कांग्रेस के 2 विधायकों ने इस्तीफा दिया, थाम सकते हैं बीजेपी का दामन
सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com
गोवा में दो कांग्रेस विधायकों ने आज पार्टी को बड़ा झटका देते हुए इस्तीफा दे दिया है, इसके बाद दोनों ने बीजेपी का दामन थामने की बात कही है, गोवा कांग्रेस के इन दो विधायकों दयानंद सोपटे और सुभाष शिरोडकर शिरोडा ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत को सौंपा है।
दोनों विधायक आज दिल्ली में बीजेपी में शामिल होंगे, बता दें कि गोवा के मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे हैं, वह दिल्ली एम्स में अपना इलाज कराने के बाद गोवा लौटे हैं।
आज सुबह कांग्रेस विधायकों दयानंद सोपटे और सुभाष शिरोडकर शिरोडा ने बीजेपी अमित शाह से मुलाकात की, इसके बाद सुभाष शिरोडकर शिरोडा ने पत्रकारों से कहा था ‘हम आज बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं, हम मान रहे हैं कि हमारे साथ 2 से 3 और कांग्रेस विधायक पार्टी छोड़ेंगे’।
वहीं गोवा विधानसभा के स्पीकर प्रमोद सावंत ने दोनों विधायकों के इस्तीफे पर कहा, मुझे कांग्रेस के दो विधायकों सुभाष शिरोडकर शिरोडा और दयानंद सोपटे के इस्तीफे मिले हैं, दोनों ने यह स्वीकारा है कि वह ये अपनी स्वेच्छा से कर रहे हैं, उनके ऊपर कोई दबाव नहीं है।
गोवा विधानसभा स्पीकर ने कहा विधानसभा में मौजूदा समय सदस्यों की संख्या 38 है, इसमें बीजेपी के 14, कांग्रेस के 14, महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के 3, गोवा फारवर्ड के 3, एनसीपी के 1 और 3 सदस्य निर्दलीय हैं।
बॉलीवुड में इन दिनों मीटू मूवमेंट जोरो शोरो से चल रहा है। इस कैंपेन के चलते कई कई महिलाओं ने बॉलीवुड स्टार्स पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के बाद अब विक्की सिदाना पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। विक्की सिदाना पर एक्ट्रेस कृतिका शर्मा ने रेप का आरोप लगाया है।
एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कृतिका ने 5 साल पहले हुई इस घटना के बारे में बताया। इंटरव्यू के मुताबिक कृतिका ने बताया कि वह 2013 में एक ऑडिशन के सिलसिले में विकी सिदाना से मिलने गई थीं। चुने जाने के बाद उन्हें बुलाया गया था। यह सब जल्दबाजी में हुआ और वह फाइनल नहीं थीं तो उन्हें अपना टिकट बुक करवाने और रहने की व्यवस्था करने को कहा गया। उन्होंने टिकट बुक कर लिया लेकिन रहने के लिए विक्की सिदाना के ऑफिस से मदद मांगी।
बाद में पता चला कि जो महिला मुझसे संपर्क में थी उसने बताया कि इस बारे में विक्की सिदाना से बात हो चुकी है और वे कुछ ने कुछ इंतजाम कर देंगे। कृतिका ने बताया कि जब उन्होंने विक्की को फोन किया तो उन्होंने कहा, मेरी कई फीमेल फ्रेंड्स हैं तो मैं तुम्हारे रहने की व्यवस्था कर दूंगा।’
कृतिका ने आगे बताया कि मुंबई पहुंचने के बाद वह विकी के ऑफिस गईं तो उन्होंने पहला सवाल किया, ‘अगर मैं तुम्हारी हेल्प करता हूं तो मुझे क्या मिलेगा? कृतिका ने बताया कि वे समझ गईं कि वे क्या कहना चाहते हैं। उन्होंने जवाब दिया, जाहिर सी बात है कि अगर इंडस्ट्री में मेरा नाम हो गया तो लोग कहेंगे कि आपने मुझे कास्ट किया था, इससे आपका नाम भी फेमस होगा। विक्की ने जवाब दिया, तू चिंता मत कर, मेरा नाम पहले से बहुत है. इसके बाद फिर उन्होंने मुझे पूछा कि उनके लिए मैं क्या कर सकती हूं।
