देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि में आज सभी उन्हें याद कर रहे हैं। ऐसे में उनकी बेटी और कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पिता को याद करते हुए बेहद भावुक पोस्ट अपने ट्वीट के माध्यम से किया है।
To be kind to those who are unkind to you; to know that life is fair, no matter how unfair you imagine it to be; to keep walking, no matter how dark the skies or fearsome the storm; .. 1/2 pic.twitter.com/pQpwFfTqIE
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) May 21, 2020
प्रियंका ने इस ट्वीट में आने पिता के साथ की आखिरी तस्वीर को पोस्ट करते हुए अंग्रेजी में लिखा जिसका अनुवाद निम्नवत है:
“उन लोगों के प्रति दयालु होना जो आपके लिए कठोर थे, यह जानना कि जीवन कितना उचित है, फिर चाहे कितना भी अनुचित क्यों न प्रतीत हो, लगातार चलते रहना फिर आकाश कितना ही काला हो या तूफान ही क्यों न आ रहा हो, मजबूत दिल रखना और इसे प्यार से भरना फिर भले ही कितने ही दुख क्यों न हों; ये मेरे पिता के जीवन के उपहार हैं।’
इससे पहले राहुल गांधी ने भी पिता राजीव को याद करते हुए एक भावुक पोस्ट शेयर की थी।
कोरोना वायरस को लेकर चीन पर अब वैश्विक दबाव बनने लगा है। जो देश अब तक चुप्पी साध कर बैठे थे, वे भी अब खुलकर चीन के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे हैं। चीन के खिलाफ जांच की मांग को लेकर करीब-करीब दुनिया के सभी देश एकजुट हैं। वैश्विक दबाव को देखते हुए अब वर्ल्ड हेल्थ असेम्ब्ली को भी मजबूरन एक प्रस्ताव पास करना पड़ रहा है। इस प्रस्ताव के तहत कोरोना का सच जानने के लिए चीन के खिलाफ एक स्वतंत्र जांच को मंजूरी दी गई है।
वर्तमान में दुनिया के ऐसे कई देश हैं, जो समूचे विश्व में फैली इस महामारी के लिए चीन को ज़िम्मेदार मानते हैं। इनमें से तीन देश अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया कोरोना वायरस को लेकर खुलकर चीन का विरोध कर रहे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कोरोना को चायनीज़ वायरस की संज्ञा दे चुके हैं। अमेरिका पुरज़ोर तरीके से ये आवाज़ उठा रहा है कि चीन और वुहान लैब की जांच होनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया और जापान भी ये मांग कई बार दोहरा चुके हैं।
कोरोना मामले में चीन की जांच को लेकर अभी तक यूरोपीय यूनियन खामोश था, लेकिन अब जब वर्ल्ड हेल्थ असेंबली ने वायरस के सोर्स का पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच का प्रस्ताव पास कर दिया है, उसके बाद से यूरोपीय यूनियन भी इसके समर्थन में आ गया है। यूरोपीय यूनियन के खामोश रहने की एक वजह ये भी बताई जाती है कि आज भी यूरोप औद्योगिक मसलों को लेकर काफी हद तक चीन पर निर्भर है।
चीन पर एक बड़ा सवाल ये भी दागा जा रहा है कि हमेशा चीन से ही बीमारियां क्यों निकलतीं हैं? कोरोना पहला मामला नहीं है, इससे पहले साल 2003 में चीन से निकलकर सार्स वायरस ने भी दुनिया के कई देशों में तबाही मचाई थी और उस वक्त भी चीन पर आरोप लगे थे कि उसने सार्स से जुड़ी जानकारियों को दुनिया से छुपाया था।
दो महीने के लॉकडाउन के बाद 25 मई से घरेलू उड़ानें एक बार फिर से शुरु होंगी। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एयरपोर्ट और एयरलाइन अब अपनी तैयारी कर लें, सरकार के इस फैसले से लाकडाउन में फंसे लोगों को बड़ी राहत मिली है। हालाँकि मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रा के लिए वेब चेक-इन आवश्यक है।
नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह ने बताया कि घरेलू नियमित कामर्शियल उड़ानें 25 मई सोमवार से शुरु हो जाएंगी। फिलहाल सीमित उड़ानों को ही इजाजत दी जा सकती है। बता दें कि, कोरोना वायरस के प्रकोप से काबू पाने के लिए सभी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लाकडाउन की घोषणा के साथ ही 25 मार्च से बंद कर दी गयी थी।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों को पहले से वेब चेक-इन करना होगा और यात्रा के दौरान मात्र एक बैग ले जाने की अनुमति होगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा, एयरपोर्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों और एयरलाइनों के लिए विस्तृत आचार संहिता के बारे में बाद में अलग से दिशानिर्देश जारी किया जाएगा।
पिछले दो महीने के भीतर एक भी घरेलू उड़ान नहीं हो सकी हैं, इस दौरान एयरलाइनों में कर्मचारियों की छंटनी, पायलटों के वेतन में कटौती और अवैतनिक ड्यूटी जैसे कड़े फैसले लिए गए हैं। पहले, दूसरे और तीसरे चरण के लाकडाउन के दौरान फ्लाटें नहीं उड़ीं, चौथे चरण की शुरुआत 18 मई से हुई है, लेकिन सरकार ने 25 मई से बंद बड़ी फ्लाइट्स को शुरु करने का फैसला ले लिया है।
कई एयरलाइंस ने 1 जून से हवाई टिकट की बुकिंग शुरू कर दी है। लॉकडाउन के चौथे चरण में भी प्लेन, ट्रेन, मेट्रो के संचालन पर पूरी तरह से पाबंदी है, लेकिन अब इसे धीरे-धीरे खोला जा रहा है।
कांग्रेस नेता पंकज पुनिया को हरियाणा के करनाल से गिरफ़्तार कर लिया गया है। पुनिया को उनके सोशल मीडिया पर किए गए आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए गिरफ़्तार किया गया है।
पंकज पुनिया पर आरोप है कि उनके ट्वीट ने हिन्दुओं की भावनाओं को आहत किया है। उनके ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश के हजरतगंज और नोएडा पुलिस ने आईटी एक्ट सहित कई मामलो में एफ़आईआर दर्ज की थी। हजरतगंज में उनके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में भी केस दर्ज हुआ था।गौतमबुद्ध नगर जिला पुलिस मुख्यालय ने बताया कि पंकज पुनिया ने ट्विटर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी की थी।
पंकज पुनिया के खिलाफ इस मामले में बुधवार को नोएडा, सेक्टर 39 थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। ये मुकदमा धारा 295ए, 500, 505, 153ए और 66 आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।ग़ौरतलब है कि पंकज पुनिया ने मई 19, 2020 को अपने एक ट्वीट में संघियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और श्रीराम के नाम का गलत इस्तेमाल किया था।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की आज (21 मई) पुण्यतिथि है। पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बेटे राहुल गांधी, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला आदि ने राजीव गांधी को ट्वीट के माध्यम से श्रद्धांजलि दी है।
राहुल गांधी ने पिता को याद करते हुए लिखा, ‘एक सच्चे देशभक्त, उदार और परोपकारी पिता के पुत्र होने पर मुझे गर्व है। प्रधानमंत्री के रूप में राजीव जी ने देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया। अपनी दूरंदेशी से देश के सशक्तीकरण के लिए उन्होंने जरूरी कदम उठाए। आज उनकी पुण्यतिथि पर मैं स्नेह और कृतज्ञता से उन्हें सादर नमन करता हूं।’
एक सच्चे देशभक्त,उदार और परोपकारी पिता के पुत्र होने पर मुझे गर्व है।प्रधानमंत्री के रूप में राजीव जी ने देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया।अपनी दूरंदेशी से देश के सशक्तीकरण के लिए उन्होंने ज़रूरी कदम उठाए।आज उनकी पुण्यतिथि पर मैं स्नेह और कृतज्ञता से उन्हें सादर नमन करता हूँ। pic.twitter.com/aDdKMf74wK
कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में चक्रवाती तूफ़ान अम्फान की वजह से क़रीब 12 लोगों की मौत ही गई। हज़ारों मकान क्षतिग्रस्त हो गए और निचले इलाक़ों में पानी भर गया। स्थानीय अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, पेड़ के गिरने और करंट लगने से लोगों ने अपनी जान गँवा दी। मिली जानकारी के मुताबिक़, हुगली और उत्तर 24 परगना जिलों में तीन लोगों की मृत्यु करंट लगने की वजह से हो गई।
