मोदी सरकार की दूसरी सालगिरह भारतीय शेयर बाज़ार के लिए भी शुभ दिन साबित हुई। पिछले दो कारोबारी सत्र में सेंसेक्स जहां 1060 अंक चढ़कर बंद हुआ, वहीं निफ्टी भी दो दिनों में 320 अंक चढ़ा। निफ्टी ने आज 8,069 के रिकार्ड स्तर को छुआ।
ट्रेडर्स के लिए आज का दिन अत्यंत खास रहा, क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी साल 2016 की नई ऊंचाई पर बंद हुए हैं। 4 नवंबर 2015 के बाद निफ्टी ने पहली बार 8,000 के रिकार्ड स्तर को छुआ है। आज बीएसई 485 अंक चढ़कर 26,366 अंक पर बंद हुआ। बाज़ार में तेज़ी की असली वजह यह रही कि इंटरनेशनल मार्केट में आज क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज़ी थी। साथ ही कल कैबिनेट में पास हुए गुड्स पॉलिसी और बेहतर मानसून की उम्मीदों की वजह से बाजार पर सकरात्मक असर पड़ा।
मार्गन स्टैनले ने बुधवार को इंडियन मार्केट की रेटिंग इक्वल वेटिंग को सुधार कर ओवरवेट कर दिया है। उधर अमेरिकी मार्केट का हाउसिंग डेटा भी बाजार में तेजी का वजह रहा।
निफ्टी के 50 में से 28 शेयर बढ़त के हरे निशान पर बंद हुए। सबसे ज्यादा एल एंड टी का शेयर 13.89 फीसदी ऊपर बंद हुआ। कल एल एंड टी के तिमाही नतीजे आये थे। आज इंफ्रा शेयरों में जबर्दस्त तेजी देखी गई। वहीं निफ्टी का पीएसयू बैंक इंडेक्स 3.5 फीसदी से ज्यादा बढ़कर बंद हुआ है।
रेटिंग एजेंसी मार्गन स्टैनले ने बाजार का बेस रेट 26,000 रखा है। मोदी सरकार के तीसरे साल कई महत्वपूर्ण सुधार के उम्मीद है। इनमें जीएसटी विधेयक महत्वपूर्ण है। राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या बढ़ने के बाद कई विधेयक पारित होने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
मुंबई के डोम्बिवली में एक केमिकल फैक्ट्री में बड़ा ब्लास्ट हुआ है। धमाके के बाद फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। इस घटना में 3 लोग मारे गए हैं। 150 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। दमकल की 8 गाड़ियाँ मौके पर पहुँचकर आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं।
राहत और बचाव कार्य को शुरू कर दिया गया है। पुलिस का कहना है कि अभी एकदम ठोस रूप से नहीं कहा जा सकता कि आग लगने की असली वजह क्या थी। वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार पहले फैक्ट्री में एक सिलेंडर में धमाका हुआ जिसके बाद अन्य सिलेंडर और बॉयलर भी फट गए। फिलहाल फैक्ट्री में फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने का काम किया जा रहा है।
धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज चार किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। आसपास के रिहायशी इलाके में कई घरों की खिड़कियां टूट गई हैं। वहीं सड़क पर चल रही गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा है।
असम विधानसभा चुनाव में अप्रतिम जीत के बाद भाजपा का आत्मविश्वास काफी बढ़ा नज़र आ रहा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विश्वास दिलाया है कि उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाएगी। शाह ने गुजरात में भी फिर से सरकार बनाने का विश्वास व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को हटाए जाने की खबरों को खारिज किया है।
उत्तराखंड पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन तकनीकी कारणों से लगाया गया था। उन्होंने कहा कि वहां सत्ता के खिलाफ भारी असंतोष है और अगर आज चुनाव हो जाएं तो आज बीजेपी की सरकार बन जाएगी। केन्द्र में बीजेपी सरकार के दो साल पूरे होने के अवसर पर शाह ने यह भी दावा किया कि उत्तराखंड में जब भी चुनाव होंगे उनकी पार्टी की ही सरकार बनेगी।
