हॉटस्टार स्पेशल्स की वेब सीरीज़ ‘आर्या’ से अभिनेत्री सुष्मिता सेन की एक बार फिर से वापसी हो रही है। सुष्मिता सेन इसके पहले हिंदी की फ़िल्म ‘नो प्रॉब्लम’ और श्रीजीत की बंगाली फ़िल्म में नज़र आईं थी। सुष्मिता की इस वेब सीरीज़ की प्रतीक्षा उनके फ़ैन्स लम्बे समय से कर रहे हैं। फ़िल्म का ट्रेलर शेयर करते हुए सुष्मिता ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि “जब आपकी रगों में अपराध बहता हो और धोखेबाज़ी आपका पारिवारिक धंधा हो, तो कोई क्या कर सकता है।”
“फ़िल्म के निर्देशक हैं श्रीराम माधवानी, जिन्होंने फ़िल्म नीरजा का निर्देशन किया था। श्रीराम इस फ़िल्म को लेकर काफ़ी एक्साइटेड हैं। आइए बढ़ते हैं कहानी की तरफ़।”
फ़िल्म में चंद्रचूड़ सिंह सुष्मिता सेन के पति हैं, जो कि एक व्यवसायी हैं। चंद्रचूड़ का व्यापार नक़ली दवाइयों का होता है, ज़ाहिर है दुश्मनी भी बहुत होती है, एक दिन अचानक उनके दुश्मनों ने उनपर जानलेवा हमला कर दिया और चंद्रचूड़ की जान चली जाती है। सुष्मिता काफ़ी समय तक परेशान रहती हैं। एक दिन उनका दोस्त अपने पति का बिज़्नेस लीड करने के लिए प्रेरित करता है। सुष्मिता धंधे में आती हैं, और जल्द ही अपनी धाक जमा लेती हैं।
यह फ़ैमिली टाइप की सीरीज़ है, ट्रेलर में गालियों के स्थान नहीं है। जिसे एक प्लस प्वाइंट के हिसाब से देखा जा सकता है। इसको औसतन अधिक ऑडीएन्स मिल सकता है। नेगेटिव रोल में सिकंदर खेर नज़र आएँगे। ट्रेलर काफ़ी कसा हुआ है। नीरजा के निर्देशक श्रीराम से एक बेहतरीन फ़िल्म की उम्मीद की जा रही है। सीरीज़ 19 जून से स्ट्रीम होगी।
देश में अब कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हर दिन हजारों की संख्या में कोरोना से संक्रमित मरीज बढ़ रहे हैं, इस बीच सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है कि कोविड-19 के कारण विचाराधीन कैदियों को रिहा करने के लिए सामान्य निर्देश जारी नहीं कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर यह माँग की गई थी कि सात साल की सजा काट रहे कैदियों को एक समान दिशा निर्देश जारी कर पैरोल दी जाए। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि, “कोरोना वायरस के कारण अंडरट्रायल कैदियों को सामान्य निर्देश जारी कर हम उन्हें रिहा नहीं कर सकते हैं।”
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, हाइकोर्ट को यह तय करना चाहिए कि किसे रिहा किया जाना है और किसे नहीं। यह हाईकोर्ट के जरिए विचार किया जाने वाला मुद्दा है, हर राज्य में स्थिति अलग-अलग है।
बता दें कि, देश में हर रोज कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अब तक देश में 226770 कोरोना मरीजों की संख्या पहुंच चुकी है, इसके अलावा 6348 लोगों की कोरोना वायरस के कारण मौत हो चुकी है।
बिहार के दरभंगा जिले से अवैध रूप से बम बनाते समय हुए धमाके का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, बम विस्फोट में एक ही परिवार के सात लोग घायल हुए हैं।
विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के रामनगर से ये खबर सामने आ रही है। जहां बम विस्फोट से मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि घर में बम बनाने के दौरान ये विस्फोट हुआ है। क्षतिग्रस्त मकान मोहम्मद नजीर का बताया जा रहा है। मौके पर पुलिस पहुंची है। बताया जा रहा है कि क्षतिग्रस्त मकान के अलावा आस-पास के घरों में भी धमाके का असर हुआ है।
