राजस्थान के डिप्टी सीएम और कांग्रेस के युवा कद्दावर नेता सचिन पायलट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।
न्यूज़ एजेंसी ANI ने ट्वीट से यह जानकारी दी है कि, काँग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, “अगर कांग्रेस पार्टी बसों और खाने का इंतजाम कर रही है,तो हर सरकार को इसका स्वागत करना चाहिए।”
If Congress is arranging food & buses for people, every government should welcome it. Not providing permission at borders, arresting leaders & doing petty politics, is it justified? It is unfortunate that the UP Government is not allowing buses: Sachin Pilot, Rajasthan Deputy CM pic.twitter.com/4ph27WeVGW
आगे पायलट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, ‘सीमा पर बसों की आवाजाही की परमिशन न देना, हमारे नेताओं को गिरफ़्तार करना कहाँ तक न्यायसंगत है!
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि संकट की इस घड़ी में यूपी सरकार मदद के लिए भेजी जा रही बसों के आवागमन की अनुमति नहीं दे रही है।’
कोरोना वायरस और लाकडाउन के कारण जहां एक ओर लोगों में तनाव बढ़ता हुआ देखा जा रहा है, वहीं लोगों में सकारात्मक सोच फिर से जगाने के लिए फिल्मीकैंडी एंटरटेनमेंट के निर्माता हरेश तोगाणी और सुशील पांडे जोश भरा गाना लेकर आए हैं “फिर से उड़ना है”। गाने को रिलीज करेगी ज़ी म्यूजिक कंपनी।
निर्माताओं का मानना है कि यह गाना इस महामारी के खिलाफ हम सबको एक सकारात्मक सोच के साथ लड़ने के लिए प्रेरित करेगा। सभी कलाकारों तकनीशियनों और जी म्यूजिक कंपनी को धन्यवाद देते हुए निर्माताओं ने यह भी बताया कि इस गाने में 18 कलाकार शामिल हैं।
दर्शक अपने पसंदीदा और बहुमुखी अभिनेताओं जैसे अनूप सोनी, परितोष त्रिपाठी, बृजेश शंडल्ल्य, पराग त्यागी, जय भानूशाली, आकृति शर्मा (कुल्फी), रांझा विक्रम सिंह, सना सुल्तान खान, राजेश जैस, अंकिता दवे, पलक सिंह, विंध्या तिवारी, संचिता बासु , डिंकी कपूर, हरेश तोगानी, योगेश कुमार, एल के लक्ष्मीकांत और आनंद राउत को देखकर निश्चित रूप से उत्साहित होंगे।
गीत के म्यूजिक डायरेक्टर एल के लक्ष्मीकांत हैं। गाने को प्रसिद्ध सिंगर बृजेश शंडल्ल्य और एलके लक्ष्मीकांत ने गाया है। गाने के बोल राहुल काले ने लिखे हैं और वीडियो को अजय वर्मा ने एडिट किया है।
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार(19 मई) को एक ट्वीट कर 1 जून से 200 नॉन एसी स्पेशल ट्रेनें चलाने का एलान किया था।
Railways will run 100 pairs (200 return journeys) of non-AC trains from June 1. Only online ticket booking will be available for these trains. A schedule of these trains will be released soon. Y'day,a record 204 'shramik special' trains were run: RD Bajpai, Railways Exec.Director pic.twitter.com/AjW41rHX33
रेलवे के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आरडी बाजपाई ने समाचार एजेंसी ANI को जानकारी दी कि रेलवे 1 जून से 200 यात्री ट्रेनें चलाएगा, जिसकी सूचना ट्वीट के माध्यम से एजेंसी ने सामान्य की है।
पुलिस ने बीती रात नोएडा में एमिटी और महामाया फ्लाईओवर के पास बस जमा करने के आरोप में कांग्रेस के नेता पंकज मलिक सहित चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
