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Monday, August 31, 2026
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पुरुषों में तेजी से बढ़ रहा है ये कैंसर, रहें सावधान

कैंसर
कैंसर

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

कैंसर ऐसा रोग है, जो धीरे-धीरे वैश्विक महामारी का रूप लेता जा रहा है, कैंसर कई प्रकार के होते हैं, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कैंसर लगभग सौ से भी ज्यादा प्रकार के होते हैं।

पुरुषों में सबसे ज्यादा हेड, गला, फेफड़े, प्रोस्टेट, कोलन, ओसेफेगस कैंसर के मामले सामने आते हैं जबकि महिलाओं में होने वाले कैंसरों में ब्रेस्ट, कर्विक्स, गैलब्लैडर, ओवरी और लंग प्रमुख हैं।

एक स्टडी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में दिल्ली वालों को गैलब्लैडर कैंसर होने का खतरा भी बढ़ रहा है। 1998 में दिल्ली में पुरुषों को अपनी जकड़ में लेने वाले कैंसर में गैलब्लैडर कैंसर 24वें नंबर पर था जबकि महिलाओं को होने वाले कैंसर के मामलों में पांचवे नंबर पर था।

14 वर्षों बाद 2012 में जीबीसी की रैकिंग बहुत ऊपर पहुंच गई है। 2012 में जीबीसी की रैकिंग 9वें स्थान पर पहुंच गई है और महिलाओं को होने वाले कैंसर में तीसरे नंबर पर है।

एम्स की टीम ने दिल्ली में गैलब्लैडर कैंसर के मामलों पर 25 वर्षों के डेटा का विश्लेषण किया है। यह डेटा सरकार के पॉपुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम से लिया गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि हालांकि गैलब्लैडर होने के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है लेकिन मोटापा और पर्यावरणीय घटक इस चिंताजनक बीमारी के जिम्मेदार हो सकते हैं।

एम्स के भीमराव अमेबडकर इंस्टिट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल के हेड प्रोफेसर जीके रथ ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, दिल्ली गैलब्लैडर कैंसर के मामले में भारत में दूसरे स्थान पर है। भारत में 1 लाख की आबादी पर जीबीसी के 11 मामले आते हैं।

जीबीसी सबसे खतरनाक कैंसर में से एक है, अधिकतर मामले बहुत देरी से पता चलते हैं, उस स्थिति में सर्जरी नहीं की जा सकती है। डॉ. रथ के मुताबिक, डायग्नोसिस के एक साल के भीतर अधिकतर मरीजों की मौत हो जाती है।

Salman Khan का BIGBOSS 12 First Look Revealled | Salman Khan Reveals JODI THEME | Karan Arjun

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नदियों में प्रदूषण का मामला: NGT ने तीन सदस्यीय कमेटी का किया गठन

प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए NGT ने गठित किया तीन सस्यीय कमिटी

एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हिंडन, कृष्णा और काली नदियों में प्रदूषण के मामले में एनजीटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस एसयू खान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

इस कमेटी में रिटायर जज के अलावा एक पर्यावरण मंत्रालय के वैज्ञानिक और एक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक शामिल होंगे, ये कमेटी एनजीटी के 8 अगस्त के आदेश का पालन कैसे हो रहा है, इसकी निगरानी करेगी।

एनजीटी ने 8 अगस्त को अपने आदेश में इन नदियों को दूषित कर रही 124 उद्योगों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, इसके अलावा एनजीटी ने प्रदूषण फैला रही इंडस्ट्रीज को तत्काल प्रभाव से बंद करने का भी आदेश दिया था। कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा था कि इन नदियों के प्रदूषण का शिकार हुए लोगों के लिए तुरन्त हेल्थ बेनीफिट स्कीम तैयार करे और प्रदूषित पानी निकालने वाले हेडपंपों को बंद किया जाए।

इससे पहले एनजीटी ने एक महीने के अंदर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों में प्रदूषित पानी देने वाले सभी हैंडपंप और बोरवेल सील करने का आदेश दिया था, इसमें गाजियाबाद, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गौतमबुद्धनगर शामिल हैं। एनजीटी ने राज्य सरकारको आदेश में कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिंडन, कृष्णी और काली नदी की वजह से भूजल प्रदूषित हो रहा है, इसमें सल्फेट, फ्लोराइड, कैडमियम, आयरन, निकल और मरकरी जैसे विषैले तत्व मिल रहे हैं, इसलिए प्रदूषित पानी देने वाले सभी बोरवेल और हैंडपंप तत्कालप्रभाव से सील किए जाएं।