घायलों को डीएमसीएच में भर्ती किया है। घायल की स्थिति नाजुक बतायी जा रही है। ग़ौरतलब है कि पहले भी लश्करे तैयबा तथा सिमी जैसे आतंकवादी संगठन के आतंकवादी दरभंगा में मिल चुके हैं, इसलिए लोगो मे डर का माहौल है।
मध्यप्रदेश का रीवा शहर, जहाँ जूदेव राजवंश के किला प्रांगण में स्थित है, भगवान शिव का महामृत्युंजय मंदिर । इस मंदिर में लगभग हजार छिद्रों वाला अद्भुत शिवलिंग स्थित है जो अन्य कहीं देखने को नहीं मिलता । यह शिवलिंग सफ़ेद रंग का है जिसपर किसी भी मौसम का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।
महामृत्युंजय मन्दिर प्रवेश द्वार व शिवलिंग
ऐसा माना जाता है कि इस शिवलिंग का अभिषेक करने से अकाल मृत्यु का संकट भी टल जाता है । साथ ही मंदिर में यदि महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाये तो हर बाधा से मुक्ति स्वयं भगवान महामृत्युंजय की कृपा से मिल जाती है, साथ ही, इस शक्तिशाली मंत्र का जप करने से घायल व्यक्ति या बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति के प्राणों की रक्षा भी हो जाती है ।
क्या है महामृत्युंजय मन्त्र का इतिहास ?
वैदिक मान्यताओं के अनुसार मरकंड ऋषि निःसंतान थे। सन्तान प्राप्ति हेतु भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए ऋषि मरकंड ने तपस्या शुरू कर दी । पहले तो भगवान शिव प्रकट नहीं हुए लेकिन बहुत प्रयासों के बाद उन्होंने प्रकट होकर ऋषि को संतान प्राप्ति का वरदान दिया, साथ ही शिव जी ने कहा कि उनका पुत्र अल्पायु होगा जिसकी बारह वर्ष की आयु में मृत्यु निश्चित है ।
रीवा किला स्थित ‘महामृत्युंजय मंदिर’
एक ओर जहाँ पुत्र प्राप्ति की प्रसन्नता थी वहीँ उसकी अल्पायु का ज्ञान माता पिता को कष्ट पहुंचा रहा था । उन्होंने अपने पुत्र का नाम मार्कन्डेय रखा । माता पिता ने पुत्र मार्कन्डेय को उसकी अल्पायु होने की बात बता दी । तभी बालक मार्कन्डेय ने यह निश्चय कर लिया कि वो उन्हीं महादेव से अपने प्राणों की रक्षा का वरदान प्राप्त करेगा जिन्होंने उसे जीवन दिया है ।
“बालक मार्कन्डेय को पिता ने बचपन से ही शिव मन्त्र का जाप करना सिखा दिया । छोटी सी आयु में ही मार्कन्डेय ने महामृत्युंजय मन्त्र की रचना कर दी । बारह वर्षों की आयु पूर्ण होने पर बालक मार्कन्डेय शिव मंदिर में बैठकर इसी मन्त्र का जाप कर रहे थे कि तभी कुछ यमदूत उनके प्राण लेने आ गये, लेकिन वो बालक के निकट जाने की हिम्मत न जुटा सके और हार मानकर वापस यमराज के पास चले गये । यमराज उन यमदूतों पर बहुत नाराज़ हुए और मार्कन्डेय के प्राण लेने स्वयं चले गये ।”
बालक मार्कन्डेय ने यमराज को देखा तो शिवलिंग से लिपट गये और जोर-जोर से मंत्रोच्चार करने लगे । यमराज ने बलपूर्वक बालक को शिवलिंग से हटाते हुए ले जाने की चेष्टा की तो जोरदार गर्जन के साथ मंदिर हिल उठा । एक तेज़ प्रकाश से यमराज की आँखें व्याकुल हो गईं । भगवान् शिव स्वयं उस शिवलिंग से प्रकट हुए और यमराज को त्रिशूल से सावधान करते हुए बोले, ‘तुमने मेरे भक्त को उसकी साधना से खींचने का साहस कैसे किया?’
