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Friday, September 11, 2026
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बोलती तस्वीरें- “हम लोग (1984)”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री, स्व० श्रीमती इंदिरा गांधी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण के प्रसारण से टेलीविज़न पर रंगीन (कलर) प्रस्तुति का दौर शुरू हो चुका था। उसी साल एशियन गेम्स का आयोजन भी दिल्ली में ही किया गया था और दूरदर्शन ने इसे प्रसारित भी किया।  टेलीविज़न के प्रति उत्साह जाग रहा था लोगों में और अगले ही साल, यानि 1983 में, कपिल देव के नेतृत्व में भारत ने क्रिकेट का विश्व कप जीत लिया। यह एक आशातीत सफलता थी और हर वर्ग के लोगों में, विशेषकर युवाओं में, कई वर्षों बाद, अपने देश के प्रति, गर्व की भावना जगी। अब हर घर में क्रिकेट के प्रति उत्साह था और क्रिकेट देखने की चाहत। विश्व कप विजय ने बहुत से घरों में टेलीविज़न पहुंचा दिया था और दूरदर्शन भी हर रोज़ नए आयाम जोड़ रहा था अपने साथ।

1982 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तत्कालीन मंत्री, स्व० वसंत साठे मेक्सिको दौरे पर गए थे और वहाँ उन्होंने उस समय मेक्सिको के टेलीविज़न पर दिखाए जाने वाले धारावाहिक, ” वेन कॉमिंगो” के बारे में जाना और जब वे भारत लौटे, तो दो साल अथक परिश्रम करना पड़ा, कलाकारों को, और दर्शकों को 1984 में एक उपहार मिला, जिसका नाम था, “हम लोग”।

टेलीविज़न पर धारावाहिक की पहली झलक

“हम लोग”, 7 जुलाई, 1984 को पहली बार दूरदर्शन पर दिखाई गई और यह भारत का पहला प्रायोजित धारावाहिक था जिसे सोप ओपेरा कह सकते थे।

सोप ओपेरा का चलन पहले रेडियो से शुरू हुआ था और पूरी दुनिया में सबसे पहले ये अमरीका के शिकागो में प्रसारित किया गया था। शिकागो के WGN रेडियो स्टेशन से 1930 में, “पेंटेड ड्रीम्स” नाम का धारावाहिक प्रसारित किया गया था, जिसे दुनिया का पहला सोप ओपेरा कहा जा सकता है। सोप ओपेरा इसलिए कहा जाता था, इन धारावाहिकों को क्योंकि इनकी प्रायोजक, साबुन की बड़ी कंपनियां हुआ करती थीं।

‘पेंटेड ड्रीम्स’ (PC-oldradioshows.org)

भारत आते-आते इस विधा को समय तो लगा, लेकिन टेलीविज़न पर प्रसारित करने के लिए जब “हम लोग” बनाने की बात आई, तो इसके दो लक्ष्य थे, पहला, लोगों को छोटे परिवार रखने के लिए प्रेरित करना और दूसरा मनोरंजन। धारावाहिक को शिक्षा और मनोरंजन दोनों देना था। धीरे-धीरे, ये इतना लोकप्रिय हो गया कि इसे घर-घर में सराहा गया।

“हम लोग”, मनोहर श्याम जोशी जी ने लिखी थी और इसका निर्देशन, पी० कुमार वासुदेव ने किया था। धारावाहिक का शीर्षक गीत, अनिल बिस्वास ने दिया था।

‘हम लोग’ के सभी पात्र

इस धारावाहिक के सभी पात्र, इतने असरदार थे कि आज तक दर्शकों की स्मृतियों में जीवित हैं। बसेसर, लल्लू, नन्हे, बड़की, मंझली, छुटकी, सब अपने ही घर के लोग लगते थे। 154 एपिसोड के प्रसारण के बाद, 17 दिसम्बर, 1985 को इस धारावाहिक का अंतिम भाग दिखाया गया। इस धारावाहिक में विनोद नागपाल, राजेश पुरी, मनोज पाहवा, सीमा पाहवा, जयश्री अरोड़ा, अभिनव चतुर्वेदी, सुषमा सेठ, आसिफ़ शेख़ समेत कई दिग्गज अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने काम किया।

