मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर स्थित एक अपार्टमेन्ट में जब पुलिस ने एक अपहृत किशोरी की तलाश में छापा मारा तो वहाँ कुछ और ही मामला सामने आया। पुलिस ने अपार्टमेन्ट में चल रहे एक बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया। तानसेन रोड स्थित न्यू साकेत नगर के पराशक्ति अपार्टमेंट के एक फ्लैट से पुलिस ने 3 युवतियों को मुक्त कराया। पुलिस ने रैकेट सरगना पीयूष चौहान और रितेश मलिक को गिरफ्तार भी किया है।
पुलिस ने दावा किया है कि वो माधौगंज से अपहृत एक युवती की तलाश में इस अपार्टमेंट में पहुंची। आरोपियों से लगातार पूछताछ जारी है। एसपी हरिनारायाणचारी मिश्र के अनुसार 1 अप्रैल को एक किशोरी को बहला फुसलाकर अपहरण का मामला परिजनों ने माधौगंज थाने में पंजीकृत करवाया था जिसके सम्बन्ध में पुलिस ने कार्यवाही की। किशोरी के संबंधो की तफ्तीश के दौरान पता चला कि साकेत नगर के पराशक्ति अपार्टमेंट में देह व्यापार चलाया जा रहा है।
पुलिस को ये भी पता चला है कि आरोपियों के चंगुल में कुछ और भी युवतियां हैं, जिनसे देह व्यापार के कई अड्डे चलवाए जा हे थे। आरोपियों की एक महीने की कमाई पचास से साठ हजार तक की थी। किशोरी को जब पुलिस ने भरोसा दिलाया कि वो अब पुलिस के पास एकदम सुरक्षित है तब उसने पीयूष की करतूतों का खुलासा किया। आरोपी लड़कियों को बहला फुसलाकर सेक्स रैकेट का हिस्सा बना देते थे और फिर उनको नुक्सान पहुंचाने की धमकी देकर अपना काम करवाते रहते थे। इनके कब्जे से पुलिस ने कानपुर, गोरखपुर तक की लड़कियों को मुक्त कराया है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कई पॉश कॉलोनियों में फ्लैट ले रखे हैं, जहां से ये सेक्स रैकेट चलाते हैं। पुलिस ने ये भी बताया कि पीयूष की शादी हो चुकी है, जिससे उसके बच्चे भी हैं। उसका परिवार पिता समेत डीडी नगर में रहता है लेकिन पीयूष काफी समय से घर नहीं गया है। पुलिस मोबाइल के माध्यम से इसके अड्डों की व इसके ग्राहकों की भी तलाश कर रही है।
बिहार के बक्सर जिले में एक प्रेमी युगल अपनों के षड्यंत्र का ही शिकार हो गया। प्रेम प्रसंग के चलते जब घरवालों ने शादी के लिए मंजूरी नहीं दी तो दोनों घर से भाग निकले, जिससे नाखुश लड़की के घरवालों ने अपहरण की एफआईआर दर्ज करवाई और बाद में लड़के के दादा की हत्या कर दी।
अपने परिवारों की बढ़ती रंजिश को देखकर दोनों युगल ने न्यायालय में सरेंडर कर दिया। सी.जे.एम. को दिए अपने बयान में लड़की ने प्रेमी के साथ स्वेच्छा से जाने की बात को स्वीकार किया। दोनों ने बालिग़ होने का हवाला देते हुए शादी की और पत्नी-पति के रूप में रहने की स्वतंत्रता की दरयाफ्त भी की।
दोनों के बयान लेकर कोर्ट ने अपहरण के आरोप में युवक को फिलहाल जेल भेज दिया और पुलिस की अभिरक्षा में लड़की को भेज दिया है।
प्रेमी जोड़े के भाग जाने के बाद लड़की के पिता वीरेन्द्र पासी ने युवक के दादा घुघली पासी की हत्या भी कर दी थी। अपने दादा की मौत की खबर पाकर युवक अजीत ने सपत्नीक न्यायालय में सरेंडर करने का कदम उठाया।
आगामी विधासभा चुनाव के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी ने पांच प्रदेशों की कमान बदल दी है। उत्तर प्रदेश और पंजाब जहां अगले वर्ष विधानसभा का चुनाव होने वाला है वहाँ भी बीजेपी ने अध्यक्ष बदल दिया है।
कुशवाहा समाज से सम्बन्ध रखने वाले केशव प्रसाद मौर्या को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पंजाब में कमान दी गई है केंद्रीय मंत्री विजय सांपला को। केशव प्रसाद इलाहाबाद के फूलपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं।
विजय सांपला होशियारपुर से सांसद हैं। सांपला ने कमल शर्मा को रिप्लेस किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस परिवर्तन से प्रदेश की राजनीति में भारी बदलाव होंगे। इसके अलावा बीएस येदुरप्पा कर्नाटक के, डॉ. के लक्ष्मण तेलंगाना और तापिर गाव को अरुणाचल में बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है।