स्थानीय अधिकारियों ने तूफ़ान से हुई तबाही के बारे में बताया कि कोलकाता के रीजेंट उद्यान क्षेत्र में एक महिला और उसके सात वर्षीय बेटे पर पेड़ गिर जाने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि तूफान के कारण उड़कर आई किसी वस्तु के टकरा जाने से कोलकाता में एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इस चक्रवाती तूफान के कारण जान-माल को हुए नुकसान का अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है, क्योंकि जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक तबाही मची है, उनमें अब भी जाना संभव नहीं है।
भारी बारिश और 190 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ ‘अम्फान’ बुधवार दोपहर ढाई बजे पश्चिम बंगाल के दीघा तट पर पहुंचा। इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश और तूफान आया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सचिवालय से मंगलवार रात से हालात पर नजर रख रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘अम्फान’ का प्रभाव कोरोना वायरस से भी भीषण है। पश्चिम बंगाल के उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलो में चक्रवात के कारण भारी बारिश और तूफान आने से खपरैल वाले मकानों के ऊपरी हिस्से तेज हवाओं में उड़ गए, पेड़ एवं बिजली के खम्भे उखड़ गए और निचले शहरों एवं गांवों में पानी भर गया।
कोलकाता में 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं ने कारों को पलट दिया और पेड़ एवं खम्भे उखड़कर गिर जाने से कई अहम रास्ते बाधित हो गए। कोलकाता, उत्तर 24 परगना एवं दक्षिण 24 परगना में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति ठप रही। मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं भी बाधित हुईं। सुंदरवन डेल्टा के तटबंध इस चक्रवात के कारण टूट गए। टीवी में दिखाई गई फुटेज में दीघा और सुंदरवन में ज्वारभाटा की ऊंची लहरें उठती दिख रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने पांच लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
तस्वीरें, हमेशा ख़ामोशी से सब बयां करने की सलाहियत रखती थीं, लेकिन जब बोलना शुरू किया, तो हमारी हो रहीं और उनकी ख़ुमारी, इस क़दर तारी रही हमारे ऊपर कि हमारी ज़ुबान से लेकर हमारे अंदाज़ तक पर उनका असर आया। दुनिया के सबसे हैरतअंगेज़ कारनामों में से एक रहा, टेलीविज़न का बनना । इसकी शुरुआत और तकनीकी सफ़र एक अलग कहानी है, लेकिन हमारे देश में, “दूरदर्शन” का शुरू होना, बोलती तस्वीरों के आने के जैसा ही था।
15 सितम्बर, 1959 को दूरदर्शन की स्थापना दिल्ली में हुई और इसकी कोई अलग जगह या दफ़्तर नहीं था। हर रोज़ दूरदर्शन पर कुछ दिखाया जाए, ऐसे इंतज़ाम में 6 साल लगे और 1965 से, रोज़ 5 मिनट के न्यूज़ बुलेटिन की शुरुआत हुई। प्रतिमा पुरी, भारत की पहली न्यूज़ रीडर थीं। ये All India Radio के भाग के रूप में ही हो रहा था।
दूरदर्शन की पहली झलक:
इसके 2 साल बाद, 1967 में सलमा सुल्ताना, दूरदर्शन से, बतौर न्यूज़ रीडर जुड़ीं। 1967 इसलिए भी यादगार साल रहा क्योंकि इसी साल गणतंत्र दिवस के दिन से, “कृषि दर्शन” नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जो आज भी चलता है, दूरदर्शन पर।
“1976 में दूरदर्शन, All India Radio से अलग हो गया और इसके 6 साल बाद पूरे भारत में कार्यक्रमों का प्रसारण शुरू हो गया और इसी साल यानि की 1982 में, पहले रंगपूर्ण कार्यक्रम प्रसारण के तौर पर, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण को दिखाया गया। “