“हर एपिसोड के अंत में महान अभिनेता, अशोक कुमार भी आते थे और सीधे दर्शकों से बातें करते थे। यह धारावाहिक 25 मिनट तक चलता था। अंतिम भाग ज़्यादा देर तक चला था। इस धारावाहिक की लोकप्रियता इतनी ज़्यादा थी कि, अशोक कुमार को चार लाख युवाओं ने इस निवेदन के साथ पत्र लिखा था कि वे उनके माता-पिता को समझाएं उन्हें अपने मन से विवाह करने देने के लिए। “

इस धारावाहिक की शूटिंग, गुरुग्राम (गुड़गांव) में हुआ करती थी और सभी कलाकार, मंडी हाऊस, दिल्ली से रोज़ गुड़गांव, एक वैन में बैठ कर जाते थे। “हम लोग” ने लोगों को टेलीविज़न के सामने बैठे हुए ख़यालों में तैरना सिखा दिया था। दर्शकों की मांग पर, इसे 1993 में, पुनः दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। दुर्भाग्य की बात है कि जिस धारावाहिक को देश के पहले सोप ओपेरा होने का गौरव प्राप्त है, उसकी रिकार्डिंग के रख- रखाव के बारे में, दूरदर्शन के लोगों और कर्मचारियों तक को नहीं पता। यूट्यूब पर भी बस इस धारावाहिक का पहला एपिसोड ही है।

धारावाहिक का पहला एपिसोड:

“हम लोग”, दूरदर्शन के आर्काइव्स से ग़ायब हो सकता है लेकिन, लोगों के मन में ये हमेशा रहेगा। “हम लोग” ने पूरे परिवार को एक साथ बैठ कर कहानियों में डूबना उतरना सिखा दिया था और आने वाले समय में दूरदर्शन, बच्चों और बड़ों को एक साथ समय बिताने के बेहतरीन मौक़े देने के लिए तैयार हो चुका था।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

नोटबन्दी पर सरकार को घेरेगी अनुराग कश्यप की फ़िल्म ‘Choked’?

ट्रेलर रिव्यू | Cinema Desk

अनुराग कश्यप निर्देशित फ़िल्म का ट्रेलर नेटफ़्लिक्स ने रीलीज़ कर दिया है। फ़िल्म में मुख्य किरदार निभाया है सय्यामी खेर ने। अनुराग इसके पहले भी ओटीटी के लिए फ़िल्म्स बना चुके हैं। फ़िल्म के ट्रेलर रीलीज़ होने के बाद डिजिटल मीडिया पर काफ़ी तारीफ़ मिल रही है।

फ़िल्म में सय्यामी एक बैंकर हैं, जो एक औसत जीवन जीती हैं। एक दिन अचानक से सय्यामी की ज़िन्दगी तब बदल जाती है, जब चोक हुए किचेन की नाली से पानी से पैसे के बंडल मिलते हैं। बस ज़िंदगी एकदम से बदल जाती है, ज़िन्दगी बड़ी मुश्किल और कंजूसी से चलाने वाली सय्यामी शाहख़र्च बन चुकी होती हैं। इस बदलाव की आदत परिवार को हो पाए, इसके पहले ही उनकी ज़िंदगी में नोटबंदी नाम की ट्रेजेडी हो जाती है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोटबंदी की घोषणा कर देते हैं। सय्यामी की रंगीन ज़िंदगी एकदम से ब्लैक एण्ड व्हाइट हो जाती है।

अपने व्यक्तिगत जीवन में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखर विरोधी व कड़ी आलोचना और विवादित बयानबाजी के लिए मशहूर फिल्म मेकर अनुराग कश्यप ने इस बार अपनी फिल्म के मार्फ़त से नोटबन्दी जैसे राजनीतिक मुद्दे को टार्गेट करने की कोशिश की है। फ़िल्म में इसके नेगेटिव-पॉजिटिव पहलू में से किस पर अधिक ज़ोर दिया गया है, इसका आंकलन तो फ़िल्म देखने के बाद ही किया जा सकता है।

फ़िलहाल फ़िल्म के साथ कितना न्याय कर पाएँ हैं अनुराग, देखने के लिए ५ जून तक का इंतज़ार करना पड़ेगा। रीलीज़ की तारीख़ ५ जून ही निश्चित की गई है।

