय अभिनेत्रियों से साथ सेल्फी लेने में ही व्यस्त हैं. इन आरोपों का खाब्दन करते हुए राज्य के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री अकसर कार्यक्रमों में उपस्थित जनता की फोटो लेते हैं. इस कार्यक्रम में बच्चे उपस्थित थे और उन्होंने बच्चों की ही फोटो ली.
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अब कांग्रेस के पास कोई मुद्दा ही नहीं है बात करने का तो इन्ही सब में अपना समय बिता रही है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बेहतर कार्य कर रही है, इसीलिए वहाँ की जनता ने भाजपा पर अपना भरोसा जताया है.
यूनिसेफ के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रमन सिंह और अभिनेत्री करीना कपूर ने छत्तीसगढ़ के 36 विभिन्न स्कूलों की 31 प्रतिभावान बालिकाओं और पांच शिक्षिकाओं को छत्तीसगढ़ रत्न अलंकरण से सम्मानित किया.
फिल्म प्रेम रतन धन पायो की प्रतिक्रिया भले ही मिली जुली रही लेकिन इसके गानों और उसकी कोरियोग्राफी को लेकर युवाओं में काफी क्रेज़ नज़र आ रहा है. फिल्म के टाइटल ट्रैक की कोरियोग्राफी की सफलता का अंदाज़ा डबस्मैश के वीडियोज से भी भी लगाया जा सकता है. युवाओं से लेकर बड़ी उम्र के लोग भी इस गाने पर थिरकते नज़र आए. हाल ही में फिल्मकार डेविड धवन ने फिल्म की कोरियोग्राफर शबीना खान को फोन करके उनकी बेहतरीन कोरियोग्राफी की तारीफ की.
प्रभुदेवा, सरोज खान , गणेश हेगड़े जैसे नामी कोरेओग्रफेर के साथ काम कर चुकी शबीना खान ने फिल्म प्रेम रतन धन पायो के ८ गानो में सलमान और सोनम कपूर को कोरिओग्राफ किया. शबीना ने भी इस फिल्म की बदौलत अपनी पहचान बना ली है और सफलता के पायदान पर अपना पहला कदम रख चुकी हैं.
सूरज बड़जात्या की इस फिल्म में उनके काम को सलमान खान ने तो सराहा ही था, और अब उनकी कोरेओग्राफी के तारीफों के पूल बाँध रहे है डेविड धवन, शबीना स्तब्ध रह गयी, जब डेविड धवन ने कॉल कर के उन्हें कॉम्पलिमेंट दिया. शबीना डेविड धवन की प्रशंसक है. शबीना ने कहा कि जिनकी मैं हमेशा से फैन रही हूँ वे मुझे फोन करके मेरे काम की तारीफ करेंगे, ऐसा मैंने कभी सोचा भी नहीं था. जब आपके काम को कोई ऐसा व्यक्ति सराहे जिसके काम की दीवानी पूरी इंडस्ट्री हो तो आपका खुश होना लाज़मी है.
