योगी का बड़ा फ़ैसला, सप्ताह में सिर्फ़ पाँच दिन खुलेंगे दफ़्तर और बाज़ार
अमिताभ बच्चन कोरोना पॉज़िटिव, अस्पताल में भर्ती
सदमे में शाहरुख़ की को-स्टार शिखा मल्होत्रा, सता रहा ये डर
सौम्या केसरवानी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
दो हिंदी फ़िल्म में अभिनय करने के बाद भी शिखा मल्होत्रा को लगता है कि कहीं उन्हें भी सुशान्त की तरह बाहर का रास्ता न दिखा दिया जाए। शाहरुख़ खान की फ़िल्म फ़ैन और तापसी की रनिंग शादी में शिखा काम कर चुकी हैं, लेकिन उनकी फ़िल्म कांचली को ओटीटी प्लैट्फ़ॉर्म पर रीलीज़ नहीं किया जा रहा है। इस बात से शिखा में डर बैठ गया है।
बॉलीवुड में अपनी खास जगह बनाने वाली एक्ट्रेस शिखा मल्होत्रा ने एक अलग पहचान बनाई है। वो उस समय कोरोना से लड़ रहे लोगों की मदद के लिए काम कर रही हैं, वो मुंबई के एक अस्पताल में वॉलनटिअर के रूप में 3 महीने से लगी हुई हैं। लेकिन इन सबके बीच उनके मन में एक अलग सा भय सता रहा है, बॉलीवुड में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से उन्हें अपने डूबते करियर का डर सताने लगा है।
नेपोटिज्म के मुद्दे को लेकर इंडस्ट्री का माहौल गर्माया हुआ है। और यह मुद्दा आज का नही बल्कि वर्षो से चली आ रही एक प्रथा है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी चलाया जा रहा है। सुशांत जैसे न जाने कितने लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं।
शिखा मल्होत्रा ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने अंदर के डर का खुलासा करते हुए बताया है कि, फ़िल्म ‘कांचली लाइफ इन ए स्लो’ में कैरेक्टर आर्टिस्ट का रोल पाने के लिए करीब 6 साल की मेहनत की, फिल्म तो मिल गई, लेकिन रिलीज होने के लिए थिएटर नहीं मिला।
सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर शिखा मल्होत्रा ने कहा, ‘जब सुशांत जैसे सुपरस्टार के साथ जब पक्षपात हो सकता है, उनके सामने को तो मैं बहुत छोटी ऐक्ट्रेस हूं, सुशांत की मौत बाद मैं डरी हुई हूं, जब भी मैं इस बारे में सोचती हूं मुझे नींद नहीं आती है, मेरे पैरंट्स भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बहुत डरे हुए हैं।’
ऐक्ट्रेस ने कहा, ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म वाले मेरी फिल्म को रिलीज होने से मना कर देते हैं, आप मेरी फिल्म को रिलीज तो करो, यदि ऑडियंस फिल्म देखने के बाद बोरियत महसूस करती है और मुझसे कहती है कि तुम नर्स ही ठीक है तो मैं मान लूंगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म वाले तय नहीं कर सकते हैं कि फिल्म चलेगी या नहीं।’
शिखा मल्होत्रा ने आगे कहा, ‘चार महीने से अपने घर का किराया नहीं दिया है, मुझे लेकर अगर किसी छोटे डायरेक्टर ने सब दांव पर लगाकर अगर फिल्म बनाई है, तो हमें जनता के सामने तो जाने दो। मेरी फिल्म को रिलीज करने के लिए मैंने कई बड़े डायरेक्टर्स, ऐक्टर्स को कहा लेकिन किसी की तरफ से कोई रेस्पॉन्स नहीं मिला।’
WHO ने किया भारत का गुणगान, कही ये बातें
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि, अभी भी संभव है कि कोरोनावायरस को काबू में किया जा सकता है। पिछले 6 हफ्तों में कोरोना के मामले दोगुने होने के बावजूद इसपर काबू किया जा सकता है। WHO के प्रमुख टेडरोस अधानोम घेब्रेसस ने कहा कि इटली, स्पेन, साउथ कोरिया और भारत के सबसे बड़े स्लम एरिया ने दिखाया कि कोरोना वायरस कितना खतरनाक था, लेकिन कड़े एक्शन के साथ इसपर काबू किया गया।
WHO प्रमुख ने कहा कि, पिछले 6 हफ्तों में कोरोना के मामले दोगुने से ज्यादा हुए हैं। कई उदाहरण ऐसे भी हैं, जिनमें देखा गया कि भले ही यह वायरस तेजी से फैला हो लेकिन फिर भी इसपर काबू पाया गया है। भारत में मुंबई का धारावी काफी आबादी वाला इलाका है, वहां टेस्टिंग, ट्रेसिंग, आइसोलेशन और इलाज के दम पर कोरोनावायरस की चेन ब्रेक करने में कामयाबी मिली है।
भारत समेत दुनियाभर के 180 से ज्यादा देशों में कोरोनावायरस का खौफ है, अभी तक 1.22 करोड़ से ज्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। COVID-19 5.5 लाख से ज्यादा मरीजों की जिंदगी छीन चुका है, भारत में भी लगभग हर रोज कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 8 लाख के आँकड़े को पार कर गई है। पिछले 24 घंटों में कोरोना के 27 हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए हैं, एक दिन में सामने आने वाले कोरोना मरीजों की यह अभी तक की सबसे बड़ी संख्या है।
