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Thursday, September 10, 2026
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दूसरे एवं अंतिम चरण के चुनाव प्रचार के लिए मोदी असम में

Bureau@Navpravah.com
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में दूसरे चरण के मतदान से पूर्व चुनाव प्रचार के पहले नीलाचर पर्वत पर स्थित भगवती मां कामाख्या देवी की पूजा की। प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह पूजा करने के बाद ही मुहीम को आगे बढ़ाया। भगवती की पूजा-अर्चना करने के लिए प्रधानमंत्री कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर गए।
मंदिर के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री ने दुर्गा मां और उनके विभिन्न अवतारों की नवरात्रि के पहले दिन पूजा की। मोदी ने मंदिर के पास उनसे मिलने के लिए रुकी भीड़ का अभिवादन भी किया। भीड़ के पास जाकर उन्होंने लोगों से हाथ मिलाया और बात की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 अप्रैल को हुए प्रथम चरण के मतदान के लिए भी प्रचार कर चुके हैं और आगामी 11 अप्रैल को होने वाले 61 निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे एवं अंतिम चरण के लिए आज प्रचार करेंगे। मोदी आज रोहा, रंगिया, सोरभोग, और गुवाहाटी में चुनाव प्रचार करेंगे। प्रधानमंत्री आज शाम को चुनाव प्रचार समाप्त कर दिल्ली वापस लौट जाएंगे।

…कलम आज उनकी जय बोल

बलिदान दिवस- शहीद मंगल पाण्डेय

अनुज द्विवेदी
ब्यूरो
(इलाहाबाद)

ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ जंग और आजादी का ख्याल आते ही कई नाम और चेहरे बरबस याद आ जाते हैं। एक लंबी लड़ाई, हजारों कुर्बानियां और तमाम जुल्मों-सितम के बाद हिन्दुस्तान 15 अगस्त 1947 की आधी रात अंग्रेजों से मुक्त हो गया था। एक लंबे समय से गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतीय समाज को खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला तो हर ओर बस जश्न का माहौल था।

हर कोई आजादी के मतवालों को याद कर रहा था, जिनके बलिदान से भारतीयों को मुक्ति मिली थी। मंगल पांडेय भी उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक थे। आज उनका शहादत दिवस है,आज ही के दिन 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी दी गई थी, या यूं कहें कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ये पहले नायक थे, जिनके विद्रोह से निकली चिंगारी ने पूरे उत्तर भारत को आग के शोले में तब्दील कर दिया था। दिल्ली लाशों से अटी पड़ी थी। डरे-सहमे ब्रिटिश अफसरों ने रातों-रात मंगल पांडेय को फांसी पर लटका दिया था और हजारों दमनकारी कानून सिर्फ इसलिए बना दिए थे ताकि दोबारा कोई मंगल पांडेय पैदा ही ना हो सके।

मंगल पांडे का जन्म उत्तर भारत में पूर्वी उत्तर प्रदेश के नगवा, बलिया में दिवाकर पांडे के परिवार में हुआ था। जन्म से ही सनातन धर्म पर उनका बहुत विश्वास था। उनके अनुसार सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ था। 1849 में पांडे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की आर्मी में शामिल हुए। कहा जाता है की किसी ब्रिगेड के द्वारा उनकी आर्मी में भर्ती की गयी थी। 34 बंगाल थलसेना की कंपनी में उन्हें 6ठी कंपनी में शामिल किया गया, मंगल पांडे का ध्येय बहोत ऊँचा था, वे भविष्य में एक बड़ी सफलता हासिल करना चाहते थे। 1850 के मध्य में उन्हें बैरकपुर की रक्षा टुकड़ी में तैनात किया गया। तभी भारत में एक नयी रायफल का निर्माण किया गया और मंगल पांडे चर्बी युक्त हथियारों पर रोक लगाना चाहते थे। ये अफवाह फ़ैल गयी थी की लोग हथियारों को चिकना बनाने के लिए गाय या सूअर के मांस का उपयोग करते है, इसी वजह से हिंदुओं और मुस्लिमों में फूट पड़ने लगी थी।