दूरदर्शन का मोटो, “सत्यम, शिवम, सुन्दरम” रखा गया। दूरदर्शन का चिन्ह (logo) , NID के छात्र रहे, देवाशीष भट्टाचार्य ने, 1976 में बनाया जो कि सम्यक दृष्टि का द्योतक है, और भी कई अर्थ इसके बताए गए हैं, लेकिन “आंख” और “दृष्टि” सब में समान है। ख़ुद देवाशीष, इसे यिन और यांग भी बता चुके हैं। एक निश्चित धुन के साथ घूमता हुआ ये चिन्ह धीरे धीरे पूर्ण होता था और ऐसे शुरुआत होती थी हर दिन के कार्यक्रमों की। ये घूमते हुए पूर्ण चिन्ह बन जाने का एनिमेशन, NID के ही छात्र आर०एल० मिस्त्री ने किया था और इसके साथ बजने वाले संगीत का निर्देशन, पं० रवि शंकर और उस्ताद अली अहमद हुसैन ख़ान जैसे महान संगीतज्ञों ने दिया था। इस धुन और चिन्ह के साथ, पहली बार 1 अप्रैल, 1976 में दूरदर्शन ने अपना दिन शुरू किया था। इस तपस्या जैसे काम से पूर्णतः अनजान, आज की पीढ़ी के तथाकथित फ़िल्मी कलाकार इस धुन का मज़ाक भी बनाते नज़र आए हैं, अपनी फ़िल्मों में।
दूरदर्शन चिन्ह का मौजूदा रंगरूप
धीरे-धीरे दूरदर्शन, 80 और 90 के दशक में, देश में छा जाने वाला था और उस दौर में बढ़ रहे बच्चों और कामकाजी लोगों के जीवन का हिस्सा बन जाने वाला था। एक लंबी और कामयाब कहानी लिखी जानी थी और दूरदर्शन शुरुआत कर चुका था।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
अयोध्या. विगत दस दिनों से श्रीराम जन्मभूमि परिसर में 11 मई 2020 से प्रारंभ समतलीकरण के दौरान लगातार पुराने मन्दिर के चिन्ह ध्वंसावशेष के रूप में मिल रहे हैं।
‘श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महामंत्री चंपत राय ने प्रेस नोट जारी कर इसकी पुष्टि की है। साथ ही अपने सोशल मीडिया एकाउंट के माध्यम से प्राप्त हो रहे अवशेषों की तस्वीरें भी जारी की हैं।
मंदिर परिसर में प्राप्त हो रहे अवशेष (PC-Champat Rai)
चंपत राय ने बताया कि, ‘मलबे को हटाए जाने पर काले कसौटी पत्थर के 7 खंभे मिले हैं, इसके अतिरिक्त, बलुआ पत्थर के नक्काशी दर अवशेष व कुछ नीचे जाने पर एक शिवलिंग भी प्राप्त हुआ है जो कि 4 फ़ीट 11 इंच लंबा व इसकी परिधि 42 इंच की है। ऐसा ही शिवलिंग कुबेर टीले पर भी लगा हुआ मिला है।
During the excavation, a 5 feet Shivaling, 7 pillars of Black touchstone, 6 pillars of red sandstone & broken idols of Devi-Devtas have also been discovered. Work is continuing at slow pace due to strict regulations. We will be providing updates regularly. pic.twitter.com/UI6OzknSgF
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) May 20, 2020
ट्रस्ट की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेने के बाद विगत दस दिनों से मंदिर निर्माण कार्य हेतु जमीन को समतल किये जाने व पुराने गैंगवे को हटाने का काम किया जा रहा है। 11 मेज चल रहे इस काम के दौरान ही परिसर में मलबे से काफ़ी संख्या में पुरावशेष, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प, कलश,आमलक,दोरजाम्ब आदि कलाकृतियां, मेहराब के पत्थर, 7 ब्लैक टचस्टोन के स्तम्भ, 6 रेड सैंडस्टोन स्तम्भ, व शिवलिंग आदि प्राप्त हुए हैं।
परिसर में चल रहे निर्माण कार्य में कोरोना संबंधी समस्त सावधानियों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
भोपाल. कोरोना संकट के बीच आज मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 12वीं परीक्षा का टाइम टेबल घोषित किया गया है।
यह परीक्षा 9 जून से शुरू होकर 15 जून तक चलेगी। 4 दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि अब माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड दसवीं की परीक्षाएं नहीं होंगी। वहीं मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल की 12वीं की परीक्षाएं जून में होगी इसके बाद अब 12वीं के शेष पेपरों की तारीखें घोषित कर दी गई है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा हायर सेकण्डरी और हायर सेकण्डरी व्यवसायिक परीक्षा- 2020 की शेष विषयों की परीक्षाओं का (सामान्य एवं दिव्यांग छात्रों के लिये) परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। परीक्षाएँ 9 जून से 15 जून तक संचालित की जाएंगी।
