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Tuesday, August 11, 2026
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सपा-कांग्रेस गठबंधन तय, कांग्रेस के हाथ 105 सीट -सूत्र

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

खींचातानी, आगे-पीछे, तू तू-मैं मैं करते करते अंततः कांग्रेस और समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए राज़ी हो गए हैं। समाजवादी पार्टी ने कल रात अंतिम दाव पेंच खेलते हुए गंठबंधन का फैसला सशर्त कांग्रेस के खेमे पर छोड़ दिया था, लेकिन अब कांग्रेस सूत्रों के हवाले से खबर है कि दोनों दलों का गंठबंधन होना तय हो गया है।

दरअसल समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार किरणमय नंदा ने शनिवार देर अखिलेश यादव से हुई वार्ता के बाद यह साफ किया था कि गंठबंधन का फैसला कांग्रेस को ही लेना है। उन्होंने कहा था कि हमने अपना प्रस्ताव कांग्रेस को दे दिया है। सीटों से लेकर तमाम आंकड़े भी कांग्रेस को दे दिये हैं। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस आलाकमान को तय करना है कि गंठबंधन होगा या नहीं। नंदा ने स्पष्ट किया था कि अगर गंठबंधन नहीं होगा तो इसकी वजह हम नहीं बनेंगे।

अब खबर है कि दोनों पार्टियों का गठबंधन तय है। कांग्रेस सूत्रों ने दावा किया है कि अखिलेश यादव ने उसे 105 सीटें दी हैं। इसमें कुछ ऐसी सीटें होंगी जहां अखिलेश की पसंद के उम्मीदवार कांग्रेस से लड़ेंगे। यह खबर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव व संरक्षक मुलायम सिंह यादव द्वारा आज लखनऊ में दिन के 11 बजे के करीब घोषणा पत्र जारी करने के ठीक पहले आई है। घोषणापत्र जारी करने का कार्यक्रम प्रारम्भ भी हो चुका है। अखिलेश आज किसी समय भी गठबंधन का ऐलान कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पहले 120 सीटों की मांग पर अड़ी थी। एक तरफ कांग्रेस अधिक से अधिक सीटें सपा से झटकना चाहती थी, दूसरी तरफ सपा ने खुद 300 सीटों पर लड़ने का ऐलान कर कांग्रेस पर दबाव बढ़ा दिया था। समाजवादी पार्टी इस बात पर अड़ गयी थी कि वह 99 या 100 से ज्यादा सीटें किसी हाल में कांग्रेस को नहीं देगी।

23 साल बाद फिर ‘मिस यूनिवर्स’ प्रतियोगिता में शामिल होंगी सुष्मिता सेन!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

आज से 23 साल पहले, भारत देश के लिए अत्यंत गौरव का क्षण लाने वाली, ब्रह्मांड सुंदरी का ताज अपने मस्तक पर सजाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन एक बार फिर ‘मिस यूनिवर्स’ प्रतियोगिता का हिस्सा बनने जा रही हैं। जी हां! पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि वह सौंदर्य प्रतियोगिता के 65 वें सत्र के जजों के पैनल में शामिल हैं।

सुष्मिता ने इंस्टाग्राम पर लिखा है, “दिल धड़कने के लिए तैयार है। मैं काफी उत्साहित और भावुक हूँ और फिलिपिंस में 23 सालों के बाद घर लौटने के इंतजार में हूं। यह आगाज 1994 में मिस यूनिवर्स बनने पर मनीला से शुरु हुआ था।”

उल्लेखनीय है कि मिस यूनिवर्स सौंदर्य प्रतियोगिता 30 जनवरी से प्रारंभ होने जा रही है। मॉडल से अभिनेत्री बनने वाली 41 वर्षीय सुष्मिता कोे 1994 में मनीला में मिस यूनिवर्स का खिताब मिला था और वे 23 सालों के बाद प्रतियोगिता में वापस आने को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस वर्ष मिस यूनिवर्स सौंदर्य प्रतियोगिता में रोशमिता हरिमूर्ति भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

