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Thursday, September 10, 2026
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31 अगस्त तक इस राज्य में लगा लॉकडाउन, थोड़ी ही देर में…

इसके बाद इस संकट से जान गंवाने वालों की संख्या भी 3,659 तक आ चुकी है। दरअसल तमिलनाडु में अब तक 1 लाख 67 हजार लोग रिकवर भी हो चुके हैं और लगभग 58 हजार सक्रिय मामले बताये जा रहे हैं।
आप जानते ही होंगे यहां राजभवन में बड़ी संख्या में कर्मचारी कोरोना संक्रमित मिले हैं। इन सबके चलते यहां की सरकार ने 31 अगस्त तक लॉकडाउन लगाने की घोषणा की है।
खबर के मुताबिक, तमिलनाडु में अभी तक 2 लाख 28 हजार केस आ चुके हैं और यह चौकाने वाला आंकड़ा है। मिली खबर के अनुसार, तमिलनाडु में Covid-19 के 6,972 नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 2 लाख 28 हजार से अधिक हो चुकी है। इसी के साथ बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के कारण 88 और लोगों की मौत हो चुकी है।
 कोविड-19 के बढ़ते मामले को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने भी 31 अगस्त तक के लिए देशबन्दी की अवधि बढ़ा दी है। दरअसल, यहां लॉकडाउन बढ़ाया जा चुका है। बताया जा रहा है राज्य में रविवार को टोटल लॉकडाउन रहेगा और बाकी दिनों में थोड़ी रियायत दी जाएगी।

 

 

सुशांत सिंह की मौत को लेकर सामने आया ये बड़ा सच, 35 से ज्यादा लोगों ने…

आपको बता दें कि सुशांत सिंह के पिता ने पटना में एफआईआर दर्ज करवाई है। एफआईआर में रिया चक्रवर्ती को सुशांत को सुसाइड करने के लिए उकसाने और उसके बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर होने का आरोप लगाया है।

सुशांत की खुदकुशी के बाद मुंबई में भी जांच चल रही है। मुंबई पुलिस अब तक 35 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है।

रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में पटना में दर्ज एफआईआर को मुंबई ट्रांसफर करने की मांग की है। रिया चक्रवर्ती की ओर से वकील सतीश मानशिंदे ने याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि मुंबई में पहले से जांच चल रही है। एक ही घटना की दो जगह जांच नहीं हो सकती।

अभिनेता सुशांत सिंह के पिता ने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद कैविएट याचिका दायर की है। सुशांत सिंह के पिता ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती की याचिका पर बिना उनका पक्ष सुने कोई फैसला न सुनाया जाए।

 

 

कमलनाथ क्यों नहीं बन पाए मप्र के अशोक गहलोत ?

डॉ अजय खेमरिया | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क

जय जय कमलनाथ के उदघोष के बीच जब मप्र काँग्रेस के विधायकों ने कमलनाथ के नेतृत्व में आस्था व्यक्त की तो लगा कि  मप्र की राजनीति में कमलनाथ एक नई ताकत बन बीजेपी का मुकाबला करेंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम का एक पक्ष यह भी स्थापित करने का प्रयास किया गया कि सिंधिया से मुक्ति के बाद कैडर बेस कांग्रेस खड़ी हो सकेगी। सरकार  गिरने के चार महीने बाद भी क्या मप्र में कांग्रेस की हालत बदल पाई है? यह सवाल इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि आने वाले मिनी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस मैदान में कहीं नजर ही नही आ रही है।

22 विधायकों ने कमलनाथ का साथ छोड़ा था। यह सिलसिला बीजेपी सरकार बनने के बाद थम जाना चाहिये था, लेकिन  इस दौरान तीन अन्य विधायक भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन पकड़ चुके है। खबर है कि मालवा और निमाड़ के करीब आठ से दस विधायक भी आने वाले समय में कांग्रेस छोड़ सकते है। यानी मप्र में कांग्रेस उपचुनाव की चुनौती को स्वीकार करने से पहले खुद के बचे हुए घर को महफूज करने की चुनौती से ज्यादा हलाकान है।

