एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
सेंसर बोर्ड की कमेटी ने फिल्म पद्मावती को ख़ारिज कर दिया है। शुरू से ही फिल्म पद्मावती को लेकर राजपूत समाज में द्वंद की स्थिति है और इस फिल्म को लेकर कई जगह प्रदर्शन भी हुए हैं।
इसके बाद फिल्म रिलीज़ को लेकर चल रहे विवाद के बीच सेंसर बोर्ड ने एक कमेटी बनाई थी। जिसमें राजपूत समाज और राजस्थान के राजघराने के लोग थे, लेकिन इस कमेटी ने फिल्म पद्मावती को देखने के बाद इसे नकार कर दिया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड ने फ़िल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले विशेषज्ञों की एक पैनल को फिल्म दिखाई। सूत्रों के मुताबिक पैनल को पद्मावती फिल्म में कई चीज़ों को लेकर ऐतराज़ है।
फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज़ होनी थी, मगर फिल्म के विरोध के चलते रिलीज़ नही हुई। इस फिल्म में दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ फिल्म की शूटिंग के दौरान मारपीट भी हुई थी। इस फिल्म को लेकर राजपूत समाज का कहना है कि इसमें पद्मावती को सही रूप में नहीं दिखाया गया है।
फिल्म पद्मावती को सेंसर बोर्ड की कमेटी ने भी किया ख़ारिज
गुजरात: पैसे वाले मंत्रालय को लेकर अड़े नितिन पटेल, मान-मनौव्वल जारी
सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
गुजरात में भाजपा ने सरकार तो बना ली है, लेकिन अंतर्कलह अभी भी जस का तस बना हुआ है। ख़बर के अनुसार, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने अब तक अपना कार्यभार नहीं संभाला है, क्योंकि वे तीन अहम मंत्रालय नहीं मिलने से नाराज़ हैं। पिछली सरकार में उनके पास 3 मंत्रालय थे वित्त, शहरी विकास, उद्योग और राजस्व, लेकिन इस बार वित्त मंत्रालय सौरभ पटेल को दे दिया गया है।
नितिन पटेल को मनाने खुद मुख्यमंत्री विजय रूपाणी गए थे, जिसके बाद वे 5 बजे शुरू होने वाली बैठक में रात नौ बजे पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, नितिन पटेल ने कहा है कि उन्हें वित्त मंत्रालय दिया जाये, अगर उन्हें वित्त मंत्रालय नहीं मिलेगा, तो वे अपने पद से इस्तीफ़ा भी दे सकते हैं।
नितिन पटेल को वित्त मंत्रालय नहीं दिया गया है, क्योंकि वित्त मंत्रालय इस बार सौरभ पटेल को दे दिया गया है, इसी से नितिन नाराज हैं। वित्त मंत्रालय पिछली आनंदीबेन पटेल और विजय रुपाणी की सरकार में नितिन पटेल के पास था। गुजरात चुनाव में बीजेपी ने 99 सीट जीती थी और कांग्रेस को 80 सीटें मिली थी, जीत के बाद बीजेपी ने विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री और नितिन पटेल को उप मुख्यमंत्री के रूप में चुना था।
आतंकी हाफ़िज़ संग दिखा फ़िलिस्तीनी राजदूत, बिगड़ सकते हैं भारत-फ़िलिस्तीन के रिश्ते!
