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Monday, August 3, 2026
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सपना चौधरी के इस ने लुक ने मचाया धमाल, देख लोग हुए घायल

सपना सोशल मीडिया पर इस तरह के जलवे अक्सर ढाती रहती हैं। उन्हें लोग काफी पसंद करते हैं। सोशल मीडिया पर उनके मिलियन्स में फॉलोवर्स करते हैं, जो उनकी हर एक तस्वीर के इंतजार में बैठे रहते हैं।

सोशल मीडिया पर तो सपना अपनी अदाओं के जलवे अक्सर दिखाती रहती हैं। अब से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने तस्वीरों को साझा किया, जिसमें वह गजब लग रही हैं। देसी अवतार में वह किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही है। सपना ने सफेद जींस के साथ आसमानी रंग का सूट पहन रखा है।

बॉलीवुड में बीते 2 साल सपना का काफी जलवा रहा है। कई हिंदी फिल्मों में उन्होंने अपनी अदाकारी का जलवा दिखाया। उम्मीद है कि इस साल भी वह खूब नाम कमाएंगी।

2018 में लोगों ने वर्ल्ड फेमस बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा से भी ज्यादा सपना को सर्च किया था। उन्हें यह लोकप्रियता बिग बॉस से बाहर आने के बाद मिली। टीवी के सबसे चर्चित और विवादित शो बिग बॉस में जाने के बाद हरियाणा की सपना की सारी दुनिया दीवानी हो चली।

एक्ट्रेस और डांसर सपना चौधरी का नाम गूगल ने उस लिस्ट में जोड़ा था, जिसमें सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली अभिनेत्रियों को रखा जाता है।

 

 

धोनी को लेकर सुरेश रैना ने कही ये बात, जानकर लोग हुए हैरान

रोहित भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अगले धोनी हैं। वह एक अद्भुत कप्तान हैं। वह बहुत शांत और धैर्यवान हैं। दूसरों की सलाह सुनता है।

 

यह खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दूसरों के लिए एक अच्छा उदाहरण है।

जब कप्तान खुद अच्छा खेलता है और साथ ही दूसरे खिलाड़ियों का सम्मान करता है, तो ड्रेसिंग रूम में माहौल सबसे अच्छा होता है। रैना ने कहा कि रोहित के पास एक अच्छा कप्तान बनने के लिए जरूरी सभी गुण हैं।

साथ ही, धोनी को किसी भी दबाव में चुपचाप सही निर्णय लेने की क्षमता के लिए ‘कैप्टन कूल’ के रूप में जाना जाता है। इस संबंध में, धोनी और रोहित में समानता है.

रैना सोचता है। रोहित आईपीएल में सबसे सफल कप्तान हैं और उनके नेतृत्व में, मुंबई इंडियंस ने टूर्नामेंट को चार बार जीता है।

अगले महेंद्र सिंह धोनी हैं, सुरेश रैना (Suresh Raina) ने भारत के उप-कप्तान की प्रशंसा की। धोनी भारत के सबसे सफल कप्तान हैं और उनके नेतृत्व में भारत ने दो विश्व कप जीते, 2007 ट्वेंटी 20 और 2011 वनडे।

 

 

 

भारत और नेपाल के बीच हुआ ये, चिट्ठी लिखकर कहा…

कमल थापा ने पत्र को शेयर करते हुए ट्वीट में लिखा, शाबाश! वहीं नेपाल द्वारा भारत को दिए गए जवाब को लेकर तमाम नेपाली नागरिक भी खुशी जता रहे हैं।

नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री कमल थापा ने इस पत्र को अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है और भारत को दिए जवाब की सराहना की है।

जिसके तहत महाकाली नदी के पूर्व का हिस्सा लिम्पियाधुरा, कुटि, कालापानी, गुंजी और लिपुलेख नेपाल के भू-भाग में आते हैं। चूंकि ये क्षेत्र नेपाली भू-भाग हैं, ऐसे में नेपालियों की आवाजाही स्वाभाविक है।