असम की जीत और केरल में पार्टी को मिले मतों से उत्साहित बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी बीजेपी की मुख्य प्रतिद्वन्दी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जीत हासिल करना असम से आसान होगा क्योंकि वहां पार्टी के पास अपनी ताकत है। वहां पार्टी ने गत लोकसभा चुनावों में 80 में से 71 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि अभी यह फैसला नहीं किया गया है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए किसी नाम का ऐलान करेगी भी या नहीं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि जैसी ज़रूरत होगी वैसा किया जाएगा।
हाल में चार राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के बारे में पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वह केरल के परिणाम से सबसे अधिक खुश हैं। वहां पार्टी को 10 फीसदी से अधिक वोट मिले हैं। शाह ने कहा कि लोगों ने हमारी नीतियों पर हमें वोट दिया है और आगे भी हम अपने विकास के एजेन्डा पर बढ़ते रहेंगे।
कांग्रेस मुक्त भारत के बीजेपी के नारे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस नारे का अर्थ देश को उस अव्यवस्था से मुक्ति दिलाना है जो कांग्रेस ने फैला रखी है। उस पार्टी ने अपने निहित स्वार्थ के लिए जनहित को पूरी तरह ताक पर रख दिया था। वैसे अब जनता इस बात से भली भाँति परिचित हो गई है। इसलिए कांग्रेस का जनाधार तेज़ी से सिकुड़ता जा रहा है।
राज्यसभा में संख्या बल के चलते सरकार के महत्वपूर्ण विधेयकों के रूक जाने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि राहुल अगर राजनीति छोड़कर राष्ट्रीय हित पर ध्यान दें और विकास को महत्त्व दें तो सारी समस्या ही समाप्त हो जाए।
मोदी सरकार की ‘ज़रा मुस्कुरा दो’ कार्यक्रम की ज़ोरदार तैयारी ने कांग्रेस के चेहरे की मुस्कान एकदम उड़ा दी है। वहीं किसी ज़माने में राजीव गाँधी के बेहद करीबी दोस्त रहे अमिताभ बच्चन का कार्यक्रम में शिरकत करना उनके जले पर नमक जैसा हो गया है।
वैसे तो पनामा पेपर्स में अमिताभ का नाम आने के बाद कांग्रेस पार्टी बिना नाम लिए अमिताभ की आलोचना करती आ रही थी, लेकिन अब कांग्रेस पूरी तरह खुलकर उनके विरोध में सामने आ गई है।
अमिताभ बच्चन मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर इंडिया गेट पर होनेवाले एक कार्यक्रम का हिस्सा बनने जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है, “हम अमिताभ के कार्यक्रम की होस्टिंग के खिलाफ नहीं हैं लेकिन पनामा पेपर मामले की जब जांच हो रही है तो जांच एजेंसियों में इस बात से क्या संकेत जाएगा?”
अमिताभ ने कांग्रेस के इस विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आर. माधवन कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे हैं, वे नहीं। वे सिर्फ ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से जुड़ा कार्यक्रम करने वाले हैं।
अमिताभ के बेटे अभिषेक बच्चन ने भी इस विषय में पूछे जाने पर कहा कि अमिताभ बच्चन किसी राजनीतिक कार्यक्रम की मेजबानी नहीं कर रहे। अभिषेक ने कहा कि वे उस कार्यक्रम का हिस्सा हैं जहाँ वे बच्चियों को शिक्षित किए जाने के बारे में बात करेंगे। वह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है।
पनामा पेपर्स के बहाने अमिताभ बच्चन पर निशाना साधने के पीछे की असली वजह कांग्रेस और बच्चन परिवार के चढ़ते-उतरते रिश्तों की लंबी कहानी है। एक समय कांग्रेस से बेहद करीब रहे अमिताभ बोफोर्स घोटाले के बाद कांग्रेस और राजनीति से एकदम दूर हो गए। लेकिन बाद में शिवसेना,सपा और आगे चलकर भाजपा से उनके करीबी रिश्ते कांग्रेस को बिलकुल रास नहीं आ रहे।
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर ने कांग्रेस द्वारा अमिताभ बच्चन के विरोध का खंडन किया है । उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के दो साल होने के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन के हिस्सा लेने पर कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों की ओर से हो रहे हमले पर कहा,” अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के सबसे महान कलाकार हैं और वे एक बड़े ही सम्मानित व्यक्ति हैं। उनके ऊपर किसी भी तरह का बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाना जायज़ नहीं है।”
