एक बार फिर से पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान खान अपने निजी रिश्तों की वजह से सुर्खियों में हैं। खबर है कि उन्होंने हाल ही में तीसरी शादी की है। हालाँकि खबरों की मानें तो इमरान ने इस खबर का खंडन किया है।
दुनिया न्यूज रिपोर्ट की खबर के मुताबिक, क्रिकेटर इमरान खान लंदन में पिछले दिनों अपने परिवार वालों की मौजूदगी में मरियम नाम की महिला से निकाह किया है। मरियम खुद 63 वर्ष की तलाकशुदा महिला हैं और उनको पहली शादी से दो बच्चे हैं।
इमरान खान इससे पहले दो बार शादी कर चुके हैं और दोनों बार ही उनका तलाक हो गया है। उनकी पहली शादी ब्रिटिश मॉडल जेमिमा खान से हुई थी। इमरान और जेमिमा 1955 से 2004 तक साथ रहे इस शादी से उन्हें दो बेटे हैं। इमरान ने 2015 में दूसरी शादी बीबीसी की पूर्व प्रजेंटर रेहम खान से की जो कि मात्र 10 महीने में ही टूट गई।
इमरान की शादी की बात आते ही यह खबर वाइरल हो गई कि इमरान ने एक और बार शादी कर ली है। बात यह भी हो रही है कि इस खबर से इमरान नाराज़ हैं। लेकिन इमरान की तरफ से इस मामले में कोई जवाब नहीं आया है।
विद्यालय स्तरीय शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी समस्या है, अलग-अलग एजुकेशन बोर्ड द्वारा चलनेवाला अलग-अलग पाठ्यक्रम। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सभी एजुकेशन बोर्ड की बनी एक कमिटी द्वारा एक जैसा पाठ्यक्रम और एक जैसा एग्जाम पैटर्न रखने की सिफारिश की गई है, जिस पर जल्द ही एचआरडी मिनिस्ट्री दूसरे दौर की मीटिंग बुलाने की तैयारी में है।
अपनेे बच्चों की पढ़ाई के सन्दर्भ में अभिभावकों की सबसे बड़ी समस्या होती है कि वे किस एजुकेशन बोर्ड के विद्यालय में बच्चों को प्रवेश दिलाएं। कौन-सा बोर्ड उनके बच्चों के उज्वल भविष्य का निर्माण कर सकने में सक्षम होगा! इस तरह के अनेक प्रश्नों में विद्यार्थी व अभिभावक उलझे रहते हैं। ऐसे में यदि सभी एजुकेशन बोर्ड एक ही पाठ्यक्रम और एक समान एग्जाम पैटर्न रखें, तो यह समस्या हल हो सकती है। एचआरडी मिनिस्ट्री के एक अधिकारी के अनुसार, इस दिशा में कार्य चल रहा है। ऑल इंडिया और स्टेट एजुकेशन बोर्ड इस प्रस्ताव से सहमत हैं। उन्हीं की एक कमिटी ने यह प्रस्ताव रखा है कि कॉमन सिलेबस और कॉमन एग्जाम पैटर्न होने से विद्यार्थियों की बहुत सी दिक्कतें दूर हो जाएँगी। अब इस विषय पर अगली मीटिंग में बात होगी और जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम एक जैसा करने का प्रयास जारी है। गणित, रसायनशास्त्र और भौतिकी विषयों में तो यह बेहद ज़रूरी है। इसी के साथ सभी बोर्ड के लिए एक ही प्रकार के प्रश्नपत्र का प्रारूप बनाने की कोशिश भी की जा रही है। एचआरडी के ही एक अधिकारी के मुताबिक थिअरी और प्रैक्टिकल के अंक सभी बोर्डों में अलग-अलग है। कहीं प्रैक्टिकल के 50 प्रतिशत अंक हैं तो कहीं 30 प्रतिशत। इससे अलग-अलग बोर्ड के विद्यार्थियों के पूर्णांक में काफी अंतर हो जाता है। इसे समान करने की कोशिश की जा रही है। सभी जगह प्रात्यक्षिक को समान वेटेज मिले यह तय किया जाना है।
मनमानी वसूली जा रही फीस-
देश भर में अलग-अलग बोर्ड के नए-नए शिक्षा संस्थान खुल रहे हैं। जहाँ विभिन्न बोर्ड के पाठ्यक्रम में भिन्नता के कारण, किसी विशेष बोर्ड के पाठ्यक्रम को उच्च स्तर की शिक्षा बताकर के संस्थानों द्वारा मनमाना फीस वसूला जाती है। कुछ संस्थान ऐसे भी हैं, जो प्राथमिक स्तर पर ही 2 से 3 लाख रूपए वार्षिक फीस वसूल करते हैं, जो एक निम्न वर्गीय या मध्यमवर्गीय विद्यार्थी के लिए संभव नहीं है। इससे सभी वर्ग के विद्यार्थियों को समान शिक्षा का अवसर मिल पाना संभव नहीं है।
