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Sunday, August 16, 2026
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​शहीद भगत सिंह क्या थे?

आलोक शर्मा | Navpravah.com

 

दो-चार दिन में मेरे सामने दो-तीन आलेख आए, जो भगत सिंह की वैचारिक स्थिति को लेकर ग़ज़ब की अवधारणा पेश कर रहे थे। हालांकि यह मसला नया नहीं है, लेकिन मेरे सामने पहली बार आया, तो मैंने इस पर सजगता से और सहानुभूतिपूर्वक विचार किया।

पहला आलेख एक दक्षिणपंथी घोषित पत्रिका में छपा था और दूसरा भगत सिंह के एक ग्रन्थ लायक लेखन को विभिन्न क़िताबों की शक्ल देकर धन कूटने वाले एक लेखक की कलम का कमाल था। पहला घोषित कर रहा था कि भगत सिंह ख़ानदानी आर्यसमाजी थे और क्षणिक रूप से भटक गए थे। इसके उलट दूसरा उन्हें ‘पक्का मार्क्सवादी’ घोषित कर रहा था। दूसरे की आड़ यह थी – ‘कुछ रुको, अभी एक क्रांतिकारी दूसरे क्रांतिकारी से मुलाक़ात कर रहा है।’ साथ ही, भगत सिंह का ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ आलेख तो बहुत बड़ा प्रमाण है ही।

वे चुनौती दे रहे थे – भगत सिंह ने घोषित किया था – ‘मैं नास्तिक हूं’, तुम भी करो, तो मैं मान लूं कि तुम सही हो।
दक्षिणपंथी असल में तर्कहीन प्रजाति है। मैं होता, तो कहता – भारत में सबसे पहले महर्षि चार्वाक ने घोषित किया था कि वे नास्तिक हैं और उनका सिद्धांत था – ‘ऋणं कृत्वा घृतम पिवेत’। तुम आज तक इसी पर चल रहे हो। अगर तुम्हारे तर्क का मूल आधार यही है, तो स्वीकार करो कि मार्क्सवाद असल में सनातन की देन है और उसके आदिगुरु आचार्य चार्वाक थे।

मैंने भगत सिंह का प्रसिद्ध आलेख ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ अनेकानेक बार पढ़ा है। कई बार जिज्ञासावश और कई दफा नुक्ताचीनी करने के उद्देश्य से, लेकिन हर बार मुझे उनके प्रश्नों की कोई काट नहीं सूझी।

कल मैं उसे एक बार फिर पढ़ रहा था, तो मुख्य प्रश्न सदा की तरह एक बार फिर मेरे सामने मुंह बाए थे –
भगत सिंह ने इसमें एक जगह कहा है कि उन्होंने कार्ल मार्क्स को ‘कुछ ही’ पढ़ा है। वे क्रांतिकारियों के कारनामे पढ़ने के शौकीन थे। फ्रांस की क्रान्ति उन्हें लुभाती थी। वे बाकुनिन, त्रात्स्की, लेनिन आदि उन लोगों को पढ़ते थे, जो क्रांतिकारी विचार को धरातल पर उतार सके थे।

उन्हीं के शब्दों में पढ़ें – “….  ‘अध्ययन’ की पुकार मेरे मन के गलियारों में गूंज रही थी – विरोधियों द्वारा रखे गये तर्कों का सामना करने योग्य बनने के लिए अध्ययन करो। अपने मत के पक्ष में तर्क देने के लिए सक्षम होने के वास्ते पढ़ो। मैंने पढ़ना शुरू कर दिया। इससे मेरे पुराने विचार व विश्वास अद्भुत रूप से परिष्कृत हुए। रोमांस की जगह गम्भीर विचारों ने ली ली। न और अधिक रहस्यवाद, न ही अन्धविश्वास। यथार्थवाद हमारा आधार बना। मुझे विश्वक्रान्ति के अनेक आदर्शों के बारे में पढ़ने का खूब मौका मिला। मैंने अराजकतावादी नेता बाकुनिन को पढ़ा, कुछ साम्यवाद के पिता मार्क्स, किन्तु अधिक लेनिन, त्रात्स्की, व अन्य लोगों को पढ़ा, जो अपने देश में सफलतापूर्वक क्रान्ति लाए थे। ये सभी नास्तिक थे। बाद में मुझे सोहम स्वामी की पुस्तक ‘सहज ज्ञान’ मिली। इसमें रहस्यवादी नास्तिकता थी। 1926 के अन्त तक मुझे इस बात का विश्वास हो गया कि एक सर्वशक्तिमान परम आत्मा की बात, जिसने ब्रह्माण्ड का सृजन, दिग्दर्शन और संचालन किया, एक कोरी बकवास है। मैंने अपने इस अविश्वास को प्रदर्शित किया। मैंने इस विषय पर अपने दोस्तों से बहस की। मैं एक घोषित नास्तिक हो चुका था।”
इस तहरीर में आप देख सकते हैं कि वे कह रहे हैं कि उन्होंने मार्क्स को ‘कुछ ही’ पढ़ा। सोचें, क्या अर्थ है इसका?