कृतिका ने बताया कि वह मीटिंग के बहाने एक घर में ले गए। वहां पहुंचते ही विकी ने घर के दरवाजे बंद किए और उन्हें बिस्तर पर धक्का देकर, उनके साथ जोरजबरजस्ती करने लगे। वह गिड़गिड़ाती रहीं, लेकिन वह नहीं मानें। ‘मैंने उन्हें कहा कि मैं यहां इसके लिए नहीं आई हूं। काम पाने के लिए मैं किसी के साथ नहीं सोऊंगी नहीं। मैंने उन्हें कहा कि बहुत विश्वास के साथ मैं उनके साथ आई हूं। अचानक पता नहीं उन्हें क्या हुआ और वह एकदम से पीछे हट गए। वह बोले, ऑटो लेकर चली जा फ्लाइट है तेरा तो। मैंने खुद को संभाला और फिर ऑटो लेकर एयरपोर्ट पहुंची।’
एक्टर गौतम रोड़े के इस बयान से ट्विटर पर मचा हंगामा
ज्योति विश्वकर्मा | Navpravah.Com
टीवी एक्टर गौतम रोडे की फैन फॉलोइंग काफी जबरदस्त है और वह समय-समय पर अपने फैंस के साथ सोशल मीडिया के जरिए कनेक्ट रहते हैं. लेकिन शनिवार को ट्विटर पर अचानक #GautamRodeLastBdayCelebration नंबर एक की पोजीशन पर ट्रेंड करने लगा। एक्टर गौतम रोडे ने एक लाइव चैट के दौरान अपने फैंस को हैरान कर दिया है।
दरअसल हाल ही में गौतम ने इंस्टाग्राम पर अपने फैंस से लाइव चैट किया, जिसमें गौतम ने उनके कई सवालों के जवाब दिए। इसी चैट के दौरान गौतम के एक फैन ने उनसे पूछा कि वह अपना जन्मदिन कब मनाएंगे? इस सवाल के जवाब में जो गौतम ने कहा उसे सुनकर हर कोई काफी हौरान और परेशान हो गया।
अपना बर्थडे सेलीब्रेट करने की बात पर गौतम ने जवाब दिया, ‘मैंने इस बार अपना जन्मदिन नहीं मनाया था, लेकिन मैं जल्द ही अपना बर्थडे सेलीब्रेट करने वाला हूं और वह मेरा आखिरी बर्थडे सेलिब्रेशन होगा।’ गौतम ने यह कहने के बाद अपने फैंस से विदा ले ली और यह वीडियो चैट बंद कर दी।
लेकिन यह सुनने के बाद से ही हर कोई इस बात को लेकर परेशान हो गया कि आखिर गौतम ने इसे अपना आखिरी बर्थडे सेलिब्रेशन क्यों कहा..? वैसे इसमें फैंस की गलती नहीं है, आप भी देखें गौतम का यह वीडियो, जिसने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है।
फैंस उनकी बात सुनकर इतना कंफ्यूज हुए कि हर कोई सोशल मीडिया पर यही जानने की कोशिश करने लगा कि आखिर वजह क्या है और गौतम ने ऐसा क्यों कहा? दरअसल, गौतम रोडे किसी स्टार पार्टी या फिर सेलिब्रेशन्स में कम ही दिखाई देते हैं। साथ ही अपने बर्थडे पर भी ग्रैंड सेलिब्रेशन और पार्टीज से परहेज ही करते हैं।
बता दें कि फिल्म ‘अक्सर 2’ में नजर आ चुके गौतम ने टीवी एक्ट्रेस पंखुरी अवस्थी से इसी साल फरवरी में शादी की है। इन दोनों ने राजस्थान के अलवर में शादी की थी। पंखुरी और गौतम टीवी सीरियल ‘सूर्यपुत्र कर्ण’ के सेट पर मिले थे और तभी से इन दोनों के बीच रोमांस की खबरें आने लगी थीं।
रामपाल समेत 15 दोषियों को उम्रकैद और 1-1 लाख का जुर्माना
सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com
आज हिसार की एक सत्र अदालत ने हत्या के दो मामलों और अन्य अपराधों में सतलोक आश्रम के स्वयं-भू बाबा रामपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई है, उनके अलावा 14 अन्य दोषियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
साथ ही सभी दोषियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, सभी को हत्या और बंधक बनाने के मामले में सजा का ऐलान हुआ है, इससे जुड़े एक अन्य मामले में 17 अक्टूबर को भी सजा का ऐलान संभव है।
सजा के ऐलान को देखते हुए पुलिस ने हिसार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है, बता दें कि 11 अक्टूबर को हिसार के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया ने हत्या के दो मामलों और अन्य अपराधों में रामपाल समेत 29 लोगों को दोषी ठहराया था।
