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Sunday, August 9, 2026
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बहुत जल्द अपना कार्यभार संभालेंगी जयललिता, अस्पताल ने बताया पूरी तरह स्वस्थ

शिखा पाण्डेय
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता अब जल्द ही अपनी ज़िम्मेदारी संभाल सकती हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है और अब वे वेन्टीलेटर के बगैर सांस ले पा रही हैं। अस्पताल के डॉ प्रताप सी रेड्डी ने जयललिता के स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए कहा कि वो अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।

डॉ. रेड्डी ने बताया कि अब जयललिता जब चाहें अस्पताल से छुट्टी ले सकती हैं। उन्होंने बताया कि इस वक्त उनके शरीर का तंत्र पूरी तरह ठीक काम कर रहा है और उनकी मानसिक स्थिति भी ठीक हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें सिर्फ कुछ देर के लिए वेन्टिलेटर में रखा जाता है, ताकि उनके फेफड़ों में फैलाव आये।

जब डॉ. रेड्डी से पूछा गया कि जयललिता कब तक मुख्यमंत्री का काम संभाल पायेंगी, तब उन्होंने बताया, “इसमें थोड़ा समय लगेगा। उनके शरीर की कुछ प्रतिक्रियाओं में तेजी आयेगी। फिलहाल वो निर्देश दे पा रही हैं। लोगों की बात समझ पा रही हैं। वह मानसिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ हैं।” जयललिता ने स्वयं पिछले सप्ताह जारी एक बयान में अपने स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए इसे दोबारा जन्म करार दिया था।

आपको बता दें कि जयललिता लंबे समय से बीमार थीं। 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भरती कराया गया था। उनके फेफड़ों में संक्रमण था जिसका उपचार चेन्नई स्थित अपोलो में किया गया। उनके स्वास्थ्य को लेकर न सिर्फ उनकी पार्टी, बल्कि उनके प्रशंसक भी परेशान थे। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी अफवाह फैलने लगी थी, जिसके बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था।

ब्लॉग: ये जनता है मोदी जी, पलकों पर उठाती है, तो खाई में भी गिरा सकती है!

अनुज हनुमत

मोदी सरकार ने पिछले 8 नवंबर को रत आठ बजे के करीब एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए 500 और 1000 रुपये की नोटों पर पाबंदी लगाने का निर्णय लिया। इसके बाद से चारों तरफ हलचल तेज हो गई। आम लोगों को थोड़ी बहुत दिक्कतें हुईं, लेकिन ज्यादातर लोगों का यही कहना था कि हम देश के साथ हैं, लेकिन क्या जनता का कहना सच है क्योंकि आम जनता का रुख कोई नहीं भांप सकता । कब बदल जाये, क्या भरोसा। ज्यादा धैर्य वाला शब्द आम लोगों की डिक्शनरी में शायद है ही नहीं। यही कारण है कि शुरुआत में जो विपक्ष सुषुप्त ज्वालामुखी की तरह शांत था, वो अचानक मुखर हो उठा और गरीबों की तरफ से लड़ाई लड़नी शुरू कर दी।

कुछ जानकारों का कहना है कि जैसे अटल जी की सरकार द्वारा प्याज की महंगाई वाले निर्णय के चलते भाजपा सत्ता से दूर हो गई वैसे ही मोदी जी द्वारा 500 और 1000 की नोटों पर पाबंदी के निर्णय से कहीं फिर से भाजपा का वनवास न शुरू हो जाये। आपको बता दें कि  ग्रामीण भारत की 80 फीसदी से ज्‍यादा आबादी का बैंकिंग सिस्‍टम से आज भी जुड़ाव नहीं हो पाया है, और अब तो सहकारी बैंकों को भी 1000 और 500 रुपये के नोटों को लेने पर पाबंदी लगा दी है। ऐसे में दूर दराज के इलाकों के किसानों की मुश्‍किलें तो और भी बढ़ गईं हैं।

देखा जाए तो पहले ही मुसीबत में फंसे किसानों व मजदूरों के लिए ये दिन और कठिनाई भरे हो गए हैं और अब आने वाले महीनों में भी राहत दिखाई नहीं दे रही है। यदि मुश्‍किलें जल्‍द ही कम नहीं हुईं तो ये फैसला मोदी को पसंद करने वालों को नाराज कर सकता है। कुछ जानकारों का मानना है कि जैसे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने अपने कार्यकाल में प्याज की कीमतों में भारी उछाल कर जनता को रुलाया था जिसके चलते भारत के लोगों ने भाजपा को सत्ता से 10 साल दूर रखा था, वही अब मोदी ने नोटबंदी कर आम लोगों को परेशान कर दिया है ।

