एक शर्मनाक वाक़िया महाराष्ट्र के पालघर जिले में सामने आया, जब ससुराल में आई नई-नवेली दुल्हन ने ही ससुराल वालों पर बलात्कार का आरोप लगा दिया। दुल्हन को अपना घर छोड़ कर ससुराल आये बस एक ही दिन हुआ था कि उसके पति के जीजा ने ही उसके साथ ये घिनौनी हरकत को अंजाम दे दिया।
महिला ने बताया है कि उसके पति हुसैन खान ने ही अपने आरोपी जीजा की मदद की और वो किसी भी तरह घर से भाग कर पुलिस स्टेशन में आई।
पीड़िता के आरोपों के आधार पर उसके पति व आरोपी जीजा को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस का कहना है इस मामले में जल्द से जल्द कार्यवाही होगी।
यह घटना उन्नाव (पुरवा) जिले की है, जब मंडप में दूल्हा गुटखे के पैकेट पे पैकेट फाड़े जा रहा था और शादी के मंत्रों के बीच में ही पंडित को रोक कर बार बार उठ कर गुटखा थूकने जा रहा था। उसकी गुटके की इस अमल को देख सारे लड़की के परिवार वाले और शादी करवाने वाले पंडित परेशान हो रहे थे, लेकिन दूल्हे साहब के लिए शादी से ज्यादा जरूरी गुटखे का पैकेट था।
उसकी इस हरकत से परेशान दुल्हन के पिता ने दूल्हे से कहा, बेटा एक बार विवाह हो जाये फिर आप गुटखा खा लेना। फिर क्या था, दूल्हे का ईगो हर्ट हो गया और उसने अभद्रता करनी शुरू कर दी। सबके समझाने के बाद भी वो नहीं माना और जब उसने अपने जेब से नई पुड़िया निकाल के जेसे ही फाड़ी उसी वक़्त दुल्हन मंडप से उठ गई और कहा कि जो इंसान मेरे परिवार की इज़्ज़त न करे और इतना नशे का आदी हो मुझे उससे शादी नहीं करनी।
बारातियों को भोजन कराने के बाद उन्हें बिना दुल्हन के विदा करने लगे। बारातियों और दूल्हे ने लड़कीवालों से काफी माफ़ी मांगते रहे मगर वो नहीं माने और उन्हें बीच शादी से ही लौटा दिया। दुल्हन के इस साहस को देख सब दंग रह गए और काफी तारीेफ़ भी की।
उत्तर प्रदेश के चुनावों के पहले ‘समान नागरिकता संहिता’ के मुद्दे की आग पर घी डाला गया है, जिसके चलते देश का सियासी माहौल फिर गरमाया हुआ है। देश को आज़ाद हुए 68 वर्ष हो गये, लेकिन किसी भी सरकार में इतना दम नहीं रहा जो यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड को लेकर एकमत बनाने में सफल हो सकें। नरेंद्र मोदी सरकार ने इस बार ये जोखम उठाया है और इस सम्बन्ध में विधि आयोग को निर्देश दिए हैं कि समान नागरिक संहिता को लागू किये जाने के लिए जरूरी बातों पर गौर करें।
यूनिफार्म सिविल कोड से तात्पर्य है, देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून, जिसमें सम्प्रदाय विशेष के लिए किसी पर्सनल लॉ के लिए कोई स्थान नहीं हो। संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार, यूनिफार्म सिविल कोड को लागू करना राज्य का दायित्व है। फिलहाल देश में हिन्दुओं, मुस्लिमों आदि के लिए उनके अपने अपने धर्माधारित संपत्ति, विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार जैसे कानून हैं।
कुछ लोग समान आचार संहिता के पक्ष में हैं तो समाज का एक हिस्सा इसका धुर विरोधी है। ऐसे लोग यूनिफार्म सिविल कोड को अपने धार्मिक स्वतंत्रता का हनन मानते हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो भाजपा इसके पक्ष में है तो कांग्रेस इसके विरोध में खड़ी है। अब चूंकि मामला धर्म-मज़हब से जुड़ा हुआ है, तो धर्मनिरपेक्षता के बड़े हिमायती माने जाने वाले विद्वान भी इसके विषय में स्पष्ट मत देते नजर नहीं आ रहे हैं।