ध्यान से समझा जाए, तो मप्र में कांग्रेस की इस हालत के लिए कमलनाथ खुद ही जिम्मेदार हैं। उनकी अपनी क्षमताओं और बढ़ती उम्र भी एक बड़ा कारक है। तथ्य यह है कि कमलनाथ मप्र के स्वाभाविक नेता है ही नही।वह आज भी दिल्ली दरबार के लिए फिट है, जबकि राज्य की राजनीति के लिए अशोक गेहलोत जैसे चपल और स्थानीय स्वीकार्यता वाले नेता ही सफल हो पाते हैं। खासकर मप्र जैसे राज्य जहाँ बीजेपी का संगठन देश भर में सबसे मजबूत और विस्तृत है और शिवराज सिंह जैसे ऊर्जावान नेता से किसी का मुकाबला हो तो 73 साल के कमलनाथ नैसर्गिक तौर पर भी मुकाबले में नही टिक सकते है। असल में मप्र कांग्रेस का अब संकट कमलनाथ ही हैं इसे निर्विवाद रूप से स्वीकार करना ही होगा। वे कभी उस स्वरूप में मप्र के नेता रहे ही नही है जैसा दिग्विजयसिंह, सिंधिया, अर्जुनसिंह अंदाज लगा सकते है कि कमलनाथ करीब 3 साल से मप्र कांग्रेस के अध्यक्ष है लेकिन 2018 का चुनाव जीतने  तक वह मप्र के आधे जिलों में भी दोरे पर नही गए।सिंधिया के प्रभाव वाले आठ जिलों में तो वे एक बार भी नही आये।

जब 2018 में वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आ गए तब भी पूर्व मुख्यमंत्री होने तक उन्होंने प्रदेश के किसी इलाके में जाने की जहमत नहीं उठाई। उनके बारे में कहा जाने लगा था कि कमलनाथ का प्लेन भोपाल, छिंदवाड़ा, दिल्ली के बीच ही उड़ता है। दूसरी तरफ शिवराज सिंह कुर्सी गंवाने के बाबजूद मप्र के मैदानी दौरों पर डटे रहे।यहां तक कि दिग्विजयसिंह भी पूरे प्रदेश में सरकार रहने तक  घूमते रहे। इससे पहले वे नर्मदा परिक्रमा कर प्रदेश के मालवा, महाकौशल, निमाड़ और नर्मदांचल को पैदल नाप चुके थे। मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ शायद शिवराज सिंह की जनता के सीएम की छवि को खत्म करना चाहते थे वे मैदानी सीएम की जगह डीपी मिश्रा की तरह वल्लभ भवन से ही हुकूमत चलाने में भरोसा करने लगे। इसके लिए पार्टी संगठन या जनसंवाद के चैनल की जगह उन्होंने अपने निजी लोगों का सहारा लिया जो अंततः उनकी सरकार पतन के एक महत्वपूर्ण कारक साबित हुए। यह भी तथ्य है कि कमलनाथ  को मप्र में कांग्रेस के मैदानी कैडर की भी कोई समझ नहीं रहीं है यही कारण है कि सीएम हाउस के नजदीक दिग्विजयसिंह के बंगले पर प्रदेश भर के कांग्रेसीयों का जमघट लगा रहता था और आम कार्यकर्ता मुख्यमंत्री निवास जाने से कतराते थे।