67 वर्षीय रामपाल और उसके अनुयायी नवम्बर, 2014 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद थे, रामपाल और उसके अनुयायियों के खिलाफ बरवाला पुलिस थाने में 19 नवम्बर, 2014 को दो मामले दर्ज किया गया था।
दोनों ने रामपाल के आश्रम के अंदर अपनी पत्नियों की हत्या की शिकायत की थी, उन्होंने आरोप लगाया था कि दोनों महिलाओं को कैद करके रखा गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी।
पुलिस जब आश्रम के अंदर मौजूद रामपाल को गिरफ्तार करने जा रही थी तो उसके लगभग 15 हजार अनुयायियों ने 12 एकड़ जमीन में फैले आश्रम को घेर लिया था ताकि स्वयं-भू बाबा की गिरफ्तारी नहीं हो सके, स्वयं-भू बाबा के अनुयायियों की हिंसा के कारण छह लोगों की मौत हो गई थी।
अब से इलाहाबाद प्रयागराज के नाम से जाना जाएगा, आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इलाहाबाद का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने की मांग बहुत समय से संत-महात्मा करते आ रहे हैं, मांग करने वालों का तर्क है कि पहले भी इलाहाबाद का नाम प्रयाग ही था, जिसे मुगल बादशाह अकबर ने बदलकर ‘अल्लाहाबाद’ रख दिया था और कालांतर में इसे इलाहाबाद कहा जाने लगा।
इस संबंध में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने भी ‘इलाहाबाद’ के दौरे पर कहा था कि, ‘इलाहाबाद’ की पहचान यहां तीन नदियों के संगम की वजह से है, इसलिए इसका नाम ‘प्रयागराज’ होना चाहिए।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने भी इलाहाबाद का नाम बदलकर ‘प्रयाग’ करने की सिफारिश की थी, उन्होंने कहा था कि राज्यपाल महोदय ने ‘बॉम्बे’ का नाम ‘मुंबई’ करने में अहम भूमिका निभाई थी।
वहीं एक तरफ इलाहाबाद का नाम बदलने के एलान का विरोध शुरू हो गया है, अलग-अलग संगठनों ने राज्य सरकार के इस कदम की कड़े शब्दों में आलोचना की है, एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से हुई बैठक में योगी सरकार के फैसले पर आक्रोश जताया गया है।
एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजीत भाष्कर ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने पर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा है कि, इलाहाबाद पूरे विश्व में विख्यात है, इसी नाम से शहर की दुनिया भर में पहचान है।
उन्होंने कहा कि प्रयाग क्षेत्र में सिर्फ माघ मेला और कुंभ मेला का आयोजन होता है, ऐसे में पूरे इलाहाबाद का नाम बदलने का औचित्य नहीं बनता है, उन्होंने संवैधानिक नियमों का हवाला दिया कि देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका संरक्षण करें।
Kasauti Zindagi Kay 2 : हिना खान का कोमोलिका अंदाज़ देख फैंन्स हुए पागल
ज्योति विश्वकर्मा | Navpravah.Com
स्टार प्लस का नया शो कसौटी जिंदगी की 2 दर्शकों के दिलों में धीरे धीरे अपनी जगह बना रहा है। यह शो में अनुराग बसु और प्रेरणा की प्रेम कहानी पर आधारित है। दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन उनके बीच तमाम तरह की परेशानियां आती रहती हैं। अब दोनों की जिंदगी में कोमोलिका की एंट्री हो चुकी है।