यूपी चुनावी दंगल: भाजपा को झटका देने के लिए रणनीति बना रही सपा

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

यूपी चुनावों के तिथि घोषित होने के बाद सभी राजनितिक पार्टियाँ एक दूसरे के वोट बैंक तोड़ने पर लगे हैं। उत्तर प्रदेश में इस बार के चुनाव में सपा और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है। हालाँकि पारिवारिक लड़ाई से सपा को नुकसान पंहुचा है, उससे निकलने के लिए अखिलेश यादव ने नई रणनीति बनाई है।

यूपी की जनता को अगर जाति के आधार पर बाँटकर देखा जाए, तो प्रदेश में करीब 8-10 प्रतिशत यादव वोटर हैं। वहीं करीब 25 प्रतिशत सवर्ण वोटर हैं, जिनमें से करीब 12-15 प्रतिशत ब्राह्मण हैं। यूपी में गैर-यादव पिछड़ी जातियों का वोट करीब 26 प्रतिशत है।

अखिलेश यादव का अगर कांग्रेस से गठबंधन होता है तो माना जा रहा है कि सपा-कांग्रेस को उम्मीद है कि दोनों दलों के मिलकर चुनावी अखाड़े में उतरने पर गठबंधन को 35-37 प्रतिशत वोट मिलेंगे, जो राज्य में सरकार बनाने के लिए पर्याप्त होंगे। साल 2012 में सपा ने करीब 29 प्रतिशत वोट के साथ बहुमत सरकार बनायी थी।

25 प्रतिशत सवर्ण वोट को मुख्यतः बीजेपी का वोटर माना जाता है। बीजेपी के इस वोट बैंक में भेद लगाने के लिए अखिलेश का गठबंधन और सपा के पुराने नेताओं के खिलाफ जंग की दोनों ही कदम कारगर साबित होंगे। सपा नेताओं को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मोहभंग और नोटबंदी जैसे फैसलों से नाराज भाजपा वोटर पाला बदल सकते हैं।

सपा के रणनीतिकार मानकर चल रहे हैं कि करीब 10 प्रतिशत यादव वोटों के अलावा करीब 15 प्रतिशत हिंदू वोट सपा-कांग्रेस गठबंधन आसानी से हासिल कर लेगा। शिवपाल यादव, अमर सिंह, मुख्तार अंसारी इत्यादि से अखिलेश यादव की सीधी टक्कर का फायदा पार्टी को मिल सकता है। कई महीनों तक चले इस टकराव से अखिलेश की छवि “दलाल, भ्रष्ट और गुंडा” तत्वों को किसी भी कीमत पर न बर्दाश्त करने वाले नेता की बनी है।

साल 2012 के विधान सभा चुनाव में अखिलेश को युवाओं का काफी वोट मिला था। सपा को उम्मीद है कि इस बार चूंकि अखिलेश पहले से मजबूत और सपा के निर्विवाद सुप्रीमो बनकर उभरे हैं, तो पार्टी को इसका बड़ा फायदा मिलेगा।

प्रशासन मुस्तैद, हेलीकॉप्टर और ड्रोन से होगी निगरानी -संजय कुमार

अनुज हनुमत | Navpravah.com

इलाहाबाद। संगम नगरी प्रयाग में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम तट पर लगने वाले माघ मेले में अगले स्नान की तैयारी जोरों पर है। पिछले दो स्नानों को सकुशल सम्पन्न कराने के बाद प्रशासन भी मौनी अमावस्या के दिन होने वाले तीसरे स्नान के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बार भी जिलाधिकारी संजय कुमार की अगुवाई में प्रशासन संगम क्षेत्र खासकर घाटों की स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है।

नवप्रवाह मीडिया से ख़ास बातचीत में जिलाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि इस बार हमने स्वच्छता से लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु विशेष व्यवस्थाएं की हैं। घाटों पर किसी भी अप्रिय घटना से निपटने हेतु 24×7 जल पुलिस की टुकड़ियां मुस्तैद हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 27 तारीख के स्नान को देखते हुए घाटों के पास पूरे संगम क्षेत्र में ट्वायलेट्स, क्लॉथ चेंजिंग रूम्स की संख्या बढ़ाई जा रही है, जिससे मेले में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को दिक्कत न हो।