दिग्विजयसिंह जब कार्यकर्ताओं को सीएम  से मिलने का परामर्श देते तो अधिकतर का जबाब यही होता था कि सीएम उन्हें पहचानते ही नही है।खासकर मालवा, विंध्य, मध्यभारत बैल्ट के लोगों के साथ यह समस्या थी।5 बार के विधायक और अब शिवराज सरकार में खाद्य मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने कमलनाथ पर यही आरोप लगाया था कि वे विधायकों से मिलते नही है। चूंकि मप्र में पार्टी के चीफ भी कमलनाथ खुद ही थे इस कारण जनता और पार्टीगत नाराजगी का इनपुट आने का सिस्टम ही 15 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने विकसित ही नही किया। मंत्री विधायक एक दूसरे पर पैसा खाने , काम न करने के खुले आरोप लगाने लगे। यह एक मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ की नाकामी ही थी जो अंततः उनके पतन का अहम कारण बनी। वैसे भी मप्र में कांग्रेस की सरकार कमलनाथ के चेहरे पर नही बनी थी बल्कि सभी क्षत्रपों ने अपने अपने इलाकों में अपने लोगों को टिकट बांटकर जीत के लिए  जो दम लगाई उसका नतीजा थी। दूसरा पक्ष सवर्ण नाराजगी और कर्जमाफी थी जिसने बीजेपी के कोर वोटर को नाराज कर दिया था।

अब मप्र में कमलनाथ सरकार जा चुकी है और 27 सीटों पर उपचुनाव होना है पार्टी कमलनाथ और दिग्विजयसिंह के कबीलों में बंटती दिख रही है।कमलनाथ बगैर जमीनी पकड़ और मेहनत के केवल अपने पुराने बैकग्राउंड के बल पर मप्र को अपने कब्जे में करना चाहते है।उन्हें अब दिग्विजयसिंह से भी खतरा लगने लगा है इसीलिए उनके विरुद्ध भी राकेश चौधरी जैसे नेताओं को सार्वजनिक रूप आगे किया जा रहा है। नेता विपक्ष का पद भी कमलनाथ खुद संभाल रहे है जबकि स्वाभाविक दावा डॉ गोविंद सिंह और केपी सिंह जैसे 6 बार के विधायकों का है। ये सभी दावेदार दिग्विजयसिंह के समर्थक है। जाहिर है कमलनाथ मप्र में सिंधिया की तरह दिग्विजयसिंह और उनकी लॉबी को मजबूत नही होने देना चाहते है। अनौपचारिक रूप से वह सरकार के पतन के लिए दिग्विजयसिंह को जिम्मेदार भी बता चुके है लेकिन वह भूल गए कि अपने विधायकों पर नजर रखना और उन्हें सन्तुष्ट करना मुख्यमंत्री का काम होता है। अशोक गेहलोत इसका उदाहरण है। जाहिर कमलनाथ इस मोर्चे पर  भी बुरी तरह नाकाम रहे हैं ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि करीब 60 फीसदी विधायको से कमलनाथ का कोई पूर्व परिचय ही नही था, न टिकट वितरण, न उन्हें जिताने, न उनके लिए स्थानीय प्रबंधन में कमलनाथ की कोई भूमिका रही।

मप्र के आधे जिले आज भी ऐसे है जहाँ कमलनाथ जीवन मे कभी नहीं गए है। इन परिस्थितियों में अगर कमलनाथ डीपी मिश्रा की तर्ज पर मप्र की सरकार चलाने की कोशिशें कर रहे थे तब उसका पतन अवश्यंभावी ही था। आगामी उपचुनावों में कमलनाथ पार्टी के मुखिया के नाते बीजेपी और सिंधिया की तगड़ी चुनौती को कैसे पार पायेंगे? इस सवाल का जबाब बहुत कठिन नही है उनके मौजूदा वर्क कल्चर से समझा जा सकता है कि काँग्रेस भोपाल से ही मैदानी लड़ाई लड़ने वाली है।बीजेपी जहाँ दो महीने से ग्रासरूट पर फील्डिंग जमाने में जुटी है वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ कांग्रेस के लड़ाकों को भोपाल बंगले पर तलब करते है।वहीं फोटो सेशन होता है और बयान जारी कर दिया जाता है कि बीजेपी केवल एक सीट जीतेगी।सवाल यह है कि  भोपाल में बैठकर कमलनाथ कैसे उस सीएम और पार्टी से लड़ेंगे जो हमेशा ही इलेक्शन मोड़ में रहते है।