मुंबई सहित पूरे राज्य में बोगस डॉक्टर्स और लैब्स मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मरीजों की चिंता की जगह डॉक्टर्स और लैब मालिक अपनी दुकान चमकाने में मशगूल हैं। महाराष्ट्र असोसिएशन आॅफ प्रैक्टिसिंग पैथलॉजिस्ट एंड माइक्रोबायलॉजिस्ट द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक राज्य में 5 हजार से अधिक बोगस लैब है। इन बोगस लैब्स की सहायता से मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। स्वास्थ विभाग को जानकारी होने के बावजूद इन लैब्स पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
महाराष्ट्र मेडिकल काउन्सिल के अध्यक्ष किशोर टावरी ने कहा कि बोगस डॉक्टर और बोगस लैब्स से निपटने के लिए एंटी क्वेकरी सेल बनाया है, जो हर जिले के कलेक्टर की अध्यक्षता के तहत चलती है। इस सेल में हेल्थ आॅफिसर, विभागीय पुलिस आयुक्त जैसे सम्बंधित लोग हर शिकायत पर अपनी नजर बनाए रखते हैं। उन्होंने लोगों से आवाहन करते हुए कहा कि बोगस डॉक्टरों अथवा पैथलैब्स पर हमारे साथ लोग भी आगे आए जो अपनी शिकायत अपने कलेक्टर तक पंहुचा सकते हैं, जिससे यह सेल हमेशा एक्टिव होगा।
नियम का उलंघन-
नियमों के अनुसार पैथोलॉजी में पैथोलॉजिस्ट का होना अनिवार्य होता है, लेकिन कई पैथोलॉजी लैब्स में पैथोलॉजिस्ट का काम टेक्नीशियन ही कर रहे है। कई लैब्स में टेक्निशियनो से ही काम चलाया जा रहा है।
असोसिएशन का आरोप-
पैथोलॉजी असोसिएशन के कार्यकारी सदस्य डॉ.प्रसाद कुलकर्णी ने बताया कि बोगस लैबों की जानकारी उनको आरटीआई के जरिए मिली है, लेकिन शिकायत करने के बाद भी राज्य में पांच बोगस लैबों की पहचान कर ली गई है। लेकिन महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है।
डॉन और डॉन-2 जैसी एक्शन थ्रिलर मूवी को डायरेक्ट करने वाले फरहान अख्तर अब ख़ुद बतौर एक्शन एक्टर नज़र आएँगे। फरहान आगामी फिल्म वजीर में काफी सारे एक्शन सीन करते दिखेंगे।
गीतकार और फरहान के पिता जावेद अख्तर ने वजीर में फरहान की काफी तारीफ की है। आपको बता दें कि जावेद ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए काफी सारी स्क्रिप्ट पुलिसवाले सिनेमा के लिए भी लिखा है। अमिताभ बच्चन को जंजीर से एंग्री यंगमैन बनाने वाले जावेद ही हैं।
जावेद ने वजीर में फरहान के काम की काफी तारीफ की है। उन्होंने फिल्म की टीम से मिलकर पूरी टीम को बधाई दी। जावेद ने पुलिस के किरदार में फरहान अख्तर के लुक को पूरी तरह से परफेक्ट बताया और कहा कि फरहान ने एक पुलिसवाले के किरदार को पूरी तरह से निभाया है।
वजीर के टेलर को लोगों का काफी अच्छा रिस्पांस मिला है। अब लोग बेसब्री से फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहे हैं। यह पहली बार है जब फरहान अख्तर ने एक पुलिसवाले का किरदार निभाया है और महानायक अमिताभ बच्चन के साथ काम किया है।
किसी भी राष्ट्र में समरसता स्थापित करने के लिए वहां की न्याय व्यवस्था और धर्म की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि न्याय व्यवस्था दिशाविहीन तथा धर्म की सहिष्णुता समाप्त होती है तो वहां अराजकता की स्थिति पैदा हो जाती है आतंक के बीज अंकुरित होने लगते हैं। आज समूचा विश्व इन्हीं दोनों भयावह स्थितियों से गुजर रहा है। आतंकवादी संगठनों की बाढ़-सी आ गई है।
