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Tuesday, August 11, 2026
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अब Gmail के जरिए नहीं भेज सकेंगे जावास्क्रिप्ट फाइल्स!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

बहुप्रसिद्ध मेलिंग ऐप जीमेल से 13 फरवरी से जावास्क्रिप्ट (.js) फाइलें नहीं भेजी जा सकेंगी। अपने उपभोक्ताओं को संभावित वायरसों से बचाने के लिए गूगल ने अपने आधिकारिक ब्लॉग के ज़रिये इस बात की घोषणा की। ब्लॉग में कहा गया है, “जीमेल पर वर्तमान में कई फाइल अटैचमेंट सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित हैं, जैसे .exe, .msc और .bat। अन्य प्रतिबंधित फाइलों की ही तरह अब आप .js फाइलें भी नहीं भेज पाएंगे। अब इसे भेजने के दौरान एक सुरक्षा चेतावनी सामने आएगी।”

ब्लॉग पोस्ट में आगे कहा गया है कि अगर आप 13 फरवरी के बाद जावास्क्रिप्ट अटैचमेंट भेजना चाहते हैं तो आप गूगल ड्राइव, गूगल क्लाउड स्टोरेज और अन्य स्टोरेज समाधान के माध्यम से भेज सकेंगे या साझा कर सकेंगे। जावास्क्रिप्ट फाइल्स स्वाभाविक रूप से बुरा नहीं हैं, लेकिन लोग ईमेल्स में इन फाइलों को अटैच नहीं कर सकेंगे।

दरअसल हाल ही में फीशिंग स्कैम के जरिए जीमेल आईडी की हैकिंग के मामले सामने आए थे। हैकर्स फिशिंग के जरिए जीमेल की नकल तैयार कर देते है। जीमेल रोजाना इस्तेमाल करने वाला शख्स नकली और असली में फर्क नहीं कर सकता है। ऐसे में यूजर अपना लॉगइन आईडी यूजर नेम और पासवर्ड नकली वेबपेज पर डाल देता है। इस तरह से हैकर्स को आसानी से यूजर का आईडी और पासवर्ड मिल जाता है। इस प्रकार कई सिक्योरिटी फीचर्स होने के बावजूद एक छोटी सी गलती के चलते आपका अकाउंट आसानी से हैक हो सकता है। इन्हीं कारणों को ध्यान में रखकर गूगल द्वारा यह फैसला लिया गया है।

गौरतलब है कि बैन्ड फाइल अटैचमेंट्स में .JS  फाइल एक्सटेंशन के अलावा और भी कई एक्सटेंशन है, जिन्हें बैन किया गया है। इनमें .ADE, .ADP, .BAT, .CHM, .CMD, .COM, .CPL, .EXE, .HTA, .INS, .ISP, .JAR, .JSE, .LIB, .LNK, .MDE, .MSC, .MSP, .MST, .PIF, .SCR, .SCT, .SHB, .SYS, .VB, .VBE, .VBS, .VXD, .WSC, .WSF और .WSH शामिल है। इनमें ज्यादातर फाइल टाइप्स का इस्तेमाल साइबर क्रिमिनल्स द्वारा ई-मेल के जरिए मालवेयर भेजने में काम आता है।

…जब सपा नेता ने खुद को मारे जूते

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

राजनीति में आये दिन नयी नयी नौटंकी देखने को मिलती रहती है। अब ऐसी ही एक नयी नौटंकी सामने आयी है। उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी के नेता और बुलंदशहर से विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी सुजात आलम ने जनसभा में खुद को जूते मारे।

बुलंदशहर से मौजूदा विधायक और सपा प्रत्याशी सुजात आलम क्षेत्र में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान वह माइक लेकर जोर-जोर से चिल्लाने लगे। उन्होंने कहा, “तुम चारों तरफ रहने वाले आगे आ जाओ। मैं तुमसे भीख मांगता हूं।” 2-3 दफा इस बात को दोहराने के बाद वह अपना कुर्ता उठाकर भीख मांगते हुए दिखाई दिए।

