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Friday, August 14, 2026
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लखनऊ मेट्रो को आज मिल सकता है ‘ग्रीन सिग्नल’!

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को बहुत जल्द मेट्रो की सुविधा मिल सकती है। सूत्रों की मानें तो सोमवार 14 अगस्त को लखनऊ मेट्रो के लिए ‘जजमेंट डे’ साबित हो सकता है। इसी क्रम में शनिवार को LMRC के MD ने चारबाग से हजरतगंज तक के निर्माण का जायजा लिया था।

ट्रायल के दौरान मेट्रो को तकरीबन 80 किमी/घंटे की रफ़्तार से दौड़ाया जायेगा।  यह ट्रायल ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच किया जायेगा। आखिरी ट्रायल के बाद लखनऊ मेट्रो को हरी झंडी दिखाई जा सकती है।

MD ने बताया कि, जल्द ही गोमती पर स्पेशल स्पैन का काम शुरू किया जायेगा, चारबाग रैंप सेक्शन में 60 डायाफ्राम वाल, हुसैनगंज मेट्रो स्टेशन में 30 डायाफ्राम वाल, सचिवालय में 120, हजरतगंज में 125, रैंप सेक्शन हजरतगंज पर 143 डायाफ्राम वाल होंगी।

गौरतलब है कि, हजरतगंज मेट्रो स्टेशन भूमिगत बनाया जायेगा, इसके साथ ही स्टेशन में 2 कमर्शियल एरिया भी बनाये जायेंगे, पहले एरिया एंट्री लेवल पर और दूसरा कॉनकोर्स लेवल पर होगा, वहीँ गोमती मशीन को सचिवालय तक लाने में करीब 20 दिन का समय लगेगा।

लखनऊ मेट्रो का शुक्रवार को ट्रायल रन किया गया था, यह ट्रायल रन सरोजनी नगर से चारबाग टर्मिनल तक किया गया था। लोगों ने जब सरोजनीनगर मेट्रो टर्मिनल से लेकर चारबाग के बीच मेट्रो को दौड़ता देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

ट्रायल रन के दौरान लखनऊ मेट्रो के जनरल मैनेजर सुशील कुमार समेत मेट्रो के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद थे, लखनऊ मेट्रो के जनरल मैनेजर सुशील कुमार ने बताया, यहां पर आज पटरियों के उपर लोड डिफ्लेक्शन टेस्ट भी कराया गया। इसके लिए कुल आठ कोच लाये गये थे, जिनका वजन 64 क्विंटल था। इस तरह 512 क्विंटल का वेट पटरियों पर रखकर टेस्ट किया गया।

लखनऊ मेट्रो ट्रेन में ड्राइविंग कैब बायीं तरफ है, इसमें एक इमरजेंसी डोर भी होगा। ड्राइवर सभी बोगियों के यात्रियों के अलावा डिपो, स्टेशन और कंट्रोल रूम के संपर्क में भी रहेगा। ट्रेन में ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है।
LMRC के मुताबिक, ड्राइवर से कोई गलती होने पर ट्रेन ऑटोमेटिक मोड पर चली जाएगी,.साथ ही ड्राइवर को यह भी पता चल जाएगा कि क्या गलती हुई।

पहले और चौथे कोच में 43 यात्रियों के बैठने और 220 यात्रियों के खड़े होने भर की जगह है।
बीच के दो डिब्बों में 50 यात्री बैठ सकेंगे जबकि 220 यात्रियों के खड़े होने भर की जगह है। इस लिहाज से मेट्रो रेल में एक बार में 1066 यात्री सफर कर सकेंगे।

“मदरसे में राष्ट्रगान का फैसला आधा-अधूरा” -साक्षी महाराज

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से सांसद और भारतीय जनता पार्टी के सबसे विवादित नेता साक्षी महाराज रविवार आज एटा जिले में पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने जम्मू-कश्मीर में चल रहे 35A पर चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

एटा पहुंचे उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने जम्मू-कश्मीर के 35A पर विवादित बयान देते हुए कहा कि, यह देश लोगों की इच्छा के अनुसार नहीं चलेगा, फतवों से नहीं चलेगा, मुल्ला मौलवी मंदिर के पुजारी के माध्यम से नहीं चलेगा, यह देश भारत के संविधान से चलेगा।

मामला चूंकि सुप्रीम कोर्ट में है और कोर्ट का जो भी निर्णय आये, वो जम्मू कश्मीर सरकार को भी मानना चाहिए, पीडीपी को भी मानना चाहिए।भारत का संविधान नकार के केवल राष्ट्रद्रोह का खिताब ले सकता है।

