28.2 C
Mumbai
Wednesday, August 5, 2026
Home Blog Page 1188

लापता विमान की अब तक कोई खबर नहीं, चेन्नई जाएंगे रक्षामंत्री पर्रिकर

शिखा पाण्डेय,

भारतीय वायुसेना के विमान को लापता हुए 24 घंटे से अधिक समय हो चुका है, परंतु अब तक उसका कोई पता नहीं चल पाया है। गुमशुदगी पर चल रहे अभियान का मुआयना करने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर चेन्नई जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना का AN 32 विमान चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जाते वक्त लापता हो गया था। इस प्लेन में 29 लोग सवार हैं। भारतीय वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा व्यापक खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया गया है, जिसमें एक पनडुब्बी, आठ विमान और 13 पोत लगाए गए हैं। रक्षा मंत्री इसी पर नजर रखने के लिए आज चेन्नई जा रहे हैं।

पर्रिकर ने कहा है कि लापता विमान और उसमें सवार कर्मियों का पता लगाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल विमान की खोज और राहत के लिए वायुसेना और नौसेना के विमान लगा दिए गए हैं। एक पी-8-आई और एक डोर्नियर को बंगाल की खाड़ी में भेज दिया गया है। प्लेन में एक एमरजेंसी बेकन लोकेटर है, जो क्रैश होने की स्थिति में सक्रिय हो जाता है। नौसेना ने एक पनडुब्बी को लोकेटेर द्वारा पानी के नीचे हुए किसी भी तरह के ट्रांसमिशन की जांच के लिए भेजा है। 13 युद्धपोत जिसमें करमुख, घड़ियाल, ज्योति और कूथर शामिल हैं, उन्हें भी इस अभियान में लगा दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक एयरक्राफ्ट से आखिरी बातचीत टेकऑफ के 16 मिनट बाद हुई थी और पायलट ने कहा था कि सबकुछ ‘सामान्य’ है। अचानक 23 हज़ार फुट से प्लेन की ऊंचाई में कमी आई। इस विमान में भारतीय वायुसेना के 12 जवान, 6 क्रू-मेंबर, 1 नौसैनिक, 1 सेना का जवान और एक ही परिवार के 8 सदस्य मौजूद हैं और यह चेन्नई के पास तंबारम एयरबेस से सुबह 8.30 बजे पोर्ट ब्लेयर के लिए रवाना हुआ था। इसे सुबह 11.15 के करीब पोर्ट ब्लेयर लैंड होना था, जो नहीं हो पाया।

रूस निर्मित एएन 32 विमान के साथ हुई ये घटना पहली बार नहीं हुई है। 1999 में भारतीय वायुसेना का एएन 32 विमान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने से ठीक पहले क्रैश हो गया था, जिसमें 21 लोगों की मौत हुई थी। भारतीय वायुसेना में इस वक्त 100 से भी ज़्यादा एएन 32 विमान सेवारत हैं। इन विमानों की खासियत है कि यह चार घंटे तक दोबारा ईंधन भरे बगैर भी उड़ सकते हैं और यह हर मौसम के लिए उपयुक्त होते हैं।

जर्मनी : शॉपिग मॉल में फायरिंग, 15 की मौत 10 घायल

अब्दुल फ़हद,

जर्मनी के म्यूनिख शहर में ओलंपिया शॉपिंग मॉल के अंदर अंधाधुंध फायरिंग की खबर सामने आई है। लोकल मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, इस हमले में अब तक 15 लोगों की जान गई है, जबकि 10 अन्य घायल हुए हैं।

म्यूनिख पुलिस ने ट्वीट करके बताया कि एरिया में बड़ा पुलिस ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जर्मनी के इंटीरियर मिनिस्टर थॉमस दे मेजेर ने बताया कि हमलावर एक टीनेज था, जो आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से इंस्पायर हो सकता है। हालाँकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

मिली जानकारी के मुताबिक़, एक हथि‍यारबंद हमलावर ने मॉल में घुसते ही धुआंधार फायरिंग की। फायरिंग के बाद मॉल में अफरातफरी मच गई। शॉपिंग मॉल में फायरिंग की सूचना पाते ही पुलिस वहां पहुंच गई है। मॉल को चारों तरफ से घेर लिया गया। हालाँकि स्थानीय पुलिस ने इस हमले में अब तक एक शख्स की मौत और 10 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। जबकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक कुल 15 लोगों की मौत हुई है।