आलम ने आगे कहा कि मेरे हिंदू भाई कहते हैं कि तुम अपनी बिरादरी को ठीक कर लो, हम तुम्हे वोट देंगे, तुम्हारे पिता को वोट देंगे। उन्होंने कहा,”मुझे समाज के सामने क्यों जलील करते हो, अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो मुझे जूते मारो।” इसके बाद उन्होंने जूते निकालकर खुद को मारना भी शुरू कर दिया। मंच पर मौजूद समर्थक हैरान रह गए! उन्होंने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन तब तक वे अपने आपको धड़ाधड़ कई जूते मार चुके थे। आलम का यह जूते मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

गौरतलब है कि अगले महीने यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव शुरू हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी ले 8 मार्च के बीच सात चरणों में चुनाव होना है। वोटों की गिनती 11 मार्च को होगी। इस चुनाव में कांग्रेस और सपा मिलकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस 105 सीटों पर और समाजवादी पार्टी 298 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

जल्लीकट्टू के बाद अब कंबाला को लेकर किचकिच

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

‘जल्लीकट्टू’ पर हुए तमाम विवादों, सुप्रीम कोर्ट द्वारा बैन और विरोधियों द्वारा बैन हटाने में मिली सफलता के बाद अब कर्नाटक की जनता बैन किए गए ‘कंबाला’ को फिर शुरू करने की मांग कर रही है। इस सन्दर्भ में सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए छात्रों, कलाकारों और नेताओं ने शुक्रवार को एक विशाल प्रदर्शन करते हुए ‘कंबाला’ पर से प्रतिबंध हटाने की मांग की।

‘कंबाला’ तटीय क्षेत्र में सालाना आयोजित होने वाली पारंपरिक भैंसा दौड़ है। सभी कॉलेजों के छात्र संगठनों, यक्षगान कलाकारों, नेता और तुलुनाद रक्षणा वेदिके के सदस्यों ने हंपनकट्टा में प्रदर्शन किया। अभिनेता देवदास कपीकड, नवीन डी पाडिल, भोजराज वामनजूर, निर्माता-निर्देशक विजय कुमार कोडेलबेल, भाजपा सदस्य नलिन कुमार कतिल और कांग्रेस विधायक मोहीउद्दीन बावा सहित तुलु फिल्म जगत की मशहूर हस्तियों ने कंबाला के आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार से फौरन कार्रवाई की मांग की है।

इस प्रदर्शन के दौरान विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने मानव श्रृंखला बनाई। कतिल ने कहा कि कंबाला का 800 साल का इतिहास है और यह तुलुनाडु की परंपरा है। उन्होंने बताया कि छात्र कंबाला को बचाने के लिए जमा हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘पेटा’ कंबाला को गलत रूप में पेश करते हुए दावा कर रही है कि भैंसों से निर्दयता बरती गई है, जबकि उनके साथ अच्छा व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कंबाला पर से प्रतिबंध हटाए जाने तक उनका यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि नवंबर 2016 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कंबाला पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इस मामले में अगली सुनवाई 30 जनवरी को है। कतिल ने गुरुवार को धमकी दी थी कि यदि राज्य सरकार ने कंबाला के लिए अध्यादेश जारी नहीं किया तो वह आमरण अनशन करेंगे।

नेताजी के लिए लाठी खाने वाले शिवपाल हुए अकेले

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

समाजवादी पार्टी की बागडोर अखिलेश यादव के हाथों में जाने के बाद शिवपाल यादव के लिए यह पहला चुनाव होगा, जब उनकी कोई भूमिका नहीं होगी। वे महज एक प्रत्याशी के तौर पर मैदान में खड़े हैं।

अक्टूबर 1992 के बाद जब समाजवादी पार्टी अस्तित्व में आई, शिवपाल यादव ने मुलायम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर, हर चुनाव में अहम भूमिका निभाई। इतना ही नहीं सभी चुनावों में टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार तक की अहम जिम्मेदारी शिवपाल के ही पास रही।