ज़िलाधिकारी ने बताया कि अगले स्नान के दिन घाटों पर आरएएफ तथा पुलिस की पर्याप्त टीम रहेगी। सेना के हेलीकॉप्टर तथा ड्रोन से निगरानी की जायेगी। इसके अलावा भीड़ में सादी वर्दी में भी फोर्स तैनात होगी। उनके साथ एलआईयू तथा आईबी के लोग भी तैनात रहेंगे। संगम पर स्नान हेतु जल की पर्याप्त मात्रा है, किसी भी स्नानार्थी को कोई परेशानी नहीं होगी।

गौरतलब हो कि इलाहाबाद में गंगा, यमुना एवं विलुप्त हुई पौराणिक नदी सरस्वती के संगम पर हर स्नान के दौरान हजारों – लाखों श्रद्धालु सुदूर जिलों और प्रदेशों से आकर डुबकी लगाते हैं। एक माह तक चलने वाले माघ मेले में आस्था के कई अलग अलग रंग देखने को मिलते हैं। इलाहाबाद में गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम तट पर लगने वाले माघ मेले में इस बार दूध की धारा भी बहेगी! जी हां आपको बता दें कि इस बार माघ मेला क्षेत्र में पराग डेयरी 40 दुकानें लगाकर दूध की बिक्री करेगा। वहीं खाद्य विभाग भी राशन की 26 दुकानें खोलेगा।

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क्यों खास है माघ मेला-

कल्पवासी पूरे एक महीने तक मेले में कल्पवास करते हैं। हजारों वर्षों से ऐसी मान्यता है कि कल्पवास करने वाले व्यक्त‍ि को जीते जी मोक्ष की प्राप्त‍ि होती है और फिर ऐसे व्यक्ति को किसी भी तीर्थ जाने की जरूरत नहीं होती। मान्यता है कि माघ के महीने में प्रयाग में न सिर्फ लोग कल्पवास करते हैं, बल्कि 33 कोटि देवी-देवता भी वहीं रहते हैं। कल्पवास करने वाले साधकों को वो किसी न किसी रूप में दर्शन देते हैं। इसलिए भक्त अपना घर और मोह-माया छोड़कर यहां धार्मिक कार्यों में लीन रहते हैं।

कल्पवास किसी तपस्या से कम नहीं है, क्योंकि इसमें सिर्फ एक समय ही भोजन किया जाता है और स्नान तीन बार। कल्पवास में रहने के दौरान दान भी करना होता है। अन्न, काला तिल, ऊन, वस्त्र व बर्तन आदि का लोग दान करते हैं।

सुरक्षा की चाकचौबंद व्यवस्था-

पूरे एक महीने चलने वाले माघ मेले को सकुशल सम्पन्न कराने हेतु प्रशासन ने भी अपनी कमर कस रखी है । इस बार पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इन सीसीटीवी कैमरे से मेले में सुरक्षा के मद्देनजर निगरानी रखी जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे मेला क्षेत्र में ट्रैफिक और सुरक्षा व्‍यवस्‍था को देखते हुए चप्‍पे-चप्‍पे पर पुलिस तैनात है। मेले में जाने के लिए अलग पॉन्टून पुल का इस्तेमाल किया जा रहा है। वापस आने वाले श्रद्धालुओं को वापसी वाले पॉन्टून पुल से भेजा जा रहा है । घाटों पर होने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए इस बार प्रशासन काफी सतर्क है । इसीलिए डेढ़ सौ गोताखोर स्नान घाटों पर लगाये गए हैं जो हर पल घाटों पर नजर बनाए रखेंगे ।

नोटबन्दी का दिख रहा असर-

इस बार माघ मेला में भी नोटबन्दी का असर देखने को मिल रहा है। दुकानों में भीड़ कम दिख रही है। कई दुकानदारों ने भी माना कि नोटबन्दी के कारण इस बार ‘मार्केट डाउन’ है। संगम क्षेत्र में हमने कई पंडो से जब बात की तो उन्होंने भी माना कि इस बार नोटबन्दी के कारण लोगों की संख्या बहुत कम है और मेला की रंगत भी फीकी है। फिलहाल मेला क्षेत्र में कई लोगों का यह भी मानना था कि नोटबन्दी का फैसला सही था और धीरे धीरे इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं ।

