उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2017 का परिणाम आज शाम चार बजे तक वेबसाइट www.upbasiceduboard.gov.in पर अपलोड होने की संभावना है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की टीम शुक्रवार सुबह लखनऊ रवाना हो गई, ताकि रिजल्ट से जुड़ी औपचारिकता पूरी करते हुए वेबसाइट पर जारी किया जा सके।
परीक्षा का परिणाम वैसे तो 30 नवम्बर तक ही जारी होना था, लेकिन इसमें काफी समय लग गया। जानकारी के लिए बता दें कि प्राथमिक और उच्च प्रथमिक स्तर की परीक्षा के कई उम्मीदवारों ने प्रश्नों के उत्तर के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं, जिसके चलते नतीजों की घोषणा होने में समय लग रहा है।
विशेष विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर प्राथमिक स्तर के तीन प्रश्नों के चारों विकल्प गलत होने पर उन्हें हल करने वाले सभी अभ्यर्थियों को एक-एक नंबर देने का निर्णय लिया गया है, जबकि अंग्रेजी के एक प्रश्न के उत्तर में संशोधन किया गया है।
राज्य में शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश बेसिक एजुकेशन बोर्ड परीक्षा का आयोजन कराता है। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद से राज्य में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हैं। शिक्षामित्रों के लिए भी UPTET 2017 पास करना अनिवार्य है, शिक्षक पात्रता परीक्षा बीते 15 अक्टूबर को हुई थी।
15 अक्तूबर को प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल स्तर की परीक्षा क्रमश: दो पालियों सुबह 10 से 12.30 और 2.30 से 5 बजे तक हुई थी। पहली पाली में 349192 अभ्यर्थियों के लिए 570 व दूसरी पाली में 627568 अभ्यर्थियों के लिए 1064 केंद्र बनाये गए थे।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(आईएमएफ) के अनुसार वर्ष 2016 में भारत सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए लिया गया विमुद्रीकरण का फैसला फायदेमंद साबित हो सकता है। आईएमएफ संचार विभाग के उप प्रवक्ता विलियम मरे ने एक सम्मेलन में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को विमुद्रीकरण के फैसले का बेहद लाभ मिलेगा।
मरे ने आगे कहा कि शुरुआत में विमुद्रीकरण के फैसले से भारत की अर्थव्यवस्था में नकदी कमी के कारण निजी उपभोग, लघु उद्योग, और आर्थिक गतिविधियों को काफी समस्यायों का सामना करना पड़ा था। जिसके कारण, देश में नकदी से व्यापार करने वाले लोगों को काफी बाधाएं पैदा हुई थी, लेकिन यह बाधाएं कुछ समय के लिए थी।
बैंकिंग प्रणाली एवं डिजिटल भुगतान के अधिक प्रयोग से भारत की अर्थव्यवस्था में भ्रष्टाचार और जाली नोट की कमी आएगी। जिसके कारण, विमुद्रीकरण के फैसले का भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभावी तौरपर सकारात्मक असर नजर आएगा। वहीं आईएमएफ जनवरी में भारत के साथ दुनिया के अन्य देशों की विकास दर पर अपना अनुमान दुनिया के सामने पेश करने वाला हैं।
राजस्थान सरकार ने सरकारी विभागों को आदेश दिया है कि सभी लेटरपैड में जनसंघ अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर लगाई जाए। सरकार के इस आदेश के दायरे में सभी सरकारी विभाग, नगर निगम और बोर्ड आएंगे।