विद्रोह का प्रारम्भ एक बंदूक की वजह से हुआ। सिपाहियों को पैटऱ्न 1853 एनफ़ील्ड बंदूक दी गयी, जो कि 0.577 कैलिबर की बंदूक थी तथा पुरानी और कई दशकों से उपयोग मे लायी जा रही ब्राउन बैस के मुकाबले मे शक्तिशाली और अचूक थी। नयी बंदूक मे गोली दागने की आधुनिक प्रणाली (प्रिकशन कैप) का प्रयोग किया गया था, परन्तु बंदूक में गोली भरने की प्रक्रिया पुरानी थी। नयी एनफ़ील्ड बंदूक भरने के लिये कारतूस को दांतों से काट कर खोलना पडता था और उसमे भरे हुए बारुद को बंदूक की नली में भर कर कारतूस को डालना पडता था। कारतूस का बाहरी आवरण मे चर्बी होती थी जो कि उसे नमी अर्थात पानी की सीलन से बचाती थी।

सिपाहियों के बीच अफ़वाह फ़ैल चुकी थी कि कारतूस मे लगी हुई चर्बी सुअर और गाय के मांस से बनायी जाती है। यह हिन्दू और मुसलमान सिपाहियों दोनो की धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध था। ब्रितानी अफ़सरों ने इसे अफ़वाह बताया और सुझाव दिया कि सिपाही नये कारतूस बनाये जिसमे बकरे या मधुमक्क्खी की चर्बी प्रयोग की जाये। इस सुझाव ने सिपाहियों के बीच फ़ैली इस अफ़वाह को और पुख्ता कर दिया। दूसरा सुझाव यह दिया गया कि सिपाही कारतूस को दांतों से काटने की बजाय हाथों से खोलें। परंतु सिपाहियों ने इसे ये कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वे कभी भी नयी कवायद को भूल सकते हैं और दांतों से कारतूस को काट सकते हैं।

तत्कालीन ब्रितानी सेना प्रमुख (भारत) जार्ज एनसन ने अपने अफ़सरों की सलाह को दरकिनार हुए इस कवायद और नयी बंदूक से उत्पन्न हुई समस्या को सुलझाने से मना कर दिया।

20 मार्च 1857 को सैनिकों को एक नए प्रकार के कारतूस  दिए गए। इन कारतूसों को दांतों से दबाकर खोला जाता था, ये गाय और सूअर की चर्बी से चिकने किये गए थे, ताकि हिन्दू और मुस्लिम सैनिक धर्म के प्रति अनुराग छोड़ कर, धर्म विमुख हों।

29 मार्च सन 1857 को नए कारतूस का प्रयोग करवाया गया। मंगल पण्डे ने आज्ञा मानने से मना कर दिया और धोखे से धर्म भ्रष्ट करने की कोशिश के खिलाफ उन्हें भला बुरा कहा, इस पर अंग्रेज अफसर ने सेना को हुक्म दिया की उसे गिरफतार किया जाये लेकिन सेना ने हुक्म नहीं माना। पलटन के सार्जेंट हडसन स्वंय मंगल पांडे को पकड़ने आगे बढ़ा तो, पांडे ने उसे गोली मार दी। तब लेफ्टीनेंट आगे बड़ा तो उसे भी पांडे ने गोली मार दी। मौजूद अन्य अंग्रेज सिपाहियों नें मंगल पांडे को घायल कर पकड़ लिया। उन्होने अपने अन्य साथियों से उनका साथ देने का आह्वान किया। किन्तु उन्होने उनका साथ नहीं दिया।

उन पर मुकदमा (कोर्ट मार्शल) चलाकर 6 अप्रैल 1857 को मौत की सजा सुना दी गई। 18 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी की सजा मिलनी थी। किंतु इस निर्णय की प्रतिक्रिया विकराल रूप न ले सके, इस रणनीति के तहत ब्रिटिश सरकार ने मंगल पांडे को दस दिन पूर्व ही 8 अप्रैल सन 1857 को फांसी दे दी।

मंगल पांडे द्वारा लगायी गयी चिनगारी बुझी नहीं। एक महीने बाद ही 10 मई सन 1857 को मेरठ की छावनी में विप्लव (बगावत) हो गया। यह विप्लव देखते ही देखते पूरे उत्तर भारत में छा गया और अंग्रेजों को स्पष्ट संदेश मिल गया कि अब भारत पर राज्य करना आसान नहीं है।