सरकारी व राज्य स्तरीय अनुदानित विद्यालयों में आईसीएसई व सीबीएसई पाठ्यक्रम की अपेक्षा निम्न स्तरीय पाठ्यक्रम के कारण विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है। यदि सभी बोर्ड एक ही पाठ्यक्रम व समान एग्जाम पैटर्न का पालन करेंगे, तो निश्चित रूप से सरकारी शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है व निजी शिक्षा संस्थानों की मनमानी पर अंकुश लग सकता है।
पूरे देश में एक समान पाठ्यक्रम व एक समान एग्जाम पैटर्न ‘सर्व शिक्षा अभियान’ के उद्देश्यों को सफल कर पाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।
हिंदी फिल्मों के प्रारंभिक दौर में नायक केंद्रित कथानकों का ही जोर रहा है, लेकिन नायिकाओं को केंद्रित कर फिल्में बनाने की शुरुआत व उन्हें कामयाबी के उच्च शिखर पर ले जाने का श्रेय जाता है, निर्देशक बिमल रॉय को। बिमल राय का नाम आते ही हमारे जहन में सामाजिक फ़िल्मों का ताना-बाना आँखों के सामने घूमने लगता है। हिंदी सिनेमा में प्रचलित यथार्थवादी और व्यावसायिक धाराओं के बीच की दूरी को पाटते हुए लोकप्रिय फ़िल्में बनाने वाले बिमल रॉय बेहद संवेदनशील और मौलिक फ़िल्मकार थे।
12 जुलाई 1909 को ढाका (बांग्लादेश) के जमींदार परिवार में जन्मे बिमल रॉय बचपन से ही अंतर्मुखी थे। बिमल दा की फिल्मों में एंट्री बतौर कैमरामैन हुई। बिमल दा ने बहुत अधिक समय तक कैमरामैन के तौर पर काम नहीं किया और 1944 में उन्होंने ‘उदयेर पौथे’ नाम की बांग्ला फिल्म का निर्देशन किया। सन् 1935 में उन्होंने के. एल. सहगल की फ़िल्म देवदास के सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। बिमल राय मानवीय अनुभूतियों के गहरे पारखी और सामाजिक मनोवैज्ञानिक थे। उनकी फिल्मों में कहीं से भी जबरदस्ती थोपी हुई या बड़बोलेपन की झलक नहीं मिलती। इसके अलावा सिनेमा तकनीक पर भी उनकी मज़बूत पकड़ थी, जिससे उनकी फ़िल्में दर्शकों को प्रभावित करती हैं और दर्शकों को अंत तक बांध कर रखने में सफल होती हैं। शायद यही वजह रही कि जब उनकी फ़िल्में आईं तो प्रतिस्पर्धा में दूसरा निर्देशक नहीं ठहर सका।
देशभक्ति और सामाजिक फ़िल्मों से अपना सफर शुरू करने वाले बिमल राय की कृतियों के विषय का फलक काफ़ी व्यापक रहा। बिमल राय ने अपनी फ़िल्मों में सामाजिक समस्याओं को तो उठाया ही, उनके समाधान का भी प्रयास किया और पर्याप्त संकेत दिए कि उन स्थितियों से कैसे निबटा जाए। ‘बंदिनी’ और ‘सुजाता’ फ़िल्मों का उदाहरण सामने है, जिनके माध्यम से वह समाज को संदेश देते हैं।
बिमल रॉय कमर्शियल सिनेमा में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। 1958 में आई ‘मधुमती’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे मुकाम तोड़ दिए। इस फिल्म का संगीत भी खूब लोकप्रिय हुआ। 1963 में आई फिल्म ‘बंदिनी’ इनके कैरियर में एक और मील का पत्थर साबित हुई। नूतन, अशोक कुमार और धर्मेन्द्र जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म उस समय में कमाई के मामले में दसवें पायदान पर पहुंच गयी।
बिमल राय स्वयं एक प्रतिभाशाली फ़िल्मकार होने के अलावा निःसन्देह प्रतिभा के अद्भुत पारखी भी थे। मूल रूप से संगीतकार के रूप में ख्यातिप्राप्त सलिल चौधरी के लेखन की ताकत को उन्होंने पहचाना, जिसके फलस्वरूप आज भारत के पास “दो बीघा ज़मीन” जैसा अमूल्य रत्न है। जैसे साहित्य के क्षेत्र में उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द के ‘गोदान’ का नायक ‘होरी’ अभावग्रस्त और चिर संघर्षरत भारतीय किसान का प्रतीक बन चुका है तो वैसे ही ग्रामीण सामंती व्यवस्था और नगरों के नृशंस पूँजीवाद के बीच पिसते श्रमिक वर्ग के प्रतिनिधि का दर्ज़ा ‘दो बीघा ज़मीन’ के ‘शम्भू’ को प्राप्त है। यदि प्रगतिशील साहित्य की तरह “प्रगतिशील सिनेमा” की बात की जाए तो बिमल राय निःसन्देह इसके पुरोधा माने जायेंगे।