हिना खान सीरियल कसौटी जिंदगी के 2 में कोमोलिका का किरदार निभाती नजर आएंगी। उनके किरदार का टीजर विडियो हाल ही में एकता कपूर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था। इसके बाद खुद हिना खान ने भी इस ट्वीट को रीट्वीट किया। कोमोलिका बनी हिना का फर्स्ट लुक लोगों को काफी पसंद आ रहा है। यहां तक कि टीवी के अन्य ऐक्टर्स भी उनकी तारीफ करते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में हिना बेहद ग्लैमरस अंदाज में नजर आ रही हैं। ऐसे में बिग बॉस 11 में उनकी कॉम्पिटिटर रहीं शिल्पा शिंदे क्या कहती हैं इस पर सभी की निगाहें थीं। दरअसल हिना खान को हराकर ही शिल्पा शिंदे ने बिग बॉस का खिताब जीता था। बिग बॉस के घर से निकलने के बाद भी दोनों को अक्सर सोशल मीडिया पर भिड़ते देखा गया था।
इसमें हिना खान ब्लैक और सिल्वर लहंगा, नथ, नेकलेस, झुमका और कमर बंध पहने दिखाई दे रही हैं। बिहार का बेवाकपन और बंगाल की अदाएं लिए हिना इसमें बंजारन लुक में नजर आ रही हैं। 31 वर्षीय हिना खान ने अपने करियर की साल 2009 में टीवी शो ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में अक्षरा का किरदार निभाकर की थी। 2009-16 तक उन्होंने इस शो के जरिए घर-घर में अपनी पहचान बनाई।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पण्डालों को दहलाने की है साजिश - सूत्र
सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com
पश्चिम बंगाल में इन दिनों हर जगह दुर्गा पूजा की धूम मची हुई है, राज्य के सभी हिस्सों में बने अलग-अलग पंडालों में दुर्गा पूजा मनाया जा रहा है, पर खुशी की इस घड़ी में आतंकवादी गड़बड़ी फैलाने की फिराक में है।
सूत्रों के अनुसार, जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आतंकी दुर्गा पूजा में खलल डालने की फिराक में हैं, जेएमबी के आतंकी उत्तरी बंगाल के पूजा पंडालों में विस्फोट कर सकते हैं।
बताया जा रहा है कि जेएमबी के आतंकी तीन जगह पर धमाका करने की तैयारी में हैं, वे जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी और कोच बेहार में धमाका करने की वारदात को अंजाम दे सकते हैं, इन इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
इसी साल अगस्त में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि बांग्लादेश से लगने वाले पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में जेएमबी ने मजबूती से अपनी जड़ें जमा ली हैं, माना जाता है कि बांग्लादेश में सख्त कार्रवाई के बाद जेएमबी के आतंकी भारतीय सीमा में घुस आते हैं।
भारतीय सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से जेएमबी आतंकियों की लगातार गिरफ्तारी हो रही है, उनकी गिरफ्तारी के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर सतर्कता और बढ़ा दी गई है।
जानकार मानते हैं कि जिस तरह जेएमबी आतंकियों की पश्चिम बंगाल पर नजर है, ऐसे में निश्चित रूप से बड़ा खतरा बरकरार है, इधर, असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के जारी होने के बाद जिस प्रकार से राजनीति हो रही है, वैसे में चिंता इस बात की बढ़ गई है।
बिगबॉस के घर वापस लौटे अनूप जलोटा और श्रीसंत, हुआ ब्रेकअप
ज्योति विश्वकर्मा | Navpravah.Com
बिगबॉस के घर में धमाके की आवाज बेहद जोर से गूंजती है। और अब तो घर में एक धमाका होनेवाला है। बिग बॉस का 12वां सीजन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है नए ट्विस्ट आते जा रहे हैं। सोमवार को प्रसारित हुए एपिसोड में अनूप जलोटा और श्रीसंत की वापसी हो गई है। वे एक बार फिर घर के अंदर आ गए हैं।
