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Tuesday, July 28, 2026
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CBSE ने जारी किया 12 वीं कक्षा का परिणाम, लड़कियों ने एक बार फिर मारी बाज़ी

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

नई दिल्ली | केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आज 13 मई को कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा 2025 का परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया है। इसके साथ ही लाखों छात्रों एवं उनके माता पिता का भी इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। इस साल 88.39% बच्चे उत्तीर्ण हुए, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर है।

इस साल कुल 17,04,367 छात्रों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था, जिनमें से 16,92,794 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 14,96,307 छात्र सफल घोषित किए गए हैं। 2024 में पास प्रतिशत 87.98% रहा था, जबकि इस साल 88.39% छात्रों ने सफलता हासिल की है, यानी इस बार 0.41% की बढ़त देखने को मिली। पास प्रतिशत देखें तो 91.64 प्रतिशत छात्राएं पास हुई हैं और 87.50 छात्र पास हुए हैं यानी कि बाजी फिर एक बार लड़कियों ने ही मारी है।

CBSE ने इस साल भी टॉपर्स की कोई मेरिट लिस्ट जारी नहीं की है। बोर्ड का मानना है कि इससे बच्चों पर बेवजह का तनाव बढ़ेगा और ऐसा नहीं करने से अनावश्यक प्रतियोगिता से बचा जा सकता है। हालांकि, जिन छात्रों ने 90% या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें ‘डिस्टिंक्शन’ के रूप में सराहा जाएगा।

ऐसे चेक करें CBSE 12वीं रिजल्ट 2025

सबसे पहले छात्र आधिकारिक वेबसाइट cbseresults.nic.in पर जाएं।

अब छात्र “Senior School Certificate Examination (Class XII) 2025” लिंक पर क्लिक करें
इसके बाद छात्र रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड ID डालें
फिर छात्र सबमिट बटन पर क्लिक करें
अब छात्र की स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड और प्रिंट कर सकते हैं

Digilocker से डाउनलोड करने के लिए

digilocker.gov.in पर जाएं या मोबाइल ऐप खोलें
CBSE के सेक्शन में जाएं
रोल नंबर डालकर लॉगिन करें
डिजिटल मार्कशीट, पासिंग सर्टिफिकेट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट डाउनलोड करें।

भारत-पाक तनाव के बीच रात में हो रहे हवाई हमले: जानिए क्यों चुनी जाती है रात की घड़ी

नृपेंद्र कुमार मौर्या| navpravah.com

नई दिल्ली| भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर किए गए हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और उसने भारत पर हवाई हमले की नाकाम कोशिशें की हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारत और पाकिस्तान—दोनों ही देशों की सेनाएं रात में ही हवाई हमले कर रही हैं। आखिर रात का समय ही क्यों चुना जा रहा है? इस सवाल का जवाब जानना जरूरी है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा तनाव

भारत ने 7-8 मई की दरम्यानी रात पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला किया। इस हमले में भारत ने मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट्स की मदद से आतंकियों के अड्डों को निशाना बनाया। इसके बाद 8-9 मई और फिर 9 मई की रात को पाकिस्तान की ओर से भारत में घुसपैठ और जवाबी हवाई हमले की कोशिश की गई, लेकिन भारतीय सेना ने इन सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया।

रात को किए गए इन हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों की सेनाएं दिन की बजाय रात को ही ऐसे ऑपरेशन अंजाम देना अधिक सुरक्षित और कारगर मान रही हैं। इसके पीछे कई रणनीतिक, तकनीकी और कूटनीतिक कारण हैं।

क्यों होते हैं रात में हवाई हमले? जानिए चार प्रमुख वजहें

1. अंधेरे में छिपने की आसानी

रात के अंधेरे का फायदा यह है कि मिसाइलें, ड्रोन और फाइटर जेट्स दुश्मन की नजरों से बच सकते हैं। खासकर ड्रोन जैसे छोटे उपकरणों को अंधेरे में देखना मुश्किल होता है और कई बार वे रडार की पकड़ से भी बाहर रह जाते हैं। आम लोग भी रात के समय अपने घरों में होते हैं, जिससे ऑपरेशन गुप्त और कम जोखिम वाला होता है।

