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Tuesday, July 28, 2026
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भावुक हुए नरेंद्र मोदी, कहा, “सोचा नहीं था कि दिवंगत माँ को गाली दी जाएगी”

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली |  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि राजद-कांग्रेस के मंच से उनकी मां को गालियां दी जाएंगी।

इस मुद्दे पर बोलते वक्त प्रधानमंत्री स्पष्ट रूप से भावुक दिख रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अपमान केवल उनकी मां का नहीं है, बल्कि यह बिहार की सभी माताओं-बहनों का भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मां हमारी दुनिया होती है। मां हमारा स्वाभिमान होती है। मैंने कभी कल्पना नहीं किया था कि इस संस्कृति संपन्न राज्य बिहार में ऐसा होगा। मेरी मां को राजद-कांग्रेस के मंच से गाली दी गई। मुझे मालूम है कि बिहार की हर मां को यह देखकर-सुनकर कितना बुरा लगा होगा। मुझे पता है जितनी पीड़ा मेरे दिल में हैं, बिहार के लोगों में भी उतनी ही पीड़ा है।

उन्होंने आगे कहा कि मेरी मां को राजद-कांग्रेस के मंच से गाली क्यों दी गई, जबकि मेरी मां का राजनीति से कोई संबंध नहीं था। मेरी मां ने मुझे खुद से दूर किया ताकि मैं आप जैसी मांओं की सेवा कर सकूं। आप सबको पता है कि मेरी मां जिंदा नहीं है। कुछ वर्ष पहले वह सौ वर्ष के हुई और उसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा, ‘माताओं और बहनों मैं आपका चेहरे देख सकता हूं और समझ सकता हूं कि आप लोगों को कितनी पीड़ा महसूस हुई। मैं कुछ माताओं के आंखों में आंसू देख पा रहा हूं, यह बहुत दुखी करने वाला और पीड़ादायक है।’

मोदी ने आगे कहा कि मेरी मां ने हमें बहुत गरीबी में पाला, वो अपने लिए एक साड़ी भी नहीं खरीदती थी जबकि एक-एक पैसा परिवार के लिए बचाती थी। मेरी मां की तरह देश की करोड़ों माएं रोज ऐसी ही तपस्या कर रही हैं।

भूकम्प से अफ़ग़ानिस्तान में हाहाकार, 800 से ज़्यादा की मौत, 2500 से अधिक घायल

भारत के 6 राज्यों में आया भूकंप, डर गये लोग
भारत के 6 राज्यों में आया भूकंप, डर गये लोग

ब्यूरो | navpravah.com

काबुल |  अफ़ग़ानिस्तान में रविवार देर रात आए तीव्र भूकम्प की वजह से लगभग 800 लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, लगभग 2500 से अधिक लोग घायल हैं। कुनार प्रांत के कई कस्बों में रविवार देर रात 6.0 की तीव्रता का भूकंप आया, जिससे भारी नुकसान हुआ।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक, रात 11:47 बजे आए भूकंप का केंद्र नंगरहार प्रांत के जलालाबाद शहर से 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में था। इसकी गहराई मात्र 8 किलोमीटर ही थी, जिसके कारण इलाके में अधिक नुकसान हुआ। इसके बाद भी इलाके में कई झटके आए।

सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार चैनलों से आए वीडियों में लोग ढहे हुए इमारतों के नीचे से शवों को ले जाते हुए दिख रहे हैं, जबकि कई लोग अपने हाथों से मलबा उठाते दिख रहे हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 800 से अधिक हो गई है। 2500 से ज्यादा लोग घायल है। ज्यादातर लोग कुनार प्रांत के हैं।

कुनार प्रांत के नूरगल इलाके के रहने वाले एक नागरिक ने बताया कि पूरे गांव में ही तबाही के मंजर हैं। बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग मलबे के नीचे हैं। हमें लोगों की जरूरत है, जो आकर हमारी मदद कर सकें।

एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि उसने अपनी आंखों के सामने घर ढहते और लोगों को मदद के लिए चीखते हुए देखा। नर्गल के माजा दारा इलाके में रहने वाले सादिकुल्लाह ने बताया कि उसकी नींद एक तेज धमाके से खुली, जो किसी बड़े तूफान के आने जैसा लग रहा था। वह दौड़कर अपने बच्चों के पास गया और उनमें से तीन को बचा पाया। वह परिवार के बाकि सदस्यों को बचाने के लिए बचाने ही जा रहा था कि इमारत उसके ऊपर गिर पड़ा।

स्वास्थ्य विभाग की प्रवक्ता शराफत जमान ने बताया कि बचाव कार्य जारी है। कुनार, नंगरहार और राजधानी काबुल से चिकित्सा दल इलाके में पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि कई इलाके से लोगों के हताहत होने की खबर नहीं मिल पाई है। इस कारण से अभी मौतों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है। तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि जान बचाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग किया जाएगा।

SCO शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात से टेंशन में ट्रम्प, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

ब्यूरो | navpravah.com 

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आतंकवाद, सीमा विवाद और व्यापार सहित कई अहम वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया और चीन से इस पर समर्थन मांगा। मोदी ने कहा कि भारत और चीन दोनों आतंकवाद के शिकार रहे हैं और सीमा पर शांति एवं सौहार्द संबंधों के समग्र विकास के लिए “बीमा” की तरह है।

वार्ता के दौरान शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिए और कहा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। इस पर आम सहमति बनी कि स्थिर और सौहार्दपूर्ण संबंध दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के लिए लाभकारी होंगे।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए। साथ ही, वैश्विक चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिति और टैरिफ मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में भारत और चीन के बीच बेहतर समझ और सहयोग की जरूरत है।