राजेश सोनी । Navpravah.com
आतंकवादी हाफिज सईद द्वारा इस्लामाबाद में आयोजित एक रैली में फिलिस्तीनी राजदूत वालिद अबु ने हिस्सा लिया था। फिलिस्तीनी राजदूत के आतंकी हाफिज सईद की रैली में हिस्सा लेने का भारत ने कड़ा विरोध जताया है। फिलिस्तीन के इस कदम के बाद भारत और फिलिस्तीन के बीच राजनयिक संबंध बिगड़ सकते है।
भारत ने फिलिस्तीनी राजदूत की आतंकी सईद के रैली में मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति जताते है हुए कहा कि वह इस मुद्दे को फिलिस्तीन के सामने सख्ती से उठाएगा। इस्लामाबाद में फिलिस्तीनी राजदूत वालिद अबु अली ने पाकिस्तान के रावलपिंडी में दिफा-ए-पाकिस्तान काउंसिल की ओर से आयोजित एक विशाल रैली में हिस्सा लिया। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमें खबर मिली है कि आतंकी हाफिज सईद द्वारा आयोजित रैली में फ़िलिस्तीनी राजदूत और अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। आगे उन्होंने कहा कि हम दिल्ली स्थित फिलिस्तीनी राजदूत के सामने इस मुद्दे को लेकर भारत का विरोध जताएंगे।
इस विशाल रैली का आयोजन शुक्रवार को दिफ़ा-ए-पाकिस्तान द्वारा रावलपिंडी के लियाकत बाग में किया था। आतंकी हाफिज अगले साल होने वाले पाकिस्तान के आम चुनाव में लड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए उसने इस्लामाबाद पार्टी का दफ्तर भी खोला है। पाकिस्तान सरकार कोर्ट से हाफिज के आतंकी संगठन को राजनीतिक पार्टी का दर्जा देने का विरोध जता चुकी है।
कुछ समय पहले भारत ने येरूसलम के मुद्दे पर अपने मित्र देश इजराइल और अमेरिका के खिलाफ सयुंक्त राष्ट्र में वोट किया था। फ़िलिस्तीन जैसे देशों का येरुसलम के मुद्दों पर साथ दिया था। अब भविष्य में भारत को फ़िलिस्तीन का किसी भी मुद्दे पर साथ देने के पहले एक बार जरूर विचार करना होगा।
गौरतलब है कि आतंकी हाफिज मुंबई के 26/11 हमलों का मास्टरमाइंड है। सईद को अमेरिका सहित सयुंक्त राष्ट्र भी अंतराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर चुका है।
मदरसे का मैनेजर करता था लड़कियों का यौन शोषण, छापा मार पुलिस ने 51 लड़कियों को छुड़ाया
सुनील यादव । Navpravah.com
यूपी की राजधानी लखनऊ से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां कल देर रात पुलिस ने एक मदरसे में छापेमारी कर 51 लड़कियों को बाहर निकाला। इन लड़कियों ने पुलिस को बताया कि मदरसे का मैनेजर इनके साथ यौन शोषण करता था। इसके बाद पुलिस ने मदरसे के मैनेजर को हिरासत में ले लिया है।
कल यूपी पुलिस को राजधानी लखनऊ के सआदतगंज इलाके के एक मदरसे में हो रही यौन शोषण की खबर मिली थी। जिसपर कार्रवाई करते हुए यूपी पुलिस ने देर रात सआदतगंज थाना क्षेत्र के यासीनगंज इलाके में स्थित जामिया खदीजातुल लीलनवात मदरसे पर छापा मारा, जहां से पुलिस टीम ने 51 लड़कियों को छुड़ाया।
लखनऊ के एसएसपी ने बताया कि पुलिस की ज्वाइंट टीम ने यासीनगंज स्थित मदरसे पर छापा मारा, जहां से 51 लड़कियों को छुड़ाया गया है। लड़कियों ने मदरसे के मैनेजर पर यौन शोषण का आरोप लगाया, जिसके बाद उस मैनेजर पर एफआईआर दर्ज कर हिरासत में ले लिया गया है। अब हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह मदरसा रजिस्टर्ड था या नहीं?
