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सरकार बुनकरों की स्थिती को लेकर गम्भीर है – स्मृति ईरानी

NEW DELHI, INDIA - SEPTEMBER 5: Smriti Irani, Minister of Human Resource Development during the National Teacher Awards distribution ceremony 2014 at Vigyan Bhawan on September 5, 2015 in New Delhi, India. Instituted in 1958, the National Award to Teachers are given away by the President of India on 5th September (Teacher's Day) every year to give public recognition to meritorious teachers working in primary, middle and secondary schools. Altogether there are 374 awards out of which 20 awards are reserved for Sanskrit, Persian and Arabic teachers. Each State/Union Territory/Organization has an earmarked quota based on the number of teachers. (Photo by Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images)

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

स्मृति ईरानी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए गए सुधारों का असर कपड़ा उद्योग के लिए सबसे अच्छा रहा। वस्तु एवं सेवाकर के लागू होने तथा उद्योग द्वारा इस कर प्रणाली का स्वागत किए जाने से इस उद्योग में निवेशकों का उत्साह बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि कपडा उद्योग को तकनीकी स्तर पर सहयोग मिल रहा है। कपडा मंत्री स्मृति ईरानी ने कल लोकसभा में कहा कि सरकार बुनकरों की स्थिति के बारे में गम्भीर है। इसके अलावा बुनकर सब्सिडी की कीमत के धागे के लिये सरकार द्वारा शुरु किये गये मोबाईल एप पर ऑर्डर दे सकते है।

एस पी एम गौडा के सवाल का जवाब देते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र ने जीएसटी का स्वागत किया है, उन्होंने कहा है कि इस सरकार में कपड़ा उद्योग के क्षेत्र में सबसे अधिक एफडीआई आई है। स्मृति ने कहा कि सरकार ने कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 6000 करोड़ रूपये की राशि दी है।

केंद्रीय मंत्री ने हैंडलूम और पावरलूम उद्योग को पेश आ रही समस्याओं के विषय में पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि सरकार ने इस ओर बहुत से कार्य किये हैं। उन्होंने कहा कि 2009-10 में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार बुनकरों के महज एक प्रतिशत बच्चे ही उच्च शिक्षा हासिल करते हैं। सरकार ने बुनकरों के बच्चों को उच्च शिक्षा में मदद देने की पहल की है, उन्हें पर्याप्त रूप से वित्तीय सहायता दी जा रही है।

एनआईए करेगा लव ज़िहाद की जांच

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उपजे केरल के कथित लव जिहाद के मामले की सुनवाई करते हुए पूरे मामले की जांच एनआईए को करने को कहा है। कोर्ट ने जांच एजेंसी से यह भी जांच करने के लिए कहा है कि उक्त मामला राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने संबंधी किसी साजिश से तो नहीं जुड़ा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस चंद्र्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है।

अदालत ने केरल पुलिस को आदेश देते हुए कहा है कि वे केस से जुड़ी तमाम फाइलें और जानकारियां एनआईए को सौंपें और उनका जांच में सहयोग करें ताकि एनआईए तटस्थ एवं सटीक जांच रिपोर्ट पेश करे। इससे पूर्व इस मामले में अनियमितता बरतने के चलते केरल पुलिस को केरल हाईकोर्ट से लताड़ लग चुकी है।

कोर्ट ने शफीन जहान की याचिका पर यह फैसला सुनाया। इससे पूर्व शफीन ने अखिला अशोकन नाम की युवती से निकाह किया है जिस पर आपत्ति जताते हुए लड़की के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि उनकी बेटी लव जिहाद का शिकार बनी है, उसका धर्मांतरण करना और तीन बार नाम बदलना इस बात की पुष्टि करता है। अखिला के पिता ने यह भी कहा है कि शफीन आईएसआईएस से जुड़ा है और वो अखिला को भी उसके लिए काम करने के लिए प्रताड़ित कर रहा है।