बिहार में दिन दहाड़े,दिन प्रतिदिन हो रही हत्याएँ सचमुच जंगलराज वापसी का सबूत दे रही हैं। बिहार के गया जिले में आज लोक जनशक्ति पार्टी के एक नेता सुदेश पासवान एवं उनके फूफेरे भाई सुनील पासवान की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
गया जिले के डुमरिया प्रखंड की काचर पंचायत की निवर्तमान मुखिया एवं मुखिया प्रत्याशी माया कुमारी के पति एवं लोजपा के प्रखंड अध्यक्ष सुदेश पासवान की उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वे दुआठ गांव में एक रैली में शामिल होने के लिए वहां पहुंचे थे। घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई। गोलीबारी के दौरान मौके पर मौजूद उनके फूफेरे भाई सुनील पासवान को भी गोली लग गई। बाद में इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी भी मौत हो गई।
एक साथ दो लोगों की हत्या की खबर फैलते ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। पुलिस फिलहाल मामले की छानबीन में जुट गई है। इस मामले में विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि बटला हाउस एनकाउंटर फर्जी नहीं था। उनके अनुसार बटला हाउस एनकाउंटर एक सही कार्रवाई थी और पाटिल ने उस एनकाउंटर पर सवाल उठाने को पूरी तरह से गलत बताया है।
शिवराज पाटिल ने इस पर दिग्विजय सिंह द्वारा सवाल उठाए जाने पर कहा कि यदि किसीको इसपर संदेह है,तो यह उसकी ज़िम्मेदारी है कि वह उसे प्रमाणित करे। गौरतलब है कि यह एनकाउंटर शिवराज पाटिल के कार्यकाल में ही हुआ था और इस एनकाउंटर पर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह सहित कुछ दूसरे कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया था व इसकी न्यायिक जांच की मांग भी की थी।
दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिग्विजय सिंह द्वारा बटला हाउस पर गुमराह करने वाला भाषण देने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एनआइए जांच की मांग की है। स्वामी ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि कांग्रेस नेता जानबूझ कर क्यों देश को भटका रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह को अपने खिलाफ एनआइए जांच की सहमति देनी चाहिए। हालांकि दिग्विजय ने कल इस बात को फिर दोहराया कि मेरा स्टैंड क्लियर हैं, बटला हाउस एनकाउंटर फर्जी था।
क्या था ऑपरेशन बटला हाउस–
ऑपरेशन बटला हाउस दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हुआ था। यह ऑपरेशन 19 सितंबर, 2008 को हुआ था, जिसमें इंडियन मुजाहिद्दीन के दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गये थे और अन्य दो भागने में सफल हो गये थे। इसमें पुलिस इंसपेक्टर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गये थे। इस एनकाउंटर का जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों व शिक्षकों के एक वर्ग, सपा, बसपा सहित कांग्रेस के एक धड़े ने विरोध किया था और न्यायिक जांच की मांग उठायी थी।
पिछले दिनों कान्स फिल्म महोत्सव के दौरान चर्चा में रही ऐश्वर्या राय की पर्पल लिपस्टिक के बारे में अभिनेत्री सोनम कपूर का कहना है कि ऐश्वर्या ने वह लिपस्टिक चर्चा में आने के लिए ही लगाई थी। यह पहला मौका नहीं है जब सोनम ने ऐश्वर्या राय पर टिप्पणी की हो, इसके पहले भी सोनम ने ऐश पर कटाक्ष कर उन्हें नाराज़ कर दिया था।
ऐश्वर्या राय बच्चन कहती हैं कि कान्स फिल्म समारोह के दौरान उन्होंने पर्पल लिपस्टिक अपने कॉस्मैटिक ब्रांड ‘लॉरिअल’ के कहने पर लगाई थी, वहीं सोनम कपूर का मानना है कि ऐश्वर्या ने यह रंग इसलिए चुना क्योंकि वह चर्चा में आना चाहती थीं।
