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Wednesday, August 5, 2026
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“प्रियंका ने बसों की जगह भेजी ऑटो रिक्शा, ट्रैक्टर, स्कूटर की लिस्ट” -भाजपा का आरोप

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

प्रियंका वाड्रा द्वारा श्रमिकों के लिए एक हज़ार बसों की सहायता का मामला हास्यास्पद मोड़ लेता जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक ट्वीट में लिखा कि प्रियंका वाड्रा ने श्रमिकों की सहायता के लिए एक हज़ार बसों के इंतज़ाम की बात कही थी, लेकिन उनकी लिस्ट में एम्बुलेंस, कार, रिक्शा और मोटरसाईकिल शामिल हैं।

प्रियंका वाड्रा द्वारा श्रमिकों की सहायता के लिए हज़ार बस देने के वायदे को भाजपा हवाबाज़ी बता रही है। भाजपा नेता संबित पात्रा ने कहा कि यह देश के श्रमिकों का मखौल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जब देने की मंशा न हो, तो उस पर राजनीति करने की क्या आवश्यकता है। इससे देश के श्रमिकों का अपमान होता है, जो कि निंदनीय है। बसों की जगह रिक्शा और मोटरसाईकिल का नम्बर देना अशोभनीय है।

ज्ञातव्य है कि श्रमिकों की सहायता के लिए कांग्रेस नेत्री प्रियंका वाड्रा ने यूपी सरकार को एक हज़ार बस देने की बात कही थी, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वीकार कर लिया था।

प्रेसीडेंट ट्रम्प आगबबूला, WHO की फ़ंडिंग पर लगेगी स्थाई रोक

वर्ल्ड अफेयर्स | Navpravah Desk

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को एक बार फिर से झटका दिया है। उन्होंने संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ग्रेबियेसस को पत्र लिखकर कहा है कि अगर अगले 30 दिनों में संगठन कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो अमेरिका अपनी फंडिंग स्थायी रूप से रोक देगा।

यही नहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने संगठन में अपनी सदस्यता पर भी पुनर्विचार करने की बात कह डाली। दुनियाभर में कोरोना फैलने पर संगठन के रूख को लेकर अमेरिका नाराज़ है। ग़ौरतलब है कि अमेरिका पहले ही डबल्यूएचओ की फ़ंडिंग अस्थायी रूप से रोक चुका है।

अमेरिका ने यह भी आरोप लगाया है कि चीन के कहने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया को महामारी के बारे में देरी से बताया। हालांकि ऐसे आरोपों के विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सिरे से खारिज किया है।

इसके पहले भी डोनाल्ड ट्रम्प डबल्यू॰एच॰ओ॰ पर कई हमले कर चुके हैं। वे संगठन पर चीन के प्रति पक्षपाती होने का आरोप लगा चुके हैं। कई बार ट्रम्प यह भी कह चुके हैं कि डबल्यू॰एच॰ओ॰ को हम सब से अधिक पैसे देते हैं, लेकिन संगठन चीन के सुर में सुर मिलाता नज़र आता है।

कोरोना वायरस से अब तक अमेरिका में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं और संक्रमण का आंकड़ा भी यहीं सबसे ज्यादा है। अमेरिका में अब तक करीब एक लाख लोगों की मौत हो चुकी है और 15 लाख से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं।

भारत में कोरोना संक्रमण के बाद अब ख़तरनाक कावासाकी की दस्तक

हेल्थ डेस्क | navpravah.com

भारत की अभी कोरोना से लड़ाई ख़त्म हुई नहीं कि एक और ख़तरनाक बीमारी के दस्तक से लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। कावासाकी नामक एक बीमारी भारत में घुस चुकी है, जिसने अपना पहला शिकार बनाया है चेन्नई के एक आठ साल के बच्चे को।

यह बच्चा हाल ही में कोरोना संक्रमण के चलते चेन्नई के कांची कामकोटि चाइल्डस ट्रस्ट हॉस्पिटल लाया गया था, जहाँ वह आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। इस बच्चे में जहरीले शॉक सिंड्रोम (शरीर में उत्पन्न होने वाले विषाक्त पदार्थों) और कावासाकी बीमारी (जिससे रक्त वाहिकाओं में सूजन आती है) के लक्षण मिले थे। मात्र आठ साल के बच्चे में कई बीमारियों के लक्षण मिले हैं, जिसमें से एक कावासाकी भी है। वहीं शुरुआती जांच में बच्चे के अंदर सेप्टिक शॉक के साथ निमोनिया, कोविड-19 पेनुमोनिटिस, कावासाकी रोग और विषाक्त शॉक सिंड्रोम के संभावित लक्षण मिले थे।