बिमल रॉय ‘चैताली’ फिल्म पर काम कर रहे थे, लेकिन 1966 में 7 जनवरी को मुंबई, महाराष्ट्र में कैंसर से लड़ते हुए सिर्फ 56 साल की उम्र में इस संसार से विदा हो गये। परंतु जाने से पहले वो फिल्म जगत को अपनी नायाब फिल्मों का ऐसा उपहार दे गये, जो सदा ही फिल्म जगत को अपनी सुगंध से महकाता रहेगा।
पाकिस्तान के पेशावर में दिसंबर, 2014 में आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए हमले के मास्टरमाइंड के मारे जाने की खबर है। पाकिस्तान के अखबार डॉन की माने तो, मंसूर शनिवार को अफगानिस्तान में नांगराहर प्रांत के बंडार इलाके में मौजूद था, जब उस पर ड्रोन से हमला किया गया।
अखबार डॉन के अनुसार, पेशावर हमले का मास्टरमाइंड उमर मंसूर और एक अन्य आतंकी लीडर सैफुल्लाह को शनिवार को अफगानिस्तान में नांगराहर प्रांत के बंडार इलाके में अमेरिकी ड्रोन हमले में मार गिराया गया है। एक और अधिकारी ने बताया कि उसके पास मंसूर और सैफुल्ला के मारे जाने की विश्वसनीय रिपोर्ट है, जो सुसाइड हमलावरों का इंचार्ज रहा है।
अब तक टीटीपी या किसी अन्य स्वतंत्र स्रोत ने मंसूर की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यदि मंसूर की मौत की खबर सच्ची है, तो यह आतंकवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका होगी, क्योंकि मंसूर पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के लिए आतंकवादी हमलों व गतिविधियों के चलते चिंता का बड़ा कारण था। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भी 25 मई को उमर मंसूर को वैश्विक आतंकवादी करार दिया था, जिसके बाद मंसूर के उसकी हिट-लिस्ट में शामिल किए जाने का रास्ता साफ हो गया था।
गौरतलब है कि प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सात बंदूकधारयों ने पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल में 16 दिसंबर, 2014 को हमला किया था, जिसमें 122 स्टूडेंट्स और 22 शिक्षकों की मौत हो गई थी। यह पाकिस्तान में हुए सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक था।
केरल के कुछ युवकों के आतंकवादी ग्रुप इस्लामिक स्टेट में शामिल होने संबंधी खबरें आ रही हैं। इसी बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आज विधानसभा को सूचित किया कि कुल मिलाकर 21 लोग राज्य से लापता हैं।
विजयन ने विपक्षी नेता रमेश चेन्निथला द्वारा इस विषय को उठाये जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसके जवाब में बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन 21 युवकों में से 17 कासरगोड और चार पलक्कड़ से हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि ये लोग विभिन्न कारण बताते हुए अपने घरों से गए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये लोग सीरिया और अफगानिस्तान गए हैं और ये आईएस के शिविरों में रह रहे हैं। विजयन ने बताया कि कासरगोड के रहने वाले एक युवक फिरोज को इस घटनाक्रम के संबंध में कल मुंबई हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि वह मुद्दे को सुलझाने के लिए केंदीय एजेंसियों के सहयोग से जरूरी कदम उठायेगी।
अपने बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज बीजेपी नीत एनडीए सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार अधिक जीडीपी दिखाने के लिए आंकड़ों में हेरफेर कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि आर्थिक प्रगति जमीन पर नहीं दिख रही है।
जब दिग्विजय से अमेरिकी विदेश विभाग की इस टिप्पणी के बारे में पूछा गया कि संभव है कि भारत की उच्च विकास दर ज्यादा बतायी गयी हो, तब कांग्रेस महासचिव सिंह ने कहा, “जब से बीजेपी की सरकार आयी है, वे आंकड़ों में वैसे ही हेरफेर कर रहे हैं जैसे चीनी लोग कर रहे थे।” उन्होंने कहा, “मैं अमेरिकी विदेश विभाग से पूरी तरह से सहमत हूं।”