जम्मू में बाढ़ से मची तबाही, घर छोड़ भागने को मजबूर लोग

ब्यूरो | navpravah.com 

जम्मू। तवी नदी में आई बाढ़ की वजह से जम्मू के रिहाईशी इलाकों में हाहाकार मच गया है। अधिकतर स्थानों में लोगों के मकान का एक मंजिल बाढ़ की चपेट में आ गया है। तवी नदी में बाढ़ से जम्मू के राजीव कॉलोनी और जम्मू विश्वविद्यालय पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। यहां बाढ़ आने से कई परिवार घर छोड़ बाहर चले गए हैं। वहीं सरकार ने जम्मू विश्वविद्यालय के छात्रावास को खाली करा लिया है। राजीव कॉलोनी में ज्यादातर घरों के निचले तल जलमग्न हो गए हैं और इनमें रखा सामान भी बर्बाद हो गया। प्रशासन ने तवी नदी में बाढ़ आने का अलर्ट जारी किया था।

तवी का जलस्तर मंगलवार को बढ़ना शुरू हुआ और नदी ने दोपहर तक रौद्र रूप धारण कर लिया। जिसके बाद से राजीव कॉलोनी में पानी आना शुरू हो गया। पानी के स्तर को बढ़ता देख लोगों में अफरातफरी मच गई। लोगों ने आनन-फानन में सामान समेटना शुरू कर दिया। कोई गठरी बांध कर भागने लगा तो कोई अपने बच्चों को कंधे पर बैठाकर भागने लगा। जब लोग निकल रहे थे तब सड़कों पर पानी लगा हुआ था।

करीब एक घंटे की बारिश में राजीव कॉलोनी में तीन फुट से ज्यादा पानी लग गया। पूरी कॉलोनी जलमग्न हो चुकी थी। सड़क पर खड़ीं गाड़ियां बहती नजर आईं। विश्वविद्यालय के छात्र लोगों की मदद के लिए राजीव कॉलोनी पहुंच गए। उन्होंने लोगों को घरों से बाहर निकालने में मदद की। बहुत से परिवार अपना सामान बाहर नहीं निकाल पाए और उनके घर के निचला हिस्सा कीचड़ से भर गया।

राजीव कॉलोनी तवी नदी और जम्मू विश्वविद्यालय के बीच में बसा हुआ है। इस कॉलोनी में 300 घर हैं, ज्यादातर लोग यहां दूसरे जगहों के हैं और यहां किराए पर मकान लेकर रहते हैं। इन सभी लोगों को मकान छोड़कर जाना पड़ा। वहीं जम्मू विश्वविद्यालय के हालात भी ठीक नहीं है। विश्वविद्यालय के छात्रावास को खाली करा दिया गया है। बच्चे छात्रावास को खाली कर सुरक्षित स्थानों की तरफ जा रहे हैं।

मौसमी आफत के बीच जैसे ही मंगलवार की दोपहर बाद भगवती नगर तवी पुल के एक हिस्से के धंसने की सूचना मिली, शहर में अफरातफरी का माहौल बन गया। तवी नदी के खतरे के निशान के ऊपर बहने से तवी के अन्य तीन पुल पर भी आवाजाही बंद कर देने से घंटों दहशत का माहौल रहा। शहर के अधिकांश बाजारों में दोपहर दो बजे ही दुकानों के शटर गिर गए। शहर के ज्यादातर हिस्सों में भारी जाम की स्थिति रही।

SOGF ईस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप 2025 का हुआ भव्य आयोजन

खेल संवाददाता | navpravah.com

नई दिल्ली| भारत में ईस्पोर्ट्स को एक प्रतिस्पर्धी और मान्यता प्राप्त खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Skillhub Online Games Federation (SOGF) ने SOGF ईस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप 2025 का भव्य आयोजन 23 और 24 अगस्त को नोएडा में किया।

SOGF, जिसे ग्लोबल स्पोर्ट्स फेडरेशन द्वारा मान्यता प्राप्त भारत की एकमात्र संस्था होने का गौरव प्राप्त है, ने इस प्रतियोगिता के माध्यम से देशभर के सर्वश्रेष्ठ गेमर्स को एक मंच पर लाकर तकनीक, रणनीति और कौशल का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। यह प्रतियोगिता पूरी तरह ऑफलाइन और निशुल्क प्रवेश पर आधारित थी, जिसमें देशभर के चयनित खिलाड़ियों ने भाग लिया।

इस दो दिवसीय चैंपियनशिप की शुरुआत 23 अगस्त को SOGF के उपाध्यक्ष, ओलंपिक पदक विजेता एवं अर्जुन अवॉर्डी अशोक ध्यानचंद द्वारा ट्रॉफी के अनावरण के साथ हुई।

प्रतियोगिता का ग्रैंड फाइनल 24 अगस्त को शाम 5:00 बजे आयोजित किया गया, जिसके बाद शाम 6:00 बजे पुरस्कार वितरण समारोह में विजेता को ₹1,00,000 (एक लाख रुपए) की पुरस्कार राशि मुख्य अतिथियों द्वारा प्रदान की गई।

मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में आयोजन को मिला गौरवपूर्ण स्वरूप:

एडवोकेट नंदन झा – अध्यक्ष, इंटरनेशनल माइंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन (IMSA); संस्थापक एवं सलाहकार, SOGF

शंकर अग्रवाल, आईएएस (सेवानिवृत्त) – अध्यक्ष, SOGF

अशोक ध्यानचंद – उपाध्यक्ष, SOGF; ओलंपिक पदक विजेता; हॉकी वर्ल्ड कप पदक विजेता (स्वर्ण, रजत, कांस्य); अर्जुन अवार्डी