आज 25 साल बाद समाजवादी पार्टी में एक युग का अंत हो चुका है। अखिलेश यादव की नए ‘नेताजी’ के रूप में ताजपोशी हो गई है और मुलायम पार्टी में महज संरक्षक की भूमिका में है। मुलायम अपने राजनीतिक जीवन में सफलता का श्रेय हमेशा शिवपाल को देते रहे हैं। वे अक्सर कहते रहें हैं कि कैसे शिवपाल ने उनके लिए लाठियां खाईं, मुकदमे झेले और जेल गए। यही वजह है कि मुलायम की सरकार में वे अहम पदों पर रहे। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता विपक्ष तक का पद उनके पास रहा, अखिलेश सरकार में भी चार साल तक वे मजबूत मंत्री थे, लेकिन अखिलेश यादव से बढ़ी तल्खी के बाद अब वे पूरी तरह से किनारे लगा दिए गए हैं।

निर्वाचन आयोग की ओर से साइकिल चिन्ह अखिलेश को देने के बाद शिवपाल के समर्थकों ने भी अब उनसे दूरी बना ली है। उनके समर्थकों को डर है कि शिवपाल से नजदीकियां आने वाले दिनों में उनके राजनैतिक भविष्य को खतरे में डाल सकता है। शिवपाल की गतिविधियां उनके अपने आवास, मुलायम आवास और अपने विधानसभा क्षेत्र जसवंतनगर तक सिमट कर रह गई है।

अखिलेश यादव की ओर से स्टार प्रचारकों की सूची में शिवपाल यादव शामिल नहीं है, जहां पिछले सभी चुनावों में मुलायम के साथ शिवपाल की चुनाव प्रचार के लिए बड़ी डिमांड रहती थी, वहीं इस बार उन्हें कोई पूछ नहीं रहा है।

अब भी कहेंगे “पधारो म्हारे देस”?

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

फिल्म पद्मावती बनाना निर्देशक संजय लीला भंसाली को बड़ा ‘ महंगा’ पड़ रहा है। फिल्म के प्रस्तुतीकरण के लिए तमाम तरह की आलिशान तैयारियों के बावजूद उन्हें उस जनता का ही जम कर विरोध सहना पड़ रहा है, जो उनके बिज़नस का इकलौता जरिया है। इतना ही नहीं, लोगों ने इस विरोध के दरम्यान भंसाली को थप्पड़ भी जड़ दिए!

दरअसल रानी पद्मावती को बखूबी जानने वालों का मानना है कि फिल्म में रानी पद्मावती से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। इसी के चलते जयपुर में  ‘पद्मावती’ की शूटिंग का शुक्रवार को जमकर विरोध हुआ और प्रदर्शनकारियों ने भंसाली को थप्पड़ मार दिया। उनके बाल भी खींचे गए। शूटिंग के दौरान यह हंगामा ‘करणी सेना’ ने किया। इस संगठन का आरोप है कि भंसाली की फिल्म’पद्मावती’में इतिहास से जुड़े तथ्यों से छेड़छाड़ की जा रही है। विरोध के दौरान फोर्ट के अंदर शूटिंग इंस्ट्रूमेंट्स में भी तोड़फोड़ की गई। इसके बाद भंसाली को शूटिंग रोकनी पड़ी।

जानिए पूरा मामला-

भंसाली जयपुर में अपनी आगामी फिल्म ‘पद्मावती’ के कुछ खास सीन शूट कर रहे थे। दोपहर करीब 12 बजे के बाद करणी सेना के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और फिल्म का विरोध करने लगे। शूटिंग के लिए रखे गए इंस्ट्रूमेंट्स और स्पीकर तोड़ने शुरू कर दिए और वहां अफरातफरी मच गई। इस दौरान संजय लीला भंसाली के साथ धक्का-मुक्की भी हुई।  शूटिंग रोक दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को संभाल लिया।

राजपूत करणी सेना के लीडर लोकेंद्र सिंह कालवी ने बताया,”जिस रानी ने देश और कुल की मर्यादा के लिए 16 हजार रानियों के साथ जौहर कर लिया था, उसे इस फिल्म में खिलजी की प्रेमिका के रूप में दिखाना बेहद आपत्तिजनक है। इस पूरी कहानी को ही ग्लैमराइज करके दिखाना हमारी संस्कृति पर तमाचा है।” कालवी ने कहा,”हम चुप नहीं रहेंगे। ये फिल्मकार क्रिएटिविटी के नाम पर हमारे इतिहास के साथ कुछ भी कर दें और हम चुप बैठें,ये कैसे हो सकता है? ये फिल्म बननी नहीं चाहिए।”

कौन थीं रानी पद्मावती?