इससे कुछ कंटेस्टेंट्स तो खुश हैं लेकिन कुछ को शॉक लगा है क्योंकि यह बात किसी को नहीं बताई गई थी इन दोनों को सीक्रेट रूप में भेजा गया था। इसके साथ ही जोड़ियों का भी ब्रेकअप हुआ जिसके बारे में खूब चर्चा हुई और कंटेस्टेंट्स काफी असमंजस में भी थे।
जोड़ियों के टूटने का सिलसिला शुरू होने वाला है और इसमें शिवाशीष और सौरभ की जोड़ी भी शामिल है। बिग बॉस के लेटेस्ट एपिसोड में घर में दीपिका कक्कड़ अपने उस स्टेटमेंट पर सफाई देती दिखती हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि, ‘यह मेरा किचन है’। वह कहती हैं कि शाकाहारियों को वह ज्यादा तवज्जो देंगी और सुरभि राणा ने सुल्तानी अखाड़े के दौरान उनके खिलाफ इसी का इस्तेमाल किया। श्रीसंत और अनूप जलोटा सीक्रेट रूम में बात करते दिखते हैं। अनूप जलोटा कहते हैं कि श्रीसंत के बाहर आने के बाद बिग बॉस का गेम काफी बदल गया है।
बिग बॉस ने इस मौके पर इस बात का भी एेलान कर दिया है अब से सबको अकेले ही गेम में आगे बढ़ना होगा। कोई किसी का जोड़ीदार नहीं होगा। अब जोड़ियों को सिंगल्स में बांट दिया गया है जिसके बाद कहा गया कि हर किसी को अपने जोड़ीदार को एक सही कारण बता कर नॉमिनेट करना होगा। एेसे में घर का माहौल बदलने लगा है। जो जोड़ियां अब एक दूसरे के साथ खुद को साबित करने के लिए आमने-सामने हो गई हैं। जब जोड़ियों को अलग किया गया तो कुछ कंटेस्टेंट्स इमोशनल भी हो गए थे। खास तौर पर खान सिस्टर्स सबा खान और सोमी खान जोड़ी टूटने से परेशान नजर आए। दीपका ठाकुर भी उर्वशी को लेकर इमोशनल हो गए।
श्रीसंत और अनूप जलोटा घरवालों से दीपिका के बारे में बात करते हैं। वे कहते हैं कि घर की असली प्लेयर दीपिका हैं, जो सबके साथ गेम खेल रही हैं। अनूप जलोटा जसलीन से कहते हैं कि वह बहुत जल्दी दूसरों की बातों में आ जाती हैं। करणवीर बोहरा को वह दीपिका का वफादार बताते हैं। जसलीन कहती हैं कि अब खुद के लिए स्टैंड लेने का वक्त आ गया है। वहीं दीपिका के बारे में सुनकर करणवीर बोहरा दर्शकों से माफी मांगते हैं
केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया
सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com
खज विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने उनके ऊपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया है, अकबर ने अपने वकीलों के जरिये दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में रमानी के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
अकबर ने कल दिल्ली में बयान जारी कर कहा था कि, मैं इन आरोपों पर पहले इसलिए नहीं कुछ बोल पाया था क्योंकि मैं विदेश दौरे पर था, इसके अलावा सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि सरकार एमजे अकबर से इस्तीफा नहीं मांगेगी।
विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने रविवार को आरोपों पर सफाई देते हुए कहा था मेरे ऊपर बिना सुबूतों के लगाए जा रहे आरोप वायरल बुखार की तरह से कुछ तबके के बीच फैल रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि आम चुनावों से महज कुछ महीने पहले ही यह तूफान क्यों उठा? क्या इसके पीछे कोई किसी तरह का कोई एजेंडा है? इन बेबुनियाद और झूठे आरोपों से मेरी इमेज को क्षति पहुंची है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर मैंने कुछ किया ही नहीं तो इस कहानी में है ही क्या, इस तरह की कोई भी स्टोरी अब नहीं है, कुछ भी होने के बावजूद इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है।