संभवतः आपको पता होगा कि पेरिस से शुरू हुआ यह विद्रोह देखने-सुनने के बाद मार्क्स ने अपनी अवधारणाओं में व्यापक बदलाव किया था। यह विशुद्ध रूप से उन श्रमिकों की क्रान्ति थी, जिनमें से कोई कम्युनिस्ट नहीं था, लेकिन कम्युनिस्टों ने इसे ‘पेरिस कम्यून’ नाम देकर हथिया लिया।

भगत सिंह आयरिश क्रांतिकारियों के दीवाने थे। उन्होंने आयरलैण्ड के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी डॉन ब्रीन की आत्मकथा ‘माई फ़ाइट फ़ॉर आयरिश फ्रीडम’ का हिन्दी में अनुवाद किया था। अर्थात भगत सिंह न राष्ट्रवादी थे, न आर्यसमाजी थे, न मार्क्सवादी थे। वे सिम्पली ‘क्रांतिकारी’ थे। उन्हें क्रान्ति से प्यार था।

दरअसल उन्हें हाईजैक कर लिया गया। ठीक वैसे, जैसे अम्बेडकर, स्वामी विवेकानंद, कबीर, राम मनोहर लोहिया, दिनकर, निराला और प्रेमचंद आदि को किया गया। पढ़ते रहिए।

(वरिष्ठ पत्रकार आलोक शर्मा जी की फेसबुक वॉल से साभार उद्धृत)

भाजपा के रंग में रंगे नितीश, अस्पताल में मर रहे बच्चे लेकिन साहब बेख़बर -तेजस्वी

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और विधान सभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश यादव पर आरोप लगाया है कि उनपर भाजपा का रंग चढ़ गया है और वही रंग बिहार के अस्पतालों में भी बच्चों की मौत का कारण बना है। मुजफ्फरपुर अस्पताल में हुई बच्चों की मौत पर ताना मारते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री पर भाजपा का रंग चढ़ चुका है। उसी के चलते बिहार के मुजफ्फरनगर में भी ऑक्सीजन की कमी पड़ने से बच्चों की मृत्यु हुई।

ट्विटर पर झटपट एक के बाद एक कई ट्वीट कर तेजस्वी ने पूछा, “नीतीश जी, आपकी नैतिकता कहां चली गई, जब राज्य के बच्चे ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं?” तेजस्वी ने लिखा है, “नीतीश जी पर भाजपा का रंग चढ़ चुका है, तभी तो ऑक्सीजन की कमी से बिहार के अस्पतालों में भी बच्चें मरने लग गए हैं।”

सृजन घोटाले पर भागलपुर में आगामी रविवार (10 सितंबर) को एक जनसभा करने जा रहे  तेजस्वी ने दूसरे ट्वीट में लिखा, “नीतीश जी चेहरा चमकाने में लीन हैं, जबकि मुज़फ्फरपुर में ऑक्सीजन से कई बच्चों की मौत और दरभंगा में एक्सपायर्ड ब्लड चढ़ाने से 8 बच्चों की मौत हो चुकी है।” अगले ट्वीटी में उन्होंने लिखा, “8 लोगों की मौत गलत खून या एक्सपाइरी खून चढाने से हुई है। लाल खून के इस काले कारोबार पर नीतीश सरकार नैतिकता रूपी कुंभकर्णी नींद में है।”

तेजस्वी ने पूछा, “नीतीश जी बिहार के अस्पतालों मे बच्चे और लोग मार रहे हैं। इसपर आपकी अंतरात्मा नहीं जागती क्या? मासूमों की मौत पर आपकी नैतिकता कहाँ छुप जाती है?”