प्रशासन ने किये कुछ नए प्रयोग-

इस बार प्रशासन ने आम लोगो के लिए हेलीकॉप्टर के साथ हॉट एयर बैलून से सैर की व्यवस्था की है । यही नही मेले के कुछ हिस्से में मुफ्त वाई-फाई, मोबाइल और माइक्रो एटीएम जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ साथ सादगी और प्रदूषण मुक्त मेले के लिए पॉलीथिन प्रतिबंधित की गई है ।

कब कब होंगे स्नान-

°पौष पूर्णिमा 12 जनवरी
°मकर संक्रांति 14 जनवरी
°मौनी अमावस्या 27 जनवरी
°बसंत पंचमी 01 फरवरी
°माघी पूर्णिमा 10 फरवरी
°महाशिवरात्रि 24 फरवरी

आज जारी होगी भाजपा की दूसरी लिस्ट

अनुज हनुमत | Navpravah.com

यूपी विधानसभा चुनावों में अब ज्यादा दिन नहीं रह गए हैं, लेकिन अभी कई पार्टियों ने इस महासंग्राम में अपने सिपाही नही उतारे हैं। इसी हफ्ते भारतीय जनता पार्टी ने यूपी और उत्तराखंड के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट घोषित की थी,  लेकिन यूपी में बहुत सी ऐसी सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं घोषित किये, जिसमें सबसे ज्यादा संघर्ष होने की संभावना है। कल देर शाम भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक संपन्न हुई, जिसमें दूसरी लिस्ट की सीटों पर जमकर माथापच्ची हुई। पार्टी आज दूसरी लिस्ट जारी करेगी।

सूत्रों की मानें तो बीजेपी बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल की कई प्रमुख सीटों पर दलबदलू नेताओं को मौका दे सकती है। यूपी में पार्टी के लिए कार्यरत पुराने कर्मठ एवं संघर्षरत नेताओं (टिकटार्थी) को बड़ा झटका लग सकता है। हालिया दिनों में बड़ी संख्या में दूसरे दलों के शीर्ष नेताओं ने टिकट की घोषणा से ऐन पहले भाजपा में पलटी मारी। जानकारों का मानना है कि ये सभी नेता इसलिए शामिल हुए हैं क्योंकि इन्हें पार्टी से टिकट चाहिए और उन्हें पूरी उम्मीद भी है।

कल हुई बैठक में नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, रामलाल, ओम प्रकाश माथुर, दिनेश शर्मा, अरूण जेटली , जे पी नड्डा और केशव प्रसाद मौर्य सहित अन्य प्रमुख नेता उपस्थित थे।

भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों की सूची आज जारी होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी कितने दलबदलू नेताओ को टिकट देती है और कितने युवाओं को! लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि इस बार पार्टी यूपी की सत्ता में चल रहे वनवास को खत्म करने लिए कड़े निर्णय ले सकती है। सबसे ज्यादा नजर बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल के उम्मीदवारों पर रहेगी, क्योंकि यूपी की सियासत के तमाम समीकरण यहीं से तय होते हैं।

केरल में एक और बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

राजनीति को एक गंदा दलदल कहने वाले लोग आज फिर सही साबित हुए हैं। केरल के कन्नूर जिले में कथित तौर पर माकपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा के 30 वर्षीय एक कार्यकर्ता की चाकू मारकर हत्या कर दी। कन्नूर जिला राजनीतिक रूप से अति  संवेदनशील माना जाता है। इसके अतिरिक्त एक अन्य घटना में थालीपरंबा स्थित आरएसएस के कार्यालय पर एक देसी बम फेंका गया, हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है।

भाजपा कार्यकर्ता संतोष पर बुधवार रात उस वक्त हमला किया गया, जब वह धर्मादोम के अंदालूर स्थित अपने घर पर अकेला था। कन्नूर के पुलिस अधीक्षक के पी फिलिप ने बताया कि संतोष की अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। संतोष ने पिछला स्थानीय निकाय चुनाव भी लड़ा था। संतोष के घऱ में उनकी मां, पत्नी और दो बच्चे हैं।

भाजपा की जिला यूनिट ने इसके बाद गुरुवार को शहर में हड़ताल की घोषणा कर दी। भाजपा ने इस हादसे में राज्य के सीएम से सफाई मांगी है। घटना सीएम की विधानसभा सीट के नजदीक हुई है। पिछले साल कन्नूर में कम से कम छह पार्टी कार्यकर्ताओं की मौत हो गई। इसमें आरएसएस और सीपीआई-एम दोनों के कार्यकर्ता शामिल हैं।