गुरशरण सिंह – महासचिव, SOGF; पूर्व महासचिव, पैरालंपिक समिति ऑफ इंडिया; सदस्य, एशियन पैरालंपिक समिति

SOGF ईस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप 2025 विजेता

EAFC 25 में विजेता इस प्रकार हैं:

🥇 पहला स्थान – कर्मन टिक्का

🥈 दूसरा स्थान – लोकमान्य चतुर्वेदी

🥉 तीसरा स्थान – गुरसीस सिंह

🏅 चौथा स्थान – अर्शदीप सिंह

टेकेन (Tekken) टूर्नामेंट के विजेता:

🥇 पहला स्थान – मोहम्मद फर्दीन

🥈 दूसरा स्थान – समीर खान

🥉 तीसरा स्थान – राहुल शर्मा (बूमर)

🏅 चौथा स्थान – हितेश खोरवाल

SOGF के संस्थापक एवं सलाहकार ने ऑनलाइन गेमिंग एक्ट का किया स्वागत

इस अवसर पर SOGF के संस्थापक एवं सलाहकार एडवोकेट नंदन झा ने सभी विजेता को बधाई देते हुए हाल ही में बना कानून “ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन अधिनियम, 2025” में ईस्पोर्ट्स को मान्यता देने के लिए भारत सरकार, खेल मंत्री और आईटी मंत्री को धन्यवाद दिया।

इस आयोजन ने न केवल देश के युवा गेमर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया, बल्कि यह SOGF के उस मिशन को भी आगे बढ़ाता है, जिसके तहत भारत में ईस्पोर्ट्स को एक वैध और संगठित खेल के रूप में मान्यता दिलाना लक्ष्य है।

SOGF ईस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप 2025 एक उदाहरण है कि कैसे तकनीक और खेल के मेल से भारत में ईस्पोर्ट्स की दिशा और दशा बदली जा सकती है। भविष्य में SOGF ऐसे और भी आयोजनों के माध्यम से देश के गेमिंग टैलेंट को वैश्विक मंचों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मानसून सत्र: 130वें संविधानिक संशोधन के बारे में ‘अ से ज्ञ’ तक जाने! आखिर क्यों बरपा है हंगामा?

अमित द्विवेदी | navpravah.com 

नई दिल्ली| बुधवार को संसद का एक अलग ही रूप देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह के ऊपर पर्चे फाड़ कर फेंके। यह घटना तब हुई जब अमित शाह संविधान के 130वें संशोधन के लिए लोकसभा में विधेयकों को पेश कर रहे थे। इस विधेयक के अनुसार, अब अगर प्रधानमंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर मामले में जिसकी सजा पांच साल या उससे अधिक की हो, उसके तहत 30 दिन या उससे अधिक दिनों तक कारावास में रहते हैं, तो उनके पास तीन विकल्प होंगे

  1. राज्यपाल मुख्यमंत्री के सलाह पर उन्हें पदमुक्त कर सकते हैं।
  2.  अगर मुख्यमंत्री सलाह देने में असफल हो जाते हैं तो मंत्री 31वें दिन स्वत: पदमुक्त हो जाएंगे।
  3. आरोप लगने पर वो खुद पद से इस्तीफा दे दे।

प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के लिए भी नियम इसी तरह लागू होता है। अगर वे भी किसी गंभीर आरोप में लगातार 30 दिन या उससे अधिक दिनों तक कारावास में रहते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देना होगा या 31वें दिन वो खुद पद के लिए अयोग्य साबित हो जाएंगे। इसी तरह से यह नियम मुख्यमंत्री पर भी लागू होगा।

इस एक विधेयक के अलावा गृह मंत्री ने दो और विधेयकों को पेश किया-

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025

यह विधेयक 2019 के अधिनियम की कमी को पूरा करता है। 2019 वाली अधिनियम के अनुसार, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री को आपराधिक आरोपों पर गिरफ्तार करने का कानून नहीं है। इस अधिनियम के तहत अब जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया जा सकता है।

केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक के नियमों को केंद्र शासित प्रदेशों, जैसे- दिल्ली, पुदुचेरी, आदि में लागू करने के लिए सरकार यह संशोधन विधेयक लेकर आई है। इसके तहत अगर केंद्र शासित प्रदेश का कोई मंत्री ऐसे गंभीर अपराध के मामले में गिरफ्तार होता है, जिसमें सजा पांच साल या इससे ज्यादा हो सकती है। ऐसे मंत्री को अगर कम से कम 30 दिन के लिए गिरफ्तार या हिरासत में रखा जाता है तो उसे मुख्यमंत्री की सलाह पर 31वें दिन तक उपराज्यपाल द्वारा पद से हटाया जा सकता है।

हालांकि यदि आरोप सिद्ध नहीं होते हैं, तो नेता वापस उसी पद आकर काम कर सकते हैं।

अब जब यह विधेयक लोकसभा में पेश हुआ तो विपक्ष ने विरोध करना शुरू कर दिया। विपक्ष ने लोकसभा में हंगामा किया और विधेयक के पर्चे फाड़कर अमित शाह के ऊपर फेंकने लगे और कुछ विपक्षी सांसद तो अमित शाह के पास आकर शोर करने लगे। प्रदर्शन की शुरूआत त्रिणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने की, उसके बाद विपक्ष के सांसद सामने आ गए। बीच बचाव में भाजपा सांसद भी आ गए वो विपक्षी सांसदों को दूर करते रहें। हंगामा इतना बरपा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को स्थगित कर दिया।