देश में यूनिफार्म सिविल कोड का विषय पहली बार सन 1840 में उठाया गया था। उसके बाद 1985 में राजीव गाँधी शासन काल में प्रसिद्द शाहबानो मामले से यूनिफार्म सिविल कोड एक बार फिर सुर्ख़ियों में छाया रहा। सरकार को इस मामले में लेकर काफी खींचातानी भी करनी पड़ी थी। मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो के पूर्व पति को शाहबानो को गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए थे। इसी केस में सुप्रीम कोर्ट ने पर्सनल लॉ में यूनिफ़ोर्मिटी अर्थात एक समानता लाये जाने की बात कही थी। तत्कालीन सरकार ने उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश को उलटने के लिए संसद में एक विवादों से घिरा हुआ बिल पास कराया था। तब से लेकर आजतक कोई भी सत्तारूढ़ दल इसके सम्बन्ध में एकमत नहीं बना पाया, इसका कारण है कि देश में जनहित से अधिक वोट बैंक पर फोकस किया जाता है. अब जाकर विधि मंत्रालय ने रिटायर्ड जस्टिस बलबीर सिंह चौहान की अगुआई में मुद्दे से जुड़े आवश्यक तथ्यों व उनपर आधारित दस्तावेजों की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कमीशन विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट देगा।
साल के शुरुआत में विधि मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा था, “देश की एकता के लिए यूनिफार्म सिविल कोड को ध्यान में रखना होगा। देश में पर्सनल कानूनों के अंदर ही तरह-तरह के रीति-रिवाज़ आदि हैं, जिनसे जनभावनाएं जुड़ी हुई हैं, इसीलिए वक़्त लगेगा।” वहीं विरोधियों ने भाजपा पर सियासी रोटियाँ सेंकने, चुनावी माहौल में वोट काटने जैसे आरोप भी मढ़ने शुरू कर दिए हैं।
गौरतलब है कि किसी भी देश की आर्थिक, सामाजिक स्थिति का जिम्मा उस देश की कानून व्यवस्था पर होता है। खासकर जब देश भारत जैसे तमाम धर्मों को समाहित करने वाला विशाल राष्ट्र हो। देश की एकता अनिवार्य होती है, जिसके सुचारू रूप से चलते रहने के लिए कानून व्यवस्था का एक समान होना भी बेहद आवश्यक है।
नई दिल्ली। पिछले एक हफ्ते से लगातार घाटी जल रही है और अभी कई स्थानों पर कर्फ्यू जारी है। कश्मीर के इसी तनावपूर्ण हालात पर पीएम नरेंद्र मोदी की बुलाई उच्च स्तरीय बैठक खत्म हो गई है। प्रधानंमत्री आवास पर हुई ये बैठक करीब 2 घंटे तक चली।
सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि बैठक में पाकिस्तान के बयानों पर भी आपत्ति जताई गई और साथ ही साथ अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के मुद्दे पर भी विस्तृत चर्चा हुई। जैसे ही बैठक ख़त्म हुई फौरन पीएमओ में मंत्री जितेंद्र सिंह ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि पीएम मोदी ने कश्मीर में सभी से शांति बनाए रखने की अपील की ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। साथ ही उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार इस मामले में राज्य सरकार को हर तरह की मदद देने को तैयार है।
बैठक में मोदी ने अमरनाथ यात्रियों के सुरक्षा इंतजाम पर भी संतोष जताया और यात्रियों की हर मुमकिन मदद करने का भी आदेश दिया। इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री को कश्मीर घाटी के घटनाक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, जहां शुक्रवार को वानी की मौत के बाद से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। इस दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष में मरने वालों की तादाद 32 हो गई है। इस बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरूण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और विदेश सचिव एस जयशंकर सहित अन्य लोगों ने भी शिरकत की।
इसके पहले जम्मू कश्मीर के हालात पर कल रात भी एक महत्वपूर्ण बैठक में पर्रिकर, जेटली और डोवाल ने शिरकत की थी। डोवाल प्रधानमंत्री के साथ दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर गए थे, लेकिन उनसे एक दिन पहले ही वापस लौट आए और मंत्रियों को केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों ने घाटी में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी।
सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार ने तमाम बलों से अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सीमा के इर्द गिर्द सतर्कता बढ़ाने को कहा गया है, ताकि हालात का फायदा उठाकर किसी तरह की ताजा घुसपैठ पर अंकुश लगाया जा सके। सूत्रों के अनुसार सुरक्षा बलों से यह भी कहा गया है कि वह प्रदर्शनकारी नागरिकों के खिलाफ विवेकपूर्ण तरीके से बल प्रयोग करें।
बैठक में हुए ये फैसले
-हालात से निपटने में राज्य सरकार को पूरी छूट।
-राज्य सरकार को हालात का सामना बेहतर तरीके से करने को कहा गया। केंद्र सरकार करेगी पूरी मदद।
-बुरहान वानी को बड़ा नेता नहीं बनाये जाने की रणनीति। वो एक आतंकवादी था, उसे उसी रूप में देखा जाए।
-पत्थरबाजी कर रहे युवाओं से राज्य सरकार निपटेगी।
– सुरक्षा ठिकानों और सुरक्षाबलों पर हमलो कों सख्ती से निपटा जाएगा।
वंशवेल और बंदूक जैसी हिंदी और मराठी फिल्म करने के बाद अभिनेत्री मनीषा केलकर अब तेलगू फिल्म मे नजर आने वाली है। फ़िल्म का नाम है फ्रेंड रिक्वेस्ट।
फिल्म मे मनीषा सुपर नॅचरल लड़की की भूमिका में नज़र आएंगी और इसलिये उन्हें अपना वजन कम करना पड़ा। फ़िल्म में फाइट सीक्वेंस को अच्छे से करने के लिए मनीषा ने बाक़ायदा मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ली। इसके लिए अभिनेत्री को कड़ी मेहनत भी करनी पड़ी।
मनीषा ने कहा कि यह शूटिंग उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई। उन्होंने कहा कि शूट की वजह से सुबह जल्दी उठकर मार्शल आर्ट सीखने जाना होता था। जिसकी वजह से उनकी दिनचर्या भी काफी सुधर गई। साथ ही खाने-पीने को लेकर भी इस दौरान काफी संजीदा नज़र आईं।
निर्देशक आदित्य ओम ने अपनी पिछली फिल्म बंदूक मे ही मनीषा को इस फिल्म का ऑफर दिया था। अब यह फिल्म हिंदी और तेलगू मे भी प्रदर्शित होने वाली है।
कश्मीर घाटी में भड़के तनाव पर अमेरिका ने आज कहा है कि कश्मीर भारत का एक आंतरिक मामला है। सभी पक्षों को हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर घाटी में भड़के तनाव का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमने कश्मीर में भारतीय बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें देखी हैं और हम हिंसा से चिंतित हैं। हम सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान ढूंढ़ने की दिशा में काम करने को प्रोत्साहित करते हैं।”
प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने इस मुद्दे पर भारत से बात नहीं की है क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है। गौरतलब है कि कश्मीर में तनावपूर्ण माहौल पर आतंकी बुरहान को पाकिस्तान ने नेता कहा और उसकी मौत पर दुःख प्रकट किया। जिसपर भारत ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि पाकिस्तान को पाक अधिकृत इलाकों पर ध्यान देना चाहिए। हमारे निजी मामले में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
कश्मीर के आतंकी बुरहान वानी की मौत के कारण लगातार बढ़ रही हिंसा में उपद्रवियों ने कश्मीरी पंडितों को अभी अपना निशाना बना लिया। हाल में ही पुलवामा क्षेत्र के रिहायशी इलाके में रह रहे कश्मीरी पंडितों पर भी हमला किया और जान से मर डालने की धमकी भी दी।
धमकियों से डरे करीब डेढ़ दर्जन पंडितो को श्रीनगर के स्थानीय मंदिर में ही रहना पड़ रहा है। अभी भी करीब 100 कश्मीरी पंडित कॉलोनी में फंसे हुए है। प्रशासन ऐसी कोई भी घटना के होने की पुष्टि नहीं कर रहा है।
अलगाववादियों ने ये भी साफ-साफ कह दिया है कि घाटी और उसके आस पास के क्षेत्रों में 2 दिन तक और ये प्रदर्शन चलता रहेगा और ये हड़ताल जारी रहेगी। उप्रदवियों को नियंत्रण में लाने के लिए सुरक्षाबलों के जवान मुस्तैद हैं।
मंदिर में फसे कश्मीरी पंडितों का कहना है कि बुरहान की मौत की खबर फैलते ही उनकी कॉलोनी में विरोध प्रदर्शन चालू हो गया था और शाम 8 बजे के करीब हज़ारों की तादात में उपद्रवियों ने पत्थर बाज़ी करना चालू कर दिया था।