जारी किये सर्कुलर में लिखा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सही साइज की एक तस्वीर पहले से मौजूद लेटरपैड में लगाई जाए और भविष्य में छपने वाले लेटरपैड में इसे अनिवार्य रूप से छपवाया जाए।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पढ़ाई-लिखाई राजस्थान में हुई थी। राजस्थान सरकार ने इस सर्कुलर को सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, विभागों के सचिव अनुमंडल कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भेजा है। अधिकारियों ने कहा कि सभी विभाग अब से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर वाले नए लेटरपैड को छपवाऐं।
राजस्थान सरकार के संयुक्त सचिव शक्ति सिंह राठौड ने कहा कि ये आदेश कुछ ही दिन पहले पारित किया गया है और सभी विभाग अपनी स्टेशनरी छपवाएंगे जिसमें दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर होगी।
आज से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। इस सत्र के शुरू होने से ठीक पहले पीएम मोदी ने कहा कि संसद में सकारात्मक बहस की आशा करता हूँ। विपक्ष इस सत्र के दौरान जोरदार हंगामा कर सकता है।
बता दें कि विपक्ष सरकार को सत्र को देरी से चालू करने, नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दों पर घेर सकता है। इसके आलावा, विपक्ष किसान और रफाल विमान खरीदी के मुद्दे पर भी सरकार की संसद में आलोचना कर सकता है। इस शीतकालीन सत्र में सरकार को 40 बिल पेश कराने हैं। इसमें सबसे अहम तीन तलाक से जुड़ा बिल पास कराना होगा।
शीतकालीन सत्र के दौरान गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव के नतीजों पर भी बहस हो सकती है। पिछले दिनों गुजरात प्रचार के दौरान, पीएम मोदी द्वारा मनमोहन सिंह पर पाकिस्तान के साथ मिलकर गुजरात चुनाव में भाजपा को हराने की साजिश के आरोप पर सदन में जोरदार हंगामा हो सकता है और विपक्ष एक बार फिर पीएम मोदी से माफ़ी की मांग उठा सकता है। इससे पहले इस मुद्दे पर कांग्रेस ने पीएमओ को नोटिस दिया था।
मोदी ने आगे कहा कि आम तौरपर दिवाली के बाद ठंड बढ़ जाती है, लेकिन इस साल ग्लोबल वार्मिंग के कारण ऐसी ठंड नजर नहीं आ रही है। आगे उन्होंने कहा कि सदन में अच्छी, सकारात्मक बहस हो, जो देश के लिए अधिक कारगर साबित हो, ऑल पार्टी मीटिंग में यही बात हुई है। मैं आशा करता हूं कि सकारात्मक रुप से सदन चलेगा। वहीं कांग्रेस के विपक्ष नेता मलिक्कार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार को विपक्ष का सम्मान करना चाहिए। यह शीतकालीन सत्र 2017 से चालू होकर अगले साल 2018 तक चलेगा।
विश्व की संस्कृति और सभ्यता अलग-अलग काल खंड में पल्लवित पुष्पित एवं फलित भी हुई है, तो समय के कठिन और अमिट प्रभाव के कारण धूल धूसरित भी हुई है। प्रमाणिक रूप से हमने विश्व के इतिहास में यह देखा है कि यूनान, मिश्र व रोम की सभ्यता और संस्कृति पुरानी और प्रभावशाली होने के बावजूद थी, काल के दुष्चक्र के स्वरूप कुछ ऐसी नेस्तनाबूद हो गयीं कि इनका आज कोई नामोनिशान नहीं है।
यह सब होते हुए… विपरीत परिस्थितियों के इतिहास के बाद भी भारतीय संस्कृति आज भी न सिर्फ वजूद में हैं, बल्कि स्थापित भी। ऐसे में किसी शायर का यह कहना कुछ गलत और अतिशयोक्ति जैसा नहीं लगता :
यूनान, मिश्र रोमा सब मिट गए जहाँ से,
लेकिन अभी है बाकी, नामों निशां हमारा।
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी,
गोकि रहा है, दुष्मन, दौरे जहां हमारा।
साफ है कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति को मिटाने के लिए बार बार विदेशी हमले होते रहे हैं, लेकिन यह नहीं मिट पाई है, जबकि विश्व की महान सभ्यतायें और संस्कृतियां मिट चुकी है।