हालांकि इन विधयकों को 34 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है जो जांच करके संसद के अगले सत्र से पहले रिपोर्ट सौंपेंगी।

विपक्ष इस बिल का खुलकर विरोध कर रहा है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे सुपर आपातकाल का दर्जा दे दिया है। एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन औवैसी ने इसे शक्तियों के पृथ्थकरण के सिद्धांत का उल्लघंन बताया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम एजेेंसियों को न्यायधीश बना देंगी जिससे वो जल्लाद हो जाएंगी। ओवैसी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह भारत को पुलिस राज्य बनाना चाहती हैं।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि यह अधिनियम संविधान के मूल ढ़ांचे को पूरी तरह से नष्ट करता है। ये तीनों विधेयक भारत के संविधान के मूलभूत स्वरूप के विरुद्ध हैं। भारत का संविधान कहता है कि आप तब तक बेगुनाह हैं जब तक आपका गुनाह साबित नहीं होता। आप किसी जांच अधिकारी या एसएचओ को हमारे प्रधानमंत्री का बॉस नहीं बना सकते हैं।

सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि अगर किसी पर कोई आरोप न भी हो, तो भी आरोप लगाए जा सकते हैं और इस सरकार में लगाए भी जा रहे हैं। लोगों को झूठे और गंभीर आरोपों में जेल में डाला जा रहा है। जिन राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं हैं, उन्हें सत्ता से हटाने का एक और तरीका इस सरकार द्वारा लाया जा रहा है।

आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, सरकार के पुराने बिलों में जनता का हित कम और अपने विरोधियों को नुकसान पहुंचाने की मंशा ज्यादा दिखाई देती है… मैं स्पीकर साहब से मांग करूंगा कि हमें जेपीसी का हिस्सा बनाया जाए।

विरोध बढ़ता देख भाजपा सांसदो ने मोर्चा संभाला। पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष को इस बिल से क्या दिक्क्त है? केजरीवाल जैसे लोग जेल जाते हैं और वहीं से सरकार चलाते हैं, यह बिल उन जैसे लोगों का ही इलाज है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्ष विरोध किस बात का कर रहा है, नैतिकता या भ्रष्टाचार का। भ्रष्टाचार के खिलाफ और नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की बात और उसके बाद कानून बनाने की बात करते हैं तो विपक्ष इसका विरोध क्यों करता है? आज लड़ाई साफ है कौन भ्रष्टाचारियों के साथ है-वो विपक्ष है और कौन भ्रष्टाचार मुक्त है वो भाजपा है और ये विरोध और इस तरह की हरकतें जो संसद में हुईं उसने लोकतंत्र को शर्मसार किया और ये भी दिखा दिया कि विपक्ष भ्रष्टाचार के साथ खड़ा है और भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए खड़ा है और भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है।

यह तो था बुधवार का घटनाक्रम। अब हम समझेंगे कि अभी तक इन आरोपों के बाद क्या प्रक्रिया होती है। अब तक किन चुनिंदा नेताओं को पद पर रहते हुए कारावास में जाना पड़ा।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अंतर्गत, यदि कोई सांसद या विधायक किसी गंभीर मामले में दो साल या उससे अधिक की सजा पाता है तो उसकी सदस्यता स्वत: ही रद्द हो जाएगी और अगर मामला भ्रष्टाचार, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में सजा पाते हैं तो सजा की अवधि देखें बिना ही उसे पद से हटाया जा सकता है।

वे हालिया मामले जिनमें जेल जा चुके हैं मुख्यमंत्री

  1. बीते दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी मामले के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। वो जेल तो गए लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ी थी। वो लगभग छह महीने जेल में थे और वहीं से दिल्ली सरकार की बागडोर संभाली थी। हालांकि जब वह जेल से बाहर आएं तब उन्होने इस्तीफा दिया और आप पार्टी की नेता आतिशी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया।

इसके अलावा 2023 में तमिलनाडु की द्रमुक सरकार में मंत्री वी. सेंथिल बालाजी एक कथित धनशोधन मामले में गिरफ्तार हुए थे। इसके बाद राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद से हटा दिया था। हालांकि, जब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बालाजी को जमानत मिली थी, तब तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने उन्हें फिर से पद सौंप दिया। इसे लेकर बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने चिंता जाहिर की थी और तमिलनाडु सरकार ने बालाजी को मंत्री परिषद से हटा दिया।

ऐसा ही एक मामला झाारखंड का है, जहां राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित भूमि घोटाले मामले में गिरफ्तार कर लिया जाता है। हालांकि उन्होंने जेल जाने से पहले उन्हीं के पार्टी के नेता चंपई सोरेन को कमान देकर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि जब वो कारावास से बाहर आए तो उन्होंने फिर से राज्य की कमान संभाल ली।

संशोधन की क्या है प्रक्रिया?