यमराज भयभीत हो गये और महादेव से क्षमा याचना करते हुए कहा, भगवन आपने ही जीवों से प्राण हरने का यह निष्ठुर कार्य मुझे सौंपा है । मैं तो बस विधि पूर्वक अपना कार्य कर रहा हूँ । इसपर महादेव शांत हुए और बोले, ‘अब तुम इसके प्राण नहीं ले सकते क्योंकि मैं अपने भक्त की साधना से प्रसन्न होते हुए इसे दीर्घायु होने का वरदान देता हूँ ।’ तब यमराज ने यह घोषणा की कि आज के बाद मैं किसी भी महादेव भक्त को, जो मार्कन्डेय रचित महामृत्युंजय मन्त्र का जाप करेगा, त्रास नहीं दूंगा । वैदिक मान्यताओं के अनुसार महामृत्युंजय मन्त्र, काल को भी परास्त कर देता है ।
क्या है रीवा के महामृत्युंजय मंदिर का इतिहास?
ऐसा माना जाता है कि, एक बार बघेलखंड के जूदेव राजवंश के इक्कीसवें राजा विक्रमादित्यदेव ने शिकार के दौरान एक बाघ को चीतल का पीछा करते हुए देखा । एक निश्चित स्थान पर आकर वह बाघ रुक गया और बिना चीतल का शिकार किये ही लौट गया ।
रीवा किला
राजा यह देख आश्चर्य में पड़ गये । राजा ने उस स्थान की खुदाई करवाने का निश्चय किया जिसके बाद वहाँ से एक सफ़ेद रंग का अद्भुत शिवलिंग प्राप्त हुआ । शिवमहापुराण में ऐसे ही सफ़ेद शिवलिंग का उल्लेख किया गया है । राजा ने उस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना करवा दी । इस स्थान पर पूजा अर्चना की जाने लगी जिसके बाद आगे चलकर राजा भाव सिंह ने यहाँ भव्य मंदिर का निर्माण करवा दिया। मंदिर के समीप ही शेरशाह सूरी के पुत्र सलीम शाह के समकालीन एक जर्जर किला भी था जिसे राजा विक्रमादित्य द्वारा पुनर्निर्मित करवाते हुए नया किला बनवाकर रीवा को विन्ध्य क्षेत्र की राजधानी के रूप में स्थापित कर दिया गया ।
रीवा किला प्रमुख द्वार
सावन के प्रत्येक सोमवार यहाँ श्रद्धालुओं की अपार भीड़ लगती है । लोग महामृत्युंजय का अभिषेक कर अपने जीवन रक्षा के लिए अर्चना करते हैं । मध्यप्रदेश समेत सुदूर राज्यों से लोग यहाँ दर्शन व अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं ।
देश में कोरोना वायरस तेजी से बढ़ रहा है, मामले बढ़ने के साथ ही कई जगह अब स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगी हैं। इसी को लेकर अब राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कोरोना से निपटने की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया कि, ‘कोई भी गलती न करें, सावधानी बरतें, आम लोगों पर कोरोना का ज्यादा असर पड़ रहा है। ये कोरोना का संकट एक सत्य है और ब्लफ एंड ब्लस्टर वाली सभी सरकारों का सच एक-एक कर उजागर होगा।
गौरतलब है कि, बिहार में इस साल विधानसभा के चुनाव हैं, ऐसे में प्रशांत किशोर लगातार एक्टिव दिख रहे हैं, कोरोना संकट को लेकर पहले भी यह सवाल उठाते रहे हैं और नीतीश सरकार को हमेशा निशाने पर लेते रहते हैं, यही वजह है कि उन्हें नितीश की मंडली से बाहर निकलना पड़ा।
बिहार में मजदूरों की वापसी के बाद से ही कोरोना के मामलों में तेजी हो गयी है। अब तक बिहार में कोरोना वायरस के कुल केस की संख्या साढ़े चार हजार के करीब पहुंच गई है, इनमें से 2250 मामले एक्टिव हैं।