अदालत ने शादी को रद्द कर दिया है। इधर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच एनआईए को सौंपने पर शफीन के वकील ने कहा कि केरल पुलिस हाईकोर्ट के सुपरविज़न में काम कर रही है। जिस पर कोर्ट ने उन्हें यह कहकर लताड़ लगाई की वे मामले को बाहर क्यों नहीं आने देना चाहते हैं। हमने एनआईए से इस केस में हमारा सहयोग करने को कहा है हम जानना चाहते हैं कि यह मामला सिर्फ केरल का है या मामला कुछ और है।

अदालत ने यह भी कहा कि वे इस मामले में अपनी आंखें नहीं मूंद सकते हालांकि वे लव जिहाद के ट्रेंड से प्रभावित नहीं हैं।
याची ने मामले से “लव जिहाद” शब्द हटाने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।

आरटीआई: ताजमहल या तेज महालय

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

बी के अयंगर नाम के व्यक्ति ने एक आरटीआई में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से यह पूछा है कि आगरा में स्थित ऐतिहासिक स्मारक मकबरा है अथवा शिवमंदिर। इस प्रश्न पर अमल करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग ने केंद्र सरकार से स्पष्ट करने के लिए कहा है कि वे इस मुद्दे पर उपजे विवाद को खत्म करने के लिए यह बताएं कि सफेद संगमरमर से बना यह ऐतिहासिक मकबरा ताजमहल है या तेजोमहल।

यह सवाल फ़िलहाल संस्कृति मंत्रालय के अधीन है। दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल पर सूचना आयुक्त ने एएसआई से आरटीआई आवेदक को स्पष्ट करने के लिए कहा है कि क्या संरक्षित स्थल की खुदाई की गयी है, यदि की गयी है तो बताया जाए कि वहां क्या मिला है। खुदाई से जुड़े मामलों में फैसला सम्बंधित अथोरिटी को लेना होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुप्त कमरों या खुदाई वाले स्थानों को खोलने का निर्देश देना आयोग के अधीन नहीं आता।

इतिहासकार पी एन ओक ने अपनी किताब ताजमहलः द ट्रु स्टोरी में लिखा है कि ताजमहल शहजहां द्धारा बनाया मकबरा नहीं बल्कि राजपूत शाशक द्धारा बनाया गया शिव मंदिर है, जिसे उसने मुगल बादशाह शाहजहां को भेंट किया था और मुगल बादशाह ने उसे स्वीकार कर लिया था। ओक की किताब में किए गए इस दावे के बाद उक्त संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक के ताजमहल या तेजोमहल होने पर संशय बना हुआ है।

हालांकि संरक्षित इमारत को शाहजहां का बनाया हुआ ताजमहल माना जाता है, जिसे उन्होंने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था।

इंदौर में कन्हैया पर बरसे पत्थर

​आनंद रूप द्विवेदी | Navpravah.com

पूर्व जेएनयू छात्र व यूनियन अध्यक्ष आज जब गाड़ी से इंदौर के BRTS कॉरिडोर में एक सभा को सम्बोधित करके निकले, तभी उनपर कुछ अज्ञात लोगों ने पथराव किया। पुलिस के अनुसार कन्हैया को सुरक्षित उस परिस्थिति से बाहर निकाल लिया गया है। केवल गाड़ी के शीशों को छति पहुंची है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कन्हैया आज इंदौर के आनंद माथुर ऑडिटोरियम में एक सभा को सम्बोधित करने पहुंचे थे, जहां उन्हें भारी विरोध प्रदर्शन का सामना भी करना पड़ा। भारत स्वाभिमान मंच नामक एक स्थानीय संगठन के द्वारा कन्हैया का विरोध किया गया।

संगठन द्वारा कन्हैया को काले झण्डे दिखाए गए तथा उन्हें बोलने से रोकने का प्रयास भी किया गया। पुलिस बल द्वारा रोके जाने के बावजूद संगठन के लोगों ने पुलिस से बहस जारी रखी। उनका कहना था कि, “देश को तोड़ने की बात कहने वालों को सभा का सम्बोधन नहीं करने दिया जाएगा।” साथ ही कन्हैया व आयोजकों के मुह में कालिख पोतने का प्रयास भी किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने लाठी डंडों से कार पार्किंग में खड़े वाहनों में तोड़ फोड़ भी की, जिसे पुलिस ने मामूली बल प्रयोग से नियंत्रण में किया।