प्रायः लोग प्रश्न करते हैं कि आतंक का नाम लेते ही इस्लाम क्यों जुड़ जाता है? क्या आतंक और इस्लाम दोनों समानार्थी हैं? इन प्रश्नों का उत्तर ढूंढ़ने के लिए हमें “इस्लाम धर्म ” में झांकना होगा। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने “सत्यार्थ प्रकाश” के चौदहवें समुल्लास में कुरान के कुछ प्रक्षिप्त (“फेंका गया” अथवा “जोड़ा गया”) विचारों की चर्चा करते हुए लिखा है-
“और काटे जड़ काफिरों की।मैं तुमको सहाय दूंगा। साथ सहस्र फ़रिश्तों के पीछे-पीछे आने वाले।अवश्य मैं काफिरों के दिल में भय डालूंगा। बस मारो ऊपर गर्दनों के। मारो उनमें से प्रत्येक पोरी(संधि)पर।” -म.2/सि. 9/सू 08/आ. 7/9/12
समीक्षा – “वाह जी वाह। कैसा खुदा और कैसे पैग़म्बर दयाहीन। जो मुसलमानी मत से भिन्न काफिरों की जड़ कटवावे।और खुदा आज्ञा देवे उनको गर्दन मारो और हाथ पग के जोड़ो को काटने का सहाय और सम्मति देवे। ऐसा खुदा लंकेश से क्या कुछ कम है ? यह सब प्रपंच क़ुरान के कर्ता का है, खुदा का नहीं। यदि खुदा का हो तो ऐसा खुदा हमसे दूर और हम उससे दूर रहें।।”
अब पाठक सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि जब धर्म में “अराजक विचार” जोड़ दिए जाते हैं तो वह कितना घातक हो जाता है। वैश्विक-शांति खतरे में पड़ जाती है। मेरी मंशा किसी के धर्मग्रन्थ पर उंगली उठाना नहीं, बल्कि सत्य के अर्थ को प्रकाश में लाना है। सत्य यह भी है कि सभी धर्मों के मूल में प्रेम, सद्भाव और भाईचारा है।
ईद, नमाज़, ज़कात, रोज़ा और हज इसके माकूल उदाहरण हैं। धर्मग्रंथों में प्रक्षिप्त अंश मानवता के लिए भस्मासुर हैं।इन जोड़े गए विचारों को भी भोले-भाले लोग खुदा का फ़रमान और ईश्वरीय-वाणी मान लेते हैं। कहीँ-न-कहीं खूंखार आतंकी संगठन इन्हीं अराजक व प्रक्षिप्त अंशों की उपज हैं।
हिन्दू धर्मग्रन्थ भी इसके अपवाद नहीं हैं। मांसाहारी लोग मांसाहार के पक्ष में वैदिक मन्त्रों की दुहाई देते हुए कतिपय मन्त्रों को उद्धृत करने में नहीं हिचकते हैं। उन्हें यह ज्ञात होना चाहिए कि उद्धृत मन्त्र या तो प्रक्षिप्त हैं अथवा उनकी टीकाएं ग़लत लिखी गई हैं। वेदों में चींटी की भी हत्या करना वर्जित है। हम बेजुबान जानवरों के शोषण तथा उनके वध के सहज ही कारण बनते हैं,किन्तु “आत्मवत् सर्वभूतेषु” अर्थात् सभी जीवों में स्वयं का दर्शन करना भूल जाते हैं।
अब बात करते हैं निरंकुश शासन प्रणाली और लचर न्याय व्यवस्था की। जब राजनीति वोट के खातिर आतंकवादियों की पक्षधर बने और न्याय व्यवस्था उनके लिए चौबीसों घंटे सेवा दे तो उस राष्ट्र में संकट के बादल घिरने लगते हैं। अराजक तत्वों का चारों ओर बोलबाला होता है। सामान्य जनता ‘कर’ और मंहगाई के बोझ तले कराहने लगती है।किसान मज़दूर बनने लगते हैं। ‘विश्वग्राम’, ‘विश्व-बाज़ार’ में तब्दील होने लगता है। राष्ट्र-निर्माण की नीति व्यावसायिक-नीति का आभास देने लगती है। प्रतिभावान युवक ग़लत रास्ते पर चल पड़ते हैं, जबकि आरक्षित व अयोग्य युवा महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभालते हैं। देश के नागरिक संतप्त होते हैं। राष्ट्र खोखला बन जाता है। ऐसी ही स्थिति का चित्रण महर्षि बाल्मीकि ने किया है-
“नाराजके जनपदे योगक्षेमः प्रवर्तते। ना चाप्य राजके सेना शत्रून् विषहते युधि।।” – अयोध्याकाण्ड 51/25