जन्मदिन विशेष: आज भी फाइलों में कैद है आज़ाद का क़ातिल

अनुज हनुमत,

“तुम्हारा नाम क्या है?”
“मेरा नाम आज़ाद है।”
“तुम्हारे पिता का क्या नाम है?”
“मेरे पिता का नाम स्वाधीन है।”
“तुम्हारा घर कहाँ पर है?”
“मेरा घर जेलखाना है।”

ये शब्द थे बालक चन्द्रशेखर के मजिस्ट्रेट खरेघाट के सामने । चन्द्रशेखर जी उस समय मात्र चौदह वर्ष आयु के थे। मजिस्ट्रेट मि. खरेघाट इन उत्तरों से चिढ़ गए। उन्होंने चन्द्रशेखर को पन्द्रह बेंतों की सज़ा सुना दी।जल्लाद ने अपनी पूरी शक्ति के साथ बालक चन्द्रशेखर की निर्वस्त्र देह पर बेंतों के प्रहार किए। प्रत्येक बेंत के साथ कुछ खाल उधड़कर बाहर आ जाती थी। पीड़ा सहन कर लेने का अभ्यास चन्द्रशेखर को बचपन से ही था। यही चंद्रशेखर आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता के के लिए चलाये गए अभियान के अगुवा बने।

जी हाँ भारत माता के ऐसे वीर सपूत को भी षड़यंत्र का सामना करते हुए अपनी जान गंवानी पड़ी। इस षड्यंत्र के पीछे किसका हाथ है, इसकी पूरी जानकारी लखनऊ मे रखी फाइलों मे दर्ज है लेकिन आज तक उसका जिक्र किसी ने नहीं किया। आज पंडित चंद्रशेखर आजाद की जयंती है।

कहा जाता है कि आजाद के इस तरह अपनी जान दे देने का रहस्य एक फाइल में छुपा है। दरअसल चंद्रशेखर आजाद की मौत की कहानी भी उतनी ही रहस्यमयी है, जितनी की नेताजी सुभाष चंद्र बोस की। कहते हैं कि आजाद की मौत से जुडी एक गोपनीय फाइल आज भी लखनऊ के सीआइडी ऑफिस में रखी है। इस फाइल में उनकी मौत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें दर्ज हैं। फाइल का सच सामने लाने के लिए कई बार प्रयास भी हुए, पर हर बार इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया गया। इतना ही नहीं भारत सरकार ने एक बार इसे नष्ट करने के आदेश भी तत्कालीन मुख्यमंत्री को दिए थे। लेकिन, उन्होंने इस फाइल को नष्ट नहीं कराया।

chandrashekhar azad

आजाद की मौत से जुड़ी इस फाइल में इलाहाबाद के तत्कालीन अंग्रेज पुलिस अफसर नॉट वावर के बयान दर्ज है। उसमें कहा गया है कि नॉट वावर की ही टुकड़ी ने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क मे बैठे आजाद को घेर लिया था और एक भीषण गोलीबारी के बाद आजाद ने खुद को गोली मार ली थी। नॉट वावर ने अपने बयान मे कहा है कि वह उस समय खाना खा रहे थे। तभी उन्हें भारत के एक बड़े नेता का मैसेज आया। आज भी ये महज एक प्रश्न बनकर ही रह गया है कि आखिर कौन था वो बड़ा नेता जिसकी सूचना पर चंद्रशेखर आजाद को पार्क में पुलिस ने घेर लिया ।