उन्होंने कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं पर आर्मी की कार्यवाही पर बयान देते हुए कहा कि, इतनी बड़ी समस्या जम्मू कश्मीर की आज सुलझती चली जा रही है पहले कार्यवाही नहीं होती थी. रोज आतंकवादी, पत्थरबाज, पाकिस्तानी मारे जा रहे हैं,.मुझे लगता है कि, बहुत अच्छी शुरुआत जम्मू कश्मीर में है, परिणाम इसके बहुत अच्छे आएंगे।

सुप्रीम कोर्ट यह नहीं सोचता है कि, कौन खुश होगा कौन नाराज होगा और न मोदी जी सोचते है। यूपी सरकार के मदरसों में 15 अगस्त को वंदे मातरम और राष्ट्रगान के निर्देश पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि, मदरसों के लिए सरकार ने आधा-अधूरा निर्णय लिया है ये भारत सरकार और प्रदेश सरकार को सुनश्चित करना चाहिए कि, सारे हिंदुस्तान के वित्त शिक्षण संस्थानों में,

चाहे वो यूनिवर्सिटी हो चाहे मदरसे हों और जितने ऑफिस हैं, जिनमें काम करने वाले हर व्यक्ति को राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान आना चाहिए।

गोरखपुर दुर्घटना: क्यों नहीं है सरकार जिम्मेदार?

पीयूष चिलवाल|Navpravah.com

कोयला घोटाला, टू जी घोटाला, काॅमनवेल्थ घोटाला और इस तरह के तमाम घोटालों की रोज़-रोज़ की ख़बरों से भारत की जनता त्रस्त हो चुकी थी. ऐसे में उन्हें एक विकल्प चाहिए था और विकल्प के तौर पर उभरे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। देश का विकास गुजरात की तर्ज़ पर करने की बात कही और अच्छे दिनों का ख़्वाब भारत की जनता को दिखाया गया। लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही दिनों के बाद सरकार में मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ने यह बात स्पष्ट कर दी की अच्छे दिन की बात महज़ एक जुमला थी। भारत की भोली भाली जनता को इस बात का कहां अंदाज़ा था कि ये बात जुमला होगी। उन्होंने तो इसे हक़ीक़त मानते हुए भाजपा को प्रचंड बहुमत के साथ भारत की सत्ता पर काबिज़ होने का मौका दे दिया। जनता बेचारी क्या जाने राजनीति के दाव पेंच, उन्हें तो जो कहा जाता है उसी बात पर वो विश्वास कर लेते हैं और देखिये अब भी अपने शहर में गुजरात जैसा विकास चाहती है लेकिन वो गुजरात है कहां। शायद यूपी के गोरखपुर में।

यूपी के गोरखपुर के मडिकल काॅलेज में हुई मौतों के लिए सरकार जिम्मेदार क्यूं नहीं है? अगर यह सवाल हम सत्ता पर काबिज़ योगी सरकार से पूछें या केंद्र में बैठी मोदी सरकार से, वे यही कहेंगे की बच्चों की मौत जापानी बुखार की वजह से हुई और हमें सत्ता में आए हुए वक़्त ही कितना हुआ है जो हम कुछ बदलाव ला सकें। चलिए इस बात को भी छोड़ देते हैं हम मान भी ले की इस हादसे में सरकार का दोष नहीं ये मौतें महज एक बीमारी या कुछ और कारणों से हुई हो जिनमें हम आॅक्सीजन की कमी को कहीं भी कारण नहीं मान रहे हैं। तो आप सिर्फ इतना जवाब दे दीजिए सप्लाई रोकने वाली कंपनी के ठिकानों पर क्यूं छापेमारी की जा रही है। मेडिकल काॅलेज के प्रधानाचार्य को क्यूं इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है? उन्हें क्यूं निलंबित किया गया है? शायद बीमारयां प्रिंसिपल साहब की वजह से फैली होंगी। मेडिकल काॅलेज के प्रिंसिपल पर आप यह जिम्मेदारी डालकर बच नहीं सकते हैं। सवाल यह उठता है कि फरवरी में कंपनी ने अस्पताल को पहला नोटिस भेजा और मार्च में आपकी सरकार बनी और उसके बाद कंपनी पांच महीनों तक आपके आगे हाथ फैलाते रही, क्या अस्पताल प्रशासन ने एक बार भी शासन प्रशासन में ये मामला नहीं भेजा? क्या आप चाहते थे कि प्रिंसिपल अपने घर से आॅक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का भुगतान करें? अगर हम यह स्वीकार भी कर लें की यह महल प्रिंसिपल की लापरवाही है तो क्या ऐसे में सिर्फ उन्हें निलंबित कर देना काफी होगा? खैर आप तो इस बात को स्वीकार ही नहीं कर रहे कि बच्चों की मौत आॅक्सीजन न मिल पाने के कारण हुई।