अर्थात् अराजक राज्य में प्रजा का योगक्षेम नहीं होता।अराजक देश की सेना,राष्ट्र की प्रतिद्वंद्वी सेना का मुकाबला कर उसे जीत भी नहीं सकती।
सामान्य नागरिक पूंजीपतियों के चंगुल में छटपटा रहा है।इसी अराजकता की घोर निंदा यजुर्वेद में की गई है –
अर्थात् जिस प्रकार बड़ी चिड़िया के सामने छोटी चिड़िया दबी रहती है , उसी प्रकार अराजक देश में प्रजा दबी रहती है।जैसे छोटी दरार में मोटी वस्तु घुसेड़ने से वह छिन्न-भिन्न हो जाती है , वैसे ही अराजक देश में प्रजा की दशा होती है।अराजक देश में प्रजा का विनाश होता है।अतः अराजक देश प्रजा का घातक होता है।
वह देश जहां अराजक शक्तियां सक्रिय होती हैं , किसी भी स्थिति में सुरक्षित नहीं रह सकता।भ्रमित प्रजा हिंसा का रास्ता चुनती है अथवा वह बाहरी आक्रमण का शिकार बन जाती है।उस देश की युवा शक्ति भटकने लगती है।उनके कदम ज़ेहाद के रास्ते पर चल पड़ते हैं।प्रश्न यह उठता है कि ऐसी अराजक स्थिति से कैसे निपटा जाय ? “संघे शक्तिः कलयुगे” द्वारा अथवा “यदा-यदा धर्मस्य …..” की प्रतीक्षा की जाय!
पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संयोजक हार्दिक पटेल के जेल में बंद होने की वजह से पटेल आरक्षण आन्दोलन का मामला ठंडा पड़ गया था, लेकिन एक बार फिर से हार्दिक ने माहौल को गर्म करने और आरक्षण अभियान को फिर से पटरी पर लाने के लिए बिगुल बजा दिया है. सूरत के जेल में देशद्रोह के जुर्म में बंद हार्दिक ने अभियान को फिर से ट्रैक पर लाने के लिए एक कोर टीम गठित की है. गिरफ्तारी के बाद आन्दोलन शिथिल पड़ गया था, जिसे पुनर्जीवित करने का प्रयास पटेल ने किया है.
आन्दोलन के दौरान हिंसा के लिए कुछ युवाओं को भड़काने के जुर्म में हार्दिक पटेल को देशद्रोह मामले का सामना करना पड़ रहा है. पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को जायज़ ठहराते हुए गुजरात के पटेलों ने हार्दिक पटेल का पूरा सहयोग किया. भारी जनादोलन की वजह से हार्दिक और पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति की टीम को लगा कि सरकार पर दबाव डालकर आरक्षण को मंजूरी दिलाई जा सकती है.
गत 25 अगस्त को अहमदाबाद में हुई में हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने हार्दिक को हिरासत में लिया था. कुछ समय के बाद ही पुलिस को वह ट्रांसक्रिप्शन हाथ लग गाया जिसमे हार्दिक दूसरे पाटीदार नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिंसा के लिए भड़का रहे थे. गुजरात पुलिस ने इसी आधार पर हार्दिक को देशद्रोह के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया था.
आन्दोलन समिति के एक पदाधिकारी के मुताबिक़, आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए हार्दिक ने पीएएएस की नई कोर समिति का गठन किया है. 11 संयोजकों की यही कोर समिति आंदोलन के संबंध में फैसला करेगी.
गौरतलब है कि 27 अक्तूबर को हाईकोर्ट ने हार्दिक पटेल के खिलाफ सूरत में दर्ज एफआईआर को खारिज करने से इंकार कर दिया था. हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि ‘उनके खिलाफ पहली नजर में देशद्रोह का मामला बनता है, क्योंकि उसने एक युवक को पुलिसकर्मियों को जान से मार डालने के लिए उकसाया था.