जब सोनम से ऐश्वर्या राय के पर्पल होठों और उसकी आलोचना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐश्वर्या को तो खुश होना चाहिए कि उन्हें और उनके मेकअप को इतना ज़्यादा महत्त्व दिया गया।
सोनम ने कहा, ‘‘फैशन और मेकअप करने के पीछे का विचार यही होता है कि लोग उसकी चर्चा करें और मुझे लगता है कि वह स्वयं चर्चा में आना चाहती थीं। ऐश्वर्या जो चाहती थीं, उन्हें इससे वह मिल गया और मुझे लगता है कि यह सही है।’’
लॉरिअल ब्रांड के ब्रांड अम्बेसडर के तौर पर ऐश द्वारा इस रंग के इस्तेमाल की सफाई देने की बात पर सोनम ने कहा,‘‘ मुझे नहीं लगता कि उस दिन ऐश्वर्या लॉरिअल के लिए वॉक कर रही थीं। मुझे लगता है कि 15वें साल में ऐसा करना मजेदार है। वह हर जगह ट्रेंड कर रही थीं। मुझे यह रंग पसंद आया और ऐश्वर्या ने इसे एक आत्मविश्वास के साथ लगाया था।’’ सोनम खुद इस कॉस्मैटिक ब्रांड के चेहरों में से एक हैं।
जब सोनम से पूछा गया कि क्या वह ऐसा कोई शेड कभी लगाएंगी तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं पहले पर्पल लिपस्टिक लगा चुकी हूं। मैंने एक शूट के लिए काले रंग की लिपस्टिक भी लगाई थी। लोगों ने मेरे बारे में तो बात नहीं की।’’
कान्स में अपने लंबे सफ़ेद गाउन पर बने मज़ाक से प्रभावित हुए बिना सोनम ने कहा, ‘‘एक या दो लोग थे, जिन्होंने ड्रेस का मजाक बनाया लेकिन मुझे लगता है कि यह मेरा सबसे शानदार लुक था। मैं किसी भी चीज को दिल पर लेने में यकीन नहीं रखती। मैं अपने लिए तैयार होती हूँ और खूबसूरत दिखती हूँ।’’
राजनीति का राज़ आज तक कोई समझ नहीं पाया है। खबर है कि सुप्रीम कोर्ट के मशहूर वकील व पूर्व सांसद राम जेठमलानी अब लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से राज्यसभा भेजे जाएंगे।
अपनी बेबाक राय के लिए जाने जानेवाले राम जेठमलानी को 2013 में बीजेपी ने उनके बयानों के कारण ही किनारे लगा दिया था। उनके बयानों से ख़फ़ा पार्टी ने पहले तो उन्हें निलंबित किया फिर निष्कासित कर दिया था। पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में जेठमलानी को 6 साल के लिए निष्कासित करने का फैसला किया था। इसके बाद से वह राज्यसभा में निर्दलीय सांसद थे।
चाहे बात नरेंद्र मोदी की पीएम उम्मीदवारी को लेकर उनके समर्थन की हो या, सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा की नियुक्ति के मसले पर बयान का मामला हो या काले धन का। जेठमलानी ने अपनी ही पार्टी के ख़िलाफ़ खुलकर बयान दिए। इसके बाद 25 नवंबर 2013 को पार्टी से उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।
अब राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एवं राम जेठमलानी का राज्यसभा में जाना लगभग तय माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राम जेठमलानी को राजद की ओर से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने पर पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मुहर लगा दी है। उम्मीद है कि जेठमलानी आगामी 30 मई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे।
सूत्रों के अनुसार राज्यसभा की पांच रिक्त होने वाली सीटों में से दो पर राजद का दावा बनता है। इनमें एक सीट पर पहले से ही पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम तय था। अब दूसरा नाम भी जेठमलानी के रूप में तय हो चुका है। सूत्रों ने बताया कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने इससे पहले भी एक बार राम जेठमलानी को राज्यसभा भेजने का मन बनाया था, लेकिन उस बार यह फैसला नहीं लिया जा सका, पर इस बार राम जेठमलानी को मौका दिए जाने पर निर्णय ले लिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केंद्र में बनी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार, कल 26 तारीख को सत्ता में अपने 2 वर्ष पूरे करेगी। ज़ाहिर है, दो साल पूरे होने को लेकर मोदी सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षाएं की जा रही हैं और अपने-अपने हिसाब से आंकलन भी किए जा रहे हैं।