बहरहाल , सरकार को याद रखना चाहिए कि ये 125 करोड़ की आबादी का देश आज भी कृषि प्रधान है, और 60 फीसदी से ज्‍यादा आबादी गांवों व कस्‍बों में बसती है। ये भारत है, यहां भविष्‍य के अच्‍छे दिनों के इंतजार में यदि वर्तमान खराब होता है, तो सरकारें बदल जाती हैं। ध्‍यान रहे कि पिछली सरकार को प्‍याज ने ही गिराया था।

कुछ भी हो लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि अगर मोदी सरकार का यह ऐतिहासिक निर्णय कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने पर जरा सा भी कामयाब हुआ, तो भाजपा के और अभी अच्छे दिन आ सकते हैं लेकिन अगर नहीं हुआ, तो फिर जनता है, कुछ भी जनमत दे सकती है ।

नोट बंदी का असर, बेदम हुआ व्यापार

सौम्या केसरवानी,

इलाहाबाद। बड़े नोटों की बंदी के बाद से बाजार और व्यापार बेदम हैं। न खरीदरों की भीड़ है न दुकानों में जरूरत का हर सामान। सप्ताह में लाखों कमाने वाले व्यापारियों की कमाई हजारों में सिमट गई है। छोटे नोटों की किल्लत से होटल, ढाबा, कपड़ा बाजार, गिफ्ट शॉप के साथ ही किराना बाजार बेहाल है।

छोटे नोट न होने से किराने तक का सामान लोग नहीं ले पा रहे हैं। रेस्टोरेंट में खाना भी नहीं मिल रहा है। वहीं होटल में बगैर नोट के रात में रुकने में भी परेशानी हो रही है।

बीते एक सप्ताह से व्यापार का पहिया सुस्त पड़ा है।  यही हाल सराफा मार्केट वाली कचौड़ी गली में दिखा। सराफ गपशप कर समय बिता रहे थे। किराना व्यापारी भी सुस्ताते नजर आए। व्यापार का औसत 20 से 30 फीसदी के बीच सिमट गया। कपड़ा व्यापारी हों या फिर कास्मेटिक्स व गिफ्ट शाप वाले, फिलहाल सब छोटे नोट न होने से परेशान रहे। रेस्टोरेंट व होटल मालिक भी पस्त हैं।

बाजार और व्यापार का हाल जानने के लिए व्यापारियों से बात की गई, तो उनका दर्द छलक आया। व्यापारियों ने बताया कि छोटे नोटों की कमी और दो हजार के नोट के छुट्टे न मिलने से बड़े बजारों से माल नहीं मिल रहा है।

महाराष्ट्र: बीजेपी मंत्री की गाड़ी से मिले 91 लाख रूपए कैश, विपक्ष ने कहा, “कैबिनेट से बाहर कर जांच कराई जाए”

अनुज हनुमत,

एक तरफ 500 और 1000 के नोटों पर बैन के बाद बवाल मचा हुआ है। वहीं दूसरे ओर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक नेता जी लाखों रूपये के साथ पकड़े गये हैं। मामला महाराष्ट्र का है, जहाँ बीजेपी मंत्री सुभाष देशमुख की गाड़ी से करीब 91 लाख रुपए बरामद किये गए हैं।

महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने बीजेपी मंत्री सुभाष देशमुख की गाड़ी से बरामद करीब 91 लाख रुपए के ऑडिट के आदेश दे दिए हैं। मंत्री की गाड़ी से बरामद कैश, बैन किए गए 500 और 1000 के नोटों में थे। नोट बरामद होने के बाद मंत्री देशमुख ने सफाई दी थी कि रुपए लोकमंगल कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े रहे हैं। निगम चुनावों के मद्देनजर सभी गाड़ियों की तलाशी लेते वक्त ये नोट बरामद हुए थे।

बहरहाल, विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी ने सुभाष देशमुख को कैबिनेट से बाहर किए जाने की मांग की है। विपक्ष की मांग है कि राज्य बीजेपी नेताओं के अकाउंट की ट्रांजेक्शन की इनकम टैक्स से जांच कराई जाए। एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि कैश रिकवरी से यह बात साफ हो गई है कि बीजेपी नेता काले धन की कमाई में लिप्त हैं। मलिक ने मांग की कि देशमुख को कैबिनेट से बाहर कर गिरफ्तार किया जाए।

दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस्मानाबाद म्युनिसिपल स्क्वॉड द्वारा मंत्री की गाड़ी से कैश बरामद किए गए थे। समाचार एजेंसी पीटीआई ने मंत्री से बात करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। मंत्री के करीबी ने बताया कि वह अभी शहर से बाहर हैं। इस मामले के सामने के बाद विपक्ष को बैठे बिठाए मोदी सरकार को घेरने का मौका मिल गया है।

नोट बदलने वाले लोगों की ऊँगली पर न लगाएं अमिट स्याही -चुनाव आयोग

अनुज हनुमत,

केंद्र सरकार द्वारा आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने का ऐलान करने के बाद से पूरे देश में नोटबंदी पर एक बहस छिड़ गई है। केंद्र सरकार के इस फैसले को अभी दस दिन का समय हुआ है, अब जाकर देश में स्थिति धीरे धीरे सामान्य हो रही है।

संसद से लेकर सड़क पर चलते लोग केवल इसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन जहां विपक्षी दल मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, वहीं भाजपा अपनी सरकार के इस फैसले के पक्ष में है। आठ नवंबर के बाद से अब तक यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

शुक्रवार को चुनाव आयोग ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि बैंकों में नोट बदलने आ रहे लोगों की उंगुली पर अमिट स्याही ना लगाई जाए। स्याही लगाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग ने चिंता जाहिर की है और पत्र में लिखा है कि कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, यह स्याही उन लोगों की उंगुली पर लगाई जाती है, जो एक बार वोट डाल चुके होते हैं। ऐसे में यह एक समस्या पैदा हो जाएगी। देखना होगा वित्त मंत्रालय चुनाव आयोग के इस पत्र का क्या जवाब देता है।

गौरतलब हो कि एक न्यूज चैनल से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री वैंकया नायडू ने विपक्षी दलों की उस मांग को मानने से इनकार कर दिया था, जिसमें विपक्षी दल चाह रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में आकर नोटबंदी के मामले पर बात करें। नायडू ने कहा कि पीएम मोदी जब जरूरत होगी, तभी बोलेंगे।

गुरुवार को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बदलने का फैसला वापस लेने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। फिलहाल चुनाव आयोग के पत्र ने वित्त मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है । अब देखना होगा कि सरकार चुनाव आयोग को क्या जवाब देती है।

साहित्‍य का नोबेल पुरस्‍कार (2016) जीतने वाले गीतकार बॉब डिलन पुरस्‍कार समारोह में नहीं होंगे शामिल

ब्यूरो,

नोबल पुरस्‍कार देने वाली स्‍वीडिश अकादमी ने एक बयान में यह जानकारी दी है कि वर्ष 2016 का साहित्‍य का नोबेल पुरस्‍कार जीतने वाले गीतकार बॉब डिलन पुरस्‍कार समारोह में शामिल नहीं होंगे। संस्‍था को लिखे अपने एक पत्र में डिलन ने खुद बताया है कि वह अगले महीने स्‍टॉकहोम में होने वाले समारोह में शामिल होने में असमर्थ हैं क्‍योंकि उन्‍होंने पहले से ही कमिटमेंट कर रखे हैं।

संस्‍था ने कहा कि इससे पहले भी कई नोबेल पुरस्‍कार विजेताओं ने समारोह में हिस्‍सा नहीं लिया है, फिर भी उन्‍हें पुरस्‍कार दिया गया। सिर्फ एक जरूरत यह है कि डिलन को छह महीनों के भीतर एक नोबेल लेक्‍चर देना होगा। स्‍वीडिश अकादमी ने कहा कि डिलन अवार्ड मिलने से बेहद सम्‍मानित महसूस करते हैं और इच्‍छा जताते हैं कि काश वह व्‍यक्तिगत तौर पर इसे ग्रहण करने वहां मौजूद हो सकते।

हर साल की तरह इस साल भी 10 दिसंबर को स्वीडन के स्टॉकहोम में सभी विजेताओं को नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। सभी विजेताओं को स्वीडन के राजा कार्ल XVI गुस्ताफ पुरस्कार देंगे। स्वीडिश अकादमी ने बताया था कि बॉब डिलन को अमेरिकी गीतों की लंबी परंपरा में नयी काव्य शैली विकसित करने के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया है।