मायावती ने मोदी की नीति पर लगाया भेदभाव का आरोप

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने आज एक बयान मे कहा कि भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के साम, दाम, दंड, भेद आदि अनेकों हथकंडों के अलावा उनकी असंवैधानिक एवं अलोकतान्त्रिक नीति तथा व्यवहार के कारण आज देश में हर तरफ भय, आतंक, हिंसा, बेचैनी और अफरातफरी जैसा माहौल है।
उन्होंने कहा कि सर्वसमाज में खासकर ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों, युवाओं, बुद्धजीवी एवं व्यापारी वर्ग के साथ-साथ दलितों, पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति हर प्रकार की सरकारी उपेक्षा, भेदभाव और नाइन्साफी को आज पूरा देश महसूस कर रहा है।
इसके तहत देश में कल्याणकारी कानून एवं मानवतावादी संविधान को एक प्रकार से असफल करने की साज़िश की जा रही है। इन वर्गों के प्रति भाजपा सरकार का रवैया लगातार निरंकुश व दमनकारी होता जा रहा है जिससे पूरा देश चिन्तित है।
मायावती ने कहा कि बसपा एक राजनीतिक पार्टी होने के साथ ही जन-आंदोलन भी है, यह बाबा साहेब डॉ. भीम राव अम्बेडकर की विचारधारा पर बनी देश की एकमात्र सशक्त राजनैतिक पार्टी है।
उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि बसपा ने बाबा साहेब और कांशी राम की इच्छानुरूप एक न बिकने वाले शक्तिशाली समाज का गठन किया है। यही कारण है बसपा ने उत्तर प्रदेश में चार बार शासन संभाला और ‘‘अपना उद्धार स्वयं करने’’ के बाबा साहेब की विचारधारा पर चलते हुए उसे हकीकत बनाने का प्रयास किया।
मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता में आने के बाद संसद के प्रति भी जवाबदेह होना पसंद नहीं कर रही है, आरएसएस के ‘गुप्त एजेंडा’ और जन-विरोधी नीतियों तथा कार्यों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वह सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर रहे हैं।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भाजपा की सरकार द्वारा शहरों, स्टेशनों, सड़कों आदि का नाम बदला जाना भी उसकी इसी संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व फासीवादी सोच का परिणाम है, भाजपा सरकार को नाम बदलने की गलत परम्परा से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमेशा की तरह वास्तविकता यही है कि भाजपा और आरएसएस के संकीर्ण जातिवादी एवं साम्प्रदायिक जहर को केवल बसपा की अम्बेडकरवादी विचारधारा व जनसंघर्ष ही काट सकती है, बसपा इसके लिए कृतसंकल्प होकर काम कर रही है।