Vikas Dubey Encounter: अखिलेश के इस बयान से टेन्शन में सरकार
सौम्या केसरवानी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
उत्तर प्रदेश के अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर की अचानक खबर से हर जगह तरह-तरह के सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इसी के साथ ही यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य की योगी सरकार पर इस एनकाउंटर को लेकर आरोप लगाए हैं।
अखिलेश यादव ने एनकाउंटर की खबर सामने आने के बाद कहा कि, यह एनकाउंटर सरकार को बचाने के लिए किया गया है। अखिलेश ने ट्वीट किया कि, ‘दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गई है।’
अखिलेश यादव ने कल भी विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद भी योगी सरकार पर सवाल उठाया था, उन्होंने विकास दुबे की गिरफ्तारी को सरेंडर होने का शक जताया था। उन्होंने ट्वीट किया था कि, ‘खबर आ रही है कि ‘कानपुर-काण्ड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है। अगर ये सच है तो सरकार साफ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ़्तारी। साथ ही उसके मोबाइल की CDR सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके।’
अखिलेश यादव ने आगे कहा था कि, ‘चार राज्यों की सीमाएं पार कर, लॉकडाउन के समय की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर कुख्यात अपराधी छह दिनों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा, इसके पीछे माफिया, पुलिस और सत्ता का गठजोड़ भी रहा होगा।’
अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि कानपुर की घटना ने यूपी की बीजेपी सरकार का चोला भी उतार दिया है और मुखौटा भी, इस घटना ने पुलिस बल के खुफिया तंत्र की भी पोल खोल दी है।
पॉज़िटिव लक्षण होने के बावजूद टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव क्यों?
सौम्या केसरवानी | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
हर रोज़ भारत में कोविड-19 मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, कुछ दिनों से हर रोज़ बीस हजार से ज्यादा मामले आ रहे हैं, इसी बीच एम्स के एक डॉक्टर ने अपना अनुभव बताया है कि, एक संक्रमित मरीज की रिपोर्ट चार बार नेगेटिव आने के बाद एक रिपोर्ट पॉजिटिव आयी, जबकि हर रिपोर्ट के समय मरीज में कोरोना लक्षण दिखाई दे रहे थे।
एम्स के डॉ. विजय गुर्जर ने अपने ट्वीट में बताया कि, एक 80 साल की महिला बुजुर्ग के एम्स में कोरोना के लक्षणों को देखते हुए भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी चार बार जांच हुई जिसमें उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई, लेकिन लक्षणों को देख कर डॉक्टर यह मान रहे थे कि कोरोना संक्रमण निश्चित है, इसके बाद डॉक्टरों ने एंटीबॉडी टेस्ट कराया जिसमें उस बुजुर्ग महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गयी।
इस पूरे घटना क्रम से कई शंकाएं पैदा हुई, पहला तो यह कि पहले चार टेस्ट की रिपोर्ट गलत कैसे आई थी, कहीं वायरस खुद को म्यूटेट तो नहीं कर रहा है या फिर क्या हमें टेस्ट की प्रक्रिया को ही बदलना चाहिए, ये चार टेस्ट PT-PCR हैं।
PT-PCR टेस्ट के बारे में शुरू से कहा जा रहा है कि, जरूरी नहीं कि इसमें एक बार में ही टेस्ट का पता चल सके, इसमें सबसे अहम यह है कि नमूने में वायरस की मौजूदगी जरूर हो, यानी यह संभावना भी होती है कि संक्रमित मरीज की रिपोर्ट नेगेटिव हो, लेकिन डॉ. गुर्जर ने कहा कि, लगातार चार रिपोर्ट का नेगेटिव आना हैरान करता है।
एंटीबॉडी टेस्ट के साथ समय की संवेदनशीलता है, इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि मरीज का नमूना उसी समय लिया जाना जरूरी है जब उसके शरीर में पर्याप्त एंटीबॉडी बन चुके हैं जिससे वे नमूने में पाए जा सकें, इसमें 6-7 दिन का समय लगता है. क्योंकि आमतौर पर इतने समय में एंटीबॉडी बनने लगते हैं और 6 से 8 सप्ताह तक बनते रहते हैं, नमूने लेते समय यह तय करना होता है कि क्या संक्रमण को 5-7 दिन का समय हो चुका है या नहीं।