भारत में, मंगल पांडे एक महान क्रांतिकारी के नाम से जाने जाते हैं। जिन्होंने ब्रिटिश कानून का विरोध किया। भारत सरकार द्वारा 1984 में उनके नाम के साथ ही उनके फोटो का एक स्टेम्प भी जारी किया। वे पहले स्वतंत्रता क्रांतिकारी थे जिन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश कानून का विरोध किया था। मंगल पांडे चर्बी युक्त कारतूसो के खिलाफ थे। वे भली-भांति जानते थे कि ब्रिटिश अधिकारी, हिन्दू सैनिको और ब्रिटिश सैनिको में भेदभाव करते थे। इन सब से ही परेशान होकर उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों से लड़ने का बीड़ा उठाया। उन्होंने आज़ादी की लड़ाई की चिंगारी भारत में लगाई थी जिसने बाद में एक भयंकर रूप धारण कर लिया था। और अंत में भारतीयों से हारकर अंग्रेजो को भारत छोड़ना ही पड़ा।

शहीदो के बारे में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर-

     “अन्धा चकाचौंध का मारा
       क्या जाने इतिहास बेचारा।
       जो चढ़ गए पुष्प वेदी पर 
       लिए बिना गर्दन का मोल 
       कलम आज उनकी जय बोल।।

शुक्रवार से ‘भारतीय नववर्ष’ प्रारम्भ

अनुज द्विवेदी 

सुबह का सूर्य उगते ही भारतीय नव वर्ष प्रारंभ हो जायेगा। कल विक्रमी संवत 2072 समाप्त हो जायेगा और चैत्र महीना शुरू हो जायेगा। भारतीय नव वर्ष का पहला दिन यानि सृष्टि का आरम्भ दिवस, युगाब्द और विक्रम संवत जैसे प्राचीन संवत का प्रथम दिन, श्रीराम एवं युधिष्ठिर का राज्याभिषेक दिवस, माँ दुर्गा की साधना चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस।

वास्तव में ये वर्ष का सबसे श्रेष्ठ दिवस है। हिन्दू नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। ब्रह्मपुराण के अनुसार, पितामह ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टिनिर्माण प्रारम्भ किया था। इसीलिये यह सृष्टि का प्रथम दिन है। इसकी काल गणना बड़ी प्राचीन है।

सृष्टि के प्रारम्‍भ से अब तक 1 अरब, 95 करोड़, 58 लाख, 85 हजार, 111 वर्ष बीत चुके है। यह गणना ज्‍योतिष विज्ञान के द्वारा निर्मित है। आधुनिक वैज्ञानिक भी सृष्टि की उत्‍पत्ति का समय एक अरब वर्ष से अधिक बता रहे है। अपने देश में कई प्रकार की कालगणना की जाती है, जैसे- युगाब्‍द (कलियुग का प्रारम्‍भ), श्री कृष्‍ण संवत्, शक संवत् आदि है।

हिन्दुशास्त्रानुसार इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारम्भ गणितीय और खगोलशास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है। प्रतिपदा हमारे लिये क्‍यों महत्‍वपूर्ण है, इसके सामाजिक एवं ऐतिहासिक सन्‍दर्भ निम्न हैं-

1. इसी तिथि को रेवती नक्षत्र में विष्कुम्भ योग में दिन के समय भगवान के आदि अवतार मत्स्य रुप का प्रादुर्भाव भी माना जाता है।

2. युगों में प्रथम सत्ययुग का प्रारम्भ भी इसी तिथि को हुआ था.