बता दें कि मदरसे में कैद लड़कियों ने छत से पर्ची फेंककर लोगों से मदद की गुहार लगाई। जिसके बाद इस मामले की शिकायत पुलिस को मिल पाई। वहीं एक पीड़िता ने संचालक मो.तैयब जिया पर लड़कियां सप्लाई करने का भी आरोप लगाया है। पुलिस के मुताबिक, मदरसे से बाहर आईं सभी लड़कियों का बयान ले लिया गया है। इस दौरान चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और डीपीओ को भी सूचित कर दिया गया है।
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स्पेशल रिपोर्ट: सिलसिलेवार तरीके से जानिए, क्या है ‘चारा घोटाला’ मामला
राजेश सोनी | Navpravah.com
27 जनवरी 1996 की सुबह बिहार की ओल्ड ब्रिटिश राज बिल्डिंग में स्थित बिहार के पशुपालन विभाग में अफरा-तफरी का माहौल था। चाईबासा के तत्कालीन कलेक्टर अमित खरे पशुपालन विभाग के बिलों की जांच कर रहे थे। जांच के दौरान एक बात ने उनका ध्यान उन बिलों की ओर खींचा। बिलों की जांच के दौरान उन्होंने पाया कि पशुपालन विभाग के ज्यादातर बिल एक ही धनराशि के थे। सभी बिलों की राशि 9 लाख 90 हजार थी और इस सभी बिलों की भुगतान एक ही सप्लायर को की गई थी। बिलों की राशि 10 लाख से कम इसीलिए थे, क्योंकि दस लाख से ज्यादा की राशि वाले बिलों को पास कराने के लिए प्रशासन से ज्यादा अनुमति लेनी पड़ती थी।
चाईबासा के कलेक्टर अमित खरे को इसी बात का शक हुआ और उन्होंने सीधे पशुपालन के विभाग में फ़ोन लगा दिया। खरे ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों से इस मामले में पूछताछ करनी चाही, तो उन्हें पता चला कि सभी अधिकारी और विभाग के कर्मचारी दफ्तर से गायब थे। इसके बाद कलेकटर खुद पशुपालन विभाग के दफ्तर पहुँच गए, वहां पहुँचते ही पशुपालन विभाग दफ्तर का नजारा देखकर वे हैरान रह गए। पशुपालन विभाग के दफ्तर में कलेक्टर अमित ने देखा कि वहां नकदी, नकली ट्रेजेडी बिल और बैंक ड्राफ्ट बिखरे पड़े थे।

बाद में इस मामले की पूरी सूचना जिला मजिस्ट्रेट को दी गई। जिला प्रशासन ने कार्यवाही करते हुए पशुपालन विभाग के दफ्तर को सील कर दिया और साथ ही चाईबासा ट्रेजेडी को भी पशुपालन विभाग के सभी बिलों के भुगतान करने से मना कर दिया। अकाउंटेंट जनरल दफ्तर और राज्य के वित्त विभाग से इस मामले की जांच करवाने के बाद अधिकारियों के पैरों तले से जमीन खिसक गई, जब उन्हें यह पता चला कि जितना पैसा चाईबासा खजाने से निकाला गया था, उतना तो इस विभाग के लिए पूरे राज्य का बजट तक नहीं था।
अब यह मामला बिहार पुलिस तक पहुंचा और पशुपालन विभाग के 100 से ज्यादा अफसरों, ठेकेदारों और सप्लायर्स को बिहार पुलिस द्वारा रातों-रात गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की पूछताछ के बाद अब पूरी तस्वीर साफ़ होने लगी थी। पशुपालन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत ने बिहार में बहुत बड़े घोटाले को अंजाम तक पहुँचाया और यह घोटाला था “चारा घोटाला।”
सीबीआई की चारा घोटाले जांच में भूमिका –
चारा घोटाले की जांच अब बिहार पुलिस से ले ली गई थी और सीबीआई के हाथों में जांच सौंप दी गई थी। सीबीआई ने स्वतंत्र तरीके से इस घोटाले की जांच करनी शुरू कर दी थी। सीबीआई ने इस घोटाले में शामिल गवाहों, दोषियों की रहस्यमय मौत से पर्दा उठाया और किस तरह सीबीआई के हाथ लालू प्रसाद यादव के गिरेबान तक पहुँच गए, आइये जानते हैं-
