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Sunday, August 9, 2026
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अब देश के पर्यटन पर भी पड़ रहा नोटबंदी का असर!

सौम्या केसरवानी


केंद्र सरकार द्वारा 500 व 1000 रुपये के पुराने नोटों पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाने के बाद देश के कई विभागों पर इसका असर पड़ता नज़र आ रहा है और अब इस श्रेणी में भारत का पर्यटन भी आ गया है। पुराने नोटों को बैन किए जाने के फैसले के बाद देश के पर्यटन पर काफी असर पड़ा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक ओडिशा में मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में कमी आई है।

नोटबंदी के बाद जगन्नाथ और पुरी जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट हुई है। बताया जा रहा है कि मंदिर में महाप्रसाद देने वाले रसोइये  पुराने नोट स्वीकार नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण मंदिर की कमाई पर काफी असर पड़ रहा है।

गौरतलब है कि इस मंदिर में नियमित रूप से 600 से लेकर 700 किलोग्राम महाप्रसाद बनाया जाता है,
जिसका सेवन रोजाना करीब 50,000 श्रद्धालु करते हैं। इस महाप्रसाद से करीब 8 से 12 लाख रुपये तक का व्यापार होता रहा है।

मंदिर के एक सेवक के अनुसार केंद्र सरकार के आदेश के बाद 500 और 1000 के नोट मंदिर में स्वीकार नहीं हो रहे हैं। हालांकि श्रधालुओं द्वारा दिए गये 500 और 1000 रुपये के नोटों को मना नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर एक धार्मिक स्थल है और यहाँ श्रधालुओं को मना नहीं किया जा सकता।

नोटों के बंडल ठिकाने लगाते धरा गया दिल्ली का डॉक्टर

आनंद रूप द्विवेदी,

नोट बंदी ने अनएकाउंटेड मनी वालों की जान सांसत में डाल रखी है। सेंट्रल दिल्ली के पहाड़गंज में एक पीड़ियाट्रिशियन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। दरअसल डॉ साहब 100 रुपये के नोट में 70 लाख रूपये दबाये हुए थे, जिसको ठिकाने लगाने के चक्कर में धर लिए गए।

पुलिस के अनुसार डॉक्टर नल्लाल कथित तौर पर नोटों के बंडल अपनी कार में रख रहे थे, तभी एक पास से गुजरने वाले आदमी ने उन्हें देख लिया और पुलिस पीसीआर को खबर कर दी। पुलिस ने डॉक्टर को गिरफ़्त में ले लिया है और प्रारंभिक जांच में उसके पास 69,86,000 रूपये 100 रुपये के नोटों में बरामद हुए।

आरोपी ने ये दावा किया है कि ये धनराशि उसके किसी कारोबारी दोस्त ने रखने के लिए दी थी, जिसे वो राजौरी गार्डेन स्थित उसके घर वापस करने ले जा रहा था। मामला आईटी डिपार्टमेंट को रेफर कर दिया गया है और जांच शुरू की जा चुकी है।

पुराने नोट बदलने की लिमिट घटाकर 2000 रूपए की गई, शादी वाले घर को मिलेगा 2.5 लाख

अमित द्विवेदी,

नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार ने गुरुवार को कुछ नई घोषणाएं की है। इन घोषणाओं के बाद एक तरफ जहां आम आदमी की परेशानियां थोड़ी और बढ़ेंगी वहीं उन लोगों को राहत भी मिलेगी, जिनके घर शादी है और उन्हें नोटबंदी के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार के नए निर्देश के मुताबिक, अब पुराने नोटों को बदलने की लिमिट 4500 रुपये से घटाकर 2000 रुपये कर दी गई है। कल यानी शुक्रवार से उपभोक्ता बैंक से सिर्फ 2000 रुपए  के पुराने नोट (500 और 1000 के नोट) ही बदल सकेंगे।

आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने स्पष्ट किया कि जिसके घर में शादी है, वह अपने परिवार के किसी भी सदस्य के खाते से 2.5 लाख रूपए निकाल सकता है। उन्होंने कहा कि लाभ अधिकाधिक लोगों को मिले, इसलिए पुराने नोटों को बदलने की लिमिट 4500 से घटाकर 2000 रूपए कर दी गई है।