3. मर्यादा पुरूषोत्‍तम श्रीराम का राज्याभिषेक।

4. माँ दुर्गा की उपासना का नवरात्रि व्रत प्रारम्भ।

5. युगाब्‍द (युधिष्‍ठिर संवत्) का आरम्भ।

6. उज्‍जयिनी सम्राट- विक्रामादित्‍य द्वारा विक्रमी संवत् प्रारम्भ।

7. शालिवाहन शक् संवत्

8. महर्षि दयानंद द्वारा आर्य समाज की स्थापना।

किसानो के लिये यह नव वर्ष के प्रारम्भ का शुभ दिन माना जाता है।

दिल्ली: उद्योगपति के बेटे के शौक ने ली एक युवक की जान

Bureau@Navpravah.com
नार्थ दिल्ली के सिविल लाइन्स में एक अमीर पिता के नाबालिग बेटे ने प्राइवेट कंपनी में कार्यरत अधिकारी सिद्धार्थ को अपनी तेज रफ़्तार मर्सिडीज़ गाड़ी से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। इस दुर्घटना के बाद से दिल्ली पुलिस भी सवालों के घेरे में है।
मृत सिद्धार्थ की बहन शिल्पा ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के 24 घंटे बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की है, अगर घटना के वक़्त आरोपी नशे में रहा हो तो हमें कैसे पता चलेगा। हमें कानून का ज्ञान नहीं लेकिन आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। सिद्धार्थ के पिता ने कहा कि “हमने किसी और के शौक के चलते अपना बेटा खो दिया। नाबालिग से ज्यादा उसका वो पिता दोषी है, जिसने गाड़ी अपने बेटे को सौंपी। नाबालिग का पिता उतना ही दोषी है।
पहले पुलिस ने नाबालिग को गिरफ्तार किया लेकिन शाम को उसकी जमानत हो गई। पिता अभी भी गिरफ्त में ही है। पता चला है कि हादसे के वक़्त कार में 8 लड़के सवार थे।
सूत्रों के अनुसार सिद्धार्थ शर्मा एक निजी कम्पनी में मार्केटिंग अधिकारी थे और अमरीकी स्ट्रेटफोर्ड विश्वविद्यालय से सम्बद्ध एक संस्थान से व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी कर रहे थे। गत सोमवार की रात जब उनके एक दोस्त ने सिविल लाइन्स रेस्तरां के पास छोड़ा तभी ज़ेबरा क्रासिंग से सड़क पार कर रहे सिद्धार्थ को तेज रफ़्तार मर्सिडीज़ कार ने टक्कर मारी।
DCP मधुर वर्मा ने बताया कि मृतक के परिजनों की दरयाफ्त पर केस को दर्ज किया गया है और मामले की तफ्तीश जारी है। कार को जब्त करने के बाद ही आरोपी की गिरफ्तारी की जा सकी है। पूछताछ के बाद ही मामले में आगे बढ़ा जा सकता है।
घटना स्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार घटना के बाद ही कार में सवार सभी लड़के वहां से कार को छोड़ भाग गये। पुलिस ने कार को जब्त कर लिया है। पुलिस की शुरूआती जांच से किशोर के कार चलाने की बात सामने आई है। कार सिविल लाइन्स स्थित ओबेराय अपार्टमेन्ट के फ्लैट नम्बर B-52 में रहने वाले व्यापारी मनोज अग्रवाल के नाम पर पंजीकृत है।
पुलिस का अंदेशा है कि मौजमस्ती करने के उद्देश्य से निकले किशोर जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है, के द्वारा ये दुर्घटना हुई है।
सिद्धार्थ शर्मा और उनका परिवार मूलतः मुंबई महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। कुछ ही साल पहले वो दिल्ली शिफ्ट हुए थे। सिविल लाइन्स के ही यमुना मार्ग के वाइट हाउस अपार्टमेंट में वो अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में पिता हेमराज, माँ मधु के अलावा पत्नी सोनम हैं। दो साल पहले सिद्धार्थ ने भाभा एटॉमिक सेंटर से बतौर कंसल्टेंट नौकरी छोड़ी थी।

