दुबई में होनेवाले इस वर्ष के आईपीएल में शिरकत करनेवाली महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपरकिंग्स टीम इस समय दुबई में है। सभी खिलाड़ियों को क्वारंटाइन कर उनका कोविड टेस्ट किया जा रहा है। खबर है कि सीएसके टीम का एक खिलाड़ी और 12 स्टाफ मेंबर कोरोना पॉजिटिव पाए गए है।
चेन्नई की टीम 21 अगस्त को दुबई पहुंची थी। इसके बाद 6 दिन के लिए पूरी टीम को क्वारंटाइन किया गया था। चेन्नई की टीम को शुक्रवार से प्रैक्टिस शुरू करनी थी। इसी दौरान टीम का एक खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ के 12 लोग पॉजिटिव आ गए। यह मामला सामने के बाद टीम ने अपना क्वारंटाइन पीरियड बढ़ा दिया है। आईपीएल की शुरुआत 19 सितंबर से होनी है।
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के खिलाफ झारखंड सरकार एफआईआर दर्ज करवाने जा रही है। उन पर लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन को तोड़ने का आरोप लगाया गया है। ज्ञात हो कि गुरुवार को तेज प्रताप पिता लालू यादव से मिलने रांची गए थे और वहीं एक एक होटल में ठहरे थे। जानकारी के अनुसार जिस होटल में वे ठहरे थे, उस होटल के खिलाफ कोरोना काल के दौरान नियम उल्लंघन करने का आरोप लगा है और इसी को लेकर एक प्राथमिकी भी दर्ज है।
होटल पर भी मामला दर्ज-
दरअसल तेज प्रताप पिता से मिलने के लिए हॉस्पिटल तो गए, लेकिन इससे पहले उन्हें होटल में ठहरना पड़ा था। कोरोना काल के दौरान सभी होटल बंद होने के चलते उनके लिए ख़ास तौर पर होटल कैपिटल रेजीडेंसी को खोला गया और सभी व्यवस्थाएं मुहैया कराई गयीं। जिसके बाद होटल के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। बताया जा रहा है कि बिना अनुमति होटल खोलने की वजह से यह केस दर्ज किया गया है।
सभी को नियमों का पालन करना चाहिए-
अब इस मामले में बिहार में सियासत भी शुरू हो गई है। जेडीयू नेता व बिहार सरकार में मंत्री महेश्वर हजारी ने कहा कि राजनीति में रहने वाले लोगों को नियमों का पालन करना चाहिए। जिम्मेदार पद पर जिम्मेदारी भी रखना चाहिए। तेजप्रताप पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भी रहे हैं, बावजूद इसके गाइडलाइन का पालन नहीं करना गलत है। सभी को गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। ऐसी लापरवाही पर मुकदमा होता ही है।
सुशांत सिंह को लेकर रिया झूठ पर झूठ बोले जा रही है। रिया ने सीबीआई के सामने जाने से पहले लोगों की सिंपेथी पाने के लिए एक कथित इंटरव्यू में सुशांत के साथ यूरोप ट्रिप से जुड़ी कुछ बातें शेयर की थीं। रिया ने कहा था कि सुशांत को क्लॉस्ट्रोफोबिया था। पिछले साल यूरोप ट्रिप के लिए फ्लाइट में बैठने से पहले सुशांत ने फोबिया दूर करने के लिए मोडाफिनिल दवा ली थी। लेकिन, डॉक्टर्स का कहना है कि यह दवा क्लॉस्ट्रोफोबिया के मरीजों को नहीं दी जाती।