तेजस्वी ने सृजन मामले में भी नीतीश पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है, “चार बार नीतीश कुमार जी ने #सृजन घोटाले पर जाँच होने से रोक दिया, वरना इसका पर्दाफ़ाश 10 साल पहले ही हो गया होता।” #SrijanExposesNitish  तेजस्वी ने अगले ट्वीट में आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के इशारों पर छोटे-छोटे कर्मियों की गिरफ्तारी दिखाकर बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है और सबूत मिटाए जा रहे हैं, गवाहों को मारा जा रहा है। तेजस्वी ने आगे लिखा, “सृजन घोटाले के गढ़ भागलपुर को प्रस्थान कर चुके हैं। सृजन के गढ़ से ही सृजन घोटाले के सृजनकर्ताओं या सृजन के दुर्जनों का पर्दाफाश करेंगे।”

उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्‍ण मेडिकल कॉलेज अस्‍पताल (एसकेएमसीएच) में शुक्रवार की देर रात ऑक्सीजन की कमी से एक बच्ची की मौत के बाद अफरातफरी मच गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। बवाल बढऩे की आशंका को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन बच्ची के शव को घर भेज दिया। एक ओर परिजनों का कहना है कि बच्ची की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है तो दूसरी ओर अस्पताल ने इस बात से साफ़ इंकार किया है।

एसकेएमसीएच के स्वास्थ्य प्रबंधक मो. सोहैल ने कहा कि बच्ची को गंभीर स्थिति में लाया गया था। वह डायरिया से पीडि़त थी। उसकी मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं, बल्कि डायरिया से  हुई है।

हनी’ की लत से ‘सीरियस’ हुआ डायबिटिक राम रहीम, लाया जाएगा पीजीआई

HoneyPreet

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com

डेरा सच्‍चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के अय्याशी भरे जीवन का अंत इस तरह जेल की सलाखों के पीछे होगा, ये उसने सपने में देखे हुए किसी सपने में भी नहीं सोचा होगा। जिस ‘हनी’ की मीठी मुस्कान का आदी बनकर राम रहीम को डायबिटीज हो गई, उसके दर्शन ऐसे दुर्लभ हो जायेंगे, इसकी उसने कल्पना ही नहीं की थी। आज जब ये सब यथार्थ में बदल गया है, तो ‘बाबा’ इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। सुनारिया जेल में गुरमीत राम रहीम की तबीयत बिगड़ गई है व जेल के डॉक्‍टरों ने उसे राेहतक पीजीअाइ ले जाने की सलाह दी है।

विशिष्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राम रहीम को पीजीआइ लाए जाने की तैयारी की जा रही है। गुरमीत राम रहीम की जांच करने चार डॉक्‍टरों की टीम सुनारिया जेल गए हैं। इसके मद्देजनर पीजीआइ में कड़ी सुरक्षा की गई है। कड़ी सुरक्षा के बीच उसके लिए वार्ड और कमरा भी आरक्षित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि गुरमीत राम रहीम के लिए पीजीआइ के वार्ड 24 में रूम नंबर 105 बुक किया गया है। हनीप्रीत से नहीं मिल पाने की बेचैनी को राम रहीम की सबसे बड़ी बीमारी बताया जा रहा है।

डीएसपी डॉक्टर रविंदर ने रूम और वार्ड के आसपास सुरक्षा का जायजा लिया। आसपास के रूम भी खाली करा लिये गए हैं। पीजीआइ परिसर में हर व्‍यक्ति की तलाशी ली जा रही है। सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर भी सुरक्षा का जायजा लेने पीजीआइ पहुंचे, हालांकि उन्होंने इस दौरे को अपना निजी दौरा बताया।