नॉट वावर को बताया गया कि आप जिसकी तलाश कर रहे हैं, वह इस समय अल्फ्रेड पार्क मे है और वह वहां तीन बजे तक रहेगा। फिर नॉट वावर ने बिना देरी किए पुलिस बल लेकर अल्फ्रेड पार्क को चारों ओर से घेर लिया और आजाद को आत्मसमर्पण करने को कहा। आजाद ने अपना माउजर निकालकर एक इंस्पेक्टर को गोली मार दी। इसके बाद नॉट वावर ने पुलिस को गोली चलाने का आदेश दिया। उन्होंने अपने बयान में बताया है कि पांच गोली से आजाद ने हमारे पांच लोगों को मारा फिर छठी गोली अपनी कनपटी पर मार ली। कुलमिलाकर पण्डित चंद्रशेखर आजाद ने जिस ‘आजाद’ अंदाज में अपनी पूरी जिंदगी को जिया और बाद में मृत्यु को भी उसी ‘आजाद’ अंदाज में प्राप्त किया, ऐसे अमर सपूत मरा नही करते बल्कि हर दिल अमर हुआ करते हैं।

27 फ़रवरी को चन्द्रशेखर आज़ाद के रूप में देश का एक महान क्रान्तिकारी योद्धा देश की आज़ादी के लिए अपना बलिदान दे गया, शहीद हो गया। लेकिन आज भी उन फाइलों में एक ऐसा सच दबा है, जिसको अभी तक फाइल से बाहर नही लाया गया। जिस किसी ने चन्द्रशेखर आजाद जी के खिलाफ षड्यंत्र करके पुलिस की मुखबिरी की थी, जिसकी वजह से उनकी जान चली गई थी। ऐसे लोगों की करतूत, उसका असली चेहरा सबके सामने आना चाहिए।

पाक के नापाक इरादे, देख रहा कश्मीर का ख़्वाब

शिखा पाण्डेय,

पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नापाक इरादे बढ़ते ही जा रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पीएमएल-एन को विधानसभा चुनावों में मिली भारी जीत के बाद शरीफ ने आज कहा है कि पाकिस्तान उस दिन का इंतजार कर रहा है जब कश्मीर उसका हिस्सा बनेगा।

‘डॉन न्यूज’ के अनुसार, मुजफ्फराबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा, “हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा।” जनसभा को संबोधित करते हुए शरीफ ने कश्मीर के लोगों से अनुरोध किया,” उन्हें ना भूलें जो लोग आजादी के आंदोलन के लिए कश्मीर में अपनी जान बलिदान कर रहे हैं।”

शरीफ ने कहा, “आजादी के इस आंदोलन को रोका नहीं जा सकता और यह आंदोलन सफल होगा। आपको पता है कि कैसे उन्हें पीटा जा रहा है और उनकी हत्या की जा रही है। हमारी दुआएं उनके साथ हैं और हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बन जाएगा।”

पीएमएल-एन पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है। विधानसभा के 41 प्रत्यक्ष सीटों पर हुए चुनाव का अनौपचारिक परिणाम बताता है कि पार्टी को अभूतपूर्व जीत मिली है। नवाज शरीफ ने पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के लोगों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और अपनी सेहत और सलामती की खातिर दुआ करने के लिए भीड़ का शुक्रिया अदा किया। बता दें कि कल हुए चुनावों में प्रधानमंत्री शरीफ की पार्टी को भारी जीत मिली है। चुनाव में कुल 26 दलों और 423 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था।

आतंकी हाफ़िज़ ने दी भारत को धमकी, कहा- गिलानी की बात स्वीकार करो नहीं तो होगा युद्ध

शिखा पाण्डेय,

जमात-उद-दावा के सरगना हाफ़िज़ सईद ने खुद खुलासा किया है कि वह मारे गए हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के संपर्क में था। साथ ही सईद ने अलगाववादी नेत्री आसिया अंद्राबी के साथ अपने सम्पर्क की बात भी कबूल की है।

बता दें कि कश्मीर में दुख्तरन-ए-मिल्लत एक चरमपंथी महिला संगठन है। यह संगठन पाकिस्तान समर्थक है और पाकिस्तानी झंडा फहराता है। आसिया इस संगठन की प्रमुख है। समाचार एजेंसी एएनआई ने कुछ एक्सक्लूसिव वीडियो जारी किए हैं, जिसमें हाफिज सईद आसिया को बहन के तौर पर संबोधित कर रहा है।