दर्द और दहशत की दास्तान थी चम्बल की बैंडिट क्वीन

अनुज हनुमत | Navpravah.com
बुन्देलखण्ड में जन्मी एक ऐसी स्त्री की कहानी जिसने मात्र 10 वर्ष की छोटी सी आयु से ही समाज का वो भयावह और दुर्दांत चेहरा देखा जिसकी हम आज कल्पना भी नही कर सकते हैं । 18 वर्ष जी आयु में उसी लड़की के साथ दर्जनो लोगो ने कई दिनों तक लगातार बलात्कार किया । इस घटना का परिणाम यह हुआ की इस लड़की ने भी प्रतिशोध की आग में हथियार उठा लिये और निकल पड़ी चम्बल के बीहड़ में । जी हां हम बात कर रहे हैं दस्यु सुंदरी फूलनदेवी की जिसकी मौत को आज 16 साल बीत चुके हैं लेकिन सबसे खास बात यह है कि डकैत से सांसद बनी फूलन देवी के किस्से आज भी चंबल के बीहड़ों में सुने और सुनाए जाते हैं।
फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के जालौन जिले के एक छोटे से गांव गोरहा का पूरवा में हुआ था ।
एक मासूम लड़की के दस्यु सुंदरी बनने तक की इस कहानी के कई पहलू हैं। कोई फूलन के प्रति सहानुभूति रखता है तो कहीं उसे खूंखार डकैत माना गया। फूलनदेवी की  25 जुलाई 2001 को उनके ही घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय के अखबारों और पत्रकारों की मानें तो हालात ने ही फूलन देवी को इतना कठोर बना दिया कि जब उन्होंने बहमई में एक लाइन में खड़ा करके 22 ठाकुरों की हत्या की तो उन्हें ज़रा भी मलाल नहीं हुआ । इसके बाद तो मानो फूलनदेवी पूरे विश्व की नजर में आ गईं ।
80 के दशक के शुरुआत में चंबल के बीहड़ों में वो सबसे ख़तरनाक डाकू मानी जाती थीं । उनके जीवन पर कई फ़िल्में भी बनीं लेकिन शेखर कपूर द्वारा बनाई गई फिल्म ने लोगो को सबसे ज्यादा प्रभावित किया । सरकार ने उस समय दस्यु फूलन देवी को पकड़ने के खातिर पूरा जोर लगा दिया था लेकिन उसे ये दस्यु सुंदरी कभी हाथ नही नही लगी लेकिन फिर खुद ही  फूलन देवी ने कुछ शर्तों के साथ सरकार के सामने सरेंडर कर दिया ।
उसने सरकार से अपनी शर्तें मनवाई, जिनमें पहली शर्त उसे या उसके सभी साथियों को मृत्युदंड नहीं देने की थी। फूलन की अगली शर्त ये थी कि उसके गैंग के सभी लोगों को 8 साल से अधिक की सजा न दी जाए। इन शर्तों को सरकार ने मान लिया था और फिर मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने फूलन देवी ने एक समारोह में हथियार डाले। आपको बता दें कि उस समय दस्यु फूलन देवी की एक झलक पाने के लिए हज़ारों लोगों की भीड़ जमा थी । आज कोई फूलन देवी को रॉबिनहुड की तो कोई बैंडिट क्वीन की संज्ञा देता है ।

मुंबई के शिक्षकों की सैलरी यूनियन बैंक से मिलेगी

इंद्रकुमार विश्वकर्मा | Navpravah.com
मुंबई बैंक का पुरज़ोर विरोध करनेवाले शिक्षकों की सैलरी यूनियन बैंक से क्यों नहीं दे रहे हैं? ऐसे प्रश्न करते हुए मुंबई हाइकोर्ट ने महाराष्ट्र शासन को आड़े हाथों लिया। जिला बैंकों की डूबती स्थिति में मुंबई में ही जिला बैंक से सैलरी देने की महाराष्ट्र शासन द्वारा सख्ती क्यों की जा रही है? ऐसा प्रश्न भी मुंबई हाइकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से किया।
शिक्षक भारती के अध्यक्ष अशोक बेलसरे, सुभाष मोरे और जालिन्दर सरोदे द्वारा की गई याचिका (2039/2017) पर न्यायमूर्ति अनूप मेहता व न्यायमूर्ति भारती डांगरे की खंडपीठ के समक्ष कल सुनवाई हुई। इस संदर्भ में शासन को शुक्रवार तक वस्तुस्थिति की सही जानकारी देने का आदेश हाइकोर्ट ने दिया है।
सिनिअर काैसिंल अॅड. राजीव पाटील, अॅड. सचिन पुंडे व अॅड. मिलिंद सावंत ने युनियन बैंक के 20 हजार शिक्षकों को सैलरी न दिए जाने की बात कोर्ट के सामने रखी व मुंबई बैंक में खाता खोलने के लिए की जानेवाली सख्ती से भी अवगत कराया। सरकारी वकील व मुंबई बैंक के वकीलों ने सरकार के निर्णय का समर्थन किया. त्योहार का समय होते हुए भी शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारियों को सैलरी न दिए जाने की बात पर न्यायाधीश ने कड़ी नाराजगी जाहिर की।
शिक्षक भारती के वकील ने न्यायालय के समक्ष शिक्षकों का पक्ष रखते हुए कहा कि मुंबई बैंक ने दबाव डालकर कई शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों के खाते खोले हैं। बिना केवायसी व शिक्षकों की अनुमति के बगैर खोले गए ऐसे खाते इनवैलिड हैं। इस बात पर न्यायाधीश ने शासन व मुंबई बैंक को फटकारते हुए कहा कि ऐसे इनवैलिड खातों पर बैंक द्वारा सैलरी किस प्रकार प्रदान की गई! शिक्षक भारती ने इस संबंध में पहले ही आरबीआई से शिकायत की है।
कल दिनभर के कामकाज के समाप्त होते-होते शिक्षक भारती के ही केस पर सुनवाई हो पाई। लगभग 1 घंटे दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने जुलाई की सैलरी जिन शिक्षकों को नहीं मिली है, उनकी सैलरी यूनियन बैंक से ही किये जाने का शासन को निर्देश दिया।
इस संदर्भ में एक और शिक्षक संघटना द्वारा मुंबई बैंक के विरोध में की गई याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।