केंद्र में भी आप ही की सरकार पिछले तीन सालों से है। हर साल इंसेफिलाइटिस के मामले आते हैं और अगस्त में हर साल होने वाली मौतों की संख्या में इज़ाफा हो जाता है। तो क्या केंद्र सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए? क्या आपके संज्ञान में यह मामला तब तक नहीं था? आप तो गोरखपुर से सांसद है तो इस बात से भली भांति वाकिफ़ होंगे। क्या भारत की चिकित्सा व्यवस्था इतनी खस्ताहाल है? क्या भारत के वैज्ञानिक इतने दुर्बल हैं कि इस बीमारी का कोई तोड़ नहीं निकाल पाए? फिलहाल भारत की चिकित्सा व्यवस्था पर तो पूरी दुनिया थूथू कर रही है।

क्या केंद्र सरकार के पांच साल पूरे होने तक इसमें कोई सुधार आएगा? ये सवाल हम आपसे  ही पूछ सकते हैं पिछली सरकार से नहीं। क्यूंकि आपको तभी चुना गया था जब उनसे उम्मीदें नहीं थी और अगर आप यह कहते हैं कि ये पिछली सरकार की कमियां हैं तो स्पष्ट कीजिए तीन साल में आप इस में परिवर्तन क्यूं नहीं ला पाए।

सवालों की लिस्ट बहुत लंबी है- स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा, किसान से लेकर मेहनतकश मजदूर, बेरोजगारी महंगाई सब जस की तस है। जैसा पिछली सरकारें छोड़ के गयी थी जो जवाब उनके थे बस आपने जवाबों को बदलकर उन पर जिम्मेदारी थोप दी है। भारत की जनता यदि किसी को सर पर बैठा सकती है तो उसे किसी को जमीन पर गिराने में भी वक़्त नहीं लगता। वो नोटबंदी झेल कर भी आपको राजसिंहासन पर पहुंचा सकती है तो अपने बच्चों की मौत के बाद उस सिंहासन से गिराना भी। अभी दो साल का वक़्त और है आपकी सरकार के पास, अब यह आप पर निर्भर करता है आपको इतिहास बनना है या बनाना है।

(यह लेख, लेखक के व्यक्तिगत स्वतंत्र विचार हैं।)

त्रिपुरा: एक आतंकी गिरफ्तार, हिंसा भड़काने की थी योजना

सौम्या केसरवानी।Navpravah.com

सरकारी रेलवे पुलिस ने असम में त्रिपुरा के एक संदिग्ध आतंकवादी को गिरफ्तार किया है, जिसकी स्वतंत्रता दिवस से पूर्व हिंसा भड़काने की योजना थी।

पकडे गए त्रिपुरा के संदिग्ध आतंकवादी पास से हथियार व गोला-बारूद भी बरामद किया गया है।

त्रिपुरा के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जीआरपी कर्मियों ने नियमित जांच के दौरान नरेश चकमा नामक आतंकवादी को बदरपुर रेलवे जंक्शन से गिरफ्तार कर लिया।

आतंकवादी के पास से 600 से अधिक कारतूस बरामद किए गए हैं, पुलिस जब चकमा के सामान की तलाशी ले रही थी, तभी उसका साथी फरार होने में कामयाब रहा।

अधिकारियों ने कहा कि नरेश ने जीआरपी अधिकारियों के समक्ष स्वीकार किया है कि उसकी स्वतंत्रता दिवस से पहले हिंसा को अंजाम देने की योजना थी, दोनों गोमती जिले के नातुन बाजार गांव के रहने वाले हैं।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ये आतंकवादी प्रतिबंधित नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के सदस्य हैं, यह संगठन त्रिपुरा को देश से अलग करना चाहता है।

18 घंटे चली मुठभेड़ में हिज्बुल के 3 आतंकी ढेर, 2 जवान शहीद, 3 घायल

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

घाटी में इस वक्त लगातार सेना की ओर से आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑप्रेशन जारी है, कश्मीर में हुई 2 अलग-अलग घटनाओं में जहां 2 भारतीय जवान शहीद हो गए, वहीं हिज्बुल के 3 आतंकी ढेर हो गये हैं।

शनिवार शाम से ही शोपियां जिले में आंतकियों और सेना के बीच मुठभेड़ हो रही थी, जो अब से थोड़ी देर पहले समाप्त हुई है। पिछले 18 घंटे से चल रही इस मुठभेड़ में सेना के जवानों ने हिजबुल के 3 आतंकियों को मार गिराया है, हालांकि इस मुठभेड़ में भारत के दो जवान भी शहीद हुए हैं जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हैं।

