अब लागू होनी चाहिए ‘नेता पात्रता परीक्षा’!

अनुज हनुमत,

हमारे देश में नेता आपस में ही गाली-गाली खेल रहे हैं, जिससे देश का माहौल बिगड़ता जा रहा है। अपने वोट बैंक को साधने के लिए नेता अब किसी भी हद तक उतरने को तैयार हैं। कहते हैं कि किसी भी नियम या कानून को अगर सही समय पर लागू किया जाए, तो उसका प्रभाव आने वाले भविष्य को भी सुरक्षित करता है। आज देश की मौजूदा राजनीति के स्तर को अगर बचाना है तो अब एक ऐसे नए क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता है, जिसके द्वारा राजनीति करने वाले नेताओं की क्वालिटी को बढ़ाया जा सके।

नेताओं के लिए भी एक न्यूनतम अर्हता निश्चित की जानी चाहिए। जिसके लिए पूरे देश में ‘नेता पात्रता परीक्षा’ का आयोजन किया जाना चाहिए। राजनीति  एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा जनता अपना जनप्रतिनिधि चुनकर उनके द्वारा अपने अधिकारों को प्राप्त करती है। इन्हीं जनप्रतिनिधियो को ‘नेता’ कहते हैं। कहा जाता है कि राजनीति और नेतागीरी सीखने की कोई पाठशाला नहीं होती, बल्कि ये तो व्यक्ति के अंदर ही होता है। क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।

देश में मौजूदा समय की राजनीति का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिसके लिए कहीं न कहीं नेता ही जिम्मेदार हैं। इस कारण हमारे समाज का स्तर भी गिरता चला जा रहा है। अगर राजनीति के स्तर को बढ़ाना है, तो हमें राजनीति में कुछ बड़े नियमों को लागू करना होगा। नेताओं के लिए भी राजनीति में प्रवेश करने के लिए एक न्यूनतम अर्हता निश्चित की जानी चाहिए। जिस प्रकार शिक्षकों को नए शिक्षा कानून के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी होती है, उसी प्रकार नेताओं के लिए भी ‘नेता पात्रता परीक्षा अर्थात LET’ होनी चाहिए। इसे अनिवार्य रूप से लागू किया किया चाहिए।

एक नेता समाज का नेतृत्व करता है और समाज का स्तर दिन-ब-दिन जिस प्रकार गिरता जा रहा है, उसे देखकर समय समय पर आवाज़ें भी उठी है कि नेताओं का कुछ-न-कुछ पढ़ा लिखा होना बहुत अनिवार्य है। नेताओं के लिए भी न्यूनतम अर्हता के रूप में नेता पात्रता परीक्षा आयोजित कराई जाए। जिसके अंतर्गत नेताओं से जनता, समाज और देश के हितों से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाएँ। इसे अनिवार्य रूप से पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। इस परीक्षा को पास करने वाले व्यक्ति को एक सर्टिफिकेट दिया जाये,  जिसे लेकर वह किसी भी पार्टी से चुनाव लड़ सकता हो। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाए, जो पूरे देश में एक साथ इस परीक्षा को आयोजित करा सके। इसको पास करने वाला ही किसी भी पार्टी से चुनाव लड़े।

भारतीय राजनीति का गिरता स्तर सचमुच गहरी चिंता का विषय है। एक दौर था जब विपक्षी दलों के प्रति भी बेहद आदर एवं सम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता था। आज सत्ता पक्ष हों या विरोधी दलों के नेता, दोनों की जुबान बुरी तरह से फिसलने लगी है। राजनीतिक सहिष्णुता नाम मात्र को देखने को मिलती है। दरअसल अगर नेता पात्रता परीक्षा को अनिवार्य रूप से भारतीय राजनीति में लागू कर दिया जाये तो निःसन्देह देश में बहुत बड़ा परिवर्तन होगा।

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