हालाँकि, चिकित्सकों ने बताया कि इस मामले में अच्छी बात यह है कि बालक को कोरोना संक्रमण समेत हाइपर-इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम को इम्युनोग्लोबुलिन और टोसीलीजुंबैब जैसी दवाओ से ठीक कर दिया गया है। वहीं अस्पताल ने यह भी दावा किया है कि पीड़ित बच्चे की गहन देखरेख की गई है और 2 सप्ताह में वह स्वस्थ हो गया है।

एक एक्सपर्ट ने बताया कि हाल ही में लंदन में भी आठ बच्चों में यह बीमारी मिली थी और वहीं अमेरिका में भी कई बच्चों में इसकी संक्रमण की शिकायतें मिली हैं।

क्या है कावासाकी?

कावासाकी शरीर की रक्तवाहिनियों से जुड़ी बीमारी है। इसके चलते रक्तवाहिनी की दीवारों में सूजन पैदा होती है, जो हृदय में रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को बहुत कमजोर कर देती है।इसके चलते अटैक होने की भी संभावना रहती है। शुरुआती लक्षणों में खार के साथ त्वचा पर चकत्ते दिखना, हाथों और गले में सूजन और आंखों का लाल होना शामिल है।

भारत: कोरोना मरीजों की संख्या एक लाख के पार

हेल्थ डेस्क | navpravah.com

अब भारत में कोरोना मरीजों की संख्या एक लाख के पार हो चुकी है। यहां 30 जनवरी को पहला संक्रमण का केस सामने आया था, आज देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 101139 हो चुकी है। इस संक्रमण से अब तक 3163 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 39173 लोग इस संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं, और देश में अभी 58802 कोरोना के एक्टिव पेशेंट हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

पिछले 24 घंटे में 4970 नए मामले सामने आए हैं, वहीं 134 मरीजों की मौत हुई है। भारत में मौत की दर 3.12 प्रतिशत है, भारत के अलावा 10 देशों में एक लाख से ज्यादा मरीज हैं। महाराष्ट्र में कोरोना के मरीज सबसे ज्यादा हैं, यहां मरीजों की संख्या 35 हजार के पार है, यहां मरने वालों की संख्या 1249 है, वहीं, गुजरात में कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा 11 हजार 745 तक जा पहुंच चुका है।

भारत 11वां देश है जहां एक लाख से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज हैं, अमेरिका, रशिया, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, इटली, ब्राजील, जर्मनी, तुर्की, फ्रांस और ईरान इन देशों में एक लाख से ज्यादा मामले हैं।

राजस्थान प्रदेश में अब तक 5 हजार 507 कंफर्म केस सामने आ चुके हैं, जिसमें 138 लोगों की मौत हो चुकी. मध्य प्रदेश में अब तक 5 हजार 236 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 252 लोगों की मौत हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में भी कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। अब यहां मरीजों की संख्या 4605 हो गई है, जिसमें 118 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

Input: Saumya Kesarwani

भारतीय सिनेमा का वो रौशन सितारा, जो खो गया: ” मास्टर विट्ठल “

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Cinema Desk

भारतीय सिनेमा का आसमान जितना बड़ा है, उतने ही ज़्यादा हैं, इसके सितारे, जो खो गए, जो बुझ जाने तक की उम्र भी पूरी न कर पाए। ये रंगीन आसमान, सिर्फ ख़ुशी और कामयाबी से ख़ूबसूरत नहीं, इसमें निराशा और असफलता के भी रंग हैं। इसका बहुत बड़ा कारण है, सिनेमा का हर दौर में बदलते रहना। कभी तकनीक बदल गए, तो कभी अंदाज़, कभी अदाकारों का तरीका बदला तो कभी निर्देशकों का। जो कलाकार ढल गए बदलते वक़्त के साथ, वो बचे रहे और जो दिल लगाकर डूब गए थे, उन्हें बदलते वक़्त का अंदाज़ा न लगा, और वे खो गए।