सोशल डिस्टेंसिंग का रखना होगा ख्याल:
परीक्षा के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा इसके अलावा परीक्षा केंद्र पर सभी छात्रों को नाक मुंह पर नकाब या कपड़े से ढक कर रखना,फिजिकल डिस्टेंस नियमों का पालन करना होगा।
अभिभावक अपने बच्चों को कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए उनके द्वारा बरते जाने सावधानियों के बारे में जानकारी देना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि उनके बच्चे बीमार ना हों।
परीक्षा केंद्रों पर उपस्थित होने के दौरान जारी किए गए सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। परीक्षार्थी एवं अन्य सर्व संबंधित इस कार्यक्रम को कृपया नोट करें। परीक्षा काल में शासन द्वारा यदि कोई सार्वजनिक अथवा स्थानीय अवकाश घोषित किया जाता है तो भी परीक्षाएं यथावत संपन्न होंगी।
“मैं सोचती रही, तुम रचना कर रहे हो और मैं सार्थक हो रही हूं”, ये भावपूर्ण संवाद, किसी ग्रंथ में भरतमुनि के वर्णित विधियों के अनुसार बोलते किसी ऐतिहासिक पात्र का नहीं, लेकिन अभिनय के लिए वांछित सभी गुणों को धारण किए हुए, एक महिला के वेश में, महान रंगकर्मी, आलोक चटर्जी का है। फ़िल्म, “कलाकार”, निर्माण, “रिशिमम प्रोडक्शन्स” और निर्देशन, चिर परिचित और दिग्गज निर्देशक, अनिल दूबे।
निर्देशक ‘अनिल दुबे’
20वीं शताब्दी अपने मध्य तक युद्ध और राजनैतिक उथल-पुथल से कभी व्यवस्था और निश्चित संरचना का समर्थन नहीं कर पाई। साहित्य और सिनेमा की प्रस्तुतियों पर भी इसका प्रभाव पड़ा और संपूर्ण जीवनकाल को रेखांकित करती किसी एक विचारधारा या अवधारणा की जगह, क्षणिक अनुभूतियों के चित्रण को भी प्रोत्साहन मिला और लघु फ़िल्में या शॉर्ट फ़िल्मों के लिए एक सार्थक जगह बनी। लेकिन इन लघु फ़िल्मों का प्रचलन 21वीं सदी में ही खूब हो पाया क्योंकि यहां दर्शकों के पास धैर्य और समय दोनों की कमी थी।
“कलाकार”, इसलिए एक विशेष फ़िल्म है क्योंकि इसमें एक रंगकर्मी की रंगमंच के लिए चिंतापूर्ण प्रेम और एक पिता की पुत्री के लिए प्रेमपूर्ण चिंता को समानान्तर और बेहद सटीक तरीके से दिखाया गया है। आलोक चटर्जी के अभिनय की जितनी प्रशंसा की जाए कम है, लेकिन कनुप्रिया, जो कि बिल्कुल ताज़ादम चेहरा हैं फ़िल्मों की दुनिया में, उनका सधा हुआ अभिनय, चकित कर देता है।”
मंच पर या पर्दे पर आलोक चटर्जी और कनुप्रिया द्रोण और अश्वत्थामा से दिखते हैं, एक अनुभव से भरा, अजेय तो दूसरी उत्साह से भरी अदम्य।
फ़िल्म के एक दृश्य में ‘आलोक चटर्जी’
रंगमंच के कलाकारों का फ़िल्मों की ओर प्रवजन भी एक चिंताजनक तथ्य के रूप में दिखाया गया है और सबसे बड़ी और भावुक कर देने वाली बात, जो इस फ़िल्म में दिखी है, वो है पिता का गुरू के रूप में कर्तव्य और प्रेम।
इतने गांभीर्य से पूर्ण फ़िल्म का निर्देशन, उसी निर्देशक ने किया है, जिसने “लापतागंज” और “चिड़ियाघर” जैसे हल्के फुल्के मनोरंजन वाले धारावाहिक भी निर्देशित किए हैं, यानि अनिल दूबे। ये निर्देशक के विशाल कलात्मक क्षितिज को प्रदर्शित करता है।
देखें यह फ़िल्म:
कुल मिलाकर एक ज़बरदस्त फ़िल्म बन पड़ी है “कलाकार”, जिसमें भविष्य की आशा, वर्तमान की चिंता, पिता का प्रेम, कलाकार की निष्ठा, गुरू का महत्व और बहुत सी भावनाएं झलकती हैं। ये कहना अतिशयोक्ति नहीं माना जाएगा कि इस छोटी फ़िल्म ने अपने अंदर, भावनाओं का महासागर समेट लिया है।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)