क्लॉस्ट्रोफोबिया एक तरह का एंग्जाइटी डिस-ऑर्डर है। इसके तहत मरीजों को बंद जगहों पर जाने से परेशानी या घुटन महसूस होती है। कुछ मरीजों पर इतना असर होता है कि उन्हें लिफ्ट या एमआरआई मशीन जैसी जगहों पर बहुत ज्यादा डर लगता है। रिया का यह दावा कि उसे क्लॉस्ट्रोफोबिया था, पूरी तरह झूठा साबित होता है, क्योंकि सुशांत को हवाई जहाज उड़ाने का शौक था और उन्होंने अपना यह शौक पूरा भी किया। यदि उन्हें ऐसी कोई बीमारी होती, तो वे न तो प्लेन उड़ाते और न ही प्लेन में बैठते।
जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल की सायकियाट्रिस्ट डॉ। गुंजन सोलंकी के मुताबिक, मोडाफिनिल दवा क्लॉस्ट्रोफोबिया के मरीजों को नहीं दी जाती है। यह दवा स्लीप डिस-ऑर्डर के मरीजों को प्रिस्क्राइब की जाती है। जिन मरीजों को बहुत ज्यादा नींद आती है, उन्हें यह दवा दी जाती है। कई बार लेट नाइट शिफ्ट में काम करने वाले डॉक्टरी सलाह से इस दवा को लेते हैं। अगर किसी को फ्लाइट में डर लगता है तो, वह उड़ान के वक्त नींद लेना पसंद करेगा। मोडाफिनिल लेने से तो उल्टा नींद भाग जाएगी।
– सुशांत को ऊंचाई से नहीं लगाता था डर
सुशांत को ऊंचाई या प्लेन में बैठने से डर लगने वाली बात भी समझ से परे है। सुशांत के ऐसे कई वीडियो हैं, जिसमें वे प्लेन उड़ाते हुए नजर आ रहे हैं। हवाई यात्रा के दौरान उनके हावभाव को देखकर बिल्कुल भी नहीं लगता है कि उन्हें क्लॉस्ट्रोफोबिया था। एक बार सुशांत बोइंग-737 उड़ाना भी सीख रहे थे। ट्रेनिंग पूरी करने के लिए वे प्लेन खरीदना चाहते थे। उन्होंने खुद अपनी ट्रेनिंग से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया था। सुशांत के साथ लम्बे समय तक रिलेशनशिप में रहीं एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे ने भी रिया के दावे को खारिज किया। अंकिता ने इंस्टाग्राम पर लिखा, तुम हमेशा उड़ना चाहते थे, और ऐसा तुमने किया था। हम सभी को तुम पर गर्व है। एक फिल्म के लिए सुशांत ने नासा से भी ट्रेनिंग ली थी।
बुन्देलखण्ड में किसान फिर से टूटने की कगार पर है। कारण है अन्ना गौवंश, जिनके कारण स्थिति फिर से खराब हो चली है। उत्तर प्रदेश का बुंदेलखण्ड इलाका, जहां कभी किसान सूखे से जूझता है तो कभी ओलावृष्टि से, लेकिन यहां के किसानों के लिये एक बढ़ी समस्या बनता जा रहा हैं गौवंश। किसानों की खेतों में लहलहाती फसलों को रात के समय हजारों की संख्या में अन्ना जानवर नुकसान पहुंचा रहें हैं। बुंदेलखण्ड ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश में अन्ना जानवरों की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है।
किसान रात दिन जागकर हाड़कंपा देने वाली ठंड में भी अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिये खेतों की रखवाली कर रहें हैं। करोड़ो का बजट अन्ना गौवंश के सरंक्षण और संवर्धन हेतु खर्च किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात ठीक नही हैं। इतनी व्यवस्थाओं के बाद भी सड़क पर गौवंश घूम रहे हैं, तो सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि आखिर गौशाला में कौन है? इसकी जांच ज़रूरी नहीं है ?