बता दें कि कोरोना संकट के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र ने भी बीते दिनों इस बात को स्वीकार किया था कि, अब देश में ऐसे अस्पताल बनाने की जरूरत आ गई है, जो सिर्फ कोविड के इस्तेमाल के लिए बनें हों।
केरल में एक गर्भवती हथिनी की मौत को लेकर चारों तरफ लोगों में गुस्सा भरा है। जिस तरह बारुद भरा अन्ननास खिलाकर उसे मारा गया है, इससे देश में काफी रोष है, वहीं आज गर्भवती हथिनी की हत्या के मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है।
वन मंत्री राजू ने कहा कि हत्या में कई लोग शामिल थे और सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। अभी एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है, यह एक निंदनीय अपराध है, पुलिस और वन विभाग इसकी जांच कर रही है।
बता दें कि, केरल के मल्लपुरम जिले के एक गांव में गर्भवती हथिनी पहुंच गई, हथिनी को खाने में पटाखा दे दिया गया। बारूद की जलन मिटाने के लिए हथिनी वेलियार नदी में गई, तीन दिन तक पानी में मुंह डाले खड़ी रही, लेकिन अंत में अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के साथ हथिनी ने जल समाधि ले ली।
हथिनी की मौत पर पूरा देश शोक में डूबा है। जानवरों के लिए काम करने वाली बीजेपी सांसद मेनका गांधी ने पूछा कि प्राइवेट हाथों में हाथियां होते क्यों हैं, यह एक शर्मनाक हत्या है, एक मूक हथिनी की मौत का सभी न्याय चाह रहे हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, पालतू हाथी अब देश में कुल 507 रह गए हैं, जिनमें 410 नर और 97 मादा हैं, साल 2017 में 17 हाथियों की मौत हुई, जबकि साल 2018 में 34 और साल 2019 में 14 हाथियों की मौत हुई थी।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले में शुक्रवार को दुर्घटना का एक बड़ा मामला सामने आया। दुर्घटना में 9 लोगों की मौत की ख़बर है। जानकारी के मुताबिक़, सभी एक ही परिवार के लोग थे, जिनमें तीन महिलाएँ, एक बच्चा और एक किशोरी भी थी।
हरियाणा से बिहार जा रहे इस परिवार की दुर्घटना उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ। घटना लखनऊ-प्रयागराज मार्ग पर प्रतापगढ़ जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के वाजिदपुर स्थित पराग नगर में हुई है। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे ट्रक और स्कॉर्पियो की टक्कर हुई है। मौक़े पर पहुँचकर पुलिस ने जाँच कार्य शुरू कर दिया है।
हादसे में एक व्यक्ति गम्भीर रूप से घायल है, जिसे लखनऊ रेफ़र किया गया है और ड्राइवर फ़रार है। स्थानीय लोगों के मुताबिक़, “यह हादसा इतना भयावह था कि शव निकालने में भी परेशानी हो रही थी। शव निकालने के किए प्रशासन को गैस कटर की मदद लेनी पड़ी, तब जाकर लाशों को निकाला जा सका।
दिल्ली हिंसा मामले की आरोपी सफूरा जर्गर की जमानत याचिका एक बार फ़िर खारिज़ कर दी गई।
इसी साल फरवरी माह में उत्तर पूर्वी दिल्ली में की गई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने 10 अप्रैल को सफूरा को गिरफ्तार कर लिया था। जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी की सदस्य सफूरा को गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। आरोपी सफूरा फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।