केंद्र सरकार इसे संविधान के अनुच्छेद 75 (केंद्र के लिए), अनुच्छेद 164 (राज्य के लिए) और अनुच्छेद 239 (कक) (केंद्र शासित प्रदेशों के लिए) के तहत संशोधित करना चाहती है। हालांकि यह संविधान संशोधन करना सरकार के लिए इतना आसान नहीं होगा। पहले लोकसभा में सरकार को 272+ सांसद और उपस्थित सदस्यों का 2/3 समर्थन चाहिए। फिर राज्यसभा में 123+ सांसद और उपस्थित सदस्यों का 2/3 समर्थन चाहिए। उसके बाद कम से कम 15 राज्यों विधानसभाओं से से मंजूरी मिलनी आवश्यक हैं और अंत में राष्ट्रपति औपचारिक स्वीकृति देंगे।

बाद में इस कानून को शीर्ष अदालत में चुनौती दी जा सकती है, जिसका सुप्रीम कोर्ट समीक्षा कर सकती है।

पक्ष और विपक्ष के दावों की समीक्षा

इस विधेयक के आने के बाद से दोनों तरफ के नेता अपना-अपना विचार दे रहे हैं। विपक्ष कह रहा है कि इस विधेयक के आने से संविधान के मूल ढ़ांचे का हनन होगा वहीं दूसरी तरफ सरकार कह रही कि इस कानून के आने से राजनीतिक शुचिता बनी रहेगी। विपक्ष कह रहा है कि अरविंद केजरीवाल का तो आरोप अभी सिद्ध नहीं हुआ है तो वो जेल से सरकार क्यों नहीं चला सकते? विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि आप नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सतेंद्र जैन को बाद में बाइज्जत बरी कर दिया गया, जबकि इससे उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि धूमिल हुई है। विपक्ष का आरोप है कि इस कानून के आने के बाद से केंद्र सरकार किसी पर भी झूठे आरोप लगाकर जेल में डाल देगी जिससे उसका राजनीतिक करियर दांव पर भी लग सकता है।

वहीं सरकार का कहना है कि इससे राजनीतिक शुचिता आएगी। जो अनैतिक लोग हैं वो राजनीति से दूर होंगे और अच्छे और स्वच्छ लोग रातनीति में हिस्सा ले सकेंगे। सरकार ने कहा कि अगर आप पर लगे आरोप गलत साबित होते हैं तो आप फिर से राजनीति में आ सकते और उसी पद पर बैठ सकते हैं। सरकार ने कहा कि विपक्ष के लोग डर क्यों रहे हैं? अगर वो इतने ही स्वच्छ हैं तो फिर इस कानून से डरना नहीं चाहिए।

हालांकि दोनों तरफ की कुछ कुछ बातें सही है। इस देश में किसी पर भी आरोप लगाना बहुत आसान है और न्यायपालिका पर काम का बोझ इतना है कि वो एक महीने में तो कभी कभी दूसरी सुनवाई की तारीख भी नहीं दे सकती। इसलिए किसी भी नेता का एक महीने से अधिक समय तक कारावास में रहना बहुत कठिन काम नहीं हो सकता। सरकार को इस प्रावधान के समय सीमा को लेकर एक बार फिर से विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि इस कानून से किसी की छवि बेहद धूमिल हो सकती है।

वहीं कुछ चीजें तो केवल विरोध का हिस्सा लग रही है। सरकार किसी की भी हो विपक्ष का काम केवल विरोध करना है, इस बार यह भी कुछ उसी तरह का हिस्सा लग रहा है। अब देखना यह है कि संयुक्त संसदीय समिति जिसमें दोनों तरफ के लोग हैं वो किस निष्कर्ष पर आती है।

44 वर्षों की परंपरा में फिर गूंजा ‘नंद के आनंद भयो’: कैपिटल पब्लिक स्कूल का जन्माष्टमी महोत्सव

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

नई दिल्ली। दिल्ली के कैपिटल पब्लिक स्कूल द्वारा इस वर्ष भी जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन अत्यंत धूमधाम से किया गया। यह कार्यक्रम पिछले 44 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में इस वर्ष भी हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक दूर-दूर से कार्यक्रम का आनंद उठाने के लिए आए।

बच्चों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण ढंग से दर्शाया गया। बाल गोपाल की लीलाओं, माखन चोरी, और रासलीला जैसी झांकियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बच्चों की कला, समर्पण और प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया।

इस भव्य आयोजन के सूत्रधार रहे कैपिटल पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ समाजसेवी अशोक मेंदीरत्ता, जो अपने परिवार सहित इस कार्यक्रम को हर वर्ष आयोजित करते हैं। उनका उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों में सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना और समाज में सौहार्द का संदेश देना है।


कार्यक्रम में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, अभिभावकों और समाजसेवियों की भी उपस्थिति रही। कैपिटल पब्लिक स्कूल द्वारा आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव अब केवल एक विद्यालय का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। वरिष्ठ समाजसेवी अशोक मेंदीरत्ता और उनके परिवार का योगदान इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने में सराहनीय है।

उपराष्ट्रपति चुनाव: संजय राउत के बयान से एक बार फिर मची खलबली

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

नई दिल्ली | शिवसेना उद्धव गुट के सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि राजग चुनाव जीतने के लिए आंकड़े को लेकर आश्वस्त नहीं है, इसलिए वे विपक्षी दलों से संपर्क कर रहे हैं। राउत ने सवाल उठाया कि जब आपके पास बहुमत है, तो आपको विपक्ष के समर्थन की जरूरत क्यों पड़ रही है।

चार अगस्त को भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। राजग की तरफ से सी पी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया गया है जबकि इंडिया गठबंधन की ओर से बी सदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार हैं। आंकड़ों को देखें तो राजग का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। राजग के पास दोनों सदनों की संख्या को मिलाकर उपराष्ट्रपति पद के लिए बहुमत नजर आ रहा है, लेकिन राउत के इस बयान ने चुनाव को रोचक बना दिया है।

अगर बहुमत है तो विपक्ष से क्यों मांग रहे वोट?

दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि विपक्ष के पास संख्याबल कम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के नेताओं ने कई विपक्षी दलों से आधिकारिक तौर पर संपर्क किया और वोट की अपील की। राउत ने कहा कि अगर राजग को लगता है कि उनके पास पर्याप्त संख्याबल है तो वो विपक्षी दलों से वोट की अपील क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि राजग की स्थिति उतनी भी मजबूत नहीं है जितनी दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बार भी सत्ताधारी गठबंधन अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने से पहले विपक्ष से संवाद करने में असफल रहा।

राउत ने सी पी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब प्रवर्तन निदेशालय ने झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की थी, तब सोरेन राजभवन मे ही थे। राउत के अनुसार यह पूरी कारवाई संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस वक्त राधाकृष्णन ने न तो ईडी अधिकारियों को रोका और न ही संवैधानिक दायरे में अपनी भूमिका निभाई।

संजय राउत ने आगे कहा कि विपक्ष की यह लड़ाई केवल एक पद के लिए नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष तानाशाही प्रवृति और उसे समर्थन देने वाले ताकतों के खिलाफ खड़ा है।

बिहार चुनाव: भाजपा पिछड़ रही है या अंदरखाने कुछ चल रहा है ? जानिए दस बड़ी बातें

अमित द्विवेदी | navpravah.com 

नई दिल्ली | देश में कहीं भी चुनाव हो भारतीय जनता पार्टी अपने अ​भियान को महीनों पहले ही शुरू कर देती है, लेकिन बिहार चुनाव में पार्टी की ओर से तैयारियां थोड़ी धीमी लग रहीं हैं। नंवबर में राज्य में चुनाव होने हैं, बिहार के ज्यादातर पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है। इंडिया ब्लॉक की ओर से तेजस्वी और राहुल मतदाता अ​धि​कार रैली निकाल रहे हैं। 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुए इस रैली का समापन एक सितंबर को पटना के गांधी मैदान में होगा। राहुल की यह रैली उनके पुराने भारत जोड़ो यात्रा और भारत न्याय यात्रा की ही तरह है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इस यात्रा को सफल बोलते हैं और कुछ असफल। हालांकि राहुल का कहना है कि वो इस यात्रा के माध्यम से देश में हुए क​थित वोटचोरी और विशेष गहन पुनरीक्षण में हुए धांधली को जनता के सामने पेश करेंगे। उन्होंने कहा है कि वो बिहार में एक भी वोट चोरी नहीं होने देंगे।

भाजपा इस चुनावी अभियान में पीछे लग रही है, इसके कई कारण हैं
1. नए चेहरे, सीमित असर-
बिहार में हर पार्टी ने अपने चेहरे का एलान कर दिया है, भाजपा नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। हालांकि पार्टी ने पिछले कई महीनों में नए चेहरों को प्रवेश दिया है। आनन्द मिश्रा, नागमणि जैसे नए चेहरों को पार्टी में जोड़ा तो गया है, लेकिन उनका जनाधार काफी कम है। भाजपा के पास अपना खुद का कोई नेता ना होना चिंता का विषय है, इसलिए भाजपा अन्य राज्यों की तरह इस चुनाव में अपना दमखम नहीं दिखा पा रही है।
2. सहयोगी दलों से टिकट बंटवारा तय नहीं-
राजग गठबंधन में अभी सीटों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों की मानें तो चिराग पासवान भी इस बार विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। वो पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारना चाहते हैं। गठबंधन में शामिल ‘हम’ पार्टी भी पहले से ज्यादा सीटों पर अपना दावा ठोंकने की कोशिश में है। वहीं मुख्य पार्टी जनता दल और भाजपा में भी अनबन की स्थिति बनी हुई है। इस कारण से भी भाजपा अपना जोर नहीं लगा पा रही है।

3. विपक्ष की एकजुटता-

बिहार के चुनाव में इस बार राजग के मुकाबले इंडिया ब्लॉक ज्यादा मजबूत लग रही है। तेजस्वी और राहुल के नेतृत्व में बिहार की यह जोड़ी और उनके द्वारा निकाली जा रही मतदाता अधिकार रैली विपक्ष एकजुट दिख रहा है और यही एकजुटता भाजपा के लिए चुनौती बनते जा रहा है।

4. जनसुराज की चुनौती-

कभी प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर, आज उन्हीं की प्रार्टी के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। बिहार में जनसुराज पार्टी की घोषणा करते हुए ही उन्होंने कहा था कि या तो वो पूरी तरह से चुनाव पलट देंगे या तो पिछड़ जाएंगे। अभी जिस तरह से वो चुनावी अभियान में जुटे हैं, उन्हें देखकर लग रहा है कि अभी चुनाव प्रचार में भाजपा उनकी पार्टी से काफी दूर है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो प्रशांत किशोर बिहार के युवाओं की पहली पसंद माने जा रहे हैं, उन्होंने युवाओं को रोजगार देने की बड़ी बात कही है, जिससे युवा जुड़े हुए भी लग रहे हैं। इस तरह से प्रशांत किशोर का उभरकर आना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा के पास अभी प्रशांत के बराबर के नेता नहीं है, जिसके कारण वो चुनावी अभियान में पिछड़ते नजर आ रही है।

5. सीमांचल की चुनौती-

बिहार की जीत की लिए सीमांचल के बिना भाजपा की सरकार बननी मुश्किल है। पिछले चुनावों में अमित शाह ने बड़ी ही सूक्ष्म अंदाज में बांग्लादेशी घुसपैठ का मसला उठाया। आतंकवाद का मसला उठाया। इस क्रम में सीमांचल का दौरा भी कई बार किया। उनका सीमांचल मिशन 2015 में मिली शिकस्त के बाद ही शुरू हुआ। सितम्बर 2022 में तो किशनगंज और पूर्णिया में जनसभा भी की, लेकिन उन्हें उस तरह के परिणाम नहीं मिले। इस बार भाजपा इस क्षेत्र के लिए एक अलग योजना बना सकती है। भाजपा चाहती है कि सीमांचल क्षेत्र की सीटों पर जदयू चुनाव लड़े, ताकि मुस्लिम सीटों पर राजग की सरकार बन सके, इन्हीं सब योजनाओं को लेकर भाजपा में मंथन जारी है।