गौरतलब है कि कन्नूर में 57वां राज्य स्कूल कला उत्सव आयोजित किया जा रहा है। लेकिन घटना के बाद से यहां सभी दुकानें बंद हैं और वाहन भी सड़कों से नदारद है। हमले का विरोध करने के लिए भाजपा ने कन्नूर में हड़ताल का आह्वान किया है।

यूएस: आज राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे डोनाल्ड ट्रम्प

अनुज हनुमत | Navpravah.com

अभी हाल ही में हुए चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करके विश्व के सबसे मजबूत देश के राष्ट्रपति पद पर कब्जा करने वाले डोनाल्ड ट्रंप आज शपथ लेंगे। आज अमेरिका को अपना 45वां राष्ट्रपति मिल जाएगा। खबरों के मुताबिक ट्रम्प वाशिंगटन डीसी पहुंच चुके हैं। खास बात ये है कि शपथ लेने के लिए उसी बाइबिल का इस्तेमाल ट्रंप करने वाले हैं, जिसका राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने इस्तेमाल किया था। ये अपने आप में अहम होगा।

आपको बता दें कि अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति बनने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप का शपथ समारोह यूएस कैपिटल के वेस्ट ग्राउंड्स पर होगा। पूरे कैपिटॉल हिल को अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया है।

गौरतलब हो कि भारतीय समय के मुताबिक आज रात 10 बजे से ट्रंप का शपथ ग्रहण शुरु होगा, जो कि रात 1.30 बजे तक चलेगा। जॉन लेजेंड, सेलिन डयाज़ और सर एल्टन जॉन जैसी मशहूर ए लिस्ट सेलिब्रेटीज़ ने ट्रंप के इनॉगरेशऩ में परफॉर्म करने से मना कर दिया है। इस पर ट्रंप ने व्यंग्य करते हुए ट्वीट किया है, ‘A-list celebrities जब हिलेरी क्लिंटन के लिये कुछ नहीं कर पायीं, तो ट्रंप को उनकी क्या ज़रूरत। उन्हें राष्ट्रपति जनता ने बनाया है और अपने शपथ समारोह में ट्रंप को जनता के अलावा किसी सिलेब्रिटी की ज़रूरत नहीं है। ट्रम्प के साथ इतना ही विवाद नहीं, बल्कि करीब 50 डेमोक्रेटिक नेता भी समारोह का बॉयकोट कर रहे हैं, लेकिन उम्मीदों से परे हिलेरी क्लिंटन और बिल क्लिंटन, पूर्व राषट्रपति बुश और जिमी कार्टर भी समारोह में नज़र आयेंगे। वैसे भारत के नज़रिए से ट्रंप का राष्ट्रपति बनना बेहद अहम है, क्योंकि वो अपने भाषणों में वो कई बार भारत और पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं।

ट्रंप कह चुके हैं कि वो भारत के अच्छे दोस्त साबित होंगे। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वो भारत के साथ खड़े हैं। भारत की आर्थिक विकास का उदाहरण वे कई बार अपने चुनावी भाषणों में दे चुके हैं। आपको बता दें कि ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में सरकार की ओर से कोई शीर्ष राजनेता या अधिकारी शामिल नहीं होगा। अमेरिका में भारत के राजदूत अरुण कुमार ही शिरकत करेंगे।

चुनाव जीतने के बाद अब तक डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ प्रेसीडेंट इलेक्ट थे और व्हाइट हाउस से दूर थे। लेकिन शपथ लेने के बाद वो ओवल ऑफिस का भार संभालेंगे और ये जिम्मेदारी संभालते ही उनके शुरुआती फैसले क्या होंगे, इस पर अमेरिका और दुनिया की नज़र रहेगी। देखना दिलचस्प होगा कि डोनाल्ड ट्रम्प आतंकवाद खासकर ISIS पर कैसे लगाम लगा पाते हैं! ये उनके लिए सबसे चैलेंजिग कार्य होगा।