देखें ट्रेलर:

पिता के साथ अंतिम तस्वीर ने किया प्रियंका को भावुक

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि में आज सभी उन्हें याद कर रहे हैं। ऐसे में उनकी बेटी और कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पिता को याद करते हुए बेहद भावुक पोस्ट अपने ट्वीट के माध्यम से किया है।

प्रियंका ने इस ट्वीट में आने पिता के साथ की आखिरी तस्वीर को पोस्ट करते हुए अंग्रेजी में लिखा जिसका अनुवाद निम्नवत है:

उन लोगों के प्रति दयालु होना जो आपके लिए कठोर थे, यह जानना कि जीवन कितना उचित है, फिर चाहे कितना भी अनुचित क्यों न प्रतीत हो, लगातार चलते रहना फिर आकाश कितना ही काला हो या तूफान ही क्यों न आ रहा हो, मजबूत दिल रखना और इसे प्यार से भरना फिर भले ही कितने ही दुख क्यों न हों; ये मेरे पिता के जीवन के उपहार हैं।’

इससे पहले राहुल गांधी ने भी पिता राजीव को याद करते हुए एक भावुक पोस्ट शेयर की थी।

ड्रैगन पर वैश्विक दबाव, जांच के चक्रव्यूह में फँसा चीन

वर्ल्ड अफेयर्स |Navpravah Desk

कोरोना वायरस को लेकर चीन पर अब वैश्विक दबाव बनने लगा है। जो देश अब तक चुप्पी साध कर बैठे थे, वे भी अब खुलकर चीन के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे हैं। चीन के खिलाफ जांच की मांग को लेकर करीब-करीब दुनिया के सभी देश एकजुट हैं। वैश्विक दबाव को देखते हुए अब वर्ल्ड हेल्थ असेम्ब्ली को भी मजबूरन एक प्रस्ताव पास करना पड़ रहा है। इस प्रस्ताव के तहत कोरोना का सच जानने के लिए चीन के खिलाफ एक स्वतंत्र जांच को मंजूरी दी गई है।

वर्तमान में दुनिया के ऐसे कई देश हैं, जो समूचे विश्व में फैली इस महामारी के लिए चीन को ज़िम्मेदार मानते हैं। इनमें से तीन देश अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया कोरोना वायरस को लेकर खुलकर चीन का विरोध कर रहे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कोरोना को चायनीज़ वायरस की संज्ञा दे चुके हैं। अमेरिका पुरज़ोर तरीके से ये आवाज़ उठा रहा है कि चीन और वुहान लैब की जांच होनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया और जापान भी ये मांग कई बार दोहरा चुके हैं।

कोरोना मामले में चीन की जांच को लेकर अभी तक यूरोपीय यूनियन खामोश था, लेकिन अब जब वर्ल्ड हेल्थ असेंबली ने वायरस के सोर्स का पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच का प्रस्ताव पास कर दिया है, उसके बाद से यूरोपीय यूनियन भी इसके समर्थन में आ गया है। यूरोपीय यूनियन के खामोश रहने की एक वजह ये भी बताई जाती है कि आज भी यूरोप औद्योगिक मसलों को लेकर काफी हद तक चीन पर निर्भर है।

चीन पर एक बड़ा सवाल ये भी दागा जा रहा है कि हमेशा चीन से ही बीमारियां क्यों निकलतीं हैं? कोरोना पहला मामला नहीं है, इससे पहले साल 2003 में चीन से निकलकर सार्स वायरस ने भी दुनिया के कई देशों में तबाही मचाई थी और उस वक्त भी चीन पर आरोप लगे थे कि उसने सार्स से जुड़ी जानकारियों को दुनिया से छुपाया था।