रानी पद्मावती चित्तौड़गढ़ की रानी और राजा रतनसिंह की पत्नी थीं। वे बेहद खूबसूरत थीं। कहा जाता है कि खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने एक बार कहीं आईने में उनका प्रतिबिम्ब देख लिया था। वह उनकी खूबसूरती का इतना दीवाना हो गया कि रानी पद्मावती को पाने के लिए उसने चित्तौड़गढ़ पर हमला कर दिया। राजा रत्नसिंह युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। जब रानी को यह पता चला, तो उन्होंने 16000 रानियों के साथ जौहर कर लिया अर्थात अपने आप को खुद आग के हवाले कर दिया। रानी पद्मिनी ने आग में कूदकर जान दे दी, लेकिन अपनी आन-बान पर आँच नहीं आने दी।

मायावती पर भड़के योगी आदित्यनाथ, कहा, “बस नाम की हैं दलितों की नेता”

आँचल जायसवाल | Navpravah.com

उत्तर प्रदेश चुनाव के करीब आते ही नेताओं का जुबानी दंगल भी शुरू हो चुका है। नेता खुद को एक दूसरे से बड़ा बताने के लिए लगातार जुबानी हमला कर रहे हैं। विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर मायावती पर बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है।

आदित्यनाथ ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर हमला करते हुए कहा कि वह दलित विरोधी हैं। वह दलित नेता होने का दावा मात्र करती है, लेकिन उनके लिए मायावती ने कुछ नहीं किया। मायावती पर मुख्तार अंसारी और उसके परिवार को बसपा में शामिल करने पर हमला करते हुए योगी ने कहा कि बसपा ने मुख्तार अंसारी को पार्टी में शामिल कर संरक्षण दिया है।

योगी आदित्यनाथ ने जैनमुनि तरूण सागर के बयान का समर्थन किया। शुक्रवार जैनमुनि तरूण सागर ने मेरठ में बढ़ती जनसंख्या को लेकर बच्चों पर बयान देते हुए कहा था कि भारत में दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी सुविधा से व्यक्ति को वंछित किया जाये। सरकार द्वारा दी जा रही सुविधा को समाप्त कर देना चहिए।

पंजाब: केजरीवाल ने जारी किया मैनिफेस्टो

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। केजरीवाल ने अपने घोषणा पत्र में पांच रुपये में खाना, छात्रों को फ्री लैपटॉप, बिजली के बिल में छूट, पत्रकारों को पेशन जैसे कई लुभावने वादे किए हैं। पार्टी के मैनिफेस्टो के प्रमुख बिंदु हैं-

400 यूनिट तक के बिजली बिल को आधा माफ किया जाएगा।

गांव और शहर हेल्थ क्लीनिक की शुरुआत की जाएगी, जिसमें टेस्ट फ्री होंगे।

राज्य में 25 लाख रोजगार अवसरों का सृजन किया जाएगा।

राज्य में बालू माफिया जैसे सभी माफिया को खत्म किया जाएगा।

ट्रांसपोर्ट और प्रॉपर्टी टैक्स को खत्म किया जाएगा।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 2500 तक किया जाएगा।

सब्सिडी वाले कैंटीन की शुरुआत होगी जिसमें पांच रुपये में खाना दिया जाएगा।

एनआरआई की जमीन पर हुआ कब्जा खत्म किया जाएगा।

1984 के सिख दंगा पीड़‍ितों को पांच लाख रुपये का मुआजवा दिया जाएगा।

बेघरों को घर दिया जाएगा।

आठवीं तक के बच्चों को फ्री लैपटॉप दिया जाएगा

सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

शिक्षकों के 30 हजार खाली पदों पर भर्ती की जाएगी।

पत्रकारों को पेंशन देने की योजना शुरू की जाएगी।

पत्रकारों को टोल टैक्स देने से मिलेगी।

नए वकीलों को 5000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।

बिस्तर पर पड़े विकलांग मरीजों को 5,000 रुपये महीने की मदद दी जाएगी।

दलितों को 2 लाख तक के लोन पर सब्सिडी दी जाएगी।

महाराष्ट्र: शिवसेना-भाजपा का हुआ ब्रेकअप!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