अब आप सलमान खान की फिल्म देखने जा रहे हैं और यह अपेक्षा कर रहे हैं कि आपको इस बार उनकी ओवर एक्टिंग देखने को नहीं मिलेगी तो आप खुद को बहला रहे हैं. भारतीय संस्कृति और सभ्य भाषा का प्रयोग फिल्म को खूबसूरत बनाता है. हालाँकि सूरज की तमाम फिल्मों की भांति इस फिल्म में भी पारिवारिक कलह नज़र आया है. सलमान, सोनम, स्वरा, दीपक, अरमान और विशेषकर अनुपम खेर ने निर्देशक का भरपूर सहयोग किया है और लगभग सभी किरदार, कहानी और पात्र के साथ न्याय करते नज़र आए.
फिल्म की शुरुआत पूरी तरह से आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत है. कहानी, प्रेम दिलवाले की नाटक कंपनी की रामलीला से शुरू होती है, जो तमाम चुटीले डाइलॉग्स की वजह से दर्शको को जोड़ लेगी. उपहार फाउंडेशन नामक एनजीओ की संचालक दिल्ली की राजकुमारी मैथिलि (सोनम कपूर) प्रेम दिलवाले को बहुत भाती हैं, जिसकी एक बड़ी वजह यह है कि मैथिलि असहायों की निःस्वार्थ मदद करती हैं. इसी काम से प्रभावित होकर प्रेम अपनी नाटक कम्पनी का बड़ा हिस्सा इकट्ठा करके उपहार फाउंडेशन को देता है. रामभक्त प्रेम, अयोध्या स्थित उपहार फाउंडेशन के कार्यालय में सहयोग राशि देने जाता है और वहाँ की अधिकारी से मैथिलि से मिलवाने का आग्रह करता है. एनजीओ की अधिकारी बताती है कि कुछ ही दूर स्थित प्रीतमपुरा के युवराज के राजतिलक में मैथिलि आएगी, वहाँ आप की मुलाक़ात उनसे हो सकती है.
प्रेम तैयारी करनी शुरू करता है और अपने दोस्त कन्हैया (दीपक डोबरियाल) के साथ प्रीतमपुरा के पास निकल पड़ता है. वहाँ पहुँच कर प्रेम को पता चलता है कि अपने उसूलों का पक्का राजकुमार अपनों की वजह से ही बड़े मुसीबत में है और संयोग से प्रेम, राजकुमार विजय सिंह का हमशक्ल है. विजय सिंह का चचेरा छोटा भाई अजय (नील नितिन मुकेश) अपने सहयोगियों की मदद से राजपाठ पर अपना अधिकार कायम करना चाहता है. मौक़ा देखकर वह विजय सिंह को मारने की पूरी योजना बना लेता है, लेकिन घटनास्थल पर दीवान साहब यानी अनुपम खेर पहुँच जाते हैं और युवराज की जान बच जाती है. हमशक्ल होने की वजह से दीवान साहब प्रेम का सहयोग लेते हैं. और प्रेम अपने अनोखे अंदाज़ से राज घराने की तमाम परेशानियों से जूझता है. और फिल्म के एंड में अधिकतर फिल्मों की तरह ही इसकी भी हैप्पी एंडिंग ही होती है. कहानी के कई मोड़ ऐसे हैं जो काफी रोचक हैं, जिसका मज़ा लेने के लिए आपको थिएटर का रुख करना होगा.
फिल्म की कहानी में ऐसा कुछ नहीं है, जिसके लिए आप ‘वाह’ कह बैठें और स्क्रीनप्ले का भी हाल कुछ ऐसा ही ही. इंटरवल के पहले फिल्म बेहद स्लो और पकाऊ है लेकिन उतनी ही रफ़्तार से इंटरवल के बाद आगे भी बढ़ती है. अगर आप पारिवारिक और भावुक हैं तो कुछ सीन आपकी आँखें नम भी कर सकती हैं.
फिल्म में शुरू से लेकर अंत तक हिमेश रेशमिया के 10 गाने हैं, जो आपको काफी बोर कर सकती हैं. लगभग हर 7 सीन के बाद गाना शुरू हो जाता है. एडिटिंग और भी उम्दा होती तो फिल्म में कसाव आ सकता था.