महिलाओं को अक्षम कहने पर सुंदर पिचाई ने दिखाया बाहर का रास्ता

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com
अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनी और दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन मानी जाने वाली कंपनी गूगल ने अपने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर जेम्स डेमोरे को नौकरी से इसलिए निकाल दिया क्योंकि उसने कंपनी के अंदर चल रहे जेंडर स्टीरियोटाइप ( लिंग संबंधी रूढ़िवादिता ) को एक इंटरनल मेमो के जरिये उजागर किया है। जो कंपनी के कर्मचारियों के बीच काफी वायरल हो रहा है।
मेमो की हेडिंग गूगल आईडियोलॉजिकल इको चैंबर है। जिसमें लिखा है कि पुरूषों और महिलाओं में जैविक कारणों से क्षमताएं अलग होती हैं जिस कारण हम गूगल में महिलाओं को तकनीक और नेतृत्व के शीर्ष पदों पर प्रतिनिधित्व करते नहीं देखते,  उनके साथ भेदभाव किया जाता है। करीब 10 पन्नों के मैमो में गूगल पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े कई आरोप लगाए गए हैं।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा है कि कंपनी के खिलाफ लिखना कंपनी के कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ है और जेंडर स्टीरियोटाइप के बारे में लिख कर उन्होंने नियम तोड़े हैं इसलिए उन्हें कंपनी से निकाला गया है।
वहीं अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट इस बात की जांच पड़ताल में जुटा है कि क्या गूगल महिलाओं को पुरुषों से कम वेतन देती है फिलहाल कंपनी ने इस तरह के आरोप को नकारा है और कहा है कि वे समान काम के लिए महिलाओं को पुरुषों के समान वेतन देते हैं।
वहीं गूगल में 60 मौजूदा एवं पूर्व महिला कर्मचारी वेतन, में असमानता को लेकर कंपनी पर मुकदमा करने की तैयारी में हैं।

योगी सरकार पुलिस का कर रही नाजायज़ इस्तेमाल -अखिलेश

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर उत्तर प्रदेश पुलिस के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा के लोग पुलिस की मदद से सपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रहे हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर पुलिस के माध्यम से अवैध वसूली का भी आरोप लगाया। हाल में विधानसभा में संदिग्ध पाउडर मिलने के बारे में अखिलेश ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायकों को विधानभवन में आने से रोकने के लिए उस पाउडर को खतरनाक विस्फोटक ‘पीईटीएन’ बता दिया गया, जबकि वह केवल फर्नीचर की पॉलिश चमकाने में इस्तेमाल होने वाला पाउडर था।

अखिलेश ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के अनेक नेता सपा पर प्रदेश के थाने चलाने का आरोप लगाते थे लेकिन प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार खुद पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। अखिलेश ने कहा, “हम जानना चाहते हैं कि अब थाने कौन चला रहा है। पुलिस के माध्यम से इतनी अवैध वसूली पहले कभी नहीं हुई।”