सरकार द्वारा जारी नए निर्देश-

*शुक्रवार से 4500 की जगह सिर्फ 2000 रुपए के पुराने नोट ही बदले जा सकेंगे।

*शादी के लिए ढाई लाख रुपए निकाल सकते हैं। लेकिन परिवार के किसी एक ही सदस्य के खाते से 2.5 लाख रूपए मिलेंगे।

*शादी के लिए केवाईसी से जुड़े खाते से ही पैसा निकाल सकते हैं।

*किसान हर हफ्ते अपने खाते से 25000 रूपए निकाल सकते हैं।

*रबी के मौसम में बुवाई सुनिश्चित करने के लिए फसल ऋण या किसान क्रेडिट कार्ड के एवज में किसानों को एक हफ्ते में 25,000 रुपये निकासी की अनुमति।

*व्यापारियों को खर्चे एवं मज़दूरी के भुगतान में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े, इसलिए इन्हें हफ्ते में 50000 रूपए नकदी आहरण की अनुमति प्रदान की गई है।

*कृषि ऋण बीमा प्रीमियम भुगतान की समयसीमा 15 दिन बढ़ायी गई है।

नोटबंदी सरकार का सराहनीय कदम, आम आदमी की दिक्कतों का करें निराकरण -सुप्रीम कोर्ट

आनंद रूप द्विवेदी,

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सरकार द्वारा डीमोनेटाईजेशन के उद्देश्य को सही ठहराया है। साथ ही शीर्ष न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए कि आम आदमी को हो रही परेशानियों पर उचित कदम उठाये जायें, ताकि उन्हें आसानी से बैंक्स और एटीएम से पैसे मिल सकें।

न्यायालय ने कहा कि नोट बंदी का उद्देश्य अकूत काले धन को समाप्त करना है, जोकि सराहनीय है। जस्टिस टी एस ठाकुर और जस्टिक चन्द्रचूड की युगल खंडपीठ ने कहा कि ब्लैक मनी के विरुद्ध सरकार का यह कदम सराहनीय इसलिए भी है, क्योंकि ब्लैक मनी से आतंकवाद को सहूलियत मिलती है और देश की आर्थिक व्यवस्था लचर पड़ती है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से एफ़ी डेविट माँगा जिसमें उन्हें आम आदमी को होने वाली असुविधाओं के प्रति लिए गये आवश्यक कदमों की जानकारी हो। साथ ही आहरण राशि की सीमा में भी बढ़ोतरी के निर्देश दिए गये।

ये सुनवाई एक जनहित याचिका के दौरान हुई, जिसकी कपिल सिब्बल और कामिनी जैसवाल द्वारा पैरवी कि जा रही है। सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि हम सरकार के इस फैसले पर कोई निषेध नहीं चाहते, बल्कि उसके लागू किये जाने में क्या वैधानिकता है और पारित किये जाने का क्या तरीका है, इसपर सवाल कर रहे हैं।

सरकार के इस अहम फैसले पर बहस करते हुए एक ओर जहाँ सिब्बल ने इसे नागरिकों के प्रति दुर्व्यवहार करार दिया, वहीं रोहतगी ने कहा कि जिसने अपने अवैध धन का खुलासा नहीं किया, वो अपने पैसों को टॉयलेट पेपर कि तरह इस्तेमाल कर सकता है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान, 70 हज़ार करोड़ ख़र्च करने के बावजूद क्यों नहीं हो पा रहा सुधार!

सौम्या केसरवानी,

शैक्षिक मामले पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार है कि “शिक्षा से समाज और देश को निखारा जा सकता है” अर्थात शिक्षा ही वह कुंजी है, जिसकी मदद से आप किसी राष्ट्र का चरित्र निर्माण कर सकते हैं।

शिक्षा से समाज की दिशा तय होती है। वर्तमान में भारत की साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत है। आज़ादी के समय में यही दर 16 प्रतिशत के करीब थी। उस समय देश की जनसंख्या भी बहुत कम थी। हिन्दुस्तान में जीडीपी का कुल 4.3 प्रतिशत शिक्षा के ऊपर ख़र्च किया जाता है, कई देशों के मुकाबले में यह राशि बहुत ही ज़्यादा है।

भारत में शिक्षा को लेकर कई कानून बने हुए हैं। भारतीय संविधान के अनुसार 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को सरकार नि:शुल्क व अनिवार्य रूप से प्राथमिक शिक्षा प्रदान करेगी। इसके अलावा सरकारी संस्थानों में बहुत कम फीस की व्यवस्था की गई है। देश में कई ऐसे संस्थान हैं, जहां छात्र आसानी से पढ़ सकते हैं।

100 बात की एक बात ये है कि शिक्षा से बेरोजगारी और अपराध जैसी समस्याओं को क्यों नहीं दूर किया जा रहा है। एक कदम तो हमने मंगल पर बढ़ा दिया, मगर दूसरा कदम अभी भी नाले में है!