लगभग डेढ़ दसक पहले की बात है। इंटरमीडिएट करने के बाद मैं मुम्बई चला आया और मेरा भतीजा बरुण, इलाहाबाद। चिट्ठियां एक दूसरे की खैरियत जानने का माध्यम बनीं। जहां तक मुझे याद है, बरुण ने धर्मवीर भारती की इन पंक्तियों को अपने दूसरे पत्र में कुछ यूँ उद्धृत किया था, “अगर पुराने जमाने की नगर-देवता की और ग्राम-देवता की कल्पनाएं आज भी मान्य होतीं तो मैं कहता कि इलाहाबाद का नगर-देवता जरूर कोई रोमैन्टिक कलाकार है। ऐसा लगता है कि इस शहर की बनावट, गठन, जिंदगी और रहन-सहन में कोई बंधे-बंधाए नियम नहीं, कहीं कोई कसाव नहीं, हर जगह एक स्वच्छंद खुलाव, एक बिखरी हुई-सी अनियमितता। बनारस की गलियों से भी पतली गलियां और लखनऊ की सड़कों से चौड़ी सड़कें । यार्कशायर और ब्राइटन के उपनगरों का मुकाबला करने वाले सिविल लाइन्स और दलदलों की गंदगी को मात करने वाले मुहल्ले । मौसम में भी कहीं कोई सम नहीं, कोई संतुलन नहीं । सुबहें मलयजी, दोपहरें अंगारी, तो शामें रेशमी ! धरती ऐसी कि सहारा के रेगिस्तान की तरह बालू भी मिले, मालवा की तरह हरे-भरे खेत भी मिले और ऊसर और परती की भी कमी नहीं । सचमुच लगता है कि प्रयाग का नगर-देवता स्वर्ग-कुंजों से निर्वासित कोई मनमौजी कलाकार है जिसके सृजन में हर रंग के डोरे हैं ।” जादू-सा असर छोड़ने वाली इन पंक्तियों को मैंने कई बार दोहराया ।पढ़ते-पढ़ते इस अल्हड़ शहर के लिए एक आकर्षण-सा पैदा हो गया । इलाहाबाद को देखने की इच्छा हिलोरें लेने लगीं । कहते हैं प्रबल इच्छाएं अवश्य पूरी होती हैं । मेरी भी हुई । वह भी, थोक के भाव में ।
जितनी बार भी इलाहाबाद गया, प्रयाग के नज़दीक आता गया । याज्ञीक अनुष्ठानों की आर्य भूमि की उर्वरता अपनी ओर खींचती गई । प्रजापति सहित देवों की प्रिय भूमि प्रयाग का महात्म्य अनेक ग्रन्थों ने गाया है । ‘याज्ञेभ्यः प्रकृष्टः’ अर्थात् ‘यज्ञों से बढ़कर’ कहकर स्कंद पुराण में प्रयाग का अर्थ-विस्तार किया गया है । यदि मत्स्यपुराण सभी तीर्थों की तुलना में इसे अधिक प्रभावशाली मानता है तो ब्रह्मपुराण प्रकृष्टता के कारण प्रयाग को ‘तीर्थराज’ घोषित करता है – ‘प्रकृष्टत्वात्प्रयागोसौ प्राषान्याद्राजशब्दवान् ।’ कूर्मपुराण, मत्स्यपुराण तथा महाभारत के वनपर्व में प्रयाग के भौगोलिक विस्तार की विधिवत चर्चा की गई है । इनमें तीन कूपों (प्रयाग, प्रतिष्ठानपुर और अलर्कपुर) की संगम से दूरी बताई गई है । तीन अग्निकुंडों से घिरी गंगा की बात इस प्रकार स्वीकार की गई है –
“तत्र त्रीण्यग्निकुंडानि येषां मध्ये जाह्नवी” अर्थात् वहां तीन कुंडों के बीच गंगा हैं ।
महाभारत, वनपर्व (87/73)
पौराणिक साक्ष्यों के अनुसार प्रयाग में त्रिदेवों का वास है । प्रतिष्ठान के उत्तर में ब्रह्माजी का वास है, भगवान विष्णु वेणीमाधव के रूप में विराजते हैं और जटाधारी शिव अक्षयवट रूप धारण किए हैं । इनके अलावा देवतागण, गंधर्व, ऋषियों और मुनियों की अदृश्य उपस्थिति मौजूद रहती है अथवा ये इस पवित्र स्थल पर आते-जाते रहते हैं । माघ महीने में तो सारे तीर्थों का संगम प्रयाग क्षेत्र में होता है । अतः कल्पवास के लिए यह महीना महत्त्वपूर्ण माना जाता है । प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित कुंभ मेले में मात्र मनुष्य ही नहीं बल्कि अदृश्य शक्तियां भी इस अवसर का लाभ उठाती हैं । गौरा गंगा और श्यामा यमुना के संधि क्षेत्र को ‘संगम’ के नाम से पुकारा जाता है । ऋग्वेद में इसकी चर्चा की गई है कि कृष्ण और श्वेत जल वाली