2. जवाबी कार्रवाई का खतरा कम

रात के समय हमला करने से दुश्मन देश के पास तुरंत प्रतिक्रिया देने का समय नहीं होता। अंधेरे में फौरन जवाबी हमले की रणनीति बनाना मुश्किल होता है, क्योंकि रात में सीमित संसाधन, कम विजिबिलिटी और कम मैनपावर के चलते जवाब देना चुनौतीपूर्ण होता है।

3. आधुनिक तकनीक की ताकत

आज की सेनाएं तकनीकी रूप से अत्यधिक उन्नत हो चुकी हैं। फाइटर जेट्स में नाइट विजन, थर्मल इमेजिंग और GPS गाइडेड मिसाइल जैसी तकनीकें होती हैं, जो रात में भी सटीक निशाना लगाने की क्षमता रखती हैं। भारतीय सेना ने भी ऑपरेशन सिंदूर में इन आधुनिक तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल किया, जिससे दुश्मन के ठिकाने सटीकता से नष्ट किए जा सके।

4. सिविलियन कैजुअल्टी से बचाव

किसी भी सैन्य हमले के दौरान नागरिकों की मौत एक गंभीर मुद्दा होती है। यदि दिन में हमला होता है, तो आम नागरिकों के खुले में रहने की संभावना अधिक होती है। इससे जान-माल का नुकसान ज्यादा हो सकता है, जिससे हमलावर देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचता है। रात को जब अधिकांश लोग अपने घरों में होते हैं, तब हवाई हमले से सिविलियन कैजुअल्टी की आशंका कम हो जाती है|

तुर्की का ड्रोन , ३६ ठिकाने , पाक के हर पाप का किया सेना ने पर्दाफाश

नृपेंद्र कुमार मौर्य|navpravah.com

नई दिल्ली। भारत के सैन्य ऑपरेशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता से बौखलाए पाकिस्तान ने गुरुवार रात भारतीय वायुसीमा में घुसपैठ की बड़ी कोशिश की, लेकिन भारतीय सैन्यबलों ने उसकी इस गुस्ताखी को करारा जवाब देते हुए न सिर्फ हमलों को नाकाम किया, बल्कि दुश्मन को भारी नुकसान भी पहुंचाया। भारतीय सेना और विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका विस्तृत खुलासा किया।

भारतीय अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान ने 8-9 मई की रात को लेह से लेकर सर क्रीक तक 36 से अधिक स्थानों पर तुर्की से प्राप्त 300 से 400 ड्रोनों की मदद से वायुसीमा का उल्लंघन किया। इन ड्रोनों के जरिए पाकिस्तान भारत की वायु रक्षा प्रणालियों और सैन्य ठिकानों की टोह लेना चाहता था। हालांकि, भारतीय वायु रक्षा प्रणाली और यूनिफाइड काउंटर यूएएस ग्रिड ने समय रहते इन हमलों को भांप लिया और अधिकतर ड्रोनों को मार गिराया गया।

भारतीय सेना की प्रवक्ता कर्नल सोफिया कुरैशी ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि ये सभी हमले भारतीय सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की कोशिश थे। “300 से अधिक ड्रोनों के जरिए हमारी सीमाओं की टोह लेने की कोशिश की गई। इनमें तुर्की के UAVs शामिल थे, जिनकी प्रारंभिक जांच की जा रही है,” उन्होंने कहा।

विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि पाकिस्तान ने 7 मई की रात करीब साढ़े आठ बजे भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उस दौरान पाकिस्तान ने अपने वायुक्षेत्र को नागरिक विमानों के लिए बंद नहीं किया। इसका उद्देश्य स्पष्ट था – नागरिक विमानों को ढाल बनाकर हमले करना। उन्होंने कहा कि भारत ने संयम का परिचय देते हुए केवल सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, जिससे नागरिकों की जान को कोई खतरा न हो।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पाकिस्तान की एक और साजिश का पर्दाफाश करते हुए बताया कि पाक सेना धार्मिक स्थलों को निशाना बना रही है और इसके लिए भारत को दोषी ठहरा रही है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान कहता है कि उसने किसी धार्मिक स्थल पर हमला नहीं किया, लेकिन हमारे पास सबूत हैं कि पुंछ में गुरुद्वारे को निशाना बनाया गया, जिसमें कुछ सिख श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई।” मिसरी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ननकाना साहिब पर हुए कथित हमले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा रहा है, जबकि यह पूरी तरह से फर्जी और मनगढंत दावा है।