बसपा सांसद की बहू हिमांशी की मर्डर मिस्ट्री, तफ़्तीश जारी

आनंद द्विवेदी
मामला उत्तर प्रदेश का है जहां BSP सांसद नरेंद्र कश्यप की बहू हिमान्शी कश्यप की बुधवार को सि‍र में गोली लगने के कारण मृत्यु हो गई। कारणों की जानकारी नहीं मिली लेकिन जानकारी के मुताबिक़ वारदात उनके कविनगर वाले घर में हुई। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस ने घटना स्थल पर पहुँच कर तफ़्तीश जारी की।
सूत्रों के मुताबिक़ गोली लगने के बाद हिमांशी को फ़ौरन अस्पताल ले जाया गया लेकिन रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो गई। विगत 3 साल पहले हिमांशी और नरेंद्र कश्यप के बड़े पुत्र सागर का विवाह हुआ था। हिमांशी बसपा से ही मंत्री रह चुके हीरालाल कश्यप की बेटी थी।
हिमांशी के पिता हीरालाल ने बेटी की हत्या पर दहेज़ प्रताड़ना को कारण बताते हुए कहा कि उनकी बेटी को दहेज़ के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। 25 मार्च को जब वह घर आई थी तो उसने बताया था कि दहेज की मांग को लेकर उसकी पिटाई की जाती है।
उसका पति सागर भी मारपीट करता था। उससे फॉरच्यूनर गाड़ी की डिमांड की जा रही थी। कुछ दिन पहले सागर ने उसे इतना मारा था कि हिमांशी के कान में गंभीर चोट आई थी और उसका इलाज भी चल रहा था। पुलिस के अनुसार शुरुआत में मामला घरेलू कलह का लग रहा है। हिमांशी ने खुद को गोली मारी या परिवार में से किसी ने, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। गोली जिस रिवाल्वर से चली वो बसपा सांसद नरेंद्र कश्यप के नाम पर लाइसेंस रजिस्टर्ड है।

सूखे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार

आनंद द्विवेदी
ब्यूरो
देश के सर्वोच्च न्यायिक प्रहरी सुप्रीम कोर्ट ने 9 राज्यों में सूखे के हालात पर केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगा दी है। कोर्ट ने बुधवार को कड़े शब्दों में कहा “आप (केंद्र) राज्यों की प्रॉब्लम्स को लेकर आंखें बंद नहीं कर सकते हैं। इससे निपटने के लिए जरूरी कार्यवाही करनी ही होगी। इस समय देश के 9 राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं। आप इनसे कैसे मुंह मोड़ सकते हैं। सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।”
कोर्ट ने ये भी पूछा कि सूखे से किसानों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार क्या कदम उठा रही है। इसके साथ ही मनरेगा को लेकर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई है। एक समाजसेवी संस्था स्वराज अभियान ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए कोर्ट को दखल देने की अपील की थी, जिसपर कोर्ट ने संज्ञान लिया। पहले भी कोर्ट ने 12 राज्यों में सूखे पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के रवैए पर सवाल किये थे और इस याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट इन राज्यों में सूखे से निपटने के लिए राज्य सरकार के साथ केंद्र को भी ऑर्डर दिया जाए।
केंद्र सरकार के अनुसार, वो राज्यों को हर संभव मदद देने के लिए तैयार हैं। अगर कोई राज्य किसी इलाके को सूखा ग्रस्त होने की घोषणा करता है तो तुरंत हम उस जगह मनरेगा के तहत 100 दिन के काम की जगह 150 दिन के काम का पैसा रिलीज कर देते हैं।
महाराष्ट्र राज्य के ठाणे प्रशासन ने सूखे से निपटने के लिए टोल फ्री नंबर 1077 जारी किया है। पानी से सम्बंधित किसी भी तरह की समस्या के लिए कोई भी व्यक्ति इस नंबर पे फोन कर सकता है। राज्य के कई इलाकों में तालाब, नल के आसपास धारा 144 लगा दी गई है। लातूर के  हालत बद से बदतर होते जा रहे हैं, जहाँ लोग एक लीटर पानी के लिए भी तरस रहे हैं।
देश के अन्य राज्यों आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना राजस्थान, गुजरात, छतीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में भी सूखे जैसे हालत उत्पन्न हो चुकी है। बुंदेलखंड में तो बन्दूक के साए में पानी की रखवाली करने जैसे मामले सामने आ रहे हैं