वीडियो में सईद ने कहा, “बुरहान वानी ने अपनी मौत से कुछ दिनों पहले मुझे फोन किया था और कहा कि उसकी अंतिम इच्छा मुझसे बात करने की है।” सईद के मुताबिक वानी ने उसे बताया कि उसकी इच्छा पूरी हो गई है और वह ‘शहादत’ के लिए तैयार है। वीडियो के मुताबिक सईद ने कहा कि उसकी बात बहन आसिया अंद्राबी के साथ हुई और चर्चा के दौरान वह 15 मिनट तक रोती रही। सईद ने उसे धीरज बंधाते हुए कहा, “रो मत। हम लोग अपने रास्ते पर हैं।”

सईद ने भारत को धमकी देते हुए कहा कि कश्मीर के समाधान के लिए नई दिल्ली हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के 4 सूत्री फॉर्मूले को भारत स्वीकार करे अथवा युद्ध के लिए तैयार रहे।

अलीगढ़ में भी कैराना जैसे हालात, पुलिस की भूमिका पर सवाल

प्रमुख संवाददाता,

कैराना मुद्दे के बाद अब अलीगढ़ से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की खबर आई है। ख़बरों के अनुसार, अलीगढ़ में दो समुदायों के बीच झड़प के बाद एक पक्ष के लोगों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर संपत्ति बिकाऊ होने के बोर्ड टांग दिए हैं। अलीगढ़ में इस बोर्ड पर लिखा है “जान है तो जहान है, ये दुकान बिकाऊ है।” इस मामले के बाद एक बार फिर हिंदू पलायन को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

उल्लेखनीय है कि अलीगढ़ के बाबरी मंडी में ये बोर्ड जिन घरों और दुकानों के बाहर लगे हैं, वो हिंदुओं के बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि छेड़छाड़ और मारपीट की घटनाओं से तंग आकर कुछ हिंदू परिवार यहां से पलायन कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बुधवार रात को बाबरी मंडी इलाके में एक महिला से छेड़छाड़ की गई और विरोध करने पर उसके परिवार वालों पर पत्थरबाजी की गई। इस घटना को लेकर गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ।

लोगों का आरोप है कि पुलिस जबरदस्ती मकान और दुकान बिकाऊ हैं के बोर्ड हटवा रही है, ताकि मामला ज्यादा न गरमाए। पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लग रहा है। बाबरी मंडी के स्थानीय निवासियों के अनुसार वहाँ के हालात इतने भयावह है कि स्कूल की बच्चियों पर भी छींटाकशी होती है। उधर पुलिस इसे मामूली छेड़छाड़ का मामला बताकर आरोपियों की गिरफ्तारी की बात कह रही है। हालांकि पुलिस ने माना है कि इस वजह से इलाके में तनाव है।

गौरतलब है कि कैराना में हिंदुओं के कथित पलायन को लेकर काफी बवाल मचा था। कुछ नामों की लिस्ट भी जारी की गई थी, जो बाद में पूर्ण रूप से सही साबित नहीं हुई। अब इस बात की जांच होनी ज़रूरी है कि आखिर अलीगढ़ मामले में कितनी सच्चाई है और यदि सच्चाई है तो प्रदेश सरकार द्वारा उस पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

मुश्किल में आप सांसद मान, हो सकती है कड़ी कार्रवाई

शिखा पाण्डेय,

आप सांसद भगवंत मान द्वारा संसद की आंतरिक सुरक्षा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के मुद्दे पर भगवंत मान ने लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से मिलकर माफी मांग ली है। लेकिन सिर्फ मांगी मांग लेने से यह विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा।

सुमित्रा महाजन ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जवाब में कहा ” भगवंत मान ने कहा कि वो माफी मांगने के लिए तैयार हैं, लेकिन ये मुद्दा ऐसा नहीं है जो सिर्फ माफी मांगने से खत्म हो जाए। यह विवाद सिर्फ माफी से नहीं सुलझेगा। यह संसद की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। सभी संसद सदस्य नाराज़ हैं। मुझे मान के शराब संबंधी भी शिकायत मिली है।” सुमित्रा ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई सभी राजनीतिक पार्टियों के सदस्यों के साथ परामर्श के बाद की जाएगी।

सुमित्रा ने कहा,” यदि मामला संसद के भीतर का होता, तो मैं शीघ्र फैसला ले चुकी होती। यह एक गंभीर मामला है। मैं सबसे बात कर रही हूं कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाए।”