उन्होंने कहा, “आप आज इस देश में किसी भी कारोबारी से बात कर लीजिए, सब लोग महसूस करते हैं कि कारोबार में तेजी नहीं आ रही है। जार में पैसा नहीं है।” उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था तब बढ़ सकती है जब मांग और कारोबार हो, लेकिन सोना, भूमि, घरेलू उपकरणों, वस्त्रों और दोपहिया वाहनों की मांग में तेजी नहीं आ रही है, वहीं खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ गयी है।
सिंह ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार ने जीडीपी विकास निर्धारण के लिए आधार वर्ष में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि यहां तक कि मुख्य सांख्यिकीविद टीसीए अनंत जो इन आंकड़ों को तैयार करते हैं, ने खुद भी इस संबंध में टिप्पणी की है। सिंह ने दावा किया कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उच्च विकास दर यथार्थ में परिलक्षित नहीं होती।
अगले महीने से शुरू होने वाले रियो ओलंपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम की घोषणा कर दी गयी है, मगर पुरुष और महिला दोनों ही टीम के कप्तान भी बदल दिए गए हैं। पुरुष टीम की कमान सरदार सिंह की जगह अब पी श्रीजेश संभालेंगे। वहीं महिला टीम की कमान सुशीला चानू संभालेंगी।
इस प्रकार जीत के लिए टीम इंडिया के साथ होंगे डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह, डिफेंडर रुपिंदर पाल सिंह, डिफेंडर कोथाजीत सिंह, डिफेंडर सुरेंदर कुमार, मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ,मिडफील्डर सरदार सिंह, डिफेंडर रघुनाथ, मिडफील्डर उथप्पा, पी श्रीजेश (गोलकीपर और कप्तान), मिडफील्डर दानिश, फारवर्ड एसवी सुनील, देविंदर वाल्मिकी, अकाशदीप सिंह, चिंगलेनसाना सिंह, रमनदीप सिंह और निकिन थिमैया। विकास दहिया को गोलकीपर के तौर रिजर्व रखा जायेगा। उपकप्तान एसवी सुनील को बनाया गया है। हॉकी इंडिया ने ट्वीट कर उक्त जानकारी स्वयं दी है।
गौरतलब है कि सरदार सिंह लंबे समय से भारतीय टीम के कप्तान रहे हैं और लंदन ओलंपिक 2012 में भी उन्होंने टीम की अगुआई की थी। लेकिन पिछले कुछ समय से सरदार सिंह विवादों में थे। एक महिला ने उनपर यौन शोषण का आरोप लगाया था, जिसके बाद सरदार सिंह को सफाई देनी पड़ी थी।
सरदार सिंह को इससे पहले चैम्पियन्स ट्राफी से आराम दिया गया था, जहां भारत ने इतिहास का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इसके अगले टूर्नामेंट में सरदार सिंह की अगुआई में टीम वेलेंसिया में सिर्फ एक मैच जीत पाई और वह भी आयरलैंड की कमजोर टीम के खिलाफ। भारत इस दौरान दो मैच हारा जबकि दो ड्रा रहे। मन जा रहा है कि इसीलिए उनसे कप्तानी छीनी गई है।
दिल्ली। लगातार मुश्किल दौर से गुजर रही कांग्रेस पार्टी के लिए दिल्ली से एक अच्छी खबर है। असल में नेशनल हेराल्ड केस मामले में कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है।
आज दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 91 के तहत कोई भी आदेश सुनाने से पहले आरोपी का पक्ष सुना जाना जरूरी है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है।
इसके बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से इस मामले में बड़े ही कैजुअल तरीके से याचिका लगाई गई थी और निचली अदालत ने उसी तरह फैसला भी सुना दिया। हालांकि उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि स्वामी इस आदेश के खिलाफ अपील कर सकते हैं। इस आदेश के बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ साथ पूरी कांग्रेंस पार्टी ने थोड़ा राहत की साँस जरूर ली होगी। अब देखना होगा की क्या सुब्रमण्यम स्वामी इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करते हैं या नहीं!