केशव प्रसाद मौर्या को उत्तर प्रदेश का बीजेपी अध्यक्ष बनाए जाते ही राजनीतिक गलियारे चर्चा तेज़ हो गई है। माना यह जा रहा है कि केशव के अध्यक्ष बनने से पिछड़ी जातियों को एकजुट करने में आसानी होगी और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका लाभ मिल सकता है। हालाँकि लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कार्यकाल ख़त्म हो गया था, जिसके बाद कई नेता अध्यक्ष बनने की लाइन में थे लेकिन केंद्र ने केशव पर ही मुहर लगाई।
पाकिस्तान में असुरक्षित माहौल को देखते हुए अमेरिका ने देशवासियों को सुझाव दिया है कि वे पाकिस्तान की गैर ज़रूरी यात्राओं से बचें। पाकिस्तान में आए दिन हिंसा की खबरों के मद्देनज़र अमेरिकी प्रशासन ने अपने नागरिकों को यह राय दी है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने यात्रा चेतावनी में यह बात कही है कि नागरिक अनावश्यक यात्राओं से बचें। गौरतलब है कि आए दिन हिंसक घटनाओं से पाकिस्तान में खौफ का माहौल है। इसलिए विदेश मंत्रालय ने इस सन्दर्भ में लोगों को सचेत किया है।
इसी सन्दर्भ में विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘पाकिस्तान में साम्प्रदायिक हमलों समेत बड़े स्तर पर आतंकवादी हमले हो रहे हैं। साथ ही कई विदेशी एवं स्थानीय आतंकवादी समूह देश भर में अमेरिकी नागरिकों के लिए खतरा बने हुए है।’
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून लागू किया जा रहा है, जोकि अल्पसंख्यक समुदायों के लिए खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में पाकिस्तान में यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। पिछले दिनों कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर हत्याएं की गई हैं।
अर्द्धकुंभ के सातवें स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं ने सदानीर गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। सातवां स्नान श्रद्धालुओं के लिए अधिक महत्वपूर्ण भी है, क्योंकि आज ही से हिन्दू नववर्ष का भी शुभारंभ हुआ है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान के बाद दान भी किया।
नव संवत्सर और अर्द्धकुंभ के सातवें स्नान पर्व के मौके पर हरकी पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं ने डुबकी लगानी शुरू कर दी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया श्रद्धालुओं की संख्या हरकी पैड़ी पर अधिक होने लगी।
सातवें स्नान पर विगत छह स्नानों की अपेक्षाकृत भीड़ कुछ अधिक रही। आज से ही विक्रम संवत 2073 की शुरुआत हो चुकी है। अब अगले साल 28 मार्च को विक्रम संवत 2073 का समापन होगा। स्नान के दौरान भीड़ अधिक होने से पुलिस प्रशासन को व्यवस्था संभालने में थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
मेला पर्व स्नान को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस की ओर से चाकचौबंद व्यवस्था की गई है। सुबह के समय मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन, मेला आईजी जीएस मर्तोलिया ने हरकी पैड़ी व अन्य मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया।
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर ट्रस्ट ने 400 साल पुरानी परंपरा को बदलने की इजाज़त दे दी है। ट्रस्ट ने मंदिर में महिलाओं को भी पूजा करने की इजाज़त दी है। पिछले 400 सालों में ऐसा पहली बार होगा जब महिलाएं मंदिर में पूजा करती नज़र आएंगी।
गौरतलब है कि भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्षा तृप्ति देसाई की अगुवाई में महिलाएं पूजा करने के लिए मंदिर पहुँच रही हैं। जिसकी जानकारी मिलने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि अगर महिलाएं आती हैं तो उन्हें पूजा करने से नहीं रोका जाएगा।