इस मामले में नोएडा के एडीसीपी रणविजय सिंह का कहना है कि बगैर किसी अनुमति के कुछ लोग एमिटी व महामाया फ्लाईओवर के पास बसें जुटा रहे थे, जब पड़ताल की गयी तो पता चला कि वो लोग कांग्रेसी नेता हैं। चार लोगों के खिलाफ भीड़ जुटाने, लॉकडाउन का उल्लंघन व अन्य धाराओं में सेक्टर-39 थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। दो बसों का परमिट व फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिला, उनको एआरटीओ प्रवर्तन ने सीज किया है।
एआरटीओ प्रवर्तन हिमेश तिवारी ने बताया कि बसों को चेक किया गया है। दो का फिटनेस सर्टिफिकेट पिछले साल ही एक्सपायर हो चुका है, इन दोनों बसों को सड़क से हटवाकर डी-पार्क सेक्टर-62 में सीज कर दिया गया है।
कल यूपी के प्रवासी मजदूरों को पड़ोसी राज्यों से लाने के मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ था। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि उनकी बसें आगरा के नजदीक बॉर्डर पर खड़ी हैं, लेकिन जिला प्रशासन उन्हें अंदर दाखिल होने की इजाजत नहीं दे रहा है।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाके की तरफ अम्फान साइक्लोन तेज़ी के साथ बढ़ रहा है। सुबह 7 बजे बंगाल के दीघा से इस तूफ़ान की दूरी लगभग 280 किलोमीटर थी, जिसकी वजह से एहतियातन कोलकाता एयरपोर्ट को बंद रखने का आदेश दिया गया है।
साइक्लोन अम्फान की वजह से बंद किये गए कोलकाता एयरपोर्ट के निदेशक ने कहा कि तूफ़ान के संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए कल सुबह ५ बजे तक के लिए हमने एयरपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है। इस बीच सारे ऑपरेशन्स बंद रहेंगे, जिसमें कोरोना के कारण आने वाली स्पेशल फ्लाइट्स भी शामिल हैं। न स्पेशल फ्लाइट्स में वंदे भारत मिशन के तहत विदेश से भारतीयों को लाया जा रहा है।
अम्फान तूफान की तीव्रता 170 किलोमीटर प्रति घंटे से 200 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच बताई जा रही है। इस तूफान के असर से पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई इलाकों में बारिश शुरू हो चुकी है और पेड़ टूटकट गिर रहे हैं। अम्फान को देखते हुए पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय इलाकों से लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। दोनों राज्य हाई अलर्ट पर हैं और लोगों को सावधानी को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही न करने का निर्देश भी दिया।
मौसम विभाग ने तूफानी खतरे को देखते कई राज्यों के लिए हाई अलर्ट और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ओडिशा और असम के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, त्रिपुरा, मिजोरम,मणिपुर और जम्मू कश्मीर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मछुआरों और स्थानीय लोगों को समुद्र से दूर रहने की चेतावनी जारी की गई है।