क्यों देखें- अगर आप परिवार के साथ फिल्म देखना चाहते हैं तो ज़रूर जाएं. अश्लीलता से कोसों दूर यह फिल्म आपके रिश्तों को मज़बूती भी दे सकता है.
क्यों न देखें- अगर आप मसाला फिल्मों के शौक़ीन हैं, फाइट सीन और फैंटेसी के दीवाने हैं तो आप ज़रूर इस फिल्म से डिसअप्वाइंट हो सकते हैं.
बाज़ार ऊँचे-ऊंचे हैं रौशनी नहाये , दियों की जगह बिजली की माला जगमगाये मिटटी के वो गजानन चांदी में बन के आये। हाथोँ में सबके थैली महंगे पटाखों वाली, पूछा है कभी खुद से क्या यही है दिवाली कहने को है दिवाली पर दिल है खाली खाली ऐसे में याद आती है गाँव की दिवाली।।
साइकिल पे कोई चढ़ के, कोई जाए कोसों चल के किसी ने पहने जूते , कोई चप्पलों से खाली, कोई फुलझड़ी खरीदे, कोई घिन्नी चक्कर वाली लो याद आ गयी फिर वो गाँव की दिवाली।।
लगते थे खूब मेले और चिज्जियों के ठेले लक्ष्मी -गणेश के संग सजे वस्त्र लाल पीले, मिटटी के भाव मिलती थीं मिटटी की दियाली अब याद आ रही है वो गाँव की दिवाली।।
माँ की कलाई जकड़े , एक लड़की ज़िद्द पकड़े अम्मा हमें पिन्हा दो वो फ्रॉक नई वाली अब याद आ रही है वो गाँव की दीवाली।। रंग रोगनो से चमका के हजार का कोना कोना हाँ याद है वो तोरण का द्वार पे पिरोना, सब मिलके लीपते थे दीवार ऊंची वाली याद आ रही है वो गाँव की दीवाली।।
न रौशनी की ज़ात, न दिए का कोई मज़हब ईद जैसी ही दिवाली मनाते थे मिलके हम सब कोई भी घर न होता था रौशनी से खाली मिल कर सभी मानते थे गाँव में दिवाली।।
गुरबक्श संग मैकू, डेविड भी साथ दौड़े जुम्मन बताओ तुमने कितने पटाखे फोड़े, दियों की जगमगाहट पटाखों के वो दंगे आकाश चूमते से अनार रंग-बिरंगे। इस घर से जाती उस घर मिठाइयों की थाली हाय याद आ रही है वो गाँव की दिवाली।।
छत, चौबारे, आँगन, मुंडेर टूटी वाली दिए की रौशनी में लगती भाग्यशाली थे छोटे-छोटे दीपक पर ऐसे जगमगाते
बिहार विधानसभा चुनाव में हुई बड़ी हार की वजह से भाजपा के शीर्ष नेताओं के कान खड़े हो गए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ भारतीय जनता पार्टी अब उन नेताओं की खबर लेने की योजना बना रही है, जिन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी और पार्टी के नेताओं के खिलाफ बयानबाज़ी की थी।
भाजपा बिहार चुनाव में हुई गलतियों को सुधारने में लगी हुई है। सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ समय से बागी रुख में नज़र आ रहे शत्रुघ्न सिन्हा पर कार्रवाई हो सकती है। स्वयं पर खतरे का अंदाज़ा लगते ही शत्रुघ्न ने नितीश से भी मुलाक़ात कर लिया। कुछ राजनीतिक जानकारों के मुताबिक़ शत्रुघ्न पर तलवार लटक रही है जिसके चलते वो काफी परेशान हैं। इसी वजह से चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही उन्होंने नितीश कुमार से मिलने की योजना भी बना ली।
रविवार को चुनाव रुझानों में बीजेपी के महासचिव मुरलीधर राव ने कहा था कि शत्रुघ्न और आर.के. सिंह जैसे कुछ नेताओं के धोखे की वजह से यह स्थिति हुई है। राव ने यहाँ तक कह दिया था कि ‘इन्हें वक्त के फैसले का सामना करना होगा।’