देश में बेरोजगारी और अपराधिक मामलों का बढ़ना, ये दर्शाता है कि शिक्षा के मामले में हम अभी भी बहुत पीछे हैं। सरकार मिड-डे मील और आंगनवाड़ी जैसे कार्यक्रमों की मदद से एक कोशिश ज़रुर कर रही है। लेकिन दुख की बात ये है कि ये बस अधिकारियों के निवाले बनकर रह गए हैं।

इंजीनियर्स, डॉक्टर्स, नर्सेस और कुशल कारीगरों ने विदेशों में सफ़लता के झंडे गाड़ दिए, मगर हमारी नींव अभी भी कमज़ोर है। इसलिए समय रहते हमें इस पर ग़ौर करने की ज़रुरत है।

राम गोपाल यादव की हुई घर वापसी, बने रहेंगे राज्यसभा में सपा संसदीय दल के नेता

अमित द्विवेदी,

समाजवादी पार्टी से हाल ही में निकाले गए राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव की गुरुवार को पार्टी में वापसी हो गई। मुलायम सिंह यादव ने एक पत्र लिखकर रामगोपाल के निष्कासन को रद्द किया और उनसे छीने गए सभी पद वापस लौटा दिए। फिलहाल रामगोपाल राज्यसभा में सपा संसदीय दल के नेता बने रहेंगे।

मुलायम सिंह के इस पहल को पारिवारिक कलह को समाप्त करने की दिशा में एक अहम कदम बताया जा रहा है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इस कदम से पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद शांत हो जाएगा। फिलहाल रामगोपाल यादव पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता के रूप में काम करते रहेंगे।

गौरतलब है कि राम गोपाल यादव ने गत दिनों आरोप लगाया था कि पार्टी में कुछ लोग मनमाने ढंग से टिकट बांटने में लगे हैं, जबकि यह अधिकार युवा मुख्यमंत्री अखिलेश को होना चाहिए। पिछले दिनों एक पत्रकार परिषद में भावुक होते हुए यादव ने कहा था कि कुछ लोग नेताजी को गलत सलाह दे रहे हैं, जिससे पार्टी का नुकसान हो सकता है।

रामगोपाल ने पिछले दिनों दुखी होते हुए यह भी कहा कि सपा का संविधान उन्होंने लिखा, और उन्हें ही निकाल दिया। पार्टी से निष्कासित नेताओं की वापसी की वकालत करते हुए यादव ने कहा था कि मुलायम इस बात की घोषणा करें कि विधानसभा चुनाव अखिलेश की अगुवाई में लड़ा जाएगा।

शीतसत्र: पहले दिन एटीएम की क़तार में धक्के खाते रहे सांसद, पत्रकार और सुरक्षाकर्मी

शिखा पाण्डेय,

कहते हैं, राम राज्य में शेर और बकरी एक ही घाट पर पानी पीते थे। भारत देश में भी लंबे समय से ऐसे अच्छे दिनों की उम्मीद थी, अब शायद वो आ गए हैं। हज़ार, पांच सौ की नोट बंदी ने छोटे-मोटों को ही नहीं, बड़े बड़ों को भी कतार में खड़ा कर दिया है। आपको बता दें कि संसद भवन परिसर में सांसद, सुरक्षाकर्मी और पत्रकार दिन भर एटीएम की कतार में धक्के खाते रहे।

संसद के कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और पत्रकार संसद भवन परिसर में एक एटीएम से दूसरे एटीएम दौड़ लगाते दिखे। संसद भवन में मौजूद भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में सांसदों और पूर्व सांसदों के पुराने नोट बदले गए और वे अपने खाते से पैसे निकाल पाए। नोट बदलने पर उंगली पर स्याही लगाने पर सांसद नाराज होते भी नज़र आए।