नायब सूबेदार जगराम सिंह तोमर शहीद-

घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, ये मुठभेड़ शोपियां के अवनीरा गांव में हो रही थी। रक्षा विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास भारतीय चौकियों पर पाकिस्तानी सैनिकों के शनिवार शाम शाम पांच बजे गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें मध्यप्रदेश निवासी नायब सूबेदार जगराम सिंह तोमर गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे और जिनकी बाद में मृत्यु हो गई।

विदेशी मीडिया ने भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं को कहा जर्जर

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत की ख़बर विदेशी मीडिया में भी चर्चा का विषय बन गई है। विश्व के कई अहम मीडिया संस्थानों ने इस ख़बर को प्राथमिकता दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स से लेकर वाशिंगटन टाइम्स ने इस खबर को दर्दनाक बताया है व भारत के स्वास्थ्य पर खर्च किए गए बजट व सुविधा की निंदा की है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर हालत का ज़िक्र करते हुए लिखा है, ”इंसेफेलाइटिस हर साल भारत के लिए सामान्य सी बात हो गई है। मॉनसून के वक़्त इससे सैकड़ों जानें जाती हैं। इस बीमारी की मुख्य वजह दूषित खाना और पानी के साथ मच्छर का काटना है। इसके साथ ही यह संक्रमण की तरह फैलता है।”

न्यूयॉर्क टाइम्स ने आगे लिखा है, ”भारत लोगों की सेहत पर मुश्किल से अपनी जीडीपी का एक फ़ीसदी हिस्सा खर्च करता है। भारत स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च करने वाले देशों में शामिल है। भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की भारी कमी है।”

इस ख़बर को वॉशिंगटन पोस्ट ने भी प्रमुखता से जगह दी है। वॉशिंगटन पोस्ट ने शांति के नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी के बयान के हवाले से इसे सामूहिक हत्या करार दिया है। वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी हेडिंग में ही सामूहिक हत्या की बात लिखी है। उल्लेखनीय है कि कल कैलाश सत्यार्थी ने गोरखपुर त्रासदी पर कहा था, ”30 बच्चों की मौत ऑक्सीजन नहीं होने की वजह से हुई है। यह कोई त्रासदी नहीं बल्कि सामूहिक हत्या है। आज़ादी के 70 साल पूरे होने का मतलब हमारे बच्चों के लिए क्या है?”

पाकिस्तानी मीडिया में भी गोरखपुर में बच्चों की मौत की ख़बर को जगह मिली है। पाकिस्तान के अहम अख़बार डॉन ने कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट को भी अपनी ख़बर में शामिल किया है। राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा है कि बच्चों की मौत के लिए उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ज़िम्मेदार है।

मध्य पूर्व के अलजज़ीरा ने भी गोरखपुर में बच्चों की मौत और भारत में सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी प्रतिक्रिया को प्रकाशित किया है। अलजज़ीरा ने समाचार एजेंसी एपी को दिए एक पीड़ित के बयान को छापा है। इसमें गौतम नाम के एक पीड़ित ने कहा है, ”हम लोगों ने अपने बच्चों को देखा कि वो सांस नहीं ले पा रहे थे।  ऐसा देखते हुए भी हम कुछ कर नहीं पाए।” अलजज़ीरा ने इस मामले में पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ़ के ट्वीट को छापा है। कैफ़ ने ट्वीट कर कहा था, ”गोरखपुर में बेगुनाह बच्चों की मौत काफ़ी दुखद है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ऐसे मामलों में लापरवाही ही मुख्य वजह होती है।”

इसके साथ ही अलजज़ीरा ने हार्ड न्यूज़ के संपादक संजय कपूर के ट्वीट का भी हवाला दिया है जिसमें उन्होंने बच्चों की मौत को सामूहिक हत्या बताया है। संजय कपूर ने अलजज़ीरा से कहा, ”ऐसे वाक़ये भारत के अलग-अलग हिस्सों से अक्सर आते हैं। भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार है।”

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बच्चों की मौत पर लिखा है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण पिछले 6 दिनों में कम से कम 64 बच्चों की मौत हो चुकी है।

ज्यादा से ज्यादा लोग ले रहे हैं जियो फोन

सौम्या केसरवानी|Navpravah.com

भारतीय जियो फोन एक मोस्ट पॉपुलर मोबाइल है, ये फोन कुछ दिनों पहले ही भारत में लॉन्च हुआ था। जियो के इस फोन को लोग ज्यादा से ज्यादा खरीद रहे हैं।