फ़िल्म ‘आलम आरा’ में मास्टर विट्ठल और जुबैदा

मास्टर विट्ठल का जन्म 1906 में, महाराष्ट्र में ही हुआ था और 18 साल की उम्र में ही ये, फ़िल्मों में, बतौर टेक्नीशियन काम करने लगे। काफ़ी कुछ फ़िल्मों के बारे में सीखा और 1926 में आई “रतन मंजरी” में इन्हें बहैसियत नायक, रोल मिला। इसके पहले ये बाबूराव पेंटर के साथ काम करते रहे थे और पहली फ़िल्म में ये महिला नर्तकी बन कर नाचे थे। फ़िल्म का नाम था, “कल्याण खजीना”।

मूक फ़िल्मों में जल्दी ही ये बहुत प्रसिद्ध हो गए। पहली सवाक् फ़िल्म, “आलम आरा”, 1931 में आई और उसके पहले मास्टर विट्ठल कई स्टंट फ़िल्मों में काम कर चुके थे और इन्हें, भारत का “डगलस फ़ेयरबैंक्स” कहा जाने लगा था। डगलस फ़ेयरबैंक्स अमरीकी मूक स्टंट फ़िल्मों के सुपरस्टार थे और यही रुतबा, मास्टर विट्ठल का भारत में हो चुका था। जब आर्देशिर ईरानी, “आलम आरा” बना रहे थे तो मास्टर विट्ठल के अलावा, और कोई शख़्स नहीं था, जिसे दर्शक, अपना नायक मानते। महबूब ख़ान ने भी इस पहली भारतीय बोलती फ़िल्म का नायक बनने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन मास्टर विट्ठल की शोहरत, इतनी ज़्यादा थी कि हिन्दी बहुत ख़राब बोलने के बावजूद, इन्हें ही चुना गया।

“इस ऐतिहासिक फ़िल्म का नायक बनने की ख़ुशी इतनी बड़ी थी कि मास्टर विट्ठल ने ईरानी के सागर स्टूडियो के साथ काम करने के लिए, शारदा स्टूडियो से अपना पुराना अनुबंध तोड़ दिया और इनपर मुक़दमा हो गया। मास्टर विट्ठल की ओर से मुहम्मद अली जिन्ना वक़ील थे। ये मुक़दमा जीत भी गए। लेकिन अब बोलती फ़िल्मों का दौर आ चुका था।”

मास्टर विट्ठल मराठी फ़िल्मों तक ही सीमित हो कर रह गए। काम तो इन्होंने ख़ूब किया लेकिन ललिता पवार और दुर्गा खोटे जैसी अभिनेत्रियों के नायक के रूप में मराठी और मूक फ़िल्मों तक ही सीमित रहे।

 मास्टर विट्ठल ने ही पहली बार 1928 की मूक फ़िल्म, “राज तरंग” में डबल रोल निभाया था और हिन्दी फ़िल्मों में भी, अपने निर्देशन में बनी, “आवारा शहज़ादा” में ,1933 में पहली बार डबल रोल की शुरुआत की थी।

फ़िल्म ‘हरिकेन स्पेशल’ में मास्टर विट्ठल और वत्सला कम्ठेकर

मास्टर विट्ठल, 1966 तक, बतौर अभिनेता, डायरेक्टर, निर्देशक, नृत्य और संगीत निर्देशक फ़िल्मों के लिए 42 साल तक काम किया। इन्होंने 90 से ज़्यादा फ़िल्मों में ऐक्टिंग की, 2 फ़िल्में निर्देशित की। लेकिन जैसे जैसे भारतीय सिनेमा, मौलिकता से अनुकरण की ओर बढ़ती गई, इस सितारे की चमक कम होती गई और संवाद के लिए बस एक भाषा में दक्ष होने के कारण भी ये सितारा खो गया। लेकिन बहुत कुछ दिया है मास्टर विट्ठल ने, भारतीय सिनेमा को और उन्हें एकदम भूल जाना, बिल्कुल ठीक नहीं।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

भूली हुई यादें- “ लीला मिश्रा ”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

जिस ठौर बैठे, महफ़िल सी हुई, वीरान सा लगे उठ जाए है जहाँ से, सब हंसे तो मासूम चेहरा लिए सबको हैरत से देखे और जब हैरत में पड़े हो सब, तो ख़ूब हंसे। न डर, न दिखावा, न तकल्लुफ़, न छलावा और बेबाक़ी ऐसी कि शहंशाह से भी बेअदबी कर बैठे, रहम इतना कि सबके दर्द पे रो ले। ऐसी बातें किसी फ़कीराना मिज़ाज शख़्स के बारे में लगती हैं, लेकिन ये बातें एक रईस ख़ानदान की उस औरत के बारे में है, जिसे एक दौर में, सारा हिन्दुस्तान, मौसी कह कर बुलाता था, वैसे उनका नाम था, लीला मिश्रा।