इस काम में केवल पत्रकार या संसद के कर्मचारी ही नहीं लगे हुए थे, बल्कि संसद और नेताओं की सुरक्षा में लगे अर्द्धसैनिक बलों के जवान भी पूरे समय एटीएम से रुपए निकालने की ताक में लगे हुए थे। संसद भवन परिसर में स्थित भारतीय स्टेट बैंक से नोट बदलवाने पर उंगली पर काली स्याही लगाने से तमिलनाडु के एक सांसद नाराज भी हो गए। उन्होंने अंग्रेजी में कहा कि अपने पैसे के लिए सांसद से ऐसा क्यों कराया जा रहा है।

कैसा रहा माहौल-

लोकसभा के दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि देने के लिए निचले सदन की कार्यवाही शुरू होने के पांच मिनट के दौरान ही स्थगित कर दी गई, जिसके बाद पत्रकार संसद भवन परिसर में लगे एटीएम की ओर दौड़े। पता चला कि किसी में रुपए नहीं हैं और संसदीय सौंध की एटीएम में लंबी लाइन लगी। फिर सभी ने पहली मंजिल पर स्टेट बैंक की शाखा की लॉज में घुसने का प्रयास किया। तब बताया गया कि वे केवल सांसदों और पूर्व सांसदों को ही पैसा देंगे। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने बैंक मैनेजर को दूसरों को भी सुविधा देने को कहा तो मैनेजर ने दो बजे के बाद का समय दिया।

इसके बाद संसद परिसर के पुस्तकालय के पास के एटीएम में पैसा डलने की खबर आई, फिर तो सभी सारा कुछ छोड़ कर वहीं दौड़े। मिनटों में लंबी लाइन लग गई, लेकिन यह सुनकर लोगों के होश उड़ गए कि कुल दो लाख रुपए ही एक बार में डाले जा सकते हैं। यानि पीछे खड़े लोगों की नंबर नहीं आने वाला है।

आमतौर पर लोकसभा की कार्यवाही न चलने पर कुछ ही समय में संसद परिसर में सन्नाटा पसरने लगता है, लेकिन बुधवार शाम तक लोग नोट बदलने और एटीएम से रुपया निकलवाने के चक्कर में परिसर में ही सक्रिय दिख रहे थे।

राष्ट्रपति ने देश में पर्याप्त नौकरियों के घटते स्तर पर जताई चिंता

आशीष पाण्डेय,

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा है कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन अगर देश में पर्याप्त नौकरियां होंगी तभी संतुष्टि और संपूर्णता होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इसके विपरीत का माहौल देश में त्रासदी ला सकता है। मुखर्जी ने कहा कि मशीनों के तेजी से चलन में आने के साथ हमें व्यापक बदलाव की ओर से ध्यान देना होगा।

शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुखों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि नौकरियां पैदा करने के आंकड़े पिछले सात वर्षों में सबसे निचले स्तर पर हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नौजवानों की सर्वाधिक आबादी होने से हमारे पास निम्न निर्भरता अनुपात का फायदा उठाने का पूरा मौका है, लेकिन नौकरियों के अवसर पैदा करने के विपरीत हालात देश में त्रासदी पैदा कर सकते हैं।

विभिन्न संस्थानों में छात्रों के विरोध की घटनाओं का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को उच्च स्तर की पढ़ाई करने के लिए सद्भावपूर्ण और शांतिपूर्ण माहौल की जरूरत है। उन्होंने संबंधित सरकारी विभागों से कहा कि वे इन शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं की मदद करें। मुखर्जी ने कहा कि देश के संस्थानों को प्रतिभाओं के सहायक के तौर पर काम करना चाहिए। साथ ही उन्‍होंने कहा कि शैक्षिक संस्‍थानों को खुद को ऐसा चुंबक बनना होगा, जिससे ब्रेन ड्रेन से ब्रेन रेन की प्रक्रिया शुरू हो जाए।

राष्ट्रपति ने कहा, “युवाओं की नाराजगी और परेशानी अशांति और उथल-पुथल के रूप में सामने आती है। ऐसे हालात पैदा मत होने दीजिए। हमें बड़ी आबादी को अपनी ताकत में तब्दील करना होगा। इसके लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जाना हमारी प्राथकिमता है। साल 2015 में नौकरियां पैदा होने का आंकड़ा 1.5 लाख था, जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम है।”

नोटबंदी के कारण हुई मौतों पर परिजनों को मिलेगा 20-20 लाख का मुआवजा!