कई क्षेत्रीय फ़िल्में, 1960-1970 के बीच, यथार्थवाद से प्रेरित होकर, समाज और उसमें होने वाली घटनाओं को प्रदर्शित कर रही थीं, लेकिन हिन्दी सिनेमा ने ऐसी प्रस्तुतियां, 1950-1960 के बाद कम ही कर दी थीं। हृषिकेश मुखर्जी और बासू चटर्जी जैसे निर्देशक, अपनी फ़िल्मों में इसकी झलक ज़रूर दिखाते रहे। 1973 में आई फ़िल्म, “सौदागर”, कई मायनों में एक बेहद ख़ास फ़िल्म थी क्योंकि इसने दो बातें प्रमाणित कर दी थीं। पहली ये कि, हिन्दी फ़िल्में भी अनजान नहीं थी सार्थक सिनेमा के महत्व से, और दूसरी ये कि अमिताभ बच्चन की अभिनय क्षमता का कोई जवाब नहीं।
फ़िल्म के एक दृश्य में अमिताभ व नूतन
1973 में, मई के महीने में “ज़ंजीर” आई थी और “ऐंग्री यंग मैन” वाली छवि, दर्शकों के मन में घर कर गई थी और इसी साल अक्टूबर में, “सौदागर” में, अमिताभ बच्चन, गुड़ बेचने वाले “मोती मियां” के किरदार में दिखे।
ये फ़िल्म, नरेन्द्रनाथ मित्रा की कहानी, “रस” पर आधारित थी और इसे सुधेन्दु रॉय ने डायरेक्ट किया था। फ़िल्म में महजबीं (नूतन), खजूर के रस से गुड़ बनाती हैं और मोती (अमिताभ बच्चन) उस गुड़ को बाज़ार में बेचता है। महजबीं, विधवा होती है और मोती, ये सोच कर शादी का प्रस्ताव रखता है कि पत्नी बन जाने पर ज़्यादा आराम से और ज़्यादा मात्रा में गुड़ बन सकेगा। लेकिन महजबीं के लिए ये प्रेम जैसा होता है। दोनों शादी करते हैं और उनका गुड़ भी ख़ूब बिकने लगता है। कुछ ही दिनों बाद मोती को ख़ूबसूरत फूलबानो (पद्मा खन्ना) दिखती है। मोती उसकी सुन्दरता देख, उससे भी शादी करना चाहता है और महजबीं को छोड़ देता है। फूलबानो, एकदम घटिया गुड़ बनाती है और मोती का धंधा डूबने लगता है और फिर उसे महजबीं की याद आती है, जो कहीं और घर बसा चुकी होती है। महजबीं, पहले तो मोती की मदद करने से मना करती है लेकिन फिर माफ़ कर देती है।
“मोती, मनुष्य है, साधक है और महजबीं उसकी प्रतिभा, त्याग और सद्भावना। जब तक साधक इन गुणों के साथ होता है, उसे जगत (गुड़ के बाज़ार) में प्रशंसा मिलती है और फूलबानो पथभ्रष्ट करने वाले आकर्षणों का द्योतक है। उसके साथ क्षणिक सुख तो है, प्रशंसा और उपलब्धि नहीं। “
फ़िल्म का संगीत, रवीन्द्र जैन ने दिया है और “सजना है मुझे, सजना के लिए”, “तेरा मेरा साथ रहे”, कभी न भूलने वाले गीत।
वैसे तो सभी ने बहुत अच्छी ऐक्टिंग की है लेकिन अमिताभ बच्चन ने ये बताया है कि क्यों वे महान अभिनेता हैं। अमिताभ का अभिनय इस फ़िल्म में, जवाब है उन सभी स्वघोषित महान अभिनेताओं को जो उन्हें कुछ ख़ास नहीं मानते।
कुल मिलाकर ये फ़िल्म, साधक (अमिताभ बच्चन/मोती मियां) और साध्य (गुड़) की कहानी है और इसे महानतम फ़िल्मों की सूची में रखना चाहिए।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
अदाकार की ज़िंदगी का फ़लसफ़ा होता है, किरदार को ख़ुद में और ख़ुद को किरदार में ऐसे शामिल कर लेना कि फिर जहाँ भी, उसकी बात हो, किरदार का ख़याल पहले आए और उसके नाम की याद बाद में।
जगदीश राज खुराना
फ़िल्मों में ऐसे बहुत से अदाकार हुए हैं, जिनके निभाए गए किरदारों की उम्र, उनकी ख़ुद की ज़िंदगी से लंबी रही है। अमरीश पुरी को आज भी कई लोग ज़ालिम ठाकुर के रूप में याद करते हैं, केश्टो मुखर्जी का नाम आते ही, एक पियक्कड़ क़िस्म के इंसान का ख़याल आ जाता है। लेकिन कुछ अदाकार अपने किसी ख़ास किरदार के लिए नहीं बल्कि एक ख़ास रंग रूप में ऐसे दर्शकों के ज़ेहन में चस्पा हो जाते हैं कि उन्हें बार बार वैसे ही देखने की आदत सी हो जाती है। जगदीश राज खुराना एक ऐसे ही अदाकार रहे हैं।
एक फ़िल्म में दारा सिंह, मुमताज़, और जगदीश राज खुराना