आपको बता दें कि एनजीटी एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैंसर से 50 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है, एनजीटी ने एक समिति का गठन किया था, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तरप्रदेश जल निगम के अधिकारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संयुक्त रूप से नदियों और जलाशयों का सर्वेक्षण करेंगे।

मनीषा दयाल की जेडीयू-आरजेडी के नेताओं के साथ तस्वीर हो रही वायरल

आसरा गृह संचालिका

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

पटना के आसरा गृह की दो लड़कियों की मौत के बाद संचालक चिन्तन और संचालिका मनीषा दयाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आसरा गृह की संचालिका मनीषा दयाल की बिहार के पूर्व मंत्री श्याम रजक (जेडयू), पूर्व मंत्री शिवचन्द्र राम (RJD) और आजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के साथ तस्वीरें वायरल हो रही है।

अभी मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड का मामला शांत भी नहीं हुआ है और एक और नया मामला सामने आ गया है, तस्वीर वायरल होने पर आरजेडी प्रवक्ता भाई वीरेंद्र और कांग्रेस के विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा ने बयान दिया है कि नेताओं के साथ कोई भी तस्वीर ले सकता है।

उन्होंने ये भी कहा है कि यह कोई मामला नहीं है बल्कि जिस तरह से पटना आश्रय होम का मामला सामने आया है और मुजफ्फरपुर की घटना के बाद जो भी बालिका गृह संदेह के दायरे में है उनकी जांच पूरी तरह कराई जानी चाहिए।

वहीं श्याम रजक ने इस मामले में कहा है कि मैं राज्य और राजधानी के सभी कार्यक्रमों में जाता हूं, किस प्रोग्राम में कौन फोटे किसके साथ खिंचवा लेता है उससे हमको कोई मतलब नहीं है।

आसरा गृह की दो लड़कियों की मौत के मामले में कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं, इस मामले में पीएमसीएच के डॉक्टर का कहना है कि लड़कियों की पीएससीएच लाए जाने से पहले ही मौत हो चुकी थी। नेपाली नगर में संचालित आसरा गृह में एक लड़की सहित दो महिलाओं की संदिग्ध मौत होने का मामला प्रकाश में आने पर समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कर दी है।

तमिलनाडु: करूणानिधि की मौत के बाद शुरू हुई गद्दी की लड़ाई

करुणानिधि
करुणानिधि
सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के प्रमुख एम. करुणानिधि की मौत के बाद पार्टी की कमान संभालने के लिए उनके बेटों के बीच जंग छिड़ गई है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करुणानिधि के बड़े बेटे एमके अलागिरी ने पार्टी पर दावेदारी पेश की है।
आज करुणानिधि के समाधि स्थल पर पहुंचे अलागिरी ने कहा, पिता सही कहते थे, पूरा परिवार मेरे साथ है, तमिलनाडु में पार्टी के सभी समर्थक भी मेरे साथ हैं। वे सभी केवल मुझे प्रोत्साहित कर रहे हैं, समय बताएगा कि मैं अभी क्या कुछ कहना चाहता हूं।
करुणानिधि के बड़े बेटे अलागिरी को कुछ साल पहले पार्टी से निकाल दिया गया था और तब से वह मुख्य राजनीति से बाहर हैं। करीब एक साल पहले उनके छोटे भाई और करुणानिधि के छोटे बेटे स्टालिन को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष भी बना दिया गया था।
पिता की मौत के साथ ही स्टालिन के दोनों बेटे पार्टी पर अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, अलागिरी ने खुद को करुणानिधि का राजनीतिक वारिस बताया है, उन्होंने स्टालिन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। दो बेटो के बीच राजनीतिक वारिस बनने का संघर्ष करुणानिधि के दो पुत्रों एमके अलागिरी और एमके स्टालिन के बीच कई वर्षों से संघर्ष चल रहा है, अलागिरी यूपीए सरकार में मंत्री भी रहे थे और उन्हें 2014 में पार्टी से निकाल दिया गया था।
अलागिरी पार्टी से निष्कासन के बाद राजनीतिक निर्वासन में मदुरै में रह रहे थे, लेकिन करुणानिधि जब चेन्नई के एक अस्पताल में भर्ती थे तो अलागिरी पूरे परिवार के साथ थे। द्रमुक के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी में फिर से उत्तराधिकार संघर्ष होने की कोई आशंका नहीं है, उन्होंने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, हर मुद्दे को सुलझा लिया गया है।