इसलिए मप्र का संकट तो फ़िलहाल कांग्रेस के लिए कमलनाथ का कल्चर ही बन गया है।

(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व टिप्पणीकार हैं।)

फ़ेसबुक पर विदेशी लड़की बनकर लगाते थे चूना, 5 नाइजीरियन समेत 7 गिरफ़्तार

  • फ़ेसबुक की मुहब्बत पड़ी महँगी।
  • लपेटे गए ५ नाइजीरियन समेत ७ नटवरलाल। 
  • गोरी विदेशी लड़कियों की प्रोफ़ाइल पिक्चर लगाते थे नौजवान लड़कों को चूना।
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
 
फ़ेसबुक पर अगर किसी गोरी मेम की मुहब्बत में गोते लगा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। फ़ेसबुक पर गोरी विदेशी लड़कियों की फ़ोटो लगाकर नौजवान लड़कों को चूना लगाने वालों का एक रैकेट पुलिस के हत्थे चढ़ा है। फरीदाबाद पुलिस ने एक ऐसे विदेशी गिरोह का पर्दाफाश किया, जिसके सदस्य फेसबुक पर विदेशी लड़की बनकर पहले लड़कों को फंसाते थे। फिर कीमती गिफ्ट भेजने की बात कह पैसे ठगते थे।
पुलिस ने इस गिरोह के शिकार हुए एक शख्स की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एक महिला समेत पांच नाइजीरियन और दो भारतीय युवकों को गिरफ़्त में ले लिया है।
इस मामले में एसीपी धारणा यादव ने बताया कि ये लोग फेसबुक पर लोगों को बेवकूफ बनाया करते थे और उनसे पैसे ठग लिया करते थे। ऐसा ही एक मामला फरीदाबाद में तब सामने आया, जब एक व्यक्ति को फेसबुक पर विदेशी महिला का फ्रेंड रिक्वेस्ट आया।
जानकारी के मुताबिक़, व्यक्ति ने रिक्वेस्ट स्वीकार कर लिया। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत होने लगी, फिर विदेशी लड़की ने कहा कि वह उससे प्यार करने लगी है और उसे एक गिफ्ट भेज रही है। शख्स खुश हो गया और उसके झाँसे में आ गया।
इसके बाद शख्स के पास कथित तौर पर एयरपोर्ट अधिकारियों का फोन आया, जिसने कहा कि उसका एक पार्सल आया है लेकिन और उसे गिफ्ट लेने के लिए अकाउंट में कुछ पैसे जमा कराने होंगे। शख्स ने पैसे जमा करा दिए। उसके बाद विदेशी लड़की ने उससे बातचीत करनी बंद कर दी।
कुछ दिन बाद जब शख्स ने ठगा हुआ महसूस किया, तो पुलिस थाने में शिकायत दर्ज़ किया। पुलिस ने उसकी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एक महिला समेत पांच नाइजीरियन और दो भारतीयों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार नाइजीरियन युवक लड़की बनकर फेसबुक पर फ्रेंड बनते थे और गिरफ्तार दोनों भारतीय एयरपोर्ट अधिकारी बनकर अकाउंट में पैसे डलवाते थे। बाद में सभी उन रुपयों को बांट लिया करते थे।

Good news: कोरोना वैक्सीन के शुरुआती ट्रायल में कोई रीऐक्शन नहीं, दो घंटे में डिस्चार्ज हुआ शख़्स