भाजपा के साथ लंबे अरसे से गठबंधन के बावजूद चले आ रहे मतभेदों का सिलसिला अंततः शिवसेना ने ख़त्म कर दिया है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा के साथ अपना गठबंधन ख़त्म करने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र में होने वाले म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और जिला परिषद का चुनाव शिवसेना अकेले लड़ेगी।

सेना चीफ उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को एक सभा में कहा कि मैं किसी के दरवाजे पर अलायंस के लिए हाथ फैलाने नहीं जाऊंगा। दूसरी ओर, बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर कोई साथ आता है तो ठीक, नहीं तो हम अकेले ही विकास के रास्ते पर चलेंगे। दरअसल इन चुनावों में सीट बंटवारे को लेकर शिवसेना और बीजेपी में सहमति नहीं बन पा रही थी।

मुंबई के गोरेगांव में एक सभा के दौरान उद्धव ने कहा, “मैं किसी की दया का पात्र नहीं हूं। मैंने फैसला किया है कि किसी भी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और जिला परिषद चुनावों में कोई गठबंधन नहीं होगा। मैं किसी के सामने भी नहीं झुकूंगा। अगर कोई ये समझता है कि हम उनसे छोटे हैं, तो हम उन्हें हटा देंगे।”

उद्धव ने परोक्ष रूप से भाजपा को एक आक्रामक बैल करार देते हुए कहा, ” आने वाले चुनाव जल्लीकट्टू से कम नहीं हैं, जिसमें एक बैल को काबू में किया जाता है।”
बता दें कि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई और दूसरे जिलों की म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव 21 फरवरी को होने हैं।

उद्धव ने कहा, “आप मेरे साथ खड़े होने का वादा करते हैं, तो मैंने ये फैसला लिया है कि महाराष्ट्र में हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। एक बार जब मैंने फैसला ले लिया तो मैं ये नहीं चाहता कि कोई इस पर सवाल उठाए।” उन्होंने कहा, “मैं अपने साथ ऐसे मजबूत सैनिक चाहता हूं, जो सामने से हमला करें, ऐसे लोग नहीं चाहता जो पीठ में छुरा घोंपें।”

गौरतलब है कि शिवसेना और बीजेपी के बीच बीएमसी की सीटों पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक 227 सीटों वाली बीएमसी में बीजेपी आधी सीटें चाह रही थी, लेकिन शिवसेना इस पर राजी नहीं थी। महाराष्ट्र में मुंबई के अलावा 9 म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में 21 फरवरी को चुनाव होंगे। इनके लिए 27 से नामांकन शुरू हो जाएगा। इसके अलावा 23 जिला परिषदों के चुनाव भी होने हैं। चुनावों के नतीजे 23 फरवरी को आएंगे।

सुषमा स्वराज ने फिर पेश की मिसाल

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

आम नागरिकों की मौलिक ज़रूरतों का पूरा ख्याल रखने की दिशा में विदेश मंत्रालय ने एक और मिसाल पेश की है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आंध्रप्रदेश की दो ज़रूरतमंद दिव्यांग लड़कियों को पासपोर्ट दिलवाने के मामले में तुरंत एक्शन लिया और उन्हें पासपोर्ट दिलाया।

दरअसल दोनों महिलाएं सगी बहनें हैं। नेल्लोर की रहने वाली दोनों बहनों के नाम हैं रल्लापल्ली रामा सुब्बा राव और सुब्बालक्ष्मी। इनकी मां ने इंटरनेट पर अपनी समस्या व्यक्त की थी। दोनों बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब पासपोर्ट कर्मचारी उनके दरवाजे पर आ गए और खुद उनके घर आकर पासपोर्ट की औपचारिकताएं पूरी कीं।