25 मई से शुरू होगी हवाई यात्रा, वेब चेक-इन ज़रूरी

सौम्या केसरवानी | navpravah.com
दो महीने के लॉकडाउन के बाद 25 मई से घरेलू उड़ानें एक बार फिर से शुरु होंगी। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एयरपोर्ट और एयरलाइन अब अपनी तैयारी कर लें, सरकार के इस फैसले से लाकडाउन में फंसे लोगों को बड़ी राहत मिली है। हालाँकि मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रा के लिए वेब चेक-इन आवश्यक है।
नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह ने बताया कि घरेलू नियमित कामर्शियल उड़ानें 25 मई सोमवार से शुरु हो जाएंगी।  फिलहाल सीमित उड़ानों को ही इजाजत दी जा सकती है। बता दें कि, कोरोना वायरस के प्रकोप से काबू पाने के लिए सभी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लाकडाउन की घोषणा के साथ ही 25 मार्च से बंद कर दी गयी थी।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों को पहले से वेब चेक-इन करना होगा और यात्रा के दौरान मात्र एक बैग ले जाने की अनुमति होगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा, एयरपोर्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों और एयरलाइनों के लिए विस्तृत आचार संहिता के बारे में बाद में अलग से दिशानिर्देश जारी किया जाएगा।
पिछले दो महीने के भीतर एक भी घरेलू उड़ान नहीं हो सकी हैं, इस दौरान एयरलाइनों में कर्मचारियों की छंटनी, पायलटों के वेतन में कटौती और अवैतनिक ड्यूटी जैसे कड़े फैसले लिए गए हैं। पहले, दूसरे और तीसरे चरण के लाकडाउन के दौरान फ्लाटें नहीं उड़ीं, चौथे चरण की शुरुआत 18 मई से हुई है, लेकिन सरकार ने 25 मई से बंद बड़ी फ्लाइट्स को शुरु करने का फैसला ले लिया है।
कई एयरलाइंस ने 1 जून से हवाई टिकट की बुकिंग शुरू कर दी है। लॉकडाउन के चौथे चरण में भी प्लेन, ट्रेन, मेट्रो के संचालन पर पूरी तरह से पाबंदी है, लेकिन अब इसे धीरे-धीरे खोला जा रहा है।

विवादित ट्वीट के चलते कांग्रेस नेता पंकज पुनिया गिरफ़्तार

न्यूज़ अपडेट | Political Desk

कांग्रेस नेता पंकज पुनिया को हरियाणा के करनाल से गिरफ़्तार कर लिया गया है। पुनिया को उनके सोशल मीडिया पर किए गए आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए गिरफ़्तार किया गया है।

पंकज पुनिया पर आरोप है कि उनके ट्वीट ने हिन्दुओं की भावनाओं को आहत किया है। उनके ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश के हजरतगंज और नोएडा पुलिस ने आईटी एक्ट सहित कई मामलो में एफ़आईआर दर्ज की थी। हजरतगंज में उनके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में भी केस दर्ज हुआ था।गौतमबुद्ध नगर जिला पुलिस मुख्यालय ने बताया कि पंकज पुनिया ने ट्विटर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी की थी।

पंकज पुनिया के खिलाफ इस मामले में बुधवार को नोएडा, सेक्टर 39 थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। ये मुकदमा धारा 295ए, 500, 505, 153ए और 66 आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।ग़ौरतलब है कि पंकज पुनिया ने मई 19, 2020 को अपने एक ट्वीट में संघियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और श्रीराम के नाम का गलत इस्तेमाल किया था।

आज है पूर्व पीएम राजीव गाँधी की पुण्यतिथि, पीएम मोदी ने दी श्रद्दांजलि

न्यूज़ डेस्क| Navpravah Desk

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की आज (21 मई) पुण्यतिथि है। पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बेटे राहुल गांधी, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला आदि ने राजीव गांधी को ट्वीट के माध्यम से श्रद्धांजलि दी है।

राहुल गांधी ने पिता को याद करते हुए लिखा, ‘एक सच्चे देशभक्त, उदार और परोपकारी पिता के पुत्र होने पर मुझे गर्व है। प्रधानमंत्री के रूप में राजीव जी ने देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया। अपनी दूरंदेशी से देश के सशक्तीकरण के लिए उन्होंने जरूरी कदम उठाए। आज उनकी पुण्यतिथि पर मैं स्नेह और कृतज्ञता से उन्हें सादर नमन करता हूं।’