इनका जन्म 1928 में पंजाब में हुआ और अब वो हिस्सा, बंटवारे के बाद, दूसरे मुल्क़ में पड़ता है। बचपन से ही इनका मन खेलकूद में ख़ूब लगता था। 1956 में आई फ़िल्म CID, राज खोसला बना रहे थे और इसके निर्माता गुरूदत्त थे। फ़िल्म में एक ऐसे अदाकार की ज़रूरत थी, तो मज़बूत सा हो और इत्तेफ़ाक़ से जगदीश राज खुराना को ये रोल मिला। 1960 के दशक में भी इन्होंने, “काला बाज़ार” और “हम दोनों” जैसी फ़िल्मों में काम किया और छोटे रोल निभाते हुए इनका फ़िल्मी सफ़र अच्छा चल रहा था।
“1970 में आई, “जॉनी मेरा नाम” में इन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया और इसके बाद ये इतनी बार पुलिस ऑफिसर बने कि इनका नाम “गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड” में दर्ज़ हो गया। इन्होंने 144 बार पुलिस की वर्दी फ़िल्मों में पहनी, जो कि एक विश्व रिकॉर्ड है। इनके अदायगी की एक ख़ास बात थी कि ये कभी भी जल्दी में या आश्चर्यचकित दिखाई नहीं दिए स्क्रीन पर।”
इनका संवाद भी बड़ा सरल और बहुत कम भंगिमाओं वाला होता था। इन्होंने ,”दीवार”, “मजदूर”, “ईमान धरम”, “बेशरम”, “राम तेरी गंगा मैली” समेत, 250 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया। प्रसिद्ध अभिनेत्री, अनीता राज, इनकी बेटी हैं और उन्होंने भी हिन्दी फ़िल्मों में अच्छा काम किया है।
पिता के अंतिम दर्शन पर द्रवित बेटी ‘अनीता राज’ व उनके पति फ़िल्म निर्देशक सुनील हिंगोरानी
इनकी पोती मालविका राज भी, “कभी ख़ुशी, कभी ग़म” में करीना कपूर के बचपन का रोल करती नज़र आई थीं।
2013 में, जगदीश राज, इस दुनिया से चल बसे, लेकिन उनकी पुलिस इंस्पेक्टर के लिबास में एक तस्वीर जो हमारे ज़ेहन में बैठी हुई है, वो कभी नहीं मिटेगी।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
सीपीसीबी
पद- साइंटिस्ट बी आदि
पद संख्या- कुल 48 पद
अंतिम तिथि- 25 मई, 2020
https://cpcb.nic.in/
नेशनल फर्टिलाइजर्स लि.
पद- इंजीनियर, मैनेजर आदि
पद संख्या- कुल 52 पद
अंतिम तिथि- 27 मई, 2020
www.nationalfertilizers.com
वेस्टर्न कोलफील्ड्स लि.
पद- ग्रेजुएट/ टेक्नीकल अप्रेंटिस
पद संख्या- कुल 303 पद
अंतिम तिथि- 19 मई, 2020
http://www.westerncoal.in/
बीपीएससी
पद- मोटर वीकल इंस्पेक्टर
पद संख्या- कुल 90 पद
अंतिम तिथि- 26 मई, 2020
http://www.bpsc.bih.nic.in/
कर्नाटक वन विभाग
पद- फॉरेस्ट गार्ड
पद संख्या- कुल 339 पद
अंतिम तिथि- 15 जून, 2020
https://aranya.gov.in/
सीएसईबी, केरल
पद- जूनियर क्लर्क/ कैशियर
पद संख्या- कुल 195 पद
अंतिम तिथि- 30 मई, 2020
http://www.csebkerala.org
पीपीएससी
पद- प्रिंसिपल आदि
पद संख्या- कुल 544 पद
अंतिम तिथि- 1 जून, 2020
https://ppsc.gov.in/
एसएसए, पंजाब
पद- मास्टर कैडर
पद संख्या- कुल 2182 पद
अंतिम तिथि- 19 मई, 2020
http://www.ssapunjab.org/
एनआइईपीआइडी
पद- जूनियर स्पेशल एजुकेशन टीचर, वोकेशनल इंस्ट्रक्टर आदि
पद संख्या- कुल 11 पद
अंतिम तिथि- 15 जून, 2020
http://niepid.nic.in/
त्रिपुरा रूरल लाइवलीहुड मिशन
पद- अकाउंट्स असिस्टेंट, कॉर्डिनेटर व अन्य
पद संख्या- कुल 150 पद
अंतिम तिथि- 31 मई, 2020
https://trlm.tripura.gov.in/