नेपाल के दार्चुला जिला अधिकारी टेक सिंह कुंवर ने धारचूला के उप-जिलाधिकारी के इस पत्र का जवाब देते हुए लिखा कि 1818 में नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच सुगौली संधि हुई थी।

इस पत्र में कहा गया है कि धारचूला जिला प्रशासन को खबर मिली है कि गुंज, कालापानी और लिम्पियाधुरा में नेपाली चोरी-छिपे घुस रहे हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ प्रशासन की ओर से ये पत्र लिखा गया था। अब इस पत्र का नेपाल ने पलटकर जवाब दिया है।

भारत ने इस महीने नेपाल को एक पत्र लिखकर कहा कि वो अपने नागरिकों को भारतीय क्षेत्र में अवैध तरीके से घुसने से रोकें।

 

भारत में राफेल के आने पर उड़ी पाकिस्तान की नींद, करने लगा…

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क

भारत में राफेल आने की खबरों के बाद से ही पाकिस्तानियों में राफेल के प्रति उत्सुकता बढ़ गई थी। 29 जुलाई की सुबह 10 बजे से ही पाकिस्तान में राफेल ट्रेंड करने लगा।

शाम तक यह टॉप ट्रेंड में आ गया। सिंध हो या ब्लूचिस्तान या फिर खैबर पख्तूनवा, पूरे पाकिस्तान में राफेल की धमक दिखने लगी। गूगल ट्रेंड के मुताबिक पाकिस्तान में बुधवार को rafale aircraft price, world best fighter jet, what is rafale और ambala सर्च किया जा रहा था।

बता दें सुखोई विमानों की निगहबानी में पांच आसमान को चीरते हुए जोरदार गर्जना के साथ आगे बढ़ रहे राफेल अंबाला एयरबेस पर उतरे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद ट्वीट कर कहा कि बर्ड्स(विमान) सुरक्षित लैंड कर गए हैं।

एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। भारत ने वायुसेना के लिए 36 राफेल विमान खरीदने के लिए चार साल पहले फ्रांस के साथ 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था।

पाकिस्तान में राफेल के बारे में जानने के लिए ऐसी होड़ मची कि गूगल सर्च में यह ट्रेंड करने लगा। पाकिस्तान में कोई राफेल की कीमत जानने के लिए तो कोई दुनिया का सबसे अच्छा फाइटर जेट सर्च करने में जुटा था। कुछ पाकिस्तानी अंबाला खोज रहे थे।

वायुसेना को नई ताकत देने वाले लड़ाकू विमान राफेल ने भारतीय सरजमीं पर लैंड किया तो अंबाला से इस्लामाबाद तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी।

चीन को लेकर अमेरिका ने दिया ये बड़ा बयान, कहा अगर…

पोम्पिओ ने एक साक्षात्कार में कहा, ”अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य से देखे तो राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने 2015 में चुनाव प्रचार अभियान के समय चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से जिस खतरे की पहचान की थी वह वास्तविक है।

 

उन्होंने कहा, ”हमने व्यापार संबंधों में गैर पारस्परिक रवैया देखा जहां चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने बौद्धिक संपदा की चोरी की और फिर वापस हमें बेच दी, राज्य प्रायोजित उद्योगों को ठगा, उस स्तर तक जाकर साइबर चोरी की जहां तक आज कोई देश पहुंच भी नहीं सकता।”

इसलिए हमने इस संबंध को फिर से संतुलित करने के लिए सभी सही कदम उठाने शुरू कर दिए हैं ताकि अमेरिकी लोगों की आजादी की रक्षा हो सके।”

पोम्पिओ ने उम्मीद जताई कि चीन यह फैसला लेगा कि व्यापार सौदे के पहले चरण के तहत उनकी प्रतिबद्धताओं का पालन किया जाए। उन्होंने कहा, ”हम इंतजार करेंगे और देखेंगे कि क्या वे अपने दायित्वों को पूरा करते हैं।”