आपको बता दें कि अकादमी ने 13 अक्टूबर को डिलन को ये पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की थी। अकादमी के फैसले से सभी लोग चौंक गए थे क्योंकि नोबेल के इतिहास में पहली बार किसी गायक-गीतकार को ये पुरस्कार दिया गया है।

डिलन को पुरस्कार के साथ 80 लाख क्रोनोर (9,06,000 डॉलर) की धनराशि मिलेगी। 1941 में मिनेसोटा के डुलुथ में एक साधारण परिवार में जन्मे रॉबर्ट एलेन जिमेरमन उर्फ बॉब डिलेन ने बड़े होने के साथ हार्मोनिका, गिटार और पियानो बजाना सीखा।

अखिलेश हैं प्रदेश के चौपट राजा, डीएनए में है खराबी -सांसद अनुप्रिया पटेल

शिखा पाण्डेय,

विवादों के इस दौर में प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद, तमाम मंत्री और सांसद, विपक्षी दल के नेता विवादित बयान देने से बाज़ नहीं आ रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में भारतीय जनता पार्टी की सांसद अनुप्रिया पटेल ने समाजवादी पार्टी के लिए एक विवादित बयान दिया है। प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने भदोही में भाजपा की परिवर्तन रैली के दौरान कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह के परिवार के डीएनए में ही खराबी है। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी चौपट राजा करार दिया।

अनुप्रिया भदोही के गोपीगंज के राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में एक सभा को संबोधित कर रही थीं। वे प्रदेश की कानून व्यवस्था, सांप्रदयिक माहौल और महिलाओं की असुरक्षा पर भाषण दे रही थीं, तभी उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा, “जनता ने सोचा था कि अखिलेश अलग हैं। कार्यकाल अलग होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश आज अंधेरनगरी बन चुका है, जिसमें एक चौपट राजा बैठा हुआ है।”

उन्होंने कहा कि यूपी में आज जो हालात हैं, उससे साफ है कि अखिलेश चौपट राजा है। उनकी पार्टी में चुनाव के पहले जो विवाद है,वह अवैध खनन और अवैध संपत्तियों से अर्जित धन के लिए है, जिसको जनता समझ चुकी है।

उन्होंने पीएम मोदी के नोट बैन वाले फैसले को सही और सराहनीय बताया। नोट बैन के फैसले का समर्थन करते हुए अनुप्रिया ने कहा, पीएम ने बहुत ही सराहनीय कदम उठाया है, जनता इससे खुश है और वहीं ब्लैक मनी होल्डर नाराज हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि 2017 में बीजेपी और अपना दल गठबंधन की सरकार ही यूपी में बनेगी।

गौरतलब है कि यूपी की समाजवादी पार्टी का ‘निकाल-बुला’ का खेल सर्वविदित है। जब नेताजी किसी को निकालते हैं, तो अखिलेश फिर से उसकी वापसी करते हैं। जब कभी अखिलेश किसी को निकालते हैं, तो नेताजी उसकी वापसी करते हैं। उदाहरण के तौर पर हाल ही पार्टी के नेता रामगोपाल यादव की फिर से पार्टी में वापसी हुई है, जिन्हें मुलायम सिंह ने सपा से 6 साल के लिए निष्कासित किया था।

hotstar के कंटेंट को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट सख़्त, केंद्र सरकार को दिया जांच का आदेश

ब्यूरो,

hotstar.com, जो स्‍टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सहायक कंपनी द्वारा चलाई जाने वाली वेबसाइट है, उस पर सॉफ्ट पॉर्नोग्राफी समेत आपत्तिजनक कंटेंट डाउनलोड के लिए मुहैया कराने का बेहद संगीन आरोप हैं। दिल्‍ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह hotstar.com पर लगे आरोपों की जांच करे।

जस्टिस संजीव सचदेवा ने स्‍टार इंडिया और इसकी सहायक, नोवी डिजिटल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी करते हुए एक याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वे अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस का पालन किए बिना गैरकानूनी इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) चलाते हैं।

कोर्ट ने यह निर्देश अन-कैन्‍ड मीडिया प्रा. लि. की याचिका पर दिए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि वेबसाइट चलाने वाली कंपनी की जांच मंत्रालय नहीं करते, वेबसाइट पर पड़ा कंटेंट अनसेंसर्ड है और मंत्रालय इसे नियंत्रित नहीं करता। याचिका में दावा किया गया है कि कंपनियों के द्वारा आपत्तिजनक कंटेंट डाउनलोड के लिए मुहैया कराया जाता था। अदालत ने अपने आदेश में कहा है, ”कुछ वाकये ऐसे भी बताए गए हैं, जहां फर्म और इसकी वेबसाइट hotstar.com पर साॅफ्ट पॉर्नोग्राफी तक डाउनलाेड करने की इजाजत दी गई।”