इस घोटाले के दौरान सूबे में जनता दल की सरकार थी। इस सरकार में लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री थे, लेकिन इस घोटाले के उजागर होने के बाद भाजपा, कांग्रेस और समता दल ने इस घोटाले की जांच सीबीआई के हाथों में सौंपने की मांग शुरू कर दी थी। जिसके चलते पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दायर की गई, याचिका को पटना उच्च न्यायालय ने मंजूर कर लिया और 11 मार्च 1996 में उच्च न्यायालय ने इस घोटाले की सीबीआई जांच करने की इजाजत दे दी। पटना उच्च न्यायालय के इस फैसले के विरोध में बिहार सरकार ने देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। बाद में बिहार सरकार की इस याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया था। आख़िरकार 27 मार्च 1996 को सीबीआई ने पूरे चारा घोटाले की जांच अपने हाथ में ले ली।
घोटाले से जुड़े गवाहों और दोषियों की हत्याओं का सिलसिला-
सीबीआई ने चाईबासा खजाने में हुए धोखाधड़ी के मामलों के ऊपर केस दर्ज कर लिया, बस इसके बाद ही इस मामले से जुड़े गवाहों और दोषियों की हत्याओं का सिलसिला जारी हो गया। इस साजिश का पहला शिकार बने लाला विश्व मोहन, जो रांची में सहायक निदेशक के पद पर पशु पालन विभाग में थे। 19 नवंबर 1996 में एक ट्रक ने उनको कुचल दिया। हालाँकि, लाला विश्व मोहन भी इस पूरे मामले में दोषी थे। लाला विश्व मोहन का कहना था कि उन्हें इस चारा घोटाले मामले में धोखेबाजी से फसाया जा रहा है। सीबीआई का कहना था कि लाला विश्व मोहन इस मामले में गवाह बने को भी तैयार थे। लाला विश्व मोहन की हत्या के 2 महीने पहले भी एक सरकारी गाड़ी में दोषियों को ले जाते वक़्त गुंडों द्वारा उन पर अंधाधुन्द गोलियां बरसाने का मामला भी सामने आया था, जिसमें उस गाड़ी में सवार सभी दोषियों की जान बाल-बाल बची थी। 20 नवंबर 1996 को ही इस घोटाले के एक और आरोपी डॉ. विरसा और राउ के ड्राइवर मनु मुंडा का अपहरण कर उनको मौत के घाट उतार दिया गया।
सीबीआई का कहना था कि मनु मुंडा इस केस के बारे में काफी कुछ जानता था और वह इस मामले में काफी अहम गवाह बन सकता था। इसके बाद तो इस घोटाले से जुड़े हुए गवाहों और दोषियों के मौत का सिलसिला सा शुरू हो गया। मुंडा के बाद 26 दिसंबर 1996 को जे.एन. तिवारी जो कि पशुपालन विभाग में कर्मचारी थे, की हत्या ट्रक हादसे में हो गई थी। 7 मई 1997 को सप्लायर हरीश खंडेलवाल की सर कटी लाश धनबाद के रेलवे लाइन पर पाई गई। 15 मई 1997 को डॉ. राम राज सिंह की भी ट्रक हादसे में मौत हो गई। 12 जून 1998 में इस घोटाले के खिलाफ याचिका दायर करने वाले विवेकानंद शर्मा की रांची में गोली मारकर हत्या कर दी गई। 4 जुलाई 1998 में पशुपालन विभाग के कर्मचारी उमा शंकर सिंह की ट्रक हादसे में मौत हो गई थी। इन हत्याओं के मामलों की जांच करने कोशिश कभी बिहार पुलिस ने की ही नहीं और सारा मामला ठन्डे बसते में चला गया।
घोटाले में शामिल आरोपी-