सबसे ज्यादा असर बुन्देलखण्ड इलाके में देखने को मिल रहा है, जहां बाँदा और चित्रकूट जिले में स्थिति बहुत खराब है। इस समय हर गांव, कस्बा व शहर के लोग आवारा गोवंश से खासे परेशान हैं। हालत यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के किसान जहां सारी रात जाग कर फसलों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं रोड पर घूमने वाले आवारा पशु खतरे का सबब बने हुए हैं। गोवंश के कारण किसानों को रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। इससे फसल को क्षति हो रही है और जान को भी खतरा बना रहता है। अगर नजारा देखना है तो आप शाम होते ही सड़क पर निकलिए और देखिये कैसे लाचार खड़े मिलेंगे। आपको गौ वंश बहुत बड़ी संख्या में फसल चट करते भी दिख ही जायेंगे।
विगत दिनों चित्रकूट जिले के कर्वी, रामनगर, पहाड़ी और मानिकपुर ब्लाक क्षेत्र से सोशल मीडिया में कई ऐसे फोटो और विडियो जारी हुए, जिसमें अनेक लोगों ने बताया कि इस समय आवारा गोवंश से फसल की सुरक्षा करना आसान काम नहीं है। रात को किसी भी तरह की दिक्कत से बेपरवाह किसान जब अपनी खेत की रखवाली कर रहे होते हैं, तो आवारा जानवर झुंड के रूप में टूट पड़ते हैं और पलक झपकते ही फसल को चट कर जाते हैं। जब इस सम्बंध में किसानों द्वारा सम्बंधित ग्राम प्रधान या सचिव से बात की जाती है, तो अब अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं ।
किसानों ने कहा कि बुंदेलखण्ड का किसान हमेशा से ठगा जाता रहा है। कभी कर्ज माफी के नाम पर तो कभी सूखा राहत के नाम पर। छोटा किसान हमेशा गेहूं में घुन की तरहा पीसा गया है और आज अन्ना जानवर की विकराल समस्या का सामना कर रहा है। यही वजह रही है कि बुंदेलखण्ड का किसान कभी आत्महत्या को मजबूर होता है तो कभी पलायन को। प्रधान और सचिवों द्वारा गौवंशो के रखरखाव में जमकर लूट की जा रही है। अब देखना होगा कि इस लूट को योगी सरकार कैसे रोक पायेगी।
“डीएम और कमिश्नर से बार बार आग्रह के बावजूद अगर समस्याएं सामने आ रही हैं तो ये गम्भीर विषय है और मैं पुनः इस सम्बंध में उच्चाधिकारियो से बात करूंगा। हमारी सरकार का प्रमुख एजेंडा है कि गौवंशो का पूर्णतया सरंक्षण और संवर्धन हो” –भोले सिंह,सदस्य ,गौ सेवा आयोग उप्र सरकार
“चित्रकूट में पांच बृहद गौशालाएं स्वीकृत हैं जिसमें दो संचालित हैं ।गौवंश के सरंक्षण और संवर्धन हेतु संचालित गौशालाओ में व्यवस्थाएं ठीक नही है । स्थानीय स्तर पर प्रधान और सचिवों द्वारा लापरवाही की जा रही है इसलिए दावों को हकीकत में बदलना होगा। हमे मिलने वाली सूचना के अनुसार जिले में रोजाना आधा सैकड़ा गौ वंश किसी न किसी कारण मर जाते हैं यहां जन्मदर से मृत्युदर ज्यादा है। हमारा संगठन लगातार कोशिश कर रहा है कि स्थिति सुधरे क्योंकी धरातल में कुछ ठीक नही” – राजीव लोचन तिवारी ,जिलाध्यक्ष ,राष्ट्रीय गौरक्षा दल
Agra: Muharram procession underway in Agra, on Oct 12, 2016. (Photo: Pawan Sharma/IANS)
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
सुप्रीम कोर्ट देश में कहीं भी मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने मौलाना कल्बे जव्वद को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट राज्य के हालात के मद्देनजर इजाजत देंगे, वह भी स्थानीय स्तर पर. राष्ट्रीय स्तर पर इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती. ज्ञात हो कि मौलना कल्बे जव्वाद ने याचिका दाखिल कर पूरे देश के अलग-अलग शहरों में मुहर्रम का जुलूस निकालने की इजाजत मांगी थी.
इन दिनों करोना की वजह से धार्मिक जुलूस निकालने की इजाजत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे देश में जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी जा सकती, क्योंकि हर जगह के हालात अलग हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर राज्य के हाईकोर्ट को वहां के हालात के मद्देनजर इजाजत देनी चाहिए. याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्हें कम से कम लखनऊ में जुलूस निकालने की इजाजत दी जाए, क्योंकि शिया समुदाय के ज्यादातर लोग यही रहते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसके जवाब में कहा कि उन्हें इसके लिए इलाहबाद हाईकोर्ट जाना चाहिए.