सरिताओं में स्नान करने वाला मनुष्य स्वर्गाधिकारी होता है । प्रयाग का संगम ‘त्रिवेणी’ के नाम से विख्यात है । गंगा-यमुना के अलावा ‘सरस्वती’ भी यहां प्रवाहित हैं किंतु इनकी धारा दिखाई नहीं देती । इस संदर्भ में कई मान्यताएं हैं । कुछ विद्वानों का कहना है कि ‘सरस्वती’ कोई जलपूरिता नदी नहीं बल्कि विज्ञों के मुख से निसृत “ज्ञान-धारा” है । उनकी इस ज्ञान-धारा को श्रवण करना सबसे उत्तम कोटि का स्नान है । अन्य जानकारों का मानना है कि सरस्वती ‘पाताल-प्रवाहिता’ हैं । इस बात की चर्चा कई ग्रन्थों में भी की गई है । ऋग्वेद में तो सरस्वती नदी को ‘नदीतमा’, ‘सर्वश्रेष्ठ माँ’, ‘सर्वश्रेष्ठ देवी’ आदि सम्मानसूचक शब्दों से संबोधित किया गया है । पारसियों के धार्मिक ग्रन्थ ‘अवेस्ता’ में सरस्वती का नाम ‘हरहवती’ है । इस नदी के वाह्य अस्तित्व की चर्चा होती रही है । राष्ट्रीय परिदृश्य में इसे तब नोट किया गया जब यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और फतेहाबाद जनपद के कुछ क्षेत्रों को ओएनजीसी (तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड) द्वारा ‘जल-स्रोत’ के रूप में चिन्हित किया गया ।
महाभारत के वनपर्व (87|18-19) में गंगा-यमुना के लोक प्रसिद्ध संगम का उल्लेख इस प्रकार है – “गंगायमुनयोर्वीर संगमं लोकविश्रुतम् ।” अपना अस्तित्त्व बनाए रखते हुए भी गंगा-यमुना का घुलनशील स्वभाव चमत्कारिक है । मिश्रण की यही परंपरा “गंगा-जमुनी” तहज़ीब है । ऐसी संस्कृति जिसमें “सहनाववतु और सहनौभुनक्तु” की विराट भावना छिपी है । यदि सौंदर्य की बात करें , तो अद्भुत ! स्वयं महाकवि कालिदास “रघुवंशम्” में लिखते हैं –
पश्यानवद्यांगि ! विभाति गंगा भिन्नप्रवाहा यमुना तरंगै: ।।”
(रघुवंशम्, 13/57)
अर्थात् कहीं काले सर्प के भूषण वाले भस्म के अंगरागयुक्त शिवजी के शरीर के समान यमुना के तरंगों के प्रवाह से पृथक् हुई शोभायमान गंगा को देख । गोस्वामी तुलसीदास तो गंगा और यमुना को तीर्थराज का चंवर घोषित करते हुए लिखते हैं –
चंवर जमुन अरु गंग तरंगा । देखि होहिं दुख दारिद भंगा ।।”
(रामचरितमानस, अयोध्याकांड)
अर्थात् (गंगा, यमुना और सरस्वती) संगम ही उसका अत्यंत सुशोभित सिंहासन है । अक्षयवट छत्र है, जो मुनियों के भी मन को मोहित कर लेता है । यमुनाजी और गंगाजी की तरंगें उसके (श्याम और श्वेत) चंवर हैं, जिनको देखकर ही दुःख और दरिद्रता नष्ट हो जाती है ।
जो शालीनता और पवित्रता संगम की है उससे कहीं अधिक प्रयाग की है । अनेकानेक संस्कृतियों को आत्मस्थ करने वाले इस शहर का आकर्षण इतना कि चंद दिनों तक रहने वाला भी, यहां का होकर रह जाय । शरीर जहां भी हो, आत्मा से अटूट जुड़ाव होता है । यहां आकर तृप्ति और सुरक्षा का आभास होने लगता है । यहां के निवासियों और पर्यटकों को दुनिया के हर कोने की झलक प्रयाग में देखने को मिल जाती है । इलाहाबाद का रंग-रूप और मौसम सभी बेजोड़ । इस संदर्भ में ‘कविता कोश’ के लिए लिखी गई जयकृष्ण राय तुषार की ‘हो गया इलाहाबाद, पेरिस, अबू धाबी’ शीर्षक कविता प्रासंगिक बन पड़ी है –
“शरद में
ठिठुरा हुआ मौसम
लगा होने गुलाबी ।
हो गया
अपना इलाहाबाद
पेरिस, अबू धाबी ।
देह से
उतरे गुलाबी –
कत्थई, नीले पुलोवर,
गुनगुनाने लगे
घण्टों तक
घरों के बंद शावर,
लॉन में
आराम कुर्सी पर
हुए ये दिन किताबी ।”