भारतीय संस्कृति के विकास में धर्म की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहाँ धर्म को विराट अर्थ में लिया गया है। भारतीय संस्कृति में पूर्वजों ने धर्म की व्याख्यायें की। इसी क्रम में उन्होने लिखा :
– यतोऽभ्युदयनिश्रेयस्सिद्धि स धर्मः।
अर्थात जिससे मानव का अभ्युदय और उसका निःश्रेयस दोनों सिद्ध हो सके वही धर्म है। अभ्युदय का अर्थ सांसारिक उन्नति से है। भौतिक आमोद-प्रमोद, भोजन-पान, निवास एवं परिधान, रहन-सहन के साधन जितने ही ज्यादा हों, सुलभ हों… उतने ही वे उन्नति के प्रतिमान माने गये हैं। जैसे-जैसे मानव घर में रहने लगा, वह सभ्य एवं सुसंस्कृत माना जाने लगा, अन्यथा मानव को असभ्य एवं जंगली ही कहा जाता था। यहां कहने का आशय है कि भवन निवेश मानव सभ्यता एवं संस्कृति के निर्माण में एक प्रमुख साधन है। रहने के लिए झोपङी है या विशाल भवन, यह उसकी आर्थिक उन्नति का परिचायक है।
भारतीय संस्कृति का अश्वमेघ यज्ञ
भारतीय संस्कृति का मूलाधार देव तत्व है। यहाँ कोई भी कार्य बिना देवत्व के प्रारम्भ नहीं किया गया, कोई भी शास्त्र बिना देवत्व के पठनीय नहीं है। इसमें कोई भी कला बिना देवत्व के ग्रहण करने का पात्र नहीं बनाती। जैसे… नृत्य कला में नटराज शिव, संगीत में नाद ब्रह्म, आलेख में जगन्नाथ के पट चित्र तथा वास्तु में वास्तु पुरुष (वास्तु देवता)। यह संस्कृति सर्वत्र देव भावना से बंधी हुई है। कह सकते है कि यही भारतीय स्थापत्य की विशेषता है। हमने कला और विज्ञान को अध्यात्म एवं दर्शन से अलग नहीं रखा। हमारी मान्यता के अनुसार कला का जन्म मनोरंजन से नहीं बल्कि धर्म और दर्शन से हुआ है। जो विज्ञान और कला आध्यात्म से शून्य तथा दर्शन से अनुप्राणित नहीं है वह कला एवं विज्ञान किसी सूखी लकड़ी की तरह की तरह जला देने, त्याग देने योग्य है। शुष्क विज्ञान कभी भी भारतीय संस्कृति में ग्राह्य नहीं रहा।
भारतीय संस्कृति की विशेषता पर जब विचार करते हैं तो यह देखते हैं कि इसकी विशेषता एक रूपता नहीं है, बल्कि इसकी विविधता है। इस विविधता में भी निरालापन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। भारतीय संस्कृति की विशिष्ट विशेषताओं में : ‘आस्तिक भावना’, ‘समन्वयवादी दृष्टिकोण’, ‘विभिन्नता में एकता’, ‘प्राचीनता’, ‘उदारता की भावना’… मूल में मिलती हैं।
भारतीय संस्कृति में आस्तिकता की भावना प्रबल रूप से है। यहाँ के मनीषियों, मुनियों और महात्माओं ने भूत, वर्तमान और भविष्य को अपनी अपार आस्था और विश्वास के आधार पर हाथ पर रखे हुए आँवले के समान अच्छी तरह से देखा और समझा है।
समन्वय की भावना हमारी भारतीय संस्कृति की अनुपम विशेषता है। समदर्षी होना भारतीयों को बहुत रोचक लगता है। यही कारण है कि हमारे भारत मे विभिन्न धर्म, जाति और दर्शन विचारधारा का खुला प्रवेश है। धर्म निरपेक्षता हमारे संविधान की प्रमुख विशेषता है। विभिन्न धर्मों, जातियों और विचारधाराओं के बावजूद भी भारतीयता का मूल स्वर कभी भी विखंडित नहीं होता है।अर्थात् इसमें से दया, उदारता और समरसता का स्रोत कभी नहीं सूखता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति की विभिन्नता में इसका ही प्रतिपादन करती है।