सौम्या केसरवानी,

आज बुधवार 16 नवम्बर से संसद का ‘शीतकालीन सत्र’ शुरू गया है, सत्र शुरू होने से पहले ही राष्ट्रीय लोकदल ने नोटों पर प्रतिबंध लगाने के कारण होने वाली मौतों पर परिजनों को 20-20 लाख रुपये मआवजे के तौर पर देने की मांग रखी। इसके साथ ही लोकदल ने किसानों, मजदूरों, खुदरा व्यापारियों और बीपीएल कार्ड धारकों को 31 दिसम्बर तक पुराने नोट के लेनदेन की छूट देने की मांग की है।

आरएलडी नेता अनिल दुबे ने कहा, “केन्द्र सरकार ने ऐसा तानाशाही फरमाज जारी करने से पहले इसके व्यावहारिक पहलू पर ध्यान ही नहीं दिया।। पुराने नोट बंद करने से पहले सरकार को छोटे नोटों की पूरी व्यवस्था कर लेनी चाहिए थी।” उन्होंने कहा कि 500 और 1000 के पुराने नोट बंद कर देने के लाखों लोग भूखे और प्यासे हैं। दुबे ने कहा,”बीमार लोगों को नोटबंदी के कारण चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल पा रही है। लोगों के पास पैसा होने के बावजूद वे उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहें है। यदि सरकार पहले ही ध्यान देती तो छोटे व्यापरियों, पटरी दुकानदारों और मजदूरों को रोटी के लिए संघर्ष ना करना पड़ता।”

आरएलडी नेता ने कहा, “पहले तो सरकार ने सिर्फ दो से तीन दिन समस्या की बात कही थी। लेकिन अब मोदी सरकार लोगों से 50 दिन का समय मांग रही है।”  उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले से लोगों को कड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।

बैंक की कतारों में खड़े लोगों के लिए ‘मोदी चाय’ के बाद अब ‘राहुल चाय’!

शिखा पाण्डेय,

जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बचपन में चाय बेचने की बात का खुलासा हुआ है, तब से चुस्कियों और तरोताजगी के लिए जानी जानेवाली चाय का राजनीतिक महत्त्व बहुत बढ़ गया है। अब जब नोट बंदी के बाद लंबी कतारों में संघर्ष कर रही आम जनता को थोड़ी राहत देने के लिए लोगों को ‘मोदी चाय’ पिलाई गई थी, तो कांग्रेस इस मामले में कहाँ पीछे रहने वाली थी! जनता को राहत देने के उद्देश्य से आज कांग्रेस भी ‘राहुल चाय’ लेकर आ गई।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अपील के बाद तीसरे दिन बुधवार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैंकों के बाहर घंटों लाइन में लगे आम लोगों को ‘राहुल चाय’ पिलाई। गोरखपुर में बैंक रोड स्थित स्टेट बैंक की शाखा के सामने कतार लगाकर खड़े लोगों को चाय पिलाने के लिए बाकायदा टी स्टाल लगाए गए। ये स्टाल जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर सैयद जमाल की अगुआई में लगाए गए।

इस स्टाल पर आने वालों को ‘राहुल गांधी चाय’ के साथ में बिस्किट भी दिए गए। जिन बर्तनों में चाय रखकर वितरित की जा रही थी, उन पर राहुल गांधी की तस्वीर लगाई गई थी और चाय का नाम ‘राहुल गांधी चाय’ रखा गया था। वहीं यूपी के रामपुर में भी बैंक और एटीएम के बाहर परेशान जनता की मदद करने के लिए युवा कांग्रेसी आगे आए। इस मौके पर उन्होंने कतार में खड़े लोगों को चाय पिलाई।

जिलाध्यक्ष डॉ. सैयद जमाल ने कहा, “कांग्रेस कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों की मदद करेंगे। कार्यकर्ता अलग-अलग ढंग से लोगों की मदद कर भी रहे थे, लेकिन राहुल गांधी की अपील के बाद अब व्यवस्थित ढंग से मदद की जा रही है। स्टाल आगे भी लगाए जाएंगे।”

गौरतलब है कि 15 नवंबर को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने बुलंदशहर में बैंको के बाहर लाइन में खड़े लोगों को ‘मोदी चाय’ पिलाई थी।