नैनीताल हाईकोर्ट ने केंद्र को दिया समय, 18 अप्रैल को होगी सुनवाई

नारायण सिंह
ब्यूरो – उत्तराखं
उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने और केंद्र के लेखानुदान अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नैनीताल हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोजफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने अपना पक्ष रखने के लिए केंद्र की समय बढ़ाने की मांग को मान लिया।
कोर्ट ने कहा कि अब केंद्र व हरीश रावत 12 अप्रैल को इस मामले में सारे दस्तावेज हाई कोर्ट में दाखिल करेंगे। साथ ही इनका आपस में आदान-प्रदान भी होगा। 18 अप्रैल को इस मामले में फिर से सुनवाई होगी।
केंद्र की ओर से पैरवी करते हुए अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। केंद्र ने हरीश रावत की संशोधन की अर्जी पर जवाब के लिए फिर से समय मांगा। इस पर हरीश रावत की ओर से अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने समय देने पर कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि जानबूझकर मामले को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पीठों का फैसला है कि जितनी देर में 356 पर फैसला आएगा, हार्स ट्रेडिंग की उतनी ही संभावना बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि केद्र राष्ट्रपति शासन हटाकर भाजपा की सरकार बनाने की फिराक मे है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगली सुनवाई की अवधि तक केंद्र सरकार उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाकर सरकार बनाने का प्रयास न करे। इस पर उन्होंने कोर्ट से आदेश देने को कहा।

मनी’ लेने में ही व्यस्त हैं ममता- नरेंद्र मोदी

Bureau@Navpravah.com
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर बरसे। अलीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि माँ, माटी और मानुष के नाम पर वोट लेने वाले आजकल सिर्फ मनी लेने में ही व्यस्त हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि दीदी का ध्यान सिर्फ बयानबाज़ी पर ही रहता है। केंद्र सरकार विकास के लिए कोई बैठक करे तो उसमे दीदी का कोई इंटरेस्ट नहीं होता। दीदी को मोदी से दिक्कत हो सकती है लेकिन केंद्र सरकार से कैसी दिक्कत!
मोदी ने आगे कहा कि ममता दीदी सोनिया गांधी से मिलने के लिए समय निकाल लेती हैं और फ़ोटो खिंचा के शेयर करने के लिए भी समय मिल जाता है लेकिन विकास जैसे मुद्दे पर होने वाले चर्चे में इन्हें समय नहीं मिलता। और जब जनता विकास पर प्रश्न खड़ा करती है तो ममता और लेफ्ट पार्टी आपस में ब्लेम गेम खेलती हैं।
मोदी ने शारदा घोटाले के साथ ही गिरीश पार्क फ्लाईओवर के गिरने की घटना का भी ज़िक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि गोरखा देश की शान हैं, लेकिन दीदी ने उन्हें भी नहीं छोड़ा। उनको भी हतोत्साहित किया।

माल्या को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा 10 दिन में दें संपत्ति का व्योरा

Bureau@Navpravah.com
बैंकों का 9000 करोड़ रूपए का सफाया करने वाले उद्योगपति विजय माल्या पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि अगली सुनवाई में माल्या भी उपस्थित रहें। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि माल्या एक बड़ी रकम भी जमा कराएं, जिससे बैंकों से बातचीत का रास्ता स्पष्ट हो सके।
विजय माल्या पर कानूनी शिकंजा कसता ही जा रहा है। गुरूवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने माल्या की गतिविधियों पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि आगामी 10 दिनों में माल्या अपनी संपत्ति का सम्पूर्ण व्योरा दें। कोर्ट के निर्देशानुसार अब माल्या को न सिर्फ अपना बल्कि पत्नी और बच्चों की संपत्ति का भी व्योरा देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।
वहीं, किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज देने वाले बैंकों ने  स्पष्ट किया है कि लोन चुकाने के लिए और भी बेहतर ऑफर दिया जाए। इस पर किंगफिशर के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कर्ज चुकाने का नया प्रस्ताव बनाने के लिए दो हफ्तों का समय मांगा है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है।

केंद्र सरकार को नैनीताल उच्च न्यायालय का झटका

नारायण सिंह
उत्तराखंड
उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने और केंद्र सरकार के लेखानुदान अध्यादेश लाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर दूसरे दिन भी सुनवाई जारी है।
बता दें कि बीते रोज इस मामले में नैनीताल उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने सुनवाई की। ये दोनों याचिकाएं निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरफ से दाखिल की गई हैं। याचिकाओं के पक्ष में उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में लंबी जिरह की।
अदालत ने तकरीबन चार घंटें दलीलें सुनीं। इस बीच, खंडपीठ ने लेखानुदान निरस्त करने की रावत की याचिका पर केंद्र सरकार का समय देने का अनुरोध खारिज कर दिया। केंद्र ने इसके लिए कम से कम तीन दिन का वक्त देने की मांग की थी।