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से खतरे को बिल्कुल वास्तविक बताते हुए बुधवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन ने बीजिंग के साथ संबंधों में फिर से संतुलित करने के लिए ”सही कदम” उठाने शुरू कर दिए हैं जिससे अमेरिकियों की आजादी की रक्षा हो सके।

 

अब इस मशहूर एक्टर ने फांसी लगाकर दी जान, जानकर लोगो में मचा हडकंप

आपको यह भी बता दें कि आशुतोष फिल्म और टीवी अभिनेत्री मयूरी देशमुख के पति थे। मयूरी और आशुतोष ने 21 जनवरी 2016 को शादी की। दोनों उस समय शादी के बंधन में बंधे थे। दिन में दोनों की तस्वीरें आती रहती थीं।

 

आशुतोष के अचानक चले जाने से न केवल उद्योग के लोग बल्कि प्रशंसक सदमे में हैं। दरअसल, आशुतोष ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया, इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

पुलिस का कहना है कि आशुतोष का शव नांदेड़ में उसके बंगले में लटका हुआ पाया गया है। हां, आशुतोष एक महीने पहले नांदेड़ गया था। आशुतोष की मृत्यु के बाद से मराठी फिल्म उद्योग में शोक की लहर है, सभी शोक में डूबे हुए हैं।

मराठी अभिनेता आशुतोष भाकरे को लेकर बड़ी खबर आई है। दरअसल, उन्होंने आत्महत्या कर ली है। आपको बता दें कि आशुतोष की उम्र 32 साल थी। उन्होंने कथित रूप से महाराष्ट्र के नांदेड़ में अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

 

 

भारत में कोरोना ने पकड़ी तेज रफ़्तार, मरीजो की संख्या…हुई पार

पिछले 24 घंटों में रिपोर्ट किए गए कुल मामलों में से 66.41 प्रतिशत आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के हैं।

 

वसूली दर में सुधार जारी है और वर्तमान में 64.43 प्रतिशत है, जबकि सकारात्मकता दर 11.67 प्रतिशत है। मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कुल 32,553 लोग बरामद हुए हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में अब तक 1,46,433 सक्रिय कोरोनावायरस के मामले हैं। कुल 14,463 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

आंध्र प्रदेश में, सबसे खराब राज्यों में से एक, पिछले 24 घंटों में कुल 7,244 नए मामले सामने आए, जिसमें कुल सक्रिय मामलों की संख्या 63,771 थी।

मंत्रालय ने कहा कि राज्य में वायरस से कुल 55,406 लोग बरामद हुए और पिछले 24 घंटों में 2,784 लोगों ने वायरस से उबरने के बाद अस्पताल या संगरोध केंद्रों को छोड़ दिया। अब तक 1,213 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 24 घंटे में 65 लोगों ने इस बीमारी का शिकार हो गए।

हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्राजील के बाद मामलों के मामले में भारत महामारी से प्रभावित तीसरा सबसे बड़ा देश है।

कुल मामलों में से, 5,28,242 सक्रिय हैं, जबकि 10,20,582 लोगों को एक घातक संक्रमण से ठीक किया गया है, जो पिछले दिसंबर में चीन के वुहान से उत्पन्न हुआ था और पूरी दुनिया को जकड़ लिया था।

इसी अवधि में 775 लोगों की मृत्यु हुई और 34,968 मौतें हुईं। हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि 70 प्रतिशत से अधिक मौतें “कॉमरेडिटी के कारण” होती हैं।

भारत ने गुरुवार को 24 घंटे में 52,123 कोरोनावायरस मामलों में सबसे अधिक एकल-दिवस स्पाइक दर्ज किया, जिसमें कुल संक्रमणों की संख्या 15,83,792 थी।

वैश्विक मोर्चे पर, कोरोनावायरस के मामलों की कुल संख्या 17 मिलियन के करीब पहुंच गई है, जबकि मृत्यु 665,000 से अधिक हो गई है।

 

 

 

31 अगस्त तक इस राज्य में लगा लॉकडाउन, थोड़ी ही देर में…

इसके बाद इस संकट से जान गंवाने वालों की संख्या भी 3,659 तक आ चुकी है। दरअसल तमिलनाडु में अब तक 1 लाख 67 हजार लोग रिकवर भी हो चुके हैं और लगभग 58 हजार सक्रिय मामले बताये जा रहे हैं।
आप जानते ही होंगे यहां राजभवन में बड़ी संख्या में कर्मचारी कोरोना संक्रमित मिले हैं। इन सबके चलते यहां की सरकार ने 31 अगस्त तक लॉकडाउन लगाने की घोषणा की है।
खबर के मुताबिक, तमिलनाडु में अभी तक 2 लाख 28 हजार केस आ चुके हैं और यह चौकाने वाला आंकड़ा है। मिली खबर के अनुसार, तमिलनाडु में Covid-19 के 6,972 नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 2 लाख 28 हजार से अधिक हो चुकी है। इसी के साथ बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के कारण 88 और लोगों की मौत हो चुकी है।
 कोविड-19 के बढ़ते मामले को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने भी 31 अगस्त तक के लिए देशबन्दी की अवधि बढ़ा दी है। दरअसल, यहां लॉकडाउन बढ़ाया जा चुका है। बताया जा रहा है राज्य में रविवार को टोटल लॉकडाउन रहेगा और बाकी दिनों में थोड़ी रियायत दी जाएगी।

 

 

सुशांत सिंह की मौत को लेकर सामने आया ये बड़ा सच, 35 से ज्यादा लोगों ने…

आपको बता दें कि सुशांत सिंह के पिता ने पटना में एफआईआर दर्ज करवाई है। एफआईआर में रिया चक्रवर्ती को सुशांत को सुसाइड करने के लिए उकसाने और उसके बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर होने का आरोप लगाया है।

सुशांत की खुदकुशी के बाद मुंबई में भी जांच चल रही है। मुंबई पुलिस अब तक 35 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है।

रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में पटना में दर्ज एफआईआर को मुंबई ट्रांसफर करने की मांग की है। रिया चक्रवर्ती की ओर से वकील सतीश मानशिंदे ने याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि मुंबई में पहले से जांच चल रही है। एक ही घटना की दो जगह जांच नहीं हो सकती।

अभिनेता सुशांत सिंह के पिता ने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद कैविएट याचिका दायर की है। सुशांत सिंह के पिता ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती की याचिका पर बिना उनका पक्ष सुने कोई फैसला न सुनाया जाए।

 

 

कमलनाथ क्यों नहीं बन पाए मप्र के अशोक गहलोत ?

डॉ अजय खेमरिया | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क

जय जय कमलनाथ के उदघोष के बीच जब मप्र काँग्रेस के विधायकों ने कमलनाथ के नेतृत्व में आस्था व्यक्त की तो लगा कि  मप्र की राजनीति में कमलनाथ एक नई ताकत बन बीजेपी का मुकाबला करेंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम का एक पक्ष यह भी स्थापित करने का प्रयास किया गया कि सिंधिया से मुक्ति के बाद कैडर बेस कांग्रेस खड़ी हो सकेगी। सरकार  गिरने के चार महीने बाद भी क्या मप्र में कांग्रेस की हालत बदल पाई है? यह सवाल इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि आने वाले मिनी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस मैदान में कहीं नजर ही नही आ रही है।

22 विधायकों ने कमलनाथ का साथ छोड़ा था। यह सिलसिला बीजेपी सरकार बनने के बाद थम जाना चाहिये था, लेकिन  इस दौरान तीन अन्य विधायक भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन पकड़ चुके है। खबर है कि मालवा और निमाड़ के करीब आठ से दस विधायक भी आने वाले समय में कांग्रेस छोड़ सकते है। यानी मप्र में कांग्रेस उपचुनाव की चुनौती को स्वीकार करने से पहले खुद के बचे हुए घर को महफूज करने की चुनौती से ज्यादा हलाकान है।