हिंसा में नियंत्रण पाने के लिए जवानों ने हवाई फायर भी किए थे, इसके बावजूद भी पथराव नहीं रुका और उपद्रवियों ने ‘इंडियन डॉग्स गो बैक’ के भी नारे लगाए और लोगो को धमकी दी कि अगर तुम सब ने ये इलाका जल्द नहीं छोड़ा, तो तुम सभी को मौत के घाट उतार देंगे। सहमे कश्मीरी पंडितों ने जिला प्रशाशन और मुख्यमंत्री से भी मदद की गुहार लगाई, मगर किसी ने भी उनकी मदद करने आगे नहीं आया। उस कॉलोनी में करीब 160 कश्मीरी पंडित रहते हैं, जिन्हें सरकार के द्वारा मुहैया कराए गए घर और नौकरी दी गई थी।
पटेल आरक्षण के लिए आंदोलन करने वाले हार्दिक पटेल नौ महीने की जेल के बाद अब जेल से बाहर आने वाले हैं। गुजरात उच्च न्यायालय ने सोमवार को विसनगर के एक विधायक के कार्यालय में हिंसा से संबंधित एक मामले में जमानत मंजूर कर हार्दिक की रिहाई का रास्ता खोल दिया है।
आज हार्दिक के जेल से बाहर आने की उम्मीद है। हालांकि हार्दिक को अगले छह महीने गुजरात के बाहर बिताने होंगे, क्योंकि शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने हार्दिक को देशद्रोह के दो मामलों में इसी शर्त पर जमानत दी थी। खबरों की मानें तो अगले 6 महीने हार्दिक उत्तर प्रवेश में रह सकते हैं।
कांग्रेस ने संभावित रिहाई को ‘‘लोकतंत्र के लिए अच्छा” बताया, जबकि भाजपा ने कहा कि उनकी जमानत का विरोध नहीं करने के उसके फैसले के कारण वह जेल से बाहर आ पाएंगे और उन्हें आंदोलन के आपसी सहमति वाले समाधान की उम्मीद है। हालांकि अदालत ने शर्त लगाई है कि हार्दिक विसनगर कस्बे के जिले मेहसाणा में मामले की सुनवाई पूरी होने तक घुस नहीं पाएंगे। अदालत ने यह भी कहा कि हार्दिक नौ महीने बाद इस शर्त में संशोधन का अनुरोध कर सकते हैं और अदालत उस समय उनके आचरण के आधार पर उचित आदेश पारित करेगी।
हार्दिक के वकील जुबिन भारदा ने कहा कि वह सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद कुछ दिन में जेल से बाहर आने वाले हैं। न्यायमूर्ति पीपी भट्ट ने हार्दिक की जमानत इसीलिए मंजूर की क्योंकि राज्य सरकार ने उनके आवेदन का विरोध नहीं किया।
उल्लेखनीय है कि 22 वर्षीय हार्दिक अभी सूरत की लाजपुर जेल में बंद हैं। वह अक्तूबर 2015 में गिरफ्तार हुए थे। उन्होंने अपने पाटीदार समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व किया था। हार्दिक पर पटेलों को ओबीसी आरक्षण की मांग स्वीकार करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए हिंसा भड़काने का आरोप है।
लखनऊ। पूरे उत्तरप्रदेश में मिशन ‘ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी’ के तहत अखिलेश सरकार ने 24 घण्टे में 5 करोड़ पौधे लगाकर विश्व रिकार्ड बनाने का संकल्प लिया। जिसके तहत पूरे प्रदेश में दिनभर आला अधिकारियों का काफिला दौड़ता रहा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव ने भी पौधारोपण किया। इतने बड़े पैमाने पर पौधरोपण का संकल्प तो काबिलेतारीफ है, लेकिन इस पूरी योजना को गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज करानेे की जल्दी के चक्कर में यूपी की मौजूदा अखिलेश सरकार से कुछ ऐसी गलतियां हो गई, जिसके कारण उनका ये मिशन पूरा होने के बावजूद भी फीका ही रहा।
करोड़ों पौधे लगाने के बावजूद भी राज्य सरकार से सूबे की जनता मिशन से निराश ही दिखी। इस मिशन के दौरान सबसे बड़ी दिक्कत ये भी देखने को मिली कि दिनभर ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को अपना ड्यूटी स्थल ढूँढने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आज इस मिशन को पूरा करने के लिए लगभग सभी राज्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। वन विभाग भी लगातार कई हफ़्तों से पसीना बहा रहा था और उसका कहना था कि हमारी तैयारी पूरी है। लेकिन आज विभाग की तैयारियों की सारी पोल तब खुल गई, जब ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को घंटो अपना ड्यूटी स्थल ढूंढने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। महिलाओं की ड्यूटी सूदूर जंगली क्षेत्रों में लगाई गई जबकि ऐसा अनुचित है। प्रदेश में कई जिले ऐसे हैं, जहाँ के जंगल काफी खतरनाक हैं, ऐसे में महिलाओं की ड्यूटी सूदूर जंगली क्षेत्रों में लगाना एक गलत कदम था। जिसके कारण कइयों को अपना ड्यूटी स्थान भी नहीं मिला और कइ तो ड्यूटी स्थल ढूढ़ने के दौरान चोटिल हो गए।