जेल में पहुंचे एक डॉक्टर का कहना है कि गुरमीत राम रहीम मानसिक रूप से परेशान है। वह सेक्स का आदी है। इसी वजह से वह जेल में परेशान हो गया है और उसकी तबियत बिगड़ गई है। इसके अतिरिक्त वह हृदय रोग और डायबिटीज से भी पीड़ित है। उसका रक्‍तचाप भी बढ़ा हुआ है। पीजीआइ में इसका इलाज संभव है और इसी कारण उसे यहां लाया जा रहा है। राम रहीम का आतंक इतना फैला है कि डॉक्टर ने भी अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर ही यह जानकारी साझा की है।

शिक्षकों द्वारा दिए गए ज्ञान का सही उपयोग करें -राम नाइक

दीक्षांत समारोह में बोले राम नाइक
एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
राज्यपाल राम नाईक ने आथ लखनऊ स्थित ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विवि के द्वितीय दीक्षांत समारोह में की शिरकत की, इस दौरान राज्यपाल राम नाईक ने दीक्षांत कार्यक्रम का संबोधन भी किया। साथ ही राज्यपाल राम नाईक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधि प्रदान कर सम्मानित भी किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो० फुरकान कमर, विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति श्री एस०के० शुक्ला, शिक्षकगण सहित अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, छात्र-छात्रायें एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राम नाईक ने कहा कि दीक्षान्त समारोह छात्र जीवन का ऐसा क्षण है, जहाँ एक तरफ किताबी पढ़ाई पूरी होती है तो, दूसरी ओर जीवन की नई पढ़ाई यानि भविष्य में क्या करना चाहते हैं। इसके लिए परिश्रम प्रारम्भ करना होता है।
उन्होंने कहा कि छात्रों का धर्म केवल शिक्षा ग्रहण करना होता है, अच्छी शिक्षा ग्रहण करके ही आप अपने देश को आगे ले जा सकते हैं, शिक्षकों द्वारा दिए गए ज्ञान का सही उपयोग करें। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को भ्रम है कि, इस विश्वविद्यालय में केवल उर्दू, अरबी-फारसी का ज्ञान दिया जाता है, जबकि यहाँ सभी प्रकार के विषय पढ़ाए जाते हैं। यहाँ धीरे-धीरे छात्रों की संख्या बढ़ रही है।
इस वर्ष 204 लोगों को उपाधि दी गई है जिसमें 142 छात्र और 62 छात्राएं है, उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु 25 स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में 17 छात्र हैं और 8 छात्राएं हैं। राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उनसे अलविदा लिया।

सिरसा : डेरा में विस्‍फोटक बनाने की फैक्‍ट्री चलाता था बलात्‍कारी बाबा

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एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
बलात्कारी राम रहीम के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में पुलिस की तलाशी जारी है। दूसरे दिन तलाशी अभियान के दौरान डेरा परिसर में विस्फोटक बनाने की अवैध फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। पुलिस द्वारा पकड़ी गई इस फैक्ट्री से 82 पेटी विस्फोटक बरामद हुआ है।
डेरा में सर्च ऑपरेशन को लेकर सिरसा में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इस वक्त डेरा मुख्यालय छावनी में तब्दील है। वहां 5000 जवानों की तैनाती हुई है। फॉरेंसिंक विभाग की की टीम यहां गहन छानबीन में जुटी है, वहीं आज डेरा परिसर के भीतर जमीन की खुदाई भी होगी। शुक्रवार से जारी तलाशी अभियान में धीरे-धीरे डेरे का रहस्य सामने आ रहा है।
डेरे से शुक्रवार को पांच लोगों को आजाद कराया गया था, जिनमें 2 नाबालिक हैं। मुख्यालय में सर्च ऑपरेशन को लेकर सिरसा में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। डेरा सर्च अभियान के चलते 10 सितम्बर तक इंटरनेट व डाटा सर्विस बंद रहेगा।
तलाशी अभियान के पहले दिन डेरे के भीतर पुलिस ने दो कमरे सील किये हैं, खबरों के मुताबिक दोनों कमरों से कुछ आपत्तिजनक सामान मिला है। जिसके बाद इन दोनों कमरों को सील किया गया। पुलिस ने कंप्यूटर, लैपटॉप और दूसरे उपकरण के साथ भारी मात्रा में नकदी बरामद की है।