इस सन्दर्भ में मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी सायाराम बनकर ने स्पष्ट किया कि तृप्ति को पूजा करने दिया जाएगा। अब महिलाएं भी चबूतरे पर जाकर शनि देव की पूजा कर सकती हैं। हालाँकि इसके लिए भूमाता ब्रिगेड को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी, लेकिन अब जाकर उन्हें इस मामले में सफलता मिली।
शनि शिंगणापुर मंदिर में गत वर्ष 28 नवम्बर को यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक युवती ने परंपरा को तोड़ते हुए शनि देव के चबूतरे पर चढ़ गई थी। इसके बाद काफी विवाद हुआ और दूसरे दिन मंदिर प्रशासन ने मंदिर का शुद्धिकरण करवाया था। मंदिर प्रशासन के इस कृत्य का महिला संगठनों के काफी आलोचना की।
ग्रीष्मकाल में पेयजल की संभावित समस्याओं के दृष्टिगत राज्यपाल कृष्णकांत पाल ने आज सचिवालय में पेयजल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश में पेयजल आपूर्ति संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
राज्यपाल ने प्रदेश में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। जनता को पीने का पानी उपलब्ध करवाना सरकार व शासन का अहम दायित्व है।
उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में पेयजल संबंधी समस्याओं से गंभीर रूप से प्रभावित रहे क्षेत्रों को चिन्हित कर उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए। राज्यपाल ने सचिव पेयजल आर.के. सुधांशु को जिलाधिकारियों के निरंतर सम्पर्क में रहकर स्थिति पर नजर रखने के निर्देश देते हुए कहा कि जनसामान्य को पेयजल उपलब्ध करवाने में धन की कमी नहीं आनी चाहिए।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि जहां टैंकरों व अन्य वैकल्पिक साधनों से पानी पहुंचाया जाना है, वहां इसकी व्यवस्था यथाशीघ्र सुनिश्चित कर ली जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में दूसरे चरण के मतदान से पूर्व चुनाव प्रचार के पहले नीलाचर पर्वत पर स्थित भगवती मां कामाख्या देवी की पूजा की। प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह पूजा करने के बाद ही मुहीम को आगे बढ़ाया। भगवती की पूजा-अर्चना करने के लिए प्रधानमंत्री कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर गए।
मंदिर के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री ने दुर्गा मां और उनके विभिन्न अवतारों की नवरात्रि के पहले दिन पूजा की। मोदी ने मंदिर के पास उनसे मिलने के लिए रुकी भीड़ का अभिवादन भी किया। भीड़ के पास जाकर उन्होंने लोगों से हाथ मिलाया और बात की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 अप्रैल को हुए प्रथम चरण के मतदान के लिए भी प्रचार कर चुके हैं और आगामी 11 अप्रैल को होने वाले 61 निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे एवं अंतिम चरण के लिए आज प्रचार करेंगे। मोदी आज रोहा, रंगिया, सोरभोग, और गुवाहाटी में चुनाव प्रचार करेंगे। प्रधानमंत्री आज शाम को चुनाव प्रचार समाप्त कर दिल्ली वापस लौट जाएंगे।
ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ जंग और आजादी का ख्याल आते ही कई नाम और चेहरे बरबस याद आ जाते हैं। एक लंबी लड़ाई, हजारों कुर्बानियां और तमाम जुल्मों-सितम के बाद हिन्दुस्तान 15 अगस्त 1947 की आधी रात अंग्रेजों से मुक्त हो गया था। एक लंबे समय से गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतीय समाज को खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला तो हर ओर बस जश्न का माहौल था।