6. नीतीश कुमार की स्थिति-

नीतीश कुमार की साख अब पहले जैसे नहीं रही। उनकी राजनीतिक निष्ठा पासे की तरह पलटती रही, जिससे नुकसान हुआ है। वहीं उनके खराब स्वास्थ्य और सरकार की कार्यशैली के कारण उनके प्रति विश्वास में कमी आई है, लेकिन यह भी स्थिति नहीं आई कि भाजपा उनसे पल्ला झाड़कर अकेले चुनाव लड़ ले। फिलहाल भाजपा अभी आश्वस्त नहीं कि वह अकेले चुनाव लड़कर चुनाव जीत सकती है। इस हिसाब से लगता है कि भाजपा अगर अकेले चुनाव लड़ेगी, तो शायद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी, लेकिन इतनी हैसियत नहीं है कि अकेले सरकार बना लें। ऐसे में नीतीश कुमार को चुनाव तक साथ रखना लाजमी है। इस कारण से भी भाजपा चुनाव प्रचार में पिछड़ती दिख रही है।

7. भाजपा का अपना चेहरा ना होना-
बिहार में हर दल का एक नेता राज्य स्तर पर है। कांग्रेस के पास कन्हैया कुमार जैसा नेता है, जो युवा होकर नेतृत्व कर सकता है। वहीं राजद के पास तेजस्वी यादव हैं, जो पूर्व में उपमुख्यमंत्री की कुर्सी भी संभाल चुके हैं। वहीं भाजपा इस मामले में शून्य दिखती है। उनके पास उस स्तर का नेता नहीं है, जो तेजस्वी यादव को टक्कर दे सके। उपमुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी तो हैं लेकिन उनके पास वह क्षमता नहीं है , जो तेजस्वी के जनाधार को मात दे सके।
8. जदयू को खत्म करना चाहती है भाजपा-
भाजपा में हमेशा महत्वाकांक्षा रही है कि अपने दम पर उनकी सरकार बनें। बिहार में नीतीश कुमार भाजपा की जरूरत हैं, उनके बिना भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती है। इस चुनाव में भी उनकी जरूरत पड़ेगी। दोनों ही इस रिश्ते से खुश नहीं हैं लेकिन इसे निभाया जा रहा है। साल 2010 में भी भाजपा की कार्यकारिणी के समय नरेंद्र मोदी को लेकर एक विवाद भी हो गया था। इसके कारण दोनों नेताओं का डिनर भी रद्द हो गया था। भाजपा का काडर अभी बिहार में उतना मजबूत नहीं है और न ही कोई ऐसा जन नेता उभरा जो पार्टी का संपूर्ण नेतृत्व संभाल सके। यही वजह है कि साल 2013 में जब नीतीश कुमार ने गठबंधन बदल राजद में गए और फिर भाजपा में आए तो भी भाजपा ने उनका स्वागत किया।
भाजपा के अभी दो उप मुख्यमंत्री और 21 मंत्री हैं, वहीं जेडीयू के 13 मंत्री हैं। पिछली बार जेडीयू की 43 सीट आई थी और भाजपा 74 सीट आई थी। यह अंतर बढ़ता जा रहा है और निश्चित रूप से भाजपा जदयू के स्पेस को कम करने की कोशिश कर रही है। भाजपा चाहती है कि उसका कोई नेता बिहार में बड़ा बनकर उभरे। इसको भी एक कारण भाजपा के प्रचार में पीछे रहने का माना जा रहा है।

9. एसआईआर और वोटचोरी का मुद्दा-

राहुल गांधी अपने यात्रा में भाजपा पर इन दोनों मुद्दे पर आरोप लगा रहे हैं। जब से उन्होंने आरोप लगाया तब से  भाजपा के अभियान पर फर्क पड़ा है। इस बार बिहार चुनाव से पहले सबसे ज़्यादा चर्चा एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों वोटरों के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। कांग्रेस और आरजेडी का कहना है कि यह साजिश विशेष वर्गों—दलित, महादलित, आदिवासी और पिछड़े समुदायों- को चुनाव से दूर करने की है। भाजपा और चुनाव आयोग इस आरोप को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया हर राज्य में होती है और इसका मकसद केवल फर्जी वोटर हटाना और सूची को पारदर्शी बनाना है। आयोग ने यह भी कहा कि सभी दलों को समय रहते ड्राफ्ट वोटर लिस्ट देखने और सुधार करने का मौका दिया गया था, लेकिन कई दलों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि इस विवाद ने विपक्ष को भाजपा पर सीधा हमला करने का मौका दे दिया है। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए अभियान को और धार दे दी है।

