जल्लीकट्टू के बाद अब कंबाला को लेकर किचकिच

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

‘जल्लीकट्टू’ पर हुए तमाम विवादों, सुप्रीम कोर्ट द्वारा बैन और विरोधियों द्वारा बैन हटाने में मिली सफलता के बाद अब कर्नाटक की जनता बैन किए गए ‘कंबाला’ को फिर शुरू करने की मांग कर रही है। इस सन्दर्भ में सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए छात्रों, कलाकारों और नेताओं ने शुक्रवार को एक विशाल प्रदर्शन करते हुए ‘कंबाला’ पर से प्रतिबंध हटाने की मांग की।

‘कंबाला’ तटीय क्षेत्र में सालाना आयोजित होने वाली पारंपरिक भैंसा दौड़ है। सभी कॉलेजों के छात्र संगठनों, यक्षगान कलाकारों, नेता और तुलुनाद रक्षणा वेदिके के सदस्यों ने हंपनकट्टा में प्रदर्शन किया। अभिनेता देवदास कपीकड, नवीन डी पाडिल, भोजराज वामनजूर, निर्माता-निर्देशक विजय कुमार कोडेलबेल, भाजपा सदस्य नलिन कुमार कतिल और कांग्रेस विधायक मोहीउद्दीन बावा सहित तुलु फिल्म जगत की मशहूर हस्तियों ने कंबाला के आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार से फौरन कार्रवाई की मांग की है।

इस प्रदर्शन के दौरान विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने मानव श्रृंखला बनाई। कतिल ने कहा कि कंबाला का 800 साल का इतिहास है और यह तुलुनाडु की परंपरा है। उन्होंने बताया कि छात्र कंबाला को बचाने के लिए जमा हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘पेटा’ कंबाला को गलत रूप में पेश करते हुए दावा कर रही है कि भैंसों से निर्दयता बरती गई है, जबकि उनके साथ अच्छा व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कंबाला पर से प्रतिबंध हटाए जाने तक उनका यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि नवंबर 2016 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कंबाला पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अंतरिम आदेश जारी किया था। इस मामले में अगली सुनवाई 30 जनवरी को है। कतिल ने गुरुवार को धमकी दी थी कि यदि राज्य सरकार ने कंबाला के लिए अध्यादेश जारी नहीं किया तो वह आमरण अनशन करेंगे।

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