हर कोई आजादी के मतवालों को याद कर रहा था, जिनके बलिदान से भारतीयों को मुक्ति मिली थी। मंगल पांडेय भी उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक थे। आज उनका शहादत दिवस है,आज ही के दिन 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी दी गई थी, या यूं कहें कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ये पहले नायक थे, जिनके विद्रोह से निकली चिंगारी ने पूरे उत्तर भारत को आग के शोले में तब्दील कर दिया था। दिल्ली लाशों से अटी पड़ी थी। डरे-सहमे ब्रिटिश अफसरों ने रातों-रात मंगल पांडेय को फांसी पर लटका दिया था और हजारों दमनकारी कानून सिर्फ इसलिए बना दिए थे ताकि दोबारा कोई मंगल पांडेय पैदा ही ना हो सके।
मंगल पांडे का जन्म उत्तर भारत में पूर्वी उत्तर प्रदेश के नगवा, बलिया में दिवाकर पांडे के परिवार में हुआ था। जन्म से ही सनातन धर्म पर उनका बहुत विश्वास था। उनके अनुसार सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ था। 1849 में पांडे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की आर्मी में शामिल हुए। कहा जाता है की किसी ब्रिगेड के द्वारा उनकी आर्मी में भर्ती की गयी थी। 34 बंगाल थलसेना की कंपनी में उन्हें 6ठी कंपनी में शामिल किया गया, मंगल पांडे का ध्येय बहोत ऊँचा था, वे भविष्य में एक बड़ी सफलता हासिल करना चाहते थे। 1850 के मध्य में उन्हें बैरकपुर की रक्षा टुकड़ी में तैनात किया गया। तभी भारत में एक नयी रायफल का निर्माण किया गया और मंगल पांडे चर्बी युक्त हथियारों पर रोक लगाना चाहते थे। ये अफवाह फ़ैल गयी थी की लोग हथियारों को चिकना बनाने के लिए गाय या सूअर के मांस का उपयोग करते है, इसी वजह से हिंदुओं और मुस्लिमों में फूट पड़ने लगी थी।
विद्रोह का प्रारम्भ एक बंदूक की वजह से हुआ। सिपाहियों को पैटऱ्न 1853 एनफ़ील्ड बंदूक दी गयी, जो कि 0.577 कैलिबर की बंदूक थी तथा पुरानी और कई दशकों से उपयोग मे लायी जा रही ब्राउन बैस के मुकाबले मे शक्तिशाली और अचूक थी। नयी बंदूक मे गोली दागने की आधुनिक प्रणाली (प्रिकशन कैप) का प्रयोग किया गया था, परन्तु बंदूक में गोली भरने की प्रक्रिया पुरानी थी। नयी एनफ़ील्ड बंदूक भरने के लिये कारतूस को दांतों से काट कर खोलना पडता था और उसमे भरे हुए बारुद को बंदूक की नली में भर कर कारतूस को डालना पडता था। कारतूस का बाहरी आवरण मे चर्बी होती थी जो कि उसे नमी अर्थात पानी की सीलन से बचाती थी।
सिपाहियों के बीच अफ़वाह फ़ैल चुकी थी कि कारतूस मे लगी हुई चर्बी सुअर और गाय के मांस से बनायी जाती है। यह हिन्दू और मुसलमान सिपाहियों दोनो की धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध था। ब्रितानी अफ़सरों ने इसे अफ़वाह बताया और सुझाव दिया कि सिपाही नये कारतूस बनाये जिसमे बकरे या मधुमक्क्खी की चर्बी प्रयोग की जाये। इस सुझाव ने सिपाहियों के बीच फ़ैली इस अफ़वाह को और पुख्ता कर दिया। दूसरा सुझाव यह दिया गया कि सिपाही कारतूस को दांतों से काटने की बजाय हाथों से खोलें। परंतु सिपाहियों ने इसे ये कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वे कभी भी नयी कवायद को भूल सकते हैं और दांतों से कारतूस को काट सकते हैं।
तत्कालीन ब्रितानी सेना प्रमुख (भारत) जार्ज एनसन ने अपने अफ़सरों की सलाह को दरकिनार हुए इस कवायद और नयी बंदूक से उत्पन्न हुई समस्या को सुलझाने से मना कर दिया।
20 मार्च 1857 को सैनिकों को एक नए प्रकार के कारतूस दिए गए। इन कारतूसों को दांतों से दबाकर खोला जाता था, ये गाय और सूअर की चर्बी से चिकने किये गए थे, ताकि हिन्दू और मुस्लिम सैनिक धर्म के प्रति अनुराग छोड़ कर, धर्म विमुख हों।
29 मार्च सन 1857 को नए कारतूस का प्रयोग करवाया गया। मंगल पण्डे ने आज्ञा मानने से मना कर दिया और धोखे से धर्म भ्रष्ट करने की कोशिश के खिलाफ उन्हें भला बुरा कहा, इस पर अंग्रेज अफसर ने सेना को हुक्म दिया की उसे गिरफतार किया जाये लेकिन सेना ने हुक्म नहीं माना। पलटन के सार्जेंट हडसन स्वंय मंगल पांडे को पकड़ने आगे बढ़ा तो, पांडे ने उसे गोली मार दी। तब लेफ्टीनेंट आगे बड़ा तो उसे भी पांडे ने गोली मार दी। मौजूद अन्य अंग्रेज सिपाहियों नें मंगल पांडे को घायल कर पकड़ लिया। उन्होने अपने अन्य साथियों से उनका साथ देने का आह्वान किया। किन्तु उन्होने उनका साथ नहीं दिया।