सीबीआई एक साल की जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंची कि घोटाले की खबर तत्कालीन मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव को भी थी, जिसके बाद 10 मई 1997 को सीबीआई ने बिहार के राज्यपाल से मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत मांगी। राज्यपाल की इजाजत मिलते ही सीबीआई ने यह पूरा मामला अपने सयुंक्त निदेशक यूएन विश्वास को सौंप दिया। सीबीआई ने 17 जून 1997 को बिहार सरकार के 5 बड़े अधिकरियों को हिरासत में ले लिया। इन अधिकारियों में बेग जूलियस, मूलचंद, राम राज, के. अमुगान शामिल थे। इनसे पूछताछ करने के बाद 23 जून 1997 को सीबीआई द्वारा पहला आरोप पत्र दाखिल किया था, इसमें लालूप्रसाद यादव समेत 55 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनके अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगननाथ मिश्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रदेव वर्मा का नाम भी शामिल था। इन सब पर सीबीआई ने 63 मुकदमे दायर किए थे।

कब हुआ चारा घोटाला-
सीबीआई के अनुसार चारा घोटाला सन 1990 से 1996 के बीच हुआ था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का हाथ था। सीबीआई का कहना है कि उस वक़्त लालू प्रसाद यादव बिहार राज्य के मुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्री भी थे। लालू प्रसाद यादव की अनुमति के बिना सरकारी खजाने से इतना पैसा निकालना संभव ही नहीं था।
लालू प्रसाद यादव ने किया नए पार्टी का गठन-
चारा घोटाले में खुद को घिरते देख लालू प्रसाद ने राष्ट्रीय जनता दल नाम से नई पार्टी बना ली। अब उन्होंने अपना रास्ता जनता दल से अलग कर लिया था। 25 जुलाई 1997 को लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसके 3 तीन बाद ही लालू यादव ने कांग्रेस से समर्थन लेकर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री पद पर बिठा दिया था।

लालू यादव कब-कब पहुंचे सलाखों के पीछे-
30 जुलाई 1997 को चारा घोटाले के मामले में लालू को गिरफ्तार कर लिया गया था। लालू को सजा के तौर पर 135 दिन की कारावास की सजा काटने के बाद जमानत मिली। इसके बाद लालू को एक बार फिर सन 2000 में एक दिन के लिए जेल जाना पड़ा। अक्टूबर 2001 में बिहार से अलग होकर झारखंड एक अलग राज्य बन गया था। इसके बाद ही चारा घोटाले के मामले को रांची में तीव्र कर दिया गया। इस मामले की सुनवाई साल 2006 में ख़त्म हुई और 31 मई 2007 को रांची की एक विशेष सीबीआई अदालत ने लालू प्रसाद के साथ उनके भतीजों को और 58 में से 57 दोषियों को सजा सुनाई थी।
3 अक्टूबर 2013 को रांची की सीबीआई विशेष अदालत ने चाईबासा से फर्जी निकासी मामले में 40 लोगों के साथ लालू को 5 साल और जगननाथ मिश्रा को 4 साल जेल की सजा सुनाई थी, लेकिन लालू यादव को दिसंबर में जमानत मिल गई। इस फैसले के बाद से ही लालू यादव को अपनी लोकसभा सीट से हाथ गवाना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार, किसी भी जन-प्रतिनिधि के खिलाफ अगर 2 साल से ज्यादा समय तक मामला चल रहा हो, तो उसे उसकी सीट छोड़नी पड़ती है। कुल 53 में से 47 मामलों पर फैसला आ चुका है। अब 48वां मामला देवघर के खजाने में से अवैध निकासी का है, जिसमें लालू प्रसाद यादव को कोर्ट ने दोषी करार दे दिया है। वहीं, उनके साथ इस आरोप में शामिल जगननाथ मिश्रा को कोर्ट ने रिहा कर दिया है। लालू प्रसाद यादव समेत पांच दोषियों को कोर्ट आगामी 5 जनवरी को सजा सुनाएगी।
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मुंबई: कमला मिल के एक पब में आग लगने से भीषण हादसा, 14 लोगों की मौत।
बिहार: पति ने पत्नी की शादी उसके प्रेमी से करा दी, दो बच्चे भी सौंप दिए।