उन्होंने औरैया जिले का एक मामला उठाते हुए कहा कि भाजपा वहां अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने के लिए सपा के जिला पंचायत सदस्य कल्लू यादव और उसके परिवार का उत्पीड़न कर रही है। यादव को हत्या और बलात्कार के मुकदमे में फंसा दिया गया है। वह इसकी शिकायत राज्यपाल और चुनाव आयोग से करेंगे। अखिलेश ने हाल के दिनों में सपा के चार विधान परिषद सदस्यों के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि इससे एक बात साफ हो गयी है कि भाजपा के लोग उपचुनाव का सामना करने से डर रहे हैं, इसलिए उन्होंने सपा के विधान परिषद सदस्यों को तोड़ लिया।

सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विधान परिषद सदस्यों बुक्कल नवाब और यशवंत सिंह की तरफ इशारा करते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि ये दोनों जब तक सपा में थे तब तक भाजपा की नज़र में गुंडे थे, भाजपा में जाकर वे दोनों पाक साफ हो गये हैं। नवाब को आवास विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया जा रहा है, जबकि दूसरे को राजस्व एवं परिवहन मंत्री बनाने की तैयारी है। समाजवादी लोहिया ट्रस्ट से अपने चार करीबी सदस्यों को हटाये जाने के सवाल पर अखिलेश ने कहा, “इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हम पर औरंगजेब होने का आरोप भी लगता रहा है। सावधान रहें मुझसे।”

22 गुना बढ़ाया जाएगा देश का डिफेंस बजट

defence budget of india will increase by 22 times

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com

भारत को रक्षा के क्षेत्र में अत्यधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। संसद में पेश किए गए मिड ईयर रिव्‍यु में जानकारी दी गई है कि सरकार का ‘डिफेंस बजट’ वर्ष 2019-20 तक 22 फीसदी बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपए के पार कर दिया जाएगा। यही नहीं वर्ष 2019-20 तक कैपिटल एक्‍सपेंडिचर 25 फीसदी बढ़कर 3.9 लाख करोड़ रुपए हो जाने का भी अनुमान है।

संसद में पेश मिड ईयर रिव्‍यु के अनुसार चालू वित्‍तीय वर्ष में कैपिटल एक्‍सपेंडिचर 3,09,801 करोड़ रुपए का प्रस्‍तावित है, जबकि यह 2018-19 में बढ़कर 3,41,000 करोड़ रुपए और 2019-20 में बढ़कर 3,90,000 करोड़ रुपए हो जाएगा।

रिव्‍यु के अनुसार कैपिटल एक्‍सपेंडिचर का लगभग 30 फीसदी डिफेंस पर खर्च होता है। यह खर्च चालू वित्‍तीय वर्ष में 91,580 करोड़ रुपए प्रस्‍तावित है, जबकि वर्ष अगले वित्‍तीय वर्ष में यह बढ़कर 1,01,137 करोड़ रुपए और वर्ष 2019-20 में यह खर्च बढ़कर 1,11,706 करोड़ रुपए हो जाएगा। सरकार का इस वक्‍त परियोजनाओं पर कुल रेवेन्‍यु एक्‍सपेंडिचर 21.46 लाख करोड़ रुपए का है। यह अगले वर्ष बढ़कर 23.4 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। वर्ष 2019-20 में बढ़कर 25.95 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा।

रिव्‍यु में पेट्रोलियम सब्सिडी घटने का अनुमान जताया गया है। चालू वित्‍तीय वर्ष में यह सब्सिडी करीब 25 हजार करोड़ रुपए है जो अगले साल घट कर 18 हजार करोड़ रुपए हो जाने का अनुमान है। इसके अगले साल में यह सब्सिडी 10 हजार करोड़ रुपए रह जाने का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल को डिकंट्रोल कर दिया है, जिस कारण इस पर सब्सिडी का बोझ कम हुआ है।

रिव्‍यु में खाद सब्सिडी वर्ष 2019-20 तक 70 हजार करोड़ रुपए पर ही बनी रहने का अनुमान है। वहीं फूड सब्सिडी बढ़ने का अनुमान है। रिव्‍यु के अनुसार वर्ष 2018-19 में यह सब्सिडी बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपए और वर्ष 2019-20 तक 2 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान जताया गया है। चालू वित्‍तीय वर्ष में फूड सब्सिडी पर 1.45 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान है।