Malta से Salman Khan का आया Special Video | BHARAT | Katrina Kaif | Ali Abbas Zafar

Malta से Salman Khan का आया Special Video | BHARAT | Katrina Kaif | Ali Abbas Zafar
Malta से Salman Khan का आया Special Video | BHARAT | Katrina Kaif | Ali Abbas Zafar

Malta से Salman Khan का आया Special Video | BHARAT | Katrina Kaif | Ali Abbas Zafar

 

मेड इन इंडिया पर बनी फिल्म सुई धागा का ट्रेलर हुआ आउट, अनुष्का शर्मा – वरुण धवन की एक्टिंग कर देगी हैरान

मेड इन इंडिया पर बनी फिल्म सुई धागा का ट्रेलर हुआ आउट, अनुष्का शर्मा - वरुण धवन की एक्टिंग कर देगी हैरान
मेड इन इंडिया पर बनी फिल्म सुई धागा का ट्रेलर हुआ आउट, अनुष्का शर्मा - वरुण धवन की एक्टिंग कर देगी हैरान

 

अनुष्का शर्मा और वरुण धवन की मेड इन इंडिया पर बनी फिल्म सुई धागा का ट्रेलर फाइनली रिलीज़ हो चूका है। 3 मिनट के ट्रेलर में फिल्म की कहानी को बखूबी बयां कर द‍िया गया है। 

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इस ट्रेलर में अनुष्का और वरुण की दमदार एक्टिंग आपको देखने को मिलेगी। वरुण धवन इस ट्रेलर में एक दुकान में नौकरी करते हैं और उनके मालिक के घर पर कभी कुत्ता तो कभी कुछ और बनते हैं जिस पर अनुष्का जो कि इस फिल्म में उनकी पत्नी का रोल निभा रही हैं उन्हें वो बात हजम नहीं होती और रोने लगती हैं। इसके बाद वरुण को किसी बात पर निकाल दिया जाता है. जिसके बाद दोनों मिलकर एक कंपनी की शुरुआत करते हैं।
 
वरुण धवन, अनुष्का शर्मा की अदाकारी से सजी फिल्म का निर्देशन शरत कटार‍िया ने किया है। फिल्म में वरुण और अनुष्का पति-पत्नी बने हैं। शरत ने इससे पहले ‘दम लगाके हइसा’ जैसी सुपर‍हि‍ट फिल्म बनाई थी। पति-पत्नी की कहानी पर इस फिल्म में आयुष्मान खुराना और भूमि पेडणेकर ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
 
ये फिल्म गांधी जयंती (दो अक्टूबर) के मौके पर 28 सितंबर को रिलीज हो रही है। इस फिल्म में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की भी झलक देखने को मिलेगी। 

यदि बीजेपी 220 सीटें भी जीती तो मोदी ही पीएम होंगे – रामदाव आठवले

रामदाव आठवले
रामदाव आठवले

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

2019 में होने वाले आम चुनाव आने वाला है, केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ जहां महागठबंधन की चर्चा जोरों पर है, तो वहीं भाजपा की ओर से भी दावा किया जा रहा है कि वह और ज्यादा ताकत से सत्ता में वापसी करेगी।

एनडीए के लिए मुश्किले ये हैं कि उसके कुछ सहयोगी उससे दूर जा चुके हैं, आंध्र में जहां टीडीपी ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है, वहीं महाराष्ट्र में शिवसेना ने ऐलान कर दिया है कि वह अगला चुनाव अकेले लड़ेगी, ऐसे में भाजपा की राह मुश्किल है।

वहीं महाराष्ट्र में उसकी सहयोगी पार्टी आरपीआई प्रमुख रामदास अठावले ने बड़ा बयान दिया है, उन्होंने कहा है कि यदि भाजपा 2019 में होने वाले चुनाव में 220 से 240 सीटें भी जीतती है तो सरकार पीएम मोदी ही चलाएंगे।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, हालांकि उस समय देखने वाली बात ये होगी कि भाजपा अपने लिए जरूरी नंबर कहां से लाती है, दलितों के मुद्दे पर रामदाव अठावले ने कहा, ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जो ये बताता हो कि दलित केंद्र सरकार से नाराज हैं।

रामदाव अठावले ने कहा, हमारी सरकार अच्छा काम कर रही है, मोदी सरकार का सिद्धांत ही है सबका साथ सबका विकास, खुद पीएम कह चुके हैं यदि बाबा साहब आंबेडकर नहीं होते तो एक चायवाला पीएम नहीं बन सकता था।