राव एक रिटायर्ड तहसीलदार हैं। राव ने change.org पर सोमवार को अपनी दोनों बेटियों की पीड़ा साझा की थी। उनकी दोनों बेटियाँ पोलियो से ग्रसित हैं। उन्होंने लिखा था कि उनकी बेटियों को पासपोर्ट ऑफिस जाने में काफी तकलीफ होगी। उनकी पीड़ा पर सुषमा ने तुरंत जवाब दिया। सुषमा ने कहा कि वो जरूर मदद करेंगी। उन्होंने उनका ब्योरा पढ़ा। उसके बाद सुषमा ने आवश्यक निर्देश दिए। उनके आदेश पर स्थानीय पासपोर्ट ऑफिस के कर्मचारियों ने परिवार वालों से संपर्क साधा और सारी औपचारिकताएं पूरी कर लीं।

राव ने बताया कि वो अपनी दोनों बेटियों को विदेश भेजना चाहती हैं। उनका बेटा वहीं पर सेटल्ड है। दोनों बेटियों की उम्र 40 के आसपास बताई गई है। राव ने कहा कि सुषमा स्वराज के जवाब से वो काफी संतुष्ट हैं। उन्होंने जिस तत्परता से काम करवाया, वो उनकी कायल हो गई हैं। उन्होंने कहा कि हम दिल से उनके आभारी हैं।

50 हज़ार से ज़्यादा धनराशि निकालने पर लगेगा कैश ट्रांज़ैक्शन टैक्स!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार एक और ठोस कदम उठाने की फिराक में है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता वाली मुख्यमंत्रियों की समिति ने डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने संबंधी अपनी एक रिपोर्ट में सरकार से सिफारिश की है कि बैंक से 50 हजार रुपये से अधिक कॅश निकालने पर टैक्स लगाया जाए। अब अगर सरकार को समिति की सिफारिश पसंद आती है, तो एक अकाउंट से 50000 रुपये से अधिक कॅश निकालने पर आपको टैक्स देना होगा।

इस रिपोर्ट में सरकार को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जो भी व्यापारी डिजिटल लेन-देन स्वीकार कर रहे हैं। उन पर पूर्वप्रभाव से टैक्स न लगाया जाए। इसके अतिरिक्त समिति ने सभी तरह के डिजिटल पेमेंट्स पर एमडीआर चार्जेज (ट्रांजैक्शन शुल्क) खत्म करने की सिफारिश भी की है। साथ ही आयकर के दायरे में न आने वाले छोटे व्यापारियों को स्मार्ट फोन खरीदने को 1,000 रुपये तक सब्सिडी देने की सिफारिश भी की है।

डिजिटल पेमेंट्स करने वाले एक निश्चित वार्षिक आय वाले ग्राहकों को टैक्स रिफंड की सुविधा देने की सिफारिश भी समिति ने की है। चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता वाली समिति ने मंगलवार को प्रधानमंत्री को अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट सौंपने के बाद नायडू ने उम्मीद जतायी कि सरकार आगामी आम बजट में समिति की सिफारिशों को जगह देगी।

नायडू ने कहा कि नकदी के इस्तेमाल को कम करने के लिए 50,000 रुपये और उससे अधिक राशि बैंक से निकालने पर बैंकिंग कैश ट्रांजैक्शन टैक्स (बीसीटीटी) लगाया जाना चाहिए। वहीं कैश के बड़े-देन के संबंध में सरकार को एक निश्चित सीमा तय करनी चाहिए, जिससे ऊपर कोई नकद भुगतान न कर सके। समिति का कहना है कि वित्त मंत्रालय को इस संबंध में कदम उठाना चाहिए।

आपको बता दें कि सरकार ने 8 नवंबर को 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने के बाद डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए नायडू की अध्यक्षता में यह समिति गठित की थी। अब अगर सरकार द्वारा इस प्रकार का कोई बैंक ट्रांसक्शन टैक्स लगाया जाता है, तो ऐसा पहली दफा नहीं होगा। इससे पहले संप्रग सरकार ने भी बैंक ट्रांजैक्शन टैक्स लगाया था। लेकिन आम लोगों की नाराजगी के चलते तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के इस फैसले को सरकार को फौरन वापस लेना पड़ा था।