गुरुवार को जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए एडिशनल सेशन जज धर्मेन्द्र राणा ने कहा कि जांच के दौरान एक बड़ी साजिश सामने आई थी। यदि किसी एक साजिशकर्ता के खिलाफ बयान या कोई कृत्य और साजिश का सबूत है तो वह सब पर लागू होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि मामले के अन्य साजिशकर्ता के कृत्य और भड़काऊ भाषण इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत आरोपी पर भी लागू होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बात का सबूत भी है कि हिंसा के दौरान चक्का जाम करने की एक साजिश तो की गई थी।
जामिया में एमफिल की छात्रा सफूरा जर्गर प्रेगनेंट हैं। कोर्ट ने आरोपी सफूरा के स्वास्थ्य को देखते हुए तिहाड़ जेल के अधीक्षक को पर्याप्त चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की बात कही।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई बार ऐसे अवसर आए हैं, जब साहित्य और सिनेमा के लिए ऐसे सम्मेलन स्थल बने या बनाए गए, जिनमें इतना शक्तिशाली अन्योन्याश्रय संबंध दिखा कि दोनों क्षेत्रों की कृतियां संवर्धन के साथ एक दूसरे को स्थापित करने में सफल रहीं। कुछ अवसर ऐसे भी आऐ, जब साहित्यकार संतुष्ट नहीं रहा, अपनी कृतियों के फ़िल्मी रूपांतरण को लेकर। देव आनंद की “गाईड”, एक शानदार फ़िल्म थी, लेकिन आर०के० नारायण संतुष्ट नहीं थे इससे।
1970 के दशक में, हिन्दी साहित्य में, नई कहानियों का दौर अपने पूर्ण गति को प्राप्त कर चुका था और हिन्दी सिनेमा के दर्शक भी मसालेदार फ़िल्मों से अलग मध्यम सिनेमा (मिडिल सिनेमा) पसंद करने लगे थे। ये एक बहुत आदर्श स्थिति थी और इसकी वजह से मन्नू भंडारी जैसी साहित्यकार और बासु चटर्जी जैसे फ़िल्मकार का संयोजन संभव हो पाया। 1974 में मन्नू भंडारी की कहानी, “यही सच है” पर आधारित फ़िल्म, “रजनीगंधा” नाम की फ़िल्म बनी और इसे खूब सराहना मिली।
मन्नू भंडारी
मन्नू भंडारी की कहानी, “यही सच है”, में एक महिला के उलझन को दिखाया गया है। इस फ़िल्म में दीपा (विद्या सिन्हा) का प्रेम संबंध, संजय (अमोल पालेकर) के साथ होता है और दोनों ने शादी करने का निर्णय कर लिया होता है, लेकिन एक नौकरी के इंटरव्यू के सिलसिले में दीपा (विद्या सिन्हा) को मुंबई जाना पड़ता है, जहाँ उसकी मुलाक़ात, पुराने प्रेमी नवीन (दिनेश ठाकुर) से होती है। दीपा ये पाती है कि पुराने संबंध ख़त्म होने के बाद भी नवीन के पास उसके लिए बहुत समय है और वह उसका बहुत ध्यान रखता है। संजय (अमोल पालेकर) ऐसा व्यक्ति नहीं होता है, वो प्रेम तो करता है, लेकिन उसे महसूस कराने के लिए कोई अलग प्रयास कभी नहीं करता। दीपा का मन बदलता है और वो अब नवीन से शादी करने की सोचने लगती है, लेकिन दिल्ली वापस आते ही जब संजय उससे मिल कर बताता है कि उसकी तरक्क़ी हो गई है, दीपा पुरानी बातें भूल कर, संजय के साथ ही रहने का निश्चय कर लेती है। इसे पूरे प्रकरण की प्रस्तुति में, रजनीगंधा के फूल, कभी नए तो कभी पुराने संबंधों का द्योतक बने रहते हैं।\
बासु चटर्जी (PC-The Indian Express)