अठावले के अनुसार, एसपी कांग्रेस और बीएसपी के साथ आने के बावजूद भाजपा ने यूपी में तीन सीटें बहुत छोटे मार्जिन से गंवाई हैं, यहां तक बिहार में लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और कांग्रेस के साथ आने के बावजूद भाजपा ने वहां पर अच्छा प्रदर्शन किया था, अभी तक मोदी लहर ने अपना असर नहीं खोया है।

सर्वे : भारत में 89% लोग तनाव का हैं शिकार

तनाव का हैं शिकार
तनाव का हैं शिकार

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

एक हालिया सर्वे के अनुसार, भारत में 89 प्रतिशत लोग तनाव का शिकार हैं, जबकि वैश्विक औसत 86 प्रतिशत है, सर्वे में शामिल लोगों में से हर आठ तनावग्रस्त लोगों में से एक व्यक्ति को इन परेशानियों से निकलने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

लोग कई कारणों से अपनी इस समस्या का इलाज नहीं करा पाते, इनमें सबसे बड़ी समस्या इसके इलाज पर आने वाले खर्च की है, यह सर्वे अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन, ब्राजील और इंडोनेशिया सहित 23 देशों में किया गया और तमाम देशों के मुकाबले भारत के लोग कहीं ज्यादा तनाव का सामना कर रहे हैं।

सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस ने अपने सिग्ना ‘360 डिग्री वेल-बीइंग सर्वेक्षण-फ्यूचर एश्योर्ड’ की एक रिपोर्ट जारी की है, विकसित और कई उभरते देशों की तुलना में भारत में तनाव का स्तर बड़े रूप में है।

इस सर्वे के दौरान दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाले 14,467 लोगों का ऑनलाइन इंटरव्यू लिया गया, जिसके बाद ये सामने आया कि भारत लगातार चौथे साल तनाव के मामले में दुनिया के बाकी देशों से कहीं आगे है।

तनाव के कारणों की बात की जाए तो लोगों का काम और उनकी आर्थिक स्थिति इसकी सबसे बड़ी वजह है, हालांकि ज्यादातर लोगों का कहना था कि अगर उनके कार्यस्थल का माहौल उनके अनुकूल हो तो उनके तनाव का स्तर कम हो सकता है।

वैसे यह राहत की बात है कि सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इस बारे में बात करने पर उन्हें कार्यस्थल पर सहयोग मिला और वह कार्यस्थल स्वास्थ्य कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं।

वहीं करीब 87 प्रतिशत ने कहा कि अगर उन्हें किन्‍हीं दो नियोक्ताओं में से किसी एक को चुनना हो तो वह उसे चुनेंगे जहां उन्हें काम करने की अनुकूल परिस्थितियां और कार्यस्थल पर स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सहूलियत मिलेगी।

सातवां वेतन आयोग : अप्रैल से मिलेगा बढ़ी हुई सैलरी का फायदा

सातवां वेतन
सातवां वेतन

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है, हालांकि, जानकारी के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों को इसी वित्त वर्ष से बढ़ी हुई सैलरी मिलेगी।

सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार अगले साल होने वाले चुनाव से पहले इस मामले को सुलझाना चाहती है, अब खबर है कि सरकार न्यूनतम सैलरी 18 हजार के बजाए 21 हजार करने पर भी विचार कर रही है, उम्मीद है सरकार इसे जल्द से जल्द लागू कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार, सातवें वेतन आयोग के बाद अगला वेतन आयोग नहीं आएगा, यह बेहद चौंकाने वाली खबर है, सरकार इस दिशा में काम कर रही है कि 68 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 52 लाख पेंशन धारकों के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा डीए होने पर सैलरी में ऑटोमैटिक वृद्धि हो जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सरकारी कर्मचारियों को यह खुशखबरी इसी साल मिलेगी, लेकिन अभी इसकी तारीख तय नहीं है, लेकिन, सैलरी अप्रैल 2018 से ही लागू माना जाएगा, दावा यह भी है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मिनिमम पे स्केल में 3000 रुपए की बढ़ोतरी होगी।

सूत्रों की मानें तो सातवें वेतन आयोग के तहत बढ़ी हुई सैलरी और फिटमेंट फैक्टर अगर लागू होता है तो कर्मचारियों को एरियर का फायदा नहीं मिलेगा, पिछले हफ्ते की कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि सरकार एरियर देने के मूड में नहीं है।