लीला मिश्रा

लीला मिश्रा, 1908 में उत्तर प्रदेश के रायबरेली में, एक बेहद अमीर, ज़मींदार ब्राह्मण परिवार में पैदा हुईं। इनकी तरबियत ऐसे माहौल में हुई जहाँ इनके मिज़ाज में राजसी ठसक भी थी और आला दर्ज़े के ब्राह्मण-संस्कार भी। इनकी ज़िंदगी का एक अरसा बनारस में भी गुज़रा और ये तो सब जानते हैं कि बनारस किसी का नहीं होता, सब बनारस के हो जाते हैं, तो इनके बारे में भी कई बार ये कहा जाता है कि ये बनारस की थीं। वो दौर महिलाओं के लिए बहुत अच्छा न था, सो लीला मिश्रा भी स्कूल न गईं और महज़ 12 साल की उम्र में इनकी शादी राम प्रसाद मिश्रा जी से हो गई।

फ़िल्म छोटे बाबू’ के एक दृश्य में लीला मिश्रा और कन्हैया लाल

राम प्रसाद मिश्रा एक आज़ाद ख़याल इंसान थे और वे भी ज़मींदार ख़ानदान से ही थे। इन्हें ऐक्टिंग का शौक़ था और मुंबई में नाटक भी किया करते थे। वहाँ, मामा शिंदे, जो फाल्के साहब के सहायक थे, इनके मित्र थे। जब राम प्रसाद मिश्रा, अपनी पत्नी लीला मिश्रा के साथ मुंबई रहने लगे, तो मामा शिंदे का उनके यहाँ, अकसर आना जाना होता था। एक बार मामा शिंदे ने कहा कि मिश्रा दम्पति, फ़िल्मों में क्यों नहीं काम करते। पहले तो राम प्रसाद मिश्रा जी ने मना किया, लेकिन फिर मान गए। वो ऐसा दौर था, जहाँ मर्द ही औरत बन कर फ़िल्मों में काम करते थे ज़्यादातर। जब ये दोनों तैयार हुए तो राम प्रसाद मिश्रा जी को 150 रुपये और लीला मिश्रा जी को 500 रुपये देने का क़रार हुआ। लेकिन दोनों ने कैमरे के सामने बेहद ख़राब ऐक्टिंग की और ये मौक़ा जाता रहा। ये 1920 के दशक की बात है।

“1926 में फ़िल्म “होनहार” में, शाहू मोदक, नायक थे और लीला मिश्रा, नायिका। एक सीन में इन्हें शाहू मोदक को पकड़ के कहना था कि, ” मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती।” लीला मिश्रा, भड़क गईं और साफ़ मना कर दिया कि अपने पति के अलावा, वे किसी और से, ऐसा व्यवहार नहीं कर सकतीं। क़ानूनी तौर पर इनका क़रार इस तरीके का था फ़िल्म कंपनी के साथ कि वे इन्हें फ़िल्म से हटा नहीं सकते थे, सो उन्होंने, लीला मिश्रा को नायक की मां का किरदार दे दिया और ये ज़बरदस्त कामयाब किरदार रहा। इसके बाद लीला मिश्रा ने पूरी ज़िंदगी में 200 से ज़्यादा फ़िल्में की और हमेशा, दादी, नानी, चाची, मौसी के ही किरदार में ही नज़र आईं। “

“चित्रलेखा” से लेकर “प्यासा” तक और “कॉलेज गर्ल” से लेकर “मंझली दीदी” तक हर बार लीला मिश्रा ने अपने ज़बरदस्त अभिनय की छाप छोड़ी। इनको सबसे ज़्यादा शोहरत मिली, फ़िल्म, “शोले” से, जो 1975 में आई।

देखें फ़िल्म शोले का एक सीन:

1979 में आई, बासु चटर्जी की फ़िल्म, “बातों बातों में” इनका अभिनय देखकर और बाकी फ़िल्मों में भी इनकी अदायगी से प्रभावित होकर, सत्यजीत रे ने इनसे कहा कि वे उनकी फ़िल्मों में काम करें। लीला मिश्रा ने उनसे कहा कि “काम तो करूंगी, लेकिन मुंबई आ कर फ़िल्में बनाओ, मैं कलकत्ते नहीं जाऊंगी।”