इलाहाबाद का लोकजीवन अलबेला है । यहां सदा जीवनोत्सव होता है । यहां के लोग राग-विराग, संयोग-वियोग और दुःख- सुख में समानधर्मा हैं । दुःख तो ईश्वर के वरदान के रूप में शिरोधार्य है । दर्शन और ज्योतिष लोगों की धमनियों में दौड़ता है । द्वैत का आनंदोत्सव मनाता हुआ प्रयाग अद्वैत की ओर सदैव अग्रसर रहता है । महत्त्वाकांक्षाएं यथार्थ की जमीन से अंकुरित होती हैं । अभाव और गरीबी को अभिशाप नहीं बल्कि चंद दिनों का मेहमान समझा जाता है । दिल्ली में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता डॉ. सत्येंद्र पूजन प्रताप त्रिपाठी इलाहाबाद के अपने एक दसकीय जीवनानुभव बताते हैं – “यहां महानगरों वाली आपाधापी लोगों में देखने को नहीं मिलती । धनार्जन की ललक में लोग अंधे नहीं हैं । संवेदनाएं जीवित हैं । आप किसी भी दुकान पर 500 की नोट लेकर चले जाइए । दुकानदार के पास यदि फुटकर नहीं है तो कहीं दूसरी जगह से व्यवस्था कर देगा, आपको निराश नहीं करेगा । समान भी देगा और छुट्टा भी । लोगों में सहयोग और प्यार की भावना भरी होती है । मेरा ही उदाहरण ले लीजिए । जब मैंने इस शहर में एक छात्र के रूप में कदम रखा तो मकान मालिक से लेकर संगी-साथियों ने भरपूर सहयोग दिया । मुझे तो इलाहबाद ने सदैव पितृवत सुरक्षा और मातृवत स्नेह दिया है । कदम-कदम पर ग्रामीण संस्कृति की खुशबू बिखरी पड़ी है ।”
अतीत को बयां करते-करते डॉ. त्रिपाठी की आंखें चमकने लगीं । चर्चा विश्वविद्यालयीन परिवेश की होने लगी । उन्होंने बताया कि हमारे प्रोफेसर ‘गुरु’ के भारी-भरकम पद से अपने को हल्का किए रहते हैं । शिष्यों के दुःख-सुख में इतनी पैठ बना लेते कि ज़िगरी हो जाते हैं । यहां तक कि सड़क पर चलती लड़की पर दोनों एक साथ कमेंट करेंगे (हलांकि यह बात उन्होंने हंसी में उदाहरण के तौर पर कही ) । हाँ, आरक्षण और गंदी राजनीति के कारण आजकल का अकादमिक स्तर ज़रूर गिरा है ।”
अमीर हो या गरीब, राजा हो या रंक, सभी अपने कर्म के मर्म को समझते हैं । महाप्राण निराला की निम्न पंक्तियां इसी रहस्य का उद्घाटन करती हैं –
“वह तोड़ती पत्थर ;
देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर
वह तोड़ती पत्थर ।
× × ×
देखते देखा मुझे तो एक बार
उस भवन की ओर देखा, छिन्नतार ;
देखकर कोई नहीं,
देखा मुझे उस दृष्टि से
जो मार खा रोई नहीं,
सजा सहज सितार,
सुनी मैंने वह नहीं जो थी सुनी झंकार
एक क्षण के बाद वह कांपी सुघर,
ढुलक माथे से गिरी सीकर,
लीन होते कर्म में फिर ज्यों कहा –
मैं तोड़ती पत्थर ।
(अंतिम दूसरी पंक्ति इस संदर्भ में महत्त्वपूर्ण है)
वर्तमान इलाहाबाद में सब शुभ ही शुभ नहीं है । कई यात्राओं में मैंने यहां के श्यामल पक्ष को नजदीक से देखा है । आस्था और आचरण में भिन्नता पाई है । रविप्रकाश की ‘इलाहाबाद’ शीर्षक कविता में भी कुछ इसी तरह की बात हुई है –
“लेकिन जब-जब इस दरबे से बाहर निकलने की कोशिश करता हूँ
और सोचता हूँ कि
ये खाई में पड़े हुए लोग
मेरे साथ खड़े होंगे
लेकिन तभी बजता है एक शंख
मंदिर का घड़ियाल
और लोग खड़े हो जाते हैं
लेकर मेरी अस्थियों का कलस ।”
इन सबके बावजूद प्रयाग की भूमि उर्वर है । अनेकों महापुरुषों ने यहां जन्म लेकर दुनिया को ज्ञान-विज्ञान का पाठ पढ़ाया । लगातार प्रतिभाओं का स्फुरण और प्रसरण हो रहा है । वेदों और पुराणों द्वारा यहां की महिमा का बखान अपार है । दुनिया के सारे विद्वान यदि एक साथ ‘प्रयाग-महात्म्य’ लिखें तो भी पार न पाएं और मैं दो टके का आदमी, चला यात्रा वृत्तांत लिखने ! मुझे अपनी औकात में रहकर मानना चाहिए था – “को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ ।”