  • शनिवार को क़रीब १२ लोगों का होगा वैक्सिनेशन। 
  • अब तक 3500 लोग करा चुके हैं रजिस्ट्रेशन। 
  • सुरक्षा की दृष्टि से ट्रायल का पहला चरण बेहद महत्वपूर्ण। 
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
कोरोना वैक्सिनेशन को लेकर एक अच्छी ख़बर सामने आई है। कोरोना वैक्सीन का एम्स में ट्रायल शुरू हो चुका है। तीस साल के एक व्यक्ति को कोरोना का वैक्सीन लगाया गया। इस शख़्स को वैक्सीन से किसी तरह की कोई समस्या नहीं हुई, जिसके बाद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
एम्स में ट्रायल के प्रिंसिपल इनवेस्टिगेटर डॉक्टर संजय राय ने कहा कि ट्रायल शुरू हो गया है अब धीरे-धीरे ट्रायल में वॉलंटियर्स की संख्या बढ़ाई जाएगी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, कुल १२ वॉलंटियर्स को मेडिकल फ़िट्नेस मिल चुका है, इनमें से दो को शुक्रवार को बुलाया गया था, लेकिन किसी वजह से मात्र एक का ही वैक्सिनेशन किया जा सका है।
संजय राय ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से पहला चरण बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए हम आवश्यक सभी एहतियात बरत रहे हैं ताकि किसी तरह की परेशानी सामने न आए। पहले वालंटियर को हमने इसी वजह से दो घंटे अपनी देख रेख में रखा, जब उन्हें किसी तरह की समस्या नहीं हुई और फ़िट लगे तब उन्हें डिस्चार्ज किया गया।
चिकित्सक संजय राय ने बताया कि वॉलंटियर्स को हमने एक डायरी दी है, जिसमें उन्हें वो सारी बातें लिखेंगे जो उनके साथ घटेंगी। अगर उन्हें किसी तरह की दिक्कत होती है तो वो उन्हें डायरी में नोट करना है। उन्होंने बताया कि हमारी टीम के लोग उन सभी के सम्पर्क में लगातार बने रहेंगे, जिन्हें वैक्सीन दिया गया होगा।
वैक्सीनेशन के बाद इसकी सेफ्टी की रिपोर्ट एथिक्स कमिटी को भेजी जाएगी। कमिटी के रिव्यू के बाद इस ट्रायल को आगे बढ़ाया जाएगा। इस वैक्सीन के फेज वन के ट्रायल में कुल 100 वॉलंटियर्स को शामिल किया जाना है और दो डोज का यह वैक्सीनेशन है। ऐसे में पहले फेज को पूरा होने में लगभग 15 से 20 दिन लग सकते हैं। यहां बता दें कि एम्स में चल रहे इस ट्रायल में शामिल होने के लिए अब तक 3500 लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।

इस बार कैसे मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस? गृह मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइन

  • सोश् डिस्टन्सिंग के मद्देनज़र भीड़ इकट्ठा न करने का निर्देश दिया गया है। 
  • डिजिटल मीडीयम का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। 
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
स्वतंत्रता दिवस मनाने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को एडवाइजरी जारी किया। जानकारी के मुताबिक़, ये एडवाइज़री राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, सरकारी ऑफिसों और राज्यपालों को भेजी गई है। गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में 15 अगस्त के मौके पर सामूहिक कार्यक्रम आयोजित नहीं करने की सलाह दी गई।
एडवाइजरी में स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है। दरअसल गृह मंत्रालय की तरफ से ये गाइडलाइंस देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों मद्देनजर जारी की गई है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस में कहा गया कि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए मास्क लगाना, सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा। स्वतंत्रता दिवस पर भीड़ इकट्ठा ना हो, इसका ख्याल रखना आवश्यक होगा। इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पहले से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना भी जरूरी होगा।

