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इलाहाबाद का नाम हुआ प्रयागराज, राज्यपाल की तरफ से भी मिली मंजूरी
सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com
सीएम योगी आदित्यनाथ कुंभ 2019 की तैयारियों का जायजा लेने के लिए इलाहाबाद के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं, यहां सीएम योगी ने कहा कि गंगा और यमुना दो पवित्र नदियों का संगम स्थल होने के नाते यहां सभी प्रयागों का राज है।
सीएम ने कहा कि, इलाहाबाद को प्रयागराज भी कहते हैं, और अगर, सबकी सहमति होगी तो प्रयागराज के रूप में ही हमें इस शहर को जाना जायेगा, इस बीच अखाड़ा परिषद की तरफ से एक प्रस्ताव आया है कि इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया जाए।
इस प्रस्ताव के आने के बाद राज्यपाल राम नाईक ने भी इस पर सहमति जताई है, उम्मीद की जा रही है कि कुंभ शुरू होने से पहले इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया जाएगा।
सीएम योगी के साथ राज्यपाल राम नाईक, मंत्री सुरेश खन्ना और नंद गोपाल गुप्ता मौजूद रहे, इस दौरान इंडियन एयरफोर्स की तरफ से एयर शो कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
एयर शो कार्यक्रम में भारतीय वायु सेना की तरफ से आसमान में करतब दिखाया गया, इस करतब में कई पायलट ने जेट फाइटर के माध्यम से मेहमानों को सलामी दी।
इस एयर शो को देखने के लिए संगम तट पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली, वायुसेना की तरफ इस ‘प्रेरणादायी अभियान’ का संचान हर साल लोगों में प्रेरणा भरने के लिए किया जाता है।
इस कार्यक्रम का मकसद जन समुदाय के मन में नीली वर्दी वाले सैनिकों के प्रति सामान्य जागरूकता की भावना को विकसित करना और देश के युवा वर्ग को भारतीय वायु सेना में भर्ती होकर देश सेवा के लिए प्रेरित करना है।
पूर्व उप राष्ट्रपति अंसारी ने गुजरात दंगों पर कह दी यह बात
सौम्या केसरवानी | Navpravah.Com
पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 2002 के गुजरात दंगों का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि, तत्कालीन केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 355 का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जबकि उसके रक्षा मंत्री मौके पर थे।
पूर्व उप राष्ट्रपति अंसारी ने कहा कि “आतंकवाद का कोई सैन्य हल’’ नहीं है क्योंकि सामान्य स्थिति लोगों का दिल और दिमाग जीतकर ही बहाल की जा सकती है, अंसारी ने दंगों पर शाह की पुस्तक की कुछ टिप्पणियों को उद्धृत करते हुए कहा, नागरिक प्रशासन की प्रारंभिक प्रतिक्रिया सुस्त थी, कर्फ्यू का आदेश दे दिया गया था लेकिन वह लागू नहीं हुआ था।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, यदि नागरिक और पुलिस प्रशासन कानून एवं व्यवस्था की बड़े पैमाने पर विफलता पर प्रतिक्रिया नहीं जताता तो लोकतांत्रिक और संसदीय प्रणाली में जिम्मेदारी कहां है।
उन्होंने कहा, पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन ने 2005 में एक मलयालम साप्ताहिक के साथ साक्षात्कार में सरकार के साथ अपनी आपत्ति का खुलासा किया था, मैं उन्हें (नारायणन को) उद्धृत करता हूं…सेना भेज दी गई थी लेकिन उसे गोली चलाने का अधिकार नहीं दिया गया था।
उन्होंने कहा, मेरे फार्मेशन से सैकड़ों अधिकारी इस पर बोल सकते हैं और बटालियन की युद्ध डायरी हैं, हालांकि अलीगढ़ स्थित ‘फोरम फार मुस्लिम स्टडीज एंड एनालिसिस’ के निदेशक जसीम मोहम्मद ने शाह द्वारा अपनी पुस्तक में गुजरात की तत्कालीन सरकार की भूमिका के संबंध में किए गए दावों का विरोध किया है।

















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