पश्चिम बंगाल: चक्रवाती तूफ़ान ‘अम्फान’ ने ली 12 लोगों की जान

12 dead in west bengal due to Cyclone Apmhan
12 dead in west bengal due to Cyclone Apmhan
ब्यूरो (कोलकाता) | navpravah.com
कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में चक्रवाती तूफ़ान अम्फान की वजह से क़रीब 12 लोगों की मौत ही गई। हज़ारों मकान क्षतिग्रस्त हो गए और निचले इलाक़ों में पानी भर गया। स्थानीय अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, पेड़ के गिरने और करंट लगने से लोगों ने अपनी जान गँवा दी। मिली जानकारी के मुताबिक़, हुगली और उत्तर 24 परगना जिलों में तीन लोगों की मृत्यु करंट लगने की वजह से हो गई। 
स्थानीय अधिकारियों ने तूफ़ान से हुई तबाही के बारे में बताया कि कोलकाता के रीजेंट उद्यान क्षेत्र में एक महिला और उसके सात वर्षीय बेटे पर पेड़ गिर जाने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि तूफान के कारण उड़कर आई किसी वस्तु के टकरा जाने से कोलकाता में एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इस चक्रवाती तूफान के कारण जान-माल को हुए नुकसान का अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है, क्योंकि जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक तबाही मची है, उनमें अब भी जाना संभव नहीं है।
भारी बारिश और 190 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ ‘अम्फान’ बुधवार दोपहर ढाई बजे पश्चिम बंगाल के दीघा तट पर पहुंचा। इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश और तूफान आया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सचिवालय से मंगलवार रात से हालात पर नजर रख रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘अम्फान’ का प्रभाव कोरोना वायरस से भी भीषण है। पश्चिम बंगाल के उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलो में चक्रवात के कारण भारी बारिश और तूफान आने से खपरैल वाले मकानों के ऊपरी हिस्से तेज हवाओं में उड़ गए, पेड़ एवं बिजली के खम्भे उखड़ गए और निचले शहरों एवं गांवों में पानी भर गया।
कोलकाता में 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं ने कारों को पलट दिया और पेड़ एवं खम्भे उखड़कर गिर जाने से कई अहम रास्ते बाधित हो गए। कोलकाता, उत्तर 24 परगना एवं दक्षिण 24 परगना में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति ठप रही। मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं भी बाधित हुईं। सुंदरवन डेल्टा के तटबंध इस चक्रवात के कारण टूट गए। टीवी में दिखाई गई फुटेज में दीघा और सुंदरवन में ज्वारभाटा की ऊंची लहरें उठती दिख रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने पांच लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

बोलती तस्वीरें- “दूरदर्शन”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

तस्वीरें, हमेशा ख़ामोशी से सब बयां करने की सलाहियत रखती थीं, लेकिन जब बोलना शुरू किया, तो हमारी हो रहीं और उनकी ख़ुमारी, इस क़दर तारी रही हमारे ऊपर कि हमारी ज़ुबान से लेकर हमारे अंदाज़ तक पर उनका असर आया।  दुनिया के सबसे हैरतअंगेज़ कारनामों में से एक रहा, टेलीविज़न का बनना ।  इसकी शुरुआत और तकनीकी सफ़र एक अलग कहानी है, लेकिन हमारे देश में, “दूरदर्शन” का शुरू होना, बोलती तस्वीरों के आने के जैसा ही था।

15 सितम्बर, 1959 को दूरदर्शन की स्थापना दिल्ली में हुई और इसकी कोई अलग जगह या दफ़्तर नहीं था।  हर रोज़ दूरदर्शन पर कुछ दिखाया जाए, ऐसे इंतज़ाम में 6 साल लगे और 1965 से, रोज़ 5 मिनट के न्यूज़ बुलेटिन की शुरुआत हुई।  प्रतिमा पुरी, भारत की पहली न्यूज़ रीडर थीं।  ये All India Radio के भाग के रूप में ही हो रहा था।

दूरदर्शन की पहली झलक:

इसके 2 साल बाद, 1967 में सलमा सुल्ताना, दूरदर्शन से, बतौर न्यूज़ रीडर जुड़ीं।  1967 इसलिए भी यादगार साल रहा क्योंकि इसी साल गणतंत्र दिवस के दिन से, “कृषि दर्शन” नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जो आज भी चलता है, दूरदर्शन पर।