लखनऊ। यूपी में विधानसभा चुनाव होने में अभी छः महीने से भी ज्यादा का समय बाकी है, लेकिन सूबे की राजनीति में समय समय पर सियासी हवाएँ गर्म देखी जा रही हैं। कल ऐसी ही एक तस्वीर तब सामने आई, जब तमाम अटकलों के बीच सोमवार देर शाम उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्मल खत्री ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया।
खत्री के इस्तीफे के बाद प्रदेश में फौरन नए कांग्रेस अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई है, इसके लिए पार्टी आलाकमान में फिर माथापच्ची शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस पार्टी यूपी में अपने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ़ ‘पीके’ की नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए किसी ब्राह्मण चेहरे के सुझाव पर गौर कर सकती है। इसके लिए प्रशांत किशोर कई हफ़्तों से पार्टी आलाकमान के ऊपर दबाव बना रहे थे। जिसमें उन्होंने अगले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए भी ब्राह्मण चेहरे को ही आवश्यक बताया था।
बताया जा रहा है कि मंगलवार को नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जायेगी और पार्टी प्रशांत किशोर के सुझाव को मान सकती है। आपको बता दें की नए प्रदेश अध्यक्ष की इस रेस में जितिन प्रसाद, प्रमोद तिवारी और राजेश मिश्रा का नाम सबसे आगे है। जिसमें प्रमोद तिवारी पार्टी की सबसे पहली पसन्द नजर आ रहे हैं ।
जानकारी के लिए बताते चलें कि प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को अपने परम्परागत वोट बैंक ब्राह्मण और मुस्लिम (बम) पर फोकस करने का सुझाव दिया था क्योंकि इस समय ये दोनों जातियां किसी भी पार्टी को जीत का ताज पहना सकती हैं। खासकर प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक पर हर पार्टी की नजर रहती है और ऐसे कांग्रेस इस वोट बैंक को कैसे छोड़ सकती है। जिसे मानते हुए गुलाम नबी आजाद को यूपी कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया। जिसके बाद से ही मीडिया में निर्मल खत्री के इस्तीफे को लेकर चर्चा थी।
गौर करने वाली बात यह है कि अगर सब कुछ प्रशांत किशोर की रणनीति के मुताबिक चला, तो राजेश मिश्रा को कांग्रेस की कमान मिलना तय माना जा रहा है। क्योंकि वो प्रशांत किशोर की पहली पसन्द है। हालांकि जितिन प्रसाद और प्रमोद तिवारी भी इस रेस में बने हुए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा को ध्यान में रखते हुए कमान से कौन सा तीर आजमाती है।
वेस्टइंडीज के क्रिकेट खिलाड़ी रामदीन के ट्वीट ने उनके लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। भारत के खिलाफ आगामी टेस्ट श्रृंखला के लिये टीम से बाहर किये जाने पर किया गया उनका ट्वीट वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड को पसंद नहीं आया। अब बोर्ड ने उनके खिलाफ कार्रवाई का मन बनाया है।
वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने कहा कि पूर्व कप्तान की हरकत टीम की नीति के खिलाफ है और इसी वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई का फैसला किया गया। विज्ञप्ति में कार्रवाई को लेकर खुलासा नहीं किया गया।
दरअसल रामदीन ने पिछले बुधवार को ट्विटर पर लिखा था कि उसे टीम से बाहर कर दिया गया है और इसके लिये उसने चयन समिति के नये अध्यक्ष कर्टनी ब्राउन को कसूरवार ठहराया था। उसने ट्विटर पर लिखा ,‘‘ जो व्यक्ति मुझसे कह रहा है कि मेरा 25 . 87 का औसत खराब रहा है और उसका खुद का 16 था। वह मुझे बल्लेबाजी सिखा रहा है, जिसने कभी अंतरराष्ट्रीय शतक नहीं जमाया। बेशर्म।”
उनके इस ट्वीट पर बोर्ड ने कहा, “यह वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड की नीति के खिलाफ है। इसी वजह से रामदीन के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया गया है।” भारत और वेस्टइंडीज के बीच चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला 21 जुलाई से शुरू होगी।