नरेंद्र मोदी लंबेे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद 2014 में आंधी की तरह केंद्र में आए और प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रवेश कर इतिहास रच दिया। मोदी की जीत भारत की जनता द्वारा दिया गया सिर्फ एक संदेश मात्र ही नहीं था। बल्कि इस जनादेश ने स्वतंत्रता के बाद से देश की सत्ता संभालनेे वाली कांग्रेस पार्टी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। इस जनादेश के तहत लोगों ने आधुनिक भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और देशवासियों के सपनों को साकार करने का वादा करने वाले नेता पर विश्वास दिखाया।
👉🏼आइए आप को बताते हैं कि पिछले दो सालों में मोदी सरकार ने कौन-कौन से महत्वपूर्ण फैसले लिए–
1. डिजिटल भारत –
21 अगस्त 2014 को ‘‘डिजिटल भारत’’ अभियान शुरु किया गया था। इस अभियान के पीछे मकसद था कि भारत को एक इलेक्ट्रिाॅनिक अर्थव्यवस्था में बदला जाए।
2. प्रधानमंत्री जन धन योजना-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की। इस योजना की घोषणा उन्होंने 15 अगस्त 2014 को अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण में की थी। यह एक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुरु होने के पहले दिन ही डेढ़ करोड़ बैंक खाते खोले गए थे और हर खाता धारक को 1,00,000 रुपये का बीमा कवर दिया गया।
3.स्वच्छ भारत अभियान-
प्रधानमंत्री ने 24 सितंबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान को मंजूरी दी जो कि पिछली सरकार द्वारा शुरु किये गए निर्मल भारत कार्यक्रम का संशोधित स्वरुप था। स्वच्छ भारत अभियान को औपचारिक रुप से महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्टूबर 2014 को शुरु किया गया।
4.मेक इन इंडिया-
यह एक नारा है जिसे नरेन्द्र मोदी ने शुरु किया था जिससे भारत में वैश्विक निवेश और विनिर्माण आकर्षित किया जा सके। उसके बाद यह एक अंतर्राष्ट्रीय मार्केटिंग अभियान बन गया। मेक इन इंडिया अभियान इसलिए शुरु किया गया जिससे भारत में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हों और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले। मेक इन इंडिया की कोशिश है कि भारत एक आत्मनिर्भर देश बने।
5.सांसद आदर्श ग्राम योजना-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की। इस योजना के अनुसार हर सांसद को साल 2019 तक तीन गांवों को विकसित करना होगा।
6.अटल पेंशन योजना-
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने फरवरी 2015 के बजट भाषण में कहा था कि दुखद है कि जब हमारी युवा पीढ़ी बूढ़ी होगी उसके पास भी कोई पेंशन नहीं होगी। प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता से प्रोत्साहित होकर वो सभी भारतीयों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के सृजन का प्रस्ताव करता हैं। इससे ये सुनिश्चित होगा कि किसी भी भारतीय नागरिक को बीमारी, दुर्घटना या वृद्धावस्था में अभाव की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
7.बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ-
जन-धन योजना, मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान के सफल कामयाबी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी को हरियाणा के पानीपत में एक और योजना शुरू की। 100 करोड़ रुपए के शुरुआती कॉर्पस के साथ यह योजना देशभर के 100 जिलों में शुरू की गई।
8.पीएम कौशल विकास योजना-
सरकार ने गरीबी के खिलाफ लड़ाई के तहत यह अभियान शुरू किया है। पीएम ने कहा कि अगर देश के लोगों की क्षमता को समुचित और बदलते समय की आवश्यकता के अनुसार कौशल का प्रशिक्षण दे कर निखारा जाता है तो भारत के पास दुनिया को 4 से 5 करोड़ कार्यबल उपलब्ध करा सकता है।