उन पर मुकदमा (कोर्ट मार्शल) चलाकर 6 अप्रैल 1857 को मौत की सजा सुना दी गई। 18 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी की सजा मिलनी थी। किंतु इस निर्णय की प्रतिक्रिया विकराल रूप न ले सके, इस रणनीति के तहत ब्रिटिश सरकार ने मंगल पांडे को दस दिन पूर्व ही 8अप्रैल सन 1857 को फांसीदे दी।
मंगल पांडे द्वारा लगायी गयी चिनगारी बुझी नहीं। एक महीने बाद ही 10 मई सन 1857 को मेरठ की छावनी में विप्लव (बगावत) हो गया। यह विप्लव देखते ही देखते पूरे उत्तर भारत में छा गया और अंग्रेजों को स्पष्ट संदेश मिल गया कि अब भारत पर राज्य करना आसान नहीं है।
भारत में, मंगल पांडे एक महान क्रांतिकारी के नाम से जाने जाते हैं। जिन्होंने ब्रिटिश कानून का विरोध किया। भारत सरकार द्वारा 1984 में उनके नाम के साथ ही उनके फोटो का एक स्टेम्प भी जारी किया। वे पहले स्वतंत्रता क्रांतिकारी थे जिन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश कानून का विरोध किया था। मंगल पांडे चर्बी युक्त कारतूसो के खिलाफ थे। वे भली-भांति जानते थे कि ब्रिटिश अधिकारी, हिन्दू सैनिको और ब्रिटिश सैनिको में भेदभाव करते थे। इन सब से ही परेशान होकर उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों से लड़ने का बीड़ा उठाया। उन्होंने आज़ादी की लड़ाई की चिंगारी भारत में लगाई थी जिसने बाद में एक भयंकर रूप धारण कर लिया था। और अंत में भारतीयों से हारकर अंग्रेजो को भारत छोड़ना ही पड़ा।
शहीदो के बारे में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर-
“अन्धा चकाचौंध का मारा क्या जाने इतिहास बेचारा। जो चढ़ गए पुष्प वेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल कलम आज उनकी जय बोल।।
सुबह का सूर्य उगते ही भारतीय नव वर्ष प्रारंभ हो जायेगा। कल विक्रमी संवत 2072 समाप्त हो जायेगा और चैत्र महीना शुरू हो जायेगा। भारतीय नव वर्ष का पहला दिन यानि सृष्टि का आरम्भ दिवस, युगाब्द और विक्रम संवत जैसे प्राचीन संवत का प्रथम दिन, श्रीराम एवं युधिष्ठिर का राज्याभिषेक दिवस, माँ दुर्गा की साधना चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस।
वास्तव में ये वर्ष का सबसे श्रेष्ठ दिवस है। हिन्दू नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। ब्रह्मपुराण के अनुसार, पितामह ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टिनिर्माण प्रारम्भ किया था। इसीलिये यह सृष्टि का प्रथम दिन है। इसकी काल गणना बड़ी प्राचीन है।
सृष्टि के प्रारम्भ से अब तक 1 अरब, 95 करोड़, 58 लाख, 85 हजार, 111 वर्ष बीत चुके है। यह गणना ज्योतिष विज्ञान के द्वारा निर्मित है। आधुनिक वैज्ञानिक भी सृष्टि की उत्पत्ति का समय एक अरब वर्ष से अधिक बता रहे है। अपने देश में कई प्रकार की कालगणना की जाती है, जैसे- युगाब्द (कलियुग का प्रारम्भ), श्री कृष्ण संवत्, शक संवत् आदि है।
हिन्दुशास्त्रानुसार इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारम्भ गणितीय और खगोलशास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है। प्रतिपदा हमारे लिये क्यों महत्वपूर्ण है, इसके सामाजिक एवं ऐतिहासिक सन्दर्भ निम्न हैं-
1. इसी तिथि को रेवती नक्षत्र में विष्कुम्भ योग में दिन के समय भगवान के आदि अवतार मत्स्य रुप का प्रादुर्भाव भी माना जाता है।
2. युगों में प्रथम सत्ययुग का प्रारम्भ भी इसी तिथि को हुआ था.
3. मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक।
4. माँ दुर्गा की उपासना का नवरात्रि व्रत प्रारम्भ।
5. युगाब्द (युधिष्ठिर संवत्) का आरम्भ।
6. उज्जयिनी सम्राट- विक्रामादित्य द्वारा विक्रमी संवत् प्रारम्भ।
7. शालिवाहन शक् संवत्
8. महर्षि दयानंद द्वारा आर्य समाज की स्थापना।
किसानो के लिये यह नव वर्ष के प्रारम्भ का शुभ दिन माना जाता है।