(यह लेख केवल सूचनार्थ है। अतः नवप्रवाह उक्त नौकरी सम्बन्धी किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता हैं, साथ ही इन तथ्यों की सत्यता की पुष्टि भी नहीं करता। कृपया आवेदक पूरी जाँच पड़ताल करने के पश्चात ही कोई निर्णय लें।)
भारतीय प्रौद्योगिकी संसथान दिल्ली और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने कोरोना के इलाज को लेकर एक शोध किया है। इस शोध में एक अच्छी खबर सामने आई है। इस संयुक्त शोध में पाया गया है कि अश्वगंधा से कोरोना वायरस के लिए एक प्रभावी दवाई बनाई जा सकती है।
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी अश्वगंधा (विथानिया सोम्नीफेरा) कोविड-19 संक्रमण के खिलाफ एक प्रभावी चिकित्सीय और निवारक दवा बन सकती है। शोध के दौरान पाया गया कि अश्वगंधा और प्रोपोलिस (मधुमक्खियों द्वारा अपने छत्ते को रोधक बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया सलाइवा) में कोरोना वायरस के लिए प्रभावी दवा बनाने की क्षमता है।
आईआईटी दिल्ली में बॉयोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डी. सुंदर के अनुसार, आयुर्वेद का प्रचलन भारत में हजारों वर्षों से है। बीते एक दशक से आईआईटी दिल्ली व एआईएसटी के शोधार्थी आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक ज्ञान के साथ अध्ययन में जुटे हैं।
शोध में यह बात सामने आई है कि अश्वगंधा के एक केमिकल कंपाउंड विथानोन में यह क्षमता है कि कोरोना वायरस के शरीर में चल रहे रेप्लीकेशन को नियंत्रित कर सकता है। इसके साथ ही मधुमक्खी के छत्ते के अंदर भी एक केमिकल कंपाउंड कैफिक एसिड फेनेथाइल ईस्टर (सीएपीई) का पता लगा है, जो कि सॉर्स सीओवी-2 एम प्रो की मानव शरीर में चल रही गतिविधि को रोक सकता है। फिलहाल ये स्टडी समीक्षाधीन है और निकट भविष्य में प्रकाशित होने की उम्मीद है।
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लिए अब राज्यों की अनुमति की ज़रूरत नहीं -रेलवे
ब्यूरो | navpravah.com
अब श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए संबंधित राज्यों की मंजूरी की जरूरत नहीं है। रेलवे मन्त्री पीयूष गोयल ने इस बात की जानकारी ट्वीट करके दी। गृह मंत्रालय ने कुछ दिन पहले प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाने के लिए इन ट्रेनों को चलावाने के लिए रेलवे के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम को जारी किया था।
आज रेलवे के प्रवक्ता राजेश बाजपेयी ने बताया कि नई एसओपी के बाद श्रमिक विशेष ट्रेनों को चलाने के लिए राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं होगी, अब ट्रेन बिना राज्यों के सहमति से भी चलायी जायेगी।
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज ट्वीट कर बताया कि ‘पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ इन ट्रेनों को मंजूरी देने के मामले में पीछे हैं। अब तक 20 लाख से अधिक प्रवासियों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाया गया है।
कोच में यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाया जा रहा है, रवानगी और संबंधित स्टेशन पर पहुंचने पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। गृह जिले में 14 दिन क्वारैंटाइन करने के बाद ही उन्हें घर भेजा जाएगा। रास्ते में शुरुआती और आखिरी स्टेशन के बीच में ट्रेनें कहीं नहीं रुकेंगी।