9.स्टैंड अप इंडिया स्कीम-
5 अप्रैल 2016 को नोएडा के सैक्टर 62 में पीएम मे स्टैंड अप इंडिया स्कीम की शुरुआत की। इस योजना के लिए उन्होंने एक वेब पोर्टल शुरू किया। इस स्कीम को लेकर भारत के उद्यमी वर्ग में खासा उत्साह है। इसके अंतर्गत नये उद्यमियों को स्थापित करने में मदद की जायेगी, जिससे देश भर में रोजगार बढ़ेगा। स्टैंड अप इंडिया स्कीम केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके अंतर्गत 10 लाख रुपये से 100 लाख रुपये तक की सीमा में ऋणों के लिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहन दिया जायेगा। इस योजना से ऐसे उद्यमियों को बड़ी संख्या में लाभ मिलने की संभावना है।
👉🏼स्टैंड अप इंडिया की खासियत–
1. नये उद्यम स्थापित करने के लिए कार्यशील पूंजी घटक के समग्र के तौर पर 10 लाख रुपये से 100 लाख रुपये तक के बीच के संयुक्त ऋण।
2. कार्यशील पूंजी के आहरण के लिए डेबिड कार्ड (रूपे)।
👉🏼 प्रधानमंत्री ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के चलते उन गांवों में जहां अब तक बिजली नहीं पहुंची थी इसके पहुंचने के बाद लोगों के रहन-सहन में काफी बदलाव आ रहा है।
👉🏼बिजनेस कम्युनिटी के लिए फेवरबेल मानी जाने वाली मोदी सरकार 26 मई को अपने दो साल पूरे कर रही है। कंपनियों के मार्केट वैल्युएशन की दो साल की कैलकुलेशन में जाे जानकारी आई, वह चौंकाने वाली है। मोदी के करीबी माने-जाने वाले बिजनेसमैन अंबानी-अडानी को इस दौरान 60 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हुआ है। जबकि, टाटा ग्रुप को 68 हजार करोड़ रुपए का फायदा हुआ है
👉🏼 9 मई 2016 को भारत के 9 गाँवों ने जीवन में पहली बार बिजली का बल्ब जलाया।
7018 गाँवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है।
👉🏼उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) (सीपीआई) आधारित महंगाई मई 2014 में 8.28 फीसदी से घटती हुई मार्च 2016 में 4.83 फीसदी तक नीचे आई लेकिन अप्रैल 2016 में इसकी चाल बदल गई और बढ़कर 5.39 फीसदी हो गई।
👉🏼मोदी सरकार की असफलताएं – मोदी सरकार कई मोर्चों पर असफल भी रही-
1. काले धन की वापसी में नाकामी – चुनावी प्रचार के दौरान मोदी ने भारतीय जनता से ये वादा किया था की वो विदेशी बैंकों में रखा काला धन वापिस लाएंगे लेकिन ऐसा लगता है कि काला धन वापस आने में कई साल लग सकते हैं. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल के हाथों में आ गया है |
3. सुरक्षा व्यवस्था में कमी -पठानकोट हमला इस बात का जीता जगता उदहारण है और इसके साथ ही पठानकोट हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के ववजूत पाकिस्तान अधिकारीयों को जांच के लिए आने देना हमारी लचर व्यवस्था को दर्शाता है | यह हमला दो जनवरी को हुआ था जिसमें सेना के सात जवान शहीद हुए थे. भारत ने इसके लिए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार ठहराया था. भारत का कहना है कि जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर इस हमले का मास्टरमाइंड था |
4 . महगाई पर काबू न पा पाना -मॅहगाई दिन पे दिन बढ़ती जा रही दाल का २०० रू किलो होना इस बात को दर्शाता है की आम आदमी केलिए अब दाल रोटी भी काफी महंगी हो गई है |
5 . बेरोज़गारी – इसके अलावा बेरोज़गारी की समस्या भी जस की तस बनी हुई है, लोगों को पीने के पानी की अनुपलब्धता और पानी की उपलब्धता के लिए कोई सटीक उपाय नहीं किये जा रहे है , किसानों के लगातार आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी कोई गम्भीरता नहीं दिखाई पड़ रही है ,सरकार उपरोक्त सभी मामलों में कमजोर पड़ती नजर आ रही है|
👉🏼इन् सबके वावजूद सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के सर्वे में कहा गया कि
70 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं, जबकि इसके उलट 49 फीसदी लोग मोदी के कामकाज से खुश नहीं हैं.