फ़िल्म ‘सदमा’ में श्रीदेवी और लीला मिश्रा

लीला मिश्रा खाने पीने की बहुत शौक़ीन थीं और ख़ूब हंसते गाते,  खाते पीते 1988 में वे इस दुनिया से चली गईं। आज भी जब कभी किसी सीन में लीला मिश्रा दिखती हैं, एक अजीब सा अपनापन महसूस होता है। इनकी सादगी और साफ़गोई आज तक किसी और कलाकार में नहीं दिखी।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

बॉयज़ लॉकर रूम केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए जल्द जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित “बॉयज लॉकर रूम” मामले में पुलिस को जांच में तेजी लाने और संबंधित निचली अदालत के सामने अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। पुलिस की तरफ से दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा और चैतन्य गोसाईं न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुए।

न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई करते हुए ज़िक्र किया कि साइबर क्राइम सेल और दिल्ली पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।

उच्च न्यायालय ने उस याचिका का निपटारा कर दिया जिसमें ‘ब्वॉयज लॉकर रूम’ मामले में (SIT) स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम या सीबीआई से जांच कराने और दोषियों को अरेस्ट किये जाने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

जिन लड़कियों व महिलाओं ने इस पूरे मामले को उजागर किया उनकी सुरक्षा का निवेदन भी याचिकाकर्ता देवाशीष दुबे ने न्यायालय के समक्ष किया था। याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत तिवारी व ओम प्रकाश परिहार द्वारा उस विवादित इंस्टाग्राम चैट एकाउंट के मेम्बर्स को फौरन अरेस्ट करने के लिए आदेश दिए जाने का अनुरोध किया गया।

दिल्ली पुलिस के साइबर सेल द्वारा मामले की कार्यवाही के दौरान ही विवादित चैट ग्रुप के 18 वर्षीय एडमिन को गिरफ्तार किया था, जो कि इस वर्ष12वीं की परीक्षा में सम्मिलित हुआ था।

कल से फिर दौड़ने लगेगी दिल्ली, स्कूल-कॉलेज रहेंगे बंद

कल से फिर दौड़ने लगेगी दिल्ली
कल से फिर दौड़ने लगेगी दिल्ली

ब्यूरो | navpravah.com 

लॉकडाउन के चौथे चरण के पहले दिन ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने सभी सरकारी और निजी दफ्तर खोलने का आदेश दे दिया। मुख्यमंत्री ने एक तरफ तो पूरी क्षमता के साथ दफ्तर खोलने की बात कह दी, दूसरी तरफ कहा कि कम्पनियाँ प्रयास करें कि ज़्यादातर कर्मचारी घर से काम करें। आज लॉकडाउन 4 का पहला दिन है, एक दिन पहले ही केंद्र ने लॉकडाउन के दौरान रियायतें देने का अधिकार राज्य सरकारों को सौंप दिया था।

गैदरिंग की अनुमति नहीं-
आज घोषणा करते समय मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि पूरी क्षमता के साथ कंपनियों को काम करने की इजाज़त दी जा रही है, लेकिन किसी भी तरह की गैदरिंग करने की अनुमति नहीं होगी। केजरीवाल ने यह भी कहा कि दिल्ली के कन्टेंटमेंट जोन में किसी तरह की कोई गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के लिए छूट की घोषणा करते हुए साफ किया कि अभी मेट्रो स्टेशन, स्कूल, कॉलेज, शॉपिंग मॉल, स्विमिंग पूल, पार्क, थिएटर, बार, ऑडिटोरियम और असेम्बली हाल सब बंद रहेंगे। यहां तक सैलून और स्पा एवं धार्मिक स्थल भी बंद रहेंगे।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि दिल्ली में मामले ज़्यादा है, लेकिन यह अच्छी बात है कि रिकवर हो रहे लोगों की संख्या में इज़ाफ़ा हो रहा है। दिल्ली में 10,054 मामले आए हैं, जिसमें से लगभग 45% लोग ठीक भी हो गए हैं। हालांकि, 160 लोगों की मौत हो गई, जो नहीं होनी चाहिए थी। केजरीवाल ने कहा कि हम हर व्यक्ति की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि अन्य राज्य या देश की अपेक्षा दिल्ली में मौत कम है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए लॉकडाउन का भरपूर इस्तेमाल किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि हमने केंद्र की गाइडलाइंस के तहत ढील देने का निर्णय किया है।