कोरोना वाइरस की चपेट से बाहर हैं दुनिया के ये देश

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
दुनिया के कुल 188 देश अब तक कोरोना वाइरस की चपेट में आ चुके हैं। कई देशों ने तो कोरोना वायरस को खत्म करने का दावा किया था, लेकिन कुछ ही हफ्तों के बाद कोरोना वायरस ने एक बार फिर से वापसी कर ली। आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि क्या दुनिया का कोई ऐसा देश है, जहाँ कोरोना वाइरस नहीं पहुंचा है?
तो आइए जानते हैं उन देशों के बारे में, जहाँ कोरोना अभी तक पहुँच ही नहीं पाया है।
किरिबाती- प्रशांत महासागर में स्थित ये एक द्वीप देश है। यहां कि आबादी सिर्फ 122000 है।
मार्शल आईलैंड- ये देश, प्रशांत महासागर के मध्य में है। यहां सिर्फ 62 हजार लोग रहते हैं।
माइक्रोनेशिया- ये देश पश्चिमी प्रशांत महासागर में 2700 किलोमीटर में फैला है। यहां करीब 600 द्वीप हैं। यहां करीब 1 लाख लोग रहते हैं।
नॉरू– ये देश ऑस्ट्रेलिया के उत्तर पूर्व में है। यहां की आबादी 12 हजार है।
उत्तर कोरिया- यहां से कोई खबरें नहीं आती है। यहां कोरोना है या नहीं इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। किम के तानाशाही शासन के चलते उत्तर कोरिया दुनिया के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है।
पलाउ- ये प्रशांत महासागर में छोटा सा देश है। यहां की आबादी सिर्फ 17 हज़ार है।
समोवा- ये हवाई द्वीप और न्यूजीलैंड के बीच में स्थित है।

सोलोमन आइलैंड- ओशिआनिया क्षेत्र में स्थित सोलोमन आईलैंड 6 बड़े द्वीपों और 900 छोटे द्वीपों को मिलाकर बना है। यहां की आबादी 652,858 है।
टोंगा- दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपमंडल है, जिसमें 169 द्वीप हैं।
तुर्कमेनिस्तान- मध्य एशिया का देश तुर्कमेनिस्तान 1991 में सोवियत संघ से अलग होकर स्वतंत्र देश बना था। यहां की आबादी 59 लाख के करीब है।
तुवालू- ये हवाई द्वीप और ऑस्ट्रेलिया के रास्ते में स्थित देश है। यहां की आबादी 11,508 है।
वानूआतू– वानूआतू प्रशांत क्षेत्र का एक देश है। यहां की आबादी 292,680 है।

राम मन्दिर भूमि पूजन मामला: स्वरूपानंद सरस्वती के बयान पर भड़के संत, रोड़ा अटकाने का आरोप

• शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने भूमि पूजन मुहूर्त को कहा अशुभ।
• स्वरूपानंद सरस्वती के बयान पर संतों में रोष। 
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
राम मन्दिर निर्माण के भूमिपूजन को लेकर विवाद तेज़ हो गया है। ज्योतिष पीठाधीश्वर द्वारका शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती द्वारा निर्माण के लिए निकाली गई तिथि को अशुभ बताए जाने पर संतों में रोष उत्पन्न हो गया है। संतों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य सरस्वती को शास्त्रार्थ की चुनौती दी है।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की टिप्पणी ने संतों की मंडली में खलबली पैदा कर दिया है। संतों ने चुनौती दी है कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती यह सिद्ध करें कि भाद्र पक्ष की भादो अशुभ होती है। भादो में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और यह संपूर्ण मास शुभ होता है। जिस माह में देवता अवतार लेते हैं, उस माह को शुभ माना जाता है।
संतों ने स्पष्ट किया कि प्रमुख रूप से दो अवतार होते हैं राम अवतार और कृष्णा अवतार। राम अवतार चैत्र में हुआ था, इसलिए चैत्र का संपूर्ण मास शुभ होता है। भादो में भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था, इसलिए भादो का भी संपूर्ण माह शुभ है। किसी भी तरीके के मंदिरों की भूमि पूजन होने के बाद सभी ग्रह नक्षत्र अनुकूल हो जाते हैं।

तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि भादो में भगवान कृष्ण का जन्म उत्सव मनाया जाता है और भादो का संपूर्ण माह पवित्र है। भगवान श्री राम का नाम लेने मात्र से ही सारे अमंगल नष्ट हो जाते हैं। सरस्वती को चुनौती देते हुए संत परमहंस दास ने कहा कि इस मामले पर आकर मुझसे शास्त्रार्थ करें। उन्होंने कहा कि भगवान राम के मंदिर निर्माण के कार्य में रोड़ा अटका रहे हैं।

What’sapp दूर करेगा आप की सारी फ़ाइनेंशियल प्रॉब्लम्स, जानिए कैसे!