कोर्ट ने इससे पहले ओडिशा में जगन्नाथ यात्रा की इजाजत दी थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ एक शहर का मामला था. पूरे देश का नहीं. अगर पूरे देश के लिए इजाजत दे दी गई तो फिर लोग एक ही समुदाय को कोरोना के लिए दोष देने लगेंगे.
पुणे- मुंबई एक्सप्रेस वे की दूरी कम करने के लिए महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) द्वारा खोपोली एग्जिट के करीब वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद दोनों शहरों की दूरी और छह किलोमीटर तक घट जाएगी। मुंबई से पुणे की बीच की दूरी कम करने वाले मिसिंग लिंक परियोजना की रफ्तार बढ़ गई है। इसके पूरा होने के बाद एक्सप्रेस वे से सफर करने वाले वाहन चालकों का करीब 20 से 25 मिनट का समय बचेगा। इसके साथ ही ईंधन की भी बचत होगी।
मौजूद समय में पुणे- मुंबई हाइवे के खोपोली एक्जिट से सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट के बीच की दूरी 19 किमी है। यह मार्ग बन जाने के बाद 19 किमी की दूरी घटकर 13।3 किमी हो जाएगी। एमएसआरडीसी द्वारा 13.3 किमी मार्ग पर दो टनल, दो वाया डेक और आठ लेन का मार्ग तैयार किया जा रहा है। अब तक करीब 1।5 किमी लंबी टनल तैयार कर ली गई है। मिसिंग लिंक के तहत दो टनल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। दो टनल में से पहली टनल की खुदाई का काम मुंबई की ओर से 1700 मीटर पूरी हो गई है, जबकि पुणे की ओर से हो रही दूसरे टनल की खुदाई का काम 1200 मीटर हो चुकी है।
मुंबई और पुणे के बीच 10।55 किमी लंबी टनल का निर्माण कार्य किया जा रहा है। मिसिंग लिंक इस परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक केबल ब्रिज, खालापुर टोल से खोपोली एग्जिट तक 8 लेन का रास्ता और 2 टनल होंगे। इस परियोजना के अंतर्गत बनाई जा रही केबल ब्रिज की लंबाई 645 मीटर और ऊंचाई 135 मीटर होगी। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे और मुंबई-पुणे नेशनल हाईवे -4 खालापुर टोल प्लाजा के पास आकर मिलते हैं। वहीं खंडाला एग्जिट के पास आकर अगल हो जाते हैं। आडोशी टनल से खंडाला एग्जिट का रास्ता 6 लेन वाला होने के साथ ही यहां पर 10 लेन वाली वाहनों का ट्रैफिक आकर मिलता है।
इसी के साथ ही इसी हिस्से में घाट सेक्शन ज्यादा रहने के कारण चढ़ाव और उतार वाले रास्ते अधिक हैं। ऐसे में मॉनसून के दौरान हर साल भूस्खलन की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं, जिसके चलते मुंबई की ओर आने वाली पहाड़ों से सटी एक लाइन मॉनसून के दौरान बंद कर दी जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर खोपोली एग्जिट से कुसगांव के बीच 13।3 किमी के मिसिंग लिंक का काम एमएसआरडीसी कर रही है। दो प्रमुख शहरों की दूरी कम करने वाले प्रॉजेक्ट का काम तीन वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुंबई से पुणे के बीच रोजाना हजारों वाहनों का आनाजाना होता हैं । ऐसे में इस परियोजना लोगों के समय के साथ ईंधन की भी बचत होगी।
महामारी कोरोना का मुकाबला करने के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और सीरम इंस्टिट्यूट द्वारा बनाई गई कोविशिल्ड वैक्सीन के दूसरे चरण का ह्यूमन ट्रायल शुरू हो गया है। जिन दो लोगों को सबसे पहले यह वैक्सीन दी गई उनकी तबियत सामान्य है।गुरुवार को भारती विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि जिन दो लोगों को ऑक्सफोर्ड की ओर से बनाया गया कोविड-19 की वैक्सीन लगी थी उनके स्वास्थ्य संबंधी जरूरी मानक सामान्य हैं।
– बुधवार को दिया गया था दो व्यक्तियों को पहला डोज