भारतीय संस्कृति के इन तमाम यशस्व गान के साथ ही यह भी स्थापित सत्य है कि प्राचीनकाल में विदेशी और आतताइयों द्वारा अगर भारतीय संस्कृति को नष्ट किये जाने के प्रयास होते रहे, तो आज यही खतरा कुछ दूसरी तरह से हमारे सामने है, जो शायद बड़ी चुनौती है। आज यह खतरा स्मृतिभंश के रूप में हमारे बीच है। भारतीय समाज या तो अपनी पुरातन संस्कृति की विशेषताओं को भूलता जा रहा है, या तो एक योजना के तहत उसे भूल जाने पर मजबूर किया जाता रहा है। योजनाबद्ध और संगठित तौर पर ऐसा होने के संकेत इस बात से मिलते हैं कि आजादी के बाद सत्ताओं द्वारा पोषित तथाकथित इतिहासकारों के लेकर सामाजिक, साहित्यिक, कला, विज्ञान, सामाजिक विषयों आदि के क्षेत्र में लगातार नकारात्मक और तथ्यविहीन लेखन किये जाते रहे जिसमें भारतीय पुरातन संस्कृति-सभ्यता को गर्व करने की बजाय… कुरीति, कपोलकल्पित, अवैज्ञानिक आदि कहते हुए शर्म का विषय जैसा चित्रित किये जाने के प्रयास होते रहे। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह रही.. कि यह सब होते हुए सत्ताएं देखती ही नहीं रहीं, बल्कि ऐसे दुष्प्रचारों को स्थापित करने में सहयोगी भी बनी रहीं।
लेकिन कहते हैं न, समय एक सा नहीं रहता। भारतीय समाज के राष्ट्रहितैषी मनीषियों और चिंतकों ने, भारतीय संस्कृति और दर्शन के ज्ञान-विज्ञान-कला-धर्म की पुरातन वैदिक परम्परा का अनुसरण करते हुये, नकारात्मकता के साथ प्रचारित और शर्म के रूप में स्थापित करने के इन प्रयासों के सामने… संवाद-विमर्श के एक बड़े और सार्थक आयोजन का निर्णय लिया और उसके लिये पुरातन की गौरवशाली स्मृति से सनातन धर्म के प्रथम तीर्थस्थल, देव भूमि नैमिषारण्य चुनाव किया।
भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण और उसे स्मृतिभंश के अभिशाप से बचाने के लिये नैमिषारण्य में बीती 7 व 8 दिसम्बर 2017 को हुआ ‘नैमिषेय शँखनाथ’ केवल किसी कार्यक्रम का दो दिवसीय आयोजन ही नहीं, बल्कि श्री बाबा योगेंद्र, अमीर चंद जी, सोनल मान सिंह जी, वासिफुद्दीन डागर जी, डॉ चन्द्र प्रकाश द्विवेदी जी, अनूप जलोटा जी, आदिनाथ मंगेशकर जी (लता मंगेशकर जी के भतीजे), मालिनी अवस्थी जी, वासुदेव कामत जी, जनार्दन गोस्वामी जी, वामन केंद्रे जी, शेखर सेन जी, सचिदानंद जोशी जी, कपिल तिवारी जी, मनोज श्रीवास्तव जी सहित ऐसे तमाम ज्ञानी पुरुषों का भारत राष्ट्र और भारतीय सभ्यता-संस्कृति के प्रति उत्तरदायित्व का व्रत है… जिसे विद्वतजनों-विचारकों ने एक सतत और दीर्घकालिक सांस्कृतिक यज्ञ के रूप में लिया है।
‘संस्कृति नैमिषेय’… उस भारतीय सभ्यता-संस्कृति-दर्शन के अश्वमेध यज्ञ का प्रारंभ है जिसका अंतिम और एक मात्र उद्देश्य हमें हमारी संस्कृति के प्रति गर्व के भाव में लाना है। इसमें सहभागिता… एक राष्ट्र और संस्कृति के प्रति हमारे नागरिक दायित्वों की पूर्ति होगी जिसकी जिम्मेदारी हम सभी की होनी चाहिए।
केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी विभिन्न अधिसूचनाओं में आधार को विभिन्न योजनाओं जैसे छात्रों द्वारा दी जानेवाली परीक्षा, छात्रवृत्ति, अंतिम संस्कार और एचआईवी मरीजों के इलाज के लिए अनिवार्य बनाने के खिलाफ अंतरिम राहत की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई की।
इस सुनवाई से पहले केंद्र सरकार ने बैंक खातों समेत अन्य कई योजनाओं के लिए आधार कार्ड लिंक करने की डेडलाइन को 31 मार्च तक बढ़ा दिया है। फिलहाल मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक करने की तारीख 6 फरवरी तक ही रखी थी, अब वह बढ़ गयी है।