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह भी बताया गया कि भारत ने लाहौर में स्थित पाकिस्तान की एक वायु रक्षा प्रणाली को सटीक हमले से नष्ट किया। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी वायु रडारों और एयर डिफेंस ठिकानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया।

पाकिस्तान की इन कार्रवाइयों का मकसद केवल सैन्य तनाव बढ़ाना नहीं, बल्कि धार्मिक और साम्प्रदायिक रंग देकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को धूमिल करना भी था। विदेश मंत्रालय की यह लगातार तीसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस थी, जिससे साफ है कि भारत सरकार इस मसले पर गंभीरता से काम कर रही है और हर झूठ का माकूल जवाब तथ्यों के साथ दे रही है।

सेना ने यह भी बताया कि पाकिस्तान लगातार नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलीबारी कर रहा है, जिसमें भारत के कुछ जवान घायल भी हुए हैं, लेकिन जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को कहीं ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा है।

कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की नापाक हरकतें एक बार फिर नाकाम साबित हुई हैं। भारत की सशक्त सैन्य तैयारी, जिम्मेदार कूटनीति और त्वरित कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।

ऑपरेशन सिन्दूर के बदला लेने की फिराक में था पाक, भारत ने किया पस्त

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के तहत पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इन हमलों में पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है।

ड्रोन हमलों में पाकिस्तानी रक्षा प्रणाली को भारी क्षति

भारतीय सेना द्वारा किए गए ड्रोन हमलों में पाकिस्तान के सियालकोट, लाहौर, कराची, रावलपिंडी, बहावलपुर, मियांवाली, चकवाल, गुजरांवाला, अटक और चोर जैसे शहरों में स्थित एयर डिफेंस यूनिट्स को निशाना बनाया गया। इन हमलों में पाकिस्तान की आधुनिक HQ-9 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को गंभीर नुकसान हुआ है। लाहौर के वाल्टन एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सायरन बजने लगे। स्थानीय नागरिकों ने आसमान में धुएं के बड़े-बड़े बादल देखे।

पाकिस्तानी हमले नाकाम, भारतीय एयर डिफेंस रहा मुस्तैद

पाकिस्तान ने 7 और 8 मई की दरमियानी रात को ड्रोन और मिसाइलों के ज़रिए जम्मू, श्रीनगर, अमृतसर, पठानकोट, भटिंडा, चंडीगढ़ और गुजरात के भुज जैसे शहरों पर हमलों की कोशिश की। लेकिन भारतीय काउंटर यूएएस ग्रिड और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया। भारतीय एजेंसियों ने कई स्थानों से हमलों के मलबे बरामद किए हैं, जिससे पाकिस्तानी साजिशों की पुष्टि होती है।

एलओसी पर भी फायरिंग तेज, नागरिकों की मौत

पाकिस्तानी सेना ने एलओसी के पुंछ, राजौरी, उरी, कुपवाड़ा और बारामुल्ला सेक्टरों में मोर्टार और भारी आर्टिलरी से फायरिंग बढ़ा दी है। भारतीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में अब तक 16 निर्दोष नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें तीन महिलाएं और पांच मासूम बच्चे शामिल हैं।

भारत की चेतावनी: शांति चाहते हैं, लेकिन कमजोरी नहीं

भारत सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय सेना शांति बनाए रखने के पक्ष में है, लेकिन यदि पाकिस्तान उकसावे वाली कार्रवाई करता है, तो उसे उसी की भाषा में जवाब दिया जाएगा। “हम तनाव नहीं चाहते, लेकिन अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे,” यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक गतिविधियां

रॉयटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट में लाहौर और अन्य शहरों में हुए हमलों की पुष्टि की गई है। अमेरिका, रूस और संयुक्त राष्ट्र की ओर से दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की जा रही है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा और जवाबी हमला है

आईपीसी का वृक्षारोपण अभियान: हरित भारत की दिशा में बड़ा कदम

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

नई दिल्ली | पर्यावरण संरक्षण को लेकर इंटरनेशनल प्रेस कम्युनिटी ने पूरे देश में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। 1 जून से शुरू होने वाला यह अभियान चरणबद्ध तरीके से देश के विभिन्न राज्यों में संचालित किया जाएगा।

संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीप्रकाश तिवारी द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें वृक्षारोपण को केवल एक प्रयास तक सीमित न रखकर, इसके संरक्षण और देखभाल पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया गया। इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई। इस योजना के तहत विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों में पौधारोपण किया जाएगा।

संस्था ने राज्य इकाइयों, स्वयंसेवी संगठनों, पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाने की योजना बनाई है। इस पहल का उद्देश्य न केवल हरित आवरण बढ़ाना है, बल्कि आम जनता को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है।

इस अभियान को सफल बनाने के लिए संस्था ने देशवासियों से सक्रिय भागीदारी की अपील की है। संस्था के सह सचिव उमाशंकर सिंह, कोषाध्यक्ष बिपिन पाणिग्रही, सचिव दिनेश दुबे, सलाहकार, दिनेश तिवारी और वरिष्ठ सदस्य सुशील मिश्रा ने इस प्रस्ताव को अनुमोदित किया।

पढ़िए, जातीय जनगणना से भाजपा को होने वाले फायदे और नुकसान की पड़ताल करती रिपोर्ट

अनुज हनुमत | navpravah.com 

लखनऊ | जातीय जनगणना से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में, जहां पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भाजपा की रणनीति ओबीसी और एससी समुदायों को साधने की है, जो पारंपरिक रूप से पार्टी के मजबूत वोट बैंक नहीं रहे हैं।

भाजपा के लिए संभावित लाभ:

– ओबीसी वोट बैंक : भाजपा ओबीसी समुदाय के नेताओं को बढ़ावा दे रही है, जैसे कि सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया और ओबीसी, महादलित और अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं को तरजीह दी गई। इससे पार्टी को ओबीसी वोटों में सेंध लगाने में मदद मिल सकती है।
– बिहार में बढ़त : बिहार में जातीय जनगणना के बाद होने वाले पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा को फायदा हो सकता है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि ओबीसी वोटर पहले भी उसे समर्थन देते रहे हैं।

– उत्तर प्रदेश में वापसी : उत्तर प्रदेश में भाजपा को ओबीसी और दलित वोटों की वापसी में मदद मिल सकती है। जातीय जनगणना से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जहां पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भाजपा की रणनीति ओबीसी और एससी समुदायों को साधने की है, जो पारंपरिक रूप से पार्टी के मजबूत वोट बैंक नहीं रहे हैं।

कुल मिलाकर, जातीय जनगणना से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन इसके लिए पार्टी को अपनी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा

भाजपा ने जातीय जनगणना को लागू करने के लिए यही समय चुनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

राजनीतिक लाभ
1. लोकसभा चुनाव 2029 : जातीय जनगणना को लागू करने से भाजपा को लोकसभा चुनाव 2029 में पूरा लाभ मिल सकता है, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जहां पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. वोट बैंक की राजनीति : भाजपा जातीय जनगणना के माध्यम से अपने वोट बैंक को मजबूत करने और नए वोट बैंक को आकर्षित करने की कोशिश कर सकती है।

सामाजिक और आर्थिक कारण-

1. सामाजिक न्याय : जातीय जनगणना से सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों के लिए।
2. आर्थिक विकास : जातीय जनगणना से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर उन समुदायों के लिए जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

अन्य कारण-

1. विपक्षी दलों का दबाव : विपक्षी दल जातीय जनगणना की मांग कर रहे थे, और भाजपा ने इसे लागू करने का फैसला करके विपक्षी दलों को जवाब देने की कोशिश की होगी।
2. भाजपा की रणनीति : भाजपा ने जातीय जनगणना को लागू करने का फैसला करके अपनी राजनीतिक रणनीति को बदलने की कोशिश की होगी, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में।

जातीय जनगणना के निर्णय के बाद सवर्ण समाज की नाराजगी से कई प्रभाव पड़ सकते हैं:

राजनीतिक प्रभाव-

1. वोट बैंक की नाराजगी : सवर्ण समाज की नाराजगी से भाजपा के वोट बैंक में दरार पड़ सकती है, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में।
2. चुनावी परिणाम : सवर्ण समाज की नाराजगी से चुनावी परिणामों पर असर पड़ सकता है, और भाजपा को नुकसान हो सकता है।

सामाजिक प्रभाव-

1. सामाजिक तनाव : सवर्ण समाज की नाराजगी से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के बीच तनाव पहले से ही है।
2. जातिगत विभाजन : जातीय जनगणना के निर्णय से जातिगत विभाजन बढ़ सकता है, और सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ सकता है।

अन्य प्रभाव-

1. राजनीतिक अस्थिरता : सवर्ण समाज की नाराजगी से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है, खासकर उन राज्यों में जहां भाजपा की सरकार है।
2. विपक्षी दलों का फायदा : सवर्ण समाज की नाराजगी से विपक्षी दलों को फायदा हो सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां भाजपा की सरकार है।

कुल मिलाकर, जातीय जनगणना के निर्णय के बाद सवर्ण समाज की नाराजगी से कई प्रभाव पड़ सकते हैं, जिनमें राजनीतिक, सामाजिक, और अन्य प्रभाव शामिल हैं।

UP: क्राइम पर सर्जिकल स्ट्राइक से शिक्षा को मिला नया आसमान

अनुज हनुमत | Navpravah.com 

उत्तर प्रदेश | प्रयागराज अब सिर्फ कुंभ, संगम या इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम से नहीं जाना जा रहा, बल्कि ‘माफिया मुक्त, शिक्षा युक्त’ नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। यह बदलाव एक दिन में नहीं आया, बल्कि यह सशक्त राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक पारदर्शिता और जन सहयोग का परिणाम है।

प्रयागराज, जो कभी देश के सर्वश्रेष्ठ शैक्षिक और सांस्कृतिक केंद्रों में शुमार होता था, बीते कुछ दशकों में अपराध, माफियागीरी और असुरक्षा की चपेट में आ गया था। शहर का वह गौरवशाली अतीत, जिसमें यहाँ से निकलने वाले छात्र UPSC, PCS, JEE और NEET जैसे परीक्षाओं में टॉप करते थे, माफिया के बढ़ते दबदबे के चलते कहीं दब सा गया था। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। माफिया के खिलाफ सीएम योगी के मार्गदर्शन में जो कदम उठाए गए उसके परिणाम आज सबके सामने हैं।

शक्ति दुबे और महक जायसवाल : नए प्रयागराज की पहचान-

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यूपी और प्रयागराज को नई पहचान दी है। प्रयागराज जो कभी आईएएस की फैक्ट्री कहा जाता था लेकिन कुछ दशकों में उसकी यह पहचान धूमिल हो चुकी थी। हाल ही में UPSC में टॉपर बनीं शक्ति दुबे ने प्रयागराज की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर फिर से स्थापित किया। शक्ति दुबे कहती हैं कि शिक्षा के लिए वातावरण का भी योगदान रहता है। पहले भी सिविल सर्विसेज के लिए अभ्यर्थी तैयारी करते थे लेकिन इसके लिए उपयुक्त वातावरण की जरूरत थी। अच्छे वातावरण में प्रतिभाएं आगे आ रही हैं। वहीं, इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में महक जायसवाल की सफलता ने यह सिद्ध किया कि सुरक्षित वातावरण में बेटियाँ भी सपने पूरे कर सकती हैं। प्रयागराज के बच्चा राम यादव इंटर कालेज की छात्रा महक जायसवाल ने 97.20 फीसदी अंक के साथ इंटर में पहला स्थान हासिल किया है। महक के पिता शिव प्रसाद जायसवाल कौशाम्बी में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते हैं। महक का कहना है कि पहले लड़कियों को अपने गांव से दूर पढ़ने जाने में डर लगता था। मां बाप भी तैयार नहीं होते थे लेकिन सुरक्षित वातावरण होने की वजह से मेरे माता पिता ने मुझे मेरे गांव कनैती से गांव से दूर मेरे विद्यालय भेजा। सुरक्षित माहौल में पढ़ाई की और अब कामयाब भी हो गए।

माफिया पर सर्जिकल स्ट्राइक से शिक्षा को मिला नया आसमान-

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रयागराज में माफिया राज पर करारी चोट की गई। कुख्यात माफिया की अवैध संपत्तियों पर बुलडोज़र चला, अपराधियों को जेल भेजा गया और जनता को यह भरोसा दिलाया गया कि अब कानून का राज चलेगा, किसी बाहुबल का नहीं। इस बदले हुए माहौल ने प्रयागराज की शैक्षिक पहचान को फिर से जीवित कर दिया। शिक्षा के जानकार भी इस बात को स्वीकार करते हैं। यूपीएससी टॉपर शक्ति दुबे की दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई प्रयागराज के एसएमसी घूरपुर से हुई। शक्ति के कॉलेज के प्रिंसिपल आशीष रंजन कहते हैं कामयाबी के लिए मानसिक तौर पर छात्राओं को तैयार करने के लिए उनके मन में बिना दबाव के निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी है। यह तभी आती है जब उन्हें और उनके परिजनों को सपने देखने में डर न लगे। बदले हालात ने सपने देखने की छूट दी है, कामयाबी आपके सामने है।

महक जायसवाल प्रयागराज के फूलपुर के भुलई का पूरा गांव के बच्चा राम यादव इंटर कॉलेज की छात्रा है। कॉलेज की प्रिंसिपल मनोरमा यादव कहती हैं कि कम से कम संसाधनों में अनुशासन और बच्चे भय मुक्त समाज में खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो उनकी प्रतिभा निखरकर सामने आती है। महक में कामयाबी की ललक थी । आर्थिक तंगी के बावजूद लगन और सुरक्षित वातावरण से उसने अपनी काबिलियत साबित कर दी।

भारत के इस फैसले से पानी के एक-एक बूँद के लिए तरसेगा पाकिस्तान

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया। आतंकियों ने बैसारन घाटी में घात लगाकर हमला किया, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई और 20 से ज्यादा घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली है, जो लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़ा है।

इस दर्दनाक घटना के बाद भारत ने अब पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक अहम बैठक हुई, जिसमें पांच बड़े फैसले लिए गए। विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने इन फैसलों की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

भारत के पांच कड़े कदम-

अटारी-वाघा बॉर्डर सील
भारत ने अटारी-वाघा सीमा को तुरंत प्रभाव से बंद करने का फैसला किया है। जिन लोगों के पास वैध यात्रा दस्तावेज हैं, उन्हें 1 मई 2025 तक लौटने की मोहलत दी गई है। इसके बाद दोनों देशों के बीच ज़मीनी आवाजाही पूरी तरह बंद हो जाएगी।

इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास बंद
भारत ने पाकिस्तान में स्थित अपना दूतावास बंद करने का एलान किया है। साथ ही, दोनों देशों के उच्चायोगों में कर्मचारियों की संख्या घटाकर 30 कर दी जाएगी। यह फैसला भी 1 मई से लागू होगा।

सिंधु जल समझौते पर रोक
भारत ने 1960 में हुए सिंधु जल समझौते को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, समझौता लागू नहीं होगा। इसका असर पाकिस्तान की खेती और जल आपूर्ति पर पड़ सकता है।

पाकिस्तानी सैन्य राजनायिकों को निकाला गया
नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा, नौसेना और वायुसेना सलाहकारों को “अवांछित व्यक्ति” घोषित कर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। भारत ने अपने सैन्य अधिकारियों को भी इस्लामाबाद से वापस बुला लिया है।

वीजा पर रोक
अब भारत, पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा जारी नहीं करेगा। पहले से जारी वीजा रद्द कर दिए गए हैं और भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने को कहा गया है।

हमले की पृष्ठभूमि और जमीनी हालात-

हमला बेहद सुनियोजित था। चार से छह आतंकियों ने पर्यटकों पर उस वक्त हमला किया, जब वे बैसारन घाटी का भ्रमण कर रहे थे। मारे गए लोगों में 24 भारतीय, एक नेपाली, एक स्थानीय कश्मीरी और एक यूएई नागरिक शामिल हैं। इस हमले में भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल और एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी भी शहीद हुए।

आतंकियों ने खासतौर पर गैर-मुस्लिम पर्यटकों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव और भय का माहौल बन गया है।

तेज और निर्णायक प्रतिक्रिया-

प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब दौरा बीच में छोड़कर बुधवार सुबह भारत वापसी की। दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ आपात बैठक की। गृहमंत्री अमित शाह ने स्वयं कश्मीर जाकर हालात का जायजा लिया और घायलों से मुलाकात की।

जांच और सुरक्षा तैयारियां-

हमले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई है। एनआईए ने तीन संदिग्ध आतंकियों—आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबू ताल्हा के स्केच जारी किए हैं। सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है।

दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं-

अमेरिका, फ्रांस, इजरायल, ईरान, रूस और यूरोपीय संघ ने हमले की कड़ी निंदा की है और भारत के साथ एकजुटता जताई है। वहीं पाकिस्तान ने हमले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया, लेकिन भारत ने इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है और पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप दोहराया है।

आगे की राह-

इन घटनाओं और फैसलों के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर हैं। जहां एक ओर भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को फिर दोहराया है, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक संबंधों में आई दरार और सिंधु जल समझौते पर रोक पाकिस्तान पर गंभीर असर डाल सकती है। पर्यटन उद्योग, खासतौर पर कश्मीर में, इस हमले से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बुकिंग्स रद्द हो रही हैं और पर्यटकों में डर का माहौल है।

फिलहाल, भारत की नजर हमले के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब करने और उन्हें सजा दिलाने पर है। आने वाले दिन इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।

रानीपुर टाइगर रिजर्व के विकास को मिलेगी गति

अनुज हनुमत | navpravah.com 

चित्रकूट | वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी द्वारा रानीपुर टाइगर रिजर्व चित्रकूट का आवश्यक दौरा किया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा टाइगर रिजर्व क्षेत्र का अवलोकन एवं सघन निरीक्षण किया गया। उस दौरान विभागाध्यक्ष द्वारा रानीपुर टाइगर रिजर्व के विकास के लिये मौजूद अधिकारियों को कई आवश्यक सुझाव भी दिए गए।

उन्होंने सुबह-सुबह वन क्षेत्र भ्रमण करते हुए चौरी वन क्षेत्र का भ्रमण किया। इस रास्ते से चलकर उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं और वन जीवों की स्थिति का भी अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने चौरी गेस्ट हाउस का भी निरीक्षण किया। इसके पश्चात मारकुंडी रेस्ट हाउस पहुंचकर डीएफओ, वार्डन, एसडीओ और रेंजर्स के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने कर्वी जिला मुख्यालय पहुंचकर जैव विविधता बोर्ड के सलाहकार ज्ञानेंद्र कटियार के साथ मिलकर प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय के परिसर में पौधरोपण भी किया।

जानकारी के अनुसार, अपने संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उन्होंने वन विभाग के जिले के अधिकारियों को निर्देशित किया कि गर्मियों में वन्यजीव को पानी पीने हेतु सुविधा जनक हेतु वाटर होल्स का निर्माण करवायें जाये एवं वन्य जीव संरक्षण एवं सर्वद्वन का उत्तम प्रबन्ध किया जाये। उन्होंने रानीपुर टाइगर रिवर्ज के सम्पूर्ण क्षेत्र के मैप डिजिटलाइजेशन करने हेतु भी मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया गया। प्रत्यूष कटियार को निर्देशित करते हुए कहा कि वर्ष 2025 में पेड़ लगाओं एवं पेड़ बचाओं (वृक्षारोपण अभियान) हेतु विशेष ध्यान दें, जिससे शतप्रतिशत वृक्षारोपण हो सके।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने फील्ड स्टाफ के साथ परिचर्चा करते हुये प्रोत्साहन एवं राजकीय कर्तव्य, सजगता एवं संवेदनशील हेतु निर्देशित किया। उन्होंने रानीपुर टाइगर रिजर्व में साइनेज बढ़ाने हेतु भी संबंधित अधिकारियों को निर्देश किया।

इस मौके पर डीएफओ प्रत्यूष कुमार कटियार, वन्य जीव प्रतिपालक दिलीप कुमार तिवारी, एसडीओ राजीव रंजन सिंह, रेंजर मो नदीम, सुशील श्रीवास्तव, अशोक जैन, नफीस खान, राजेंद्र नेगी, अपूर्व श्रीवास्तव,राजेश सोनकर एवं फील्ड स्टाफ मौजूद रहे।

ब्राह्मणों पर अनुराग कश्यप की अभद्र टिप्पणी, क्या है लीगल एंगल ?

एडवोकेट आनंद रूप द्विवेदी | navpravah.com 

नई दिल्ली | हाल ही में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर एक विवादास्पद टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने ब्राह्मणों पर मूत्र त्यागने जैसी अमर्यादित और अपमानजनक बात कही। इस टिप्पणी ने देशभर में सामाजिक और कानूनी बहस को जन्म दिया है। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली इस तरह की टिप्पणियाँ न केवल सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारत की न्याय व्यवस्था के दायरे में भी गंभीर रूप से विचारणीय होती हैं।

क्या है मामला?

दरअसल अनुराग कश्यप की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर सामने आई, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कहा कि मैं ब्राह्मण पर मूतूंगा…यह कथन न केवल अशोभनीय है, बल्कि भारत जैसे बहुजातीय और बहुधार्मिक देश में साम्प्रदायिक तनाव को भड़काने वाला माना जा सकता है। इस तरह की टिप्पणियाँ सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और भारत के संविधान में वर्णित समानताऔर धर्मनिरपेक्षताजैसे मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत क्या कानूनी प्रावधान हैं ?

अनुराग कश्यप की टिप्पणी को भारतीय दंड संहिता की निम्न धाराओं के अंतर्गत देखा जा सकता है:

1. धारा 196समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना:

यदि कोई व्यक्ति धर्म, जाति, जन्मस्थान, भाषा या किसी अन्य आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य या द्वेष फैलाने का प्रयास करता है, तो उसे इस धारा के अंतर्गत सज़ा दी जा सकती है। अनुराग की टिप्पणी इस धारा के अंतर्गत लाई जा सकती है, क्योंकि यह विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय को लक्षित करती है।

2. धारा 299धार्मिक भावनाओं को आहत करना:

जानबूझकर और दुर्भावना के साथ किसी धर्म या धार्मिक समुदाय की भावनाओं को आहत करने के लिए की गई कोई भी टिप्पणी इस धारा के अंतर्गत दंडनीय है। यदि यह प्रमाणित होता है कि अनुराग की टिप्पणी किसी धार्मिक भावना को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से की गई है, तो उनके खिलाफ इस धारा के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।

3. धारा 352शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना:

किसी व्यक्ति या समुदाय को जानबूझकर अपमानित करना जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है, यह भी दंडनीय अपराध है।

भारतीय न्याय व्यवस्था का दृष्टिकोण:

भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल उद्देश्य है निष्पक्षता, स्वतंत्रता और कानून का शासन। किसी भी नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)) का अधिकार है, परंतु यह स्वतंत्रता पूर्णतः निरंकुश नहीं है। अनुच्छेद 19(2) के तहत यह स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था”, “शालीनताऔर नैतिकताजैसे प्रतिबंधों के अधीन है।

इस दृष्टिकोण से यदि अनुराग कश्यप की टिप्पणी सामाजिक शांति को भंग करने वाली, धार्मिक द्वेष को उकसाने वाली या किसी विशेष जाति/धर्म के प्रति अपमानजनक सिद्ध होती है, तो न्यायपालिका इस पर कठोर कदम उठा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों ने भी अपने अनेक निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि hate speech या incitement to violence किसी भी प्रकार से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा में नहीं आता। अतः ऐसे मामलों में अदालतें अभियुक्त की मंशा, वक्तव्य का प्रभाव और समाज पर पड़ने वाले परिणामों का गहन परीक्षण करती हैं।

समाज और कानून का संतुलन:

भारतीय लोकतंत्र में सभी वर्गों, जातियों और धर्मों को समान सम्मान मिलना चाहिए। अनुराग कश्यप जैसे जन-संवाद माध्यमों से जुड़े व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक मंच पर संयमित भाषा का प्रयोग करें। कानून को बिना पक्षपात के काम करना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्तिचाहे वो आम नागरिक हो या कोई सेलिब्रिटीयदि समाज में ज़हर फैलाता है, तो उसे उसके दुष्परिणामों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाए।

अनुराग कश्यप की विवादास्पद टिप्पणी को केवल एक व्यक्तिगत राय कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकती है और भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय हो सकती है। भारत की न्याय व्यवस्था को ऐसे मामलों में सख्ती से कार्यवाही करनी चाहिए ताकि समाज में यह संदेश जाए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रताका मतलब किसी धर्म या जाति के अपमान की छूट नहीं है।

यदि यह टिप्पणी साबित होती है कि दुर्भावना और वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से की गई है, तो न्यायपालिका को निष्पक्ष और कठोर रुख अपनाकर इस पर उदाहरणात्मक निर्णय देना चाहिए।

(लेखक, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता हैं।)