यूपी चुनावी दंगल: चुनाव आयोग के निर्देशों की उड़ रही धज्जियाँ

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

यूपी चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों का वोट बैंक को रिझाने का नया प्लान सामने आ गया है। प्रदेश में अब राजनीतिक दल वोट बैंक को रिझाने में जुट गए हैं। रोज नए हथकंडे अपनाते हुए वोटरों को रिझाने के लिए खास प्लान बनाये जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद जातीय समीकरण और धार्मिक समीकरण बनाये-बिगाड़े जा रहे हैं।

हालाँकि बीजेपी अभी तक अपने सभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं कर सकी है, लेकिन पश्चिमी यूपी में ध्रुवीकरण की राजनीति करने का बीजेपी पर पहले भी आरोप लगता रहा है। संगीत सोम ने इन आरोपों में जान फूंकने का काम किया है, क्षेत्र में समुदाय विशेष को मुज़फ्फरनगर दंगों के लिए दोषी ठहराने से लेकर कैराना में पलायन के मुद्दे पर अब राजीनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने चुनाव की घोषणा के बाद ही अपनी प्रेस कांफ्रेंस के जरिये मुस्लिमों से सीधी अपील की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के मुस्लिम बसपा के साथ आयें और भाजपा जैसी सांप्रदायिक शक्तियों को परास्त करें। मायावती ने मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी को जिम्मा सौंपा है। बसपा ने 22 मौलानाओं को प्रचार करने के लिए आमंत्रित किया है। हालाँकि सपा के साथ मुस्लिमों को जाने से रोकने के लिए बसपा को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।

यूपी चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और सपा का साथ आना इस सियासी संग्राम में काफी अहम हो सकता है। मुस्लिमों का साथ कांग्रेस और सपा दोनों को हमेशा से मिलता रहा है। इस ‘खास’ समीकरण के कारण ही कांग्रेस-सपा का गठबंधन यूपी चुनाव में निर्णायक सबित हो सकता है, सपा को मुस्लिमों का साथ पिछले विधानसभा चुनाव में भी मिला था और सपा इस चुनाव में भी ऐसी ही उम्मीद कर रही है।

कुल मिलाकर ये कहें तो अब राजनीतिक दल खुलकर अपनी चाल को अंजाम दे रहे हैं और वोट बैंक पर निशाना साध रहे हैं। मुस्लिम किधर जायेंगे ये उनका फैसला होगा लेकिन मुस्लिमों को रिझाने के लिए सभी पार्टियां लगी हुई हैं।

अतीक़ अहमद और अंसारी बंधुओं को मिल सकता है झटका, तनी अखिलेश की भृकुटि

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को पिता मुलायम सिंह ने अब 38 लोगों की लिस्ट सौंपी है, जिसके बाद टिकटों को लेकर पार्टी में माथापच्ची फिर शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश इनमें से कुछ लोगों का टिकट काटकर बाकी ज्यादातर लोगों को चुनाव में उतराने पर राजी हैं।

सपा उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कहा है कि अपर्णा यादव, ओम प्रकाश, नारद राय को टिकट मिल सकता है, लेकिन अतीक अहमद और अंसारी बंधुओं का टिकट कट सकता है। शिवपाल यादव पर कोई फैसला नहीं किया गया है। नंदा ने साफ किया कि गायत्री प्रजापति अमेठी से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि सपा कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी में कोई सीट छोड़ने के मूड में नहीं है।

मुलायम सिंह ने जो लिस्ट दी थी, उसमें शिवपाल यादव की जगह उनके बेटे आदित्य यादव का नाम था। इसकी वजह यह है कि खुद शिवपाल यादव ने मुलायम से मिलकर अखिलेश के साथ काम करने की अनिच्छा जाहिर की थी। इसके बाद मुलायम ने शिवपाल के बेटे आदित्य यादव का नाम दे दिया। हालांकि बाद में अखिलेश यादव की तरफ से कहा गया कि आदित्य का जीतना पक्का नहीं है और शिवपाल को ही जसवंत नगर की महत्वपूर्ण सीट पर लड़ना चाहिए। इसके बाद फिर मुलायम ने शिवपाल यादव को बुलाकर ये बात बतायी और सूत्रों की मानें तो वे लगभग मान गए हैं।