व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने वालों की चाँदी। 
• ग्राहकों को मिलेगी पेन्शन, लोन भी देगी कम्पनी। 
• सेवा विस्तार की प्रक्रिया हुई तेज़।
मुम्बई ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने वालों की क़िस्मत चमकने वाली है। इंस्टंट मैसेजिंग सर्विस देने वाला व्हाट्सऐप भारत में अपनी सेवाओं के विस्तार की तैयारियों में लग गया है। पीटीआई की एक ख़बर के मुताबिक़, व्हाट्सऐप बीमा, माइक्रो फ़ाइनैन्स (छोटे ऋण) और पेन्शन जैसी सेवाओं की शुरुआत की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक़, इस काम को लेकर पाइलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया जा सकता है।
फाइनेंशियल प्रोडक्ट तक लोगों की पहुंच आसान बनाने के लिए भारत में बैंकों व वित्तीय संस्थानों जैसे भागीदारों के साथ काम करेगी। कंपनी के नैशनल हेड (इण्डिया)  अभिजीत बोस ने बुधवार को यह बात कही। बोस ने ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट’ में कहा कि कंपनी फाइनेंशियल प्रोडक्ट वितरण से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए संभावित समाधानों का परीक्षण करने के लिए विभिन्न नई पहलों का भी समर्थन करेगी।
फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी बैंकिंग भागीदारों के साथ उनकी डिजिटल उपस्थिति को बेहतर बनाने तथा देश के विभिन्न खंडों व भौगोलिक क्षेत्रों में वित्तीय पहुंच की गति तेज करने के लिए एक साल से अधिक समय से काम कर रही है।
व्हाट्स ऐप के नैशनल हेड बोस ने कहा, आने वाले वर्षों में बैंकिंग सेवाओं को सरल बनाने और उनके विस्तार के लिए हम अधिकाधिक बैंकों के साथ मिलकर काम करेंगे। हम आरबीआई द्वारा रेखांकित बुनियादी वित्तीय सेवाओं जैसे अन्य उत्पादों के लिए अपने प्रयोगों का विस्तार करना चाहते हैं। इसकी शुरुआत माइक्रो पेंशन और इंश्योरेंस से करना चाहते हैं।

वैक्सीन को लेकर WHO का ये बयान टेन्शन बढ़ाने वाला है

Health desk | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क

तमाम देशों के वैक्सीन बनाने के प्रयास पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। डबल्यूएचओ ने स्पष्ट किया कि विभिन्न प्रयासों के बावजूद साल 2021 के पहले वैक्सीन का तैयार हो पाना मुश्किल है। WHO के मुताबिक, अगले साल तक वैक्सीन मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके मैन्यूफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में और भी वक़्त लग सकता है।

रूस, चीन, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में कोरोना वैक्सीन का विभिन्न चरणों में ट्रायल चल रहा है। लोग ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्दी से वैक्सीन आ जाए तो सबकी गाड़ी पटरी पर आए, लेकिन डबल्यूएचओ के बयान ने एक बार फिर लोगों की उम्मीदों पर ब्रेक लगा दिया।

WHO के कार्यकारी निदेशक माइक रेयान ने स्पष्ट किया कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के मामले में शोधकर्ताओं को कामयाबी मिल रही है, लेकिन साल 2021 के शुरुआती दिनों से पहले उसकी उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने ये भी कहा कि ये ज़रूरी है कि वैक्सीन की सुरक्षा मानकों में कोई कमी नहीं की जाए, भले ही वैक्सीन बनने की गति थोड़ी धीमी हो जाए। आम लोगों को ये वैक्सीन देने से पहले, हमें उन्हें सुनिश्चित करना है कि वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए हमने हर संभव एहतियात बरता है।

उन्होंने कहा कि कई संभावित वैक्सीन अपने ट्रायल के तीसरे फ़ेज़ में हैं और कोई भी वैक्सीन सुरक्षा मानकों या प्रभावी होने में अभी तक फ़ेल नहीं हुई है।