जिन आला अधिकारीयों की ड्यूटी लगी थी उन्हें भी सड़कों से सटे स्थानों में ही निरीक्षण करते पाया गया। इन अधिकारियों से जब कोई कर्मचारी अपने ड्यूटी स्थल के बारे में पूछता, तो उन्हें भी उस स्थान की कोई खास जानकारी नहीं रहती। उनका कहना था कि जंगल के रास्ते और स्थान हमें नही पता, तो हम कैसे बता दें। कुल मिलाकर इतना बड़ा मिशन गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल होने की जल्दी से ज्यादा कुछ और नहीं लग रहा था। इतने बड़े मिशन के लिए किसी प्रकार की कोई ट्रेनिंग नही कराई गई।
विशेषज्ञों की मानें तो ये पौधारोपण सिवाय विश्व रिकार्ड बनाने के कुछ और नही था, क्योंकि पौधे तो हर साल लगाये जाते हैं, लेकिन सिर्फ कागजों पर और इस बार पौधे लगाये तो गए हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और देखभाल की कोई खास व्यवस्था नहीं की गई, जिससे यूपी की जनता का निःसन्देह आज तो संवर रहा है पर कल क्या होगा ? बहरहाल इस पूरे मिशन की सच्चाई तो कुछ दिनों में सामने आ ही जायेगी, लेकिन इतना तो स्पस्ट है कि अखिलेश सरकार आगामी चुनावी समर में इस ‘ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी’ मिशन को अपने चुनावी ब्रह्मास्त्र के रूप में प्रयोग करेगी।
नई दिल्ली। सूत्रों की मानें तो रिजर्व बैंक के नए गवर्नर, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के नाम पर मुहर लग चुकी है और जल्दी ही रिजर्व बैंक के नए गवर्नर अपना कार्यभार संभाल सकते हैं। पीएमओ सूत्रों के अनुसार, उनके नाम पर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने भी मुहर लगा दी है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि अफ्रीका से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नए गवर्नर की घोषणा कर सकते हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए गवर्नर के नाम की घोषणा प्रधानमंत्री अफ्रीका से वापस आ गए हैं, अब किसी भी वक़्त नए गवर्नर के सम्बन्ध में घोषणा हो सकती है। वर्तमान आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का तीन साल का कार्यकाल चार सितंबर को समाप्त हो रहा है। बता दें कि राजन ने पिछले महीने ही घोषणा की थी कि वह अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा करने के बाद शैक्षणिक क्षेत्र में वापस लौट जाएंगे। उन्होंने दूसरा कार्यकाल स्वीकार नहीं करने की घोषणा की है, जिसके बाद सरकार ने नए आरबीआई गवर्नर की तलाश शुरू कर दी।
आरबीआई पद के लिए चार्चित नामों में रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण और राकेश मोहन शामिल भी शामिल हैं। गोकर्ण इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष में कार्यकारी निदेशक हैं। अन्य नामों में एसबीआई की प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्य और आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास की भी चर्चा है।
इसके अलावा वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम और आरबीआई के मौजूदा डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल का भी नाम सामने आ रहा है। नया आरबीआई गवर्नर कोई भी बने लेकिन उसके सामने भारतीय अर्थव्यवस्था को तेजी से दुरुस्त करके पटरी पर लाने की जिम्मेदारी होगी ।