10. राहुल की मतदाता अधिकार रैली के मुकाबले कमजोर अभियान करना-

इंडिया गठबंधन ने राहुल गांधी की अगुवाई में 1300 किमी लंबी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की है। इस यात्रा का मकसद केवल संगठन मज़बूत करना नहीं है, बल्कि यह संदेश देना है कि लोकतंत्र को बचाना ज़रूरी है और किसी भी हाल में वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस यात्रा ने विपक्ष को एक साझा मंच दिया है। तेजस्वी यादव खुले तौर पर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री का चेहरा बताते हुए जनता को यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार में महागठबंधन केंद्र की राजनीति को प्रभावित करने का दम रखता है। कन्हैया कुमार जैसे युवा नेता भी खुलकर सामने आए हैं और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रहे हैं। यात्रा में जुट रही भीड़ और सोशल मीडिया पर इसकी गूँज ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया है। विपक्ष यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह न केवल सत्ता विरोधी लहर को भुनाना चाहता है, बल्कि एक नया राजनीतिक एजेंडा भी स्थापित करना चाहता है। भाजपा के पास फिलहाल इस यात्रा का कोई विकल्प नहीं है इसलिए वह चुनाव प्रचार में पिछड़ती दिख रही है।

बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारी में सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। विपक्ष ने राहुल गांधी की यात्रा और एसआईआर विवाद को चुनावी हथियार बना लिया है। राजग भी पीछे नहीं है, लेकिन सीट बंटवारे की गुत्थी, नए चेहरों का सीमित असर और विपक्ष की एकजुटता ने भाजपा को “थोड़ा पीछे” खड़ा कर दिया है।  हालांकि राजनीति का खेल अंतिम हफ्तों में बदलता है। अगर भाजपा और राजग सही समय पर अपनी रणनीतियों को तेज कर दें और केंद्र की योजनाओं का प्रचार कर गाँव-गाँव तक पहुँचा दें, तो स्थिति पलट भी सकती है। लेकिन फिलहाल के हालात में यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहार का चुनाव इस बार बेहद रोचक, अप्रत्याशित और बहुस्तरीय होने जा रहा है।

आइजोल को मिली रेल कनेक्टिविटी की ऐतिहासिक सौगात

न्यूज डेस्क | navpravah.com

आइजोल | मिज़ोरम के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला है। आज़ादी के पूरे 77 वर्ष बीत जाने के बाद पहली बार राज्य की राजधानी आइजोल देश के विस्तृत रेल नेटवर्क से जुड़ने जा रही है। यह न केवल मिज़ोरम के विकास की दृष्टि से एक बड़ा कदम है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

बैराबी से आइजोल तक पहली ट्रेन-

नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे से मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने नवप्रवाह मीडिया नेटवर्क से बात की। उन्होंने बताया कि अब तक मिज़ोरम के लोग केवल बैराबी रेलवे स्टेशन तक ही रेल सुविधा का लाभ उठा पाते थे, जो असम-मिज़ोरम सीमा पर स्थित है। लेकिन अब बैराबी-साईरंग रेल लाइन पूरी हो जाने के बाद राजधानी आइजोल तक ट्रेनों का संचालन संभव हो पाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन करने वाले हैं, जिसके बाद दिल्ली से सीधे आइजोल तक रेल यात्रा संभव होगी।

दुर्गम इलाकों में इंजीनियरिंग का चमत्कार-

बैराबी-सैरांग रेल लाइन मात्र 51.38 किलोमीटर लंबी है, किंतु इस छोटे से सफर में रेल को 50 सुरंगों और 150 से अधिक पुलों से गुजरना होगा। कल्पना कीजिए, हर एक किलोमीटर पर एक सुरंग और हर तिहाई किलोमीटर पर एक पुल! यह अपने आप में इंजीनियरिंग का चमत्कार है।

मुख्य अभियंता विनोद कुमार के अनुसार, इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती थी – भौगोलिक परिस्थितियां। घने जंगल, लगातार बारिश, और भूस्खलन इस परियोजना के लिए बाधा बने रहे। समुद्र तल से 81 मीटर ऊंचाई पर पुलों का निर्माण करना किसी परीक्षा से कम नहीं था।

मौसम और भूगोल बने चुनौती-

मिज़ोरम में साल के लगभग 8 महीने बारिश रहती है। ऐसे में रेलवे इंजीनियरों को मुश्किल से चार-पाँच महीनों का ही समय कार्य के लिए मिल पाता था। वह भी तब, जब मौसम साथ दे। कई बार बारिश या भूस्खलन के कारण कार्य हफ्तों तक ठप रहा।

करीब दो वर्षों तक तो निर्माण सामग्री पहुँचाने तक में अड़चनें आईं, क्योंकि संकरी सड़कों पर अक्सर भूस्खलन हो जाता था। बाद में कार्ययोजना बदली गई और राज्य सरकार व एजेंसियों के सहयोग से परियोजना को गति मिली।

मिज़ोरम के लिए नए विकास के द्वार-

इस रेल लाइन का बनना मिज़ोरम की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद अहम है।

अर्थव्यवस्था: अब माल परिवहन सस्ता और आसान होगा। स्थानीय उत्पाद—बांस, फल, हस्तशिल्प—देशभर में तेज़ी से पहुँच पाएंगे।

पर्यटन: मिज़ोरम की नैसर्गिक सुंदरता अब सीधे रेलमार्ग से जुड़ जाएगी। इससे पूर्वोत्तर को देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।

रणनीतिक महत्व: मिज़ोरम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरा है। रेल कनेक्टिविटी से सीमाई इलाकों की सुरक्षा और रसद व्यवस्था और भी मज़बूत होगी।

एक प्रतीकात्मक बदलाव-

यह परियोजना केवल रेल लाइन का निर्माण नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत को “मेन्स्ट्रीम इंडिया” से जोड़ने का एक प्रतीक है। लंबे समय से यह इलाका बुनियादी ढांचे की कमी और दूरी की वजह से बाकी देश से कटा-कटा महसूस करता था। लेकिन अब यह रेलवे लाइन न सिर्फ यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि मिज़ोरम को राष्ट्रीय आर्थिक परिदृश्य में और सशक्त स्थान दिलाएगी।