ये प्रस्तुति, प्रख्यात नाटककार, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ की “कैंडिडा” से काफ़ी मिलती है, जहाँ कैंडिडा, पति मॉरेल और प्रेमी मार्चबैंक्स के बीच, पति को चुनती है जबकि रूमानियत में मार्चबैंक्स, उसके पति की तुलना में बहुत बेहतर होता है। इसकी व्याख्या में शॉ ने, “लाईफ़ फ़ोर्स थ्योरी” दी और बताया कि जहाँ, सामाजिक, आर्थिक और भौतिक सुरक्षा का आश्वासन होता है, संबंध और प्रेम वहीं टिकते हैं। हालांकि ये अंतिम सत्य नहीं है, लेकिन अधिकतर यही मनोवैज्ञानिक दशा होती है, वास्तविक जीवन में।
फ़िल्म में ‘विद्या सिन्हा’ और ‘अमोल पालेकर’
फ़िल्म के निर्देशक, बासु चटर्जी थे और इसका निर्माण, सुरेश जिन्दाल और कमल सहगल ने किया था। फ़िल्म में संगीत सलिल चौधरी का था और सारे गीत, योगेश ने लिखे थे। सिनेमैटोग्राफ़ी, के० के० महाजन के ज़िम्मे थी और संपादन का काम जी० जी० मायेकर ने किया था।
“ये विद्या सिन्हा की पहली फ़िल्म थी और अमोल पालेकर की भी पहली हिन्दी फ़िल्म थी। फ़िल्म को रिलीज़ करने में काफ़ी परेशानियां आईं, लेकिन ये फ़िल्म “स्लीपर हिट ” निकली। “स्लीपर हिट “, ऐसी फ़िल्मों को कहते हैं, जिनकी शुरूआत छोटी होती है, लेकिन वे आगे जाकर खूब सफ़ल होती हैं और यादगार बन जाती हैं।”
इस फ़िल्म को कई पुरस्कार मिले,जिनमें फ़िल्मफ़ेयर 1975 भी शामिल है। इसके एक गीत, “कई बार यूं ही देखा है”, के लिए मुकेश को सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
मानव जीवन के शाश्वत मानसिक दोलन का, जिसमें सुरक्षा और और रोमांच के बिंदुओं के बीच मस्तिष्क झूलता रहता है और वर्तमान एवं भविष्य के बीच घर्षण होता रहता है, इस फ़िल्म में अविस्मरणीय चित्रण किया गया है।
(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)
कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन हुआ है, और इसी दौरान हुई एक शादी का वीडियो TikTok पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस विडियो में लड़कीवालों ने दूल्हे का स्वागत मास्क पहनाकर किया।
टिकटॉक में इस वीडियो को बहुत पसंद किया जा रहा है। भारत में लॉकडाउन का अगला चरण 30 जून तक चलने वाला है, सरकार ने इसे लॉकडाउन के बजाय अनलॉक 1 कहा है। ऐसे में जिन लोगों की शादी रुकी थी, वो अब अनलॉक में कर रहे हैं और कम मेहमानों के साथ शादियां हो रही हैं, इस टिकटॉक वीडियो में दूल्हा बारातियों के साथ दुल्हन के घर पहुंचता है, लड़की वालों ने बारातियों को सैनेटाइज किया और फिर दूल्हे को नया मास्क पहनाया, वहीं बारातियों को भी मास्क पहनाया, लोगों को ये वीडियो खूब पसंद आ रहा है।
इस वीडियो के अब तक 2.5 मिलियन व्यूज हो चुके हैं, साथ ही 1 लाख से ज्यादा लाइक्स और 100 से ज्यादा कमेंट्स आ चुके हैं, बता दें, अनलॉक 1 में विवाह जैसे कार्यक्रमों में भी मेहमानों की संख्या 50 से अधिक होने की इजाजत नहीं दी गयी है।
देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक के सबसे ज्यादा नए 9,304 मामले सामने आए हैं, जबकि 260 लागों की मौत हो गयी है, अब तक भारत में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 2,16,919 हो गयी है।