“आधे अधूरे कॉमरेड”

आनंद रूप द्विवेदी | Navpravah.com

वामपंथी पत्रकार गौरी लंकेश की निर्मम हत्या के बाद देश का राजनीतिक माहौल एक बार फिर से वैचारिक सिद्धांतों व दलगत हथकंडों के सूक्ष्म परीक्षण की मांग खड़ी करता है। हमें मूलभूत ढांचे को समझने की सख्त जरूरत है। जरूरत इसलिए ताकि क्रांति की आड़ में अपनी सेमी पॉलिटिकल रोटियां सेंकने वाले घाघ आपको अपना सॉफ्ट टारगेट बनाने में कामयाब न हों। आज का सबसे फैन्सी शब्द है कॉमरेड।

कॉमरेड कभी आधा अधूरा नहीं हो सकता। उसे पूरा कॉमरेड बनना ही पड़ता है। ये पूर्णत्व का भाव हर उस कॉमरेड में होना ही चाहिए जिसे इसकी एबीसीडी तक का ज्ञान हो। ‘कॉमरेड’ का शाब्दिक अर्थ है ‘फ़ेलो मेम्बर’ जिससे युद्ध मे भागी सैनिक आदि को संबोधित किया जाता था। कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों को ये शब्द इतना लज़ीज़ महसूस हुआ कि इसका पूर्णकालिक स्वामित्व ले लिया गया। अब कॉमरेड कहने भर से आप कम्युनिस्ट हो जाते हैं। लेकिन आधे अधूरे। पूरा कम्युनिस्ट या कॉमरेड भारत मे नहीं मिलता। भारत का कॉमरेड हर सुख को भोगता हुआ, सहवास आदि में ओत प्रोत कम्युनिस्ट होता है। विचारों की आड़ में ये साम्प्रदायिक सौहार्द्र की देशज भावना को आगे बढ़ाने को उठ खड़ा तो होता है, लेकिन स्वयं ऐसी साम्प्रदायिकता को जन्म देता है जिससे कुछ हासिल होता है तो हिंसा और वैमनस्यता।

ये कॉमरेड डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर, हीरो, हेरोइन, कलाकार, अदाकार, साहित्यकार, कुछ भी हो सकता है। आजीविका और बाजारवाद का कोई भी संसाधन अपना सकता है फ़िर भी विचारों से कॉमरेड का कॉमरेड ही रहता है। सप्तपदी पर आधारित हिन्दू वैवाहिक संस्था में भी बंध जाता है। सनातन पद्धति के सभी कर्मकांडो का बराबरी से पालन करने वाला, जिसके नाम में ही किसी देवी देवता आदि के दर्शन हो जाएं, ऐसा कॉमरेड केवल भारत में ही पाया जाता है।

कहानी की गहराई में जाने पर पता चलता है कि मार्क्स और लेनिन के रास्ते पर चलने वाली कम्युनिस्ट विचारधारा के दो धड़े हुए। एक मार्क्सवादी और दूसरा कम्युनिस्ट। किसान आंदोलनों से जन्मे इस संगठन की शुरूआत जिस सिध्दांत पर हुई आज के समय में उसके ठीक उलट जाती हुई दिख रही है। आगे चलकर 70 के दशक में जब चारु मजूमदार और कानू सान्याल ने संगठन का हथियार बन्द विभाजन किया तो चीन के माओ का दामन थाम लिया। अब इसमें द्वेष, हिंसा, अहंकार, लिप्सा सब थी। इस माओवाद के दो सिद्धांत हैं:

1. राजनैतिक सत्ता बन्दूक की नली से निकलती है। 

2. राजनीति रक्तपात रहित युद्ध है और युद्ध रक्तपात युक्त राजनीति।

जब 1967 में नक्सलवादियों ने कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों की एक अखिल भारतीय समन्वय समिति बनाई तब इन विद्रोहियों ने औपचारिक तौर पर स्वयं को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग कर लिया और सरकार के खिलाफ़ भूमिगत होकर सशस्त्र लड़ाई छेड़ दी। अपने लक्ष्य और विचारधारा से पूर्णतः भटके लोगों का नक्सलवाद इसी कम्युनिस्ट विचारधारा का बिगड़ा हुआ स्वरूप है। आज का नक्सल हत्या और तबाही का द्योतक है।