सरकार ने अभी तक आधार को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने को लेकर कुल 139 अधिसूचनाएं जारी की है, जिसमें इसे मनरेगा से लेकर पेंशन योजना और प्रोविडेंड फंड से लेकर प्रधानमंत्री जन धन योजना तक को जोड़ने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अगुवाई में पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में राहत की मांग को लेकर गुरुवार को करीब साढ़े तीन घंटों तक सुनवाई करने के बाद अपना फैसला शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रखा है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने राम सेतु के काल को लेकर अमेरिकी वैज्ञानिकों के दावों पर असहमति जताई है। भारतीय प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं भूगर्भशास्त्री डॉ. राजिव निगम ने रामसेतु विवाद पर कहा कि अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा किये गए दावों पर विस्तृत शोध की जरुरत है, इसलिए यह कह पाना मुश्किल है कि सेतु कितना पुराना है।
डॉ निगम के अनुसार रामसेतु के निर्माण कार्य में लगा रेत 4000 वर्ष पुराना है, जबकि अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि रामसेतु के पत्थर 7000 वर्ष पुराने हैं। उन्होंने कहा कि यह कतई तर्क संगत नहीं लगता कि सेतु का निर्माण बिना रेत के हुआ हो। ऐसा संभव नहीं लगता कि पत्थर पहले आये हों और रेत बादमें।
गौरतलब है कि अमेरिकी पुरातत्व वैज्ञानिकों ने डिस्कवरी के माध्यम से बताया था कि रामसेतु के पत्थर 7000 वर्ष पुराने हैं और वाहन बिछी रेत 4000 वर्ष पुरानी है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा था कि यह सेतु मानवनिर्मित है और इसमें लगे पत्थर बाहर से लाये गए हैं। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बताया कि सेतु निर्माण में जो चुना पत्थर इस्तेमाल किये गए हैं वह उस क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध नहीं थे, उन्हें कहीं और से लाया गया होगा। डॉ निगम ने बताया कि जहाँ तक तैरने वाले पत्थर हैं वह मुख्य रूप से प्यूमिक पत्थर होते हैं, लेकिन वहां के पत्थरों की अबतक जाँच नहीं हो पाई है।
हालाँकि अबतक रामसेतु पर कोई सही तर्क नहीं निकल पाया है। इसी बात को मध्यनजर रखते हुए डॉ राजिव निगम ने भारत सरकार से मांग की है कि भारतीय वैज्ञानिकों को रामसेतु को शोध करने में मदद की जाए।
भाजपा ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 50 से अधिक सीटों के जीतने का लक्ष्य रखा था, मगर पार्टी के आतंरिक सर्वे में इसकी संभावना बेहद कम जताई गई है। जानकारी के मुताबिक़, सही समय पर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम न घोषित होने की वजह से ऐसा हुआ। उनके अनुसार अगर पार्टी ने टिकट के वितरण के पहले नेतृत्व का मुद्दा सुलझा लिया होता, तो पार्टी निश्चित तौर पर 50 से ज्यादा सीटें जीतती।
बता दें कि इसी स्थिति से निबटने के लिए भाजपा ने 15 दिसंबर को एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्त्ता एग्जिट पोल्स के आधार पर रोडमैप तैयार करेंगे। भाजपा नेता सतपाल सटटी ने इस बैठक की पुष्टि की है, लेकिन कहा कि इस बैठक का कोई एजेंडा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता मतगणना के दिन को लेकर उम्मीदवारों से बात करना चाहते हैं।
हमीरपुर से भाजपा उम्मीदवार नरिंदर ठाकुर का कहना है कि अगर प्रेम कुमार धूमल को सीएम कैंडिडेट नहीं बनाया होता, तो भाजपा की प्रदेश में बड़ी हार होती। धूमल इस बार चुनाव सुजानपुर से लड़ रहे हैं और अपनी हमीरपुर सीट ठाकुर के लिए छोड़ दी थी। हिमाचल प्रदेश के दो बड़े जिलों में कांगड़ा और मंडी में भाजपा को इस बार के चुनाव में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। यह हिमाचल प्रदेश की दो सबसे बड़े जिले हैं और इनमें कुल 15 विधानसभा सीटें हैं।