आपको बता दें कि इस वेबसाइट और ऐप पर क्रिकेट, टीवी कार्यक्रम, वीडियो, फिल्‍में तथा अन्‍य मनोरंजक सामग्रियां प्रस्‍तुत की जाती हैं। इन दोनों कंपनियों के अलावा, अदालत ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा संचार एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय से इस आरोप पर जवाब मांगा है कि उन्‍होंने IPTV प्‍लेटफॉर्म वेबसाइट hotstar.com पर मौजूद कंटेंट की जांच नहीं की।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अगस्‍त 2015 में देश में पोर्न वेबसाइटों पर बैन लगाया था, जिसके विरोध में सोशल मीडिया व सिविल सोसाइटी के कुछ सदस्‍यों ने आवाज उठाई थी। सरकार के यह फैसला करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश में पॉर्न पूरी तरह से बैन नहीं किया जा सकता, क्योंकि कानूनी रूप से किसी को अपने घर के अंदर पॉर्न देखने से नहीं रोका जा सकता है।

नोटबंदी को लेकर ममता और केजरीवाल ने मोदी सरकार पर किया हमला, कहा, “इमरजेंसी से भी ख़राब माहौल”

शिखा पाण्डेय,

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सपोर्ट में उतरे दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि सरकार तीन दिनों के भीतर नोट बंदी का फैसला वापस ले, वरना परिणाम अच्छे नहीं होंगे। ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी को तानाशाही के माध्यम से देश नहीं चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह ऐसा संकट जो आपातकाल में भी नजर नहीं आया। वहीं केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि विमुद्रीकरण स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला है।

आजादपुर में एशिया की सबसे बड़ी सब्जी एवं फल मंडी में व्यापारियों को संबोधित करते हुए केजरीवाल और ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पर कालाधन निकालने के नाम पर आम आदमी पर मुश्किलों का पहाड़ तोड़ने का आरोप लगाया। दोनों नेताओं ने बाद में संसद मार्ग पर भारतीय रिजर्व बैंक के बाहर प्रदर्शन किया एवं मांग की कि केंद्रीय बैंक उन्हें नोटों की उपलब्धता के बारे में बताए।

गरीब और किसानों को सरकार न करे परेशान-

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने सरकार से नोटबंदी तीन दिनों में वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, “हम कालेधन के खिलाफ संघर्ष का समर्थन करते हैं, लेकिन गरीब और वंचित लोग परेशान नहीं होने चाहिए। हम चुप नहीं रहेंगे और यदि तीन दिन में ऐसा नहीं किया जाता है तो देशवासी आपको नहीं बख्शेंगे।” ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी, ” यदि आपमें साहस है तो मुझे जेल में डाल दीजिए, मुझे गोली मार दीजिए।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, “यह फैसला देश को 100 साल पीछे ले जा सकता है। सरकार हर रोज एक फैसले के साथ सामने आती है। परसों कहा गया था कि नोट बदलने की सीमा 4500 होगी और आज आप कहते हें कि यह 2000 रुपए है।”

ममता ने कहा कि भारत में महज चार फीसदी विनिमय के लिए कार्ड का उपयोग करते हैं, और सरकार प्लास्टिक मनी की बात करती है। उन्होंने कहा, ” कैश निकालने वालो की अंगुलियों पर स्याही लगायी जाएगी। यह चल क्या रहा है? क्या हम नौकर हैं, क्या हम चोर हैं और आप ईमानदार? ” कालेधन पर रोक पर सरकार की कटिबद्धता पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने पूछा कि विदेशों में रखे गए कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए गए।

वहीं केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा, “सरकार ने तीन दिन में नोटबंदी का फैसला वापस नहीं लिया तो बगावत होगी। मोदीजी ने विजय माल्या को एक ही रात में लंदन भेज दिया, जिन पर बड़ा उधार है। उन्होंने लोगों को सड़कों पर ला दिया, जो घंटों लाइन में खड़े हैं।” उन्होंने कहा, “कालाधन बाजार में फिर बड़ी मात्रा में आ गया है। कुछ लोगों को घर तक नोट पहुंचाये जा रहे हैं। यह स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला है। सरकार लोगों को अपना धन बैंकों में जमा करने के लिए बाध्य कर, उनसे 10 लाख करोड़ रूपए जमा करने और इस धनराशि का उपयोग मोदी के मित्रों का ऋण माफ करने के लिए करना चाहती है।”