बुधवार को कोरोना वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के दूसरे चरण में पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के बने कोविशील्ड टीके का पहला डोज 32 वर्ष एवं 48 वर्ष के दो व्यक्तियों को लगाया गया था। इसकी खुराक (डोज) एक महीने बाद दोहराई जाएगी। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के चिकित्सा उप निदेशक डॉ। जितेंद्र ओस्वाल ने कहा, कल से हमारा चिकित्सा दल दोनों लोगों के संपर्क में है और वे दोनों ठीक हैं। टीका लगने के बाद उन्हें दर्द, बुखार, इंजेक्शन का कोई दुष्प्रभाव या और कोई तकलीफ नहीं है।
– एक महीने बाद फिर लगाया जाएगा टीका
डॉ। ओसवाल ने बताया कि बुधवार को टीका लगाने के बाद दोनों पर आधे घंटे तक नजर रखी गई, उसके बाद ही उन्हें घर जाने दिया गया। उन्हें सभी आवश्यक नंबर दिए गए थे जिन पर आपात स्थिति में संपर्क किया जा सकता है। हमारी मेडिकल टीम भी उनके साथ लगातार संपर्क में है। अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ। संजय ललवानी ने कहा कि दोनों व्यक्तियों को एक महीने के बाद टीके की एक और खुराक दी जाएगी तथा अगले सात दिन में 25 लोगों को यह टीका लगाया जाएगा।
पुणे रेल मंडल द्वारा देश के अनेक क्षेत्रों में विभिन्न तरह की वस्तुओं आदि का परिवहन नियमित रूप से किया जाता है, जिसमें शक्कर, ऑयल प्रोडक्ट आदि शामिल है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुणे रेल मंडल द्वारा कारों का परिवहन रेल के माध्यम से पहली बार बांग्लादेश को किया गया है।
हाल ही में रेलवे द्वारा गठित की गई बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट ने अपने सक्रिय प्रयासों से पहल करके नया बिज़नेस प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की है। रेलवे के शीघ्र परिवहन, किफायती दरों, सुरक्षित परिचालन आदि विशेषताओं को देखते हुए ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया ने इस दिशा में विशेष रुचि दिखाते हुए अपने उत्पाद को बांग्लादेश के लिए रेलों के माध्यम से भेजने का विकल्प चुना है, जिसके जरिए पुणे रेल मंडल के चिंचवड़ रेलवे स्टेशन से 75 पिकअप वेन पहली खेप में रेल वेगनों में लोड करके 2139 किलोमीटर दूर बांग्लादेश के बेनापोल (Benapole) को भेजी गई हैं।
पुणे रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज झंवर ने बताया कि मंडल रेल प्रबंधक श्रीमती रेणु शर्मा के मार्गदर्शन में हुई इस कार्य योजना को अपर मंडल रेल प्रबंधक सहर्ष बाजपेयी के संयोजन में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सुनील मिश्रा तथा वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक डॉ। स्वप्निल निला के नेतृत्व में वाणिज्य तथा परिचालन विभाग की टीम के सक्रिय एवं संयुक्त प्रयासों से बेहतर मार्केटिंग के जरिए ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया के सहयोग से संभव बनाया जा सका है।
मध्य प्रदेश में अपना अस्तित्व तलाश रही कांग्रेस पार्टी की चुनौतियों को उसके नेता ही आए दिन बढ़ाते नज़र आते हैं। भाजपा नेतृत्व से भिड़ने के समय आपस में ही भिड़ने की वजह से कांग्रेस पार्टी की एक बार फिर किरकिरी हो गई है। उप चुनाव नज़दीक है, ऐसे में दो वरिष्ठ कांग्रेसियों के आपसी विवाद ने सियासी गर्मी बढ़ा दी है।
कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे डॉक्टर गोविंद सिंह और पूर्व खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल ने डॉक्टर गोविंद सिंह के खिलाफ ऐसी टिप्पणी की कि राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गयी।