“1976 में दूरदर्शन, All India Radio से अलग हो गया और इसके 6 साल बाद पूरे भारत में कार्यक्रमों का प्रसारण शुरू हो गया और इसी साल यानि की 1982 में, पहले रंगपूर्ण कार्यक्रम प्रसारण के तौर पर, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण को दिखाया गया। “

दूरदर्शन का मोटो, “सत्यम, शिवम, सुन्दरम” रखा गया।  दूरदर्शन का चिन्ह (logo) , NID के छात्र रहे, देवाशीष भट्टाचार्य ने, 1976 में बनाया जो कि सम्यक दृष्टि का द्योतक है, और भी कई अर्थ इसके बताए गए हैं, लेकिन “आंख” और “दृष्टि” सब में समान है।  ख़ुद देवाशीष, इसे यिन और यांग भी बता चुके हैं।  एक निश्चित धुन के साथ घूमता हुआ ये चिन्ह धीरे धीरे  पूर्ण होता था और ऐसे शुरुआत होती थी हर दिन के कार्यक्रमों की।  ये घूमते हुए पूर्ण चिन्ह बन जाने का एनिमेशन, NID के ही छात्र आर०एल० मिस्त्री ने किया था और इसके साथ बजने वाले संगीत का निर्देशन, पं० रवि शंकर और उस्ताद अली अहमद हुसैन ख़ान जैसे महान संगीतज्ञों ने दिया था।  इस धुन और चिन्ह के साथ, पहली बार 1 अप्रैल, 1976 में दूरदर्शन ने अपना दिन शुरू किया था।  इस तपस्या जैसे काम से पूर्णतः अनजान, आज की पीढ़ी के तथाकथित फ़िल्मी कलाकार इस धुन का मज़ाक भी बनाते नज़र आए हैं, अपनी फ़िल्मों में।

दूरदर्शन चिन्ह का मौजूदा रंगरूप

धीरे-धीरे दूरदर्शन, 80 और 90 के दशक में, देश में छा जाने वाला था और उस दौर में बढ़ रहे बच्चों और कामकाजी लोगों के जीवन का हिस्सा बन जाने वाला था।  एक लंबी और कामयाब कहानी लिखी जानी थी और दूरदर्शन शुरुआत कर चुका था।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

“श्रीराम जन्मभूमि परिसर में मिल रहे, ध्वंस किये गए पुराने मंदिरों के अवशेष” :ट्रस्ट

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

अयोध्या. विगत दस दिनों से श्रीराम जन्मभूमि परिसर में 11 मई 2020 से प्रारंभ समतलीकरण के दौरान लगातार पुराने मन्दिर के चिन्ह ध्वंसावशेष के रूप में मिल रहे हैं।

‘श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महामंत्री चंपत राय ने प्रेस नोट जारी कर इसकी पुष्टि की है। साथ ही अपने सोशल मीडिया एकाउंट के माध्यम से प्राप्त हो रहे अवशेषों की तस्वीरें भी जारी की हैं।

मंदिर परिसर में प्राप्त हो रहे अवशेष (PC-Champat Rai)

चंपत राय ने बताया कि, ‘मलबे को हटाए जाने पर काले कसौटी पत्थर के 7 खंभे मिले हैं, इसके अतिरिक्त, बलुआ पत्थर के नक्काशी दर अवशेष व कुछ नीचे जाने पर एक शिवलिंग भी प्राप्त हुआ है जो कि 4 फ़ीट 11 इंच लंबा व इसकी परिधि 42 इंच की है। ऐसा ही शिवलिंग कुबेर टीले पर भी लगा हुआ मिला है।

ट्रस्ट की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेने के बाद विगत दस दिनों से मंदिर निर्माण कार्य हेतु जमीन को समतल किये जाने व पुराने गैंगवे को हटाने का काम किया जा रहा है। 11 मेज चल रहे इस काम के दौरान ही परिसर में मलबे से काफ़ी संख्या में पुरावशेष, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प, कलश,आमलक,दोरजाम्ब आदि कलाकृतियां, मेहराब के पत्थर, 7 ब्लैक टचस्टोन के स्तम्भ, 6 रेड सैंडस्टोन स्तम्भ, व शिवलिंग आदि प्राप्त हुए हैं।

परिसर में चल रहे निर्माण कार्य में कोरोना संबंधी समस्त सावधानियों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।