वहाँ पत्रकारों से बात करते हुए भगवंत मान ने कहा,” मैं स्पीकर मैडम से मिला, मैंने उनसे कहा कि मुझे अपनी बात रखने का मौका दिया जाए। मेरी मंशा कभी भी संसद की सुरक्षा को खतरे में डालने की नहीं थी। मैंने वादा किया है, मैं ऐसी गलती दोबारा कभी नहीं करूंगा। मैं संसद शराब पीकर नहीं आता।” आपको बता दें कि आप से निलंबित चल रहे सांसद हरिंदर खालसा ने शुक्रवार को यह मांग की कि सांसद भगवंत मान के करीब से शराब की महक आती है, इसलिए उनकी सीट उनके पास से हटाकर कहीं और कर दी जाए।

गौरतलब है कि मान ने  सभी सुरक्षा घेरों को पार कर संसद में प्रवेश का एक वीडियो फिल्माया थाऔर इसे सोशल मीडिया पर डाल दिया था। वाइरल हुए वीडियो में मान को प्रवेश द्वार दर्शाते दिखाया गया है, जिससे सांसद संसद भवन में प्रवेश करते हैं और वह कह रहे हैं कि कितनी मजबूत सुरक्षा है। भगवंत मान के वीडियो बनाने को लेकर शुक्रवार को संसद में जमकर हंगामा हुआ है जिसके चलते सदन की कार्रवाई सोमवार तक स्थगित कर दी गई।

मायावती भक्तों ने किया उपद्रव, बदले में बकी गाली

आनंद द्विवेदी,

भाजपा के दयाशंकर सिंह ने मायावती के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था, जिसके एवज में उनका 6 वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासन किया गया। प्रतिशोध की ज्वाला में जल रहे बसपाइयों ने भी वही दुष्कर्म कर डाला, जिसके लिए वो उपद्रव मचाते रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लखनऊ में सैकड़ों बसपाइयों ने गालियां बरसाते हुए आपत्तिजनक नारे लगाए। उधर दिल्ली में मायावती ने भी खुद को देवी घोषित कर डाला। उन्होंने कहा कि कमजोर तबका मुझे बहन के साथ देवी की तरह मानता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वहीं मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विरोध ने उपद्रव का स्वरुप ले लिया। गुरुवार को बसपाई उपद्रवियों ने ग्वालियर शहर में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसने बाद में उपद्रव का स्वरुप ले लिया। बसपाइयों का ये उपद्रव तकरीबन दो घंटे तक चला। इन्होंने पड़ाव चौराहा, फूलबाग चौराहा, अम्बेडकर उद्यान के सामने तथा महाराज बाड़ा पर राहगीरों से मारपीट कर डाली और वाहनों में तोड़फोड़ की।

उपद्रवियों का मन इतना बढ़ा था कि इन्होंने महिलाओं और स्कूली बच्चों को भी नहीं बख्शा। जुलूस के दौरान उपद्रवी गाड़ियों में खाली बीयर की बोतलें व डंडे भरकर लाये थे। शहर पुलिस ने बसपा जिलाअध्यक्ष समेत नौ पर नामजद व 200 अन्य अज्ञात के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज़ किया है।

इस मामले में बसपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि, “ये उपद्रव बसपा के नहीं भाजपा के कार्यकर्ताओं ने किया, जो पार्टी की छवि खराब करना चाहते हैं।”

अब लागू होनी चाहिए ‘नेता पात्रता परीक्षा’!

अनुज हनुमत,

हमारे देश में नेता आपस में ही गाली-गाली खेल रहे हैं, जिससे देश का माहौल बिगड़ता जा रहा है। अपने वोट बैंक को साधने के लिए नेता अब किसी भी हद तक उतरने को तैयार हैं। कहते हैं कि किसी भी नियम या कानून को अगर सही समय पर लागू किया जाए, तो उसका प्रभाव आने वाले भविष्य को भी सुरक्षित करता है। आज देश की मौजूदा राजनीति के स्तर को अगर बचाना है तो अब एक ऐसे नए क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता है, जिसके द्वारा राजनीति करने वाले नेताओं की क्वालिटी को बढ़ाया जा सके।