बॉलीवुड में डेब्यू करेंगे ट्विंकल खन्ना के भाई।
बीएमसी की तोड़क कार्यवाई में बड़ी लापरवाही, विधवा महिला का परिवार हुआ बेघर।
एक हफ्ते के बाद 200 करोड़ के क्लब में शामिल हुई अभिनेता सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर ज़िंदा है।’
एलजी के लिए चपरासी जैसे हो गए हैं केजरीवाल -सपा नेता नरेश अग्रवाल
अरुण जेटली ने लोकसभा में कहा, “सहकारी बैंकों को कोई आयकर छूट नहीं।”
पैसा पीने वाला है टेलिकॉम बिजनेस -अनिल अम्बानी
उद्योगपति मुकेश अम्बानी अपने सहपरिवार के साथ पहुंचे, मुंबई इंडियंस ऑल राउंडर क्रिकटर कुणाल पंड्या की शादी में।
व्यक्तिगत कर दाताओं की तादाद बढ़ी -केंद्र सरकार।
योगी आदित्यनाथ ने मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसपा प्रमुख मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट यानी अपने शासनकाल में बनाए गए पार्कों और मूर्तियों के संरक्षण का अनुरोध करने वाले प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने लखनऊ में होने वाले इन्वेस्टर मीट की बात करते हुए शहर के सभी पार्कों और मूर्तियों को चमकाने का आदेश अधिकारियों को दिया है, ताकि दुनियाभर से आने वाले निवेशकों के जहन में लखनऊ को लेकर एक अच्छी छवि बन सके।
मायावती साल 2012 से 2017 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए पत्र लिखती रही थीं, लेकिन अखिलेश यादव ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया था। गुजरात चुनावों के नतीजों से एक बात उभर कर सामने आई थी कि बसपा और एनसीपी ने करीब 10 सीटों पर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा कर बीजेपी को जीत दिलाई थी।
अब लोग ये कयास लगा रहे हैं कि गुजरात चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाने का इनाम योगी, मायावती को उनके शासन काल में बनाए गए पार्कों और मूर्तियों को चमकाकर देगें। लखनऊ में कांशी राम, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर समेत कई दलित चिंतकों और समाज सुधारकों के मूर्तियों के साथ ही खुद मायावती की मूर्ति भी लगाई गई हैं, और तो और वहां बड़ी संख्या में पत्थर के हाथी भी लगाए गए थे।
अगर बच्चे का कद छोटा है तो परेशान न हों, अपनाएं ये आसान तरीके
एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
छोटी हाईट हर जगह शर्मिंदा करती है। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस…और तमाम जगहों पर छोटा कद आपको शर्मिंदा कर देता है। ऐसे में कम हाइट वाले लोगों को मोटापा और भी परेशान करता है। जिसके लिए कई लोग बाज़ार में मौजूद हाइट बढ़ाने वाली ड्रिंक्स या सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, जो कि घातक नुकसान पहुंचाती है।
हमारे शरीर में मौजूद ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन (HGH) हड्डियों और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करते हैं। ये हार्मोन 12 से 13 साल की उम्र के बच्चों में बहुत एक्टिव होते हैं, जिनकी हाइट आगे आने वाले 6 सालों तक बढ़ती है यानी 18 साल तक बच्चों की हाइट बढ़ती है। 18 साल के बाद भी हाईट 4 तरीके बढ़ा सकते हैं। आपके बच्चे की हाईट बढ़ने के लिए रोजाना उसके रूटीन में एक्सरसाइज, सही खानपान, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज और पूरी नींद होना जरुरी है।