हमारे आधुनिक कॉमरेड मार्क्सवाद, कम्युनिज़्म, नक्सल की पंचमेल खिचड़ी जैसे हैं, जिन्हें दरअसल स्वयं नहीं पता कि किस पलड़े जाकर बैठना है। इन्हें सरकारी सहयोग, जनता के टैक्स से मिलने वाले फायदे भी चाहिए, तो दूसरी ओर जंगल में बनती हुई सड़क इनके मकसद की सबसे बड़ी बाधा भी लगती है। जिस प्रगतिशील समाज की अवधारणा यह बुद्दिजीवी वर्ग टीवी चैनलों, जर्नल्स, में करता है, उसी प्रगतिशीलता का आज सबसे मुखर विरोधी है। इन्हें सेल्फ़ी मोड वाला कॉमरेड कहना भी गलत न होगा।

कहा जाय तो “हाथी के खाने के अलग और दिखाने के दांत अलग”। ऐसा भारतीय कॉमरेड मूल विचारधारा का वहन कर पाने में बिल्कुल सहज नहीं होता। उसे अपने शिष्य तो इस परंपरा के कठिन साधक चाहिये किंतु गुरुत्व में पर्याप्त छूट प्राप्त हो। ऐसे अधकचरे खोखले वैचारिक दांव पेंच से बचना ही श्रेयस्कर होगा। आज का आधा अधूरा कॉमरेड हत्या पर डिबेट्स करता है। वो बात करना चाहता है लेकिन अपने हित की। उसे जनमानस, जनसरोकार का कुछ ज्ञान ही नहीं। वो बस आपको हमें और पूरी मायावी दुनिया को कुछ दिखाना चाहता है, ऐसा दिखावा जिसमें विचारों, संवेदनाओं की दर्दनाक मौत के सिवा और कुछ बचा है तो बस पाखण्ड।

सुषमा स्वराज ने की श्रीलंका के विदेश मंत्री से मुलाकात

Foreign Minister Sushama Swaraj
सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार को भारत दौरे पर आए श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर यह जानकारी दी, मारापना दो दिवसीय यात्रा पर दिल्ली आये हैं।
दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के मुलाकात की जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दी, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दोनों नेताओं के मुलाकात एक तस्वीर ट्वीट की। ट्वीट में लिखा,”निकट और ऐतिहासिक द्विपक्षीय संबंधों का निर्माण। सुषमा स्वराज ने आज श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना से मुलाकात की।”
दोनों नेताओं की इस महीने की शुरुआत में कोलंबो में दूसरे भारतीय महासागर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी, पिछले महीने श्रीलंका के विदेश मंत्री का पदभार संभालने वाले मारापना शुक्रवार को भारत की दो दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे हैं।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह 4 दिवसीय जम्मू कश्मीर दौरे के लिए रवाना

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एनपी न्यूज़ नेटवर्क । Navpravh.com
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह जम्मू-कश्मीर के चार दिवसीय दौरे के तहत शनिवार को श्रीनगर पहुंच गये हैं, वह इस दौरान राज्यपाल एन.एन.वोहरा और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से मुलाकात करेंगे।
इस दौरे पर राजनाथ के साथ केंद्रीय गृह सचिव राजीब गाबा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी हैं, गृहमंत्री दो दिन घाटी में जबकि दो दिन जम्मू क्षेत्र में बिताएंगे। राजनाथ सिंह राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा के लिए सबसे पहले महबूबा मुफ्ती से मिलेंगे।
राजनाथ अनंतनाग में जिला पुलिस लाइन पर राज्य के पुलिसकर्मियों और खानबल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को भी संबोधित करेंगे, सूत्रों के मुताबिक, वह राज्य के लिए प्रधानमंत्री के विकास पैकेज के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करेंगे।
सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक धड़ों के प्रतिनिधि भी श्रीनगर और जम्मू में राजनाथ से मुलाकात करेंगे। राजनाथ सिंह का कहना है कि वह सभी से बात करने के लिए तैयार हैं। राज्यपाल वोहरा राज भवन में राजनाथ के लिए भोज की मेजबानी करेंगे।
राजनाथ सिंह सोमवार को जम्मू रवाना होने से पहले राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से भी बातचीत करेंगे। जम्मू दौरे के दौरान सीमा सुरक्षाबलों के जवानों को भी संबोधित करेंगे।