केवल टेस्ट के भरोसे ही कोविड-19 का इलाज नहीं हो सकता. इस वायरस का वैसे तो इलाज अभी निकला ही नहीं है, बस डॉक्टर को यह सुनिश्चित करना होता है कि मरीज का इम्यून सिस्टम कमजोर न हो और उसके सपोर्टिव ट्रीटमेंट में कमी न हो जिससे उसका शरीर वायरस से लड़ सके और बीमारी से उबर सके।
महाकाल मंदिर में चिल्लाने लगा विकास, “मैं हूँ यूपी का मोस्ट वांटेड”
बलिया: आख़िर किस दबाव में पीसीएस अधिकारी ने किया आत्महत्या, सकते में पुलिस अधिकारी
ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
बलिया | यूपी के बलिया जिले में तैनात एक महिला पीसीएस अफसर मणि मंजरी राय ने कल देर रात कोतवाली क्षेत्र स्थित अपने आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। वे महिला आवास विकास कॉलोनी में रहती थी।
पुलिस को मौके से शव के पास सुसाइड नोट बरामद हुआ है। वहीं, उसके मामा का आरोप है कि अधिकारी और ठेकेदार मंजरी पर बिना काम किए पेमेंट करने का दबाव बना रहे थे। मणि मंजरी राय गाजीपुर जिले के थाना भावरकोल की रहने वाली थीं। उनकी 2 साल पहले ही मनिया नगर पंचायत में तैनाती हुई थी, मंजरी 2016-17 बैच की पीसीएस अफसर थीं।
पुलिस का कहना है कि, अधिशासी अधिकारी ने फांसी क्यों लगाई, इसकी वजह का पता नहीं चल सका है। मामले की जांच की जा रही है और सबूतों को इकट्ठा किया जा रहा है।
शव के पास मिले सुसाइड नोट में लिखा है कि, “मैं दिल्ली-मुंबई से बचकर बलिया में चली आई, लेकिन, यहां मुझे षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। इससे मैं काफी दुखी और तनाव में हूं, मेरे पास अब आत्महत्या करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है।”
महिला अफसर के पिता का आरोप है कि, उन्हें बेटी के कमरे में पुलिस ने जाने नहीं दिया गया, सिर्फ शव दिखाया गया है, पुलिस भले ही इसे आत्महत्या कहे, लेकिन उसकी हत्या करने के बाद शव को पंखे से लटकाया गया है।
पाकिस्तान में इस वजह से फँसे 500 NORI वीज़ा धारक, लगा रहे भारत सरकार से गुहार
ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
किसी काम से NORI वीज़ा पर पाकिस्तान गए लोग लॉकडाउन के चलते अब वो वहां फंस गए हैं। NORI वीज़ा का मतलब होता है ‘नो आब्जेक्शन टू रिटर्न टू इंडिया’। ये वीज़ा भारत ऐसे पाकिस्तानियों को जारी करता है, जिन्होंने किसी भारतीय नागरिक से शादी की हो और भारत में लॉन्ग टर्म वीज़ा पर रह रहे हों। वे जब संबंधियों से मुलाक़ात या किसी और काम के लिए पाकिस्तान जाते हैं, तो उन्हें NORI वीज़ा दिया जाता है।
पाकिस्तान की अफ्शां सैफ़ ने भारतीय नागरिक आहिल सैफ़ से शादी की, वे आठ साल से भारत में रह रही थीं। फ़रीदाबाद FRRO से NORI वीज़ा मिलने के बाद वे अपने मायके कराची गईं, लॉकडाउन के चलते बाद विदेशी यात्रा प्रतिबंधों के कारण वे वहीं फंसकर रह गई हैं।
अफ्शां सैफ़ के साथ उनके दो छोटे बच्चे हैं जो जन्म के आधार पर भारत के नागरिक हैं और उनके पास भारतीय पासपोर्ट हैं, पर वे भी मां के साथ वहीं फंसे हैं, इन्होंने एक वीडियो जारी कर भारत सरकार से लौटने देने की गुहार लगाई है।
ऐसे क़रीब 500 लोग हैं, जो इस तरह पाकिस्तान गए और वहां फंस गए हैं। बहुतों की NORI वीज़ा की अवधि भी ख़त्म हो रही है जो अमूमन 45 दिनों की होती है, इसी दौरान वे लौटना होता है, कई महीनों से ये लोग इसे बढ़ाने की भी गुहार लगा रहे हैं ताकि लौटते समय दिक़्क़त न हो।
पाकिस्तान में फंसे क़रीब 750 भारतीय नागरिकों को हाल ही में वाघा अटारी बॉर्डर के जरिए भारत वापस लाया गया है। NORI वीज़ा वालों की गुहार है कि भारत सरकार जल्द ही उन्हें भी वापिस आने दे। बहुतों के पैसे ख़त्म हो गए हैं और कुछ लोग एक रिश्तेदार से दूसरे रिश्तेदार के घर सिर छिपाने को मजबूर हो रहे हैं।
पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग के क़रीबी सूत्रों का कहना है कि पहले सभी भारतीय नागरिकों को वापिस निकालना प्राथमिकता है। 748 भारतीय वापस लौट चुके हैं, 114 भारतीय 9 जुलाई को लौट रहे हैं। इनके अलावा 70-80 और भारतीय नागरिक पाकिस्तान में और हैं, जिनकी वापसी की कोशिश की जा रही है।

