पूर्व खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने कहा गोविंद सिंह ग्वालियर चंबल में सबसे बड़े डाकू हैं। जायसवाल तो गोविद सिंह को मलखान सिंह से भी बड़ा डाकू बता गए। उन्होंने गोविंद सिंह को भूमाफिया बताते हुए ग्वालियर चंबल का डकैत बताया। प्रदीप जायसवाल ने कहा भिंड ग्वालियर में अवैध खनन में हिस्सेदारी के लिए गोविंद सिंह दबाव की राजनीति करते रहे हैं। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने विभाग को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया था और जमकर कमीशन खोरी की थी।
प्रदीप जायसवाल ने यह भी आरोप लगाया कि गोविंद सिंह के कारण ही पिछली सरकार में खनिज नीति को मंजूरी नहीं मिल पायी थी। यदि उस समय खनिज नीति को मंजूरी मिलती, तो प्रदेश को चार से 500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व हासिल होता। लेकिन उस समय मंत्री रहे डॉक्टर गोविंद सिंह ने खरीद नीति पर आपत्ति जताते हुए उसे अमल में लाने से रोक दिया।
नेतागीरी छोड़ धन्धा करें जायसवाल-
प्रदीप के आरोपों से नाराज़ डॉ. गोविंद सिंह ने भी जवाबी हमला बोल दिया। सिंह ने कहा, प्रदीप जायसवाल ने कांग्रेस को धोखा दिया है। निर्दलीय विधायक होने के बाद भी कांग्रेस सरकार में खनिज विभाग जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई। बावजूद इसके जायसवाल ने जनसेवा की जगह सौदेबाजी को महत्व दिया। डॉ गोविंद सिंह ने उन्हें सलाह दी है कि वह राजनीति छोड़ कर पैसा कमाने के लिए धन्धा करें। राजनीति जनसेवा का माध्यम है। प्रदीप जायसवाल पैसा कमाने के लिए राजनीति में आए हैं, इसी बात से उनकी छवि का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
आकांक्षा हत्याकांड के आरोपी और सनकी सीरियल किलर उदयन दास को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। उदयन ने अपनी प्रेमिका आंकाक्षा की हत्या कर उसे दफना दिया था। उसने अपने माता-पिता की भी हत्या की थी। करीब चार साल पहले 2017 में पहली बार उदयन की करतूतों का खुलासा हुआ था। अब इस जघन्य हत्याकांड के आरोपी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। सीरियल किलर उदयन दास की करतूतों को क्राइम पेट्रोल के साथ ही हाल ही में प्रदर्शित वेब सीरिज अभय में भी दिखाया गया है.
बता दें कि राजधानी भोपाल का खौफनाक सीरियल किलर उदयन दास हाई प्रोफाइल लाइफ जीने का आदी था और उसने अपनी प्रेमिका आकांक्षा शर्मा की हत्या की थी। आकांक्षा पंश्चिम बंगाल की रहने वाली थी और उसके घरवालों को उदयन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जब उसके घर वालों ने अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा पुलिस से की तो इस मामले की जांच शुरू हुई थी। कॉल डिटेल तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की तो आकांक्षा का अंतिम लोकेशन भोपाल के साकेत नगर इलाके में मिला था। उसके बाद ही पुलिस ने उदयन हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी।
उदयन दास ने 17 दिसंबर 2016 को अपनी प्रेमिका की हत्या कर शव को घर में ही दफना दिया था और उसपर एक चबूतरा बना दिया था। इतना ही नहीं, इस सनकी हत्यारे ने अपने माता पिता की भी हत्या कर दी थी और पुराने घर के बगीचे में दोनों की लाश को दफना दिया था। ये दोहरा हत्याकांड उसने 2010 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में किया था।
मां बाप की हत्या कर वो फर्जी तरीके से उनकी पेंशन भी ले रहा था। अब पश्चिम बंगाल की एक अदालत ने आकांक्षा की हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या की ये दोनों घटनाएं भोपाल और रायपुर में हुई, लेकिन उसके खिलाफ एफआईआर पश्चिम बंगाल में दर्ज की गई थी। इस पूरे मामले की सुनवाई पश्चिम बंगाल में हुई और अब बंगाल के बांकुड़ा के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उदयन दास को उम्रकैद की सजा सुनाई है।