गुरूग्राम: पकड़ा गया दूसरी क्लास मे पढ़ने वाले प्रद्युम्न का हत्यारा

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एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल में दूसरी क्लास में पढ़ने वाले छात्र प्रद्युम्न की कल हत्या हो गयी थी, जिसके बाद आज बड़ा खुलासा हुआ है, 7 वर्षीय बच्चे के साथ यौन शोषण की कोशिश हुई थी और शोर करने पर उसकी हत्या कर दी गयी।
इस मामले में पुलिस ने स्कूल बस के कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है, परिजन ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चे की हत्या किसी और ने की है। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी स्कूल में 7 साल के बच्चे की हत्या कर दी गई हो।
बच्चे की हत्या के आरोप में पुलिस ने स्कूल बस के कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है, पुलिस के मुताबिक अशोक कुमार नाम के इस कंडक्टर ने स्कूल के बाथरूम में बच्चे के साथ पहले यौन शोषण की कोशिश की। जब बच्चा चिल्लाने लगा तो कंडक्टर नाकाम होने पर बच्चे की गला रेतकर हत्या कर दी।
पुलिस के मुताबिक आरोपी कंडक्टर ने अपना गुनाह कबूल लिया है, शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंडक्टर ने इस वारदात को अकेले अंजाम दिया। घटना के बाद स्कूल के बाहर लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

शुक्रवार को फिर खराब हुई लखनऊ मेट्रो

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सौम्या केसरवानी।Navpravah.com
लखनऊ मेट्रो 6 सितम्बर से शहरवासियों के लिए चलने लगी है, लेकिन शहरवासियों की उत्सुकता निराशा और डर में व्याप्त होने लगी है। इसका कारण ये है कि 60 घंटे के भीतर मेट्रो दूसरी बार ख़राब हो चुकी है।
इस तकनीकी खराबी के चलते शुक्रवार शाम को मेट्रो उसी जगह ख़राब हुई जहां पर बुधवार सुबह मेट्रो ख़राब हुई थी, करीब एक घंटे मेट्रो के खड़े रहने के दौरान ऐसी लाइट बंद हो गए, गर्मी की वजह से यात्री बेहाल हो गए।
चारबाग से ट्रांसपोर्ट नगर जा रही मेट्रो दुर्गापुरी और मवैया स्टेशन के बीच खड़ी हो गई, सूचना पाकर मौके पर पहुंचे मेट्रो के कर्मचारियों ने यात्रियों को इमरजेंसी गेट से बाहर निकाला। ट्रेन से बाहर निकलने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।
इस मामले में मेट्रो के जनसम्पर्क अधिकारी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि एमरजेंसी ब्रेक लगाने से मेट्रो खड़ी हो गई थी, इस ट्रेन को ट्रांसपोर्ट नगर डिपो भेज दिया गया, रूट पर मेट्रो का संचालन करीब एक घंटे बाद फिर शुरू हो गया था।
लखनऊ मेट्रो का 5 सितंबर को उद्घाटन किया गया था, बुधवार सुबह कमर्शियल रन के पहले ही चक्कर में लखनऊ मेट्रो रास्ते में ही ख़राब हो गई थी। इस ट्रेन में 101 यात्री फंसे थे।
मेट्रो के ख़राब होने की सूचना मिलते ही एलएमआरसी प्रशासन में हड़कंप मच गया था।
आनन-फानन में मेट्रोकर्मी मौके पर पहुंचे और लखनऊ मेट्रो के इमरजेंसी गेट से करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित यात्रियों को बाहर निकाला गया था।