राष्ट्रभक्ति की दुहाई देकर जनता को मूर्ख न बनाएं पीएम मोदी-

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सीमापार लक्षित हमले के अलावा स्वच्छ भारत और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे मोदी की कई पहलों का खुले दिल से समर्थन किया। यदि यह कालेधन के खिलाफ वाकई संघर्ष होता, तो वह और उनकी पार्टी अग्रिम मोर्चे पर होते। उन्होंने कहा, “लोग ठगे जा रहे हैं। आईटी ने पूर्व भाजपा मंत्री जी जर्नादन रेड्डी पर छापा क्यों नहीं मारा, जिन्होंने अपनी बेटी की शादी पर 500 करोड़ रुपए खर्च किए और वे चाहते हैं कि हम आम लोग शादी पर ढाई लाख रुपए ही खर्च करें।”

केजरीवाल ने कहा, “मोदीजी, लाइन में खड़ा रहने को राष्ट्रभक्ति कहकर लोगों को बेवकूफ मत बनाइए। लाइनों में खड़ा रहकर हुई 40 लोगों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है?” दिल्ली के मुख्यमंत्री ने मोदी पर गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के सिलसिले में भी कुछ आरोप लगाए और दावा किया कि वित्त मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर बैठे किसी व्यक्ति द्वारा उन्हें प्रदत्त दस्तावेजों पर उनके आरोप आधारित हैं।

किम कार्दाशियां के बाद अब मल्लिका शेरावत पर जानलेवा हमला!

पाई-पाई को तरस रही हैं मल्लिका शेरावत

पारुल पाण्डेय,

पेरिस में टीवी स्टार किम कर्दाशियां पर हुए हमले के बाद अब बॉलिवुड एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत पर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। डेली मेल के अनुसार मास्क पहने हुए अज्ञात तीन लोगों ने मल्लिका और उनके एक दोस्त पर 11 नवंबर की रात हमला किया। मल्लिका के अपने अपार्टमेंट में हुए इस हमले के दौरान वह अपने दोस्त संग किसी समारोह से वापसी कर घर पहुँची थीं। इस दौरान हमलावरों ने लूट का भी प्रयास किया।

टियर गैस के स्प्रे से किया हमला-

एक स्थानीय अखबार के मुताबिक हमलावरों ने स्कार्फ से अपने चेहरे को छिपाया था और बिना कुछ कहे अचानक उन्होंने मल्लिका और उनके दोस्त पर सबसे पहले टीयर गैस का स्प्रे किया और फिर इस घटना की अंजाम दिया।

खुफिया अफसरों द्वारा जाँच शुरू-

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस मामले में वहां की पुलिस ने खुफिया अफसरों द्वारा जांच शुरू करवा दी है। यह घटना किम कर्दाशियां के साथ हुई लूट की घटना के तक़रीबन एक महीने बाद हुई है। इस घटना के बाद मल्लिका शेरावत को गहरा झटका लगा है।

गौरतलब है कि पिछले महीने टीवी स्टार और कर्दाशियां सिस्टर्स में से एक किम कर्दाशियां पर भी कुछ लोगों ने हमला करके उनसे लूटपाट की थी। किम कर्दाशियां वेस्‍ट के प्रवक्‍ता का कहना है कि उन्‍हें पेरिस के होटल के कमरे में बंदूकधारियों ने बंधक बना लिया था। उसके अनुसार, पुलिस अफसरों की तरह कपड़े पहने दो नकाबपोश हथियारों से लैस होटल के कमरे में रविवार रात दाखिल हुए। जिसके बाद हमलावर किम से करोड़ों रुपयों की ज्‍वेलरी लूट ले गए हैं।

आपको बता दें कि किम फैशन वीक के सिलसिले में पेरिस गई थीं। उन्‍होंने रविवार शाम को गुवेंची का शो अटेंड किया। पिछले सप्‍ताह भी किम पर एक सोशल सेलिब्रिटी अटैकर ने एक रेस्‍तरां में घुसते समय हमला करने की कोशिश की थी। इसके अलावा कर्दाशियां पर 2014 में पेरिस फैशन वीक के बाहर भी हमला हो चुका है।