ध्यान से समझा जाए, तो मप्र में कांग्रेस की इस हालत के लिए कमलनाथ खुद ही जिम्मेदार हैं। उनकी अपनी क्षमताओं और बढ़ती उम्र भी एक बड़ा कारक है। तथ्य यह है कि कमलनाथ मप्र के स्वाभाविक नेता है ही नही।वह आज भी दिल्ली दरबार के लिए फिट है, जबकि राज्य की राजनीति के लिए अशोक गेहलोत जैसे चपल और स्थानीय स्वीकार्यता वाले नेता ही सफल हो पाते हैं। खासकर मप्र जैसे राज्य जहाँ बीजेपी का संगठन देश भर में सबसे मजबूत और विस्तृत है और शिवराज सिंह जैसे ऊर्जावान नेता से किसी का मुकाबला हो तो 73 साल के कमलनाथ नैसर्गिक तौर पर भी मुकाबले में नही टिक सकते है। असल में मप्र कांग्रेस का अब संकट कमलनाथ ही हैं इसे निर्विवाद रूप से स्वीकार करना ही होगा। वे कभी उस स्वरूप में मप्र के नेता रहे ही नही है जैसा दिग्विजयसिंह, सिंधिया, अर्जुनसिंह अंदाज लगा सकते है कि कमलनाथ करीब 3 साल से मप्र कांग्रेस के अध्यक्ष है लेकिन 2018 का चुनाव जीतने  तक वह मप्र के आधे जिलों में भी दोरे पर नही गए।सिंधिया के प्रभाव वाले आठ जिलों में तो वे एक बार भी नही आये।

जब 2018 में वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आ गए तब भी पूर्व मुख्यमंत्री होने तक उन्होंने प्रदेश के किसी इलाके में जाने की जहमत नहीं उठाई। उनके बारे में कहा जाने लगा था कि कमलनाथ का प्लेन भोपाल, छिंदवाड़ा, दिल्ली के बीच ही उड़ता है। दूसरी तरफ शिवराज सिंह कुर्सी गंवाने के बाबजूद मप्र के मैदानी दौरों पर डटे रहे।यहां तक कि दिग्विजयसिंह भी पूरे प्रदेश में सरकार रहने तक  घूमते रहे। इससे पहले वे नर्मदा परिक्रमा कर प्रदेश के मालवा, महाकौशल, निमाड़ और नर्मदांचल को पैदल नाप चुके थे। मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ शायद शिवराज सिंह की जनता के सीएम की छवि को खत्म करना चाहते थे वे मैदानी सीएम की जगह डीपी मिश्रा की तरह वल्लभ भवन से ही हुकूमत चलाने में भरोसा करने लगे। इसके लिए पार्टी संगठन या जनसंवाद के चैनल की जगह उन्होंने अपने निजी लोगों का सहारा लिया जो अंततः उनकी सरकार पतन के एक महत्वपूर्ण कारक साबित हुए। यह भी तथ्य है कि कमलनाथ  को मप्र में कांग्रेस के मैदानी कैडर की भी कोई समझ नहीं रहीं है यही कारण है कि सीएम हाउस के नजदीक दिग्विजयसिंह के बंगले पर प्रदेश भर के कांग्रेसीयों का जमघट लगा रहता था और आम कार्यकर्ता मुख्यमंत्री निवास जाने से कतराते थे।