नेताओं के लिए भी एक न्यूनतम अर्हता निश्चित की जानी चाहिए। जिसके लिए पूरे देश में ‘नेता पात्रता परीक्षा’ का आयोजन किया जाना चाहिए। राजनीति  एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा जनता अपना जनप्रतिनिधि चुनकर उनके द्वारा अपने अधिकारों को प्राप्त करती है। इन्हीं जनप्रतिनिधियो को ‘नेता’ कहते हैं। कहा जाता है कि राजनीति और नेतागीरी सीखने की कोई पाठशाला नहीं होती, बल्कि ये तो व्यक्ति के अंदर ही होता है। क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।

देश में मौजूदा समय की राजनीति का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिसके लिए कहीं न कहीं नेता ही जिम्मेदार हैं। इस कारण हमारे समाज का स्तर भी गिरता चला जा रहा है। अगर राजनीति के स्तर को बढ़ाना है, तो हमें राजनीति में कुछ बड़े नियमों को लागू करना होगा। नेताओं के लिए भी राजनीति में प्रवेश करने के लिए एक न्यूनतम अर्हता निश्चित की जानी चाहिए। जिस प्रकार शिक्षकों को नए शिक्षा कानून के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी होती है, उसी प्रकार नेताओं के लिए भी ‘नेता पात्रता परीक्षा अर्थात LET’ होनी चाहिए। इसे अनिवार्य रूप से लागू किया किया चाहिए।

एक नेता समाज का नेतृत्व करता है और समाज का स्तर दिन-ब-दिन जिस प्रकार गिरता जा रहा है, उसे देखकर समय समय पर आवाज़ें भी उठी है कि नेताओं का कुछ-न-कुछ पढ़ा लिखा होना बहुत अनिवार्य है। नेताओं के लिए भी न्यूनतम अर्हता के रूप में नेता पात्रता परीक्षा आयोजित कराई जाए। जिसके अंतर्गत नेताओं से जनता, समाज और देश के हितों से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाएँ। इसे अनिवार्य रूप से पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। इस परीक्षा को पास करने वाले व्यक्ति को एक सर्टिफिकेट दिया जाये,  जिसे लेकर वह किसी भी पार्टी से चुनाव लड़ सकता हो। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाए, जो पूरे देश में एक साथ इस परीक्षा को आयोजित करा सके। इसको पास करने वाला ही किसी भी पार्टी से चुनाव लड़े।

भारतीय राजनीति का गिरता स्तर सचमुच गहरी चिंता का विषय है। एक दौर था जब विपक्षी दलों के प्रति भी बेहद आदर एवं सम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता था। आज सत्ता पक्ष हों या विरोधी दलों के नेता, दोनों की जुबान बुरी तरह से फिसलने लगी है। राजनीतिक सहिष्णुता नाम मात्र को देखने को मिलती है। दरअसल अगर नेता पात्रता परीक्षा को अनिवार्य रूप से भारतीय राजनीति में लागू कर दिया जाये तो निःसन्देह देश में बहुत बड़ा परिवर्तन होगा।

29 जवानों के साथ भारतीय नौसेना का विमान हुआ लापता

अभिजीत मिश्र,

भारतीय सेना का जहाज़ एएन 32 चेन्नई ताम्बरम से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद लापता हो गया है।
ताम्बरम से सुबह 8:30 पर विमान के उड़ान भरते ही कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। एएन 32 में कुल 29 लोग सवार थे, जिनमें से 6 क्रू मेंबर्स, अंडमान निकोबर एवं नोसेना के जवान सवार थे ।

विमान को 1300 किलोमीटर का सफर तय करना था, जो उस विमान के लिए बहुत ही कम समय में तय हो सकता है। विमान की टॉप स्पीड 2500 किलोमीटर प्रति घंटा है। विमान को अपनी मंजिल तक 11:30 तक पहुंचना था, मगर रास्ते में ही विमान लापता हो गया।

करीब 8 घंटे से विमान की तलाश की जा रही है। वायुसेना के 2 लड़ाकू विमान C130 और P81 और नौ सेना के 4 जंगी जहाज की मदद से विमान की खोज की जा रही है। अभी तक विमान के मिलने की कोई खबर नहीं आई है। विमान का आखिरी सिग्नल धरती से करीब 30 मीटर दूर से मिला था।