कंपनी ने जियो फोन को फ्री बताया है, फोन लेने के लिए आपको सिर्फ 15,00 रुपए डिपॉजिट जमा कराने होंगे जो कि आपको 3 साल बाद आपके पैसे वापस मिल जाएंगे इसका मतलब ये फोन एकदम फ्री है।

इस फोन को लेने के बाद आपको को मात्र 153 रुपए का रिचार्ज कराना होगा जो की काफी सस्ता है, फिर आपको कॉल तथा इंटरनेट की फ्री सुविधा मिल जााएगा।

जियो फोन की डिस्प्ले काफी दमदार है, फोन में आपको किसी फीचर फोन के जैसी ही 2.4 इंच की QVGA स्क्रीन देखने को मिलेगी हालांकि ये स्क्रीन काफी शार्प और ब्राइट होगी जो यूजर्स को पसंद आएगी और फोन का बैटरी बैकअप भी धांसू है।

जियो फोन में KaiOS का ऑपरेटिंग सिस्टम दिया गया है, आपको फोन में एप्प स्टोर भी मिलेगा जहाँ से आप फेसबुक और यूट्यूब जैसे एप्प इंस्टॉल कर सकते हो म्यूजिक तथा न्यूज़ का भी आनंद ले सकते हैं।

तेजी से पॉपुलर हो रहा है Sarahah App

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

सराहा ऐप कुछ ही दिनों में वायरल हो गया है, इसे 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है, इस ऐप को सउदी अरब के एक साफ्टवेयर डेवलपर ने बनाया है।

सराहा अरबी शब्द है, जिसका मतलब ईमानदार होता है, इस ऐप में दिल खोलकर किसी के बारे मे लिखा जा सकता है। इस ऐप के माध्यम से आप अपने प्रोफाइल लिंक किसी भी व्यक्ति को मैसेज भेज सकते हैं।

वॉट्सएप और फेसबुक जैसे दिग्गज मैसेजिंग एप पहले से मौजूद हैं इसके बाद भी लोगों में यह एप तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। यह एप जून में शुरू हुआ था।

लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि मैसेज प्राप्त करने वाले व्यक्ति को यह पता नही चलेगा कि यह मैसेज किसने भेजा है, यह वेब प्लेटफॉर्म के साथ एंड्रायड और आइओएस के लिए भी उपलब्ध है।

यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं Sarahah App:

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.sarahah.android

बिहार बाढ़ को लेकर केंद्र सरकार सतर्क, गृहमंत्री राजनाथ ने भेजी पहले से ही रेस्क्यू टीम

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

बिहार में तेज बारिश और बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, कई इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बाढ़ की स्थिति को लेकर बात की है, बिहार में बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ के करीब 320 कर्मचारियों को भेजा गया है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से चर्चा की, एनडीआरएफ की टीमें बाढ़ पहले ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंच चुकी है।

फोन पर हुई बातचीत में सीएम नीतीश ने राजनाथ सिंह को राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति के बारे में बताया कि भारी बारिश और नेपाल से छोड़े गए पानी की वजह से ताप्ती और महानंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है।

बाढ़ का असर रेल यातायात पर भी पड़ा है, भारी बारिश और किशनगंज स्टेशन के आसपास के इलाकों में बाढ़ को देखते हुए पांच ट्रेनें रद्द की गई हैं।

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा है कि बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ की कम से कम सात टीमें भेजी गई हैं और हर टीम में 45 कर्मचारी हैं।

गोरखपुर ट्रेजेडी: CM योगी व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पहुँचे अस्पताल

न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज पहुंचे और स्थिति का जायज़ा लिया। साथ ही जेपी नड्डा ने केंद्र की ओर से हर सम्भव मदद मुहैया कराने का आश्वासन CM योगी को दिया।

मुख्यमंत्री ने इस बीच पूरी घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने को का निर्देश भी दिया गया।

डीडी न्यूज़ की खबर के अनुसार , इससे पहले उत्‍तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर मेडिकल कालेज में बच्‍चों की मौत की घटना की जांच मुख्‍य सचिव की अध्‍यक्षता में गठित समिति से कराने की घोषणा की है। अस्‍पताल के प्रिंसिपल को ड्युटी में लापरवाही बरतने के लिए पद से निलम्‍बित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल शाम अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बच्चों की मौत के मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर में बी आर डी मेडिकल कालेज अस्‍पताल की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। एक ट्वीटर संदेश में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि पीएम मोदी केंद्र और उत्‍तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं।