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Monday, September 7, 2026
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दीवाली से पहले सरकार का तोहफा, जीएसटी दरों में बदलाव से बड़े राहत की उम्मीद

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ब्यूरो | navpravah.com 

नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अध्यक्षता में हो रही जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक जारी है। यह बैठक दो दिनों तक चलेगी और लिए गए फैसलों की घोषणा चार सितंबर को होगी। इस बैठक में केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हो रहे हैं। इस बार हो रही जीएसटी परिषद की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी दरों में बदलाव की घोषणा किया था। यह बदलाव जीएसटी लागू होने के आठ साल बाद होगी। परिषद ने इस बार जीएसटी दरों में भारी कटौती करने का प्रस्ताव रखा है। सरकार के इस प्रस्ताव का मकसद अमेरिका द्वारा लगाए टैरिफ के चुनौतियों से निपटने के लिए घरेलु स्तर पर मांग को बढ़ावा देने की कोशिश करना।

इसके पहले फरवरी में आयकर में बड़ी राहत देने के बाद अब जीएसटी दरों में बड़ी कटौती करने से देश में खपत बढ़ने की उम्मीद है। जून तिमाही में अर्थव्यवस्था में अप्रत्याशित रूप से 7.8% की उच्च दर ने इसके संकेत पहले ही दे दिए हैं।

इस बैठक में परिषद, हेयर ऑयल से लेकर छोटी कारों तक लगभग 400 वस्तुओं की कीमत कम करने पर विचार करेगा। रॉयटर्स ने ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी के पार्टनर मनोज मिश्रा के हवाले से बताया है कि अमेरिकी टैरिफ के कारण कपड़ा, ऑटो और संभवतः फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात पर असर पड़ रहा है। ऐसे में भारत को प्राथमिक विकास इंजन के रूप में घरेलू खपत पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

इस कदम के बाद से हिंदुस्तान यूनिलीवर, गोदरेज जैसी एफएमसीजी कंपनियों और सैमसंग जैसी इलेक्ट्रानिक्स कंपनियों को फायदे का अनुमान है। वहीं वाहनों की ब्रिकी से मारूति, टोयोटा मोटर्स और सुजुकी कार जैसी कंपनियों को बड़े राहत की उम्मीद है।

जानकारों के मुताबिक जीएसटी स्लैब को चार से घटाकर दो स्लैब में करने की योजना है। जीएसटी में लगने वाले 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत वाले स्लैब को हटाया जा सकता है। वहीं एक 40 प्रतिशत के नए स्लैब को जोड़ने का विचार किया जा रहा है। इसके तहत सिगरेट और महंगी कारों जैसी विलासितापूर्ण चीजों पर मोटा कर लगाने पर विचार किया जाना है। सरकार की योजना है कि रोजमर्रा में उपयोग होने वाली वस्तुओं को 5 प्रतिशत की श्रेणी में लाया जाए, जो फिलहाल 12 प्रतिशत वाले स्लैब में है।

जीएसटी सुधारों के लिए केंद्र की रूपरेखा के अनुसार, आठ क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है। इसमें कपड़ा, उर्वरक, नवीकरणीय ऊर्जा, मोटर वाहन, हस्तशिल्प, कृषि, स्वास्थ्य और बीमा के दरों में बदलाव से सबसे अधिक लाभ होगा।

सस्ते होने वाले अनुमानित वस्तुओं की सूची-

डेयरी प्रोडक्ट्स: मक्खन, पनीर, छाछ, पनीर जैसे उत्पाद।

रेडी टू इट फूड्स: जैम, अचार, स्नैक्स, चटनी जैसे उत्पाद।

पर्सनल केयर उत्पाद: टूथपेस्ट, शैम्पू, साबुन, टैल्कम पाउडर।

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स: एसी, टीवी, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन।

निजी वाहन: छोटी कारें, हाइब्रिड कारें, मोटरसाइकिलें, स्कूटर।

बीमा: लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर शून्य प्रतिशत जीएसटी का प्रस्ताव।

भागवत-राजे मुलाकात बनी चर्चा का केंद्र, बन सकती हैं भाजपा अध्यक्ष!

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली|  राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से मुलाकात की। वसुंधरा ने भागवत से लगभग 20 मिनट की बातचीत की। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच 20 मिनट की मुलाकात में कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल मचने लगा है।

गौरतलब है कि वसुंधरा राजे ने धौलपुर में एक रामकथा के दौरान वनवास को लेकर बयान दिया था और उसके एक दिन बाद ही उन्होंने कहा था कि ईश्वर पर अटूट विश्वास से किसी भी कार्य को पूरा किया जा सकता है, भले ही देर से हो। सियासी गलियारे में उनके इस बयान और भागवत के साथ मुलाकात के बाद चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। सूत्रों की मानें तो सिंधिया आरएसएस की पहली पसंद है। अगर वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनती हैं, तो भाजपा की पहली महिला अध्यक्ष होंगी।

बता दें कि आरएसएस प्रमुख इन दिनों 5 से 7 सितंबर तक होने वाली अखिल भारतीय समन्वय बैठक के लिए जोधपुर प्रवास पर हैं। भागवत से मुलाकात के बाद राजे सीधे सूरसागर स्थित बड़ा रामद्वारा पहुंचीं, जहां रामस्नेही संत रामप्रसाद जी के जन्मदिन की बधाई देने के साथ ही उनके साथ धार्मिक चर्चा भी की। राजे ने अजीत भवन में पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती में सफल हुए युवाओं से भी मुलाकात की और उन्हें हरसंभव मदद देने का आश्वासन भी दिया।

दिल्ली दंगे (साल 2020) के आरोपियों को नहीं मिली ज़मानत

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली |  दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2020 में हुए दंगों से जुड़े मामलें में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों को जमानत देने से इन्कार कर दिया।

मंगलवार को इस मामले पर न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शैलिंदर कौर की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने उमर खालिद, शरजील इमाम, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने जमानत याचिका दायर करते हुए दलील दी कि उनके उनके मुवक्किल निर्दोष हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि इस आधार पर उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। बचाव पक्ष ने कहा कि वो फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।

बता दें कि फरवरी 2020 में दिल्ली में हिंसा भड़की थी। इस हिंसा के साजिशकर्ता के रूप में उमर खालिद और शरजील इमाम पर आरोप लगे थे। पुलिस ने इनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था।

भावुक हुए नरेंद्र मोदी, कहा, “सोचा नहीं था कि दिवंगत माँ को गाली दी जाएगी”

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली |  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि राजद-कांग्रेस के मंच से उनकी मां को गालियां दी जाएंगी।

इस मुद्दे पर बोलते वक्त प्रधानमंत्री स्पष्ट रूप से भावुक दिख रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अपमान केवल उनकी मां का नहीं है, बल्कि यह बिहार की सभी माताओं-बहनों का भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मां हमारी दुनिया होती है। मां हमारा स्वाभिमान होती है। मैंने कभी कल्पना नहीं किया था कि इस संस्कृति संपन्न राज्य बिहार में ऐसा होगा। मेरी मां को राजद-कांग्रेस के मंच से गाली दी गई। मुझे मालूम है कि बिहार की हर मां को यह देखकर-सुनकर कितना बुरा लगा होगा। मुझे पता है जितनी पीड़ा मेरे दिल में हैं, बिहार के लोगों में भी उतनी ही पीड़ा है।

उन्होंने आगे कहा कि मेरी मां को राजद-कांग्रेस के मंच से गाली क्यों दी गई, जबकि मेरी मां का राजनीति से कोई संबंध नहीं था। मेरी मां ने मुझे खुद से दूर किया ताकि मैं आप जैसी मांओं की सेवा कर सकूं। आप सबको पता है कि मेरी मां जिंदा नहीं है। कुछ वर्ष पहले वह सौ वर्ष के हुई और उसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा, ‘माताओं और बहनों मैं आपका चेहरे देख सकता हूं और समझ सकता हूं कि आप लोगों को कितनी पीड़ा महसूस हुई। मैं कुछ माताओं के आंखों में आंसू देख पा रहा हूं, यह बहुत दुखी करने वाला और पीड़ादायक है।’

मोदी ने आगे कहा कि मेरी मां ने हमें बहुत गरीबी में पाला, वो अपने लिए एक साड़ी भी नहीं खरीदती थी जबकि एक-एक पैसा परिवार के लिए बचाती थी। मेरी मां की तरह देश की करोड़ों माएं रोज ऐसी ही तपस्या कर रही हैं।

भूकम्प से अफ़ग़ानिस्तान में हाहाकार, 800 से ज़्यादा की मौत, 2500 से अधिक घायल

भारत के 6 राज्यों में आया भूकंप, डर गये लोग
भारत के 6 राज्यों में आया भूकंप, डर गये लोग

ब्यूरो | navpravah.com

काबुल |  अफ़ग़ानिस्तान में रविवार देर रात आए तीव्र भूकम्प की वजह से लगभग 800 लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, लगभग 2500 से अधिक लोग घायल हैं। कुनार प्रांत के कई कस्बों में रविवार देर रात 6.0 की तीव्रता का भूकंप आया, जिससे भारी नुकसान हुआ।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक, रात 11:47 बजे आए भूकंप का केंद्र नंगरहार प्रांत के जलालाबाद शहर से 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में था। इसकी गहराई मात्र 8 किलोमीटर ही थी, जिसके कारण इलाके में अधिक नुकसान हुआ। इसके बाद भी इलाके में कई झटके आए।

सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार चैनलों से आए वीडियों में लोग ढहे हुए इमारतों के नीचे से शवों को ले जाते हुए दिख रहे हैं, जबकि कई लोग अपने हाथों से मलबा उठाते दिख रहे हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 800 से अधिक हो गई है। 2500 से ज्यादा लोग घायल है। ज्यादातर लोग कुनार प्रांत के हैं।

कुनार प्रांत के नूरगल इलाके के रहने वाले एक नागरिक ने बताया कि पूरे गांव में ही तबाही के मंजर हैं। बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग मलबे के नीचे हैं। हमें लोगों की जरूरत है, जो आकर हमारी मदद कर सकें।

एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि उसने अपनी आंखों के सामने घर ढहते और लोगों को मदद के लिए चीखते हुए देखा। नर्गल के माजा दारा इलाके में रहने वाले सादिकुल्लाह ने बताया कि उसकी नींद एक तेज धमाके से खुली, जो किसी बड़े तूफान के आने जैसा लग रहा था। वह दौड़कर अपने बच्चों के पास गया और उनमें से तीन को बचा पाया। वह परिवार के बाकि सदस्यों को बचाने के लिए बचाने ही जा रहा था कि इमारत उसके ऊपर गिर पड़ा।

स्वास्थ्य विभाग की प्रवक्ता शराफत जमान ने बताया कि बचाव कार्य जारी है। कुनार, नंगरहार और राजधानी काबुल से चिकित्सा दल इलाके में पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि कई इलाके से लोगों के हताहत होने की खबर नहीं मिल पाई है। इस कारण से अभी मौतों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है। तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि जान बचाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग किया जाएगा।

SCO शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात से टेंशन में ट्रम्प, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

ब्यूरो | navpravah.com 

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आतंकवाद, सीमा विवाद और व्यापार सहित कई अहम वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया और चीन से इस पर समर्थन मांगा। मोदी ने कहा कि भारत और चीन दोनों आतंकवाद के शिकार रहे हैं और सीमा पर शांति एवं सौहार्द संबंधों के समग्र विकास के लिए “बीमा” की तरह है।

वार्ता के दौरान शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिए और कहा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। इस पर आम सहमति बनी कि स्थिर और सौहार्दपूर्ण संबंध दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के लिए लाभकारी होंगे।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए। साथ ही, वैश्विक चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिति और टैरिफ मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में भारत और चीन के बीच बेहतर समझ और सहयोग की जरूरत है।

जम्मू में बाढ़ से मची तबाही, घर छोड़ भागने को मजबूर लोग

ब्यूरो | navpravah.com 

जम्मू। तवी नदी में आई बाढ़ की वजह से जम्मू के रिहाईशी इलाकों में हाहाकार मच गया है। अधिकतर स्थानों में लोगों के मकान का एक मंजिल बाढ़ की चपेट में आ गया है। तवी नदी में बाढ़ से जम्मू के राजीव कॉलोनी और जम्मू विश्वविद्यालय पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। यहां बाढ़ आने से कई परिवार घर छोड़ बाहर चले गए हैं। वहीं सरकार ने जम्मू विश्वविद्यालय के छात्रावास को खाली करा लिया है। राजीव कॉलोनी में ज्यादातर घरों के निचले तल जलमग्न हो गए हैं और इनमें रखा सामान भी बर्बाद हो गया। प्रशासन ने तवी नदी में बाढ़ आने का अलर्ट जारी किया था।

तवी का जलस्तर मंगलवार को बढ़ना शुरू हुआ और नदी ने दोपहर तक रौद्र रूप धारण कर लिया। जिसके बाद से राजीव कॉलोनी में पानी आना शुरू हो गया। पानी के स्तर को बढ़ता देख लोगों में अफरातफरी मच गई। लोगों ने आनन-फानन में सामान समेटना शुरू कर दिया। कोई गठरी बांध कर भागने लगा तो कोई अपने बच्चों को कंधे पर बैठाकर भागने लगा। जब लोग निकल रहे थे तब सड़कों पर पानी लगा हुआ था।

करीब एक घंटे की बारिश में राजीव कॉलोनी में तीन फुट से ज्यादा पानी लग गया। पूरी कॉलोनी जलमग्न हो चुकी थी। सड़क पर खड़ीं गाड़ियां बहती नजर आईं। विश्वविद्यालय के छात्र लोगों की मदद के लिए राजीव कॉलोनी पहुंच गए। उन्होंने लोगों को घरों से बाहर निकालने में मदद की। बहुत से परिवार अपना सामान बाहर नहीं निकाल पाए और उनके घर के निचला हिस्सा कीचड़ से भर गया।

राजीव कॉलोनी तवी नदी और जम्मू विश्वविद्यालय के बीच में बसा हुआ है। इस कॉलोनी में 300 घर हैं, ज्यादातर लोग यहां दूसरे जगहों के हैं और यहां किराए पर मकान लेकर रहते हैं। इन सभी लोगों को मकान छोड़कर जाना पड़ा। वहीं जम्मू विश्वविद्यालय के हालात भी ठीक नहीं है। विश्वविद्यालय के छात्रावास को खाली करा दिया गया है। बच्चे छात्रावास को खाली कर सुरक्षित स्थानों की तरफ जा रहे हैं।

मौसमी आफत के बीच जैसे ही मंगलवार की दोपहर बाद भगवती नगर तवी पुल के एक हिस्से के धंसने की सूचना मिली, शहर में अफरातफरी का माहौल बन गया। तवी नदी के खतरे के निशान के ऊपर बहने से तवी के अन्य तीन पुल पर भी आवाजाही बंद कर देने से घंटों दहशत का माहौल रहा। शहर के अधिकांश बाजारों में दोपहर दो बजे ही दुकानों के शटर गिर गए। शहर के ज्यादातर हिस्सों में भारी जाम की स्थिति रही।

SOGF ईस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप 2025 का हुआ भव्य आयोजन

खेल संवाददाता | navpravah.com

नई दिल्ली| भारत में ईस्पोर्ट्स को एक प्रतिस्पर्धी और मान्यता प्राप्त खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Skillhub Online Games Federation (SOGF) ने SOGF ईस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप 2025 का भव्य आयोजन 23 और 24 अगस्त को नोएडा में किया।

SOGF, जिसे ग्लोबल स्पोर्ट्स फेडरेशन द्वारा मान्यता प्राप्त भारत की एकमात्र संस्था होने का गौरव प्राप्त है, ने इस प्रतियोगिता के माध्यम से देशभर के सर्वश्रेष्ठ गेमर्स को एक मंच पर लाकर तकनीक, रणनीति और कौशल का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। यह प्रतियोगिता पूरी तरह ऑफलाइन और निशुल्क प्रवेश पर आधारित थी, जिसमें देशभर के चयनित खिलाड़ियों ने भाग लिया।

इस दो दिवसीय चैंपियनशिप की शुरुआत 23 अगस्त को SOGF के उपाध्यक्ष, ओलंपिक पदक विजेता एवं अर्जुन अवॉर्डी अशोक ध्यानचंद द्वारा ट्रॉफी के अनावरण के साथ हुई।

प्रतियोगिता का ग्रैंड फाइनल 24 अगस्त को शाम 5:00 बजे आयोजित किया गया, जिसके बाद शाम 6:00 बजे पुरस्कार वितरण समारोह में विजेता को ₹1,00,000 (एक लाख रुपए) की पुरस्कार राशि मुख्य अतिथियों द्वारा प्रदान की गई।

मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में आयोजन को मिला गौरवपूर्ण स्वरूप:

एडवोकेट नंदन झा – अध्यक्ष, इंटरनेशनल माइंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन (IMSA); संस्थापक एवं सलाहकार, SOGF

शंकर अग्रवाल, आईएएस (सेवानिवृत्त) – अध्यक्ष, SOGF

अशोक ध्यानचंद – उपाध्यक्ष, SOGF; ओलंपिक पदक विजेता; हॉकी वर्ल्ड कप पदक विजेता (स्वर्ण, रजत, कांस्य); अर्जुन अवार्डी

गुरशरण सिंह – महासचिव, SOGF; पूर्व महासचिव, पैरालंपिक समिति ऑफ इंडिया; सदस्य, एशियन पैरालंपिक समिति

SOGF ईस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप 2025 विजेता

EAFC 25 में विजेता इस प्रकार हैं:

🥇 पहला स्थान – कर्मन टिक्का

🥈 दूसरा स्थान – लोकमान्य चतुर्वेदी

🥉 तीसरा स्थान – गुरसीस सिंह

🏅 चौथा स्थान – अर्शदीप सिंह

टेकेन (Tekken) टूर्नामेंट के विजेता:

🥇 पहला स्थान – मोहम्मद फर्दीन

🥈 दूसरा स्थान – समीर खान

🥉 तीसरा स्थान – राहुल शर्मा (बूमर)

🏅 चौथा स्थान – हितेश खोरवाल

SOGF के संस्थापक एवं सलाहकार ने ऑनलाइन गेमिंग एक्ट का किया स्वागत

इस अवसर पर SOGF के संस्थापक एवं सलाहकार एडवोकेट नंदन झा ने सभी विजेता को बधाई देते हुए हाल ही में बना कानून “ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन अधिनियम, 2025” में ईस्पोर्ट्स को मान्यता देने के लिए भारत सरकार, खेल मंत्री और आईटी मंत्री को धन्यवाद दिया।

इस आयोजन ने न केवल देश के युवा गेमर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया, बल्कि यह SOGF के उस मिशन को भी आगे बढ़ाता है, जिसके तहत भारत में ईस्पोर्ट्स को एक वैध और संगठित खेल के रूप में मान्यता दिलाना लक्ष्य है।

SOGF ईस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप 2025 एक उदाहरण है कि कैसे तकनीक और खेल के मेल से भारत में ईस्पोर्ट्स की दिशा और दशा बदली जा सकती है। भविष्य में SOGF ऐसे और भी आयोजनों के माध्यम से देश के गेमिंग टैलेंट को वैश्विक मंचों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मानसून सत्र: 130वें संविधानिक संशोधन के बारे में ‘अ से ज्ञ’ तक जाने! आखिर क्यों बरपा है हंगामा?

अमित द्विवेदी | navpravah.com 

नई दिल्ली| बुधवार को संसद का एक अलग ही रूप देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह के ऊपर पर्चे फाड़ कर फेंके। यह घटना तब हुई जब अमित शाह संविधान के 130वें संशोधन के लिए लोकसभा में विधेयकों को पेश कर रहे थे। इस विधेयक के अनुसार, अब अगर प्रधानमंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर मामले में जिसकी सजा पांच साल या उससे अधिक की हो, उसके तहत 30 दिन या उससे अधिक दिनों तक कारावास में रहते हैं, तो उनके पास तीन विकल्प होंगे

  1. राज्यपाल मुख्यमंत्री के सलाह पर उन्हें पदमुक्त कर सकते हैं।
  2.  अगर मुख्यमंत्री सलाह देने में असफल हो जाते हैं तो मंत्री 31वें दिन स्वत: पदमुक्त हो जाएंगे।
  3. आरोप लगने पर वो खुद पद से इस्तीफा दे दे।

प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के लिए भी नियम इसी तरह लागू होता है। अगर वे भी किसी गंभीर आरोप में लगातार 30 दिन या उससे अधिक दिनों तक कारावास में रहते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देना होगा या 31वें दिन वो खुद पद के लिए अयोग्य साबित हो जाएंगे। इसी तरह से यह नियम मुख्यमंत्री पर भी लागू होगा।

इस एक विधेयक के अलावा गृह मंत्री ने दो और विधेयकों को पेश किया-

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025

यह विधेयक 2019 के अधिनियम की कमी को पूरा करता है। 2019 वाली अधिनियम के अनुसार, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री को आपराधिक आरोपों पर गिरफ्तार करने का कानून नहीं है। इस अधिनियम के तहत अब जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया जा सकता है।

केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक के नियमों को केंद्र शासित प्रदेशों, जैसे- दिल्ली, पुदुचेरी, आदि में लागू करने के लिए सरकार यह संशोधन विधेयक लेकर आई है। इसके तहत अगर केंद्र शासित प्रदेश का कोई मंत्री ऐसे गंभीर अपराध के मामले में गिरफ्तार होता है, जिसमें सजा पांच साल या इससे ज्यादा हो सकती है। ऐसे मंत्री को अगर कम से कम 30 दिन के लिए गिरफ्तार या हिरासत में रखा जाता है तो उसे मुख्यमंत्री की सलाह पर 31वें दिन तक उपराज्यपाल द्वारा पद से हटाया जा सकता है।

हालांकि यदि आरोप सिद्ध नहीं होते हैं, तो नेता वापस उसी पद आकर काम कर सकते हैं।

अब जब यह विधेयक लोकसभा में पेश हुआ तो विपक्ष ने विरोध करना शुरू कर दिया। विपक्ष ने लोकसभा में हंगामा किया और विधेयक के पर्चे फाड़कर अमित शाह के ऊपर फेंकने लगे और कुछ विपक्षी सांसद तो अमित शाह के पास आकर शोर करने लगे। प्रदर्शन की शुरूआत त्रिणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने की, उसके बाद विपक्ष के सांसद सामने आ गए। बीच बचाव में भाजपा सांसद भी आ गए वो विपक्षी सांसदों को दूर करते रहें। हंगामा इतना बरपा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को स्थगित कर दिया।

हालांकि इन विधयकों को 34 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है जो जांच करके संसद के अगले सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपेंगी।

विपक्ष इस बिल का खुलकर विरोध कर रहा है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे सुपर आपातकाल का दर्जा दे दिया है। एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन औवैसी ने इसे शक्तियों के पृथ्थकरण के सिद्धांत का उल्लघंन बताया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम एजेेंसियों को न्यायधीश बना देंगी जिससे वो जल्लाद हो जाएंगी। ओवैसी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह भारत को पुलिस राज्य बनाना चाहती हैं।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि यह अधिनियम संविधान के मूल ढ़ांचे को पूरी तरह से नष्ट करता है। ये तीनों विधेयक भारत के संविधान के मूलभूत स्वरूप के विरुद्ध हैं। भारत का संविधान कहता है कि आप तब तक बेगुनाह हैं जब तक आपका गुनाह साबित नहीं होता। आप किसी जांच अधिकारी या एसएचओ को हमारे प्रधानमंत्री का बॉस नहीं बना सकते हैं।

सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि अगर किसी पर कोई आरोप न भी हो, तो भी आरोप लगाए जा सकते हैं और इस सरकार में लगाए भी जा रहे हैं। लोगों को झूठे और गंभीर आरोपों में जेल में डाला जा रहा है। जिन राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं हैं, उन्हें सत्ता से हटाने का एक और तरीका इस सरकार द्वारा लाया जा रहा है।

आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, सरकार के पुराने बिलों में जनता का हित कम और अपने विरोधियों को नुकसान पहुंचाने की मंशा ज्यादा दिखाई देती है… मैं स्पीकर साहब से मांग करूंगा कि हमें जेपीसी का हिस्सा बनाया जाए।

विरोध बढ़ता देख भाजपा सांसदो ने मोर्चा संभाला। पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष को इस बिल से क्या दिक्क्त है? केजरीवाल जैसे लोग जेल जाते हैं और वहीं से सरकार चलाते हैं, यह बिल उन जैसे लोगों का ही इलाज है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्ष विरोध किस बात का कर रहा है, नैतिकता या भ्रष्टाचार का। भ्रष्टाचार के खिलाफ और नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की बात और उसके बाद कानून बनाने की बात करते हैं तो विपक्ष इसका विरोध क्यों करता है? आज लड़ाई साफ है कौन भ्रष्टाचारियों के साथ है-वो विपक्ष है और कौन भ्रष्टाचार मुक्त है वो भाजपा है और ये विरोध और इस तरह की हरकतें जो संसद में हुईं उसने लोकतंत्र को शर्मसार किया और ये भी दिखा दिया कि विपक्ष भ्रष्टाचार के साथ खड़ा है और भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए खड़ा है और भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है।

यह तो था बुधवार का घटनाक्रम। अब हम समझेंगे कि अभी तक इन आरोपों के बाद क्या प्रक्रिया होती है। अब तक किन चुनिंदा नेताओं को पद पर रहते हुए कारावास में जाना पड़ा।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अंतर्गत, यदि कोई सांसद या विधायक किसी गंभीर मामले में दो साल या उससे अधिक की सजा पाता है तो उसकी सदस्यता स्वत: ही रद्द हो जाएगी और अगर मामला भ्रष्टाचार, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में सजा पाते हैं तो सजा की अवधि देखें बिना ही उसे पद से हटाया जा सकता है।

वे हालिया मामले जिनमें जेल जा चुके हैं मुख्यमंत्री

  1. बीते दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी मामले के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। वो जेल तो गए लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ी थी। वो लगभग छह महीने जेल में थे और वहीं से दिल्ली सरकार की बागडोर संभाली थी। हालांकि जब वह जेल से बाहर आएं तब उन्होने इस्तीफा दिया और आप पार्टी की नेता आतिशी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया।

इसके अलावा 2023 में तमिलनाडु की द्रमुक सरकार में मंत्री वी. सेंथिल बालाजी एक कथित धनशोधन मामले में गिरफ्तार हुए थे। इसके बाद राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद से हटा दिया था। हालांकि, जब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बालाजी को जमानत मिली थी, तब तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने उन्हें फिर से पद सौंप दिया। इसे लेकर बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने चिंता जाहिर की थी और तमिलनाडु सरकार ने बालाजी को मंत्री परिषद से हटा दिया।

ऐसा ही एक मामला झाारखंड का है, जहां राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित भूमि घोटाले मामले में गिरफ्तार कर लिया जाता है। हालांकि उन्होंने जेल जाने से पहले उन्हीं के पार्टी के नेता चंपई सोरेन को कमान देकर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि जब वो कारावास से बाहर आए तो उन्होंने फिर से राज्य की कमान संभाल ली।

संशोधन की क्या है प्रक्रिया?

केंद्र सरकार इसे संविधान के अनुच्छेद 75 (केंद्र के लिए), अनुच्छेद 164 (राज्य के लिए) और अनुच्छेद 239 (कक) (केंद्र शासित प्रदेशों के लिए) के तहत संशोधित करना चाहती है। हालांकि यह संविधान संशोधन करना सरकार के लिए इतना आसान नहीं होगा। पहले लोकसभा में सरकार को 272+ सांसद और उपस्थित सदस्यों का 2/3 समर्थन चाहिए। फिर राज्यसभा में 123+ सांसद और उपस्थित सदस्यों का 2/3 समर्थन चाहिए। उसके बाद कम से कम 15 राज्यों विधानसभाओं से से मंजूरी मिलनी आवश्यक हैं और अंत में राष्ट्रपति औपचारिक स्वीकृति देंगे।

बाद में इस कानून को शीर्ष अदालत में चुनौती दी जा सकती है, जिसका सुप्रीम कोर्ट समीक्षा कर सकती है।

पक्ष और विपक्ष के दावों की समीक्षा

इस विधेयक के आने के बाद से दोनों तरफ के नेता अपना-अपना विचार दे रहे हैं। विपक्ष कह रहा है कि इस विधेयक के आने से संविधान के मूल ढ़ांचे का हनन होगा वहीं दूसरी तरफ सरकार कह रही कि इस कानून के आने से राजनीतिक शुचिता बनी रहेगी। विपक्ष कह रहा है कि अरविंद केजरीवाल का तो आरोप अभी सिद्ध नहीं हुआ है तो वो जेल से सरकार क्यों नहीं चला सकते? विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि आप नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सतेंद्र जैन को बाद में बाइज्जत बरी कर दिया गया, जबकि इससे उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि धूमिल हुई है। विपक्ष का आरोप है कि इस कानून के आने के बाद से केंद्र सरकार किसी पर भी झूठे आरोप लगाकर जेल में डाल देगी जिससे उसका राजनीतिक करियर दांव पर भी लग सकता है।

वहीं सरकार का कहना है कि इससे राजनीतिक शुचिता आएगी। जो अनैतिक लोग हैं वो राजनीति से दूर होंगे और अच्छे और स्वच्छ लोग रातनीति में हिस्सा ले सकेंगे। सरकार ने कहा कि अगर आप पर लगे आरोप गलत साबित होते हैं तो आप फिर से राजनीति में आ सकते और उसी पद पर बैठ सकते हैं। सरकार ने कहा कि विपक्ष के लोग डर क्यों रहे हैं? अगर वो इतने ही स्वच्छ हैं तो फिर इस कानून से डरना नहीं चाहिए।

हालांकि दोनों तरफ की कुछ कुछ बातें सही है। इस देश में किसी पर भी आरोप लगाना बहुत आसान है और न्यायपालिका पर काम का बोझ इतना है कि वो एक महीने में तो कभी कभी दूसरी सुनवाई की तारीख भी नहीं दे सकती। इसलिए किसी भी नेता का एक महीने से अधिक समय तक कारावास में रहना बहुत कठिन काम नहीं हो सकता। सरकार को इस प्रावधान के समय सीमा को लेकर एक बार फिर से विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि इस कानून से किसी की छवि बेहद धूमिल हो सकती है।

वहीं कुछ चीजें तो केवल विरोध का हिस्सा लग रही है। सरकार किसी की भी हो विपक्ष का काम केवल विरोध करना है, इस बार यह भी कुछ उसी तरह का हिस्सा लग रहा है। अब देखना यह है कि संयुक्त संसदीय समिति जिसमें दोनों तरफ के लोग हैं वो किस निष्कर्ष पर आती है।

44 वर्षों की परंपरा में फिर गूंजा ‘नंद के आनंद भयो’: कैपिटल पब्लिक स्कूल का जन्माष्टमी महोत्सव

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

नई दिल्ली। दिल्ली के कैपिटल पब्लिक स्कूल द्वारा इस वर्ष भी जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन अत्यंत धूमधाम से किया गया। यह कार्यक्रम पिछले 44 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में इस वर्ष भी हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक दूर-दूर से कार्यक्रम का आनंद उठाने के लिए आए।

बच्चों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण ढंग से दर्शाया गया। बाल गोपाल की लीलाओं, माखन चोरी, और रासलीला जैसी झांकियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बच्चों की कला, समर्पण और प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया।

इस भव्य आयोजन के सूत्रधार रहे कैपिटल पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ समाजसेवी अशोक मेंदीरत्ता, जो अपने परिवार सहित इस कार्यक्रम को हर वर्ष आयोजित करते हैं। उनका उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों में सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना और समाज में सौहार्द का संदेश देना है।


कार्यक्रम में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, अभिभावकों और समाजसेवियों की भी उपस्थिति रही। कैपिटल पब्लिक स्कूल द्वारा आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव अब केवल एक विद्यालय का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। वरिष्ठ समाजसेवी अशोक मेंदीरत्ता और उनके परिवार का योगदान इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने में सराहनीय है।