COVID-19: बांग्लादेश का दावा, बना ली कोरोना वैक्सीन

सौम्या केसरवानी |Navpravah Desk

कोरोना वाइरस ने हर जगह कहर बरपा दिया है, इसकी दवा कई देश खोज रहे हैं, लेकिन सफलता किसी के हाथ नहीं लगी है। इसी क्रम में एक खबर आयी है कि बांग्लादेशी डॉक्टरों की एक टीम ने कोविड-19 की दवा बना ली है।

उनका दावा है कि टीम ने दो ड्रग को मिलाकर ऐसा एंटीडॉट तैयार किया है, जिसके परिणाम मरीजों पर चौकाने वाले मिले हैं। प्रो. मोहम्मद तारिक आलम का कहना है कि हमने कोरोना के 60 मरीजों पर दवा का इस्तेमाल किया है और परिणाम काफी सकारात्मक मिल रहे हैं।

प्रोफ़ेसर तारिक का कहना है कि कोरोना के मरीजों को जब दो दवाओं वाला एंटीडोट दिया गया तो सभी मरीज रिकवर हो गए। उन्होंने बताया कि जानवरों में परजीवी-कीड़े मारने वाली दवा आईवरमेक्टिन के सिंगल डोज के साथ एंटीबायोटिक डॉक्सीसाइक्लिन को मिलाकर एंटीडोट तैयार किया गया है।

प्रो. तारिक ने बताया कि ज्यादातर ऐसे मरीज थे जो सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहे थे और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। दवा देने के बाद ही 4 दिन में मरीज रिकवर हो गये थे और इसका कोई साइड इफेक्ट भी मरीजों में नहीं दिखा था।

मोहम्मद तारीक के मुताबिक, आशा यह है कि यह कॉम्बिनेशन कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा कि हम सरकार से सम्पर्क करके इस इलाज को अंतररष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रो. तारिक बांग्लादेश के जाने माने विशेषज्ञ हैं।

बता दें कि बांग्लादेश में कोरोनावायरस के 22 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और अब तक संक्रमण से 238 मौत हो चुकी हैं, हर देश में कोरोना ने अपना साम्राज्य सा फैला लिया है।

सीबीएसई 10वीं-12वीं की परीक्षा 1 से 15 जुलाई के बीच, डेट शीट जारी

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

कोरोना की वजह से बीच में ही टाल दी गई परीक्षा के लिए सीबीएसई ने डेटशीट जारी कर दिया है। 12वीं की परीक्षाएं एक जुलाई से 15 जुलाई के बीच होंगी, इसके साथ ही नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में एक जुलाई से 15 जुलाई तक सीबीएसई 10वीं की परीक्षा होगी। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने डेट शीट अपने सोशल मीडिया पर साझा की है।

लॉकडाउन के चलते सीबीएसई बोर्ड ने जारी परीक्षाएं मार्च में ही रोक दी थीं। बता दें कि इसके बाद सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने दूसरे लॉकडाउन के वक्त घोषणा किया था कि दसवीं बोर्ड की परीक्षाएं नहीं आयोजित होंगी, लेकिन 12वीं बोर्ड की बची हुई परीक्षाओं में से 29 मुख्य विषयों की परीक्षाएं आयोजित होंगी।

ये उन विषयों कि परीक्षाएँ ली जा रही हैं, जिनके जरिये विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर एडमिशन मिलना सुनिश्च‍ित होता है। कई विश्वविद्यालय मेरिट के आधार एडमिशन लेते हैं जहां इन विषयों के नंबर अन‍िवार्य तौर पर जुड़ते हैं।

वहीं दूसरी ओर जिन परीक्षाओं का आयोजन पहले से ही हो चुका है सीबीएसई ने उन परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया को पूरे होने में 50 दिन का समय लग सकता है। डॉ निशंक ने बताया था कि 29 विषयों की परीक्षा का होना बाकी है, लेकिन जो 173 विषयों की परीक्षा हो चुकी थी, जिसकी 1.5 करोड़ से भी अधिक उत्तरपुस्तिकाएं हैं, जिनका मूल्याकांन करने के लिए गृह मंत्रालय की ओर से अनुमति मिल गई है।