यानी मोदी अब भी सबसे लोकप्रिय नेता बने हुए हैं. लगभग हर जनमत सर्वेक्षण में मोदी की लोकप्रियता कायम है |
👉🏼मोदी हिट ,मंत्री फेल-
ज्यादातर विशेषज्ञों का स्पस्ट तौर पर मानना है की नरेंद्र मोदी के प्रधानमन्त्री बनने के बाद से विदेशों में भारत की छवि में बहुत बदलाव हुआ है । जिससे उनकी विदेश नीति को सफल माना जा रहा है , लेकिन ये भी सच है की नेपाल और चीन से रिश्तों में पिछले कुछ दिनों से तल्खियाँ नजर आ रही हैं और पाकिस्तान का व्यवहार जस का तस है जो की मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा है ।
👉🏼 बरहाल कुछ भी हो पर प्रशासनिक स्तर पर मोदी सरकार को जनता पंसद कर रही है पर वही महंगाई ,बेरोजगारी जैसे अहम विषयों पर मोदी सरकार ने अभी तक निराश ही किया है । अगर इन दो सालों की ही तरह मोदी जी अकेले बैटिंग करते रहे और मंत्री ,सांसद यूही दर्शक बने रहे तो स्थिति बिगड़ सकती है क्योंकि जब तक सामूहिक प्रयास नही होंगे तब तक देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर नही लाया जा सकता है । सरकारें तो आती जाती रहती हैं ।कार्यकाल तो यूही हर साल पूरे होते हैं ।सरकारों द्वारा जश्न और उसके कार्यों का लेखा जोखा भी हर साल होता है पर वास्तव में अगर सही रूप से देश की मूलभूत चुनिंदा समस्यायों पर समय रहते ध्यान नही दिया गया तो शायद आने वाले समय में देश में लोकतन्त्र तो रहे पर सरकारें देखने को न मिले ,देश में राजनीति तो रहे पर नेता देखने को मिले । इसलिए उम्मीदों के साथ सत्ता संभाल रही मोदी सरकार के सामने अब आने वाले 3 सालों में चुनौतियाँ भी तीन गुना होगीं।
मोदी सरकार के केंद्र में दो साल पूरे होने के मौके पर 28 मई को इंडिया गेट पर होने वाले कार्यक्रम की ज़ोर शोर से तैयारियाँ चल रही हैं। इस कार्यक्रम की मेजबानी महानायक अमिताभ बच्चन करेंगे।
कार्यक्रम का नाम होगा ‘जरा मुस्करा दो’, जिसमें सरकार की उपलब्धियों को उजागर करने के लिए कई कार्यक्रम पेश किए जाएंगे। इस शो का पूरे देश में दूरदर्शन पर प्रसारण किया जाएगा। शो के दौरान विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों खासतौर पर स्वच्छ भारत अभियान और डिजिटल इंडिया को उजागर किया जाएगा।
इस अवसर पर देश के विभिन्न शहरों में भी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। सरकार ने शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में शो की तैयारियों की निगरानी के लिए एक समिति का भी गठन किया है। नितिन गडकरी, पीयूष गोयल और राज्यवर्धन सिंह राठौर इस समिति के सदस्य हैं। सरकार की जिन योजनाओं पर जोर दिए जाने की जरूरत है, समिति ने उन योजनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की है।
भाजपा पूरे देश में 26 मई से 10 जून के बीच सरकार की सफलताओं को उजागर करने के लिए 200 से अधिक कार्यक्रम आयोजित करेगी। पीएम मोदी द्वारा विभिन्न स्थानों पर इन रैलियों को संबोधित करने की संभावना है। इसकी शुरुआत वह 26 मई को सहारनपुर में रैली को संबोधित करके करेंगे।