वहीं शादाब फातिमा को गाजीपुर से और नारद राय को बलिया सदर से टिकट मिल सकता है। इसके अलावा मुलायम सिंह द्वारा नाम दिए जाने के बाद ओम प्रकाश सिंह को भी टिकट मिलना तय माना जा रहा है। चौधरी बलिया के फेफना से विधायक हैं, हालांकि अखिलेश उनकी जगह संग्राम सिंह को यहां से लड़ाना चाहते हैं।

महाराजगंज के नौतनवा से अमनमणि त्रिपाठी का पत्ता कट सकता है और ये सीट भी कांग्रेस के पास जा सकती है, क्योंकि यहां भी मौजूदा विधायक कांग्रेस का है।

वहीं बारांबकी की रामनगर सीट फिर से अरविंद सिंह गोप को मिल सकती है और यहां पर बेनी प्रसाद के बेटे राकेश वर्मा की सीट बदली जा सकती है, उधर मुख्तार अंसारी की पार्टी से उनके भाई सिबगतुल्‍ला अंसारी का नाम मुलायम ने नहीं भेजा है और इसका फैसला अखिलेश पर छोड़ दिया है।

गठबंधन के पहले ही सीटों को लेकर आमने सामने सपा-कांग्रेस

आँचल जायसवाल | Navpravah.com

यूपी में पहली बार होने जा रहे सपा-कांग्रेस गठबंधन के चलते अमेठी में सपा के कद्दावर मंत्री रहे गायत्री प्रजापति और कांग्रेस की रानी अमिता सिंह आमने सामने आ गए हैं। यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सपा-कांग्रेस में गठबंधन की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इसको लेकर यहां दोनों पार्टिया आमने-सामने हो गई हैं।

कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने कहा कि अमेठी लोकसभा की दो सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशी लड़ाने का ऐलान किया है, तो पूर्व मंत्री अमिता सिंह ने अमेठी रायबरेली की सभी सीटों पर। इसके चलते अब अमेठी में सपा कांग्रेस नेताओं के बीच वाकयुद्ध तेज हो गया है। सवाल सबसे बड़ा यह भी है कि गठबंधन में कांग्रेस अपने गढ़ अमेठी में गायत्री प्रजापति के लिए सीट छोड़ने पर सहमत होती है या नहीं।

हालांकि समाजवादी पार्टी यह कह सकती है कि गायत्री प्रजापति मौजूदा विधायक हैं, लिहाजा यह सीट उनके लिए छोड़ दी जाए, लेकिन इसके लिए समाजवादी पार्टी को उसी तरह कांग्रेस को मनाना होगा, जैसे वह लखनऊ की जीती हुई कांग्रेस की सीट पर मुलायम सिंह यादव की बहू अर्पणा यादव के लिए सीट छोड़ने को लेकर मनाएगी। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो गायत्री प्रजापति मुश्किल मे आ जायेगें।

बुधवार को कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति समाजवादी पार्टी कार्यालय पर अमेठी व संग्रामपुर के कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद रहे। मंत्री ने इस दौरान दावा किया कि कार्यकर्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए उन्हें फिर से विधायक बनाने का संकल्प लिया है। कार्यकर्ताओं से खाली होकर गायत्री प्रसाद मीडिया के सामने आए और कहा मैं अमेठी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ूंगा। यही नहीं उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि वो मुख्यमंत्री और नेता जी के आदेश से प्रचार-प्रसार कर रहा हूं। गायत्री प्रजापति ने कांग्रेस से गठबंधन पर बोलते हुए कहा कि अमेठी और गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से सपा ही चुनाव लड़ेगी।

कांग्रेस की ओर से गायत्री प्रजापति के बयान पर पलटवार हुआ। पूर्व मंत्री रानी अमीता सिंह ने कहा कि गायत्री प्रजापति को अमेठी से चुनाव लड़ने के सम्बन्ध में न तो समाजवादी पार्टी और न ही कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई अधिकृत बयान आया है। ऐसे में उन्हें बयानबाजी से बचना चाहिए। यही नहीं उन्होंने कहा कि मंगलवार को प्रशासन द्वारा गायत्री के कई ठिकानों पर हुई छापेमारी से वो घबराए हुए हैं। इसलिए प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए वो ऐसा बयान दे रहे हैं।