दिग्विजयसिंह जब कार्यकर्ताओं को सीएम  से मिलने का परामर्श देते तो अधिकतर का जबाब यही होता था कि सीएम उन्हें पहचानते ही नही है।खासकर मालवा, विंध्य, मध्यभारत बैल्ट के लोगों के साथ यह समस्या थी।5 बार के विधायक और अब शिवराज सरकार में खाद्य मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने कमलनाथ पर यही आरोप लगाया था कि वे विधायकों से मिलते नही है। चूंकि मप्र में पार्टी के चीफ भी कमलनाथ खुद ही थे इस कारण जनता और पार्टीगत नाराजगी का इनपुट आने का सिस्टम ही 15 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने विकसित ही नही किया। मंत्री विधायक एक दूसरे पर पैसा खाने , काम न करने के खुले आरोप लगाने लगे। यह एक मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ की नाकामी ही थी जो अंततः उनके पतन का अहम कारण बनी। वैसे भी मप्र में कांग्रेस की सरकार कमलनाथ के चेहरे पर नही बनी थी बल्कि सभी क्षत्रपों ने अपने अपने इलाकों में अपने लोगों को टिकट बांटकर जीत के लिए  जो दम लगाई उसका नतीजा थी। दूसरा पक्ष सवर्ण नाराजगी और कर्जमाफी थी जिसने बीजेपी के कोर वोटर को नाराज कर दिया था।

अब मप्र में कमलनाथ सरकार जा चुकी है और 27 सीटों पर उपचुनाव होना है पार्टी कमलनाथ और दिग्विजयसिंह के कबीलों में बंटती दिख रही है।कमलनाथ बगैर जमीनी पकड़ और मेहनत के केवल अपने पुराने बैकग्राउंड के बल पर मप्र को अपने कब्जे में करना चाहते है।उन्हें अब दिग्विजयसिंह से भी खतरा लगने लगा है इसीलिए उनके विरुद्ध भी राकेश चौधरी जैसे नेताओं को सार्वजनिक रूप आगे किया जा रहा है। नेता विपक्ष का पद भी कमलनाथ खुद संभाल रहे है जबकि स्वाभाविक दावा डॉ गोविंद सिंह और केपी सिंह जैसे 6 बार के विधायकों का है। ये सभी दावेदार दिग्विजयसिंह के समर्थक है। जाहिर है कमलनाथ मप्र में सिंधिया की तरह दिग्विजयसिंह और उनकी लॉबी को मजबूत नही होने देना चाहते है। अनौपचारिक रूप से वह सरकार के पतन के लिए दिग्विजयसिंह को जिम्मेदार भी बता चुके है लेकिन वह भूल गए कि अपने विधायकों पर नजर रखना और उन्हें सन्तुष्ट करना मुख्यमंत्री का काम होता है। अशोक गेहलोत इसका उदाहरण है। जाहिर कमलनाथ इस मोर्चे पर  भी बुरी तरह नाकाम रहे हैं ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि करीब 60 फीसदी विधायको से कमलनाथ का कोई पूर्व परिचय ही नही था, न टिकट वितरण, न उन्हें जिताने, न उनके लिए स्थानीय प्रबंधन में कमलनाथ की कोई भूमिका रही।

मप्र के आधे जिले आज भी ऐसे है जहाँ कमलनाथ जीवन मे कभी नहीं गए है। इन परिस्थितियों में अगर कमलनाथ डीपी मिश्रा की तर्ज पर मप्र की सरकार चलाने की कोशिशें कर रहे थे तब उसका पतन अवश्यंभावी ही था। आगामी उपचुनावों में कमलनाथ पार्टी के मुखिया के नाते बीजेपी और सिंधिया की तगड़ी चुनौती को कैसे पार पायेंगे? इस सवाल का जबाब बहुत कठिन नही है उनके मौजूदा वर्क कल्चर से समझा जा सकता है कि काँग्रेस भोपाल से ही मैदानी लड़ाई लड़ने वाली है।बीजेपी जहाँ दो महीने से ग्रासरूट पर फील्डिंग जमाने में जुटी है वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ कांग्रेस के लड़ाकों को भोपाल बंगले पर तलब करते है।वहीं फोटो सेशन होता है और बयान जारी कर दिया जाता है कि बीजेपी केवल एक सीट जीतेगी।सवाल यह है कि  भोपाल में बैठकर कमलनाथ कैसे उस सीएम और पार्टी से लड़ेंगे जो हमेशा ही इलेक्शन मोड़ में रहते है।

इसलिए मप्र का संकट तो फ़िलहाल कांग्रेस के लिए कमलनाथ का कल्चर ही बन गया है।

(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व टिप्पणीकार हैं।)