डेली एक्सरसाइज़ करना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारा कद दिन में कुछ इंच कम हो जाता है। वहीं, रात में सोते वक्त हम लंबे लगते हैं। इसकी वजह यह है कि जब बॉडी खड़े होनेपर मूवमेंट करती है, तब रीढ़ की हड्डी पर शरीर का भार पड़ता है, जिससे कद छोटा लगता है। लेकिन अगर बॉडी का पॉश्चर ठीक रखा जाए तो हाइट में बदलाव नहीं दिखेगा। इसके लिए रेगुलर लटकने वाली एक्सरसाइज़ की ज़रूरत होगी, जिससे लोअर बैक यानी रिढ़ की हड्डी मज़बूत बनेगी और वज़न से सिमटेगी नहीं। इसके अलावा रनिंग, जम्पिंग और एरोबिक्स भी काफी मददगार होती हैं।
सही खानपान शरीर के विकास का एक अहम हिस्सा है। जिसके लिए फल, हरी सब्ज़ियां, दूध और मेवे ये सब भरपूर प्रोटीन और कार्ब्स का अच्छा सोर्स होते हैं। इससे बॉडी में मेटाबॉलिज्म और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे ग्रोथ हार्मोन बूस्ट होते हैं।
स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ भी उतना ही महत्वपूर्ण है। रोज़ाना दिन में 15 मिनट स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करना, जिससे रीढ़ की हड्डी स्ट्रेच होकर मज़बूत होती है, जिससे पॉश्चर बेहतर होता है और हाइट लंबी दिखती है। इसके लिए सूर्य नमस्कार भी बहुत बेहतर योगा है, इससे भी बॉडी की स्ट्रेचिंग अच्छी होती है।
बड़ों की ही तरह बच्चों को भी बेहतर और पूरी नींद की ज़रूरत होती है। क्योंकि नींद में भी पीयूषिका-ग्रंथि काम करती है, इसीलिए ज़रूरी है कि सही पॉश्चर में नींद ली जाए। इसके लिए सिर पर नहीं, बल्कि तकिए को घुटने के नीचे रखें। यह पोज़िशन रीढ़ की हड्डी को मज़बूती देने के साथ-साथ स्ट्रेच भी करेगी। इसके अलावा भी इस पोज़िशन में सोने से पीठ के दर्द में भी राहत मिलती है।
मैं गिर गई थी और लोग मेरे ऊपर दौड़ रहे थे -मुंबई आग हादसा पीड़िता
राजेश सोनी | Navpravah.com
कल रात मुंबई के कमला मिल्स कंपाउंड स्थित पब में भीषण आग लग गई थी। इसी पब में कल रात को सुलभा अरोड़ा अपना जन्मदिन मनाने पहुंची थी, पर उन्हें क्या पता था कि इस पब में उनके जन्मदिन के ख़ुशी में खलल डालने के लिए भीषण आग उनका इंतजार कर रही थी। उन्होंने बताया कि इस पब में आग लगने के दौरान वहां सिर्फ अफरातफरी का माहौल था और उसी अफ़रातफ़री मैं गिर गई, लोग मेरे ऊपर से दौड़ रहे थे।
डॉक्टर अरोड़ा ने आगे बताया कि यह काफी डरवाना पल था। पब में मौजूद हर एक व्यक्ति प्रवेश द्वार पर पहुँचने की जद्दोजेद कर रहा था। इसी अफरातफरी में पीछे से आकर मुझे किसी ने धक्का दे दिया और इस वजह से मैं अपना संतुलन खो बैठी और फर्श पर गिर पड़ी। मुझे उस समय महसूस हो रहा था कि छत मेरे ऊपर आ गिरेगी। बाद में भीड़ में से एक व्यक्ति मेरी मदद के लिए आगे आया।
डॉक्टर अरोड़ा ने आगे बताया कि उनको और उनके ग्रुप के सभी सदस्यों को महसूस हो गया कि वे पब के मुख्य द्वार से बाहर नहीं निकल सकते हैं। इसके लिए वे सभी किचन के तरफ भागे और वहां किचन स्टाफ ने उन्हें बाहर निकलने का रास्ता दिखाया था। इस वजह से उनकी जान बच पाई और वे सही सलामत पब से बाहर निकल आए।
बता दें कि इस हादसे में 11 महिलाओं समेत 14 लोगों की मौत हुई थी। जिसके कारण कल रात उस पब का जश्न का माहौल मातम में बदल गया था। इस हादसे में ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने के कारण हुई थी।








